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Talent Search Test in Mathematics Olympiad

 Talent Search Test in Mathematics Olympiad

1.टैंलेट सर्च टेस्ट इन मैथमेटिक्स ओलंपियाड का परिचय (Introduction to Talent Search Test in Mathematics Olympiad) – 

किसी मनुष्य के अच्छे कार्यों, सेवा, परोपकार का स्मरण अक्सर मृत्यु के बाद किया जाता है। हमें उसके जीवित रहने की अवस्था में उसके अच्छे कार्यों का अनुभव नहीं होता है।कोई मनुष्य जब अच्छा कार्य करता है तो बिना किसी हवाबाजी या प्रचार-प्रसार के करता रहता है जिससे लोगों का ध्यान उसकी तरफ नहीं जाता है। हमारा ध्यान तब जाता है जब वह नहीं रहता है तथा उसकी कमी हमें खटकती है।
यहाँ तक कि उसके अच्छे कार्यों का उसके जीवित रहने पर हम उसका विरोध भी करते हैं। लेकिन मरने के बाद जब उसका महत्त्व का पता चलता है तो हम उसके पुण्य स्मरण में शिक्षा संस्थान, चिकित्सालय, धर्मशालाएं इत्यादि का निर्माण करवाते हैं या उनके नाम पर अवार्ड की घोषणा करते हैं।
बहुत से लोग तो ऐसे नेक इन्सान को जानते नहीं है परन्तु मरने के बाद ही जानते हैं । नीति में कहा है कि –
बहुधा मरे हुए मनुष्य के गुण अधिक फैलते हैं और खिलते हैं जैसे अगर के जले हुए टुकड़े की सुगन्ध बहुत फैलती है।
बिहार मैथेमेटिक्स सोसाइटी ने श्री वशिष्ठ नारायण सिंह की स्मृति में जीनियस आॅफ जीनियस इन मैथेमेटिक्स अवार्ड बच्चों को देगा। श्री वशिष्ठ नारायण सिंह महान् गणितज्ञ थे तो स्वाभाविक है कि उनकी स्मृति में कोई अवार्ड बच्चों को दिया जाता । हो सकता है कि बिहार मैथेमेटिक्स सोसाइटी की तरह उनकी स्मृति में इसी प्रकार कोई ओर संस्था या सरकार अवार्ड की घोषणा कर दे ।
हमारा विचार यह है कि भारत में महान् प्रतिभाओं को जीवित अवस्था में उनकी ठीक से देखभाल तथा ईलाज की व्यवस्था नहीं की जाती है और मृत्योपरांत उनके स्मरण में कोई न कोई अवार्ड की घोषणा कर दी जाती है। हम मृत्योपरांत अवार्ड का विरोध नहीं कर रहे हैं। हम इस बात की ओर ध्यान दिलाना चाहते हैं कि इन अतिप्रतिभाशाली प्रतिभाओं को उचित चिकित्सा सुविधा समय पर उपलब्ध करायी जाए तो ये प्रतिभाएं भारत के हित में कितना महान् कार्य खड़ा कर सकती है इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। आज कोई भी नेता यदि बीमार हो जाता है तो उनकी तत्काल देश और विदेश में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाती है वहीं दूसरी ओर श्री वशिष्ठ नारायण सिंह 44 वर्ष तक बीमारी से जूझते रहे लेकिन केवल खानापूर्ति के लिए उनको चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी गई। यदि उनको उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाती तो वे न केवल ठीक हो जाते बल्कि देश के लिए उनकी सेवाओं से लाभ उठाया जा सकता था। इसी प्रकार श्री निवास रामानुज का अल्पायु अर्थात् 30-31 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया था। भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है परन्तु उनकी उचित देखभाल व समय पर उचित सुविधा मुहैया नहीं कराने के कारण हमें व देश को इसका नुकसान उठाना पड़ता है। यह कैसा विरोधाभास है कि ऐसी प्रतिभाएं सुविधाओं के अभाव में जीवन से संघर्ष कर रही होती है परन्तु मरने के बाद उनको सम्मानित किया जाता है, उनकी याद में अवार्ड घोषित किए जाते हैं। विश्व स्तर पर यदि भारत को अपनी पहचान बनानी है तो हमें प्रतिभाओं को उचित सुविधाएँ उपलब्ध करानी होगी और सम्मानित करना होगा। उनके कष्टों और कठिनाइयों में सक्षम लोगों व सरकार को उचित कदम उठाने होंगे और उनके कष्टों में साथ खड़ा होना होगा। ऐसा करके हम उन पर कोई एहसान नहीं कर रहे हैं बल्कि उन प्रतिभाओं का समाज और देश पर ऋण है, इसलिए केवल हम अपना कर्त्तव्य पूरा कर रहे हैं। वरना उनके ऋण को तो किसी भी कीमत पर चुकाया ही नहीं जा सकता है। आगे किसी भी प्रतिभा के साथ ऐसा नहीं हो इस प्रकार की व्यवस्था होनी चाहिए तभी सच्चे अर्थों में श्री वशिष्ठ नारायण सिंह जैसी प्रतिभाओं के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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2.भारत के महान् गणितज्ञ श्री वशिष्ठ नारायण सिंह (Great Mathematician Shri vashishtha Narayan Singh) – 

Talent Search Test in Mathematics Olympiad
Talent Search Test in Mathematics Olympiad
भारत के स्टीफन हॉकिन्स जाने वाले महान गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह अस्पताल परिसर के बाहर स्ट्रेचर पर आज ठीक वैसे ही पड़े थे जैसे बिहार के छपरा में डोरीगंज में वर्षो पहले वो कूड़ा के ढ़ेर पर पड़े मिले थे।

आज से छब्बीस साल पहले जब इनकी पहचान हुई थी तो पटना से दिल्ली तक के अखबारों में इनकी खबरें सुर्खियों में थीं। उन दिनों पटना नवभारत टाईम्स में गुंजन सिन्हा जी हमसे नियमित व्यंग्य लेख लिखवा रहे थे। एक कांठी बाबू कैरेक्टर बनाया था हमने जो हर साप्ताह किसी ना किसी से रू-बरू होते और उनकी बातें कहते। इन्हीं दिनों वशिष्ठ नारायण जी के मिलने की सूचना मिली और देश-दुनिया के अखबारों में इनकी खबरें चलने लगीं। कांठी बाबू  उस सप्ताह वशिष्ठ बाबू की चर्चा मोहल्ले के एक नेताजी से कर रहे थे। सवाल कांठी बाबू का था और जवाब नेताजी का वशिष्ठ नारायण जी के बारे में।
अब, आज सुबह जो हाल देखा-पीएमसीएच कैम्पस के बाहर स्ट्रेचर पर वशिष्ठ बाबू की डेड बॉडी पड़ी है उनके भाई इधर-उधर एम्बुलेंस के लिए भटक रहे  आग्रह कर रहे लेकिन अस्पताल प्रशासन एक एम्बुलेंस देने में सक्षम नहीं। कुछ लोगों को कॉल से सूचना दी, सोशल मीडिया पर चलने लगा। न्यूज चैनल भी चलने लगा फिर लगभग दो घंटे बाद एम्बुलेंस मिला और अभी बारह बजे इनके पार्थिव शरीर के पास अचानक इक्के-दुक्के नेता से लेकर जिला प्रशासन फोन कान में लगाए इधर से उधर अपनी रफ्तार में हैं। मीडिया है और मीडिया के कैमरे के सामने कुर्सी-फुल माला के लिए फोन पर बोलते यही लोग। अब मुख्यमंत्री भी आने वाले हैं, फुलों का गोल गुलदस्ता भी
अभी-अभी आ गया है दो दल के दो नेता में यहां आने का श्रेय पहले लेने में मारापीटी की नौबत भी सबके सामने आ चुकी है। सीएम आनेवाले हैं तीन तो आज बजिए जाएगा पत्रकार भी एक दुसरे के कान में फुसफुसा रहे। सत्ताधरीदल का एक पायजामा-कुरता नेता जैसे कैमरा गाड़ी के अंदर की तरफ होता है, वशिष्ठ बाबु अमर रहें चिल्लाना शुरू कर देता है।आज तीन घंटे का ये सारा ड्रामा देख कर मुझे वही छब्बीस साल पुराने अपने लेख वाले कांठी बाबू याद आए। हू-बहू वही व्यवस्था, वही हाल और सरकार का वही रवैया। उस वक्त के नेताजी का कांठी बाबू को जवाब और आज हमारे सुशासन सरकार की उपेक्षा वाली वही कहानी।कांठी बाबू की वो कहानी-नेताजी का वशिष्ठ यहां पोस्ट कर रहा हूं।
पहली बार वशिष्ठ जी से मिला था फरवरी दो हजार तेरह में। आरा से संजय साश्वत फोन किए थे उन्होंने कहा था कि वशिष्ठ बाबू याद कर रहे हैं । आज के अखबार में छपे कार्टून के बारे में वे पूछे रहे हैं- ई के बनावेला? दूसरे ही दिन यवनिका के उस कार्यक्रम में हम आरा पहुंचे जिस मंच पर उनके साथ हमें भी बैठने का अवसर मिला था और अपनी जो किताब कार्टून की दी वो उस दिन के पूरे कार्यक्रम में एक-एक पन्ना पलटते रहे और निहारते रहे। उनके लिए कांठी बाबू का वो लेख भी लेकर गया था। फिर दूसरी बार उनके गांव बसंतपुर गया उनकी बांसुरी सुनी उनकी मां से भी खूब बातें हुईं। फिर जब-तब
आना – जाना होता रहा। उनका जन्मदिन हो या और दिन। ये सुकुन मिलता रहा कि हर बार वो पहचान लेते और उनके भाई ये देखकर मुस्कुरा रहे होते। कई लोगों से सुना कि बहुत देर तक वो किसी को बर्दाश्त नहीं करते अपने पास। गुस्सा जाते हैं ये हमने भी दो-चार बार देखा है। लेकिन अपने लिए नहीं पाया कभी ऐसा। पिछले महीने जब अस्पताल गया तो वहीं पड़े अखबार में अपना कार्टून दिखाकर बोला-पहचाने सर? उनका जवाब एक टक उसे देख और फिर मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखते हुए बोले-ई तऽ तूहीं बनावे वाला बाड़ऽ…और अच्छी सूचना ले कर लौटा था कि स्वस्थ होकर वशिष्ठ बाबू लौटे
अपने घर। अब ना वो बांसुरी की आवाज मिलेगी ना कागज के टूकड़ों पर बुदबुदाते हुए हमेशा कुछ लिखते रहने वाले वशिष्ठ बाबू। नमन है आपको।
# 2 अप्रैल 1946 : जन्म.
# 1958 : नेतरहाट की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान.
# 1963 : हायर सेकेंड्री की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान.
# 1964 : इनके लिए पटना विश्वविद्यालय का कानून बदला। सीधे ऊपर के क्लास में दाखिला. बी.एस-सी.आनर्स में सर्वोच्च स्थान.
# 8 सितंबर 1965 : बर्कले विश्वविद्यालय में आमंत्रण दाखिला.
# 1966 : नासा में.
# 1967 : कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिक्स का निदेशक.
# 1969 : द पीस आफ स्पेस थ्योरी विषयक तहलका मचा देने वाला शोध पत्र (पी.एच-डी.) दाखिल.
# बर्कले यूनिवर्सिटी ने उन्हें “जीनियसों का जीनियस” कहा.
# 1971 : भारत वापस.
# 1972-73: आइआइटी कानपुर में प्राध्यापक, टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च (ट्रांबे) तथा स्टैटिक्स इंस्टीट्यूट के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन.
# 8 जुलाई 1973 : शादी.
# जनवरी 1974 : विक्षिप्त, रांची के मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती.
# 1978: सरकारी इलाज शुरू.
# जून 1980 : सरकार द्वारा इलाज का पैसा बंद.
#1982 : डेविड अस्पताल में बंधक.
# नौ अगस्त 1989 : गढ़वारा (खंडवा) स्टेशन से लापता.
# 7 फरवरी 1993 : डोरीगंज (छपरा) में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर फेंके गए जूठन में खाना तलाशते मिले.
# तब से रुक-रुक कर होती इलाज की सरकारी/प्राइवेट नौटंकी.
# अक्टूबर 2019 : पीएमसीएच के आईसीयू में.
(ठीक होकर घर लौटे).
# 14 नवंबर 2019 : निधन.
(आज अब और कुछ नहीं। सिर्फ विनम्र श्रद्धांजलि।).
साभार- पवन टून
#ॐ
अब पछताए होत क्या, जब चिड़ियाँ चुग गई खेत?
सही समय से ईलाज व अंतिम समय में Ambulance?उपलब्ध न करा पाई सरकार।
समय निकल जाने पर पछताने से क्या लाभ।
ईश्वर ऐसे महान आत्मा को शांति प्रदान करें। ओम् शांति

3.टैलेंट सर्च टेस्ट इन मैथमेटिक्स ओलंपियाड में सनोज व सौरभ टॉपर(Sanoj and Saurabh Topper in Talent Search Test in Mathematics Olympiad) – 

Publish Date:Sat, 16 Nov 2019
पटना। बिहार मैथमेटिकल सोसाइटी ने शनिवार को 22 सितंबर को आयोजित टैलेंट सर्च टेस्ट इन मैथमेटिक्स ओलंपियाड की सूची जारी कर दी है।…
पटना। बिहार मैथमेटिकल सोसाइटी ने शनिवार को 22 सितंबर को आयोजित टैलेंट सर्च टेस्ट इन मैथमेटिक्स ओलंपियाड के सफल प्रतिभागियों की सूची जारी कर दी है। जूनियर व सीनियर वर्ग में 30-30 बच्चे शामिल हैं।
सीनियर वर्ग में प्रथम सनोज एस विजेंद्र, डीएवी पुनाईचक, द्वितीय मनोज कुमार, उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय अरवल, तृतीय उत्तम कुमार, उत्क्रमित राजकीय मध्य विद्यालय अरवल शामिल हैं। जूनियर वर्ग (कक्षा 6-7) में प्रथम स्थान पर सौरभ कुमार उत्क्रमित राजकीय मध्य विद्यालय अरवल, द्वितीय सृष्टि कुमारी उत्क्रमित मध्य विद्यालय, मुबारकपुर, अरवल, तृतीय इसानआलम, डीएवी खगौल शामिल हैं। कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आ‌र्ट्स एंड साइंस में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव के ओएसडी विनोदानंद झा ने कहा, बिहार और तमिलनाडु के बच्चे शुरू से ही गणित में अव्वल रहते हैं। इस ओलंपियाड का नियमित आयोजन राज्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा। -वशिष्ठ नारायण सिंह के नाम पर मिलेगा अवार्ड
सोसाइटी के संयोजक डॉ. विजय कुमार ने बिहार मैथमेटिकल सोसाइटी वशिष्ठ नारायण सिंह की स्मृति में जीनियस ऑफ जीनियस इन मैथमेटिक्स अवार्ड बच्चों को देगा। इससे कॉलेज के विद्यार्थियों को भी जोड़ा जाएगा। टैलेंट सर्च टेस्ट इन मैथमेट्कि्स ओलम्पियाड 2020 में वर्ग छह से 12 के लिए दिसंबर से आवेदन लिए जाऐंगे। सरकारी स्कूलों के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं
पटना साइंस कॉलेज के प्राचार्य प्रो. केसी सिन्हा ने कहा, बिहार के गावों में रहने वाले सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सफल प्रतिभागियों का साक्षात्कार प्रो. केसी सिन्हा, प्रो. डीएन शर्मा, प्रो. पीके चक्रवर्ती, मुखदेव सिंह, प्रो. शैलेंद्र कुमार सिंह ने किया। अतिथियों का स्वागत प्राचार्य प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने किया। मौके पर प्रो. अनिल कुमार, प्रो. संतोष कुमार, प्रो. राजेश शुक्ला, मिशन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समिति के उपसंयोजक डॉ. अरुण दयाल, डॉ. मंजय कश्यप, सूर्यनारायण वर्मा, राजीव कुमार शर्मा, अजय पटेल आदि उपस्थित थे।

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