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Professor Sonajharia Minz appointed VC

1.प्रोफेसर सोनाझरिया मिंज को वीसी नियुक्त किया का परिचय (Introduction to Professor Sonajharia Minz appointed VC)-

प्रोफेसर सोनाझरिया मिंज को वीसी नियुक्त किया (Professor Sonajharia Minz appointed VC) ,जो कि दूसरी जनजातीय महिला है जिसे कुलपति चुना गया है।
उसने इस पद तक पहुंचने के लिए कितने संघर्षो का सामना किया है,वह सब उसने बताया है।उसने बताया कि उसे गणित में अच्छे अंक प्राप्त करने के बावजूद गणित शिक्षक बार-बार जलील करते थे।उस पर इस तरह के व्यंग्य कसा जाता था कि गणित पढ़ना तुम्हारे वश की बात नहीं है।
उसके गणित शिक्षक द्वारा जलील करने से सोनाझरिया मिंज बिल्कुल हतोत्साहित नहीं हुई बल्कि उसने निश्चय किया कि वह गणित में कुछ विशेष करके गणित शिक्षक की बात को गलत सिद्ध करेगी।उसने वही किया और गणित में स्नातक (B.Sc.),परास्नातक (M.Sc.) तथा पीएचडी (PHD) करके यह साबित कर दिया कि उसमें प्रतिभा है। महिलाओं के साथ यह भेदभाव किया जाता है कि वे गणित पढ़ने जितनी काबिलियत नहीं रखती है।इस प्रकार के कटु वचनों से बहुत सी छात्राएं विषय को पढ़ना ही छोड़ देती है। लेकिन सोनाझरिया जैसी महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि गणित में वे पुरुषों से किसी भी मायने में कमतर नहीं है।
महिलाओं में भी प्रतिभा,संकल्प शक्ति,विवेक, बुद्धि की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है तो उनकी प्रतिभा को पहचानकर निखारने व उभारने की। महिलाओं के साथ भेदभाव व दोयम दर्जे का बर्ताव नहीं किया जाना चाहिए।
सोनाझरिया मिंज महिला तो थी ही साथ ही जनजातीय महिला थी। इसलिए उसे अंग्रेजी माध्यम से गणित पढ़ने के लिए अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में प्रवेश नहीं दिया गया।
अब सोनाझरिया मिंज को वीसी नियुक्त करने(Professor Sonajharia Minz appointed VC) के बाद यह प्रमाणित हो गया कि उसमें प्रतिभा की कोई कमी नहीं थी। प्रोफेसर सोनाझरिया मिंज को वीसी नियुक्त किया है (Professor Sonajharia Minz appointed VC) तो उसकी प्रतिभा के आधार पर।
समाज में सोनाझरिया मिंज जैसी ओर भी कई महिलाएं और जनजातीय महिलाएं हैं जिनमें प्रतिभा होते हुए भी अवसर उपलब्ध न कराने के कारण उनकी प्रतिभा सुप्त ही रह जाती है।उनकी प्रतिभा निखरने और उभरने से पहले ही दम तोड़ देती है।
आश्चर्य की बात है कि भारत में एक तरफ नारी को पूज्य माना जाता है वहीं दूसरी तरफ उसके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है।इस प्रकार के विरोधाभास को दूर करना होगा।तभी सच्चे मायनों में हमें नारी को पुरुषों के समान अधिकार है,यह कहने का हक होगा।
प्रोफेसर सोनाझरिया मिंज को वीसी नियुक्त किया है (Professor Sonajharia Minz appointed VC) ,तो वह अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत होगी। महिलाओं को अपना स्थान प्राप्त करने के लिए खुद को मजबूत बनाना होगा और संघर्ष करना होगा।
हम लोकतन्त्र में अवसर की समानता के ढोल नगाड़े तो खूब बजाते हैं परन्तु सोनाझरिया मिंज के उदाहरण से यह साबित नहीं होता है।
यदि महिलाओं को समान अवसर उपलब्ध कराया जाता तो ऐसी विषम स्थिति देखने को नहीं मिलती जैसे हर क्षेत्र में पुरुषों का वर्चस्व है। कोई भी क्षेत्र देख लें जैसे राजनीति, शिक्षा, खेलकूद,उद्योग धन्धे सबमें महिलाओं की संख्या को उंगलियों पर गिना जा सकता है और पुरुषों के मुकाबले उनका प्रतिशत बहुत कम है। प्रोफेसर सोनाझरिया मिंज को वीसी नियुक्त किया है ( Professor Sonajharia Minz appointed VC), उसके जीवन से हमें सबक लेना चाहिए कि अन्य महिलाओं को ऐसी स्थिति से गुजरना न पड़े।
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2.प्रोफेसर सोनाझरिया मिंज को वीसी नियुक्त किया (Professor Sonajharia Minz appointed VC)-

सोनाझारिया मिंज एक कुलपति के रूप में चुने जाने के लिए दूसरी जनजातीय महिला बन गई (Sonajharia Minz Becomes The Second Tribeswoman To Be Elected As A VC)
30 मई, 2020
प्रोफेसर सोनाझारिया मिंज को हाल ही में झारखंड के दुमका स्थित सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय (SKMU) के उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था (Professor Sonajharia Minz was recently appointed as vice-chancellor of Sido Kanhu Murmu University (SKMU), Dumka in Jharkhand)। वह कुलपति के रूप में चुने जाने वाली दूसरी जनजातीय महिला बन जाती हैं।
एक प्रकाशन के साथ एक साक्षात्कार में, पीएचडी धारक इस बारे में बात करती है कि कैसे उसे अपनी शिक्षा के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ा। वह स्कूल में अपने मैथ टीचर के दु:ख पहुंचाने वाले शब्दों को याद करती है, जिसने उसे 100 अंकों के स्कोर को यह कहते हुए खारिज कर दिया था, ‘तुमसे ना हो पायेगा (आप ऐसा नहीं कर पाएंगे)। “मैथ्स शिक्षक, जो आदिवासी नहीं था, जानता था कि यह मेरा मजबूत विषय है और मैंने तीन बार 100 प्रतिशत स्कोर किया था। फिर भी उसने मुझे स्नातक के लिए गणित की पढ़ाई नहीं करने के लिए कहा। इससे मुझे विषय का अध्ययन करने के लिए और भी अधिक निर्धारित किया गया। “वह याद करती है।
गुमला जिले के ओराओं आदिवासी भी एक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में प्रवेश नहीं ले सकते थे। उन्होंने आगे कहा, “मैं एक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में प्रवेश नहीं कर सकती थी, लेकिन मैं आदिवासी छात्रों और शिक्षकों के साथ रांची में एक हिंदी-माध्यम सेंट मार्गरेट, में अच्छा प्रदर्शन करती थी।”
गणित के उनके शौक ने उन्हें महिला क्रिश्चियन कॉलेज, चेन्नई से स्नातक करने और मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से एमएससी करने के लिए प्रेरित किया। उसने बाद में अपने क्षेत्र को स्थानांतरित कर दिया और कंप्यूटर को अपने शब्दों में, “एक नई चुनौती पर ले जाने, और जेएनयू में आने के लिए” लिया।
मिंज लूथरन बिशप एमेरिटस निर्मल मिंज की बेटी हैं, जिन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज की स्थापना की थी। उन्होंने कुरुख (ओरांव जनजाति द्वारा बोली जाने वाली) के विकास में योगदान के लिए 2016 में भाषा सम्मान जीता।
# तिरूपुर समूह को सुरक्षित रूप से धनबाद में पहुँचाना। पंडाल में बैठे बसों की जानकारी के बिना वे @cmjharkhand @DCDhanbad @danielponraj https://t.co/8M1OBiUP1G मदद मांग रहे हैं
– सोनाजहरिया मिंज (@SonajhariaM) 22 मई, 2020
हाल ही में, मिंज ने तमिलनाडु के तिरुप्पुर के टेक्सटाइल हब में फंसे 141 महिला श्रमिकों को वापस लाने में मदद की। श्रमिकों का अंतिम 23 मई को झारखंड में उनके गांवों में पहुंच गया। “श्रमिकों की यह बड़ी अनदेखी आबादी अब (घर) लौट रही है। सरकार के लिए अपने कौशल को रिकॉर्ड करने के लिए हमारे पास कुछ तंत्र होना चाहिए ताकि उन्हें अवशोषित किया जा सके और उन्हें रोजगार और सम्मान दिया जा सके। रह रहे हैं, ”मिंज ने कहा।
वह एसकेएमयू के कुलपति के रूप में तीन साल के कार्यकाल के बाद जेएनयू में लौटने का इरादा रखती है, जिसके दौरान वह वहां पेश किए गए कंप्यूटर एप्लिकेशन पाठ्यक्रमों में कुछ कक्षाओं को पढ़ाने की उम्मीद करती है।
प्रोफेसर सोनाझरिया मिंज को वीसी नियुक्त किया,के विवरण से उनके संघर्ष को समझा जा सकता है।

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