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Objective test in hindi |वस्तुनिष्ठ परीक्षण

Objective test

वस्तुनिष्ठ परीक्षा (objective type examination)

Objective test

Objective test

(1.)लिखित परीक्षा का प्रथम रूप निबन्धात्मक परीक्षा है तथा दूसरा रूप वस्तुनिष्ठ परीक्षा है ।निबन्धात्मक परीक्षा के दोषों को दूर करने के लिए वस्तुनिष्ठ परीक्षा आवश्यकता महसूस हुई ।

(2.)वस्तुनिष्ठ परीक्षा में किसी प्रश्न के कुछ विकल्प दिए जाते हैं ।परीक्षार्थी को उन विकल्पों में से ही उत्तर देना होता है ।सही विकल्प के अलावा अन्य विकल्प के रूप में उत्तर देने पर प्रश्न गलत होता है ।
(3.)वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की संख्या बहुत अधिक होती है जिससे सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का समावेश हो जाता है ।वर्तमान समय में अधिकतर प्रतियोगिता परीक्षाओं में वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के द्वारा ही प्रतियोगी का चयन किया जाता है ।
लाभ(merit) :-
(1.) इस प्रकार की परीक्षा में विद्यार्थियों से बहुत अधिक संख्या में प्रश्न पूछे जाते हैं इसलिए सम्पूर्ण पाठ्यक्रम के प्रश्न शामिल हो जाते हैं ।विद्यार्थी रटकर सफल नहीं हो सकते हैं ।
(2.)इस प्रकार के प्रश्नों की जाँच में वस्तुनिष्ठता रहती है अर्थात् अध्यापक की रूचि का इसमें फर्क नहीं पड़ता है ।सभी विद्यार्थियों ने जिन्होंने सही उत्तर दिए हैं समान अंक प्रदान किए जाते हैं ।
(3.)इस प्रकार की परीक्षा पद्धति में उन विद्यार्थियों को कोई नुकसान नहीं होता है जिनका लेखन खराब होता है ।
(4.)इस परीक्षा पद्धति में कम समय में उत्तर पुस्तिकाओं की जाँच की जा सकती है तथा शीघ्र ही परीक्षा परिणाम घोषित किया जा सकता है ।
(5.)इस परीक्षा पद्धति में वन वीक सीरीज तथा बुक में कुछ प्रश्नों को रटकर सफल नहीं हुआ जा सकता है ।अर्थात् विद्यार्थी को सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को पढ़ना व तैयार करना होता है ।
हानि(Demerit) :-
(1.)इस प्रकार की परीक्षा पद्धति में अनुमान के आधार पर उत्तर दिया जा सकता है और सफल हुआ जा सकता है ।
(2.)वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न पत्र को तैयार करने में बहुत अधिक समय व श्रम व्यय करना पड़ता है ।
(3.)विद्यार्थियों की लेखन क्षमता को प्रकट करने की जाँच नहीं की जा सकती है ।
(4.)वस्तुनिष्ठ परीक्षा पद्धति में विचार और तर्कशक्ति का विकास नहीं हो पाता है ।
(5.)कुछ विवादास्पद प्रश्न भी होते हैं उनका निराकरण इस परीक्षा पद्धति से नहीं हो सकता है ।
(6.)इस प्रकार की परीक्षा पद्धति में नकल करने की अधिक सम्भावना होती है ।
सुझाव(suggestion) :-
(1.)विवादास्पद प्रश्नों को शामिल नहीं करना चाहिए तथा प्रश्न पत्र किसी विशेषज्ञ से ही तैयार कराया जाना चाहिए ।
(2.)सार्वजनिक परीक्षा-केन्द्रों में प्रवेशद्वार एक ही होना चाहिए तथा पूर्ण जाँच-पड़ताल के बाद ही विद्यार्थियों /परीक्षार्थियों को प्रवेश देना चाहिए ।
(3.)प्रश्न-पत्र बनाने वाले विशेषज्ञ द्वारा उसकी उत्तर पुस्तिका भी साथ ही तैयार करना चाहिए ।
(4.)प्रश्न-पत्र में सभी प्रकार के प्रश्न देने चाहिए अर्थात् कठिन व सरल सभी प्रकार के प्रश्न शामिल करने चाहिए ।
(5.)प्रश्न-पत्रों की भाषा क्लिष्ट व जटिल नहीं होनी चाहिए ।
(6.)प्रश्न-पत्रों के सही विकल्प वाले प्रश्नों को एक ही क्रम में नहीं देना चाहिए ।
(7.)उत्तर पुस्तिकाओं की जाँच के लिए सभी परीक्षाकों को सही विकल्प की उत्तर पुस्तिका उपलब्ध करवानी चाहिए ।

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