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Why do you need a tutor or coaching in mathematics?

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1 Why do you need a tutor or coaching in mathematics?)-

Why do you need a tutor or coaching in mathematics?)-

1.गणित में ट्यूटर या कोचिंग की आवश्यकता का परिचय(Introduction to the need of tutor or coaching in mathematics)-

Why do you need a tutor or coaching in mathematics
Why do you need a tutor or coaching in mathematics
इस आर्टिकल में बताया गया है कि विद्यार्थियों को स्कूल में नियमित रूप से जाने के बावजूद ट्यूटर या कोचिंग की आवश्यकता क्यों है? वर्तमान युग आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रौद्योगिकी का युग है। प्राचीन काल के बजाय वर्तमान युग में हर चीज इतनी तेजी से बदल रही है परम्पराएँ, मान्यताएं, रीति रिवाज, फैशन यानी इतना परिवर्तन हो रहा है (हर क्षेत्र में) कि आज कोई भी अनुसंधान या तकनीक आ गई है तो कहा नहीं जा सकता है कि वह तकनीक कितने दिन टिकी रह सकेगी। आधुनिक युग से कदमताल मिलाते हुए नहीं चलेंगे तो हम पिछड़ जाएंगे और हमसे पीछे जो हैं वे हमसे आगे निकल जाएंगे। हालांकि ऐसा कहकर हम दूसरों से स्पर्धा करने का समर्थन नहीं कर रहे हैं परन्तु स्वयं से भी स्पर्धा की जाए तो हमेशा इस बात का मूल्यांकन करते रहना चाहिए कि पिछले समय से हम कितना आगे बढ़ें हैं अर्थात् हमारा कितना उत्थान और विकास हुआ है। दूसरी बात यह है कि प्रतियोगिता परीक्षाओं में दूसरों से अव्वल या आगे निकलेंगे तो ही किसी पद पर नियुक्त हुआ जा सकता है, इसके लिए दूसरों से स्वस्थ प्रतियोगिता तो की ही जा सकती है। दूसरों से प्रतियोगिता के समय यह बात हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि हमारे मन में दूसरों के प्रति कोई ईर्ष्या, जलन तथा राग, द्वेष तो पैदा नहीं हो रहा है।

अब हम मूल मुद्दे की तरफ आते हैं कि ट्यूटर या कोचिंग की जरुरत है या नहीं यदि है तो क्यों है? और नहीं तो क्यों नहीं? सामान्यतः निम्नलिखित कारणों की वजह से ट्यूटर या कोचिंग की आवश्यकता होती है –

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2.स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव(Lack of quality education in schools)-

औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने का प्रथम स्थान स्कूल, कॉलेज को ही दिया जाना चाहिए यदि वाकई में स्कूलों और कालेजों में पढ़ाई कराई जाती है तो। लेकिन हमारे अनुभव में आया है कि स्कूलों में तो फिर भी अध्ययन-अध्यापन का कार्य होता है जो स्तरीय स्कूल हैं। बहुत से स्कूल ऐसे हैं जो धनार्जन के केन्द्र बने हुए हैं उनको बालकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने से कोई लेना-देना नहीं है। काॅलेजों में तो 80 प्रतिशत काॅलेज नाम मात्र के चल रहे हैं,केवल उनको फीस वसूल करने से मतलब है, विद्यार्थियों की शिक्षा तो भगवान भरोसे है। कुछ नामी या उत्कृष्ट काॅलेजों को छोड़ दिया जाए तो काॅलेजों की स्थिति बदतर है। जब सारे कुएँ में ही भाँग मिली हुई है तो कोई कैसे बच सकता है। इन स्कूल, काॅलेजों की स्थिति के कारण ही तो ट्यूटर और कोचिंग संस्थानों की आवश्यकता महसूस हुई है।
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3.पाठ्यक्रम को पूर्ण करने हेतु(To complete the course)

स्कूलों में पाठ्यक्रम पूर्ण न कराया गया हो या विद्यार्थी स्कूल में कराए गए कोर्स के साथ न चल पा रहा तो पाठ्यक्रम पूर्ण करने के लिए ट्यूटर या कोचिंग की आवश्यकता होती है। अन्य विषयों के कोर्स को तो जैसे तैसे विद्यार्थी अपने स्तर पर पूर्ण कर लेते हैं परन्तु सबसे अधिक परेशानी गणित और विज्ञान के कोर्स को पूरा करने में आती है। इन विषयों का पाठ्यक्रम छूट जाने पर अपने स्तर पर पूर्ण नहीं किया जा सकता है।

4.अप्रत्याशित घटना घटित होने के कारण(Due to force majeure)-

कई बार विद्यार्थी बीमार हो जाते हैं या कोई पारिवारिक संकट आ जाता है जैसे किसी की मृत्यु हो गई हो या विद्यार्थी का एक्सीडेंट हो जाए या अन्य किसी कारण से साल दो साल के लिए पढ़ाई में ब्रेक लग जाए इत्यादि अनपेक्षित स्थितियों में ट्यूटर या कोचिंग की आवश्यकता हो जाती है। क्योंकि बीच में ब्रेक आने से अध्ययन का क्रम टूट जाता है और हमारा याद किया हुआ विस्मृत हो जाता है इसलिए पुराने ज्ञान को रिमाइंड करने की आवश्यकता होती है तथा पाठ्यक्रम को समय पर पूर्ण करना होता है।

5.स्कूलों में अनुभवी शिक्षकों का अभाव(Lack of experienced teachers in schools)-

बहुत से स्कूलों में गणित व विज्ञान के अनुभवी अध्यापक नहीं होते हैं इसलिए विद्यार्थियों की गणित व विज्ञान सम्बन्धी समस्याएँ हल नहीं हो पाती है। यदि विद्यार्थी और अभिभावक स्कूल प्रशासन से शिकायत करते हैं तो वे कोई भी गोल-मटोल जवाब दे देते हैं, ऐसी स्थिति में विद्यार्थी और अभिभावकों को  ट्यूटर या कोचिंग की व्यवस्था करनी ही पड़ती है।

6.अभिभावकों का शिक्षित न होना(Parents not educated)-

विद्यार्थी को सबसे अधिक समस्या विज्ञान और गणित, अंग्रेजी विषयों में होती है। स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण विद्यार्थियों की व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता है। अभिभावक या तो गणित व विज्ञान जैसे विषयों में शिक्षित नहीं होते हैं और यदि होते भी हैं तो अध्ययन का लम्बा अन्तराल व्यतीत होने से वे गणित व विज्ञान जैसे विषयों की जटिल समस्याओं को हल करने में सहायता नहीं कर सकते हैं। दूसरी तरफ उनकी अपने व्यवसाय में इतनी व्यस्तता होती है कि वे विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान नहीं कर पाते हैं।

7.अच्छे अंक प्राप्त करने हेतु(To get good marks)-

हर विद्यार्थी तथा अभिभावक की यह दिली तमन्ना होती है कि वो अधिक से अधिक अंक अर्जित करे। इसलिए अपने अध्ययन में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। अच्छे अंक अर्जित करने के लिए अधिक परिश्रम व मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। स्कूल व ट्यूटर तथा कोचिंग की कल्चर अलग होती है। ट्यूटर आपकी प्रत्येक व्यक्तिगत समस्या का समाधान कर सकता है जबकि स्कूल में ऐसा नहीं हो सकता है। इसलिए अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने के लिए ट्यूटर व कोचिंग संस्थान की आवश्यकता होती है।
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8.नया सीखने के लिए(To learn new)-

ट्यूटर, स्कूल और कोचिंग संस्थान में पढ़ाने का अलग-थलग तरीका होता है। किसी बालक को ट्यूटर से तो किसी बालक को कोचिंग संस्थान में ठीक से समझ आता है। साथ स्कूल में पढ़ने के बाद कुछ अलग हटकर तथा नया सीखने की इच्छा होती है क्योंकि ट्यूटर, स्कूल और कोचिंग संस्थान में अलग-अलग तरीके से पढ़ाया जाता है।

9.पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति हेतु(For course repeat)-

स्कूलों में सामान्यतः पूर्ण सत्र में पाठ्यक्रम को एक बार ही करवाया जाता है। यदि पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति करनी हो और पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति करनी ही चाहिए, उसके लिए भी ट्यूटर व कोचिंग की आवश्यकता होती है। बहुत से प्रश्न व सवाल विद्यार्थी पुनरावृत्ति करते समय स्वयं हल कर लेता है परन्तु जो जटिल समस्याएं होती है उन्हें विद्यार्थी समझ नहीं पाता है उसके लिए मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।

10.प्रतियोगिता परीक्षा के लिए आवश्यकता(Requirement for competitive examination)-

प्रतियोगिता परीक्षाओं में प्रश्न घुमा फिराकर आते हैं। सामान्य प्रश्नों को भी घुमा फिराकर देते हैं जिससे अभ्यर्थियों में कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा हो जाती है। पाठ्यक्रम पहले से पढ़ा हुआ नहीं होता है। पूरी तरह नवीन होता है। इसलिए पाठ्यक्रम के प्रश्नों को हल करने, कुछ नवीन मैथड सीखने, परीक्षा का पैटर्न पता लगाने और सवालों को हल करने की स्पीड बढ़ाने के गुर सीखने के लिए ट्यूटर या कोचिंग संस्थान की आवश्यकता होती है।

11.हुनर सीखने के लिए(To learn skills)-

Why do you need a tutor or coaching in mathematics
Why do you need a tutor or coaching in mathematics
ग्रीष्मकालीन या शीतकालीन व दीपावली की छुट्टियाँ आने पर विद्यार्थी उस समय को फालतू नष्ट कर देते हैं इसलिए अभिभावक भी चिन्तित हो जाते हैं। इस अवकाश काल का उपयोग किसी हुनर को सीखने में लगाया जा सकता है। इससे कुछ फायदे हैं। सबसे पहला फायदा तो यह है कि समय का सदुपयोग हो जाता है। फालतू में समय नष्ट करने से कोई न कोई खुराफात सूझती है। इसलिए इस प्रकार का कार्य करने से रचनात्मकता को प्रोत्साहन मिलता है। दूसरा फायदा यह है कि आधुनिक शिक्षा सैद्धान्तिक है इसको प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों को रोजगार व भविष्य की चिन्ता सताने लगती है। यदि आप कोई हुनर सीखें हुए हो तो आपको ज्यादा चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं होगी। आप डिग्री हासिल करने के बाद अपना छोटा-मोटा कार्य कर सकते हो। बहुत से कोचिंग संस्थान कोई न कोई हुनर सीखाते हैं जैसे योगासन, संगीत, नृत्य, पेटिंग,कम्प्यूटर संबंधी स्किल।

12.समीक्षा(Review)-

ऊपर बताएं गए कारणों से एक बार में यह मत समझ बैठना कि हम ट्यूटर तथा कोचिंग के पक्के समर्थक हैं। हमारा व्यक्तिगत अनुभव है कि यदि विद्यार्थियों और माता-पिता में दृढ़ संकल्पशक्ति हो तो आप बिना ट्यूटर व कोचिंग की सहायता लेकर भी सफल हो सकते हैं। यदि आपमें दृढ़ संकल्पशक्ति नहीं है और अन्य विद्यार्थियों की देखा देखी ट्यूटर या कोचिंग कर रहे हैं तो ऐसी शिक्षा कोई भी काम आनेवाली नहीं है। केवल आप अपना समय और धन ही खर्च करेंगे। हाँ यह अवश्य है कि यदि आप सजग, सतर्क और चौकस हैं तो ट्यूटर व कोचिंग का फायदा उठा सकते हैं। हमारा व्यक्तिगत अनुभव तो यह है कि हमने न तो कोई ट्यूटर की व्यवस्था की थी और न ही कभी कोचिंग में शिक्षा ग्रहण की। परन्तु फिर भी  R. A. S  तक का एक्जाम अपने बलबूते पर तैयारी करके दी थी। बीएससी(गणित) भी अपने खुद के दम पर ही की थी। यह अवश्य है कि वो समय अलग था और आज समय अलग है। हालांकि हमारे समय में भी ट्यूटर और कोचिंग संस्थान थे। पर हमने कभी इनकी सेवाएँ नहीं ली। आज समय बदल चुका है। फिर भी इतना तो कह सकते हैं कि मनुष्य में असीम क्षमताएं हैं। वह अपने संकल्पशक्ति, कठोर परिश्रम, तप, साधना और समर्पण के बल पर अपनी मंजिल हासिल कर सकता है। जो विद्यार्थी ऐशोआराम में अपना जीवन व्यतीत करते हैं उनमें ये गुण विकसित नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति में वे चाहे ट्यूटर रख लें, कोचिंग क्लासेज ज्वाइन कर लें तो भी उनकी सफलता संदिग्ध है। हम निश्चित के स्थान पर संदिग्ध का प्रयोग इसलिए कर रहे हैं क्योंकि कई बार पूर्वजन्म के अच्छे संस्कार प्रबल हो जाते हैं तो उनके बल पर सफलता मिल जाती है परन्तु ऐसी सफलता टिकाऊ नहीं होती है अर्थात् लम्बे समय तक टिकी नहीं रह सकती है क्योंकि किसी जाॅब पर कार्य करने के लिए कई कठिनाइयों व समस्याओं का सामना करना पड़ता है यदि हम उनका समाधान नहीं करते हैं तो हमारी प्रतिभा और योग्यता की पोल खुल जाती है। इसलिए विद्यार्थी काल को ऐशोआराम में न बिताकर कठोर तप व साधना से हमें व्यावहारिक ज्ञान तो मिलता ही है साथ ही हमारा चारित्रिक विकास भी होता है। यदि इन बातों को ध्यान में रखा जाए तो आपका उत्थान और विकास टिकाऊ होगा। आपका खुद का तो भला होगा ही साथ ही ज्यादा कुछ करेंगे तो दूसरों का भी भला कर सकेंगे।

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