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Women Reservation Bill:Exam Key Facts

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1.महिला आरक्षण बिल:एग्जाम के लिए मुख्य तथ्य (Women Reservation Bill:Exam Key Facts):

  • महिला आरक्षण बिल:एग्जाम के लिए मुख्य तथ्य (Women Reservation Bill:Exam Key Facts) में मुख्य तथ्य में भारत में संसद के लिए महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वन्दन अभियान) क्या है? इसके प्रभाव और काॅम्पीटेटिव एग्जाम के लिए जरूरी तथ्य पढ़ें।
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2.राजनीति में महिलाएँ:रिजर्वेशन का स्पष्टीकरण (Women in Politics:Reservation Explained):

  • देश की लगभग आधी आबादी महिलाओं की है,किंतु राजनीति में उनकी भागीदारी अभी सीमित ही है।लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए यह आवश्यक है कि राजनीतिक नीतियों और कानूनों का निर्धारण,महिलाओं और पुरुषों को मिलकर करना चाहिए।किंतु पुरुषों की निम्न मानसिकता के कारण ऐसा नहीं हो पाना चिंताजनक ही है।
  • एक सभ्य और लोकतांत्रिक समाज के नाते हमारे यहाँ स्वाभाविक रूप से यह होना चाहिए था कि एक क्रमिक प्रक्रिया में स्त्रियों को हर स्तर पर उचित स्थान मिले।लेकिन दुनिया के तमाम विकसित एवं विकासशील कहे जाने वाले देशों के साथ ही हमारे यहां भी ऐसा नहीं हो सका है,क्योंकि ऐतिहासिक,सामाजिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों के चलते स्त्रियां कभी इस स्थिति में नहीं आ सकीं कि अपने स्वाभाविक हक के लिए लड़ सकें।
  • स्त्री की कोमलता तथा कायरता संबंधी मिथक पर शायद सबसे घातक प्रहार झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने किया था।उन्होंने न केवल अंग्रेजों को,बल्कि संपूर्ण पुरुष जाति को ही चुनौती दी थी।वैदिक युग से लेकर आज तक ऐसी स्त्रियों के ढेरों उदाहरण हैं,जिनसे साबित होता है कि स्त्रियां ऐसे सभी कार्य कर सकती हैं जो कि पुरुष कर सकते हैं।कल्पना चावला,मेघा पाटेकर,किरण बेदी,लीला सेठ,संतोष यादव,लता मंगेसकर,महादेवी वर्मा,अरुंधति राय,मदर टेरेसा आदि महिलाओं की उपलब्धियां से हम सभी परिचित हैं।
  • स्त्रियों की सबसे बड़ी कमजोरी अगर कोई है,तो वे सामाजिक-आर्थिक बेड़ियाँ है जिन्हें तोड़ने की प्रक्रिया में
  • खतरे,अपमान,असुरक्षा,ताने एवं दुष्प्रचार झेलना हरेक के बस की बात नहीं है।उन्हें शैक्षिक,धार्मिक,सामाजिक,राजनीतिक आदि किसी भी क्षेत्र में उत्थान का उचित एवं पर्याप्त अवसर प्रदान नहीं किया गया है और ऐसा केवल हमारे देश में ही नहीं है,बल्कि संपूर्ण विश्व में महिलाओं की स्थिति कमोबेश एक समान ही है।हमारे यहां महिलाएं जहां एक ओर देवी,गृहलक्ष्मी आदि उपाधियों से विभूषित होती रही हैं,तो वहीं दूसरी ओर सलाखों के पीछे पुरुषों के शोषण का शिकार भी बनती रही हैं।
  • जहां तक विश्व के अन्य देशों की राजनीति में महिलाओं का सवाल है,तो वर्तमान में न केवल विकासशील देशों में,अपितु तथाकथित विकसित देशों में भी महिलाएँ उपेक्षित ही हैं।स्वीडन की राजनीति में महिलाओं की सर्वाधिक भागीदारी 40% है,जबकि सबसे कम मोरक्को में 0.8% है।एशियाई देशों में सर्वाधिक भागीदारी चीन में लगभग 21% है।अरब देशों में उनकी भागीदारी नगण्य ही है।
    विकसित देशों की संसदीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी तो और भी कम है।संपूर्ण विश्व में राजनीतिक सहभागिता के क्षेत्र में पुरुषों और स्त्रियों के अनुपात में व्यापक असमानता (Political Inequality) है और इस असमानता को दूर करना अत्यावश्यक है।वर्तमान भारतीय संसद में मात्र 13.25% प्रतिशत महिलाएं हैं।जिस प्रकार सम्पूर्ण विश्व में लगभग आधी आबादी महिलाओं की है,उसी प्रकार राजनीति में भी महिलाओं की आधी भागीदारी होनी चाहिए।

3.राजनीति में महिला आरक्षण:क्या बदलेगा भारत (Politics mein Mahila Arakshan:Kya badlega Bharat):

  • आजकल राजनीति में महिलाओं की सहभागिता को बढ़ाने के लिए आरक्षण दिए जाने की बात पर जोरदार बहस चल रही है।इस मुद्दे को लेकर संपूर्ण पुरुष समाज दो गुटों में बँटा हुआ है।एक गुट का कहना है कि महिलाओं को आरक्षण प्रदान कर एक गलत परंपरा की शुरुआत की जा रही है,तो दूसरे गुट का कहना है कि आरम्भ में आरक्षण देना निहायत ही आवश्यक है,क्योंकि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी आज की परिस्थिति में आरक्षण से ही संभव है।आरक्षण का विरोध करने वाले गुट का कहना है कि इस बात की क्या गारंटी है कि आरक्षण प्रदान किए जाने के बाद भी महिलाओं को राजनीति में बराबर की सहभागिता का अधिकार मिल ही जाएगा?
  • भारतीय समाज या राजनीति में जब भी महिलाओं की समान सहभागिता की बात उठायी जाती है,तो सामंती प्रवृत्ति के रूढ़िवादी पुरुष इसका विरोध करते हुए यह तर्क देना शुरू कर देते हैं कि महिलाओं की क्षमता और उनकी शारीरिक दक्षता इसके अनुकूल नहीं है।वे हमेशा यह कहते हैं कि महिलाओं की शारीरिक संरचना ही ऐसी है कि वे पुरुषों की बराबरी में नहीं आ सकतीं।किंतु यदि वे काल्पनिकता और मिथ्या भावना की जगह वास्तविकता और सत्य को अपनाते हुए महिलाओं की संपूर्ण कार्यक्षमता को स्वीकार करें,तो यह स्वतः ज्ञात हो जाएगा कि उनकी क्षमता अथवा योग्यता,पुरुषों की अपेक्षा किसी भी दृष्टि से कम नहीं है।सबसे बड़ी बात तो यह है की राजनीति का पहला अध्याय परिवार से ही शुरू होता है और परिवार के संचालन में सबसे प्रमुख भूमिका महिलाओं की होती है।
  • महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता में सबसे बड़ी बाधा,आर्थिक समस्या की है।वर्तमान राजनीति बहुत ही खर्चीली हो गई है और राजनीति में जीत-हार का मापदंड भी आर्थिक हैसियत हो गया है।स्वीडन की तरह,जहां महिला संगठनों द्वारा धन इकट्ठा किया जाता है और इन संगठनों द्वारा महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर महिला प्रत्याशी को मैदान में उतारा जाता है,लगभग वैसे ही नीति भारत में भी अपनायी जानी चाहिए।
  • संसद में स्त्रियों का प्रतिनिधित्व (Representation of women in Parliament) बढ़ने के बाद शायद ऐसे कानून पारित करना आसान नहीं होगा,जिनमें स्त्री हितों की उपेक्षा की गई हो या उनकी संवेदनाओं का ख्याल नहीं रखा गया हो।इससे ऐसे कानूनों की समीक्षा का रास्ता भी खुल सकता है,जिनसे सभी वर्गों की स्त्रियां प्रभावित होती हैं।एक तरह से संसद तथा विधानसभाओं में उनकी उपस्थिति कुछ लोकतांत्रिक विसंगतियों को दूर करने में मदद करेंगी।
  • वास्तव में,जिस देश की मातृ या नारी सत्ता जागरूक रहा करती है,उस देश को अपने लक्ष्य पाने में कभी कोई रोक नहीं सकता।ऐतिहासिक विवेचन करके हमने देखा है कि भारतीय नारी आरम्भ से ही कठिन परिस्थितियों में भी अपनी राजनीतिक जागरूकता तथा सूझ-बूझ का उचित परिचय देती आ रही है।आज आवश्यकता है कि वह एक बार फिर त्याग और बलिदान की मूर्ति बनकर सामने आए,तभी सभी प्रकार के भ्रष्टाचार दूर हो सकेंगे और देश का प्रत्येक जन अपना उचित और वास्तविक अधिकार पा सकेगा।महिलाओं की संपूर्ण सहभागिता के बिना किसी भी परिवार,समाज,राज्य या राष्ट्र का संपूर्ण विकास कठिन ही नहीं,अपितु असंभव भी है।

4.भारत में रिजर्वेशन:इतिहास और लाभ (Women’s Reservation in India:History and Benefits (1996-1924)):

  • भारत एक लोकतांत्रिक देश है।मजबूत लोकतंत्र स्थापित करने के लिए आवश्यक है कि राजनीतिक नीतियों व कानूनों का निर्धारण स्त्री-पुरुष दोनों मिलकर करें। राजनीति में महिलाओं का आरक्षण का मुद्दा काफी लंबे समय से चल रहा है।नई दिल्ली में फरवरी 1997 में संपन्न हुए अंतर्राष्ट्रीय अंतर संसदीय सम्मेलन में राजनीति में महिलाओं तथा पुरुषों के समान भागीदारी पर विचार किया गया।इस सम्मेलन में एक बात उभर कर सामने आयी कि पूरी दुनिया के राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका कम ही है (political empowerment),जबकि विश्व के प्रायः अधिकांश देशों के संविधान में स्त्री-पुरुष की समानता पर जोर दिया गया है।
    व्यावहारिक दृष्टिकोण से राजनीति में समानता के इस सिद्धांत को पूरी तौर पर लागू करने में काफी बाधाएँ विद्यमान हैं।यह भी कम त्रासदीपूर्ण बात नहीं है कि मैक्सिको से लेकर पेइचिंग तक में विश्व महिला सम्मेलनों का आयोजन हुआ तथा महिलाओं को पुरुषों के बराबर स्थान दिलाने के अनेक प्रस्ताव भी पारित किए गए,फिर भी विश्व के ज्यादातर देशों की महिलाओं को उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित ही रखा गया।
  • संसदीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी के मामले में हमारा देश अभी भी काफी पिछड़ा हुआ है।इस समय भारतीय संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व (Representation of women in the Indian Parliament) मात्र 13.25% प्रतिशत है।राजनीति में महिलाओं की भागीदारी के क्षेत्र में विश्व में भारत का स्थान 65 वाँ तथा एशिया में 11वाँ है।निश्चय ही,भारत की राजनीति में महिलाओं की भूमिका बहुत कम है।इसी मुद्दे पर आजकल देश में व्यापक विचार-विमर्श चल रहा है।लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया जा चुका है,जिसके अंतर्गत महिलाओं के लिए 33% सीटों का आरक्षण किया जाना है परंतु यह विधेयक पारित नहीं हो सका।
  • अंतर्संसदीय सम्मेलन में भारत में यह बात स्वीकार की थी की राजनीति में स्त्री-पुरुष सहभागिता को सही ढंग से लागू करने के लिए पुरुष प्रधान सामाजिक व्यवस्था को बदलने की जरूरत है।इस परिप्रेक्ष्य में यदि महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाला बिल पारित करने में सफलता प्राप्त कर ली गई होती,तो यह प्रस्ताव अपने आप में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध होता।
  • यह भी एक त्रासदीपूर्ण तथ्य है कि भारतीय राजनीति में वोट बैंक के रूप में महिलाओं की भूमिका तो महत्त्वपूर्ण है,परन्तु निर्णय प्रधान संस्थाओं में,उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल सकता है।इस परिस्थिति को बदलना होगा तथा स्त्री-पुरुष सहभागिता वाले लोकतंत्र की स्थापना करनी होगी।आज राजनीतिक सहभागिता की विषम परिस्थिति को देखते हुए बराबरी की जरूरत पर बल देने की बावजूद महिलाओं के लिए आरक्षण के मुद्दे पर आम सहमति नहीं बन पाई है।हालांकि लगभग सभी प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति व्यक्ति की है कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर नहीं है तथा राजनीतिक निर्णयों की प्रक्रिया में भी महिलाओं को समान स्थान प्राप्त नहीं है।
  • इस परिस्थिति को दूर करने हेतु काफी प्रयास करने की जरूरत है,परंतु विश्लेषकों की राय में इस समस्या का समाधान आरक्षण ही नहीं हो सकता।उनकी राय में आरक्षण से महत्त्वपूर्ण पदों पर ऐसे लोगों को आने का अवसर मिल जाएगा,जो इस जिम्मेदारी को उठाने में कदापि सक्षम नहीं होंगे।साथ ही,उन्होंने यह तर्क भी दिया है कि आरक्षण प्रदान करने से महिलाओं को राजनीतिक जीवन में बराबरी का दर्जा हासिल हो ही जाएगा,इस बात की क्या गांरटी है?
  • वैसे कुछ सीमा तक उपर्युक्त तर्क तथ्य पूर्ण भी है कि महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए महिला आरक्षण ही एकमात्र समाधान नहीं है।दरअसल,राजनीतिक दलों को स्वयं ही ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना चाहिए।महिलाओं को अपना अधिकार देने के लिए स्वयं ही आगे आना चाहिए।
  • पुरुषों की तुलना में महिलाओं की योग्यता या क्षमता में कोई कमी नहीं है।भारत में पंचायतों में जहां कहीं भी महिलाएं हैं,वे उल्लेखनीय काम कर रही हैं।शिक्षा,कार्य कुशलता,क्षमता तथा दक्षता में देश की कई महिलाओं ने काफी उच्च मापदंड बनाएं हैं।देश के लगभग सभी क्षेत्रों में महिलाएं दक्षतापूर्वक काम कर रही हैं।महिलाएं काम के अवसर व सुविधाएँ प्राप्त कर सकें,इसके लिए एक राष्ट्रीय महिला नीति बनायी जानी चाहिए।
  • भारतीय इतिहास में शुरू से ही महिलाओं ने राजनीति में हिस्सा लिया है।परंतु बाद में इस क्षेत्र में भ्रष्टाचार को देखते हुए उनकी संख्या में निरंतर कमी आती गयी।राजनीतिक क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाने के लिए महिलाओं को स्वयं आगे आना होगा।विभिन्न राजनीतिक दलों का यह दायित्व बनता है कि वे महिला प्रत्याशियों को अधिक से अधिक टिकट उपलब्ध कराएं। महिलाओं को अवसर की आवश्यकता है,आरक्षण का इतना ही महत्त्व है कि वह इनकी भागीदारी को और अधिक बूस्ट (Boost) करेगा।

5.नारी शक्तिवन्दन के मुख्य फीचर्स (Key Features of Nari shakti vandan Adhiniyam):

(1.)भारत में महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व 2024-2026 (Bharat mein Mahila Rajnitik Pratinidhitwa 2024-2026):

\begin{array}{|cccc|} \hline \text{sadan/Nikay(Body)} &\text{kul Seats} & \multicolumn{2}{|c|}{\text{Mahila sankhya}}  \\ \hline \text {(18th Lok Sabha(2024-29) } & 543 & 75 & \sim 43.8 \% \\ \text { Raja Sabha } & 245 & \sim 31 & \sim 2.7 \% \\ \text { State Assemblies(Avg.) }& - & - & < 10 \% \\ \text { Panchati Raj(local)} & - & - & 30 \% \text{ to } 50 \% \\ \text { Global Average(IPU) } & - & -& \sim 27.5 \% \\ \hline \end{array}

  • नोट:2024 में 74 महिलाएँ जीती थीं,लेकिन प्रियंका गाँधी वाड्रा की जीत के बाद ये संख्या 75 हो गयी है।
    लोकल बाडीज में कई राज्यों (जैसे बिहार,एमपी) में 50% आरक्षण है।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) लगभग 21.1% (sabse zyada)
    त्रिपुरा (Tripura):लगभग 15%
    झारखंड (Jharkhand):लगभग 14.8%
    दलों के अनुसार (Party-wise Mahila Pratinidhitwa (key points)):
    TMC (Trinamool Congress):इनके 38% MP महिलाएँ हैं (38% MP mahilayein hain (Highest percentage)
    BJP:इस पार्टी से सबसे ज्यादा MPs (31) हैं।
    INC Congress:इनके पास 14 महिला MPs hain
  • Call to Action:kya aapko lagata hai ki 33% arakshan se desh ki rajneeti badlegi? Comment mein batayein.

(2.)अनुच्छेद 330A और अनुच्छेद 332A (Article 330 A and Article 332 A):

  • जो नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106 वां संविधान संशोधन) के माध्यम से पेश किए गए थे,सांसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए \frac{1}{3} सीटों (33%) का आरक्षण सुनिश्चित करते हैं।ये अनुच्छेद क्रमशः लोकसभा (330 A) और विधानसभाओं (332 A) में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाते हैं।
    अनुच्छेद 330 A का विवरण:लोकसभा में महिलाओं के आरक्षण का प्रावधान करता है।इसमें अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के लिए पहले से आरक्षित सीटों में से \frac{1}{3} उस वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
  • आरक्षित सीटों का रोटेशन परिसीमन (delimitation) के बाद होगा।
    अनुच्छेद 332 A:राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण (33%) सीटें आरक्षित करता है।
    यह प्रावधान भी राज्यों में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए है।
    यह 33% आरक्षण अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर भी लागू होता है।
    प्रमुख बिंदु (key points):यह कानून लागू होने के 15 साल की अवधि के लिए मान्य होगा।
    परिसीमन के बाद आरक्षित सीटें रोटेट (बदल) दी जाएंगी।
  • यह 106 वां संविधान संशोधन (128 वाँ विधेयक) है। अनुच्छेद 330 और 332 (बिना A के) मूल रूप से लोकसभा और विधानसभाओं के केवल SC/ST (एससी/एसटी) आरक्षण से संबंधित है,जबकि 330 A और 332 A उन्हें विशेष रूप से महिलाओं के लिए आरक्षित करते हैं।नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण अनिवार्य है,जिसे 2023 में पारित किया गया था।2026 के अपडेट के अनुसार यह कानून 2011 (न की 2026) की जनगणना के आधार पर परीसीमन के साथ 2029 के आम चुनाव में लागू किया जा सकता था,परंतु यह पारित नहीं हुआ।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में महिला आरक्षण बिल:एग्जाम के लिए मुख्य तथ्य (Women Reservation Bill:Exam Key Facts) के बारे में बताया गया है।

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6.आरक्षण से उत्थान (हास्य-व्यंग्य) (upliftment from reservation) (Humour-Satire):

  • टीचर:पेपर कैसा हुआ?
  • महिला अभ्यर्थी:बस पेपर कैसा भी हुआ हो,सिलेक्शन पक्का हो जाएगा।
  • टीचर:आप इतने इत्मीनान से कैसे कह सकती हैं?
  • महिला अभ्यर्थी:महिलाओं का आरक्षण है,इसलिए निश्चित सिलेक्शन हो जाएगा।
  • टीचरःपर आरक्षण के साथ योग्यता भी तो होनी चाहिए।
  • महिला अभ्यर्थी:यह बात कहने में अच्छी लगती है वरना मुंह में आए हुए पतासे को कौन थूकेगा?

7.महिला आरक्षण बिल:एग्जाम के लिए मुख्य तथ्य (Frequently Asked Questions Related to Women Reservation Bill:Exam Key Facts) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.महिला आरक्षण बिल क्या है? (What is the Women’s reservation bill?):

उत्तर:यह लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने से संबंधित है,जिससे महिला भागीदारी वर्तमान 14% प्रतिशत से बढ़कर 33% हो सके।

प्रश्न:2.महिला आरक्षण बिल पर विवाद क्यों बना? (Why was there a controversy over the women’s reservation bill?):

उत्तर:इस बिल को परिसीमन (delimitation) से जुड़ने के कारण विवाद बना।

प्रश्न:3.क्या महिला आरक्षण बिल पारित हो गया? (Has the Women’s Reservation Bill been passed?):

उत्तर:विपक्षी दलों ने 2023 में पारित बिल का समर्थन किया था लेकिन 2026 में परिसीमन के साथ जोड़कर जल्दबाजी में लाने के कारण विरोध हुआ जिससे यह 2029 से लागू नहीं हो सकेगा क्योंकि यह बिल गिर गया,पारित नहीं हुआ।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा महिला आरक्षण बिल:एग्जाम के लिए मुख्य तथ्य (Women Reservation Bill:Exam Key Facts) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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