Success Mantra for Students:The Power of 1% Habit
1.छात्र-छात्राओं के लिए सक्सेस मंत्र:शक्तिशाली 1% आदत (Success Mantra for Students:The Power of 1% Habit):
- कुछ छात्र-छात्राओं के लिए सक्सेस मंत्र (Success Mantra for Students) सपने ही रह जाते हैं।क्या आप अपने सपने को साकार करना चाहते हैं? सफलता पाना चाहते हैं? जानिए छात्र-छात्राओं के लिए सक्सेस मंत्र और कैसे रोजाना की छोटी आदतें आपके जीवन को बदल सकती हैं।
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2.छात्र-छात्राओं के लिए सक्सेस मंत्र:रोजाना एक प्रतिशत इंप्रूवमेंट कैसे करें? (Success Mantra for Students:Rojana 1% Improvement kaise Karen?):
- हमारी छोटी-छोटी आदतें,छोटे-छोटे बदलाव मील का पत्थर साबित होते हैं।यदि आपको बड़ी सफलता चाहिए तो शुरुआत छोटे-छोटे अच्छे बदलाव,अच्छी शुरुआत से कीजिए।जैसे आप कोई भी काम की शुरुआत करते हैं तो आलस्य आ रहा हो तो उसकी शुरुआत 2 मिनट से करिए।जैसे 2 मिनट के लिए गणित के सवाल हल कीजिए।इससे गणित के प्रति भय समाप्त होता है पढ़ने का फ्लो बनता है।
- मुझे 23 साल का अनुभव है।इस अनुभव से मैंने जाना है कि छात्र-छात्राओं के पढ़ने का फ्लों नहीं बनता है तो आलस्य सबसे बड़ा शत्रु है।कक्षा में शिक्षक पढ़ा रहे होंगे तो छात्र-छात्राएं आपस में गपशप कर रहे होते हैं।शिक्षण को वे मौज-मस्ती का जरिया मानते हैं।रिजल्ट खराब आता है तो पश्चाताप करते हैं।
- किसी काम में सफलता के लिए आत्म-अनुशासन (Self-Discipline) जरूरी है।अनुशासन तो भय,दंड आदि तरीकों से भी कायम किया जा सकता है परंतु ऐसा अनुशासन टिकाऊ नहीं होता है।छोटा नियम ही बनाएं परंतु उसको फॉलो करें।छोटे-छोटे नियमों और अनुशासन का पालन करना सहज और सरल होता है और उसको फॉलो करने से आत्मविश्वास बढ़ता है।आप एक बार छोटी शुरुआत करके देखिए तो सही।बड़े बदलाव,बड़े नियमों का पालन न कर पाने पर हिम्मत टूटती है,आत्मविश्वास कमजोर होता है।फिर दोबारा किसी भी नियम का पालन करने का मन नहीं करता है।
- मैंने देखा है कि जो बच्चे फिजिकल एक्सरसाइज योगासन,ध्यान वगैरह करने वाले एक्टिव,चुस्त-दुरुस्त रहते हैं और उनकी याददाश्त बेहतर होती है।मैं स्वयं रोजाना सुबह जल्दी उठकर योगासन-प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करता हूं।योगासन-प्राणायाम और ध्यान की प्रेक्टिस करने का मुझे 30 साल का अनुभव है।आज भी मैं फिट रहता हूं,याददाश्त अच्छी है।लेकिन ये सब एक दिन का कमाल नहीं है।इसके पीछे 30 साल का अनुभव है।यह अनुशासन कायम है तो शुरू में छोटे-छोटे अनुशासन के नियमों की बदौलत।आत्मानुशासन में बहुत बड़ी ताकत होती है।
- प्रेरणा का उतना महत्त्व नहीं पड़ता जितना आत्मानुशासन का।प्रेरणा से आप थोड़ी देर के लिए कोई काम कर लोगे क्योंकि प्रेरणा हमें उत्साहित करती है।परंतु फिर जोश ठंडा पड़ जाता है और प्रेरणा धरी की धरी रह जाती है।लेकिन अनुशासन और निरंतरता (consistency) में वह ताकत होती है कि जो आप चाहते हैं वही करने में सक्षम है।निरंतरता (consistency) का अर्थ होता है किसी भी काम को बिना रुके रोजाना करना और यही आदत और अनुशासन आपको सफलता तक पहुंचा देता है।
छात्र-छात्राएँ परीक्षा खत्म होते ही सुस्ताने लगते हैं।परंतु अगले वर्ष के लिए नियम-अनुशासन,जो परीक्षा की वजह से,अपनी आदतों की वजह से शुरू नहीं कर पा रहे थे,अब शुरू कर सकते हैं।जैसे सुबह जल्दी उठने की आदत नहीं है और परीक्षा के निकट जल्दी उठने की आदत नहीं बना सकते थे,अब उनकी शुरुआत करें।अपने जीवन में अनुशासन (Discipline) और निरंतरता (Consistency) को अपनाकर देखिए,कितना जबरदस्त बदलाव आएगा।
3.छात्र-छात्राओं के लिए सक्सेस मंत्र क्या है? (Success Mantra for Students Kya hai?):
- कोई भी बड़ी सफलता एक दिन में नहीं मिलती,बल्कि रोजाना की मेहनत से मिलती है।एक-एक दिन,एक-एक घंटे,एक-एक मिनट,एक-एक क्षण जब आप कड़ी मेहनत करते हैं तो सफलता का दर्शन होता है।कई सालों की तपस्या से सफलता मिलती है।
- अब यह समय ऐसा है जिसमें आप कोई पांच अच्छी आदतें डालकर उनकी शुरुआत कर सकते हैं।जैसे सुबह जल्दी उठने की आदत,रात को समय पर सोना,योगासन,प्राणायाम,ध्यान की प्रैक्टिस करना आदि।यदि पांच नहीं तो दो या एक आदत,अनुशासन का पालन करके ही देखिए,आपके जीवन में कितना बदलाव आ जाएगा।
एक साल में ही एक अच्छी आदत का पालन करने के फायदे नजर आने लगेंगे।हर विद्यार्थी का सपना होता है कि वह भी टॉपर बनें,लेकिन सही “छात्रों के लिए सक्सेस मंत्र” (Success Mantra for Students) ना पता होने की वजह से वो पीछे रह जाते हैं।एक छात्र-छात्रा आत्मानुशासन निम्न नियमों का पालन करने के लिए लागू कर सकता है:
(1.) सुबह जल्दी उठकर अध्ययन करें (Early Morning Routine):
- सुबह जल्दी उठकर अध्ययन करना चालू करें।अध्ययन किस तरह से करना है,इसकी रणनीति के लिए हमने लेख लिखा है।उसे पढ़कर जान सकते हैं।परंपरागत तरीके से नहीं बल्कि वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करें।सुबह जल्दी उठने का फायदा तभी है जबकि आप उस समय को उत्पादक कार्य (अध्ययन वगैरह) में व्यतीत करते हैं।
(2.)स्वयं के लेख का महत्त्व (Handwritten ka Mahatva):
- लेख लिखने से टॉपिक पर मजबूत पकड़ होती है।छोटी-छोटी बातें स्पष्ट होती हैं।समझकर स्वयं के नोट्स बनाने से स्वयं के लिखने की कार्यशैली विकसित होती है।परीक्षक सीरीज,किताबी या पासबुक्स की भाषा शैली से आकर्षित नहीं होता और न इनसे अच्छे अंक प्राप्त होते हैं क्योंकि इनकी भाषा अधिकांश बच्चों की होती है।अच्छे मार्क्स वे ही छात्र-छात्राएं प्राप्त करते हैं जो स्वंय की शैली में लिखते हैं।ये हो सकता है कि शुरू में आपको नोट्स बनाने में दिक्कत हो परंतु घबराएँ नहीं धीरे-धीरे अभ्यास से,छोटी-छोटी शुरुआत से आप लेख तथा नोट्स बनाने में सिद्धहस्त हो सकेंगे।
(3.)साप्ताहिक रिवीजन प्लान (Weekly Revision Plan):
- जो भी पढ़ा है,याद किया है उसका साप्ताहिक रिवीजन प्लान अवश्य बनाएं।आप आगे से आगे बढ़ते जाएंगे और पीछे पढ़े हुए,याद किए हुए का रिवीजन नहीं करेंगे तो दिमाग से पढ़ा हुआ बिल्कुल गायब हो जाएगा।सप्ताह में रविवार या किसी अन्य दिन की छुट्टी तो मिलती ही है।इस छुट्टी का उपयोग आप पिछले छः दिन के पढ़े हुए रिवीजन करने और बिना पढ़े हुए चैप्टर को तैयार करने में कर सकते हैं।
- जिन छात्र-छात्राओं को 100 में से 100 अंक प्राप्त होते हैं,वे उपर्युक्त नियमों का पालन करते हैं,कड़ी मेहनत करते हैं,घंटों अभ्यास करते हैं बिना थके,बिना रूके।हमें उनकी तपस्या और साधना दिखाई नहीं देती है।वे कैसे फर्श से अर्श पर पहुंच जाते हैं।हमारा एक ही रटा-रटाया उत्तर होता है कि उनमें अधिक दिमाग होता है।भगवान ने उनको छप्पर फाड़कर दिमाग दिया है और हमें दिमाग देने में कंजूसी की है।भगवान सबके साथ न्याय नहीं करता है।जबकि बात ऐसी नहीं है,भगवान सभी को दिमाग देकर भेजता है,जो दिमाग को एक्टिव करता है,सुप्त शक्तियों को जगा लेता है वह फायदा उठाता है।
4.निरंतरता (Consistency):
- जैसे आप रोजाना खेलते हैं,रोजाना भोजन करते हैं,रोजाना शौच-स्नान आदि करते हैं या रोजाना योगासन करते हैं,उसी प्रकार ही आपको रोजाना पढ़ाई करनी चाहिए।आप उपर्युक्त कामों को करने में किसी भी तरह की बहानेबाजी नहीं करते हैं।
लेकिन होता अक्सर यह है कि भोजन,स्नानादि के लिए तो हमें समय मिल जाता है परंतु पढ़ाई के लिए हमारे पास बिल्कुल समय नहीं है या समय की कमी खलती है।आपने खरगोश व कछुए की दौड़ की कहानी बहुतों बार पढ़ी होगी।कछुआ निरंतर चलते रहने से खरगोश से आगे निकल गया और खरगोश तेजी से दौड़ने वाला पिछड़ गया। - कुछ छात्र-छात्राओं की आदत होती है कि पूरे साल कुछ नहीं पढ़ेंगे और परीक्षा के निकट रात-रात भर जागकर पढ़ने का अभ्यास करेंगे।परंतु जो छात्र-छात्रा सत्रारम्भ से थोड़ा-थोड़ा परंतु निरंतर अध्ययन करता है वह टॉपिक्स पर मजबूत पकड़ बना लेता है और सफल भी होता है।
- आप क्वॉन्टिटी के बजाय क्वालिटी और निरंतरता पर ध्यान देंगे तो ही बात बनेगी।एक प्रतिशत इंप्रूवमेंट करते-करते ही सौ प्रतिशत तक पहुंच सकेंगे।इस 1% इंप्रूवमेंट में बहुत बड़ी ताकत है।ये एटॉमिक हैबिट (atomic habit) है जो एक बड़ा लक्ष्य को प्राप्त करने,बड़ी सफलता प्राप्त करने,बड़ा बदलाव करने में सक्षम है।
- हमारे अंदर आलस्य योगासन से दूर होता है।यानी बड़ी सफलता के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से फिट होना जरूरी है।पढ़ने के दौरान बीच-बीच में ब्रेक दें।ये आदतें,ये बदलाव आपको टॉप पर पहुंचाएंगी।यानी मुख्य आइडिया यह है कि आप रोजाना अपने आप को थोड़ा बेहतर बनाएं और आगे बढ़ते रहें।एक-एक कदम से ही मंजिल तय होती है।
5.आत्मानुशासन ओवर प्रेरणा (Self-discipline over Motivation):
- सेल्फ डिसिप्लिन और आत्मानुशासन और प्रेरणा में कौन शक्तिशाली है? प्रेरणा तो आती जाती रहती है।किसी भी अच्छी पुस्तक को पढ़ने या किसी सज्जन और श्रेष्ठ व्यक्ति के संपर्क से प्रेरणा मिलती है।परंतु आत्मानुशासन तो शब्दभेदी बाण की तरह है जो निशाने पर लगता ही है।आत्मानुशासन के पीछे आत्मिक शक्ति होती है और वह हमें वांछित परिणाम दिलाता है।यदि छोटे-छोटे नियमों का पालन करने में आप असफल रहते हैं तो बार-बार अभ्यास करें।अपनी आत्मिक शक्ति को पहचानने और किसी नियम का पालन करने के लिए उस शक्ति को लगा दें।
- कई बार हम प्रेरित होकर जोर-शोर से काम तो प्रारंभ कर देते हैं लेकिन ज्योंही प्रेरणा का प्रभाव समाप्त हो जाता है तो जिंदगी फिर उसी पुराने ढर्रे पर चल पड़ती है।
6.लक्ष्य सेट करें (Goal Setting):
- हम शुरू में अपनी क्षमता,योग्यता और रुचि को जाने बिना ही लक्ष्य तय कर कर लेते हैं।यदि आपको कोई बड़ा लक्ष्य प्राप्त करना है तो उस लक्ष्य को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटे।छोटे-छोटे टार्गेट को प्राप्त करें और आगे बढ़ते जाएं।छोटे-छोटे टार्गेट प्राप्त करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और हमारे अंदर बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने की काबिलियत पैदा हो जाती है।पढ़ाई के दौरान बीच में ब्रेक अवश्य लें।ब्रेक लेने से मस्तिष्क की ग्रहणशीलता यथावत बनी रहती है।ब्रेक न लेने से पढ़ा हुआ ओवरलेप हो जाता है,क्या पढ़ा है पता ही नहीं चलता है।क्वांटिटी के बजाय क्वालिटी पर फोकस करें।हमेशा अपने लक्ष्य को सामने रखें।
7.सत्यम कोचिंग सेंटर की एक्सपर्ट सलाह (Satam Coaching Centre ki Expert Advice):
- आपको जो भी हम सुझाव या सलाह देते हैं,आपके लिए लेख लिखते हैं इसके पीछे हमारे कोचिंग का 23 साल का अनुभव है।यों हमने अपने जीवन को शुरुआत से ही नियम,संयम और अनुशासन में ढाला है और इसीलिए बिना थके,विश्राम किए हुए,अनवरत अध्ययन और अध्यापन का कार्य करते रहते हैं।जो भी सुझाव हम देते हैं या लेख लिखते हैं वे कोरी हवाई कल्पनाएँ नहीं है बल्कि कल्पनाओं को साकार कैसे करें,इसका तजुर्बा है।यथार्थवादी और पालन की जा सकने वाली बातें आपके लिए लिखते हैं।इनका पालन करने से हमें जो फायदा मिला है,मिल रहा है और आगे भी मिलता रहेगा वही बातें आपके साथ शेयर करते हैं।
- इन बातों के पीछे हमारा अनुभव,हमारी कड़ी मेहनत और कुशलता छिपी हुई है।हमने खुद ने इन नियमों को फॉलो किया है और कर रहे हैं और हमारे कहने पर जिन छात्र-छात्राओं ने इनका पालन किया उनको भी फायदा मिला है।ये एक-एक बात हमारे जीवन से होकर गुजरी हुई है इसीलिए इतनी सच्ची,सही,अच्छी और आपके हित की बात बता रहे हैं।ये बातें बताना हमारा फर्ज है,धर्म है लेकिन इनका पालन करना आप पर ही निर्भर है।यदि आप पालन करेंगे तो इसका फायदा आपको ही मिलने वाला है,कोई दूसरा नहीं चुरा कर ले जा सकता है।एक बार आप अपने सच्चे दिल से इन बातों का पालन करने का मन बना कर देखें।थोड़े समय में ही उनके परिणाम सामने आना प्रारंभ हो जाएंगे।जब इन बातों की असली ताकत आपको मालूम पड़ जाएगी तो फिर आप खुद ही इन बातों को नहीं छोड़ना चाहेंगे।आपका जीवन अलौकिक,दिव्य और भव्य बन जाएगा।
8.छात्र-छात्राओं के लिए सक्सेस मंत्र:अंतिम शब्द (Success Mantra for Students:Antim Sha bad):
- आपको मोबाइल को दुश्मन नहीं दोस्त बनाना है।यदि मोबाइल की लत पड़ जाती है,अत्यधिक सोशल मीडिया का प्रयोग करते हैं,अनावश्यक प्रयोग करते हैं तो यह हमारा दुश्मन हो जाता है।पढ़ाई के समय इससे दूरी बनाकर रखें और पढ़ाई से सम्बन्धित काम में ही उपयोग लें तो यह हमारा दोस्त बन जाता है।
- अंत में हमें यह समझना होगा कि कोई भी “छात्र-छात्राओं के लिए सक्सेस मंत्र (Success Mantra for Students) तभी काम करता है जब आप उसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं।बड़ी कामयाबी रातोरात नहीं मिलती,बल्कि ये आपकी रोजाना के छोटे-छोटे सुधारों (1% इम्प्रूवमेंट) का नतीजा होता है।वो पढ़ाई हो या योग।
- निरन्तरता (consistency) ही वो राज है जो एक औसत छात्र को टॉपर बना देता है।सत्यम कोचिंग सेंटर (Satam coaching Centre) में हमारा हमेशा से यही मकसद रहा है कि हम छात्र-छात्राओं को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देते बल्कि उनमें आत्मानुशासन और फोकस की सही राह दिखाते हैं।आज ही अपने आप से एक वादा करें कि आप सिर्फ सपने नहीं देखेंगे बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए आज से ही मेहनत शुरू करेंगे।याद रखिए आपका कल वही होगा जो आप आज करेंगे।
- Call to Action:अगर आपको यह लेख पसंद आए तो,इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और नीचे कमेंट करके बताएं कि आपका सबसे बड़ा सपना क्या है।
- उपर्युक्त आर्टिकल में छात्र-छात्राओं के लिए सक्सेस मंत्र:शक्तिशाली 1% आदत (Success Mantra for Students:The Power of 1% Habit) के बारे में बताया गया है।
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9.छात्र का सक्सेस मंत्र (हास्य-व्यंग्य) (Student’s Success Mantra) (Humour-Satire):
- शिक्षक (छात्रों से):अच्छा बच्चों बताओ सक्सेस का मंत्र क्या है?
- छात्र:दूसरों की कॉपी करो और चिपका दो।आज किसी की सफलता का असली मंत्र यही है।अपने आप को बड़ी मेहनत में झोंक देना सजा देना है और सजा देने से सफलता नहीं मिलती है।
10.छात्र-छात्राओं के लिए सक्सेस मंत्र:शक्तिशाली 1% आदत (Frequently Asked Questions Related to Success Mantra for Students:The Power of 1% Habit) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाली प्रश्न: प्रश्न:1.सबसे बड़ा सक्सेस मंत्र क्या है? (Sabse Bada Success Mantra kya hai?):
प्रश्न:1.सबसे बड़ा सक्सेस मंत्र क्या है? (Sabse Bada Success Mantra kya hai?):
उत्तर:सबसे बड़ा मंत्र है निरंतरता (consistency) किसी भी काम को बिना रुके रोजाना करना ही सक्सेस की चाबी है।
प्रश्न:2.मोटिवेशन कम होने पर क्या करें? (Motivation kam hone par kya karein?):
उत्तर:मोटिवेशन पर निर्भर ना रहे हैं बल्कि अपनी एक दिनचर्या बनाएं।दिनचर्या (routine) ही आपको तब भी काम करने पर मजबूर करेगा जब आपका मन नहीं होगा।
प्रश्न:3.पढ़ाई में फोकस कैसे बढ़ाए? (Padhai mein focus kaise badhayein?):
उत्तर:मोबाइल से दूर रहे और हर 60 मिनट की पढ़ाई के बाद 5 मिनट का ब्रेक (या एक आसन) करें।
प्रश्न:4.क्या 10-12 घंटे पढ़ना जरूरी है? (Kya 10-12 ghante padhana zaroori hai?):
उत्तर:नहीं क्वालिटी क्वांटिटी से बेहतर है।5 घंटे की केंद्रित पढ़ाई काफी है।
प्रश्न:5.सत्यम कोचिंग सेंटर स्टूडेंट की कैसे मदद करता है? (Satyam Coaching Centre Students ki kaise madad karte hai?):
उत्तर:हम सिर्फ सिलेबस नहीं बल्कि “लर्निंग हैबिट” विकसित करने पर ध्यान देते हैं।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा छात्र-छात्राओं के लिए सक्सेस मंत्र:शक्तिशाली 1% आदत (Success Mantra for Students:The Power of 1% Habit) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Lekhak Ke Baare Mein (About the Author)
**Satyam Narain Kumawat**
**Website Name:Satyam Mathematics**
*Owner:satyamcoachingcentre.in*
*Sthan:Manoharpur,Jaipur (Rajasthan)*
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***Shiksha:**B.sc.,B.Ed.,(M.sc. star Ke Mathematics Ko Padhane ka Anubhav),B.com.,M.com. Ke vishayon Ko Padhane ka Anubhav,Philosophy,Psychology,Religious,sanskriti Mein Gahri Ruchi aur Adhyayan
***Anubhav:**phichale 23 varshon se M.sc.,M.com.,Angreji aur Vigyan Vishayon Mein Shikshaka Ka Lamba Anubhav
***Visheshagyata:*Maths,Adhyatma (spiritual),Yog vishayon ka vistrit Gyan*
****In Brief:I have read about M.sc. books,psychology,philosophy,spiritual, vedic,religious,yoga,health and different many knowledgeable books.I have about 23 years teaching experience upto M.sc. ,M.com.,English and science.
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