7 Guidelines to Reflect on Security of Nation
1.राष्ट्र की सुरक्षा का चिन्तन करने के लिए 7 गाइडलाइंस (7 Guidelines to Reflect on Security of Nation):
- राष्ट्र की सुरक्षा का चिन्तन करने के लिए 7 गाइडलाइंस (7 Guidelines to Reflect on Security of Nation) के आधार पर आप जान सकेंगे कि हमारे लिए राष्ट्र का चिन्तन और राष्ट्र की सुरक्षा क्यों सबसे अधिक जरूरी है? जब राष्ट्र की सुरक्षा के लिए फोर्स और तमाम इंतजाम हैं तो हमें सुरक्षा का चिन्तन करने की जरूरत क्यों है?
Also Available in Hindi:Claims India to UN Security Council
2.राष्ट्र की सुरक्षा का चिन्तन करने के लिए सर्वप्रथम सीमाओं की सुरक्षा (To contemplate the security of the nation,first of all,the security of the borders):
- भारत को आजाद हुए 79 वर्ष बीत जाने को हैं,परन्तु स्वतन्त्रता के बाद क्या हमने अपने राष्ट्र की सुरक्षा (Security of nation) के बारे में चिन्तन किया है? क्या हमने अपने धर्म ग्रंथों का,जो हमें राष्ट्रीय एकता के प्रति कटिबद्ध करते हैं,अध्ययन कर मनन किया है? शायद नहीं अथर्ववेद में लिखा है “मैं अपनी मातृभूमि के लिए और उसके दुःख दूर करने के लिए सब प्रकार के कष्ट सहने को तैयार हूँ।वे कष्ट चाहे जिस ओर से तथा जिस समय आएं,इन्हें चिन्ता नहीं”
ये कथन हमारे धर्मग्रन्थों तक ही सीमित रह गए।उल्टे हमने इन पर जिल्द चढ़ाकर अलमारी में बन्द कर दिया। इसी के परिणामस्वरूप हमको भारत-पाक,भारत-चीन एवं भारत-पाक युद्धों को देखना पड़ा।उस समय चाँदी के चन्द टुकड़ों के लिए देशद्रोह (Treason for a few pieces of silver) करते दूर कुछ भारतीयों ने बिना संकोच के चीन एवं पाकिस्तान को भोजन सामग्री भेजी थी तथा जासूसी की थी।इसीलिए हमें सुनने को मिला था:भारत जयचन्द एवं मीरजाफरों का देश है।इन्हें गुलाम बनाना आसान है। - ऐसी स्थिति में हमारे सामने प्रश्न आता है राष्ट्र की सुरक्षा (Security of Nation) का।हमारा देश कैसे सुरक्षित रहे।भारत की सुरक्षा के लिए सर्वप्रथम उसकी सैन्य शक्ति सुदृढ़ एवं शत्रु हृदय को दहलाने वाली होनी चाहिए।हमारी सरकार को चाहिए कि वह परमाणु शक्ति द्वारा भारत का विकास करे तथा उसके द्वारा चालित अनेकानेक हथियारों को सदैव तैयार रखे साथ ही सुरक्षा के नाम पर बजट अधिकाधिक धनराशि का प्रावधान किया जाए।हमने प्रक्षेपास्त्र एवं अन्तरिक्ष विज्ञान में पर्याप्त प्रगति कर ली है।हमें अपने ज्ञान को कार्य रूप में परिणत करने के लिए हर समय तैयार रहना चाहिए।
- क्या केवल सीमाओं की सुरक्षा को ही राष्ट्रीय सुरक्षा कहा जाएगा? क्या राष्ट्रीय सुरक्षा (Is National Security) का दायित्व हमारी सेनाओं का ही है? यदि हम इन दोनों प्रश्नों पर गहनता और गम्भीरता से विचार करें तो पायेंगे कि मात्र सीमाओं की सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं है,वरन देश में उपस्थित समस्त ऐसी वस्तुओं की सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा के अन्तर्गत माना जाएगा,जो राष्ट्र के किसी भी पहलू से किसी भी स्तर पर जुड़ी हो।
देश में निवास प्रत्येक नागरिक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उत्तरदायी है।खेतों में काम करने वाला किसान,उद्योगों में काम करने वाला श्रमिक,शासकीय और अशासकीय कार्यालयों में काम करने वाला क्लर्क सभी अपने-अपने स्थान पर सैनिक हैं (All are soldiers in their own places)।सीमा पर तैनात सैनिकों से अधिक उत्तरदायित्व देश के अन्दर काम करने वाले इन लोगों का है। - शिक्षा आयोग (1964-66) के अनुसार कोई भी राष्ट्र अपनी सुरक्षा को केवल पुलिस एवं सेना को नहीं सौंप सकता है।बहुत बड़ी सीमा तक राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार (The basis of national security) “नागरिकों की शिक्षा,विभिन्न बातों का उनका ज्ञान,उनका चरित्र,उनकी अनुशासन की भावना और सुरक्षा के कार्यों में कुशलता से भाग लेने की उनकी योग्यता” इन लोगों के चरित्र से ही देश का भाग्य जुड़ा होता है।हम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए निम्नांकित बिन्दुओं पर चिन्तन कर सकते हैं:
3.क्षेत्रवाद को बढ़ावा देने वाली मानसिकता पर अंकुश (Curbing the mentality that promotes regionalism):
- यह विभिन्नताओं का उत्पाद है।राज्य पुनर्गठन आयोग द्वारा भाषायी आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के फलस्वरूप अनेक क्षेत्रों में अलगाव का मनोभाव बढ़ा हुआ है।महाराष्ट्र में एक विदर्भ या मराठवाडा,गुजरात में सौराष्ट्र,बिहार में एक झारखण्ड,म.प्र में एक छत्तीसगढ़,उ. प्र. में एक उत्तराखण्ड,पश्चिम बंगाल में एक गोरखालैण्ड तथा जम्मू-कश्मीर में एक लद्दाख की माँग इसी मनोवृत्ति का परिणाम है।क्या इन राज्यों के निर्माण पर देश की एकता और अखण्डता (Unity and integrity of the country) पर प्रश्नचिह्न नहीं लगेगा? क्या भारत की स्थिति रूस की भाँति नहीं हो जाएगी?
- एक समय था जब 1905 में बंगाल विभाजन के समय पूरा देश इसके विरोध में उठ खड़ा हुआ था,परन्तु आज इस प्रकार की दुर्घटनाएं हमारे मर्म को स्पर्श नहीं करती हैं।यह कैसी विडम्बना है कि अब हम ही पृथक राज्यों की माँग कर रहे हैं जो देश को दुर्बल बनाने की दिशा में एक कदम ही कहा जाएगा।
4.जातिवाद और साम्प्रदायिकता राष्ट्र के लिए घातक (Casteism and communalism are dangerous for the nation):
- भारत बहुजातीय एवं बहुधार्मिक लोगों की गौरवमयी स्थली है,लेकिन आज इसी धरती पर वोटों की राजनीति (Politics of votes) के नाम पर नित्य नए विभाजन की माँगे उठ रही हैं।इन्हें कभी धर्म के नाम पर सुरक्षित स्थल चाहिए तो कभी अल्पसंख्यकों के वोटों के लिए संविधान में प्रावधान।यह बात किसी से छिपी नहीं है कि इन्हीं राजनीतिज्ञों ने अपना उल्लू सीधा करने के लिए लोगों की आँखों में धूल झोंक कर जातीय विद्वेष भड़काए।
- कभी आरक्षण के नाम पर जातीय भेदभाव (racial discrimination) उत्पन्न किया तो कभी राम जन्मभूमि का विवादास्पद मुद्दा उठाकर साम्प्रदायिकता को न्यौता दिया तथा राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता को ठुकराना चाहा।आज इन्हीं जातीय एवं धार्मिक विद्वेष से ऊपर उठकर राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति चिन्तन करने की आवश्यकता है।
5.भाषावाद की समस्या से निपटना जरूरी (It is necessary to deal with the problem of linguistics):
- यहाँ पर 1,652 के लगभग बोलियाँ बोली जाती हैं।ऐसे में एक सशक्त सम्पर्क भाषा (Strong Contact Language) तथा राष्ट्र भाषा की आवश्यकता महसूस की जाने लगी जिससे लोगों में राष्ट्रीय एकता की भावना का संचार किया जा सके।इसके लिए हिन्दी एक सशक्त भाषा उभर कर सामने आयी,लेकिन दक्षिण भारतीयों की संकीर्ण मनोवृत्ति के फलस्वरूप इसका तीव्र विरोध किया गया।वास्तव में भाषा विवाद कोई समस्या नहीं,बल्कि राजनेताओं का शतरंजी खेल है,ताकि उनके क्षेत्र के लोगों को संकीर्ण विचारों तक रखकर वोट भुना सकें।हमें हिन्दी के प्रति स्वच्छ एवं समीचीन दृष्टिकोण रखकर उसे राष्ट्रभाषा बनाने में सहयोग देना चाहिए,ताकि राष्ट्र की सुरक्षा के संदेश को जन-जन सुन सके और समझ सके।
6.भारत के सम्मुख नेतृत्व के संकट की समस्या का निवारण (Solving the Leadership Crisis Facing India):
- पिछलों दशकों से भारत के सम्मुख नेतृत्व संकट (Leadership crisis facing India) की समस्या उत्पन्न हो गई है।भारत के सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी ढपली पर अपना-अपना राग अलाप रहे हैं और प्रत्येक दल की सोच अपनी कुर्सी की रक्षा तक सीमित है।ऐसे देश में एक सफल विदेश नीति नहीं बन सकती है।परिणामस्वरूप अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।इससे राष्ट्र के सम्मुख निवेश,विदेशी व्यापार,भुगतान सन्तुलन,रक्षा सामग्री के आदान-प्रदान की समस्याए आ रही है।
7.भारत में आतंकवाद से निपटना बहुत जरूरी (It is very important to deal with terrorism in India):
- वर्तमान में भारत में आतंकवाद एवं विघटनकारी प्रवृत्तियों में जिस तीव्रता से वृद्धि हुई है उस पर प्रशासन भी लगाम लगाने में असफल रहा है।अतः प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य बनता है कि वह आतंकवादियों से मुकाबला करे।
- आज आतंकवाद पंजाब एवं कश्मीर की समस्या (Terrorism is a problem of Punjab and Kashmir) मात्र न रहकर सम्पूर्ण भारत की समस्या बन गया है।पंजाब एवं कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में पाकिस्तानी हस्तक्षेप के स्पष्ट प्रमाण मिलने के बाद भी भारतीय शासन चुप्पी साधे बैठा है,जबकि उसे ऐसा मुँह तोड़ जवाब देना चाहिए जिससे वह भविष्य में भारत की ओर आँख न उठा सके।इससे दूसरे देशों को सबक मिलेगा।पिछले वर्षों में पुरुलिया में गिराए गए हथियारों,पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) 14 फरवरी 2019,उरी हमला (18 सितम्बर,2016),पठानकोट एयरबेस (2 जनवरी 2016),अमरनाथ यात्रा पर हमला (10 जुलाई 2017),सुजवान सैन्य शिविर हमला (2 फरवरी 2018),आरसी जिला तीर्थयात्री हमला (9 जून 2024) से राष्ट्रीय सुरक्षा पर ऊँगली उठी है।प्रत्येक भारतवासी को ऐसी गतिविधियों के प्रति चिंतित होना चाहिए
8.राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना (Building a national character):
- राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राष्ट्रीय चरित्र दोनों ही एक दूसरे से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं।राष्ट्रीय चरित्र की नींव पर ही राष्ट्रीय सुरक्षा की अट्टालिका खड़ी होती है,जहाँ नींव में थोडी-सी भी कमजोरी आई वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा की अट्टालिका डगमगाने लगती है।
- हम स्वयं समझ सकते हैं कि व्यक्तिगत चरित्र द्वारा हमारा देश किस प्रकार निरादर का पात्र बन जाता है।साधु सन्तों,ऋषि मुनियों,त्यागियों तपस्वियों का यह देश चरित्रहीन और गद्दारों का देश (The country of saints, sages, renunciants and ascetics has become a country of characterless and traitors) बन गया है।राष्ट्रीय चरित्र के अभाव में न आज हमारा देश सुरक्षित है न समाज।यहाँ तक कि हमारे नगर और परिवार भी सुरक्षित नहीं हैं।मुम्बई,दिल्ली एवं कलकत्ता में हुए बम विस्फोट इस बात के प्रमाण हैं।राजनीतिज्ञों और प्रशासन का अपराधीकरण एवं उनका गिरा चरित्र वोहरा समिति की रिपोर्ट से स्पष्ट हो जाता है।
- आज हमारे चारों ओर काला बाजारी,तस्करी,चोर बाजारी,रिश्वत,भ्रष्टाचार आदि का बोलबाला है (Corruption reigns)।हमें अपनी आँखें खोलकर इन्हें मिटाना होगा तभी राष्ट्र सुरक्षित रह सकता है।स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत में हुए घोटालों को अंगुलियों पर गिनना कठिन है,लेकिन 1992 के बाद के प्रमुख घोटालों में प्रतिभूति,चीनी,चारा,आवासीय,हवाला,यूरिया,मेडिकल संयंत्र,दूरसचार एवं झारखण्ड मुक्ति मोर्चा रिश्वत घोटाले प्रमुख हैं।इसलिए हाल ही नीट पेपर घोटाले के बाद भारत घोटालों का देश बन गया है (India has become a land of scams)।इसमें लगभग 12,000 करोड रुपए राजनीतिज्ञों और प्रशासनिक कर्मचारियों की जेब में गए हैं।क्या हमने इसके प्रति चिन्तन किया है।अगर इतनी बड़ी राशि राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के विकास पर लगाई गई होती तो भारत विकसित राष्ट्रों की पंक्ति में आ खड़ा होता?
- भारतीयों के गिरे चरित्र तब और उजागर हो जाते हैं जब वे अपने प्रधानमंत्रियों और राष्ट्र नेताओं की हत्या करते नहीं कतराते।महात्मा गांधी,इन्दिरा गांधी एवं राजीव गाधी की हत्याएं हमारे राष्ट्रीय चरित्र पर ऐसे दाग है जिन्हें हम कभी नहीं पोंछ पाएंगे।इस जानकारी से हमारा सिर और शर्म से झुक जाना चाहिए कि श्रीमती इन्दिरा गांधी की हत्या तो उन्हीं के द्वारा की गई जिन पर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी थी।
9.युवकों में निराशा की भावना को समाप्त करना जरूरी (It is necessary to end the feeling of hopelessness among the youth):
- किसी भी देश की सुरक्षा का उत्तरदायित्व वहाँ के युवा वर्ग का है।वे ही कलह,द्वेष,भ्रष्टाचार,क्षेत्रीयता एवं जातीयता से मुक्त समाज की स्थापना कर उसमें व्याप्त आतंकवाद,हत्या,अपहरण,अनाचार,दुराचार,काला बाजारी,घूसखोरी,हड़ताल आदि असामाजिक तत्वों की जड़ों को काट सकते हैं,लेकिन हमारे देश का युवा वर्ग बहकावे में जल्दी आ जाता है (The youth of the country are quick to be misled)।निराशा एवं कुंठा शीघ्र ही हमारे युवाओं के अहम् को आहत कर लेती है,जिससे वे अँधेरी गलियों में भटक जाते हैं।उन्हें चाहिए कि वे राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए उसकी सुरक्षा के प्रति सदैव कटिबद्ध रहें एवं चिन्तन करते रहें।
- उपर्युक्त अवलोकन के पश्चात् हम पातें हैं कि आज हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा अंधकार के अंक में चली गई हैं और उस पर काले बादल मंडरा रहे हैं।अतः आज आवश्यकता इस बात की है कि देश को सुरक्षित रखने वाले बिन्दुओं पर हम स्वविवेक से चिन्तन और मनन करते हुए उसकी सुरक्षा के प्रति सदैव तैयार रहें।हमें अपने राष्ट्रीय चरित्र को इस स्तर तक उठाना होगा कि हमारा राष्ट्र विश्व में आदर्श रूप ग्रहण कर सके अन्यथा इतिहास अपने को दोहराएगा और मीरजाफर एवं जयचन्द की परम्परा हमारी सुरक्षा एवं स्वतन्त्रता के सामने बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा देगी
Also Available in English:National security
10.राष्ट्र की सुरक्षा का चिन्तन करने के लिए 7 गाइडलाइंस का सारांश (Summary of 7 Guidelines to Reflect on Security of Nation):
- (A)देश की सुरक्षा का चिन्तन करने के लिए छात्र-छात्राओं से खरे-खरे प्रश्न (Real questions to students to think about the security of the country):
(1) देश और राष्ट्र में आपके अनुसार क्या फर्क है? (What do you think is the difference between country and nation?)
(2.) राष्ट्र के टुकड़े-टुकड़े होने के क्या-क्या कारण है? (What are the reasons for the disintegration of the nation?)
(3.) आजादी से पूर्व भारत के गुलाम होने और टुकड़े होने से आपने क्या सबक लिया है? (What lessons have you learnt from the enslavement and fragmentation of India before independence?)
(4.) क्या आप अपने आस-पास राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने वाले लोगों से सतर्क रहते हैं? उनको बेनकाब करने के लिए क्या कोई सक्रिय प्रयास करते हैं? (Do you be cautious of people indulging in anti-national activities around you? Do you make any active efforts to expose them?)
(5.) राष्ट्र और व्यक्ति में कौन अधिक महत्त्वपूर्ण है? (Who is more important in the nation and the individual?)
(6.) क्या आपकी राष्ट्र के प्रति भक्ति विवादरहित है? (Is your devotion to the nation undisputed?
(7.) आपके विचार से गद्दारों,राष्ट्रोहियों को अलग-थलग करने के लिए क्या किया जाना चाहिए? (What do you think should be done to isolate traitors and traitors?)
(8.) क्या आप राष्ट्र के हित में चिन्तन करने के लिए कुछ समय निकालते हो? (Do you take some time to reflect in the interest of the nation?)
(9.) क्या आप अपने अन्दर राष्ट्रीय चरित्र का विकास करने का प्रयास करते हैं? (Do you try to develop a national character within yourself?)
(10.) क्या राष्ट्र को आपकी जरूरत हो, राष्ट्र के लिए कुर्बानी देने की जरूरत हो तो निशंक और सहर्ष तैयार है? (Is the nation ready to sacrifice for the nation if it needs you?) - (B)राष्ट्र की सुरक्षा का चिन्तन करने के लिए 7 गाइडलाइंस के महत्त्वपूर्ण चिन्तन बिन्दु (Important Thinking Points for 7 Guidelines to Reflect on the Security of the Nation):
- (1.) राष्ट्रराष्ट्र की सुरक्षा का चिन्तन करने के लिए की सुरक्षा के सर्वप्रथम सीमाओं की सुरक्षा (To contemplate the security of the nation, the security of the borders is the first thing to be seen)
(2.) क्षेत्रवाद को बढ़ावा देने वाली मानसिकता पर अंकुश (Curbing the mentality that promotes regionalism)
(3.) जातिवाद और साम्प्रदायिकता राष्ट्र के लिए घातक
(Casteism and communalism are dangerous for the nation)
(4.) भाषावाद की समस्या से निपटना जरूरी (It is necessary to deal with the problem of linguistics)
(5.) भारत के सम्मुख नेतृत्व के संकट की समस्या का निवारण (Solving the Leadership Crisis Facing India)
(6.) भारत में आतंकवाद से निपटना बहुत जरूरी (It is very important to deal with terrorism in India)
(7.) राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना (Building a national character)
(8.) युवकों में निराशा की भावना को समाप्त करना जरूरी (It is necessary to end the feeling of hopelessness among the youth)
उपर्युक्त आर्टिकल में राष्ट्र की सुरक्षा का चिन्तन करने के लिए 7 गाइडलाइंस (7 Guidelines to Reflect on Security of Nation) के बारे में विस्तार और गहराई से समझाया गया है। - ### 📢 यदि आपको यह गणित का आर्टिकल पसंद आया हो:
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Also Available in Hindi:UN Organisation Security Council
11.पत्रकार और गद्दार का गठजोड़ (हास्य-व्यंग्य) (The nexus of journalists and traitor) (humor-satire):
- पत्रकार (चंद्रास्वामी से): आप देश विरोधी कार्य करते हो।आतंकवादियों को हथियार सप्लाई करते हो।
- चंद्रास्वामीःराष्ट्रभक्त,राष्ट्र के प्रति निष्ठा आदि दनियानूसी और आउटडेटेड बातें हो गई है।आज धन-दौलत, अय्याशी और विलासिता पूर्ण जीवन ही सब कुछ है। और इन सब के लिए गैर-कानूनी ढंग से पैसा चाहिए।ईमानदारी और कड़ी मेहनत से धन कमाने में केवल गुजारा किया जा सकता है।
- पत्रकार (राजेन्द्र):राष्ट्र खण्ड-खण्ड हो जाएगा तो आप कहाँ बचोगे।किसी दंगे, विस्फोट में आप भी तो चपेट में आ जाओगे।
- चंद्रास्वामी (व्यंग्यपूर्वक): देख, मेरे ये तेरी आदर्शवादी बातें पल्ले नहीं पड़ती।और पहले तुम भी मेरे साथी थे।आज एकदम से कैसे पलट गए।
- राजेन्द्रः मैं तुम्हारे कारनामों का भण्डाफोड़ करूँगा।
- चंन्द्रास्वामी (चाल बदलते हुए): बोलो तुम्हें कितने रुपये चाहिए,अपना मुँह बन्द रखने के लिए।
- राजेन्द्रःदस लाख रुपए।
- चन्द्रास्वामी ने अपने शागिर्द के द्वारा राजेन्द्र को दस लाख रुपये दे दिए।
- राजेन्द्र की मांग पूरी होते ही उसने अपना मुँह और खोल दिया।चन्द्रास्वामी ने एक दिन अपने गुर्गे से उसकी हत्या करवा दी।चन्द्रास्वामी का बाल भी बाँका नहीं हुआ।
- आज ऐसे न जाने कितने गद्दार भारत माँ की कोख में छुरा घोंपकर खुले आम घूम रहे हैं।कानून और नेता उनकी मुट्ठी में है।
12.राष्ट्र की सुरक्षा का चिन्तन करने के लिए 7 गाइडलाइंस (Frequently Asked Questions Related to 7 Guidelines to Reflect on Security of Nation) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.देश की सुरक्षा कैसे सम्भव है? (How is the security of the country possible?):
उत्तर:राष्ट्रीय सुरक्षा को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझें।(Treat national security as your personal responsibility) केवल सेना और सरकार का दायित्व नहीं है।देश की एकता,अखंडता और सामाजिक सदभाव को मजबूत करें।(Strengthen the unity, integrity and social harmony of the country) आपस में प्रेम और सद्भाव सम्भव है।
साइबर सुरक्षा और डिजिटल सतर्कता को अपनाएं।(Embrace cybersecurity and digital vigilance) आधुनिक युग में राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध साइबर और डिजिटल माध्यम से भी होता है।इसलिए जागरूक रहें,गलत सूचना और फेक न्यूज से बचें।(Stay aware, avoid misinformation and fake news) पर्यावरण,संसाधनों और सीमाओं की सुरक्षा में योगदान दें।(Contribute to the protection of the environment, resources, and borders)युवाओं में देशभक्ति,अनुशासन और कर्त्तव्य भावना को बढ़ावा दें।(Promote patriotism,discipline and duty among the youth) शांति,सहयोग और सतर्क नागरिक के रूप में राष्ट्र की शक्ति बनें।(Be the strength of the nation as a peaceful,cooperative and vigilant citizen)
प्रश्न:2.देश की सुरक्षा के लिए किस प्रकार के युवाओं को गढ़ना होगा? (What kind of youth will have to be created for the security of the country?):
उत्तर:चरित्रवान और देशभक्त युवाओं को गढ़ना होगा।केवल जाॅब के लिए तैयार करने वाली शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है।
प्रश्न:3.देश की सुरक्षा के लिए हमारी नींद कब खुलती है? (When do we wake up to the security of the country?):
उत्तर:जब तक भारत टूटने के कगार पर नहीं पहुँच जाता है तब तक देश के लोग सोये रहते हैं,लापरवाह रहते हैं।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा राष्ट्र की सुरक्षा का चिन्तन करने के लिए 7 गाइडलाइंस (7 Guidelines to Reflect on Security of Nation) की प्राइमरी टर्म्स के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- *”यह आर्टिकल **Satyam Mathematics** ब्लॉग पर **Satyam Coaching Centre** के द्वारा तैयार किया गया है।”*










