High-Tech Brain:How to Make Mind High-Tech?
1.हाइटेक दिमाग:मन को हाइटेक कैसे बनाएंगे? (High-Tech Brain:How to Make Mind High-Tech?):
- हाइटेक दिमाग:मन को हाइटेक कैसे बनाएंगे? (High-Tech Brain:How to Make Mind High-Tech?) मन को हाइटेक बनाने की कला ही सबसे बड़ी कला है।जानिए विज्ञान ने कितनी प्रगति कर ली? क्या हाईटेक होने के बावजूद मन की बराबरी की जा सकती है?
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2.कंप्यूटर के बुद्धिसंपन्न बनने की शुरुआत (beginning of the intelligentization of computers):
- मानवीय बुद्धि ने आश्चर्यजनक आविष्कार किए हैं।बौद्धिक क्षमता और कुशलता से असंभव लगने वाले दीर्घावधि के कार्य क्षणभर में,पलभर में संपन्न होने लगे हैं।मानवीय बुद्धि ने अपने ही मस्तिष्क की विराट जानकारी एवं प्रक्रियाओं को आधार बनाकर कृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence) का उद्भव किया है।सन् 1956 में जाॅन मैकार्थी ने कृत्रिम बुद्धि (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) शब्द का प्रयोग करके स्पष्ट किया कि यह बौद्धिक मशीन का विज्ञान है,जो तकनीकी है।कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में प्रयुक्त होने वाला यह शब्द भविष्य की अनेक जिज्ञासाओं को समेटे हैं।
वर्तमान में कंप्यूटर के क्षेत्र में अनेक नए आयाम विकसित हुए हैं।इससे इंसानी दिमाग की तर्ज पर काम करने वाले ज्ञानसंवेदी कंप्यूटर (कॉग्निटिव कंप्यूटिंग) के निर्माण का सपना पूरा हुआ है। - यह सपना 65 वर्ष पुराना है।19वीं सदी एवं 20वीं शताब्दी में यह शब्द एक कल्पना एवं रहस्य था,परंतु यह कल्पना वर्तमान में हकीकत बनकर सामने है।इस सपने को बढ़ाने में न्यूरोलॉजी,सूचना सिद्धांत एवं साइबरनेटिक्स मील के पत्थर साबित हुए हैं।इनके आधार पर कृत्रिम बुद्धि की यात्रा वर्तमान अवस्था तक पहुंची है।
- संभव है,आगे इसमें और भी अकथनीय कड़ियां जुड़ने लगेंगी।इतने वर्षों में वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बुद्धि को कुतर्क (फर्जी लॉजिक) और न्यूरल नेटवर्क के विकास की मंजिलें पार की हैं,परंतु कंप्यूटर को आंख,कान और दिल दे पाने में कामयाबी मिलना अभी शेष है।सन् 1956 में एक सम्मेलन हुआ,जिसमें जाॅन मैकर्थी,मर्विनर्मिस्की,एलेन नेवले और हर्बर्ट साइमन आदि प्रमुख विद्वान विद्यमान थे।इन्हीं को इस अविष्कार का प्रमुख श्रेय जाता है।
- कंप्यूटर अलजेब्रा (Algebra) को हल करने लगा,तार्किक प्रमेय को जानने लगा एवं अंग्रेजी बोलने लगा।इससे सभी हतप्रभ थे।1960 से इसके प्रयासों में तेजी आई।इस कार्य से उत्साहित होकर हर्बर्ट साइमन ने घोषणा की कि आगामी 20 वर्षों में कंप्यूटर वही सब कुछ करता नजर आएगा,जैसे कि मनुष्य करता है।मर्विनर्मिस्की ने आगे इसमें यह जोड़ा है।”इसी पीढ़ी में कृत्रिम बुद्धि का उपयोग किया जाने लगेगा।”
- सन् 1980 में अर्थात् ठीक 20 वर्ष बाद इनकी भविष्यवाणियाँ सच साबित होने लगीं।यह व्यावसायिक सफलता (Professional Success) हासिल करने लगी और 1985 में इसमें अरबों डॉलर का व्यवसाय होने लगा।सन् 1985 में इसमें कुछ व्यतिक्रम भी आया,परंतु कुछ समय के व्यतिरेक के पश्चात यह फिर नए आयामों को गढ़ने लगा।90 के दशक एवं 21वीं सदी के प्रारंभिक दरजों में यह सफलता की नई ऊंचाइयों को छूने लगा।आज यह लॉजिस्टिक्स,डाटा माइनिंग,मेडिकल डायग्नोसिस एवं अन्य अनेक तकनीकी उद्योगों में प्रयुक्त हो रहा है।
- जनसंवेदी कंप्यूटर से अनेक लाभ हैं।आधुनिक जीवन शैली (Modern Life Style) की रफ्तार में यह सहायक हो रहा है।इसकी शुरुआत बुद्धिसंपन्न (इंटेलिजेंस) कंप्यूटर की अवधारणा से शुरू हुई।इन प्रारंभिक प्रयासों की अपनी सीमाएं थीं;क्योंकि यह सिस्टम अपने अनुभव से सीखना नहीं जानते थे।हालांकि प्रारंभिक दौर में कंप्यूटर को कुछ बौद्धिक प्रक्रियाएं सीखने में सफलता मिली,लेकिन इसमें स्वयं निर्णय ले पाने की सामर्थ्य नहीं थीं,न ही ये आसान परिस्थितियों का विश्लेषण कर कोई सार्थक समाधान दे पाते थे।
- इस प्रकार कृत्रिम बुद्धि विकसित करने का उत्साह एवं उमंग कुछ असफलताओं के साथ लड़खड़ाने लगा।कुछ अवस्था तो ऐसी थी कि कहीं यह कल्पनाओं का मकड़जाल न बन जाए,परंतु यह संकट अधिक समय तक टिक नहीं सका और सफलता का सूर्य अपनी रश्मियाँ बिखेरने लगा।
3.कॉग्निटिव कंप्यूटर टेक्नोलॉजी एवं क्रामोलाॅजी सम्मिश्रण (Blending Cognitive Computer Technology and Chromology):

High-Tech Brain:How to Make Mind High-Tech? (Teacher practicing math from book
Woman happy to study)
- यह मानवीय मस्तिष्क से संबंधित होने के कारण आवश्यक था कि सर्वप्रथम इसके गूढ़ रहस्य अनावृत्त हों।जैसे-जैसे इंसानी दिमाग (Humain Brain) की कार्य प्रणाली आशा प्रदीप हुई।1990 के दशक में कृत्रिम बुद्धि को ज्ञानसंवेदी कंप्यूटर का नाम दिया गया।अब तक वैज्ञानिक इंसानी दिमाग के मुकाबले बहुत तेज गति से काम करने वाले कंप्यूटर बना चुके थे और अब तो उन्होंने इंसानी दिमाग की रिवर्स इंजीनियरिंग (Reverse Engineering) की राह अख्तियार कर ली है।
- वस्तुतः वर्तमान दौर में ऐसे कंप्यूटर को भी नियमित करने का प्रयास किया जा रहा है,जो इंसानी दिमाग की तरह न्यूरल नेटवर्क (Neural Networks) की सहायता से घटनाओं एवं अनुभवों की श्रृंखला का विश्लेषण कर सही समाधान प्राप्त कर सके।
कॉग्निटिव कंप्यूटर टेक्नोलॉजी एवं क्रामोलाॅजी (Blending Cognitive Computer Technology and Chromology) का सम्मिश्रण है,जिससे मस्तिष्क को पुनः एक बार नए ढंग से बनाया जा सके।चूँकि यह केवल कंप्यूटर नहीं है,अतः धरती का सबसे प्रभावी एवं अनोखा होगा।यह सोच एवं विचार की भी क्षमता रख सकता है।वैज्ञानिकों के अनुसार न्यूरल नेटवर्क कंप्यूटर की जानकारी में अनवरत बढ़ोतरी करेगा,ताकि वह किसी तर्कसंगत विकल्प (Logical Alternative) को चुनने के स्तर पर पहुंच सके और किसी विपरीत एवं चुनौती भरी परिस्थिति का सार्थक निर्णय दे सके।इससे जुड़े वैज्ञानिक कहते हैं कि चूँकि इंसान का मस्तिष्क भी एक मशीन के समान है,अतः इसकी नकल करना संभव नहीं है।यह अपूर्ण सत्य है।

High-Tech Brain:How to Make Mind High-Tech? (The obsession of being a girl’s high-tech
Girl accustoming their brains to artificial intelligence)
- मस्तिष्क जैसी रचना तो संभव है,परंतु मन का निर्माण (Build of Mind) कर पाना असंभव कार्य है;क्योंकि मस्तिष्क तो एक यंत्र है,पर इसे संचालित एवं नियंत्रित करने का काम मन के द्वारा होता है।जो भी हो,ऐसा न सही,इसके जैसी मशीन का निर्माण भी एक उल्लेखनीय उपलब्धि होगी।
- मस्तिष्क की बनावट एवं बुनावट (Structure and Texture of the Brain) की जानकारी बढ़ने के साथ ही कृत्रिम बुद्धि की विकास यात्रा तीव्र हो रही है;क्योंकि कृत्रिम बुद्धि के निर्माण का आधार मस्तिष्कीय संरचना और इसका प्रकार्य है।विकास की कड़ी में कम्प्यूटर का निर्माण उल्लेखनीय उपलब्धि है।यह कम्प्यूटर ध्वनि-निर्देशों को ग्रहण कर उनका अनुपालन करता है।
- अब कम्प्यूटर का ऑपरेशन हाथ से नहीं,बल्कि बोलकर किया जाता है।इसका अनुप्रयोग अत्याधुनिक कार्पोरेट जगत में किया जा रहा है।इसके अलावा ज्ञान-संदेश प्रणालियाँ नई पीढ़ी के वायुयानों एवं जलयानों के दिशासूचक उपकरणों का हिस्सा बन चुकी हैं,जो वर्तमान में सामान्य परिस्थितियों में इन वाहनों को स्वतः ही नियंत्रित (Automatic Control) करती हैं।कार निर्माण कंपनियां ऐसी प्रणालियों के विकास में खुद रुचियाँ ले रही हैं,जो सोचने-समझने वाले चालकविहीन वाहनों (Driverless Vehicles) को हकीकत में बदल देंगी।निकट भविष्य में बाजार में ऐसी कारें आ जाएंगी,जिनमें चालक नहीं होगा,परंतु पूर्णतः नियंत्रित ढंग से सड़कों पर दौड़ा करेंगी।ऐसी कारों में आज के मुकाबले दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना बहुत कम हो जाएगी।
5.हर प्रकार का ज्ञान सीधे डाउनलोड (All kinds of knowledge directly download):
- कंप्यूटर की इस क्रांति से रक्षा-क्षेत्र में बड़ी सहायता मिलेगी।वैज्ञानिकों का दावा है कि वर्तमान में दुनिया के विकसित देश इतने विकसित हो चुके हैं की जंग के मैदान में इंसानी सैनिक भेजना बंद कर देंगे।स्वचालित ड्रोन विमान व रोबोट सैनिक उनकी जगह दुर्गम मोर्चे पर जंग लड़ते दिखाई देंगे।यही नहीं,इस माध्यम से क्षतिग्रस्त मस्तिष्क का उपचार भी संभव होगा।सदर्न कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने शरीर में प्रत्यारोपित की जा सकने वाली ऐसी इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियाँ (Electronic Systems) तैयार की हैं,जो भविष्य में नष्ट होने के कगार पर पहुंचती कुदरती तंत्रिकाओं की जगह लेंगी।इस अनुसंधान से लंबे समय तक शरीर को जवान बनाए रखा जा सकता है।
- वैज्ञानिक कहते हैं कि वह दिन दूर नहीं,जब हर तरह का ज्ञान दिमाग में सीधे डाउनलोड (Download directly in mind) किया जा सकेगा।इनका कहना है कि आनेवाली पीढ़ियों को पढ़ाई लिखाई में 15-20 साल खर्च नहीं करने पड़ेंगे।कठिनतम-कौशल पलक-झपकते ही दिमाग में उतारा जा सकेगा और नैनो-मेटोरियल से बनी कृत्रिम तांत्रिकाएं दिमाग की रफ्तार व याददाश्त को लाखों गुना बढ़ा देंगी।यही नहीं,इंसान अपनी भावनाओं को कंप्यूटर के साथ बांटने लगेगा और मशीन उसकी मनोवैज्ञानिक उलझनों का हल प्रस्तुत करेंगी।
- हॉलीवुड की विज्ञान फिल्मों में दिखाई जाने वाली ये फंतासियाँ (Fantasies) कहीं हकीकत का रूप धर हमारे सामने ना आ जाएँ।वैज्ञानिक कहते हैं कि हार्मोनों की घट-बढ़ से इंसानी दिमाग में उठने वाली जज्बाती तूफान बड़े कारक हैं।इनसे कार्य प्रभावित होता है।कंप्यूटर के साथ यह समस्या नहीं होगी,अतः वह किसी दिशा में गहराई से सोचने में सक्षम हो सकेगा।नैनोटेक भविष्यवेत्ता जाॅन बर्च इंसानी दिमाग में ज्ञानसंवेदी कंप्यूटर को एक कल्पना नहीं मानते।उनके अनुसार सन् 2030 के आस-पास गैर जैविकी नैनो-मेटीरियल दिमागी कोशिकाओं की जगह लेने लगेंगी।इनकी सहायता से दिमागी क्षमता को कई गुना बढ़ाया जा सकेगा।वे आगे कहते हैं कि नया दिमाग हमारी समूची शख्सियत की पूरी नकल होगा,परंतु यह उससे लाखों लाख गुना अधिक तीव्रता से काम करेगा।यह हमारी याददाश्त (Our memory) को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ाने में सक्षम होगा।
- इसके अलावा भविष्य के मस्तिष्क में विचारों की रफ्तार को तेज भी किया जा सकेगा।जैविक कोशिकाओं का प्रतिक्रिया व्यक्त करने का वर्तमान समय 0.1 सेकंड से घटकर 0.00000005 सेकंड (50 नैनो सेकण्ड) यानी 2 करोड़ गुना कम हो जाएगा।मस्तिष्क किसी भी सुपर कंप्यूटर से भी अधिक काम करेगा।
बर्च का कहना है कि मस्तिष्क को हाईटेक बनाया जा सकता है।उनके अनुसार नैनो तकनीक से बनी रोजाना एक गोली के जरिए शरीर के भीतर नई तंत्रिकाओं का निर्माण करने वाले आवश्यक नैनोबीट्स भेजे जा सकते हैं।ये कृत्रिम तंत्रिकाओं की जगह लेती जाएंगी। - इस प्रक्रिया से मस्तिष्क को पता भी नहीं चलेगा और 6 महीने के अंदर एक नए मस्तिष्क की ताकत का एहसास होने लगेगा।साइबरनेटिक्स विशेषज्ञ क्रिमराफ काॅक का अनुमान है कि कॉग्निटिव कंप्यूटर के विकास से संभव है,कृत्रिम अंगों का इस्तेमाल आम हो जाए;क्योंकि मेडिकल साइंस में ऐसी व्यवस्था नहीं है,अतः इसके होने से एक अभूतपूर्व सफलता मिलेगी।यह प्रयोग 2050 तक व्यापक रूप से ठीक उसी प्रकार हो जाएगा;जैसे वर्तमान में मोबाइल का प्रयोग हो रहा है।
- कृत्रिम बुद्धि की खोज एवं उसके उपयोग के क्रांतिकारी परिवर्तन का स्वागत है,परंतु इससे यह न समझा जाए कि इससे इंसान बनाया जा सकेगा।विज्ञान की उपलब्धि इंसान के लिए हो,ना कि इसकी महत्ता इंसान को गौण बना दे।प्राकृतिक एवं कृत्रिमिता में भेद है।इंसान कुदरती देन,मन एवं मस्तिष्क का संबंध इसका अविच्छिन्न हिस्सा है।हां,यह तो ठीक है कि मस्तिष्क की क्षमता को बढ़ाया जाए,परंतु यह भी आवश्यक है कि उस क्षमता का उपयोग जनकल्याण के लिए हो,मात्र व्यावसायिक तात्पर्य के लिए ना हो जाए।बुद्धि के साथ भावनाओं का भी संयोग हो अन्यथा भावनाओं के बिना सब कुछ अधूरा एवं एकांगी है और वह मात्र निस्वार्थ सेवा (Selfless service) से प्राप्त की जा सकती है।अतः विज्ञान एवं भावप्रधान अध्यात्म का समन्वय होना चाहिए,ताकि जनकल्याण हो।
5.एआई जैसी स्मार्ट स्किल हो (Have smart skills like AI):
- आज के युग में सिर्फ साक्षर होना (डिग्री होना) या टॉपर होना (अच्छे मार्क्स) ही जॉब की जरूरत पूरी नहीं करते हैं।आवश्यक है स्मार्ट स्किल की,जो आपको भीड़ से हटकर और आगे रख सके।तेजी से बदलती दुनिया में कंपनियां अब ऐसे प्रोफेशनल्स को तरजीह देती है,जो सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान नहीं बल्कि तकनीकी समझ,आत्मविश्वास और लगातार सीखने की तीव्र उत्कंठा रखते हों।ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) आपकी बेहतरीन ताकत बनकर उभर रहा है।एआई अब किसी साइंस फिक्शन की चीज नहीं रह गई है।यह आपकी पढ़ाई,इंटरव्यू की तैयारी,कम्युनिकेशन स्किल्स और यहां तक की रिज्यूमे बनाने जैसी चीजों से भी मदद कर सकता है।फिर स्किल अपग्रेड करना चाहते हो,ये टूल्स आपके लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं।
जैसे जैमिनी (Gemini),चैटजीपीटी (ChatGPT),भारत का सर्वम (Sarvam) आदि। - एक छात्र जितना अधिक Proactive होता है,उतना ही वह अपनी परिस्थितियों पर नियंत्रण पा सकता है और उन्हें अपने पक्ष में मोड़ सकता है।Proactive बनना केवल स्वयं जिम्मेदारी लेना नहीं,बल्कि अपने जीवन के हर पक्ष में एक्टिव सुधार लाने की मानसिकता अपनाना है।जब आप Proactive होते हैं तो आप समस्या को स्वीकार करते हैं,उसके कारणों का एनालिसिस (Analysis) करते हैं और हल खोजने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।यह बात सफलता के करीब लाती है,साथ ही आत्मविश्वास,समय प्रबंधन,पर्सनेलिटी डेवलपमेंट को प्रोत्साहित करती है।
- कॉम्पिटेटिव एज (Competitive Age) में Proactive होना सफलता की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण गुण माना जाता है।इस शब्द का अर्थ है,किसी परिस्थिति या प्रॉब्लम का सामना करने के लिए पहले से तैयार रहना और आवश्यक स्टेप्स उठाना,बजाय इसके कि परिस्थितियों के घटित होने का इंतजार किया जाए।Proactive वे होते हैं जो अपनी परिस्थिति,जाॅब और रिजल्ट्स पर सक्रिय रूप से नियंत्रण रखते हैं।वे समस्या का सामना करने के लिए पहले से योजना बनाते हैं और हर परिस्थिति में आगे बढ़ने के तरीके खोजते हैं।
AI का इस्तेमाल करते हैं तो इन बातों का ध्यान रखें: - अगर बिना पुष्टि किए AI द्वारा दी गई हर जानकारी का आंख मूँदकर विश्वास कर लेते हैं तो खुद को विफलता के लिए तैयार कर रहे हैं।AI टूल्स कभी-कभी पुराना या गलत डेटा देते हैं और होमवर्क में इनका इस्तेमाल करने से ग्रेड पर असर पड़ सकता है।स्रोतों की पुष्टि के लिए सर्च इंजन पर पुष्टि करें।गूगल पर इमेज की पुष्टि के लिए रिवर्स सर्च (Reverse Search) का इस्तेमाल करें।
- जरूरी नहीं है,AI ने जो सामग्री दी है,वह पूरी तरह से मौलिक ही होगी।ऐसे में आप AI टूल्स की जानकारी को ले रहे हैं तो आपको संपादन कर काम को अपना बनाना चाहिए और जहां जरूरी हो,वहां स्रोतों का हवाला देना चाहिए।चेकर के जरिए स्रोतों का पता लगाएं।
- आजकल कंपनियों की एआई-बेस्ड मार्केटिंग इतनी प्रबल है कि हर कोई इसके झांसे में आ रहा है।आपको समझना चाहिए कि यह बस एक टूल है,जो आपका सहायक बन आपका काम थोड़ा आसान करेगा।यह समय बचा सकता है,लेकिन हर बार एआई टूल्स का इस्तेमाल करने से बचें।
उपर्युक्त आर्टिकल में हाइटेक दिमाग:मन को हाइटेक कैसे बनाएंगे? (High-Tech Brain:How to Make Mind High-Tech?) के बारे में बताया गया है। - ### 📢 यदि आपको यह गणित का आर्टिकल पसंद आया हो:
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6.एआई या शिक्षक में दूर कौन है? (हास्य-व्यंग्य) (Far Who’s Away in AI or Teacher?) (Humour-Satire):
- गणित शिक्षिका ने छात्र से प्रश्न पूछा:बताओ एआई दूर है या गणित का टीचर।
- निखिलःमैम,एआई ज्यादा दूर है।
- टीचर (चौंकते हुए):वो कैसे?
- निखिल:क्योंकि टीचर दिखाई देता है परंतु एआई दिखाई नहीं देता है।
7.हाइटेक दिमाग:मन को हाइटेक कैसे बनाएंगे? (Frequently Asked Questions Related to High-Tech Brain:How to Make Mind High-Tech?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.एआई में निपुण होने के लिए क्या जरूरी है? (What is required to be proficient in AI?):
उत्तरःप्रोग्रामिंग लैंग्वेज और मैथमेटिक्स का ज्ञान होना तो जरूरी है।साथ ही अलग हटकर सोचना भी आना चाहिए;क्योंकि इस फील्ड में कई समस्याएं आती है जिन्हें क्रिटिकल थिंकिंग से ही हल कर सकते हैं।
प्रश्न:2.एआई का प्रयोग कहां असंभव है? (Where is it impossible to use AI?):
उत्तरःभावनात्मक बुद्धि,नेतृत्व क्षमता,सहानुभूति,जटिल निर्णय और क्रिएटिविटी वाले फील्ड में एआई का प्रयोग असंभव है।
प्रश्न:3.एआई के लिए कौनसी लैंग्वेज सीखें? (What language to learn for AI?):
उत्तर:पाइथन और मशीन लर्निंग तथा सी प्लस प्लस (C++),जावा स्क्रिप्ट आदि।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा हाइटेक दिमाग:मन को हाइटेक कैसे बनाएंगे? (High-Tech Brain:How to Make Mind High-Tech?) के बारे में प्रारम्भिक शब्दों के अर्थ जान सकेंगे।
- *”यह आर्टिकल **Satyam Mathematics** ब्लॉग पर **Satyam Coaching Centre** के द्वारा तैयार किया गया है।”*
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