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7 Ways for Drawing Diagrams in Maths

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1.गणित में डायग्राम खींचने के 7 तरीके (7 Ways for Drawing Diagrams in Maths),चित्र कैसे खींचे? (How to Draw Sketch?):

  • गणित में डायग्राम खींचने के 7 तरीके (7 Ways for Drawing Diagrams in Maths) के आधार पर हम जानेंगे कि गणित तथा विज्ञान आदि विषयों में डायग्राम खींचने के क्या फायदे हैं और उन्हें खींचने की कला में कैसे सिद्धहस्त हो सकते हैं।
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  • काॅलेज और विश्वविद्यालयी परीक्षाओं और प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी लेख।

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2.चित्रों का महत्त्व (Importance of Pictures):

  • चित्र का प्रयोग आजकल ऑनलाइन आर्टिकल्स (लेखों) में,ऑफलाइन गणित,विज्ञान,सांख्यिकी,भूगोल पढ़ाने में,यूट्यूब पर विभिन्न वीडियो आदि सभी क्षेत्रों में बहुतायत रूप से होता है।चित्र के स्वयं अपने गुण होते हैं।मोबाइल से सेल्फी लेने में भी चित्र (photo) का खूब चलन बढ़ता जा रहा है।सोशल मीडिया में इंस्टाग्राम तो विशेष रूप से फोटो और रील के लिए लोकप्रिय है।किसी चित्र को देखने में उस विशेष वस्तु का ज्ञान एक साधारण चित्र के द्वारा हो जाता है।स्कूलों में चित्र का ज्ञान देना एक महत्त्वपूर्ण विषय हो गया है।निम्न कारणों से गणित और विज्ञान विषय में चित्रों का प्रयोग होता है:
  • (1.)चित्र का प्रयोग ज्यामिति में ठोसों के पृष्ठीय क्षेत्रफल,आयतन आदि ज्ञात करने के लिए आयतफलकी (घनाभ),घन,बेलन,शंकु,गोलों व अर्द्ध-गोलों के द्वारा उनकी स्थिति ठीक तरह से समझ में आ जाती है।इनमें प्रयुक्त लंबाई,चौड़ाई,त्रिज्या,ऊंचाई,तिर्यक ऊंचाई को ठीक तरह से जाना जा सकता है।इसके अलावा त्रिभुज,चतुर्भुज,पंचभुज आदि आकृतियों की भुजाओं,लंबाई,चौड़ाई का ठीक प्रकार से ज्ञान हो जाता है।न्यून कोण,अधिक कोण,ऋजु कोण (सरल कोण),वृहत कोण आदि में अंतर समझ पाते हैं।
  • (2.)रेखागणित तो पूर्णतः चित्रों पर ही आधारित है।रेखाखंड को विभिन्न अनुपात में विभाजित करना हो,त्रिभुज के समरूप त्रिभुज की रचना करना हो,न्यून कोण या किसी कोण के समान कोण की रचना करना,चतुर्भुज बनाना,पंचभुज बनाना आदि आकृतियों की रचना चित्र के द्वारा भली प्रकार समझ में आ जाती है।
  • (3.)त्रिकोणमिति में त्रिभुज की भुजाओं के अनुपात,त्रिकोणमितीय अनुपातों के द्वारा किसी भवन,टाॅवर आदि वस्तुओं की ऊंचाईयाँ और दूरियां बिना चित्रों के हल कर पाना और समझ पाना असंभव है।
  • (4.)रेखाचित्र का प्रयोग मुख्य रूप से बीजगणित में होता है।रेखाचित्र के द्वारा बीजगणित का ज्ञान स्थूल रूम में हो जाता है,इसके अभाव में बीजगणित के बहुत-से नियम स्पष्ट रूप से नहीं पढ़ाये जा सकते हैं।रैखिक समीकरण युग्म का ग्राफीय विधि से हल ज्ञात करते हैं।ग्राफ भी एक प्रकार का चित्र ही है।ग्राफ द्वारा समांतर रेखाओं,संपाती रेखाओं और प्रतिच्छेदी रेखाओं का ज्ञान हो जाता है।
  • (5.)चित्रों का प्रयोग हमारे दैनिक जीवन में समाचार-पत्रों तथा लेखों में किया जाता है।इसके बिना समझें,हम समाचार और लेखों का ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकते हैं।इसलिए शिक्षण संस्थानों में इसका ज्ञान देना अति आवश्यक है।चित्रों के द्वारा समाचार और लेख जीवन्त हो उठते हैं और उन्हें पढ़ने में सरसता का अनुभव करते हैं।
  • (6.)इसके द्वारा किसी विस्तृत वर्णन को सूक्ष्म (concise) में रखा जा सकता है।इसलिए किसी भी ज्ञान को समझने के लिए चित्रों,रेखाचित्रों,आरेखों का ज्ञान होना आवश्यक है।
  • (7.)बहुत से जटिल तथ्य (facts) जो किसी और विधि से स्पष्ट नहीं किये जा सकते हैं,उनको चित्रों द्वारा स्पष्ट और सरल बनाया जा सकता है।जैसे विज्ञान में श्वासनली,हृदय,छोटी व बड़ी आंत आदि को समझना हो तो इनकी जटिल संरचना को समझना आसान हो जाता है।
  • (8.)चित्रों द्वारा बालक समीकरण संबंधी प्रश्नों को सरलता से हल कर सकते हैं।
  • (9.)चित्रों का ज्ञान साधारण गणित में ही नहीं बल्कि उच्च गणित (Higher Mathematics) के लिए एक आवश्यक आधार प्रदान करता है।
  • (10.)चित्र साधारण समीकरणों के हल की अपेक्षा नवीनता रखते हैं जिससे बालक उनमें रुचि लेते हैं। इनका ज्ञान नेत्रों के द्वारा मस्तिष्क को हो जाता है।इस तरह पढ़ाते समय इन चित्रों के प्रयोग से वही लाभ होता है,जो कि विज्ञान में प्रयोग (Experiments) से होता है।
  • (11.)चित्रों द्वारा दो संबंधित वस्तुओं का संबंध स्पष्ट होता है।जैसे किसी व्यक्ति की आय को वृत्तीय चित्र द्वारा दर्शाया जाए तो उसे पता चल जाता है कि भोजन,शिक्षा,मनोरंजन,खेल तथा अन्य पर कितना-कितना खर्च किया जा रहा है।
  • (12.)चित्रों के प्रयोग करने से कक्षा का बहुत समय बचता है जिसका उपयोग किया जा सकता है।

3.चित्रों का प्रारंभ करना (Initiating Pictures):

  • चित्र का प्रारंभ बालकों के दैनिक जीवन की घटनाओं से संबंधित करके करना चाहिए।शिक्षक को कार्य का विभाजन,तापमान (Temperature) का चित्र,आबादी (population) का चित्र आदि के आधार पर करना चाहिए।बालक को सरल चित्र से कठिन की ओर (simple to complex) ले जाना चाहिए।
  • केवल चित्र खींच देना ही पर्याप्त नहीं है,उसके विभिन्न अंगों,हिस्सों का नाम लिखना,उसका समझना भी उतना ही आवश्यक है।चित्र खींचने में एक बिंदु से दोनों ओर बिंदु निश्चित करने में दो मात्राओं को दिखाया जा सकता है।उसके लिए चित्र खींचे श्यामपट्ट का प्रयोग किया जाना चाहिए।शिक्षक को अपनी कक्षा के बालकों को पर्याप्त अभ्यास देना चाहिए।रेखागणित की सहायता से समीकरण का हल भी बताना चाहिए।
  • समीकरणों द्वारा दो या दो से अधिक समस्याओं का हल चित्र की सहायता से किया जा सकता है।दो समानुपाती (proportional) पदों का चित्र एक सीधी रेखा के रूप में होता है।

4.चित्र खींचना कैसे प्रारंभ करें? (How to start drawing?):

  • (1.)सर्वप्रथम स्थूल (concrete) उदाहरणों का प्रयोग किया जाता है।जैसे किसी दीवार का चित्र बनाना,गिलास का चित्र बनाना,पुस्तक का चित्र बनाना,स्कूल की भिन्न-भिन्न वर्षो में उन्नति का चित्र आदि।इसके पश्चात ताप (Temperature),आबादी आदि के चित्र खींचे जा सकते हैं।
  • (2.)समुच्चय का अध्ययन करते समय वेन डायग्राम (venn-Euler Diagrams),वृत्त आदि के चित्र खींचकर समझाया जाए।वृत्त का चित्र आसानी से खींचा जा सकता है।आयत,वर्ग का चित्र भी आसानी से बनाना सीखा जा सकता है।
  • (3.)इसके बाद बालकों से संख्याओं के खाने तैयार करने को कहा जाए,जैसे पुस्तक की कीमत ₹10 से ₹80 तक खानों में मिलाकर चित्र खींचा जाए।
  • (4.)बीजगणित संबंधी चित्र-इसमें ‘a’ और ‘b’ की कीमत समीकरण की सहायता से चित्र खींचे-b=3a+2 या b=a।
  • (5.)त्रिभुज,आयत,वर्ग के चित्र खींचने का अभ्यास हो जाए तो इसके बाद घनाभ,घन,बेलन,शंकु,गोले,अर्द्धगोले आदि के चित्र खींचकर सीखा या सिखाया जाए।
  • (6.)विज्ञान,रसायन विज्ञान,भौतिकी के चित्र भी बनाने का अभ्यास किया जाए।चित्र खींचना भी एक कला है।और यह अभ्यास द्वारा धीरे-धीरे विकसित होती है।जितना अधिक इसका अभ्यास किया जाता है उतना ही चित्र खींचने में सिद्धहस्त होता चला जाता है।पहले किसी भी आकृति का रफ (Rough) डायग्राम बना लेना चाहिए उसके पश्चात उस रफ डायग्राम के आधार पर स्पष्ट और सही चित्र बनाना चाहिए।रफ डायग्राम के आधार पर हमें सही डायग्राम का आईडिया मिल जाता है।रफ डायग्राम में जहाँ त्रुटि हो उसको स्पष्ट और सही चित्र में सुधार लेना चाहिए।
  • स्वच्छ एवं स्पष्ट चित्र बनाना एकदम से नहीं आता है।साधारण व सीधी-सादी आकृतियों में कठिनाई महसूस नहीं होती है।कुछ समय के अभ्यास से सरल व सीधे चित्र खींचे जा सकते हैं।

5.अध्यापन में चित्र खींचने के लिए ध्यान रखी जाने वाली बातें (Things to keep in mind while drawing in teaching):

  • (1.)चित्र खींचने के साथ-ही-साथ उसको पढ़ाना (Interpret) तथा समझाना भी चाहिए।एक ताप (Temperature) चित्र द्वारा बालकों को किसी समय का ताप (Temperature) ज्ञात करने का ज्ञान होना चाहिए तथा कोई विशेष ताप किस समय है आदि पढ़ना जानना चाहिए।
  • (2.)चित्र खींचते समय उसके साथ विभिन्न भागों का अंकन भी करना चाहिए।जैसे ध्रुवीय सूत्र को समझाने के लिए खींचे जाने वाले चित्र में वक्र के किसी बिंदु पर ध्रुवीय निर्देशांक,स्पर्श रेखा द्वारा बनाया गया कोण,ध्रुवांतर रेखा आदि को दर्शाने के साथ-साथ यह भी बताया जाए की x-अक्ष को प्रारंभिक रेखा (initial line) तथा मूलबिंदु (origin) को ध्रुव (pole) कहा जाता है।बालकों को ध्रुवीय व कार्तीय निर्देशांक में संबंध और अंतर को बताया जाना चाहिए।
  • (3.)त्रिकोणमिति में त्रिकोणमितीय दूरी बताते समय उन्हें चित्र में अंकित करके बताना चाहिए कि उन्नयन कोण क्या होता है,अवनमन कोण कैसे बनता है,सीधी या तिरछी रेखा से क्या आशय है,पाद या आधार बिंदु क्या होता है,क्षैतिज व उर्ध्वाधर रेखा कौन-सी होती है,एकांतर कोण कैसे बनता है आदि।
  • (4.)भौतिकी में जैसे स्प्रिंग को खींचने में किया गया कार्य बताना हो तो क्षैतिज व ऊर्ध्वाधर रेखा खींचकर स्प्रिंग का चित्र बनाया जाए।स्प्रिंग को एक सिरे उर्ध्वाधर के दृढ़ आधार से बांधकर दूसरे सिरे पर बल F को दर्शाया जाए।इसके पश्चात बल और विस्थापन x को अलग चित्र बनाकर स्पष्ट किया जाए कि उनमें क्या संबंध होता है।
  • (5.)रसायन शास्त्र में सहसंयोजक बंध समझाना हो तो परमाणुओं को वृत्त द्वारा दर्शाया जाए तथा इलेक्ट्रानों को बिंदुओं (डाट्स) द्वारा दर्शाया जाए।उदाहरणार्थ मेथेन के एक अणु में एक कार्बन परमाणु चार हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध बनाता है।अतः चारों हाइड्रोजन परमाणुओं को वृत में दर्शाया जाए।और सहसंयोजक बंध में भाग लेने वाले दोनों के इलेक्ट्रॉनों को क्रॉस वृत्त के अंदर दर्शाया जाए।
  • (6.)बालकों को यह समझना चाहिए कि यदि दो मात्राएं समानुपाती (proportional) हों,तो इस तरह का चित्र एक सीधी रेखा में होता है।जैसे भौतिकी के उपर्युक्त उदाहरण में बल एवं विस्थापन समानुपाती हैं अतः इसका चित्र सीधी रेखा में होगा।
  • (7.)चित्र खींचने में अधिक समय नहीं लगाना चाहिए।स्पष्ट और स्वच्छ चित्र सतत अभ्यास द्वारा कम समय में खींचा जा सकता है।
  • (8.)समीकरणों के हल को चित्र के द्वारा भी ज्ञात किया जा सकता है।
  • (9.)प्रत्येक बिंदु रखने में सावधानी से काम करना चाहिए।

6.चित्र खींचने का निष्कर्ष (Conclusion to Drawing):

  • गणित में स्पष्ट,स्वच्छ और सही चित्र वही छात्र-छात्रा खींच सकता है जिसकी हर कांसेप्ट क्लियर है।यदि सवाल की कांसेप्ट क्लियर नहीं है तो सही चित्र क्या,चित्र ही बनाना संभव नहीं है।ऐसी स्थिति में छात्र-छात्रा सवाल को गलत कर बैठते हैं।जिस छात्र-छात्रा की बेसिक्स क्लियर है,जो घुमावदार,जटिल व अस्पष्ट चित्र को भी समझ सकता है तथा चित्र बनाने का जिसे अभ्यास है वही छात्र-छात्रा सही चित्र खींच सकता है और सवाल को हल कर सकता है।
  • परीक्षा में प्रश्न में दिया गया हो तो आवश्यक रूप से स्केच (sketch) खींचना चाहिए।परंतु सवाल या प्रश्न में डायग्राम बनाने के लिए नहीं कहा गया है परंतु सवाल या प्रश्न में डायग्राम खींचना आवश्यक है तो आवश्यक रूप से डायग्राम खींचना चाहिए।
    परीक्षार्थियों को ध्यान रखना चाहिए कि सवाल या प्रश्न के ही अंक नहीं मिलते हैं बल्कि डायग्राम के भी अंक प्राप्त होते हैं।
    कुछ छात्र-छात्राएं सवाल या प्रश्नों को तो याद कर लेते हैं,रट लेते हैं और परीक्षा में हूबहू लिख देते हैं।परंतु स्केच (sketch) को रटना या याद करना संभव नहीं है।चित्र तभी खींचा जा सकता है जबकि आपने थ्योरी को ठीक से समझा है और डायग्राम बनाने का अभ्यास किया हुआ है।
  • अतः छात्र-छात्राओं को प्रारंभिक कक्षाओं से ही डायग्राम खींचने का अभ्यास करते रहना चाहिए ताकि उच्च कक्षाओं में आप स्पष्ट व स्वच्छ डायग्राम बना सकें।कुछ छात्र-छात्राएं सोचते हैं कि उन्हें कौन-सा पेंटर बनना है जो डायग्राम खींचने का अभ्यास किया जाए।डायग्राम खींचने से थ्योरी ठीक से समझ में आ जाती है या थ्योरी को ठीक से समझाया जा सकता है।गणित की अधिकांश विषय वस्तु अमूर्त (Abstract) होती है अतः अमूर्त विषयवस्तु को डायग्राम के द्वारा ठीक से समझा या समझाया जा सकता है।अब तो प्रतियोगिता परीक्षाओं में भी वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी डायग्राम के आधार पर पूछे जाने लगे हैं।अतः हर तरह की परीक्षाओं चाहे वह निबन्धात्मक हो या वस्तुनिष्ठ डायग्राम को समझना जरूरी हो गया है।इसलिए घुमावदार और जटिल प्रश्नों और सवालों को डायग्राम के आधार पर हल करने का अभ्यास तो कर ही लेना चाहिए साथ ही डायग्राम को समझने की कला में भी पारंगत होना चाहिए।
  • ऐसे प्रश्नों की तैयारी के लिए कुछ स्तरीय पुस्तकों से वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को हल करना चाहिए।अक्सर बोर्ड की पुरानी पुस्तकों में डायग्राम पर आधारित प्रश्न मिल जाते हैं।यदि पुरानी पुस्तकें उपलब्ध न हो सके तो कुछ स्तरीय गाइडों से इनकी तैयारी की जा सकती है।
  • बोर्ड परीक्षाओं,कॉलेज और विश्वविद्यालयी,प्रतियोगिता तथा प्रवेश परीक्षाओं के दृष्टिकोण से डायग्राम आधारित प्रश्नों व सवालों को हल करना और समझना आवश्यक है।गणित विषय में कमजोरी का एक कारण यह भी है कि विद्यार्थी डायग्राम नहीं खींच पाते हैं और न डायग्राम को समझने की कोशिश करते हैं।फलतः वे डायग्राम आधारित सवालों को हल भी नहीं कर पाते हैं।अतः परीक्षार्थियों को सवाल का हल ज्ञात है तब भी यदि उसमें डायग्राम की जरूरत है तो डायग्राम खींचकर ही सवाल हल करना चाहिए ताकि डायग्राम खींचने का अभ्यास होता रहे।अक्सर अधिकांश विद्यार्थी बिना डायग्राम के ही सवाल का हल या तो याद कर लेते हैं या सीधे ही हल करते हैं,डायग्राम बनाने में समय को नष्ट करना समझते हैं।
  • लेखो में भी डायग्राम की आवश्यकता महसूस की जाती है।भावों को व्यक्त करने के लिए संबंधित डायग्राम लेख में होता है तो लेख को पढ़ने में रुचि बनी रहती है।यदि तनाव पर कोई लेख है तो उसमें तनावग्रस्त व्यक्ति की फोटो लगाने पर तनाव की कॉन्सेप्ट स्पष्ट हो जाती है साथ ही उस पिक्चर को देखने से लेख प्रभावी हो जाता है।वीडियो में भी डायग्राम या फोटो का इस्तेमाल किया जाता है।सिनेमा को तो फोटो का इस्तेमाल करने के कारण चलचित्र ही नाम दे दिया गया है।इस प्रकार हर क्षेत्र में फोटो,पिक्चर,डायग्राम का महत्त्व है तो उसके लाभ भी हैं।विद्यार्थियों को इनके महत्त्व व लाभ को देखते हुए शुरू से ही डायग्राम खींचने का अभ्यास करना चाहिए ताकि गणित में पारंगत हो सके।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गणित में डायग्राम खींचने के 7 तरीके (7 Ways for Drawing Diagrams in Maths),चित्र कैसे खींचे? (How to Draw Sketch?) के बारे में बताया गया है।

Also Read This Article:लड़कियों को गणित विषय क्यों लेना चाहिए?

7.पुत्री की हरकतें (हास्य-व्यंग्य) (Daughter’s Mischiefs) (Humour-Satire):

  • मां:ये तुम कमरे की दीवारों को गंदा क्यों कर रही हो।
  • पुत्रीःमां आप ही ने तो कहा था कि यह ड्राइंग रूम है। इसलिए मैं इसमें डायग्राम बनाकर ड्राइंग का अभ्यास कर रही हूं।

8.गणित में डायग्राम खींचने के 7 तरीके (Frequently Asked Questions Related to 7 Ways for Drawing Diagrams in Maths),चित्र कैसे खींचे? (How to Draw Sketch?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.डायग्राम का अभ्यास कैसे करें? (How to practice diagrams?):

उत्तर:बार-बार अभ्यास करें।रिवीजन करें तब भी डायग्राम बनाएं।नोट्स बनाते समय यथास्थान सुंदर,स्पष्ट और स्वच्छ डायग्राम बनाएं।कक्षा में खाली कालांश आए तो डायग्राम वाले सवाल व प्रश्नों को हल करें।

प्रश्न:2.क्या डायग्राम के लिए ट्रेनिंग की जरूरत है? (Do diagrams need training?):

उत्तर:सतत अभ्यास की जरूरत है और डायग्राम वाले प्रश्नों को समझकर डायग्राम बनाने की जरूरत है।

प्रश्न:3.डायग्राम की शुरुआत कैसे करें? (How to start a diagram?):

उत्तर:पहले सरल-सरल डायग्राम बनाएं।रेखाएं,वृत,आयत,घन आदि बनाएं।फिर जटिल डायग्राम बनाएं।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित में डायग्राम खींचने के 7 तरीके (7 Ways for Drawing Diagrams in Maths),चित्र कैसे खींचे? (How to Draw Sketch?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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