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What is Use of Mathematics in Daily Life

What is Use of Mathematics in Daily Life

Table Of Contents

    दैनिक जीवन में गणित की क्या उपयोगिता है (What is The Use of Mathematics in Daily Life)-

    1.गणित शिक्षा एवं हमारे जीवन में परिवर्तन(Mathematics education and change in Our Life)-

    शिक्षा द्वारा हम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में वांछनीय परिवर्तन लाते हैं तथा उनको विकास की ओर अग्रसर करते हैं। इस प्रकार विद्यार्थियों का मानसिक, बौद्धिक एवं सामाजिक विकास होता है। कक्षा में अध्यापन द्वारा हम धीरे-धीरे प्रतिदिन विद्यार्थियों की प्रगति में सहायता करते हैं तथा शिक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति करते हैं। समाज द्वारा निर्धारित उद्देश्यों के संदर्भ में ही शिक्षा के उद्देश्य निश्चित किए जाते हैं। इन उद्देश्यों में भी समाज की परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन होते रहते हैं। गणित के उद्देश्यों में भी विज्ञान की विषय-सामग्री में वृद्धि होने से परिवर्तन होते रहते हैं।
    गणित के सफल अध्ययन से विद्यार्थियों के व्यवहारों में सम्बन्धित परिवर्तन देखे जा सकते हैं। यह बात हम उन दो विद्यार्थियों के व्यवहारों का अध्ययन कर देख सकते हैं जिनमें से एक इस विषय का अच्छा विद्यार्थी रहा है तथा दूसरा इस विषय का अच्छा विद्यार्थी नहीं रहा है या उसने इस विषय का कभी भी अध्ययन नहीं किया है। गणित के अध्ययन से विद्यार्थी के व्यक्तित्व में कुछ ऐसे गुण आ जाते हैं जिन्हें दूसरे विषयों द्वारा शायद ही इतनी मात्रा में प्राप्त नहीं किया जा सकता है क्योंकि इस विषय में कुशलता प्राप्त करने के लिए उन गुणों की प्राप्ति आवश्यक है।
    राष्ट्र की समस्याओं को ध्यान में रखकर भारत में शिक्षा के सामान्य उद्देश्यों को निश्चित किया जाना चाहिए तथा इन्हें विभिन्न विषयों की विषय-सामग्री के चयन तथा संगठन का आधार बनाया जाना चाहिए। जिस समाज में राष्ट्रीय उद्देश्यों में तालमेल नहीं होता वहाँ पर शिक्षा का उपयोगी प्रभाव दृष्टिगत नहीं होता। गणित विषय की सामग्री का चयन एवं संगठन इस विषय की विशेषताओं एवं उद्देश्यों में स्थापित सामंजस्य कर ही किया जा सकता है। यूरोप का सबसे बड़ा योगदान वैज्ञानिक क्रांति है और विज्ञान तथा गणित इसके महत्त्वपूर्ण अंग हैं।
    विज्ञान पर आधारित औद्योगिकरण की ओर तेजी से बढ़ने के लिए आवश्यक है कि गणित के सामान्य एवं कक्षापयोगी उद्देश्यों को निर्धारण करने में भावी समाज की स्पष्ट रूपरेखा को भी सामने रखा जाय। भारत का आधुनिकीकरण विज्ञान एवं गणित के सफल अध्यापन एवं उपयोग पर निर्भर करता है। इन विषयों के पाठ्यक्रमों का उचित निर्धारण अध्यापक एवं शिक्षाशास्त्री आवश्यकतानुसार इन विषयों के पाठ्यक्रमों में परिवर्तन कर समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सतत प्रयास करते हैं किन्तु पिछड़े हुए समाज में वहाँ के अध्यापकगण सड़े-गले पाठ्यक्रमों को बिना आवश्यकता के पढ़ाते रहते हैं।

    2.गणित की हमारे जीवन में व्यावहारिक उपयोगिता(Practical Utility of Mathematics in Our Life)-

    आज के वैज्ञानिक युग में गणित के महत्त्व पर प्रकाश डालना सूर्य को दीपक दिखाना है। गणित ही विज्ञान की जननी है तथा गणित की सहायता के बिना विज्ञान में प्रगति सम्भव नहीं है। वर्तमान में जितनी भौतिक प्रगति हम देखते हैं वह सब विज्ञान एवं गणित की ही देन है। गणित के बिना विज्ञान पंगु हो जाता है। तथ्यों का अध्ययन, संकलन तथा विवेचन गणित के सिद्धान्तों की सहायता से किया जाता है। तथ्यों में परस्पर सम्बन्ध स्थापित कर नये सिद्धान्तों को जन्म गणित की मदद से किया जाता है। भौतिक विज्ञान की प्रगति में गणित का महत्त्वपूर्ण हाथ है तथा जैविक विज्ञानों के विकास में इसका अधिकाधिक प्रयोग किया जाता है। स्वचालन विज्ञान और साइबरनैटिक्स के आगमन से गणित अध्ययन पर विशेष ध्यान देना और भी आवश्यक हो गया है।
    मनुष्य का चाँद पर पहुँचना इस शताब्दी की एक महत्त्वपूर्ण घटना है। चाँद की पृथ्वी से दूरी, राकेट की गति में विभिन्न बाधाएँ, ताप का प्रभाव, पृथ्वी की आकर्षण शक्ति का राकेट की गति पर प्रभाव, राकेट के चाँद पर पहुँचने का समय आदि की गणना, गणित की सहायता से ही सम्भव हो सकीं है। गणित की सहायता के बिना राकेट सम्बन्धी कोई भी गणना नहीं की जा सकती है। विज्ञान को व्यावहारिक बनाने में गणित का प्रमुख हाथ है। मंगल और शुक्र ग्रह पर भी पहुँचने की योजना में गणित का उपयोग आवश्यक है तथा निकट भविष्य में मनुष्य चन्द्रमा की तरह अन्य ग्रहों पर भी पहुँच सकेगा। प्रकृति के विभिन्न तथ्यों को संख्यात्मक स्वरूप देना गणित के द्वारा ही सम्भव है। चन्द्रमा से प्राप्त अनेक तथ्यों एवं आँकड़ों का मूल्यांकन गणित की सहायता से किया गया है तथा धीरे-धीरे हमें मूल्यांकन के निष्कर्षों से चन्द्रमा एवं वहाँ के वायुमंडल के बारे में अनेक नवीन बातों की जानकारी मिली है। भावी संसार की रूपरेखा एवं निर्माण गणित के बिना असम्भव है।

    What is The Use of Mathematics in Daily Life
    What is The Use of Mathematics in Daily Life

    दैनिक जीवन में भी गणित का अधिकाधिक प्रयोग होने लगा है। प्रत्येक जीवन का क्षण गणित के किसी न किसी प्रकार गणित के नियमों, सिद्धान्तों तथा प्रक्रियाओं का प्रयोग करते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को समाज का एक उपयोगी अंग सिद्ध होने के लिए और अपने जीवन में सफल होने के लिए गणित का सामान्य ज्ञान होना चाहिए। इसके बिना दैनिक जीवन में पग-पग पर कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। जब हम बाजार से सब्जी या अन्य कोई वस्तु खरीदने जाते हैं तो गणित के सामान्य ज्ञान के बिना हमें भाव निश्चित करने में तथा कीमत की गणना करने में असुविधा होगी। घर का बजट बनाते समय, आय और मजदूरी फलाते समय, वस्तुओं को तोलते समय, घड़ी में समय देखते हुए, रेलगाड़ी के आने के वक्त की जानकारी देते हुए, बस का किराया देकर बाकी के पैसे लेते हुए, लिफाफे पर टिकट लगाते समय, तारघर में तार देते समय यानी प्रत्येक स्थल पर गणित का उपयोग करना पड़ता है। जीवन में शायद ही कोई ऐसा धन्धा है जिसमें कम या अधिक मात्रा में गणित का उपयोग न होता हो। दर्जी को कपड़ा माप के अनुसार काटना पड़ता है, हलवाई को अपने काम में अनुपात, औसत आदि का प्रयोग करना पड़ता है, दूध बेचने वाले को लीटर आदि को काम में लेना पड़ता है, पंसारी को तोलने के विभिन्न बाटों का उपयोग करना पड़ता है, ओवरसियर एवं इंजीनियर को क्षेत्रफल आयतन आदि की गणना करनी पड़ती है, खिलाड़ी को स्कोर का ध्यान रखना पड़ता है, डाॅक्टर को रोगी की आयु आदि को ध्यान में रखकर आवश्यक मात्रा में औषधि देनी पड़ती है, मजदूर को अपने कार्य तथा समय के हिसाब से मजदूरी की गणना करनी पड़ती है, खाती को लकड़ी की कोई वस्तु बनाते समय माप का पूरा ध्यान रखना पड़ता है। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि जीवन का कोई ऐसा पक्ष नहीं है जिसमें गणित की आवश्यकता न हो। यह भी कहा जा सकता है कि प्रत्येक धन्धे में गणित का अधिकाधिक प्रयोग होने लगा है। मशीनों एवं बिजली के प्रयोग से अनेक धन्धों में गणित का अनिवार्य रूप से प्रयोग होने लगा है।

    What is The Use of Mathematics in Daily Life

    What is The Use of Mathematics in Daily Life

    विश्व के नागरिकों को निकट लाने में तथा समाज के उत्कर्ष में गणित की एक उपयोगी भूमिका रही है। समाज की आर्थिक प्रगति तकनीकी ज्ञान के प्रयोग पर निर्भर करती है। वैज्ञानिकों तथा गणितज्ञों के आविष्कारों को समझने के लिए गणित का ज्ञान आवश्यक है। रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर, फिल्में, राकेट, हवाई-जहाज, कार, पुल, अनेक मंजिलों की इमारतें, पंखें, सड़कें, पानी के जहाज, विज्ञान के उपकरण आदि की उपलब्धि गणित के कारण ही सम्भव हो सकी है। जिसके कारण हमें जीवन में आनन्द, सुख और समृद्धि उपलब्ध हो सकी है। आगे आने वाले समय में गणित के अधिकाधिक उपयोग के कारण जन-जीवन में ओर भी अधिक समृद्धि की अपेक्षा की जानी चाहिए।
    ज्योतिष, भूगोल, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, इंजीनियरिंग आदि के अध्ययन में गणित का ज्ञान आवश्यक है। इन विषयों में नवीन प्रगति गणित के ज्ञान के उपयोग से की जा रही है। यह देखने में आ रहा है कि इन विषयों में विषय-सामग्री का विवेचन गणित की सहायता से अधिक बोधगम्य हो गया है।

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    गणित के पाठ्यक्रम में अनेक ऐसे उप-विषय हैं जो हमारे जीवन में काम आते हैं तथा हमारे दैनिक जीवन के कार्यकलापों को सुविधा करते हैं। उदाहरणार्थ माप, तोल एवं दशमलव प्रणाली, ऐकिक नियम, साधारण एवं चक्रवृद्धि ब्याज, अनुपात, समय, गति और दूरी, लेखाचित्र, औसत, प्रतिशत, सांख्यिकी बजट बनाना, क्षेत्रफल एवं आयतन, समुच्चय सिद्धान्त आदि अनेक उप-विषय हैं जिनका ज्ञान आज के जीवन में आवश्यक है। प्रगति के साथ सम्भवतः भविष्य में अनेक नवीन उप-विषयों को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करना पड़े जिससे साधारण मनुष्य की नवीन आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके। पुराने पाठ्यक्रमों में सैकण्डरी स्तर पर समुच्चय सिद्धान्त, त्रिकोत्रमिति, बेलन के क्षेत्रफल एवं आयतन, कम्प्यूटर आदि उप-विषय नहीं थे किन्तु उच्च गणित एवं जीवन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर इन्हें नवीन पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया गया है। गणित में समुच्चय भाषा के उपयोग के कारण प्रगतिशील देशों ने समुच्चय सिद्धान्त को प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाना आरम्भ कर दिया है और भारत में हमें भी ऐसा करना आवश्यक है क्योंकि हमारे लिए विश्व में गणित की प्रगति के साथ ही चलना अपरिहार्य है । वर्तमान गणित की भाषा समुच्चय की भाषा है ।
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