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Logarithms

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2 (1.)लघुगणकों की पद्धतियां (Systems of Logarithms):

1.लघुगणक (Logarithms):

  • लघुगणक (Logarithms) का आविष्कारक स्कॉटलैंड निवासी जॉन नेपियर (John Napier) था।1612 ईसवी में नेपियर की एक पुस्तक जिसका नाम था ‘Mirificilogarithmorum Canons Description’था,एडिनबर्ग में प्रकाशित हुई।इस पुस्तक में लघुगणको के आविष्कार का मार्मिक विवेचन दिया हुआ है।उक्त पुस्तक में पहली बार लघुगणकों की परिभाषा एवं लघुगणक सारणी उपलब्ध होती है।पुस्तक के प्रकाश में आते ही बड़े-बड़े गणितज्ञ जैसे राइट (Wright) और हेनरी ब्रिग्स (Henry Brigs) आदि का ध्यान स्वत: आकृष्ट हो गया।राइट ने इस पुस्तक का अंग्रेजी में अनुवाद किया जिसको उसकी मृत्यु के बाद 1616 ईस्वी में उसके लड़के ने प्रकाशित किया।
  • जिन लघुगणक का नेपियर ने आविष्कार किया था,वे वह नहीं थे जो आजकल दशमलव लघुगणक कहलाते हैं। नेपियर ने प्राकृतिक लघुगणकों का आविष्कार किया था।इस प्रणाली में लघुगणक का आधार एक असम्मेय (Incommensurable),संख्या e मानी जाती है।हेनरी ब्रिग्स ने जो अंग्रेज गणितज्ञ था,ने नेपियर के सामने यह प्रस्ताव रखा कि लघुगणकों का आधार संख्या 10 को बना दिया जाए।नेपियर ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और दोनों ने मिलकर मौलिक लघुगणकों को दशमलश लघुगणकों में बदल दिया।दोनों ने ही मिलकर 1624 ईस्वी में एक पुस्तक ‘एरिथमैटिकल लाॅगरिथमिका’ (Arithmetical Logarithmica) प्रकाशित की जिसमें एक से 30,000 तक और 80,000 से 1,00,000 तक की संख्याओं के लघुगणक दिए गए हैं।
  • उपर्युक्त कथन से मालूम पड़ता है कि लघुगणक (Logarithms) का आविष्कार यूरोप में 17वीं शताब्दी में हुआ था परंतु प्राचीन भारतीय ग्रंथों का अवलोकन करने से ज्ञात होता है कि इस विषय की विस्तृत रूप से जानकारी भारत में लगभग 2000 वर्ष पहले भी थी।उस समय लघुगणकों को ‘छेदा गणित’ के नाम से पुकारते थे।तिलोयपण्णति नामक ईसा की दूसरी शताब्दी के जैन ग्रंथ में इस विषय पर विस्तृत विवरण दिया गया है।उस समय लघुगणक के आधार प्राय: 2,3,4 आदि संख्याएं होती थी।जब लघुगणक का आधार 2 होता है तो उसे ‘अर्द्धच्छेद’ कहते हैं,जब आधार 3 हो तो ‘त्रिकच्छेद’ और जब आधार 4 हो तो उसे ‘चतुर्थच्छेद’ कहते हैं।इसके अतिरिक्त एक अन्य शब्द ‘वर्ग शलाका’ भी इस ग्रंथ में मिलता है।इस शब्द का आशय अर्द्धच्छेद के अर्द्धच्छेद से है।यथा a की वर्गशलाका=लघु3लघु4 a है।इन सबका उल्लेख बाद में जैन ग्रंथों ‘धवला’ और ‘तिलोकसार’ आदि में भी विस्तृत रूप से मिलता है।
  • निष्कर्षत: कहा जा सकता है कि लघुगणक (Logarithms),गणितशास्त्र में अपना विशेष महत्त्व रखता है।ऐतिहासिकता से संपन्न यह लघुगणक विवेचन जहाँ सैद्धान्तिकता के धरातल पर अत्यंत उपयोगी है,वहां क्रियात्मक धरातल पर भी कम नहीं है। क्योंकि यह भारतीय ऐतिहासिकता के परिवेश में पूर्णतः सत्य उतरता है कि यहां इसका पहले ही प्रचलन था,न कि यह यूरोपीय गणित की देन है।लघुगणक के बीज भारतीय क्षेत्र में बोये गए है।हां,ऐसा हो सकता है इसको पुष्पित कर विकास की ओर लाने में पाश्चात्य देशों का योगदान रहा हो।
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(1.)लघुगणकों की पद्धतियां (Systems of Logarithms):

  • (i)प्राकृत या नैपियर की लघुगणक पद्धति (Natural or Naperian System of Logarithms):
    इस पद्धति में लघुगणक का आधार ‘e’ होता है,जहाँ
    e=1+\left( \frac{1}{1} \right)+\left( \frac{1}{1×2}\right)+\left(\frac{1}{1×2×3}\right)+\cdots \cdots \cdots=2.71828183 \text{ (लगभग) }
    इस पद्धति का उपयोग उच्च गणितीय अध्ययन में होता है।
  • (ii)साधारण या ब्रिग की लघुगणक पद्धति (Common or Brigg’s System of Logarithm):
    इस पद्धति में लघुगणक का आधार 10 होता है।जब किसी संख्या का लघुगणक 10 होता है तो वह उस संख्या का साधारण लघुगणक कहलाता है।किसी संख्या का साधारण लघुगणक व्यक्त करते समय आधार नहीं लिखा हो तो भी आधार 10 ही समझना चाहिए।साधारण लघुगणक का उपयोग समस्त व्यावहारिक संख्यात्मक गणनाओं में अधिक होता है।ब्रिग ने सर्वप्रथम 10 के आधार पर लघुगणक सारणी (Logarithmic Table) तैयार की इसलिए इसको ब्रिग पद्धति भी कहते हैं।इस सारणी की सहायता से संख्याओं के लघुगणक ज्ञात करने की विधि अत्यंत सरल है।

(2.)लघुगणकों के आधारभूत नियम (Fundamental Laws of Logarithms):

(i)नियम (Rule):1.लघुगणकों का गुणनफल सूत्र (Product of Logarithms Formula):
\log(MN)=\log M+\log N

Proof:-  \text {Let } M =a^{x}, \therefore \log _{a} M=x \\ N =a^{y}, \therefore \log _{a} N=y \\ M N =a^{x} \times a^{y}=a^{x+y} \\ M N =a^{x+y} \\ \log _{a} M N=x+y \\ \log _{a} M N=\log _{a} M+\log _{a} N  

Example:- \log _{10} 6=\log _{10}(3 \times 2)=\log _{10} 3+\log _{10} 2 \\ \text{ इसी प्रकार } \log _{7} 30=\log _{7}(2 \times 3 \times 5)=\log _{7} 2+\log _{7} 3+\log _{7} 5  

दो संख्याओं के गुणनफल का लघुगणक (Logarithms) उसी आधार पर उन संख्याओं के लघुगणकों के योग के बराबर होता है।

(ii)नियम (Rule):2.लघुगणकों के भागफल का सूत्र (Formula for Quotient of Logarithms):
\log(\frac{M}{N})=\log M-\log N

उपपत्ति : मान लीजिए M=a^{x}, \therefore \log _{a} M=x \cdots (1)  

और  N=a^{y}, \therefore \log _{a} N=y \cdots (2)  

अब   \frac{M}{N}=\frac{a^{x}}{a^{y}}

या \frac{M}{N}=a^{x-y} \cdots (3)   

(3)  को लघुगणक के रूप में लिखने पर \log _{a} \frac{M}{N}=x-y \\ \text{ या } \log _{a} \frac{M}{N}=\log _{a} M-\log _{a} N   

 अत: इस नियम से , \log _{4} \frac{5}{3}=\log _{4} 5-\log _{4} 3 \\ \log _{5} \frac{11}{6}=\log _{5} 11-\log _{5} 6

(iii)नियम (Rule):3.लघुगणकों का घात सूत्र (Power Formula of Logarithms):
\log _{a} M^{N}=N \log _{a} M

उपपत्ति : मान लीजिए M=a^{x} \\ \therefore \log _{a} M=x

या \therefore \quad M^{N} =\left(a^{x}\right)^{N} \\ M^{N} =a^{N x} \cdots(2)
(2) को लघुगणक के रूप में लिखने पर,
\log _{a} M^{N} =N x \\ =N \log _{a} M
अतः इस नियम से
\log _{3} 5^{7}=7 \log _{3} 5
उप नियम 1 :
\log _{a} a=1

हम जानते हैं कि a^{1}=a इसे लघुगणक रूप में प्रकट करने पर,
\log _{a} a=1
अत: आधार के बराबर वाली संख्या का लघुगणक सदेव 1 होता है।
जैसे : \log _{2} 2=1, \log _{7} 7=1, \log _{10} 10=1
उप नियम 2 : \log _{a} 1=0
हम जानते हैं कि a^{0}=1 इसे लघुगणक रूप में प्रकट करने पर
  \log _{a} 1=0
अतः किसी भी आधार पर 1 का लघुगणक शून्य होता है। जैसे- \log _{2} 1=0, \log _{3} 1=0, \log _{10} 1=0

(iv)नियम (Rule):4.आधार परिवर्तन सूत्र (Base Changing Formula):

\log _{a} M=\log _{b} M \times \log _{a} b
उपपत्ति : मान लीजिए \log _{b} M=x \therefore M=b^{x} \quad \ldots (i)
  \log _{a} b=y \quad \therefore b=a^{y}
(i) में (ii) से b का मान रखने पर
M=\left(a^{y}\right)^{x}=a^{x y} \\ \therefore \log _{a} M=x y [परिभाषा से ]
या \log _{a} M=\log _{b} M \times \log _{a} b
अथवा
  \log _{b} M=\frac{\log _{a} M}{\log _{a} b}
शब्दों में इस नियम की ” किसी आधार a पर किसी भी संख्या का लघुगणक, दूसरे आधार b पर उस संख्या के लघुगणक तथा आधार a पर b के लघुगणक के गुणनफल के बराबर हीता है” व्यक्त किया जाता है।

उप नियम 3: \log _{b} \\ a \times \log _{a} b=1 a=b^{x}
उपपत्ति : मान लीजिए \log _{b} a=x
या b=a^{\frac{1}{x}} \\ \log _{a} b=\frac{1}{x} \\ \therefore
अत: \log _{b} a \times \log _{a} b=1

किसी आधार a पर किसी भी संख्या का लघुगणक (Logarithms),दूसरे आधार b पर उस संख्या के लघुगुणक तथा आधार a पर b के लघुगुणक के गुणनफल के बराबर होता है।

Example:- (i) \log _{10} 6 \\  ( ii ) \log _{10} 5 \\ (iii) \log _{10} 36 \\ ( iv ) \log _{10} \frac{2}{3}
हल : (i) \log _{10} 6=\log _{10}(2 \times 3)\\ =\log _{10} 2+\log _{10} 3 \\(ii)=0.3010+0.4771 =0.7781 \\ \log _{10} 5 =\log _{10} \frac{10}{2}=\log _{10} 10-\log _{10} 2\\ =1-0.3010 \quad \left[\because \log _{10} 10=1\right] \\ =0.6990 \\ \text { (iii) } \log _{10} 36 =\log _{10}(2 \times 2 \times 3 \times 3) \\ =\log _{10} 2+\log _{10} 2+\log _{10} 3+\log _{10} 3 \\ =2 \log _{10} 2+2 \log _{10} 3 \\ =2\left(\log _{10} 2+\log _{10} 3\right) \\ =2(0.3010+0.4771) \\ =2 \times 0.7781=1.5562
इसे आप निम्न प्रकार भी हल कर सकते हैं :
  \log _{10} 36=\log _{10} 6^{2}=2 \log _{10} 6 \\ (iv) \log _{10}\left(\frac{2}{3}\right) =\log _{10} 2-\log _{10} 3 \\ =0.3010-0.4771 \\ =-0.1761
उदाहरण 1: यदि \log _{10} 2=0.3010 और \log _{10} 3=0.4771
हो तो \log _{10}\left(\frac{6}{5}\right)^{7} का मान ज्ञात कीजिए :
हल : \log _{10}\left(\frac{6}{5}\right)^{7}=7 \log _{10} \frac{6}{5}\\ =7\left\{\log _{10}\left(\frac{6}{5}\right)\right\}=7\left\{\log _{10} \frac{12}{10}\right\} \\ =7\left\{\log _{10} 12-\log _{10} 10\right\} \\=7\left\{\log _{10}\left(2^{2} \times 3\right)-\log _{10} 10\right\} \\ =7\left\{\log _{10} 2^{2}+\log _{10} 3-1\right\} \\=7\left\{2 \log _{10} 2+\log _{10} 3-1\right\} \\ =7\{0.6020+0.4771-1\} \\ =7 \times 0.0791=0.5537

उदाहरण 2 : सिद्ध कीजिए :
7 \log \frac{10}{9}-2 \log \frac{25}{24}+3 \log \frac{81}{80}=\log 2

 हल : वाम पक्ष =7 \log 10-7 \log 9-2 \log 25 \\ +2 \log 24+3 \log 81-3 \log 80 \\ =7 \log (5 \times 2)-7 \log \left(3^{2}\right)-2 \log \left(5^{2}\right)+2 \log \left(2^{3} \times 3\right)+3 \log \left(3^{4}\right)-3 \log \left(2^{4} \times 5\right) \\ =7 \log 5+7 \log 2-14 \log 3-4 \log 5+2 \log 2^{3} +2 \log 3+12 \log 3-3 \log 2^{4}-3 \log 5 \\ =7 \log 5+7 \log 2-14 \log 3-4 \log 5+6 \log 2+2 \log 3+12 \log 3-12 \log 2-3 \log 5 \\=\log 2=दक्षिण पक्ष

(3.)लघुगणकों का पूर्णांश और अपूर्णांश (Characteristic and Mantissa of the Logarithmics):

1,10,100,1000,……इत्यादि के लघुगणक क्रमशः 0,1,2,3,…… हैं।यह स्पष्ट है कि इन संख्याओं में प्रत्येक में कितने अंक हैं,उसके लघुगणक का मान उन अंकों की संख्या से 1 कम है।उदाहरणार्थ 1000 में 4 अंक हैं और इसका लघुगणक 4-1=3 है।

उपर्युक्त से हम कह सकते हैं कि एक संख्या जिसके पूर्णांकीय भाग में 2 अंक होते हैं,वह 10^1 और 10^2 के बीच में होती है;एक संख्या जिसके पूर्णांकीय भाग में 3 अंक होते हैं वह 10^2 और 10^3 के बीच होती है।अतः एक संख्या जिसके पूर्णांकीय भाग में n अंक है वह 10^(n-1) और 10^n के बीच में होगी।
परिभाषा (Definition):किसी संख्या के लघुगणक (Logarithms) में पूर्णांक वाला भाग इस लघुगणक का पूर्णांश (Characteristic) और भिन्नात्मक भाग भिन्नांश (Mantissa) कहलाता है।

Logarithm of Numbers between 10 to 100:-

10 से 100 के मध्य ( 100 नहीं) की संख्याओं का लघुगणक :
मान लिया हमें 1 0 से 100 के बीच की किसी संख्या उदाहरणार्थ 30 का लघगणक
करना है तो
\log 30 =\log (10 \times 3)=\log 10+\log 3 \\ =1+0.4771=1.4771 \\ \text { इसी प्रकार } \quad \log 72.94 =\log (10 \times 7.294) \\ =\log 10+\log 7.294 \\ =1+0.8629=1.8629
इसी प्रकार अन्य उदाहरण लेकर हम देख सकते हैं कि :

10 से 100 के बीच की संख्याओं के लघुगणक का पूर्णांश सदैव 1 होगा 100 से 1000 के मध्य ( 1000 नहीं) की संख्याओं का लघुगणक :
मान लिया हमें 300 का लघुगणक ज्ञात करना है। अब
\log 300 =\log (100 \times 3)=\log 100+\log 3 \\ =2+\log 3=2+0.4771 \\ =2.4771 \\ \text { इसी प्रकार } \quad \log 729.4 =\log (100 \times 7.294) \\ =\log 100+\log 7.294 \\=2+0.8629=2.8629
अब यदि 1 से छोटी किसी धन संख्या जैसे .0003 अथवा .007294 का लघुगणक करना हो तो हम देखते हो कि :
और
\log .0003 =\log \frac{3}{10000}=\log \left(3 \times 10^{-4}\right) \\=\log 10^{-4}+\log 3=-4+0.4771 \\ \log .007294 =\log \frac{7.294}{1000}=\log \left(7.294 \times 10^{-3}\right) \log 10^{-3}+\log 7.294=-3+0.8629
यहाँ यह श्यान रखना आवश्यक है कि 1 से छोटी संख्याओं का लघुगणक ज्ञात करते
इन्हें सरल करके लघुगणक का मान पूरी ऋण संख्या के रूप में नहीं लिखा जाता। \log .0003=-4+0.4771=4.4771
लिखते हैं।

(4.)किसी संख्या के लघुगणक का भिन्नांश (Mantissa) ज्ञात करना (Finding the Mantissa of the Logarithm of a Number):

  • किसी संख्या के लघुगणक (Logarithms) के भिन्नांश ज्ञात करने के लिए हम लघुगणक सारणी (Logarithm Table) का उपयोग करते हैं।उस सारणी में बायीं ओर प्रथम स्तम्भ में 10 से 99 तक की संख्याएं लिखी हैं तथा ऊपर की प्रथम पंक्ति में पहले 0,1,2,3,…..9 तक और फिर उसी के आगे 1 से 9 तक संख्याएं दी गई है।ये आनुपातिक अंतर (Proportional Parts) की संख्याएं हैं।पूरी सारणी में स्तंभों और पंक्तियों में लिखी गई इन संख्याओं के संगत संख्याएं लिखी हुई है।उदाहरण log3856 का भिन्नांश ज्ञात करना
  • दी हुई संख्या के पहले दो अंकों से बनी संख्या को सारणी के बायीं ओर के पहले स्तम्भ में देखते हैं।3856 में पहले दो अंकों से बनी संख्या 38 है अतः इस स्तम्भ में पहले 38 पर पहुंचते हैं।
  • अब इस संख्या के सामने की पंक्ति में वह संख्या देखते हैं जिसके ठीक ऊपर सारणी की पहली पंक्ति में दी गई संख्या का तीसरा अंक है।3856 में तीसरा अंक 5 है।सारणी में 38 के सामने और 5 के नीचे 5855 लिखा है।
    इसके बाद इसी पंक्ति में वह संख्या ज्ञात करते हैं जिसके ऊपर सारणी के अनुपातिक अंतर की संख्या में दी गई संख्या का चौथा अंक है।3856 में चौथा अंक 6 और 38 के सामने तथा अनुपातिक अंतर 6 के नीचे 7 लिखा है।
    इस प्रकार उपर्युक्त में प्राप्त संख्याओं का योगफल अर्थात् 5855+7=5862 ही अभीष्ट भिन्नांश होता है।अतः log3856 का भिन्नांश=.5862

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(5.)प्रतिलघुगणक (Antilogarithms):

कभी-कभी हमें इसके विपरीत क्रिया करनी पड़ती है अर्थात् हमें संख्या का लघुगणक (Logarithms) दिया होता है और वह संख्या ज्ञात करनी पड़ती है।कोई भी संख्या अपने लघुगणक (Logarithms) का प्रतिलघुगणक कहलाती है।

प्रतिलघुगणक ज्ञात करने की विधि (Method of Finding Antilogarithm):प्रतिलघुगणक ज्ञात करने के लिए प्रतिलघुगणक सारणी का प्रयोग करते हैं।इस सारणी की रचना भी लघुगणक सारणी की भांति होती है।अन्तर केवल इतना होता है कि इसमें बायीं ओर के प्रथम स्तम्भ में .00,.01,.02,…….,.99 तक की संख्याएं लिखी होती है।इस सारणी के उपयोग की विधि भी लगभग लघुगणक सारणी की भांति है।

उदाहरण 1 : चूँकि \log 3=0.4771 अतः 0.4771 का प्रतिलघुगणक 3 है। इसे antilog 0.4771=3 लिखकर व्यक्त करते हैं। antilog 1.6742=47.23
उदाहरण 2 : 2.5821 का प्रतिलघुगणक ज्ञात कीजिए। हल : दी हुई संख्या में भिन्ञांश .5821 है। प्रतिलघुणक सारणी में
(i) .58 की पंक्ति में 2 के नीचे 3819 है।
(ii) इसी पंक्ति में अनुपातिक अन्तर में 1 के नीचे 1 है।
(iii) अब (i) तथा (iii) में प्राप्त संख्याओं का योगफल 3820 है।
(iv) चूँकि दी गई संख्या का पूर्णांश \overline{2} है, अत: अभीष्ट संख्या में दशमलव बिन्दु के बाद एक शून्य होगा। इस प्रकार antilog 2.5821=0.03820=0.0382

उपर्युक्त आर्टिकल में लघुगणक (Logarithms) के बारे में बताया गया है।

(6.)मुख्य बातें (Highlight):

  • आधार के बराबर वाली संख्या का लघुगणक सदैव 1 होता है।
  • किसी भी आधार पर 1 का लघुगणक शून्य होता है।log(1)=0
  • लघुगणक (Logarithms) का आधार कोई भी राशि हो सकती है परंतु आधार e तथा आधार 10 वाली पद्धतियां सर्वाधिक उपयोग में लाई जाती है।
  • 1 से 10 के बीच की संख्याओं का लघुगणक (Logarithms) सदैव शुद्ध भिन्न होता है अर्थात् इसमें केवल भिन्नांश होता है और इसका पूर्णांश सदैव शुन्य (0) होता है।
  • एक दशमलव भिन्न के लघुगणक (Logarithms) का पूर्णांश उसके दशमलव चिन्ह के ठीक बाद शून्यों की संख्या से एक अधिक ऋणात्मक होता है।
  • एक छोटी संख्याओं का पूर्णांश ऋण संख्या प्राप्त होती है।उसे पूर्णांश के ऊपर रेखा चिन्ह (bar) द्वारा दर्शाया जाता है।ऐसी संख्या का पूर्णांश ऋणात्मक और भिन्नांश धनात्मक होता है।
  • 1 से छोटी संख्याओं के लघुगणक (Logarithms) में पूर्णांश ऋण और भिन्नांश धन रखने का यह लाभ है कि एक जैसे अंकों वाली संख्याओं के लघुगणकों के भिन्नांश समान हो जाते हैं।

2.लघुगणक (Logarithms) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.लॉगरिदम किसके लिए उपयोग किए जाते हैं? (What are logarithms used for?):

उत्तर:लॉगरिदमिक स्केल किसी मूल्य के सापेक्ष परिवर्तन को उसके निरपेक्ष अंतर (absolute difference) के विपरीत मापने के लिए उपयोगी होते हैं।इसके अलावा,क्योंकि लॉगरिदमिक फ़ंक्शन log(x) बड़े x के लिए बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है,बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक डेटा को संपीड़ित (compress) करने के लिए लॉगरिदमिक स्केल का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न:2.सरल शब्दों में लघुगणक क्या है? (What is a logarithm in simple terms?):

उत्तर:एक लघुगणक वह शक्ति (power) है जिसके लिए किसी अन्य संख्या को प्राप्त करने के लिए एक संख्या को उठाया जाना चाहिए।उदाहरण के लिए,10 का आधार 100 का लघुगणक 2 है,क्योंकि दस को दो की घात तक बढ़ाए जाने पर 100 है: log100=2।

प्रश्न:3.आप लघुगणक का अध्ययन कैसे करते हैं? (How do you study logarithms?):

उत्तर:दो संख्याओं के एक लघुगणक को एक दूसरे से विभाजित किया जा रहा है,x और y को दो लॉग में विभाजित (split into two logs) किया जा सकता है:भाज्य (dividend) का लघुगणक x में से भाजक (divisor) y का लघुगणक घटाना।यदि लघुगणक के कोणांक (argument) x में चरघातांक r है, तो चरघातांक को लघुगणक के सामने ले जाया जा सकता है।कोणांक (argument) के बारे में सोचो।(1/x),x-1 के बराबर है।

प्रश्न:4.वास्तविक जीवन में लघुगणक का उपयोग कैसे किया जाता है? (How are logarithms used in real life?):

उत्तर:लॉगरिदमिक फ़ंक्शंस का उपयोग करना
लघुगणक की अधिकांश शक्ति चरघातांकीय समीकरणों (exponential equations) को हल करने में उनकी उपयोगिता है।इसके कुछ उदाहरणों में ध्वनि (डेसिबल माप) [sound (decibel measures)],भूकंप (रिक्टर स्केल) [earthquakes (Richter scale)],सितारों की चमक (brightness of stars) और रसायन विज्ञान (पीएच संतुलन,अम्लता और क्षारीयता को मापना (pH balance, a measure of acidity and alkalinity)) शामिल हैं।

प्रश्न:5.लघुगणक के 4 नियम क्या हैं? (What are the 4 laws of logarithms?):

उत्तर:लघुगणक के नियम (Rules of Logarithms)
नियम 1: गुणन नियम (Product Rule)।
नियम 2: भागफल नियम (Quotient Rule)।
नियम 3: घात नियम (Power Rule)।
नियम 4: शून्य नियम (Zero Rule)।
नियम 5: सर्वसमिका नियम (Identity Rule)।
नियम 6: चरघातांक नियम का लघुगणक (आधार से घात नियम का लघुगणक) [Log of Exponent Rule (Logarithm of a Base to a Power Rule) ]
नियम 7: लॉग नियम का चरघातांक (लॉगरिदमिक पावर नियम का आधार) [Exponent of Log Rule (A Base to a Logarithmic Power Rule)]

प्रश्न:6.इसे लघुगणक क्यों कहा जाता है? (Why is it called a logarithm?):

उत्तर:17 वीं शताब्दी में स्कॉटिश गणितज्ञ जॉन नेपियर (1550 से 1617) द्वारा गणना उपकरण के रूप में लघुगणक का आविष्कार (Scottish mathematician John Napier) किया गया था,जिन्होंने अनुपात (लोगो) [ratio (logos)] और संख्या (अरिथमॉस) [number (arithmos)] के लिए ग्रीक शब्दों से शब्द गढ़ा था।

प्रश्न:7.लघुगणक के ऋणात्मक आधार क्यों नहीं हो सकते? (Why can’t logarithms have negative bases?):

उत्तर:और जैसा कि आप जानते हैं,जब तक हम काल्पनिक संख्याओं में नहीं जा रहे हैं,हम वर्गमूल के नीचे एक ऋणात्मक संख्या से निपट नहीं सकते हैं।तो संक्षेप में, क्योंकि हम लॉग के आधार को केवल 1 के बराबर नहीं एक धनात्मक संख्या होने की अनुमति देते हैं,इसका मतलब है कि लघुगणक का कोणांक केवल एक धनात्मक संख्या हो सकता है।

प्रश्न:8.लॉगरिदम के विभिन्न प्रकार क्या उपयोग किए जाते हैं? (What are different kinds of logarithms used?):

उत्तर:लॉगरिदम के बारे में जानने के बाद,हम देख सकते हैं कि लॉगरिदमिक फ़ंक्शन का आधार 1 और शून्य को छोड़कर कोई भी संख्या हो सकती है।हालाँकि,अन्य दो विशेष प्रकार के लघुगणक अक्सर गणित में उपयोग किए जाते हैं।ये सामान्य लघुगणक (common logarithm) और प्राकृतिक लघुगणक (natural logarithm) हैं।

प्रश्न:9.लघुगणक के भागों को क्या कहते हैं? (What are the parts of logarithms called?):

उत्तर:जिस प्रकार एक चरघातांकीय फलन के तीन भाग होते हैं,उसी प्रकार एक लघुगणक के भी तीन भाग होते हैं: एक आधार (base), एक कोणांक (an argument) और एक उत्तर (answer) (जिसे शक्ति भी कहा जाता है)।इस फ़ंक्शन में,आधार 2 है,कोणांक 3 है और उत्तर 8 है।

प्रश्न:10.रैखिक और लघुगणक के बीच अंतर क्या है? (What is the difference between linear and logarithmic?):

उत्तर:रैखिक रेखांकन (Linear graphs) को स्केल किया जाता है ताकि समान ऊर्ध्वाधर दूरियां (equal vertical distances) समान निरपेक्ष-डॉलर-मूल्य परिवर्तन (absolute-dollar-value change) का प्रतिनिधित्व करें।लॉगरिदमिक स्केल प्रतिशत परिवर्तनों को प्रकट करता है।उदाहरण के लिए, 100 से 200 में परिवर्तन उसी तरह प्रस्तुत किया जाता है जैसे 1,000 से 2,000 में परिवर्तन।

प्रश्न:11.लघुगणक का दूसरा नाम क्या है? (What is another name for logarithm?),लघुगणक के लिए दूसरा शब्द क्या है? (What is another word for logarithm?):

उत्तर:संख्यात्मक अंकगणित (numeric arithmetic)
डिफरेंशियल डिजिटल (differential digital)
चरघातांक चरघातांकीय (exponent exponential)
भिन्न भिन्नात्मक (fraction fractional)
समाकृत लघुगणक (integrated logarithmic)

प्रश्न:12.लघुगणक पर क्या प्रतिबंध हैं? (What are the restrictions on logarithms?):

उत्तर:लघुगणक के नियम (Laws of logarithms):
एक लघुगणकीय फलन में आधार b धनात्मक होना चाहिए।चरघातांकों के लिए,इस शर्त ने आश्वासन दिया कि bx से आउटपुट हमेशा धनात्मक थे।लघुगणक के लिए,यह एक प्रतिबंध है जो कहता है कि इनपुट हमेशा धनात्मक होना चाहिए।लघुगणक पूरी तरह से y-अक्ष के दाईं ओर रहते हैं।

प्रश्न:13.चरघातांकीय फलन का आधार ऋणात्मक क्यों हो सकता है? (Why can base of exponential function be negative?):

उत्तर:चरघातीय फलनों का आधार धनात्मक होना चाहिए। यहाँ bx हमेशा धनात्मक होता है,जो तभी संभव है जब आधार धनात्मक हो।f(x) के मान ऋणात्मक या धनात्मक होते हैं क्योंकि फलन का विस्तार (range) सीमित होता है।

प्रश्न:14.गणित में लॉग का क्या अर्थ है? (What does log mean in maths?):

उत्तर:लोगारित्म (logarithms)
बीजगणित में,”लॉग” “लघुगणक” के लिए संक्षिप्त है। लघुगणक चरघातांक वाले समीकरणों के विपरीत या प्रतिलोम हैं,जैसे y = x^3।अपने सरलतम रूप में,लॉग यह निर्धारित करने में मदद करते हैं कि दूसरी संख्या प्राप्त करने के लिए एक संख्या में से कितने गुणा (multiplied) किया जाना चाहिए।

प्रश्न:15.लीनियर और लॉगरिदमिक पोटेंशियोमीटर में क्या अंतर है? (What’s the difference between linear and logarithmic potentiometer?):

उत्तर:विभिन्न ट्रैक वाले दो प्रकार के पोटेंशियोमीटर उपलब्ध हैं।रैखिक पोटेंशियोमीटर के साथ,ट्रैक के एक छोर और वाइपर के बीच प्रतिरोध एक स्थिर दर पर बदलता रहता है क्योंकि स्लाइडर को ट्रैक के साथ ले जाया जाता है। लॉगरिदमिक प्रकारों में, ट्रैक के एक छोर से दूसरे छोर तक प्रतिरोध में परिवर्तन बहुत कम होता है।

प्रश्न:16.क्या लॉगरिदमिक रैखिक से तेज है? (Is logarithmic faster than linear?):

उत्तर:एक लॉगरिदमिक फ़ंक्शन एक रेखीय फ़ंक्शन की तुलना में बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहा है जैसे कि एक रैखिक फ़ंक्शन एक चरघातीय फ़ंक्शन की तुलना में बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहा है।ये कार्य पदानुक्रम (hierarchy) के बुनियादी नियम (basic laws) हैं।

प्रश्न:17.क्या चरघातांक का आधार ऋणात्मक हो सकता है? (Can the base of an exponential be negative?):

उत्तर:डोमेन पर लगातार वृद्धि या कमी और प्रतिबंधों में उनकी अक्षमता के कारण,चरघातीय फलनों के ऋणात्मक आधार नहीं हो सकते हैं।

प्रश्न:18.क्या एक लॉगरिदमिक फ़ंक्शन एक चरघातीय फ़ंक्शन के समान है? (Is a logarithmic function the same as an exponential function?):

उत्तर:लॉगरिदमिक फ़ंक्शन चरघातांकीय फलनों के व्युत्क्रम हैं।चरघातांकीय फलन y=ax का प्रतिलोम x=ay है।लॉगरिदमिक फ़ंक्शन y = logax को चरघातांकीय समीकरण x=ay के बराबर परिभाषित किया गया है।तो आप देखते हैं कि एक लघुगणक एक चरघातांक से अधिक कुछ नहीं है।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा लघुगणक (Logarithms) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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