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What Would Happen if There Were no Newspapers? | Importance of Newspaper in Hindi

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1.अगर अखबार नहीं होते तो क्या होता? | हिंदी में समाचार पत्र का महत्त्व (What Would Happen if There Were no Newspapers? | Importance of Newspaper in Hindi):

  • अगर अखबार नहीं होते तो क्या होता? | हिंदी में समाचार पत्र का महत्त्व (What Would Happen if There Were no Newspapers? |Importance of Newspaper in Hindi) जानिए हमारी जिन्दगी में क्या परिवर्तन हो जाता? समाचारपत्र हमारी चाय की तरह जरूरी होता है।जैसे चाय के बिना मूड अच्छा नहीं रहता उसी तरह समाचारपत्र न होते तो हमारा जीवन फीका-फीका होता।

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2.समाचार पत्रों की महत्ता (Importance of Newspapers):

  • नगरों,शहरों,कस्बों और गाँवों में बिस्तर छोड़ते ही पता नहीं भगवान की याद आती है कि नहीं,समाचारपत्र यानी अखबार की याद अवश्य हो आती है।हम तब तक उन्मन बने रहते हैं,जब तक सुबह-सुबह अखबार न आ जाए।प्रातःकालीन ठण्डी वायु की भाँति उसके आते ही हमारा मन पुलकित हो उठता हैं।यह बात दूसरी है कि आज का अखबार कल भले बासी हो जाए।
  • समाचारपत्र मुख्य रूप से मुख्य घटनाओं का विवरण प्रस्तुत करते हैं।देश-विदेश में जिस क्षण भी राजनीतिक भूकंप आया,समाचारपत्र में शीघ्र ही उसके कंपन का अंकन (His marking) हो गया।अतः,समाचारपत्र युग के गतिमापक यंत्र हैं।यह ऐसा दर्पण है,जिसमें हम जनजीवन का प्रतिबिंब देखते हैं,यह ऐसा शीशा है,जिसके आर-पार हम देख सकते हैं।समाचारपत्र समाज का थर्मामीटर (Thermometer of society) है,जिसमें सामाजिक वातावरण के तापमान का भान होता है।इसे दूरबीन कहिए,जिसके द्वारा हम बहुत दूर-दूर के दृश्य देख सकते हैं।
  • समाचारपत्र में केवल राजनीतिक खबरें ही नहीं,सांस्कृतिक,धार्मिक आदि खबरें भी छपती हैं। समाचारपत्रों मे बेकार अपना रोजगार ढूँढ़ता है,छात्र-छात्राएँ करियर सम्बन्धी गाइडेन्स प्राप्त करता है,प्रतियोगिता परीक्षाओं के विज्ञापन पता लगाता है,क्वाँरा अपनी भावी पत्नी का पता खोजता है (Searches for the address of the future wife),व्यापारी बाजार भाव पर नजर दौड़ाता है,चलचित्र का प्रेमी ताजा फिल्मों के विज्ञान पर दृष्टि गड़ाता है।खिलाड़ी इसमें खेल की खबर पर टूट पड़ता है,यात्राकामी रेलगाड़ी की समय-सारणी उलटता-पुलटता है।समाचारपत्र केवल सनसनीखेज खबरों द्वारा हमें चकित ही नहीं करता,वरन् भिन्न रुचिवाले लोगों को तृप्ति भी प्रदान करता है।
  • समाचारपत्रों की जन्मभूमि यूरोप है।सबसे पहले समाचारपत्र हॉलैंड से 1526 ई० में प्रकाशित हुआ।इसके बाद जर्मनी से 1610 ई०,इंगलैंड से 1622 ई०,अमेरिका से 1690 ई०,रूस से 1703 ई० तथा फ्रांस से 1736 ई० में समाचारपत्र प्रकाशित हुए।लंदन से ‘डेली करेंट’ नामक दैनिक समाचारपत्र 11 मार्च,1702 में प्रकाशित हुआ।हिंदी का सबसे पहला पत्र ‘उदंत-मार्तंड’ 1826 ई० में कलकत्ता से प्रकाशित हुआ।इन दिनों दुनिया में लाखों समाचारपत्र छपते हैं।भारत में समाचार पत्रों और ऑनलाइन न्यूज़ चैनल्स की संख्या:Print Media (अख़बार):RNI (Registrar of Newspapers for India) के आंकड़ों के अनुसार भारत में 1,40,000+ से अधिक पंजीकृत समाचार पत्र/पत्रिकाएं हैं।इनमें दैनिक अख़बारों (Dailies) की संख्या लगभग 17,000 से 20,000 के बीच है और साप्ताहिक (Weeklies) लगभग 45,000 से 50,000 हैं।
  • Online News Platforms/Channels:डिजिटल युग में यूट्यूब,वेब पोर्टल्स और ऐप्स को मिलाकर लाखों ऑनलाइन न्यूज़ चैनल्स और ब्लॉग्स सक्रिय हैं। इनमें MIB (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) के तहत रजिस्टर्ड डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स की संख्या हज़ारों में है।अब तो आनलाईन समाचारपत्रों की बाढ़ सी आ गई है जिनकी कोई गिनती ही नहीं है।
  • प्रमुख भारतीय दैनिक समाचारपत्रों में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’,’स्टेट्समैन’,’अमृतबाजार पत्रिका’,’नवभारत टाइम्स’,’इंडियन एक्सप्रेस’,’आज’,’जनसत्ता’,’टेलीग्राफ’,’हिन्दुस्तान’,’आनंदबाजार पत्रिका’,’पाटलिपुत्र टाइम्स’,’राजस्थान पत्रिका’,’दैनिक भास्कर’,’जनशक्ति’,’दैनिक जागरण’,’द हिन्दू’ आदि उल्लेखनीय हैं।

3.समाचार पत्रों का संगठन और प्रभाव (Organization and Influence of Newspapers):

  • समाचारपत्र चाहे दैनिक हो या साप्ताहिक,पाक्षिक हो या मासिक- इसके लिए बहुत बड़े संगठन की आवश्यकता होती है।पत्रसंचालक,मुद्रक,प्रकाशक,संवाददाता तथा संपादक बड़े महत्त्वपूर्ण होते हैं।संवाददाता तो आधुनिक युग के नारद हैं (The Narada of the Modern Age)।उनके लिए न कोई फल वर्जित है,न कोई स्थान।यदि वे हंस की तरह विवेकी हैं,तो गलत-सही समाचारों को परखकर पत्रों में स्थान देंगे,यदि नहीं तो बिलकुल घटिया समाचार।संपादक का कार्य तो और भी उत्तरदायित्त्वपूर्ण है।उनकी थोड़ी असावधानी से बड़ा अनर्थ हो सकता है।
  • अतः, समाचारपत्र आधुनिक युग के अनिवार्य अंग बन चुके हैं।जनमत के निर्माण में उनका बहुत बड़ा हाथ है। सबल समाचारपत्र महाप्रतापी नरेश दशरथ की तरह किसी को सहज ही रंक तथा किसी को सहज ही नरेश बना सकता है।
  • इसीलिए,नेपोलियन ने कभी कहा था कि मैं लाखों संगीनों की अपेक्षा तीन विरोधी समाचारपत्रों (Conflicting newsletters) से अधिक डरता हूँ।अनेक विदेशी विचारकों ने समाचारपत्र के बारे में अपने विचार प्रकट किए हैं।हेन ने कहा है कि आजकल हम विचारों के लिए संघर्ष करते हैं और समाचारपत्र हमारी किलेबंदियाँ हैं।जेम्स एलिस का विचार है कि समाचारपत्र संसार के दर्पण हैं।किसी ने समाचारपत्र को जनता का अध्यापक बताया है,तो किसी ने उसे जनता का विश्वविद्यालय घोषित किया है।
  • आधुनिक युग में समाचारपत्रों की शक्ति अपरिसीम हो गई है।समाचारपत्र आज बड़े-बड़े धनपतियों एवं शस्त्रपतियों को भी अपने संकेत पर नचा रहे हैं।इनके समक्ष बड़े-बड़े नेता विनीत भाव (The leader is humbled) से खड़े रहते हैं।इन्हें भ्रू-संचालन से सरकार भी पीपल के पत्ते की तरह प्रकंपित होती रहती है।जो निर्बल हैं,उपेक्षित और प्रताड़ित हैं,उनके लिए समाचारपत्र सशक्त ढाल भी बन जाते हैं।इसलिए,एक कवि ने इसका गुणगान करते हुए कहा है:
    झुक जाती है तलवार भी अखबार के आगे,
    झुक जाती है सरकार भी अखबार के आगे।
    अँगुली पै नचाती है यह सरमायादार को,
    सड़कों पै नचाती है यह लीडर की कार को।
    मुर्दे को होश देती है अखबारनवीसी ।
    जिंदे को जोश देती है अखबारनवीसी।
  • समाचारपत्र अपने देश की जनता के विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं,जनजीवन की गतिविधियों को जन-जन तक पहुँचाते हैं,जनता में साहस भरते हैं।

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4.समाचारपत्र न होते तो जीवन पर असर (Without newspapers,life has an impact):

  • सूचना और समाचार का अभाव (Lack of information and news) (Information Gap):देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों के लिए हम पूरी तरह अफ़वाहों या सीमित मीडिया पर निर्भर हो जाते हैं।हालांकि आनलाईन समाचार माध्यम हो गए हैं और उनसे जानकारी भी हासिल कर सकते हैं फिर भी लिखित समाचारपत्र के वे विकल्प नहीं हो सकते हैं।
  • चिंतन और पढ़ने की आदत में कमी (Decreased reading habit):डिजिटल मीडिया शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट (content) को बढ़ावा देता है,जबकी अखबार गहन अध्ययन और क्रिटिकल थिंकिंग (critical thinking) सिखाता है।इस प्रकार हमारी सोच का दायरा बढ़ता है,हम व्यापक और गहराई से सोचने के अभ्यस्त हो जाते हैं।
  • लोकतंत्र पर असर (Impact on Democracy):अखबार सरकार और जनता के बीच एक पुल (bridge) है।जनता के विचारों को सरकार तक तथा सरकार की योजनाओं को,कार्यशैली को जनता तक पहुँचाता है।इसके बिना ट्रांसपेरेंसी (transparency) कम हो जाती है।
    व्यापार और विज्ञापन (स्थानीय विज्ञापन और नौकरियाँ) (Local Ads & Jobs): स्थानीय व्यापार और नौकरी अधिसूचनाएँ समाचार पत्रों के लिए आज भी सबसे प्रामाणिक स्रोत हैं।
  • यदि समाचारपत्र न होते तो दैनिक जीवन पर असर (Impact on Daily Life):अभी भी समाचार पत्र आधुनिक जीवन का महत्त्वपूर्ण अंग बन हुये हैं।सुबह जागने के साथ ही हमारे हाथ में समाचार पत्र होता है।समाचार पत्र के महत्त्वपूर्ण अंशों के शीर्षक दिन के खाली समय में हमारे तर्क का विषय होते हैं।समाचार पत्रों के बिना जीवन की कल्पना करना बहुत ही कठिन है।यदि समाचार पत्र न होते तो निम्नलिखित परिणाम संभव परिणाम हो सकते हैं:
  • प्रथम,हम समाचार पत्र की घटनाओं के विस्तार से वंचित रह जायेंगे।हमें समाचारों के लिए रेडियो या टी० वी० पर निर्भर रहना होगा।समाचार पत्र के सिवाय रेडियो और टी० वी० द्वारा स्थानीय समाचार नहीं मिल पाते हैं।इनके लिए हमें समाचार पत्रों पर ही निर्भर होना पड़ता है।समाचार पत्रों के बिना सरकार के लिए नवीन विकास तथा प्रतिक्रिया (Innovation and Response) के बारे में ज्ञान प्राप्त करना कठिन होगा।
  • द्वितीय,समाचार पत्र के व्यवसाय में काफी कार्यकर्ता होते हैं।एक ही समाचार पत्र में हजारों व्यक्तियों को विभिन्न विभागों में कार्य मिल जाता है,जैसे-सम्पादकीय,व्यवस्थापक,रचनात्मक आदि।यदि समाचार पत्र बंद हो जाय तो ये व्यक्ति बेरोजगार (Individuals unemployed) हो जायेंगे।राजनीतिज्ञों को भी अपनी प्रसिद्धि की जानकारी प्राप्त करना बहुत कठिन होगा।साथ ही अर्थशास्त्रियों को विभिन्न आर्थिक संकेतों को समय के अनुसार प्राप्त करना कठिन होगा।व्यंग्य चित्रों को बनाने वालों के लिए अपने कार्य की स्वीकृति का ज्ञान भी नहीं हो सकेगा।
  • तृतीय,समाचार पत्र विज्ञापनकर्त्ताओं के व्यापार में प्रगति पहुंचाने में या उनके द्वारा किये गये निर्माण की बिक्री को बढ़ाने में सहायक होते हैं।समाचार पत्र के क्रमबद्ध स्तम्भ रोजगारों तथा रोजगार की खोज करने वाले,दोनों के लिए बहुत सहायक हैं।इन सभी के अतिरिक्त वाहन,सम्पत्ति,संबंधी आदि की खोज का कार्य समाचार पत्र की सहायता से किया जाता है।समाचारपत्र की अनुपस्थिति में हम इन सभी सेवाओं से वंचित रह जायेंगे।

5.ज्ञानार्जन के लिए समाचारपत्रों की भूमिका (Role of Newspapers for Knowledge Acquisition):

  • समाचारपत्र आज के युग में ज्ञान ग्रहण का एक उत्तम साधन है।समाज में किसे ऊँचा चढ़ाना,किसके गुणों को महत्त्व देना,किसे सम्मान देना आदि यह सब समाचारपत्रों के हाथ में है।आज क्या दृश्य देखने को मिलता है? वृत्तपत्र अपने विस्तार-प्रसार की ओर ही ध्यान देते हैं।एक संस्था के रूप में कुछ सिद्धान्त हैं,कोई नीति है,ऐसा कुछ नहीं रह गया है।आज जिसे वे चाहते हैं,उसे चढ़ाते हैं और जिसे चाहते नहीं,उसे गिराते हैं।
    समाचारपत्र व्यापक प्रभावशाली,शक्तिशाली लोकशिक्षक संस्था है।यह संस्था बिगड़ जाए तो कैसे चले ? यदि नितान्त दुष्ट तथा बदमाशों को यह संस्था ऊँचा चढ़ायेगी तो बालकों के मन में बाल्यकाल से ही ऐसी धारणा बनेगी कि हम भी बदमाशी करेंगे तो हमारा नाम भी अखबार में छपेगा।इससे बच्चों में बचपन से ही संयम के प्रति अरुचि निर्माण हो जाती है।उनका चित्त चंचल एवं भ्रमणशील बन जाता है और यह निरर्थक एवं व्यर्थ के आदर्शों युक्त भोगप्रधान जीवन बन जाता है।
  • बालकों को जो नहीं सिखाना चाहिए;वह अखबारवाले सिखाते रहते हैं।सगुण,सद्विचार और सद्व्यवहार की खुले आम उपेक्षा होती है।वाणी-स्वतंत्रता (Freedom of Speech) के नाम पर उसका उपहास किया जाता है।
  • वर्तमान अखबारों को समझना चाहिए कि उनके अक्षरों का समाज पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है।उन्हें लोकशिक्षक का अपना उत्तरदायित्त्व सतर्कता तथा निष्ठापूर्वक निभाना चाहिए।समाचारपत्र को वृद्ध ही नहीं बल्कि बालक,युवा और किशोर भी पढ़ते हैं।आज ज्ञानार्जन का एकमात्र माध्यम केवल विद्यालय,कोचिंग संस्थान ही नहीं है बल्कि छात्र-छात्राएँ और युवावर्ग कई माध्यमों से ज्ञान अर्जित करता है।यदि ज्ञान अर्जित करने वाले इन माध्यमों में कूड़ा-कचरा भरा होगा तो उसकी छाप युवाओं के मन पर भी पड़ेगी।युवावर्ग आज भटक क्यों जाते है क्योकि ज्ञानार्जन के ये मुरख्य स्तम्भ अपनी सही जिम्मेदारी और कर्त्तव्यों को नहीं निभा रहे हैं और क्योंकि उन्होंने व्यावसायिक वृत्ति अपना रखी है।अपने आपको पापुलर बनाने के लिए जायज-नायायज तरीकों का प्रयोग करते हैं जो कि गलत है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में अगर अखबार नहीं होते तो क्या होता? | हिंदी में समाचार पत्र का महत्त्व (What Would Happen if There Were no Newspapers? | Importance of Newspaper in Hindi) के बारे में विस्तार और गहराई से बताया गया है।
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6.अखबार का प्रभाव (हास्य-व्यंग्य) (Newspaper Influence) (Humour-Satire):

  • व्यक्ति (छात्रा से):क्या पढ़ रहे हो?
  • छात्रा:दिख नहीं रहा है;अखबार पढ़ रही हूँ।
  • व्यक्ति:परन्तु अखबार में क्या पढ़ रही हो?
  • छात्रा:युवती एक युवक के साथ घर छोड़कर भाग गयी है।
  • व्यक्ति:.. परन्तु अखबार में और भी तो बातें है।
  • छात्रा:यह उत्तेजक और गर्मागर्भ खबर है,इसे ही पढ़‌ना चाहिए।

7.अगर अखबार नहीं होते तो क्या होता? | हिंदी में समाचार पत्र का महत्त्व (What Would Happen if There Were no Newspapers? | Importance of Newspaper in Hindi) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.क्या डिजिटल मीडिया समाचार पत्र का विकल्प बन सकता है? (Can digital media become a substitute for newspapers?):

उत्तर:टीवी और सोशल मीडिया पर फेक न्यूज का खतरा ज्यादा है,जबकि प्रिंट मीडिया की प्रामाणिकता ज्यादा होती है।

प्रश्नः 2.एक सही अखबार किसके समान है? (What is a perfect newspaper similar to?):

उत्तर:एक सही और अच्छा अखबार सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं है,बल्कि समाज का आईना है।

प्रश्न:3.आज शिक्षा प्राप्ति के मुख्य माध्यम कौनसे हैं? (What are the main means of getting education today?):

उत्तर:शिक्षक,माता-पिता (अभिभावक),अखबार,सत्साहित्य,सिनेमा,संत,गुरु,सज्जन,इंटरनेट आदि।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा अगर अखबार नहीं होते तो क्या होता? | हिंदी में समाचार पत्र का महत्त्व (What Would Happen if There Were no Newspapers? | Importance of Newspaper in Hindi) की प्राइमरी टर्म्स के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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