success:4 Reasons to Become a Broker
1.सफलता:दलाल बनने के 4 कारण (success:4 Reasons to Become a Broker):
- सफलता:दलाल बनने के 4 कारण (success:4 Reasons to Become a Broker) जानिए कि क्यों लोग छोटे और खोटे मार्ग से सफलता प्राप्त करना चाहते हैं? यों दलाल शब्द एक गाली जैसा लगने लगा है।क्यों कोई अपने आपको दलाल कहलावाना पसन्द नहीं करता है? दलाल क्या-क्या गुल खिलाते है?
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2.दलाल शब्द कब से पापुलर हुआ? (When did the word broker become popular?):
- कहा जाता है कि दलाली में हाथ काले।अर्थात् दलाली में आप कितने ही साफ सुथरे रहें,लेकिन फिर भी हाथ काले हो ही जाते हैं।काजल की कोठरी में कालिख लगने से बचा नहीं जा सकता है।सर्व प्रथम यह जान लें कि दलाल को अंग्रेजी में क्या कहा जाता है? अंग्रेजी में दलाल को ‘Broker’ कहा जाता है।
जब से हर्षद मेहता रिश्वत काण्ड में करोड़ो का बैंक घोटाला हुआ तो दलाल (Broker) शब्द इतना पापुलर हो गया और दलाली में लोगों को मजा आने लग गया।स्टाॅक ब्रोकर हर्षद मेहता ने बैंकिंग प्रणालियों की कमियों का फायदा उठाकर फर्जी बैंक रसीदें (Bank Receipts) बनाई और बैंकों के हजारों करोड़ रुपये शेयर बाजार में लगा दिए,जिससे शेयरों की कीमतें आसमान छूने लगी।यह 5000 करोड़ (वर्तमान में 24000 करोड़ रुपये से अधिक के बराबर था)।इसका पर्दाफाश 23 अप्रैल 1992 को टाइम्स आफ इंडिया की पत्रकार सुचेता दलाल ने की।इसे शेयर बाजार का 1992 का प्रतिभूति घोटाला भी कहा जाता है।
दलाली में कोई मेहनत नहीं करनी पड़ती बस आपको मध्यस्य (Mediator) बनना होता है।मध्यस्थ बनने से ही आप मालामाल हो जाते हैं।हर्षद मेहता रिश्वत काण्ड के बाद लोग जो दलाली करते हैं वे अपने आपको दलाल कहलवाना पंसद नहीं करते हैं क्योंकि इस काण्ड के बाद यह पापुलर भी हुआ तो बदनामी भी हुई।हाँ दलाली करने वाले बोक्रर कहलवाना जरूर पसन्द करते हैं क्योंकि ब्रोकर के साथ रिश्वत की गंध नहीं आती है और थोड़ा रैस्पेक्टपुल शब्द (Respectful word) नजर आता है। - परन्तु यह दलाल शब्द पहले शेयर मार्केट (Share Market) में ही प्रचलित था और इसे कानूनी मान्यता भी है।परन्तु हर्षद मेहता रिश्वत काण्ड के बाद लोगों को दलाल बनने का ऐसा चस्का लग गया कि अब हर क्षेत्र में इसकी घुसपैठ हो गयी है।
आपको वाहन (vechile) लाइसेन्स चाहिए तो दलाल से मिलिए आपका फटाफट काम हो जाएगा वरना सही तरीके से पासपोर्ट विभाग वाले आपको घास ही नहीं डालेंगे,अनेक चक्कर लगवाएंगे फिर भी जरूरी नहीं कि आपका काम हो ही जाए।
आपको किसी प्लाट,खेत या प्रोपर्टी की रजिस्ट्री करवानी है तो दलाल से मिलिए फौरन आपका काम हो जाएगा।प्रोपर्टी का लेनदेन,खरीददारी,बेचान करना हो तो दलाल से मिलिए आपका काम फौरन हो जाएगा।
- इसी प्रकार आपको राजस्थान गवर्नमेंट में किसी विभाग में नौकरी चाहिए तो दलाल से मिलिए आपके स्थान पर छद्म (pseudo,dummy) कंडीडेट बिठाकर आपका चयन करवा दिया जाएगा।आप किसी भी परीक्षा का पेपर चाहते हैं तो पैसा (रिश्वत) दें और मनोवांछित पेपर प्रप्त कर लें।अभी हाल ही में नीट-यूजी पेपर घोटाला आपके सामने है।नीट-यूजी घोटाला के बाद कौनसा पेपर है जो रिश्वत देकर नहीं खरीदा जा सकता है।
ये सब काम कौन करते हैं जो सत्ता में बड़े अधिकारी (officer) हैं जिन्हें धन के अलावा और कुछ चाहिए ही नहीं।छद्म कोचिंग सेन्टर (Pseudo coaching center),जिनके ऊपर पापुलर (popular) होने का भूत सवार है।इन्होंने ऑफिसर या कोचिंग सेन्टर के नाम की जनेऊ क्यों पहन रखी है? क्योंकि हर्षद मेहता काण्ड के साथ यह नाम बदनाम हो गया।लेकिन उसके कमाने का तरीका सबको लुभाता है।
3.छात्र-छात्राएँ दलालों के चकुजूह में (Students in the maze of brokers):
- किसी परीक्षा/प्रतियोगी परीक्षा में सफल न होने पर अथवा मनोनुकूल सफलता प्राप्त न होने की स्थिति में हमारे अनेक युवक-युवतियाँ बाबाओं,गुरुओं आदि के चक्कर लगाते हुए देखे जाते हैं।वहाँ जाकर वे ऐसे मकड़जाल में फँस जाते हैं जिससे छुटकारा पाना दुष्कर हो जाता है।
- ऐसे भी उदाहरण देखने में आते हैं,जब वे किसी ‘गुरु’ की शरण (agent) में पहुंचकर अपना सर्वस्व समर्पण तक करने को तैयार हो जाते है।दुनिया के छल-फरेबों से अपरिचित युवतियों के ये तथाकथित ‘गुरु’ प्रायः कहीं का नहीं छोड़ते है।
शिक्षित युवावर्ग को प्रभावित करने के लिए ये ‘गुरु’ लम्बी-चौड़ी बातें ही नहीं करते,स्वयं प्रभावशाली ऐश्वर्यपूर्ण जीवन तो व्यतीत करते ही हैं,साथ ही दो चार विदेशी युवतियों को अपनी चेली के रूप में अपनी शरण में रखते हुए देखे जाते हैं।इनके गटकटा साथ आप बीती सुनाकर स्वार्थ में अंधे युवा वर्ग को मंत्र मुग्ध-सा (spellbound) कर देते हैं।ये लोग कभी-कभी दो-चार प्रमाण-पत्र भी दिखाकर यह प्रमाणित करते हैं कि बड़े-बड़े प्रतिष्ठित एवं शिक्षित व्यक्ति उनको सर्वस्व समर्पण कर चुके हैं। - बिना श्रम एवं अध्यवसाय के सफलता-प्राप्ति के मार्ग पर चलना अंधेरे में ऐसी काली बिल्ली को प्राप्त करने का प्रयत्न है,जो वहाँ है ही नहीं।इस मार्ग पर चलने वाले मृग-तृष्णा के शिकार होते हैं।प्रकृति में स्थानापन्न अथवा एवजी (substitute) पर काम का नियम नहीं है तथा भगवान के दरबार में एजेण्ट या दलाल अथवा बिचौलिया (agent) के लिए कोई स्थान नहीं है।
- हो सकता है हमारा कोई प्रयत्न निष्फल हो जाए और हम निराश हो जाएं।ऐसा न करके हमें विचार करना चाहिए कि सफलता-प्राप्ति का मार्ग अपनाने में कहीं हमसे कोई भूल तो नहीं हो गई है?
- बाबाओं और गुरुओं से जैसे आशाराम और राम रहीम से मोहभंग होने के बाद अब छात्र-छात्राएँ कोचिंग सेन्टर्स के चक्रव्यूह में फँसते जा रहे हैं।इन कोचिंग सेन्टर्स ने शिक्षा पर कालिख पोत दी है।सही मायने में ये कोचिंग सेन्टर नहीं है बल्कि दलाल हैं।इन्होंने अपना ब्रान्ड नेम दलाल क्यों नहीं रखा क्योंकि इन्हें बदनामी का डर भी सताता है।इन्हें प्रसिद्धि (Reputation) भी चाहे और रिश्वत से पैसा भी चाहिए।छात्र-छात्राओं को ये मीठी-मीठी और गोल-गोल बातों में फंसाते हैं और कोचिंग फीस के साथ-साथ पेपर उपलब्ध कराने के एवज में बड़ी रकम ऐंठते हैं।
- चूंकि छात्र-छात्राओं में इतना विवेक नहीं होता है और विवेक जाग्रत करने की किसको जरूरत है क्योंकि विवेक जागृत होते ही इनके काले कारनामों की पोल खुल जाती है।अतः सत्ता में बैठे आका और ये ऐसे छद्म कोचिंग सेन्टर्स (Pseduo coaching center) शिक्षा को व्यवसाय ही बनाये रखना चाहते हैं।शिक्षा में बदलाव लाना ऐसे लोग पसन्द ही नहीं करते हैं।यदि कोई कोचिंग सेन्टर,शिक्षाविद,विद्वान और समझदार व्यक्ति ऐसे सुझाव देता भी है तो उसकी आवाज नक्कार खाने में तूती की आवाज के समान हैं।
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को ये ऐसे छद्मचोर पसन्द ही नहीं करते हैं क्योंकि शिक्षा को व्यवसाय बनाये रखने में इनकी पाँचो ऊँगली घी में रहती है।अब नीट-यूज़ी धोटाले भी छात्र-छात्राओं के थोड़े-बहुत आन्दोलन के बाद दब जाएंगे।
4.छोटे मार्ग द्वारा प्राप्त सफलता लुभावनी (The success achieved by the short route is breathtaking):
- सत्ता में बैठे,दलाल और कोचिंग सेन्टर्स में बैठे हुए महादलालों का गोरखधंधा बदस्तूर क्यों जारी है? इसका कारण है ऐसे छात्र-छात्राएँ जो छोटे मार्ग द्वारा सफलता प्राप्त करना चाहते हैं।
- आज के भोगवादी और अर्थप्रधान युग में अधिकांश युवक-युवतियों में जल्दी से जल्दी अर्थ सम्पन्न होने की कामना इतनी बलवती होती जा रही है कि वे इसके लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।
- अपने आदर्श और सिद्धान्तों को छोड़कर ये अनैतिक तरीके,धूस देकर पेपर या नौकरी पाने वालों में शामिल हो रहे हैं।अच्छे भविष्य के लिए वे इसी राह पर चलना ठीक समझते हैं।हो सकता है कुछ युवक-युवतियों को इस तरह सफलता मिल भी जाती होगी पर अधिकांश युवक-युवतियों को इस राह पर चलकर निराशा,कुण्ठा,जिल्लत,बदनामी और असफलता (failure) ही मिलती है।
- जो कुछ हमें अनैतिक,भ्रष्ट और अन्याय के मार्ग से मिलता है वह अन्याय मार्ग में ही नष्ट होता है और साथ में अन्यायी को भी नष्ट कर देता है।अच्छे भविष्य के लिए हमें सही राह पर चलना होगा।
- अगर कोई अभ्यर्थी कठिन परिश्रम करके और परीक्षा में सही उत्तर लिखकर उत्तीर्ण होता है तभी उसे सफल कहा जा सकता है।लेकिन जो अभ्यर्थी नकल करके,अनैतिक और भ्रष्ट (corrupt way) तरीके अपनाकर उत्तीर्ण हो जाता है और कहता है कि वह सफल हो गया तो ठीक नहीं कहता।नकल,अनैतिक और भ्रष्ट तरीके अपनाकर उत्तीर्ण होना अलग बात है और मेहनत करके सही उत्तर लिखकर उत्तीर्ण होना अलग बात है और सही माने में यही सफल होना भी है।नकल करके,भ्रष्ट तरीके अपनाकर उत्तीर्ण होमा वास्तव में सफल होना नहीं बल्कि दूसरों की ही नहीं खुद की आँखों में धूल झोंकना है।क्योंकि अन्ततः उसकी असलियत सामने आ ही जाती है।
- तो दूसरा कारण यह हुआ है कि कुछ छात्र-छात्राओं को छोटे और खोटे मार्ग से जल्दी से जल्दी सफलता चाहिए और इसीलिए उनको यह मार्ग लुभावना लगता है और आकर्षक भी।हालांकि वे ऐसा करने से पहले उसके परिणाम घर भलीभाँति नहीं सोचते।
5.सुविधाभोगी मनोवृत्ति (Privileged Attitude):
- अनैतिक तरीके से व भ्रष्ट तरीके से पेपर प्राप्त करने का तीसरा कारण है सुविधा-योगी मनोवृत्ति।जब से विलासिता (Luxurious life) पूर्ण जीवन का चस्का लगा है तब से युवक-युवतियों की कर्मठता को लकवा मार गया है।वे कठोर-परिश्रम नहीं करना चाहते है और विलासी जीवन जीना चाहते है।ऐसी स्थिति में विलासिता की वस्तुएँ प्राप्त करने के लिए धन चाहिए और धन के लिए खोटे काम करने पड़ेंगे क्योंकि कठिन पश्चिम वे करना नहीं चाहते है।
- आप यह भी कह सकते हैं कि धन को अनैतिक तरीके से कमाने के और भी तरीके है।जैसे अपहरण,चोरी,डकैती,साइबर क्राइम,बैंक डकैती,साइबर फ्राॅड आदि।परन्तु इन तरीकों से बहुत बदनामी होती है और फिर कानून व पुलिस उनके पीछे हाथ धोकर पड़ जाती है।इसलिए कुछ युवक-युवतियाँ सत्ता में रहकर गलत धन्धे करके धन कमाते हैं तो सत्ता उनके लिए सुरक्षा कवच (security shell) का
- काम करती है।सत्ता में रहते हुए ये अच्छा वेतन तो पाते ही हैं साथ ही इनको कोई बड़ा खतरा नहीं रहता है,हालाँकि यह उनका भ्रम है।ये बात कुछ युवक-युवतियों को लुभाती है।
- वे डाॅक्टर,इंजीनियर,आईएएस आदि पद प्राप्त करके सत्ता का दुरुपयोग करना चाहते हैं और करते हैं।हालांकि कई घोटाले हुए हैं और उनमें कुछ को सजा भी हुई है,परन्तु वह नाम मात्र की हुई है।इसलिए युवक-युवतियाँ इसे शानदार (pompous) करियर मानते हैं।वैसे भी धन-सम्पत्ति का लोभ होता ही ऐसा है जिसमें व्यक्ति अन्धा हो जाता है।उसे अच्छे-बुरे,सही-गलत का विवेक नहीं रहता है।
- हमारा सत्यम् कोचिंग सेन्टर (Satyam Coaching centre) में और उससे पहले भी यह अनुभव रहा है कि भ्रष्ट अधिकारियों को नेक व ईमानदार (Homest employee) फूटी आंख भी नहीं सुहाता है।वे येन-केन प्रकारेण नेक कर्मचारी को अपनी टीम में शामिल करना चाहते हैं।
- यों सुविधापूर्वक किसी काम को करने का सही अर्थ है सही और अच्छे ढंग से करना।परन्तु आज के कुछ भटके हुए युवा इस अर्थ में न लेकर इसका अर्थ मनमर्जी के मुताबिक किती काम को करने के लिए लेते हैं।
- सत्ता में बैठे हुए ऐसे भ्रष्ट अफसर (crupt officer) और छद्म कोचिंग सेन्टर्स युवाओं की इस मानसिकता को अच्छी तरह भाँपते हैं और इसीलिए वे उनकी इस मानसिरता का दुरुपयोग करते हैं।
6.नौकरी को ही सबकुछ समझना (Understanding the job as everything):
- हमारे भारतीय जनमानस की यह एक विकृति है कि वे नौकरी करने वाले को बहुत्त महत्त्व देते हैं।भले कोई फुटकर व्यवसाय करके उससे ज्यादा कमाई (earning) कर रहा हो,परन्तु नौकरी करने वाले की ज्यादा आवभगत करते हैं,उनका सम्मान बढ़ जाता है। नौकरी करने वाले लड़के या लड़की के फौरन अनेक रिश्ते आने लगते हैं।लेकिन कोई फुटकर व्यवसाय करता है तो उसको मुश्किल से कोई रिश्ता मिलता है और रिश्ते वाले भी बीस तरह की बात पूछते है,उसके चरित्र (character) की पूरी जाँच पड़ताल करते हैं यानी उसकी पूरी कुण्डली खँगालते हैं।जबकि नौकरी करने वाले के बारे में कोई जाँच पड़ताल नहीं की जाती है।
- आज के युवा चरित्र निर्माण पर ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि उनके चारों ओर इंटरनेट का मायाजाल,भौतिकता की चकाचौंध और विलासितापूर्ण जीवन का चश्मा चढ़ा हुआ रहता है।ऐसे बहुत कम युवा हैं जो चरित्र निर्माण की तरफ ध्यान देते हैं।और जो युवा इस ट्रेक पर चलता है उसे जिन्दगी फाँके मारकर गुजारनी पड़ती है।कोई यूट्यूबर (youtuber),इंफ्लुएंसर,ब्लोगर या इंस्टाग्राम में लाखों और मिलियन्स में फोलोअर्स हैं तो उन्हें देखकर लोग लट्टू होजाते हैं,यह देखते ही नहीं है कि किस तरह का कन्टेंट (content) परोस रहे हैं।
अगर आपको फोलोअर्स बढ़ाने हैं दलालों से मिलें और वे आपका हर काम आसान कर देंगे।दलालों के चांदी ही चाँदी है।नीट-यूजी (NEET-UG) घोटाले में सबसे ज्यादा नुकसान मेहनती,नेक अभ्यर्थियों को ही ही हुआ है,पहले भी हो चुका है और आगे भगवान ही मालिक है।इन युवाओं का दर्द कोई समझे तब बात बने।

Watching the fluctuations of two broker stocks on a laptop to implement 4 Reasons to Become a Broker
- युवाओं को हम तो यही कहेंगे कि आप इधर-उधर मत भटकिए;न जल्दबाजी कीजिए,न दुःखी होइए,अपना कर्म करते रहिए,जो रास्ता बनता जाए,उस पर पूरी निष्ठा के साथ कर्त्तव्य पालन करते चलिए,आपके सपने अवश्य साकार होंगे।
प्रकृति या परमात्मा ने आपकी सफलता की एक योजना बना रखी है,उसभी कार्य-पद्धति (working style) हमारी कार्य-पद्धति से भले ही भिन्न हो,परन्तु उसकी कार्य-पद्धति ही हमारे लिए सर्वोतम है। - उपर्युक्त आर्टिकल में सफलता:दलाल बनने के 4 कारण (success:4 Reasons to Become a Broker) के बारे में बताया गया है।
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7. दलाल और छात्र (हास्य-व्यंग्य) (Brokers and Student) (Humour-Satire):
- दलाल (छात्र से):क्यों इतनी रात-दिन आँखे फोड़ रहे हो?
- छात्रःतो क्या करु?
दलाल:मेरे पास पास कई तरीके हैं,सीधे परीक्षा पास करने के। - छात्र:कौन-कौनसे?
- दलाल:पेपर चाहिए तो पेपर,डमी कन्डीडेट चाहिए तो उसकी सेटिंग,सीधे नौकरी चाहिए तो उसकी सेटिंग करा दूँ।
- छात्र: तुम्हे क्या मिलेगा?
- दलाल :मैं NGO हूँ,इस तरह के भलाई के काम करता हूँ।
8.सफलता:दलाल बनने के 4 कारण (Frequently Asked Questions Related to success:4 Reasons to Become a Broker) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.ब्रोकर किसे रहते हैं? (What is a broker?):
उत्तर:ब्रोकर (Broker) एक मध्यस्थ (Intermediary) या एजेंट होता है जो किसी खरीददार और विक्रेता के बीच लेन-देन (transation) कराने में मदद करता है।इसके बदले में वह एक कमीशन या फीस लेता है।
प्रश्न:2.ब्रोकर के प्रकार बताइए। (Describe the types of brokers):
उत्तर:स्टाॅक ब्रोकर (stock broker),डिस्काउंट ब्रोकर (Discount Broker),फुल सर्विस ब्रोकर (Full service broker),रियल स्टेट ब्रोकर (real estate broker),इंश्यारेंस ब्रोकर (insurance broker) आदि।
प्रश्न:3.इस लेख में कौनसे ब्रोकर के बारे में लिखा है? (Which broker is written about in this article?):
उत्तर:इस लेख में सत्ता में बैठे अफसर,कोचिंग इंस्टीट्यूट में टीचर का चोला पहने हुए और ऐसे ही दलालों के बारे में चर्चा की गई है जो सत्ता का दुरुपयोग करते हैं।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा सफलता:दलाल बनने के 4 कारण (success:4 Reasons to Become a Broker) की प्राइमरी टर्म्स के बारे में जान सकते हैं।
- *”यह आर्टिकल **Satyam Mathematics** ब्लॉग पर **Satyam Coaching Centre** के द्वारा तैयार किया गया है।”*
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