Computer Ek Vardan ya Abhishap
1.कंप्यूटर एक वरदान या अभिशाप (Computer Ek Vardan ya Abhishap):
- कंप्यूटर एक वरदान या अभिशाप क्या है? (Computer Ek Vardan ya Abhishap) क्या हम कंप्यूटर को चला रहे हैं या कंप्यूटर हमें? जानिए कैसे एक मशीन हमारी जिंदगी की डोर अपने हाथ में ले रहा है।इस लेख में कंप्यूटर के लाभ और हानियों का पूरा विश्लेषण है।
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2.कंप्यूटर एक वरदान के रूप में (Computer Ek Vardan Ke Roop Mein):
- आज के डिजिटल युग में कंप्यूटर हमारी जिंदगी का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है।सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक,हम किसी न किसी रूप में इस पर निर्भर हैं।जहां इसने तरक्की के नए रास्ते खोले हैं,वहां कुछ गंभीर चिंताएं भी पैदा की हैं।
- कंप्यूटर का आविर्भाव इस युग की क्रांतिकारी घटना रही है,जिसने मानवीय जीवन की कार्यक्षमता में अप्रत्याशित वृद्धि कर मानवीय सभ्यता को एक नई दिशा दी है।पहले जो कार्य घंटों एवं दिनों में होते थे,वे इसके रहते आज मिनटों में होने लगे हैं।इसके बहुआयामी उपयोग के कारण आज कंप्यूटर मनुष्य के एक अभिन्न सहयोगी के रूप में उभरकर सामने आया है।इसके बिना जीवन की कल्पनामात्र दूभर है।भारत में हालाँकि इसका प्रवेश अधिक पुराना नहीं है,किंतु तीव्रता से इसमें वृद्धि हो रही है।इस समय लगभग 10 लाख लोग इसका पेशे के बतौर उपयोग कर रहे हैं,जबकि पश्चिम के विकसित देशों में तो यह तादाद भारी-भरकम है।अकेले अमेरिका में लगभग 5 करोड लोग व्यवसाय के रूप में कंप्यूटर का उपयोग कर रहे हैं।
यह वरदान के रूप में इस प्रकार है:शिक्षा में क्रांति (Shiksha mein kranti): - आज ऑनलाइन क्लासेस और डिजिटल लाइब्रेरी (Digital kranti) की मदद से दुनिया भर का ज्ञान हमारी उंगलियों पर है।गणित (Mathematics) जैसे जटिल विषय को समझने के लिए नए सॉफ्टवेयर ने काम आसान कर दिया है।
व्यापार और नौकरी (Vyapaar aur Naukri):
- घर बैठे काम करना (work from home) और डिजिटल मार्केटिंग (digital marketing) ने बेरोजगारी को दूर करने में मदद की है।
- समय की बचत (samay ki bachat):
जो काम पहले महीनों में होते थे,वो अब कुछ सेकंड में हो जाते हैं।कंप्यूटर इतनी तेज गति से गणना करता है कि पलक झपकते ही पूरी दुनिया की जानकारी और हमारी वांछित चीजों को उपलब्ध करा देता है परंतु विद्यार्थियों को ध्यान रखना चाहिए कि हमारी दिमाग की कसरत वैदिक गणित से होती है।अतः वैदिक गणित के फाॅर्मूलों और ट्रिक्स को अपनाएं जिससे आपका दिमाग कैलकुलेटर और कंप्यूटर की तरह गणना करने लग जाए। - रिसर्च में भी यह उल्लेखनीय सहायक के रूप में हमारे पास मौजूद है।आज तकनीकी और शोध कार्यों में तीव्र गति से इतने अनुसंधान इसीलिए हो रहे हैं।
- Education Tip:शिक्षा के क्षेत्र में ब्लैक बोर्ड से व्हाइट बोर्ड होते हुए डिजिटल बोर्ड और प्रोजेक्टर की सहायता से छात्र-छात्राओं की एक बड़ी संख्या को आधुनिक तरीके से पढ़ाने में इससे मदद मिली है।
Fact-based Hook:दुनिया की 70% से ज्यादा अर्थतंत्र आज कंप्यूटर पर टिका है।लेकिन क्या आपने सोचा है कि एक छोटा सा साइबर अटैक हमारी पूरी दुनिया को रोक सकता है? इसलिए इसको काम लेने के साथ-साथ इसकी सुरक्षा तकनीकों को जानना भी जरूरी है।आइए जानते हैं कि कैसे कंप्यूटर हमारे लिए अभिशाप बन रहा है?
3.कंप्यूटर एक अभिशाप के रूप में (Computer Ek Abhishap Ke Roop Mein):
- जिस कंप्यूटर का आविर्भाव मनुष्य के अभिन्न सहयोगी-सहचर के रूप में हुआ,अपनी बहुआयामीय उपयोगिता के कारण जो मनुष्य के लिए एक वरदान के रूप में प्रकट हुआ,वही आज अपने घातक दुष्परिणामों के कारण अभिशाप (Abhishap) भी सिद्ध हो रहा है।कंप्यूटर के अत्यधिक उपयोग के कारण उत्पन्न हो रहे नाना प्रकार के भयंकर रोग इसकी सूचना दे रहे हैं।अकेले अमेरिका में इसने हजारों लोगों का जीवन पंगु बना दिया है और अधिकांश लोगों को अपने व्यवसाय एवं नौकरियों के लिए विवश कर दिया है।
- चिकित्सा विज्ञान ने इन लोगों को कंप्यूटर रिलेटेड डिसिस’ अर्थात कंप्यूटर संबंधित रोग कहा है।कंप्यूटर के अत्यधिक प्रयोग से होने वाले इन रोगों में’ रोटेटर ‘कफ्इंज्यूरीस’ अर्थात् कंधों के जकड़ जाने से होने वाला असह्य दर्द,’एपीकोण्डाइलाइटिस’-टेंडन घिसने से कोहनी एवं बगल के स्नायु में पीड़ा एवं सूजन आना,’टिनोसायनोवायटिस’ हथेली की मांसपेशियों में सृजन वाली कोशिकाओं पर अधिक दबाव से स्नायु का निष्क्रिय बनना और ‘टेंडिनाइटिस’ टेंडन में सूजन आने से हाथ के स्नायुओं में जलन व दर्द मुख्य है।
इन रोगों के प्रमुख शिकार चार्टर्ड अकाउंटेंट,मैनेजमेंट कंसल्टेंट,शेयर दलाल,वकील एवं पत्रकार हुए हैं,जो पूरा दिन कंप्यूटर की-बोर्ड पर काम करते हुए और स्क्रीन पर नज़रें गड़ाए रहते हैं। - कंप्यूटर से उत्पन्न रोगों की इसी श्रृंखला में एक घातक रोग है ‘रिपिटेटिव स्ट्रेस इंज्युरीस’ (आर० एस० आई०),जो व्यक्ति को अपंगता के अभिशाप से ग्रसित तक कर देता है।यह रोग मुख्यतः प्रतिदिन एकसा काम करने वाले लोगों को होता है,क्योंकि उनके कुछ निश्चित अंगों को अत्यधिक श्रम करना पड़ता है तथा लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर उपर्युक्त रोग उन अंगों की अपंगता के रूप में प्रकट होता है।
- पिछले समय अमेरिका की सुप्रतिष्ठित पत्रिका ‘रायटर’ के संपादक ग्रांट मेककुल कंप्यूटरजनित इस रोग के शिकार हो गए और अब वे अपनी रिपोर्ट कंप्यूटर पर कभी नहीं भेज सकते हैं।वे अब कार भी नहीं चला सकते,क्योंकि उनके पीड़ाग्रस्त हाथों में स्टीयरिंग ह्वील पर सही नियंत्रण रखने की शक्ति नहीं रही।मेककुल को इस रोग का अहसास तब हुआ,जब रोज घंटों कंप्यूटर की-बोर्ड का उपयोग करने के बाद उनके हाथों में जबरदस्त पीड़ा होने लगी।सुबह उठने के साथ ही उनके हाथों में जलन एवं जोड़ों में भयंकर दर्द होता।चिकित्सकों ने जांच के बाद ग्रांट को कंप्यूटर का उपयोग तत्काल रोक देने की सलाह दी।इस तरह आज ग्रांट मेककुल उस रोग के कारण अपंग की-सी स्थिति में हैं,जो उंगली,कलाई तथा कंधों में स्नायुओं तथा मांसपेशियों के अत्यधिक प्रयोग से जन्म लेता है।
- अकेले मेककुल नहीं,अमेरिका के कारखानों और दफ्तरों में काम करने वाले दो लाख कामगार बाबू इस रोग के शिकार हैं और हर वर्ष उनकी संख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है।यही स्थिति कंप्यूटर का अत्यधिक उपयोग करने वाले अन्य देशों की है।आर०एस०आई० का घातक प्रभाव किसी एक अंग तक सीमित नहीं है।इसके कारण व्यक्ति की कमर से ऊपर का पूरा हिस्सा कई तरह की तकलीफों को भोगता है।
- इस रोग का पहला शिकार हथेलियां तथा आंखें होती हैं। कंप्यूटर की-बोर्ड के लगातार उपयोग के बाद उंगलियों में दर्द होने लगता है एवं कलाइयाँ जवाब देने लगती हैं।उंगलियों के जोड़ों में एक तरह की जलन होने लगती है।कई बार तो हाथों में सूजन तक आ जाती है और उंगलियों की सूक्ष्म रक्त वाहिनियों के कमजोर पड़ जाने से उंगलियों के सिरे सफेद पड़ जाते हैं।
4.कंप्यूटर से अन्य रोग और खतरे (Other diseases and dangers from computers):
- कंप्यूटर से जुड़े घातक रोगों का अन्य नाम है ‘कार्पेटनल सिंड्रोम’, जो हथेली में कलाई के समीप वाले भाग को मांसपेशियों में सूजन से शुरू होता है।इस रोग से महीनों और वर्षों तक छुटकारा नहीं मिल पाता।अतः इस रोग के चलते अनेक कर्मचारियों को अंदर की ओर मोड़ देते हैं।
- गर्भवती महिलाओं पर भी कंप्यूटर के दुष्प्रभावों का आकलन कई प्रकार से होता रहा है।भ्रूण के विकृत होने,उसके नष्ट होने व अक्षम संतान के जन्म लेने तक के दुष्प्रभावों को कंप्यूटर से संबंधित पाया गया है।हालांकि कंप्यूटर विशेषज्ञ एवं गायनेकोलॉजिस्ट इस बात पर अधिक बल दे रहे हैं कि कंप्यूटर के प्रतिकूल प्रभाव के लिए उसके किरणोत्सर्ग के बजाय घंटों तक एक स्थिति में बैठे रहने के कारण होने वाला ‘स्ट्रेस’ अधिक जिम्मेदार है।अनवरत कंप्यूटर के सामने बैठे रहने से आंखों पर जो जोर पड़ता है,वह अंततः मनोशारीरिक तनाव में पलट जाता है।
- कंप्यूटर जनित रोगों के कारण जहाँ व्यक्ति का स्वास्थ्य घातक रूप से प्रभावित हो रहा है,वहीं कंपनियों एवं संस्थानों की कार्यक्षमता भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।अमेरिका में अनेक कंपनियों को अपने कर्मचारियों की उत्पादन क्षमता घट जाने से हर वर्ष 7 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
- साथ ही कंप्यूटर रोग से पीड़ित कर्मचारियों की चिकित्सा के पीछे भी करोड़ों डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं।अनेक कंपनियों ने आर०एस०आई० पीड़ित कर्मचारियों को कम और हलके काम वाले विभाग में ‘ट्रांसफर’ कर दिया है।दूसरी ओर अधिकांश कामगार संगठनों की मांग है कि कंपनी संचालक अपने कर्मचारियों को अधिक बेहतर की-बोर्ड वाले कंप्यूटर उपलब्ध कराएँ तथा दफ्तर के फर्नीचर में सुधार कर कंप्यूटर ऑपरेटर को प्रति 2 घंटे पर 15 मिनट का विश्राम दें।
- यदि कंप्यूटर का सही उपयोग नहीं किया जाए,तो यह किसी अभिशाप से कम नहीं है।स्वास्थ्य पर प्रभाव (Swastyya par prabhav):जैसे कि ऊपर देखा कि सामने बैठने से आंखों की रोशनी कम होना,पीठ में दर्द और मानसिक तनाव (stress) बढ़ रहा है।
- साइबर क्राइम (cyber crime),डाटा चोरी (data chori),हैकिंग (haking) और ऑनलाइन फ्रॉड ने सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- सामाजिक दूरी (Samajik Doori):लोग वर्चुअल दुनिया में इतने खो जाते हैं कि अपने परिवार और दोस्तों से दूर होते जा रहे हैं।
- कंप्यूटर अपने अपने आप में बुरा नहीं है।यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसे एक औजार (tool) की तरह इस्तेमाल करें,तो यह वरदान है,लेकिन अगर हम इसके गुलाम बन जाएं,तो यह अभिशाप है।
अति हर चीज की खराब होती है,किसी भी अच्छी चीज की लत लग जाती है तो वह अपना दुष्प्रभाव दिखाती ही है।अब हम जानेंगे कि कंप्यूटर से रोगों और खतरों से कैसे बचें।केवल यह जानना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि यह ज्यादा जरूरी है कि उन उपायों पर अमल करें तभी कंप्यूटर के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।
5.कंप्यूटर के दुष्प्रभावों से बचाव (Preventing Computer Side Effects):
- कंप्यूटर रोग के उपचारार्थ अपने स्तर पर प्रयास चल रहे हैं।कंप्यूटर या वर्ड प्रोसेसर का उपयोग करने वाले कर्मचारी हाथ में पीड़ा अनुभव करें तो बर्फ लगा सकते हैं।मरहम लगाकर पीड़ा को कम कर सकते हैं और पीठ में दर्द अनुभव होने पर थोड़ी देर फोम रबर के गद्दे पर लेटकर संकुचित हुई स्नायुओं को विश्राम दे सकते हैं।
- कंप्यूटरों के रोग के उपचारार्थ किए जाने वाले इन उपकरणों के साथ यदि योग विज्ञान की कुछ क्रियाओं को भी अपनाया जाए तो इन रोगों के घातक प्रभावों को बहुत हद तक रोका जा सकता है।आसनों के लाभ सर्वविदित हैं।ये मांसपेशियों को ही प्रभावित नहीं करते,बल्कि स्वास्थ्य,स्फूर्ति एवं आरोग्यता के उत्प्रेरक सूक्ष्म जैव रसायन के स्रवण एवं प्रसार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- प्रज्ञायोग के व्यायाम में महत्त्वपूर्ण आसनों का समन्वय है,जो समूचे कायतंत्र को प्रभावित करता है।नित्य 10-15 मिनट का इसका अभ्यास आशातीत लाभ देने में सक्षम है।साथ ही प्राणायाम का अभ्यास प्राणशक्ति को धारण कर स्वयं को सशक्त बनाने का एक महत्त्वपूर्ण व्यायाम है।इसमें भी प्राणाकर्षण जैसे सरल सुगम प्राणायाम को कहीं भी कभी भी किया जा सकता है।अखिल ब्रह्मांड में व्याप्त हमारे चारों ओर फैले लहलहा रहे प्राणऊर्जा के भंडार से अपने लिए उपयुक्त प्राणशक्ति को श्वास के माध्यम से ग्रहण एवं धारण करने का अभ्यास मानसिक स्थिरता एवं शारीरिक स्वास्थ्य संतुलन का एक बेहतरीन प्रयोग साबित हुआ है।
- आसन,प्राणायाम के साथ ध्यान का क्रम भी जुड़ जाए तो जीवनचार्य की सम्यक व्यवस्था एवं सुनियोजन का कार्यक्रम सुनिश्चित हो जाता है।इस तरह कंप्यूटर संस्कृति के बढ़ते दुष्प्रभावों को रोकने में वैज्ञानिक स्तर पर चल रहे चिकित्सकीय प्रयासों की सामयिक महत्ता अपनी जगह है,योग विज्ञान की आसन-प्राणायाम-ध्यान जैसी सूक्ष्म प्रक्रियाओं का स्वल्प ही सही,किंतु नियमित उपयोग कंप्यूटर जनित रोगों के अभिशाप से मनुष्य को अधिकतम राहत दिला सकता है और इसके घातक प्रभावों को प्राथमिक स्तर पर ही निरस्त कर कंप्यूटर के वरदान को अभिशाप बनने से रोक सकता है।
- शारीरिक और मानसिक रोगों की रोकथाम के लिए ध्यान-योगासन-प्राणायाम करना रामबाण औषधि है। हम स्वयं रोजाना ध्यान-योगासन-प्राणायाम करते हैं और मोबाइल व कंप्यूटरों से जनित रोगों से बचे रहते हैं।योग एक संपूर्ण जीवन पद्धति है यह केवल औषधीय उपचार ही नहीं है बल्कि जीवन को पूरी तरह से संतुलित करने की जीवन पद्धति है।हम अपने व्यक्तिगत अनुभव से इस बात को आपको बता रहे हैं।
- साइबर क्राइम व फ्राॅड बचने के लिए यों तो साइबर पुलिस की मदद ले सकते हैं।फिर भी व्यक्तिगत स्तर पर कुछ उपायों को अमल में लेकर आप साइबर फ्राॅड से बच सकते हैं।साइबर क्राइम से बचाव के लिए हमने एक लेख लिखा है उससे भी लाभ उठा सकते हैं।सामाजिक दूरी को कम करने के लिए अपनी व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर परिवार,मित्रों और सामाजिक लोगों के साथ समय बिताना चाहिए।वर्चुअल वर्ल्ड के बजाय हमें रीयल लाइफ में जीने से आत्मिक शांति और संतोष का अनुभव होता है।
- कितनी ही व्यस्तता हो परंतु परिवार,समाज व जॉब में संतुलन बनाकर चलेंगे तो कंप्यूटर अभिशाप सिद्ध नहीं होगा।कंप्यूटर तो एक निर्जीव वस्तु है यह तो हमारे ऊपर निर्भर है कि हम इसका कैसा और कितना उपयोग करते हैं।जीवन को जीने की एक कला है,इसमें संतुलन बनाकर चलें।
- उपर्युक्त आर्टिकल में कंप्यूटर एक वरदान या अभिशाप (Computer Ek Vardan ya Abhishap) के बारे में बताया गया है।
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6.मेहनत से जी नहीं चुराती (हास्य-व्यंग्य) (Hard work doesn’t steal the mind) (Humour-Satire):
- क्लास में टीचर ने एक छात्रा को कंप्यूटर से सवालों की चोरी करते उत्तरपुस्तिका में लिखते हुए पकड़ लिया।टीचर अगर तुमने कंप्यूटर से जितनी मेहनत इन सवालों के हल ढूंढने में की है,अगर उतनी मेहनत पढ़ाई करने में की होती तो अवश्य पास हो जाती।
- छात्रा:जी मैं मेहनत से जी नहीं चुराती।
- *”यह आर्टिकल **Satyam Mathematics** ब्लॉग पर **Satyam Coaching Centre** के द्वारा तैयार किया गया है।”*
7.कंप्यूटर एक वरदान या अभिशाप (Frequently Asked Questions Related to Computer Ek Vardan ya Abhishap) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.क्या कंप्यूटर बच्चों के लिए हानिकारक है? (Kya computer bachon ke liye hanikark hai?):
उत्तर:नहीं,यदि इसका उपयोग करने में अति ना करें।अपनी आवश्यकता के अनुसार और संतुलित रूप में करें।जीवन में योग को अपनाएं।
प्रश्न:2.कंप्यूटर से होने वाली बीमारियों से कैसे बचें? (Computer se hone wali bimariyon se kaise bachein?):
उत्तर:अपनी जीवन शैली में योग या व्यायाम को शामिल करें।योग हमारे पूरे शरीर का कायाकल्प कर देता है।ध्यान-योगासन-प्राणायाम को जीवन का अंग बनाएं।यह न केवल बीमारियों से बचाता है बल्कि जीवन को संतुलित भी करता है।
प्रश्न:3.क्या एआई नौकरियों के लिए खतरा है? (Kya AI (Artificial Intelligence) naukriyon ke liye khatra hai?):
उत्तर:जहां संवेदनाओं,कल्पनाओं और भावों की आवश्यकता है वहां एआई दखल नहीं दे सकता है।ऐसी नौकरियों को कोई खतरा नहीं है।इसका सावधानी से उपयोग करने की जरूरत है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा कंप्यूटर एक वरदान या अभिशाप (Computer Ek Vardan ya Abhishap) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- ***Students Se Mera Ek Sawal***
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Satyam
Lekhak Ke Baare Mein (About the Author) **Satyam Narain Kumawat** **Website Name:Satyam Mathematics** *Owner:satyamcoachingcentre.in* *Sthan:Manoharpur,Jaipur (Rajasthan)* **Teaching Mathematics aur Anya Anubhav** ***Shiksha:**B.sc.,B.Ed.,(M.sc. star Ke Mathematics Ko Padhane ka Anubhav),B.com.,M.com. Ke vishayon Ko Padhane ka Anubhav,Philosophy,Psychology,Religious,sanskriti Mein Gahri Ruchi aur Adhyayan ***Anubhav:**phichale 23 varshon se M.sc.,M.com.,Angreji aur Vigyan Vishayon Mein Shikshaka Ka Lamba Anubhav ***Visheshagyata:*Maths,Adhyatma (spiritual),Yog vishayon ka vistrit Gyan* ****In Brief:I have read about M.sc. books,psychology,philosophy,spiritual, vedic,religious,yoga,health and different many knowledgeable books.I have about 23 years teaching experience upto M.sc. ,M.com.,English and science.











