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How Delhi Government is Helping Students to Learn Maths Subject Better

A Math Problem: How Delhi Government is Helping Students to Learn this Subject Better

1.गणित विषय में असफल होने के कारण (Due to unsuccessful in maths subject)-

गणित विषय में असफल होने के कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण तो यह है कि यह विषय अन्य विषयों की तरह मात्र पढ़कर व रटने से हल नहीं किया जा सकता है। इसके लिए सतत अभ्यास व मार्गदर्शन की आवश्यकता है। दूसरा कारण है माता-पिता व अभिभावक अपने बच्चों को निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने को वरीयता देते हैं। निजी शिक्षण संस्थानों की पौध चारों ओर खड़ी हो गई है जिसमें योग्य अध्यापकों का अभाव है। अधिकांश शिक्षण संस्थानों का मुख्य उद्देश्य है कि धनार्जन करना इसलिए उनका ध्यान विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना नहीं है वरन् उनका मूल उद्देश्य है धनार्जन करना। तीसरा कारण है कि अधिकांश प्रतिभाशाली शिक्षित वर्ग सरकारी सेवाओं को वरीयता देते हैं और सरकारी सेवाओं में चयन हो जाने के बाद उन पर किसी प्रकार का प्रभावी नियंत्रण नहीं होता है। स्वयं अपनी इच्छा से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा विद्यार्थियों को उपलब्ध नहीं कराते हैं, अधिकांश शिक्षकों का यही ढर्रा है। 9 वीं कक्षा तक विद्यार्थियों को उत्तीर्ण करने का प्रावधान है, ऐसी स्थिति में जबकि बिल्कुल अवरोधक ही नहीं है तो विद्यार्थियों की यह स्थिति है कि कई विद्यार्थियों को गणित के साधारण जोड़, गुणा, भाग, बाकी ही नहीं आते हैं तथा न अंग्रेजी को पढ़ सकते हैं तो उनकी आगे क्या स्थिति होगी और भविष्य कैसा होगा इसको समझा जा सकता है। हालांकि विद्यार्थियों को उत्तीर्ण करने के पीछे जो भावना थी वह तो सही थी कि साक्षरता को बढ़ावा देना। परन्तु साक्षरता ही बढ़ाना है तो उसके अन्य कई विकल्प हैं जैसे अनौपचारिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, आंगनबाड़ी कार्यक्रम, दूरस्थ शिक्षा, पत्राचार शिक्षा आदि। परन्तु नवीं कक्षा तक सभी को उत्तीर्ण करने के कई दुष्परिणाम है कि कई विद्यार्थियों को प्रारम्भिक ज्ञान भी नहीं है। शिक्षक जब कोई जिम्मेदारी नही समझते हैं तो क्यों पढ़ाएंगे अर्थात् उनके क्या अटकी पडी है जो वे पढ़ाएंगे। कुछ शिक्षकों की बात अलग है जो अपना कार्य ईमानदारीपूर्वक निभाते हैं। राजनेताओं को अपनी राजनीति चमकाने से मतलब है उनको शिक्षा से क्या लेना देना। यदि शिक्षा व्यवस्था चौपट हो रही है , शिक्षा के परखच्चे उड़ रहे हैं, शिक्षा बँटाधार हो रही है, विद्यार्थियों का भविष्य खराब हो रहा है तो उसमें उनका क्या बिगड़ रहा है आखिर क्यों वे ऐसा सिरदर्द मोल ले, उन्होंने कौनसा शिक्षा को, शिक्षा व्यवस्था को और विद्यार्थियों के भविष्य को सुधारने का ठेका ले रखा है। जब पहले से ही ऐसी व्यवस्था चली आ रही है तो उनको कौनसा सेहरा अपने सिर पर बाँधना है। इस प्रकार शिक्षा, शिक्षा व्यवस्था व विद्यार्थियों के भविष्य का बँटाधार हो रहा है, कोई कुछ पूछने और जिम्मेदारी लेने वाला नहीं है। कोई भल मानुष इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज भी उठाता है तो नक्कारखाने में तूती की आवाज को कौन सुनता है, ऐसी आवाज को दबा दिया जाता है, नज़रअंदाज कर दिया जाता है, उसको सुना नहीं जाता है। 
तीसरा कारण है शिक्षा का क्षेत्र वे शिक्षक या अभ्यर्थी ही चुनते हैं जिनका चयन आरएएस, इंजीनियरिंग, डाॅक्टर, आईएफएस इत्यादि प्रतिष्ठित सेवाओं में नहीं होता है शिक्षा के क्षेत्र में चाहे कोई कितने ही बड़े पद पर हो प्रोफेसर, रीडर, लेक्चरार या प्रिसिंपल ही हो लेकिन उपर्युक्त सेवाओं की तुलना में उनको प्रतिष्ठा व अधिकार नहीं मिलते हैं। अर्थात् शिक्षक व्यवसाय को सामान्य अभ्यर्थी ही चुनते हैं, ऐसी स्थिति में उनसे उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की आशा कैसे की जा सकती है। चौथा कारण है शिक्षा का व्यावसायिकरण होना। शिक्षा को व्यवसाय मानकर शिक्षा प्रदान करना बुरा नहीं है यदि विद्यार्थियों के हित का पूरा ध्यान रखा जाए अर्थात् उनको गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना। जबकि वास्तविकता यह है कि अधिकांश शिक्षा संस्थान देखने में भव्य, सुन्दर भवन तथा भौतिक सुविधाएं तो मिल जाएगी ताकि अभिभावकों व विद्यार्थियों को आकर्षित किया जा सके। उनको गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की तरफ ध्यान न होकर केवल मोटी-मोटी फीस लेकर धनार्जन करना है। यानि ये शिक्षण संस्थान धनार्जन के केन्द्र बने हुए हैं। इस लूट के लिए केवल शिक्षण संस्थान ही जिम्मेदार नहीं है बल्कि हम भी कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं जो इस लूट के हिस्सेदार है तथा लूट होने दे रहे हैं और चुपचाप उनको मोटी-मोटी फीस चुका रहे हैं। अपने कर्त्तव्यों के प्रति, विद्यार्थियों के भविष्य के प्रति सजग, चौकस नहीं है। पांचवा कारण है कि विद्यार्थियों के अनुपात में गणित शिक्षकों की कमी है। एक ही कक्षा में 50 से 100 विद्यार्थीयों को ठूंस दिया जाता है जिससे विद्यार्थियों को गणित में आनेवाली व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता है। 
गणित विषय में पिछड़ने का एक कारण यह है कि शिक्षक विद्यार्थियों की गणित की प्रतिभा को निखारने में दिलचस्पी नहीं लेते हैं। वे विद्यार्थियों को परम्परागत तरीके से पढ़ाते हैं। जो शिक्षक कर्मठ, चरित्रवान होते हैं वे विद्यार्थियों में जिस प्रकार की प्रतिभा होती है उसको पहचानकर निखारते हैं। वे अध्यापन को मात्र व्यवसाय न समझकर उसे पूजा व यज्ञ कार्य समझते हैं। ऐसे शिक्षकों के विद्यार्थी शिक्षकों, माता-पिता, समाज व राष्ट्र का यश फैलाते हैं। इस प्रकार के शिक्षक कदम-कदम पर उनकों सही दिशा देते हैं जिसे वे आगे जाकर होनहार, प्रतिभावान बनते हैं। इसलिए अध्यापन व्यवसाय में ऐसे शिक्षकों का ही चयन करना चाहिए जिनकी अध्यापन में रुचि हो तथा अभ्यर्थियों को भी चाहिए कि अध्यापन व्यवसाय का तभी चुनाव करें जबकि अध्यापन में उनकी रुचि हो।
गणित विषय में विद्यार्थियों के असफल होने व पिछड़ने के कारणों का पता लगाकर उसे दूर करना चाहिए। हमारे विचार से गणित व विज्ञान में असफल होने व पिछड़ने कारण हो सकते – गणित के लिए समर्पित व योग्य अध्यापकों का अभाव ,विद्यार्थियों का गणित में रूझान न होना, तकनीकी व कम्प्यूटर के विकास के कारण प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का रुझान कम्प्यूटर साइंस की ओर होना,विद्यार्थियों की गणित सम्बन्धी समस्याओं का हल न हो पाना, शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों की गणित सम्बन्धी समस्याओं को हल न कर पाना या हल करने में दिलचस्पी न लेना। अभिभावकों, माता-पिता व शिक्षकों का गणित सम्बन्धी प्रतिभा के प्रति सचेत न रहना तथा उनकी प्रतिभा व योग्यता को निखारने में सहयोग न देना। इससे विद्यार्थियों में सकारात्मकता के बजाए नकारात्मकता का प्रवेश हो जाता है और विद्यार्थी गणित व विज्ञान में असफल हो जाता है व पिछड़ता जाता है। यदि इन कारणों को दूर कर दिया जाए तो कोई कारण नहीं है कि गणित में विद्यार्थी पिछड़ते जाएगें।

2.गणित में विद्यार्थियों को सफल करने के टिप्स (Tips to make students successful in mathematics)-

सकारात्मकता गणित व विज्ञान जैसे विषयों के लिए आवश्यक है। गणित व विज्ञान विषय अपेक्षाकृत अन्य विषयों की तुलना में कठिन लगते हैं। इन विषयों को पढ़ाने वाले योग्य शिक्षकों का अभाव है। सबसे मूल कारण है कि नैतिक व आध्यात्मिक विषयों से बिल्कुल कट जाते हैं तो जीवन में नकारात्मकता का प्रवेश हो जाता है। आध्यात्मिकता से हमारे जीवन में सकारात्मकता आती है। सकारात्मकता का अर्थ है कि हमेशा किसी भी घटना के अच्छे पहलू को देखना और ग्रहण करना व उसका अनुसरण करना तथा नकारात्मक परिणाम के लिए अपने आपको तैयार रखना। 

मनुष्य में दोनों प्रकार की बातें अर्थात् अच्छाई व बुराई पाई जाती है। हम जिस पक्ष को विकसित करना चाहे उसी पक्ष को विकसित कर सकते हैं। विद्यार्थियों के सामने गणित में कठिनाइयां  और परेशानियां आती है तो विद्यार्थी उसका समाधान निकालने का प्रयास करता है परन्तु कुछ या बहुत सी समस्याएं वह स्वयं हल नहीं कर पाता है जिसके लिए उसे मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। यदि शिक्षक योग्य तथा सदाचार से युक्त होगा तो विद्यार्थियों के सकारात्मक पक्ष को विकसित करने का प्रयास करेगा। गणित, विज्ञान जैसे विषयों के लिए योग्य व सदाचारयुक्त शिक्षक की इसलिए भी आवश्यकता होती है कि गणित व विज्ञान कथा-कहानियों की तरह नहीं है जिसे स्वयं पढ़ा जा सके। गणित को पढ़ाने के लिए गणित में रुचि व जिज्ञासा जाग्रत करनी होती है। किसी भी विषय में रुचि व जिज्ञासा तभी जाग्रत होती है जबकि उस विषय में आनेवाली समस्याओं का समाधान उचित समय पर मिलता रहे। दूसरा तरीका है कि उस विषय का हमारे जीवन में कितना महत्त्व है। यदि गणित का हमारे जीवन में महत्त्व समझ में आ जाए तो गणित में रुचि व जिज्ञासा होगी और उसमें अधिक परिश्रम करने का प्रयास करेंगे। तीसरा तरीका है कि गणित विषय का हमारे जाॅब से कितना सम्बन्ध है अर्थात् गणित के द्वारा हमें व्यवसाय चुनने में मदद मिलती है तो भी गणित विषय में रुचि व जिज्ञासा जाग्रत होगी। चौथा तरीका है यदि गणित को ही हम अपना कार्यक्षेत्र चुन लें। पाँचवा तरीका है कि सामान्य लोगों का Trend किस विषय की ओर है तब भी हमारी रुचि व जिज्ञासा बढ़ती है। इन तरीकों से हमें गणित में सकारात्मकता दिखाई देने लगती है।
गणित विषय इस प्रकार का विषय है कि यदि इसे रुचि व जिज्ञासापूर्वक पढ़ें व हल करें तो हीरो और अरुचि प्रदर्शित करें तो जीरो हो सकते हैं। यह विषय हमारे अंकों को प्रतिशतता में वृद्धि करता है क्योंकि यह एक प्रैक्टिकल विषय है और प्रैक्टिकल विषय में बहुत अच्छे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। यदि हम गणित के सूत्रों को याद कर लें तो बारहवीं अर्थात् सीनियर सैकण्डरी कक्षा तक तो आसानी से अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो सकते हैं। इसे विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, राजनीति विज्ञान जैसे विषयों की तरह रटना नहीं पड़ता है। सूत्रों के आधार पर ही हम इसे आसानी से हल कर सकते हैं। इस प्रकार गणित विषय की दुनिया अन्य विषयों से अलग ही है। सूत्र याद करने से यह काफी आसान और सरल हो जाता है। सूत्रों को छोटी सी नोट बुक में लिखकर जब चाहे तथा जहाँ चाहे याद कर सकते हैं। अपने साथ पाॅकेट में रख सकते हैं। 

3.गणित की तैयारी के टिप्स(Math Preparation Tips) – 

गणित विषय को खेल-खेल में, कविता व गानों की सहायता से आसानी से सीखाया जा सकता है। इसलिए प्रारम्भिक स्तर पर विद्यार्थियों को खेल-खेल में, कविता व गानों की सहायता से सीखाना चाहिए जिससे गणित विषय में विद्यार्थियों की रुचि व जिज्ञासा जाग्रत हो सके। विद्यार्थियों में गणित विषय के प्रति डर पैदा करने की कोशिश न करें। यह न कहे कि गणित बहुत कठिन विषय है इसलिए इस पर अधिक फोकस करो बल्कि गणित विषय में आनेवाली कठिनाईयों को दूर करके उनसे कहें कि ऐसा आप भी कर सकते थे यदि थोड़ा सा प्रयास करते तो। सूत्रों व थ्योरी को समझाकर याद करवायें। समझाकर याद करवाने से स्मृति में गणित का हल अधिक स्थायी व दीर्घकाल तक रहता है। गणित के सूत्रों को याद करने के लिए नोटबुक बना ले और जब भी, जहाँ भी मौका मिले उसको पढ़े, बार-बार पढ़ने से सूत्र याद हो जाएंगे। यदि कोई भी गणित के प्रति आपमें डर पैदा करता है तो सुनी सुनाई बात पर विश्वास न करें। याद रखें कोई विषय तभी तक कठिन होता है जब तक हम उसे बार-बार उसकी पुनरावृत्ति नहीं करते, उसका अभ्यास नहीं करते हैं। केवल शिक्षा संस्थानों के द्वारा बनाए गए नोट्स व अध्ययन पर ही निर्भर न रहें। स्वयं के द्वारा बनाए गए नोट्स तैयार करें और घर पर भी गणित को समय दें। गणित के सवाल हल नहीं हो रहे हों तो अपने माता-पिता, अभिभावकों से सहायता लें। यदि माता-पिता व अभिभावक अनपढ़ हैं या उनको गणित विषय का ज्ञान नहीं है तो अपने बड़े भाई, बहनों से सहयोग लें। यदि बड़े भाई, बहिन नहीं है या उनको भी गणित विषय के बारे में जानकारी नहीं है तो अपने मित्रों व शिक्षकों से मदद लें। अन्यथा कोचिंग ज्वाइन कर लें। कोचिंग संस्थान के बारे में ठीक से जाँच पड़ताल करके ही ज्वाइन करें अन्यथा आपकी समस्याओं का वहाँ समाधान नहीं हो पाएगा। आपकी फीस का नुकसान तो होगा ही साथ ही आपका समय भी बर्बाद होगा। हमेशा ऐसे मित्रों के साथ रहें जो आपको प्रोत्साहित करते हों और आपका हौसला बढ़ाते हों। 

यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए ।आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं। इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें। 

4.एक गणित की समस्या: दिल्ली सरकार इस विषय को बेहतर तरीके से सीखने के लिए छात्रों को कैसे साध रही है(A math problem: how Delhi government is helping students to learn this subject better.)-

2019 के बोर्ड परीक्षा परिणाम दिल्ली सरकार के लिए एक नए प्रयोग की शुरुआत थे। यह महसूस करने के बाद कि गणित पास प्रतिशत को नीचे ले जा रहा है, स्कूलों और शिक्षा विभाग ने महीनों तक ठोकर खाने की कोशिश की। 
दिल्ली सरकार के स्कूल में समग्र परिणाम में सुधार करने के लिए 10 वीं कक्षा के छात्रों को विशेष गणित कक्षा दी जा रही है। 

How Delhi Government is Helping Students to Learn Maths Subject Better

How Delhi Government is Helping Students to Learn Maths Subject Better

“मैं अभी अपने सिर को बहुपदों के आसपास नहीं लपेट सकता। वहाँ x और y और z है … समीकरण के दोनों किनारों पर x है … इसमें विभाजन और गुणा है। इससे मुझे कोई मतलब नहीं था, “17 वर्षीय हेमंत, आधा शर्मिंदा और आधा बहिष्कृत।
“मेरे लिए यह सब पाप, तान, कॉस, थीटा मुंबो जंबो है,” उसके दोस्त शिवम में पाइप किया, उसके चारों ओर अन्य लड़कों ने समझौते में सिर हिलाया।
दोनों लड़के दिल्ली के सरकारी स्कूलों के 47,231 छात्रों में से थे, जो इस साल मार्च में आयोजित सीबीएसई दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को पास नहीं कर पाए थे। इनमें से आधे से अधिक छात्रों की तरह, वे केवल एक विषय में असफल रहे थे – गणित।
सीबीएसई दसवीं कक्षा की परीक्षाओं में कम उत्तीर्ण प्रतिशत दिल्ली सरकार के स्कूलों में एक पैटर्न रहा है, और बच्चों का गणित के साथ संघर्ष सबसे बड़ा कारण रहा है। इस साल की परीक्षा के बाद, लगभग 350 स्कूलों की पहचान की गई थी जहाँ दसवीं कक्षा में गणित में 55% से कम छात्र उत्तीर्ण हुए थे। ये स्कूल – और उनके पीछे सरकारी तंत्र – अब एक ही मिशन पर काम कर रहे हैं: छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए 2020 की परीक्षा में गणित में पास होना।
ऐसी सरकार के लिए जो अपने हस्तक्षेपों और पहलों के सबसे प्रमुख क्षेत्र के रूप में शिक्षा को आगे बढ़ाती है, कम पास प्रतिशतता अपने स्कूलों में किए गए काम के एक अन्यथा अनुकूल सार्वजनिक छवि में एक आकर्षक अंतर बनी हुई है।
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मई में परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद गणित को जीतने की खोज शुरू हुई, और शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा परिणामों के विश्लेषण ने कुछ स्पष्ट रुझान फेंके।
सीबीएसई दसवीं कक्षा की परीक्षाओं में कम उत्तीर्ण प्रतिशत दिल्ली सरकार के स्कूलों में एक पैटर्न रहा है, और बच्चों का गणित के साथ संघर्ष सबसे बड़ा कारण रहा है। 

How Delhi Government is Helping Students to Learn Maths Subject Better

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“हमने जो डेटा एकत्र किया था, उसे देखते हुए, हमने पाया कि छात्र अन्य विषयों में अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। 96% से अधिक अंग्रेजी, हिंदी और सामाजिक विज्ञान में उत्तीर्ण हुए, लेकिन गणित एक प्रमुख मुद्दे के रूप में उभरा। इसमें लगभग 73% छात्र ही पास हुए थे। लगभग 86% विज्ञान में पास हुए थे, ”शैलेन्द्र शर्मा, शिक्षा निदेशालय के प्रमुख सलाहकार थे।
परिणामों पर अभी भी करीब से देखने से पता चला है कि इनमें से कुछ छात्रों को शैक्षणिक वर्ष बचाने में मदद करने में अभी भी देर नहीं हो सकती है। उन छात्रों के लिए जो एक या दो विषयों में असफल होते हैं, केंद्रीय बोर्ड कुछ महीनों बाद उन विशेष विषयों में कम्पार्टमेंट परीक्षाओं में बैठने का अवसर प्रदान करता है।
दिल्ली सरकार के स्कूलों से मार्च की परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हुए छात्रों में से केवल 2,715 ही असफल रहे जबकि 44,516 को कंपार्टमेंट में रखा गया था। यह पाया गया कि इन छात्रों में से 24,502 केवल गणित में असफल रहे थे, जबकि 6,092 केवल विज्ञान में असफल रहे थे।
“कम्पार्टमेंट परीक्षाओं को वास्तव में कभी भी स्कूलों, छात्रों या बोर्ड द्वारा गंभीरता से नहीं लिया जाता है क्योंकि एक बार जब वे पास नहीं होते हैं, तो छात्रों को असफल माना जाता है और हर कोई आगे बढ़ता है। लेकिन हमने सोचा कि यह एक अंतर था, जो इन दो विषयों, विशेषकर गणित पर लक्षित फोकस के माध्यम से भरना संभव हो सकता है, ”।
मई में परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद गणित को जीतने की खोज शुरू हुई, और शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा परिणामों के विश्लेषण ने कुछ स्पष्ट रुझान फेंके। (अभिनव साहा द्वारा एक्सप्रेस फोटो)
और इस तरह एक नई कवायद शुरू हुई, जिसमें जुलाई में होने वाली परीक्षाओं की तैयारी के लिए कंपार्टमेंट में रखे गए छात्रों को मई और जून की गर्मियों की छुट्टियों के महीनों में अपने स्कूलों में रेमेडियल कक्षाओं में जाने के लिए धकेल दिया गया।
प्रत्येक कार्य दिवस, डेढ़ महीने के लिए, ये छात्र डेढ़ घंटे की कक्षाओं के लिए स्कूल जाते थे और अपने शिक्षकों से विशेष ध्यान रखते थे, जिन्हें शिक्षा विभाग से शिक्षण योजनाएँ प्राप्त करने का सुझाव मिलता था कि कौन से विषय अध्याय वे इन दो विषयों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
गणित पढ़ाने के तरीके में बड़ी समस्या: मनीष सिसोदिया(Big problem in teaching mathematics: Manish Sisodia)-
परिणामस्वरूप, हेमंत और शिवम सहित 16,395 छात्र-छात्राएं कंपार्टमेंट परीक्षाओं को पास करने और अपने सहपाठियों के साथ ग्यारहवीं कक्षा में जाने में सफल रहे। “मैंने वास्तव में उस दौरान खुद को धक्का दिया क्योंकि मैं एक साल बर्बाद नहीं करना चाहता था। मैंने खुद से कहा कि यह सिर्फ एक मामला है या एक या दो महीने है और एक बार मैं ग्यारहवीं कक्षा तक पहुंच जाऊंगा, मैं हमेशा के लिए गणित से मुक्त हो जाऊंगा, ”हेमंत ने कहा। मार्च की परीक्षा में 80 में से 17 स्कोर करने के बाद, उन्होंने 40 के साथ 80 को कंपार्टमेंट में खींच लिया और अब मानविकी का छात्र है।
हालांकि, दोनों लड़कों ने अपने करीबी दोस्तों को अपने क्लासरूम से बाहर निकलते हुए देखा है, या तो कम्पार्टमेंट पास नहीं कर पाए हैं – कुछ को दसवीं कक्षा में फिर से दाखिला मिल गया है, कुछ स्कूल की पढ़ाई के लिए चले गए हैं, जबकि कुछ फिर से कंपार्टमेंट की तैयारी कर रहे हैं अगले मार्च स्कूल के बाहर से।
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कंपार्टमेंट परीक्षा, सामान्य रूप से सरकारी स्कूलों और विशेष रूप से कम प्रदर्शन के रूप में पहचाने जाने वाले 350 स्कूलों के परिणाम विश्लेषण और अनुभव से सबक लेते हुए, अतिरिक्त मील को आगे बढ़ाने के लिए अगले साल की बोर्ड परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे हैं। गणित में पास होने वालों की संख्या।
प्रत्येक कार्यदिवस, डेढ़ महीने के लिए, ये छात्र डेढ़ घंटे की कक्षाओं के लिए स्कूल जाते थे और अपने शिक्षकों से विशेष ध्यान आकर्षित करते थे। 

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गवर्नमेंट बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल के हेड हंसराज मीणा ने कहा, “शिक्षा निदेशक ने हमें बताया कि हमें दसवीं कक्षा के गणित में 90 प्रतिशत अंकों के साथ निशाना बनाना है, इसलिए हम अपनी ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।” – गणित में कमजोर प्रदर्शन के लिए स्कूलों में से एक।
शिक्षा विभाग द्वारा क्रंच किए गए नंबरों के अनुसार, लगभग 350 छात्र इन 350 स्कूलों से दसवीं कक्षा की परीक्षा में उपस्थित हुए थे, जिनमें से 42% गणित में उत्तीर्ण हुए थे। मीना के स्कूल में, गणित में 64 में से केवल 32 लड़के पास हुए थे और स्कूल का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 46.88% था।
गणित के साथ संघर्ष और भी स्पष्ट हो जाता है जब इसे छात्रों के प्रदर्शन के साथ कहीं और रखा जाता है। सभी छात्र अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत में उत्तीर्ण हुए थे, एक सामाजिक विज्ञान में और नौ विज्ञान में असफल रहे थे। बारहवीं कक्षा में, पास प्रतिशत 95.51% था।
इन विद्यालयों के लिए सबसे बड़े हस्तक्षेप में से एक, निजी कोचिंग के माध्यम से गणित पर पुनरीक्षण केंद्रित है, जो जनवरी से शुरू हो रहा है। “हमने बाहरी विशेषज्ञ एजेंसियों को पढ़ाने वाले गणित की कुछ मात्रा को आउटसोर्सिंग करने के बारे में सोचा है, जिस तरह से हमने अंग्रेजी बोलने वाले छात्रों की मदद करने के लिए ब्रिटिश काउंसिल जैसी अकादमियों को काम पर रखा है। यह हमारे शिक्षकों द्वारा सिखाया गया पूरक है; शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि इससे उनकी अवधारणाओं को साफ करने और समस्याओं को हल करने में मदद मिलेगी।
इस साल की शुरुआत में, शिक्षा विभाग ने 610 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) गणित के शिक्षकों के लिए डीएसएसबी के लिए एक अनुरोध भेजा था। 

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वर्तमान में ध्यान नवंबर में पाठ्यक्रम पूरा करने पर है ताकि छात्र जल्द से जल्द संशोधन मोड में प्रवेश कर सकें। सरकार ऐसी एजेंसियों के लिए प्रस्तावों (आरएफपी) के लिए अनुरोध भेजने पर काम कर रही है और जनवरी में शीतकालीन अवकाश के 15 दिनों में दो-तीन घंटे की अवधि के लिए पुनरीक्षण कक्षाएं शुरू करेगी, परीक्षा तक जारी रहेगी, 100 घंटे के प्रशिक्षण के साथ हर स्कूल के लिए एजेंसियों के साथ पैकेज।
जब पूछा गया कि सरकार सहायता के लिए निजी पार्टियों की ओर क्यों रुख कर रही है, तो यह सरकारी स्कूलों की लंबे समय से चली आ रही समस्या की ओर इशारा किया गया – शिक्षकों की कमी। “न केवल शिक्षकों की कमी है, यहां तक ​​कि जब हमने नियमित गणित शिक्षकों के लिए रिक्तियों की अधिसूचना भेजी, तो हमें बहुत कम उम्मीदवार मिले। जब हमने अतिथि शिक्षकों की तलाश में एक पोर्टल खोला, तब भी हमें कुछ ही आवेदन मिले। ”
इस साल की शुरुआत में, शिक्षा विभाग ने DSSSB को 610 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) गणित शिक्षकों के लिए एक आवेदन भेजा था, जो एक प्रतियोगी परीक्षा प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती को अंजाम देता है। DSSSB द्वारा केवल 115 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था, जिनके डोजियर विभाग को भेजे गए थे।
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इस साल, सीबीएसई ने एक नया विकल्प प्रदान किया है जो न केवल दिल्ली में बल्कि अन्य जगहों पर भी उत्तीर्ण प्रतिशत प्रतिशत बना सकता है – दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा के लिए या तो बुनियादी या मानक गणित चुनने के लिए। जबकि सभी छात्र एक ही पाठ्यक्रम का अध्ययन करेंगे, जिन्होंने बुनियादी गणित का विकल्प चुना है, सरल प्रश्नों के साथ आसान स्तर पर परीक्षण किया जाएगा। हालांकि, ये छात्र कक्षा XI और XII में एक विषय के रूप में गणित का चयन नहीं कर पाएंगे।
दिल्ली सरकार ने सभी स्कूलों को यह कहते हुए परामर्श देने के निर्देश दिए थे कि “जो छात्र गणित में कम प्रदर्शन करते हैं, उन्हें CBSE कक्षा X बोर्ड परीक्षा 2020 के लिए बुनियादी और मानक गणित का चयन करने के लिए परामर्श दिया जाए”। परीक्षा के लिए फॉर्म स्कूलों द्वारा बोर्ड को भेजे गए हैं और इन-कम प्रदर्शन वाले स्कूलों ’से बड़ी संख्या में छात्रों ने अगले साल की परीक्षा के लिए बुनियादी गणित का विकल्प चुना है।
2019 की परीक्षा में, स्कूल के 105 लड़कों में से जो परीक्षा के लिए उपस्थित हुए थे, 54 असफल हो गए थे। 

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अंबेडकर नगर में गवर्नमेंट बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल नंबर 3 में, 118 कक्षा X के उम्मीदवारों में से केवल 15 ने मानक गणित का विकल्प चुना है, जबकि बाकी ने 2020 के दसवीं कक्षा के लिए बुनियादी गणित का विकल्प चुना है।
2019 की परीक्षा में, स्कूल के 105 लड़कों में से जो परीक्षा के लिए उपस्थित हुए थे, 54 असफल हो गए थे। “बुनियादी गणित का चुनाव करने के लिए कोई ज़बरदस्ती नहीं थी।विषय शिक्षक ने कमजोर छात्रों की पहचान की और उन्हें यह बताकर परामर्श दिया कि बुनियादी गणित क्या है और उनके पास क्या विकल्प हैं, और अंतिम निर्णय छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए छोड़ दिया गया था, ”होएस राम दयाल खटीक ने कहा। मीना के स्कूल में, अगले वर्ष की परीक्षा के लिए 78 में से 65 कक्षा के उम्मीदवारों ने बुनियादी गणित का विकल्प चुना है।
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इस मिशन के केंद्र में पैर सैनिक, शिक्षक, सुनिश्चित कर रहे हैं कि तैयारी जोरों पर है। पिछले सप्ताह स्कूल के समय से पहले दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए एक घंटे की उपचारात्मक कक्षाएं। शिक्षकों ने बोर्ड द्वारा प्रदान किए गए गणित के नमूना पत्रों के साथ छात्रों की मदद करना शुरू कर दिया है, और ध्यान केंद्रित करने के लिए विषयों की पहचान करना भी शुरू कर दिया है।
महरौली के स्कूल में, मीना ने दो प्रबंधन व्यक्तियों को भी नियुक्त किया है – गणित और विज्ञान के लिए – स्कूल प्रबंधन समिति के माध्यम से एक-दो हफ्ते की कक्षाएं लेने के लिए, और शिक्षकों की कक्षाओं का निरीक्षण करने और उन्हें अपने शिक्षण विधियों पर प्रतिक्रिया देने के लिए।
“हमने हाल ही में अपनी मध्य अवधि की परीक्षाएँ पूरी की हैं और मैं उत्तर पुस्तिकाओं का विश्लेषण कर रहा हूं कि यह देखने के लिए कि कौन से प्रश्न विद्यार्थियों ने प्रयास नहीं किए, और जो वे हल नहीं कर पाए, जिससे समस्या क्षेत्रों की पहचान की जा सके। पिछले सप्ताह से, मैंने चार-पाँच के समूह बनाकर और उन्हें एक साथ एक समस्या देकर समूह अध्ययन सत्र शुरू किया, ताकि वे एक-दूसरे से विचार-मंथन कर सकें और सीख सकें। हमें शिक्षा विभाग द्वारा ध्यान केंद्रित करने के लिए आसान अध्यायों की एक सूची भी दी गई है ताकि छात्रों को कम से कम उन अध्यायों के अंकों का आश्वासन दिया जा सके। ये पाठ्यक्रम में 15 अध्यायों में से आठ हैं, जिनमें त्रिकोण, संख्या प्रणाली और अंकगणितीय प्रगति शामिल हैं। हमने इसके साथ ही कार्यशालाओं में भी भाग लिया है, ”अम्बेडकर नगर स्कूल में टीजीटी गणित के शिक्षक निमेंद्र कुमार ने भी स्वीकार किया कि ये सीमित लक्ष्य हैं।
“वर्तमान में, निर्देश पास संख्याओं को बढ़ाने के लिए है। मैं भी, एक नुकसान को महसूस करता हूं जब एक शिक्षक के रूप में मेरे प्रयासों के बावजूद, मेरे छात्रों की एक बड़ी संख्या विफल हो जाती है। लेकिन अभी, नजर छात्रों की मात्रा पर है, जबकि गणित के साथ उनके जुड़ाव की गुणवत्ता को पहले के स्तर पर मजबूत नींव के साथ ही बेहतर बनाया जा सकता है।

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