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Vaishvik Arthvyastha aur Punjivad: kya Vaishvikaran Arthvyastha Punjivad ka Paryay hai?

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3 3.पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के पक्ष में तर्क (Arguments in favor of the capitalist economy):

1.वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था और पूंजीवादः क्या वैश्वीकरण पूंजीवाद का पर्याय है? (Vaishvik Arthvyastha aur Punjivad: kya Vaishvikaran Arthvyastha Punjivad ka Paryay hai?):

  • वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था क्या है? पूँजीवाद क्या है? वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था में पूंजीवाद के क्या फायदे और नुकसान क्या हैं? इसे जानने के लिए पढ़िए वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था और पूंजीवाद (Vaishvik Arthvyastha aur Punjivad) के बारे में सम्पूर्ण डिटेल।
  • Also Available in Hindi:How Can India Prosper in 21st Century?

2.पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का विश्लेषण (Analysis of the capitalist economy):

  • वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था पूँजीवाद का पर्याय है।आज विश्व की अर्थव्यवस्था पर पूँजीवादी छाया स्पष्ट दिखाई देती है।अर्थव्यवस्था के प्रत्येक घटक पर बड़ी मात्रा में पूँजी का विनियोजन किया जा रहा है।भूमण्डलीकृत अर्थव्यवस्था के परिप्रेक्ष्य में तो पूँजी की प्रधानता एक अपरिहार्य अंग बन गई है।पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की जब हम चर्चा करते हैं तो सहज ही ये प्रश्न उठते हैं कि ये पूँजी प्रधान अर्थव्यवस्था क्या है? यह कब से प्रचलित हुई इत्यादि।अर्थव्यवस्था के अन्तर्गत समस्त आर्थिक व सामाजिक क्रियाओं जिसमें सेवाएं भी सम्मिलित की जाती हों,का अध्ययन किया जाता है।
  • अर्थात पूँजीवाद से तात्पर्य कृषि क्षेत्र,उद्योग,व्यापार,विनिर्माण उद्योग व सेवाओं को शामिल करते हुए इनके अध्ययन,नियोजन और प्रतिफल प्राप्ति से है।इस विचारधारा का उदय ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति,द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् की परिस्थितियों और विश्व बैंक समूह की स्थापना के बाद हुआ,परन्तु अर्थव्यवस्था के पूँजीकृत स्वरूप की देन पश्चिमी और विकसित राष्ट्र ही हैं।इसका प्रमुख कारण यहाँ पूँजी की आवश्यकता से अधिक उपलब्धता,शिक्षा तथा वैज्ञानिक खोज है।
    बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भूमण्डलीकृत अर्थव्यवस्था का सबसे सशक्त उदाहरण हैं।अर्थव्यवस्था के औद्योगिक क्षेत्र में विशाल मात्रा में पूँजी लगाकर बड़े-बड़े उद्योगों की स्थापना की जाती है।इनमें विशाल पूँजी का कारण इनके बाह्य कारण से नहीं बल्कि इसके साथ अत्याधुनिक मशीनों,उपकरणों तथा नवीनतम तकनीक के उपयोग के कारण इनमें भारी पूँजी की आवश्यकता होती है,परन्तु आज दुनिया के लगभग सभी राष्ट्र औद्योगिक उपक्रमों के महत्त्व को समझ रहे हैं और इनको स्थापित कर रहे है।
  • इनकी प्रतिस्थापना से अर्थव्यवस्था को दोहरा लाभ होता है।एक और औद्योगिक क्षेत्र से कम लागत पर गुणवत्ता सुधार के साथ गुणात्मक उत्पादन की प्राप्ति होती है दूसरी ओर इनमें हजारों बेकार और बेरोजगार हाथों को काम मिलता है अर्थात् बेरोजगारी की समस्या के उन्मूलन में सहायता मिलती है,क्योंकि बेरोजगारों की अधिक संख्या अर्थव्यवस्था की असफलता को ही उजागर नहीं करती,बल्कि प्रति व्यक्ति आय भी न्यूनतम हो जाती है जिसका आकलन अर्थव्यवस्था के अध्ययन से किया जाता है।अतः एक स्वस्थ और मानवोपयोगी अर्थव्यवस्था में अधिक-से-अधिक रोजगार की प्राप्ति के साथ अधिकतम औद्योगिक उत्पादन का होना आवश्यक है।इसके लिए पूँजी प्रधान इकाइयाँ ही सर्वश्रेष्ठ विकल्प है।

3.पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के पक्ष में तर्क (Arguments in favor of the capitalist economy):

  • अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का भी विशेष योगदान रहता है।पिछडे और अल्पविकसित राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था पूर्णरूपेण कृषि क्षेत्र पर आधारित है।आँकड़ों के अनुसार इन राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था में अस्सी प्रतिशत के लगभग योगदान कृषि क्षेत्र का ही होता है।ऐसे राष्ट्रों में इस क्षेत्र में विशाल पूँजी के विनियोजन की आवश्यकता है।विश्व के बहुसंख्यक राष्ट्र कृषि क्षेत्र में बड़ी मात्रा में पूँजी का विनियोग कर रहे हैं।कृषि क्षेत्र में विशाल पूँजी की आवश्यकता नवीन कृषि उपकरणों और औजारों,रासायनिक खादों और नये तरीके से खेती करने के लिए होती है।
  • कृषि के लिए जल सबसे आवश्यक है अर्थात् सिंचाई सुविधाएं भी आधुनिक युग में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।आज सिंचाई सुविधाओं के लिए बड़ी-बड़ी नहरों,बाँधों का निर्माण किया गया है।सिंचाई के लिए बहुउद्देशीय योजनाएं चल रही हैं जो कृषि हेतु जल की पूर्ति के साथ-साथ जल विद्युत तथा कृषि के सहायक उद्योग जैसे मत्स्य पालन आदि उद्योगों का विकास भी होता है।इससे भी अतिरिक्त रोजगार का सृजन होता है। प्रयोगशालाओं में नए-नए संकर किस्म,रासायनिक खाद व बीज आदि के लिए शोध कार्य जारी है।इन सबके कुशल उपयोग से कृषि उपज अपेक्षा से अधिक प्राप्त होती है, परन्तु इन सबके उपयोग हेतु पूँजी की अपरिहार्यता स्वतः प्रतीत होती है जो राष्ट्र कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं वहाँ उत्पादन वस्तुतः अनुमान से कहीं अधिक अर्जित हो रहा है।
  • अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में भी पूँजीवाद का वर्चस्व है।पर्यटन से भी अर्थव्यवस्था को बड़ी मात्रा में धन की प्राप्ति होती है।इसमें उल्लेखनीय है कि विदेशी बहुमूल्य मुद्रा का भी अर्जन होता है।पर्यटन के क्षेत्र में भी बड़ा पूँजी निवेश हो रहा है।पर्यटन स्थलों पर भव्य होटलों,धर्मशालाओं,संचार,परिवहन सुविधाओं का विस्तार हो रहा है।आज सभी राष्ट्र पर्यटन के क्षेत्र को बढ़ावा दे रहे हैं,क्योंकि इसमें पूँजी व्यय करके पर्याप्त मात्रा में पूँजी निवेश से अधिक मुद्रा कमायी जा सकती है।
  • वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था से तात्पर्य दुनिया के समस्त राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के योग से है अर्थात् वैश्विक अर्थव्यवस्था किसी राष्ट्र विशेष से सम्बद्ध नहीं है अपितु वैश्विक अर्थव्यवस्था न्यूनाधिक रूप से दुनिया के किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था से प्रभावित होती है।यद्यपि समग्र राष्ट्रों का प्रभाव इस पर पड़ता है तथापि कुछ विकसित और पूँजी प्रधान राष्ट्र का योगदान भूमण्डलीकृत अर्थव्यवस्था में लगभग 70 प्रतिशत से अधिक है और दूसरी ओर अगणित पिछडे राष्ट्र हैं जिनका योगदान तुलनात्मक दृष्टि से नगण्य है।
  • यदि कोई राष्ट्र विश्व अर्थव्यवस्था में अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज करना चाहता है तो उसे पूँजी पर आधारित अर्थव्यवस्था को ही अपनाना होगा।आज के उदारीकरण के युग में पूँजी प्राप्ति के व्यापक स्रोत के साथ उसके विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता है।आधुनिक विलासिता की वस्तुओं से लेकर रोजमर्रा की सभी आवश्यक वस्तुएं जो आज जनसामान्य के उपयोग के लिए कम लागत में मिलती है।व्यक्ति विशेष के जीवन स्तर में जो उल्लेखनीय अभिवृद्धि हो रही है।ये सब पूँजी प्रधान नीतियों और अर्थव्यवस्था में उसके उपयोग के कारण ही सम्भव है।

4.पूँजीवादी आर्यव्यवस्था के विपक्ष में तर्क (Arguments against the capitalist economy):

  • 1990 के दशक से विश्व स्तर पर द्रुत गति से प्रसारित हो रहे उदारीकरण व भूमण्डलीकरण (ग्लोबलाइजेशन) के कारण सामान्यतः यह धारणा बन रही है कि वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था (Worldwide Economy) पूँजीवाद की ओर अग्रसर है।कतिपय विशेषज्ञों ने भी वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था को पूँजीवाद का पर्याय कहा है।लेकिन यह कथन यथार्थपरक एवं सत्य नहीं है।जोकि निम्नलिखित पहलुओं के तर्कसंगत विवेचन से स्पष्ट किया जा सकता है:
  • (1)क्लासिकल अर्थशास्त्री ‘एडम स्मिथ’ जिसने अपने महत्वपूर्ण ग्रंथ ‘वेल्थ ऑफ नेशन्स’ में व्यापार के संवृद्धि के रूप में ‘लैसेज फेयर’ के सिद्धान्त का वर्णन किया है,के अनुसार राज्य अहस्तक्षेप की नीति का पालन करते हुए वणिकवाद् (Mercantilism) को बढ़ावा दे सकता है।वस्तुतः इसी रूप में पूँजीवाद (Capitalism) का उदय होता है अर्थात् पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में निजी उद्यम का महत्त्व अधिक है।
  • जबकि सम्पूर्ण विश्व में केवल व्यक्क्तिगत उद्यम प्रकार्य ही सम्पन्न नहीं होता,अपितु सार्वजनिक व सर्वहारा समाज के लिए भी नियंत्रित अर्थव्यवस्था का प्रावधान किया गया है।भारत जैसे विकासशील राष्ट्र में तो स्वतंत्रता के प्रारम्भ से ही मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy) की नीति को अपनाया गया है इस प्रावधान के अनुसार निजी एवं सार्वजनिक दोनों ही प्रकार के उद्यम प्रकार्यों को स्वीकार किया गया है।
  • यद्यपि यहाँ भी जुलाई 1991 एवं उसके बाद की घोषित अर्थव्यवस्था सम्बन्धी नीतियों से पूँजीवाद के प्रारम्भ होने का भ्रम पैदा हुआ है,परन्तु यह सच नहीं है।यथार्थ रूप में यहाँ अभी भी सार्वजनिक उपक्रमों की महत्ता घटी नहीं है।व्यक्तिगत एवं संस्थागत दोनों ही प्रकार के पूँजी निवेशकों को यहाँ के प्रावधानों के अनुसार अपने निगमों में फेरबदल करना पड़ता है।अभी भी यहाँ की बीमा कम्पनियों,रेलवे,प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पूँजीवाद की कलुषित दृष्टि का पूर्णरूपेण शिकार नहीं हुई है।ऐसे में यह सोचना कि वर्तमान अर्थव्यवस्था पूँजीवाद का पर्याय है,गलत दृष्टिकोण का ही द्योतक है।
  • (2.) विश्व स्तर पर अमरीका,इंगलैण्ड,जापान,जर्मनी,फ्रांस एवं सिंगापुर जैसे दर्जनौ राष्ट्र पूँजीवाद अर्थव्यवस्था के प्रतीक है।तो दूसरी ओर चीन,उत्तरी कोरिया,क्यूबा और कुछ हद तक रूस एवं उसके पूर्ववर्ती राज्य साम्यवाद के प्रतीक रहे हैं।इसके अतिरिक्त तीसरी दुनिया के वैसे विकासशील राष्ट्र भी है,जो इन दोनों के बीच संतुलित अर्थव्यवस्था को अपनाए हुए हैं।कुल मिलाकर पूरे विश्व में पूँजीवाद अर्थव्यवस्था के बलबूते पर टिकी राष्ट्रों की आबादी लगभग 35-40 प्रतिशत से अधिक नहीं है ऐसे में शेष 60-65 प्रतिशत आबादी वाले राष्ट्रों की आधारभूत अर्थव्यवस्था की संरचना को भी पूँजीवादी अर्थव्यवस्था मानना क्या असंगत नहीं होगा?
  • (3.)1 जनवरी,1995 में विश्व व्यापार संगठन (WTO) के निर्माण होने से प्रायः सभी राष्ट्र इसकी नीतियों एवं प्रावधानों से प्रभावित हुए है अथवा प्रभावित हो रहे हैं और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों (MNCs) का जाल फैला है, लेकिन इसका कतिपय तात्पर्य नहीं है कि सभी राष्ट्र पूँजीवादी राष्ट्र हो गए हैं।हाल के वर्षों में मेक्सिको (1995),दक्षिण कोरिया (1997) का आर्थिक संकट तथा इण्डोनेशिया में बढ़ रहा आर्थिक अवमूल्यन इस तथ्य को साबित करता है कि विकासशील राष्ट्र पूँजीवाद की राह पर पूर्णरूपेण नहीं चल सकते।मूलत पूँजीवाद प्रारम्भ से सम्पन्न राष्ट्रों में ही सफल रहा है।जबकि अधिकांश राष्ट्र अपनी मूलभूत व्यवस्था एवं आधारिक संरचना को ही सुदृढ नहीं कर पाए है।
  • इस प्रकार का सभी कार्य सरकार द्वारा निर्देशित राष्ट्रीय एजेंसियों के माध्यम से ही सम्भव है।अन्यथा पूँजीवाद की राह पर चल रहे बहुराष्ट्रीय निगमों (MNCs) से केवल देशी संसाधनों का दोहन हो सकता था,वास्तविक विकास नहीं।जिस प्रकार भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन सम्बन्धी यह महत्त्वपूर्ण तथ्य कि भारतीय जागरण अग्रेजों के शिक्षा प्रसार की देन था,आंशिक सत्य हो सकता है,पूर्णतः नहीं।उसी प्रकार विश्वव्यापी अर्थव्यवस्था की नव्यानव्य गतिविधियाँ (Innovational Activities) भी पूँजीवाद की आंशिक देन हो सकती है,पूर्णरूपेण नहीं।अतएव विश्वव्यापी अर्थव्यवस्था में जागृति आई है।वह सभी देशों में शिक्षा,वैज्ञानिक विकास एवं बुद्धिवाद (Rationalism) के कारण हुई है,जोकि एकमात्र पूँजीवाद का पर्याय नहीं है।
  • (4.)प्रायः पूँजीवाद का पर्याय समृद्धि एवं सम्पन्नता का माना जाता है।यदि हम विश्वव्यापी अर्थव्यवस्था को पूँजीवाद की संज्ञा देते हैं,तब तो इसका तात्पर्य होना चाहिए कि विश्व में कहीं भी निर्धनता,कुपोषण,अशिक्षा आदि का नामोनिशान नहीं हो,जबकि उक्त सभी समस्याएं विश्व में गम्भीरता से घटने के बजाए बढ़ती ही जा रही है। यह विरोधाभास (Paradox) स्वयंमेव इस धारणा का खण्डन करती है कि वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था पूँजीवाद का पर्याय है।

5.पूँजीवादी अर्थव्यवस्थ का निष्कर्ष (Conclusion regarding the capitalist economy):

  • (5.) 1991 में सोवियत संघ के विघटन के पूर्व तक विश्व की आर्थिक राजनीतिक गतिविधियाँ दो ध्रुवों के रूप में रही हैं।तथाकथित इस शीतयुद्ध के रणाक्षेत्र में केवल अमरीकी नेतृत्व वाले पूँजीवादी गुट के ही सबल रूप में रह जाने के कारण ऐसा विभ्रम उत्पन्न हुआ है कि विश्वव्यापी अर्थव्यवस्था पूँजीवाद का पर्याय है,जबकि ऐसी स्थिति नहीं है।वर्तमान में क्षेत्रीय आर्थिक संगठनों ने अपने क्षेत्रीय राष्ट्रों के साथ नए गठबंधन बनाए है। जोकि बहुधा पूँजीवादी अमरीकी गुट से मतांतर भी रखते हैं।इस प्रक्रिया में भी उक्त गतिविधियाँ पूँजीवाद का पर्याय हों,ऐसा सम्भव नहीं।
  • (6) संचार व्यवस्था के व्यापक प्रयोग के कारण पूरा विश्व एक ग्राम (ग्लोबल विलेज) सदृश हो गया है।इससे भी यह भ्रम उत्पन्न हुआ है कि सभी देशों की अर्थव्यवस्था पूँजीवादी हो गई है।वास्तव में अभी भी सभी राष्ट्र अपने संसाधनों के उपयोग के लिए व्यक्तिगत नियम व कानून बनाए हुए हैं।ऐसे में कुछ समृद्ध राष्ट्रों द्वारा अविकसित राष्ट्रों का आर्थिक शोषण अवश्य हुआ है।लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं समझना चाहिए कि तथाकथित शोषित राष्ट्र पूँजीवादी राष्ट्र की श्रेणी में शामिल हो गए।
  • उपर्युक्त विभिन्न पहलुओं के विश्लेषण से साबित होता है कि वैश्वीकृत अर्थ-व्यवस्था पूँजीवाद का पर्याय नहीं है,अपितु परम्परागत अर्थव्यवस्था का स्वरूप अवश्य परिवर्तित हुआ है।

Also Available in English:Capitalism

6.वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था और पूंजीवाद: क्या वैश्वीकरण पूंजीवाद का पर्याय है का सारांश (Summary of Vaishvik Arthvyavastha Aur Poonjivad: Kya  Vaishvikarn Poonjivad ka Paryay hai?):

  • (A)वैश्विक अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित छात्र-छात्राओं से आर्थिक प्रश्न (Economic questions for students studying the global economy)
    (1.) पूँजीवाद और लोकहितकारी अर्थव्यवस्था में क्या फर्क है? (What is the difference between a capitalist economy and a public-welfare-oriented economy?)
    (2.) क्या आप अर्थव्यवस्था के पूँजीवाद को श्रेष्ठ समझते है? (Do you consider the capitalist economic model to be superior?)
    (3.) पूँजीवादी और लोकहितकारी अर्थव्यवस्था में कौन सी श्रेष्ठ है? और क्यों ? (Which is superior: a capitalist economy or a public-welfare-oriented economy? And why?)
    (4.) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का क्या उद्देश्य होता है? (What is the objective of a capitalist economy?)
    (5.) क्या भारत में पूँजीवादी अर्थव्यवस्था लागू करना समीचीन है? (Is it appropriate to implement a capitalist economy in India?)
    (6.) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था समाजबादी से किस प्रकार भिन्न है? (How does a capitalist economy differ from a socialist economy?)
    (7.) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की अच्छी बातें कौनसी है? (What are the merits of a capitalist economy?)
    (8.) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के प्रबन्धकों की क्या धारणा है? (What is the perspective of those who advocate for a capitalist economy?)
    (9.) वर्तमान विश्व में कौनसी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जाना चाहिए (Which economic model should be promoted in the current global scenario?)
    (10.) क्या पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के पक्ष और विपक्ष में आप कुछ तर्क दे सकते हो ? (Can you present arguments both in favor of and against a capitalist economy?)
  • (B)पूँजीवादी अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित कुछ समालोचनात्मक बिन्दु (Critical points regarding the capitalist economy)
    (1.) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का विश्लेषण (Analysis of the capitalist economy)
    (2.) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के पक्ष में तर्क (Arguments in favor of the capitalist economy)
    (3.) पूँजीवादी आर्यव्यवस्था के विपक्ष में तर्क (Arguments against the capitalist economy)
    (4.) पूँजीवादी अर्थव्यवस्थ का निष्कर्ष (Conclusion regarding the capitalist economy)
    उपर्युक्त आर्टिकल में वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था और पूंजीवादः क्या वैश्वीकरण पूंजीवाद का पर्याय है? (Vaishvik Arthvyastha aur Punjivad: kya Vaishvikaran Arthvyastha Punjivad ka Paryay hai?) के बारे में विस्तार और गहराई से बताया गया है।
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Also Available in Hindi:Reality of 2nd Generation Economic Reforms in India

7.बिजनेसमैन का नजरिया (हास्य-यंग्य) (A Businessman’s Perspective) (Humorous-Satirical):

  • कस्टूमर (बिजनेसमैन से): श्रीमन वस्तु को सस्ता देने का उपाय कीजिए।
  • बिजनेसमैन : आज विश्व अर्थव्यवस्था सरपट दौड़ रही है और इस अर्थव्यवस्था में तुम वस्तु के सस्ती होने की बात करते हो।
  • कस्टूमर : आप वस्तु को महंगा करते जाएँगे तो आम आदमी कैसे खरीद पाएगा।आम आदमी का भी तो खयाल कीजिए।
  • बिजनैसमेत : हमें आम आदमी से क्या मतलब है।उसकी फुर्सत हो तो खरीदो और नहीं तो अपना काम गरीबी,बिना साधन सुविधाओं के गुजारो।
  • कस्टूमर : श्रीमन आम आदमी का कुछ तो लिहाज कीजिए
  • बिजनेसमैनः देखो आज विश्व अर्थव्यवस्था पूंजीवाद का पर्याय होती जा रही है और गरीब और आम आदमी के बारे में सोचेंगे तो बिजनेस को बंद करना घड़ेगा।

8.वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था और पूंजीवादः क्या वैश्वीकरण पूंजीवाद का पर्याय है? (Frequently Asked Questions Related to Vaishvik Arthvyastha aur Punjivad: kya Vaishvikaran Arthvyastha Punjivad ka Paryay hai?) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.वैश्वीकरण का यथार्थ क्या है? (What is the reality of globalization?):

उत्तर:पूँजीवादी अर्थव्यवस्था ने वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास,तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दिया है।लेकिन इसके साथ समानता,शोषण और पर्यावरणीय संकट समस्याएँ भी हैं।इसलिए इसे पूर्णतः श्रेष्ठ या अस्वीकार नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न:2.वैश्वीकरण के पूंजीवाद से कैसे बचा जा सकता है? (How can the capitalism of globalization be avoided?):

उत्तर:संतुलित,मानवीय और समावेशी माॅडल जिसमें विकास के साथ सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण भी हो।

प्रश्न:3.वैश्वीकरण को पूँजीवाद का पर्याय क्यों कहा जाता है? (Why is globalization synonymous with capitalism?):

उत्तर:क्योंकि आज हर देश बिना सोचे-समझे पूँजीवाद को अपनाता जा रहा है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था और पूंजीवादः क्या वैश्वीकरण पूंजीवाद का पर्याय है? (Vaishvik Arthvyastha aur Punjivad: kya Vaishvikaran Arthvyastha Punjivad ka Paryay hai?) की प्राइमरी टर्म्स के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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