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Freedom of Media:Role,Threats and Contribution of Prasar Bharati

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1.संचार माध्यमों की स्वतन्त्रता:भूमिका,खतरे और प्रसार भारती का योगदान (Freedom of Media:Role,Threats and Contribution of Prasar Bharati):

  • संचार माध्यमों की स्वतन्त्रता (Freedom of Media) क्या हैं? जानिए वर्तमान मीडिया,प्रसार भारती की भूमिका,विदेशी चैनलों के दुष्प्रभाव,आजादी की कानूनी सीमाएं और इसके मुख्य खतरे।

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2.संचार माध्यमों की स्वतन्त्रता की भूमिका (The role of media freedom):

  • संचार माध्यम को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना जाता है।किसी भी जागरूक और सशक्त समाज के लिए मीडिया की स्वतन्त्रता उतनी ही जरूरी है जितनी कि आम नागरिक अभिव्यक्ति की आजादी के लिए।भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (A) के साथ ही नागरिकों को मिली भाषा और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता (बोलने की स्वतन्त्रता) में ही संचार माध्यमों की आजादी भी शामिल है।
  • संचार माध्यमों को हम मूलतः निम्न प्रकार विभाजित कर सकते हैं:आज संचार के साधन केवल समाचार पत्र तक सीमित नहीं है।डिजिटल क्रांति के बाद इसके मुख्य रूप निम्न हैं:परम्परागत माध्यम:प्रिंट मीडिया (समाचार पत्र,पत्रिकाएं),रेडियो (एफएम,एआईआर) और टेलीविजन समाचार चैनल (दृश्य श्रव्य माध्यम)।
    डिजिटल और न्यू मीडिया (Modern Medium):सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (एक्स,फेसबुक,यूट्यूब),ऑनलाईन समाचार पोर्टल,शैक्षिक ब्लॉग और पॉडकास्ट।आज के डिजिटल परिवर्तन,एल्गोरिथ्म और 24/7 समाचार चक्र के युग में,मीडिया की स्वतन्त्रता की गतिशीलता में काफी बदलाव आया है।समाचार-पत्र कई दशकों से आम व खास लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बना हुआ है।सुबह की चाय के साथ अखबार और शाम के भोजन के समय टी०वी० न हो तो जायका बिगड़ा हुआ लगता है।लेकिन अधिकांश समाचार-पत्रों और टी०वी० ने अपने लिए कोई लक्ष्मण-रेखा (Lakshman Rekha not drawn) नहीं खींची है।यहाँ तक कि वे प्रेस परिषद और प्रसार भारती द्वारा निर्धारित आचार संहिता का पालन भी नहीं करते और कई बार इसके लिए निन्दित तथा दण्डित भी हुए हैं।
  • संचार माध्यमों की स्वतन्त्रता (Freedom of media) के फलस्वरूप एक ओर अमरीका के वाटर गेट का रहस्य खुला तथा भारत में अनेक घोटाले (कोयला घोटाला,प्रतिभूति घोटाला,चारा घोटाला आदि) सामने आए।दूसरी ओर राजकुमारी डायना एवं उनके प्रेमी की मृत्यु हो गई,क्योंकि प्रेस की स्वतन्त्रता ने उच्छृंखलता का रूप धारण कर लिया था।
  • चूंकि ऑनलाईन के बजाय छपा हुआ अधिक विश्वसनीय व टिकाऊ (Reliable and Durable) होता है अतः समाचार पत्रों को दंगों या किसी दुर्घटना में मारे गए लोगो के आँकड़े बढ़ा-चढ़ाकर देने से पहले उन खबरों की प्रतिक्रिया के फलस्वरूप उत्पन्न दहशत,आक्रोश व प्रतिशोध के बारे में विचार करना चाहिए।कई बार शीर्ष समाचारों में गलत आंकड़े देने के बाद अगले किसी दिन छोटा-सा खण्डन आता है,लेकिन उस बीच शरारतपूर्ण समाचार अपना प्रभाव दिखा चुका है।
  • दूसरा महत्त्वपूर्ण संचार माध्यम है,रेडियो।रेडियो अथवा ट्रांजिस्टर उन सुदूर क्षेत्रों में सूचना एवं मनोरंजन (Information & Entertainment) के सशक्त माध्यम हैं जहाँ टेलीविजन ने अपनी जड़े नहीं जमाई तथा समाचार-पत्र सुलभ नहीं होते,रेडियों चूंकि सरकारी नियंत्रण में हैं अतः इस पर होने वाले क्षेत्रीय व राष्ट्रीय प्रसारणों पर सरकार के दिशा-निर्देशों की छाप स्वाभाविक है।भारत में आज भी लघु व मध्य तरंगदैर्ध्यों की ध्वनि तरंगें रेडियों व ट्रांजिस्टर के माध्यम से कुछ श्रोताओं को एक साथ सूचना व मनोरंजन से लाभान्वित करती है।
  • जहाँ रेडियो/ट्रांजिस्टर दूरदराज के अविकसित ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयोगी हैं वही वर्तमान युग में शहरी,अर्द्धशहरी तथा कई ग्रामीण क्षेत्रों में भी संचार का एक सशक्त माध्यम है।’आकाशवाणी’ की भाँति ‘दूरदर्शन’ भी सरकारी नियंत्रण में प्रसारण कर रहा है।

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3.प्रसार भारती की भूमिका (Role of Prasar Bharati):

  • प्रसार भारती (जिसने दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो को शामिल किया है) भारत का सार्वजनिक सेवा प्रसारक (Bharat Ka public service Broadcaster) है।इसका मुख्य कार्य कमर्शियल टीआरपी (TRP) और लाभ की दौड़ से ऊपर उठकर जनता तक सही और प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करना है।
  • प्रसार भारती का गठन 15 सितम्बर 1997 को किया गया था।इसके तहत आकाशवाणी एवं दूरदर्शन स्वायत्त अभिकरण बन गये हैं।इसे 29 जून,1989 को श्री पी. उपेन्द्र द्वारा संसद में प्रस्तुत किया गया था,जुलाई 1950 में इसे संसद द्वारा पारित कर दिया गया और सितम्बर 1990 में राष्ट्रपति की स्वीकृति भी मिल गई,लेकिन कांग्रेस ने इसे लटकाए रखा।तत्कालीन संयुक्त मोर्चा सरकार के उत्साही सूचना एवं प्रसारण मंत्री के सक्रिय प्रयासों से यह विधेयक लागू हुआ।
    प्रसार भारती की स्थापना का उद्देश्य सार्वजनिक हित के सभी राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय मामलों में लोगों के निष्पक्ष एवं सूचना प्राप्त करने के अधिकार को सुनिश्चित करना है।प्रसार भारती अनुच्छेद 1(3) के अनुसार प्रसार भारती एक निगमित निकाय की भाँति कार्य करता है। इसका अध्यक्ष एवं सदस्यों का प्रशासक मण्डल है। इसके सदस्यों में उपराष्ट्रपति,प्रेस कौंसिल के अध्यक्ष,आकाशवाणी व दूरदर्शन के पदेन सदस्य होते हैं।आकाशवाणी तथा दूरदर्शन के कर्मचारियों का एक-एक प्रतिनिधि भी इसके सदस्यों में शामिल हैं।
  • ये सरकारी और गैर-सरकारी विषयों पर एक संतुलित दृष्टि प्रदान करता है।सामाजिक विकास (Social Development),शिक्षा,कृषि,स्वास्थ्य और संस्कृति से जुड़े मुद्दो को देश के दूर-दराज इलाको तक पहुंचाना इसका मुख्य उद्देश्य है।स्वतंत्रता की आवश्यकता (The Need for Independence) दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में की गई काँट-छाँट,गुम हुई आवाज यह आभास करा देती है कि दूरदर्शन पर एक अघोषित सेंसर लागू था।कुछ दूरदर्शन की स्वामिभक्ति भी,पक्षपातपूर्ण समाचार,सूचना या विवरण के लिए उत्तरदायी हो सकती है।इस तरह असीमित सम्भावनाओं भरा दूरदर्शन अब तक सीमित उत्तरदायित्वों का निर्वाह ही कर रहा था।
  • ऐसे में एकरसता तथा अधकचरे कार्यक्रमों से ऊबे दर्शकों का विदेशी चैनलों की ओर आकर्षित होना स्वाभाविक ही है।आज विदेशी चैनलें निश्चय ही दूरदर्शन से अधिक त्वरित तथा नवीनतम जानकारी देकर दर्शकों को मानसिक क्षुधा को शान्त करती है।भारतीय संचार माध्यम स्वायत्त होने से उच्चस्तरीय तथा निष्पक्ष प्रसारण करने लगे हैं।

4.विदेशी चैनलों का दुष्प्रभाव (Side effects of foreign channels):

  • विदेशी चैनलों का भारत से कोई आत्मिक रिश्ता नहीं है जिससे इसके कई दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं।आज के डिजिटल दौर में विदेशी समाचार चैनल,ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया नेटवर्क का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है जिसके कुछ दुष्प्रभाव है।
    सांस्कृतिक अतिक्रमण (cultural Erosion) विदेशी सामग्री पर विदेशी जीवन-शैली और मूल्यों को बढ़ावा देता है,जिससे स्थानीय और परम्परागत संस्कृति मूल्य कमजोर होने लगते हैं।
  • भू-राजनीतिक पूर्वाग्रह और प्रचार (Geopolitical Bias and propaganda):विदेशी समाचार चैनल अक्सर अपने देश के राष्ट्रीय हित के बारे में खबरों को दिखाते हैं,जिससे कई बार दूसरे देश की छवि गलत पेश होती है।
  • आर्थिक और डेटा का निष्कासन (Economic and data removal) विदेशी प्लेटफार्मों का विज्ञापन-राजस्व और उपयोगकर्ता डेटा उनके अपने देश में चला जाता है,जिसकी स्थानीय मीडिया इंडस्ट्री को आर्थिक नुकसान होता है।

5.संचार माध्यम कितने फ्री है? (How free are the media?):

  • मीडिया को घटनाओं की निष्पक्ष रिर्पोटिंग करनी हैं,सरकार की नीतियों की समीक्षा करनी है और सामाजिक मुद्दों को उठाने की आजादी है।लेकिन ये आजादी असीमित (unlimited) नहीं है।संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत देश की सुरक्षा,अखण्डता और सार्वजनिक व्यवस्था के हित में इस पर उचित प्रतिबन्ध लगाए गए हैं।

6.मीडिया की स्वतन्त्रता के मुख्य खतरे (उदाहरणों के साथ) (The main threats to media freedom (with examples)):

  • फर्जी खबरे और गलत सूचनाएं (Fake and Misinformation),सोशल मीडिया के दौर में बिना किसी पुष्टि के अफवाहें फैलना सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बन जाता है।बदलकर दिखाने से खबर का असली मकसद ही बदल जाता है।जैसे आज दुनिया खत्म होने वाली है ज‌बकि असल में ऐसा कुछ होता ही नहीं है।
  • टीआरपी और कमर्शियल कंद्रोल (TRP and Commercial Control):टीआरपी की दौड़ में कई बार सनसनी खबरों को बदल कर दिखाया जाता है। जैसे यह खबर हैं:उसे मारो मत,जाने दो या उसे मारो,मत जाने दो।दोनों में वही शब्द हैं परन्तु दोनों का अर्थ ही बदल गया है।
    मीडिया द्वारा ट्रायल (Trial by Media) कोर्ट का फैसला आने से पहले ही मीडिया द्वारा किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित कर देना,उसके मौलिक अधिकारों का हनन है।
  • देश की सुरक्षा पर आँच (Threat to the security of the country):संवेदनशील अभियान (जैसे आतंकवादी हमलों) की लाइव रिपोर्टिंग से सुरक्षा बलों के अभियान प्रभावित होते हैं।

7.संचार माध्यमों की स्वतंत्रता की सीमाएँ (Limitations of the freedom of the news media):

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत मीडिया की आजादी पर कुछ मुख्य उचित प्रतिबन्ध लगाएँ गए हैं।सीमाओं के बाहर मीडिया काम नहीं कर सकता।यदि करता है तो गलत करता है।
  • देश की एकता और अखण्डता (Unity and integrity of the country):ऐसी कोई भी खबर या बयान नहीं दिखाया जा सकता जो देश के टुकड़े करे या सुरक्षा को खतरे में डाले।यों भी नैतिक दृष्टि से राष्ट्र से बड़ी किसी की भक्ति किसी के प्रति नहीं होनी चाहिए।आंतरिक सुरक्षा और लोक-व्यवस्था (Security and Public Order) या ऐसी खबरें या धार्मिक अफवाहें जिनसे दंगे,हिंसा या सामाजिक वैमनस्यता फैले,उन पर रोक है।
    न्यायालय की अवमानना न्यायालय की कार्यवाही पर गलत टिप्पणी करना या न्याय-प्रणाली पर आरोप लगाना कानूनन जुर्म है।
  • मानहानि (contempt) किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को बिना किसी पुख्ता सबूत के चोट पहुंचाना कानूनन अपराध है।
    कहने का तात्पर्य यह है कि मीडिया (संचार माध्यमों) को स्वतन्त्रता तो दी ही जानी चाहिए,लेकिन इस स्वायत्तता के परिणामों पर भी नजर रखनी चाहिए।यदि स्वायत्तता उच्छृंखलता या उद्दंडता हो जाए,इसका दुरुपयोग यदि कार्यक्रमों को रंगीन तथा उत्तेजक बनाने में होने लगे,यदि स्वायत्तता का मतलब खबरे देने का पर्याय हो जाए,तो ऐसी स्वायत्तता (autonomy) नियन्त्रित होनी चाहिए।

8.स्वतन्त्रता की सफलता किन-किन बातों पर निर्भर करती है? (What are the limits of freedom dependent on?):

  • मीडिया की आजादी तभी समाज के लिए लाभदायक हो सकती है जब वो निम्नलिखित बिन्दुओं पर टिकी हो:
    आत्मनियन्त्रण और नैतिकता (Self-Regulation & Ethics):मीडिया टीआरपी की दौड़ से दूर रहकर स्वयं के पत्रकारिता नैतिकता (पत्रकारिता के नियम) (Journalistic Ethics) तय करने होंगे,तब तक निष्पक्षता मुश्किल है।सार्वजनिक वित्त पोषित या पाठक समर्थित मीडिया माॅडल इसका अच्छा विकल्प है।
    आर्थिक स्वतन्त्रता (Financial Independence):जब तक मीडिया हाउस केवल कॉर्पोरेट विज्ञापन या सरकारी विज्ञापन पर पूरी तरह से निर्भर रहेंगे,तब तक निष्पक्षता मुश्किल है।सार्वजनिक वित्त पोषित या पाठक समर्थित मीडिया मॉडल इसका अच्छा विकल्प है।
  • नागरिकों की जाग्रति (जनता के बीच मीडिया साक्षरता) (Media Literacy among public):मीडिया कितना सही काम कर रहा है,ये जनता पर भी निर्भर करता है।अगर जनता सेंसेशन और फेक न्यूज (sensation and fake news) को रिजेक्ट करके सही और प्रामाणिक खबरों को देखे भी,तो मीडिया अपने आप सही रास्ते पर आएगा।
  • संतुलित कानूनी ढांचा (Balanced Legal Framework):सरकार का न्याय ऐसा होना चाहिए जो मीडिया को बिना वजह दबाए नहीं,लेकिन गलत रिपीटिंग पर लगाम भी लगाए रखे।

9.संचार माध्यमों की स्वतन्त्रता का निष्कर्ष (Conclusion to media freedom):

  • संचार माध्यमों की स्वतन्त्रता लोकतंत्र की आत्मा है। हालांकि “स्वतन्त्रता” और “स्वच्छंदता” (uncheeked freedom) में अंतर होता है।मीडिया को आत्मनियंत्रण (स्व-नियमन) अपनाते हुए अपने सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए,ताकि समाज में विश्वास और सच्चाई बनी रहे।
    किसी भी नीति की सफलता नीयत के साफ रहने पर निर्भर करती है।विदेशी कार्यक्रमों के दुष्प्रभावों पर तो सरकार ध्यान रखे ही,दूरदर्शन भी भौतिवादी होकर न रह जाए यह भी ध्यान रखना है।दूरदर्शन का काम सिर्फ मनोरंजन करना या अर्थ लाभ करना नहीं होना चाहिए,बल्कि उसे देश की सांस्कृतिक विरासत का वाहक होना चाहिए।स्वस्थ लोकतन्त्र के लिए मीडिया की अनुशासित स्वतंत्रता सर्वथा आवश्यक है।
    उपर्युक्त आर्टिकल में संचार माध्यमों की स्वतन्त्रता:भूमिका,खतरे और प्रसार भारती का योगदान (Freedom of Media:Role,Threats and Contribution of Prasar Bharati) के बारे में विस्तार और गहराई से बताया गया है।
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10.मीडिया TRP के चक्रव्यूह में (हास्य-व्यंग्य) (Media in the cycle of TRP) (Humour-Satire):

  • अधिकारी (टी०वी० संवादकाता से):तुम टीवी पर खुले आम पोर्नोग्राफी (आपत्तिजनक सामग्री) की पिच्चर क्यों दिखा रहे हो?
  • टी०वी० संवाददाता:आजकल के युवा और लोग ऐसा ही पसन्द करते हैं।
  • अधिकारी:तुम्हें पता नहीं तुम कानून का उल्लंघन कर रहे हो।
  • टीवी संवाददाता:कुछ पेटी (रिश्वत) चाहिए क्या,ये लो?
  • अधिकारी:टीवी संवाददाता के मुंह पर फेंकते हुए,मुझे बिकाऊ समझ रखा है क्या?

11.संचार माध्यमों की स्वतन्त्रता:भूमिका,खतरे और प्रसार भारती का योगदान (Frequently Asked Questions Related to Freedom of Media:Role,Threats and Contribution of Prasar Bharati) से सम्बन्धित अवसर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.हमारे लिए सबसे प्राथमिक शर्त क्या है? (What are the most elementary conditions for us?):

उत्तर:हमारे लिए राष्ट्रीय एकता,अखण्डता,सम्प्रभुता,राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना किसी भी कीमत पर आवश्यक है।

प्रश्न:2.स्वतन्त्रता का दुरुपयोग से अन्ततः क्या नुकसान है? (What are the ultimate disadvantages of the misuse of freedom?):

उत्तरःस्वतन्त्रता का दुरुपयोग करने से मीडिया और आम व्यक्ति अपनी विश्वसनीयता खो देते हैं।

प्रश्न:3.स्वतन्त्रता का दुरुपयोग का उदाहरण दो। (Give an example of the misuse of freedom):

उत्तर:व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर अफवाह के कारण खतरे में पड़ना या किसी व्यक्ति के खिलाफ गलत माहौल बन जाना।इसी प्रकार नीट-यूजी पेपर लीक करने में जैसे टेलीग्राम माध्यम बना।26/11 मुम्बई आतंककारी हमलों के समय टी०वी० चैनलों पर आतंकवादियों के आकाओं ने फायदा उठाया था।

प्रश्न:4.क्या मतभेद होना गलत है? (Is it wrong to have differences of opinion?):

उत्तर:मतभेद लोकतन्त्र की आत्मा है ऐसे में मतभेदों को मनभेदों का रूप देकर खोजी पत्रकारिता के नाम पर उन्हें उछालकर गलतफहमियों को बढ़ाना (मीडिया द्वारा) गलत है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा संचार माध्यमों की स्वतन्त्रता:भूमिका,खतरे और प्रसार भारती का योगदान (Freedom of Media:Role,Threats and Contribution of Prasar Bharati) की प्राइमरी टर्म्स के बारे जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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