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9 Golden Tips to Write Best Answers

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1.श्रेष्ठ उत्तर लिखने की 9 स्वर्णिम टिप्स (9 Golden Tips to Write Best Answers),परीक्षा में श्रेष्ठ उत्तर कैसे लिखें? (How to Write Best Answer in Exam?):

  • श्रेष्ठ उत्तर लिखने की 9 स्वर्णिम टिप्स (9 Golden Tips to Write Best Answers) के द्वारा आप जान सकेंगे कि उत्तर देने की पद्धति कैसी हो ताकि अच्छे अंक अर्जित किए जा सकें।अक्सर विद्यार्थी प्रश्न को समझे बिना पुस्तक से रटी-रटायी भाषा को उत्तर-पुस्तिका में उतार देते हैं।
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2.प्रश्नों की प्रकृति और स्वरूप (Nature of Questions):

  • काॅलेज की परीक्षा तथा प्रतियोगिता परीक्षाओं में निबन्धात्मक प्रश्न व प्रतियोगिता परीक्षाओं में वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी पूछे जाते हैं।वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में तो किसी प्रश्न के चार उत्तरों में से कोई एक सही होता है।इस सही उत्तर को उत्तर-पत्रक में दर्शाना होता है।
    प्रतियोगिता परीक्षाओं में दोनों प्रकार के प्रश्न वस्तुनिष्ठ व निबन्धात्मक कॉलेज परीक्षा से बिल्कुल हटकर उत्तर देना होता है।दोनों के उत्तरों में काफी अंतर होता है।ऊपर से देखने पर एक जैसे प्रश्न लगते हैं।परंतु प्रतियोगिता और विश्वविद्यालयी परीक्षाओं में प्रश्न पूछने का ढंग अलग-अलग होता है।प्रतियोगिता परीक्षा में प्रश्न सीधे-सीधे नहीं पूछे जाते,वहीं विश्वविद्यालय परीक्षा में सीधे और तथ्यात्मक या घटनापरक प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • प्रतियोगिता परीक्षाओं की लोकप्रियता के लिहाज से विश्वविद्यालयी छात्र-छात्राएं डिग्री प्राप्त करते ही परीक्षाओं में भाग लेते हैं।लेकिन प्रतियोगिता परीक्षा में प्रश्नों का उत्तर ऊंचा और पूछने का ढंग बिल्कुल अलग होने के कारण विश्वविद्यालय के अच्छे-अच्छे छात्र इसमें सफल नहीं हो पाते हैं।
  • कॉलेज या प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं के दिलो-दिमाग में एक बात बैठी हुई होती है की निबन्धात्मक प्रश्नों के उत्तर देना काफी आसान होता है,यह उनकी गलतफहमी है और वे इन प्रश्नों को अत्यधिक हल्के ढंग से लेते हुए उसकी तैयारी पर अपेक्षित ध्यान नहीं देते हैं।फलतः निबन्धात्मक अनेक प्रश्नों को ‘कंफ्यूजन’ के कारण वे गलत करके चले जाते हैं।परीक्षार्थी यह अनुमान लगाते हैं कि उनके द्वारा दिए गए उत्तर 80-85% सही होगा ही।लेकिन जब परिणाम सामने आता है तो अपेक्षा से काफी कम अंक प्राप्त करते हैं।
  • परीक्षार्थियों का रोल नंबर उसमें से गोल होता है।उन्हें यह समझ ही नहीं आता है कि आखिर इतने प्रश्न सही होने पर भी उन्हें सफलता क्यों नहीं मिली? लेकिन हकीकत यह है कि अपने उत्तरों को लेकर ऐसे परीक्षार्थी भ्रम की स्थिति में होते हैं।दरअसल जिन दुविधा वाले प्रश्नों को वे सही मानते हैं,वे गलत होते हैं।वहीं वे अपनी कमजोरी पकड़ नहीं पाते।
  • जिन अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी पर भरोसा होता है और जो उससे पूरी तरह संतुष्ट होते हैं,वे परीक्षा भवन में विश्वास के साथ प्रश्न हल करते हैं।ऐसे परीक्षार्थी कम प्रश्नों को अटेम्प्ट करके भी परीक्षा पास कर जाते हैं।
  • बहुत सारे परीक्षार्थी 90-95 प्रतिशत प्रश्न सही करने की डींग मारते हैं,इसके बावजूद जब वे परीक्षा में असफल रहते हैं तो उसकी सारी पोल खुल जाती है।वैसे ऐसे छात्र-छात्राएं यही प्रचार करते हैं कि मेरिट बहुत ऊंचा जाने के कारण वे सफल नहीं हो सके।इसलिए इस बात से भयभीत होने की जरूरत नहीं है कि मेरिट बहुत ऊंचा जाने के कारण चयन नहीं होगा।यदि पूरी ईमानदारी और विश्वास के साथ उत्तर का चयन किया जाए तो कम प्रश्नों के उत्तर सही होने पर भी सफलता में संदेह नहीं रह जाएगा।
  • विश्वविद्यालयी छात्र-छात्राओं को शैक्षिक परीक्षा में ही अच्छी तैयारी करने और श्रेष्ठ उत्तर लिखने की कला सीख लेनी चाहिए।

3.शैक्षिक और प्रतियोगिता परीक्षा में प्रश्न (Questions in Academic and Competitive Exams):

  • एक बार फिर से स्मरण करा दें कि विश्वविद्यालयी परीक्षा में प्रश्न सीधा पूछा जाता है जबकि प्रतियोगिता परीक्षा में टेढ़ा और घुमावदार।सीधे प्रश्न तथ्यों या घटनाओं पर आधारित होते हैं।अगर आपको इनका सही-सही ज्ञान है तो आपको सही उत्तर चुनने में कतई परेशानी नहीं होगी।प्रश्नों के उत्तर अधिक कंफ्यूजन वाले नहीं होते।हां,यदि आपने या तो पढ़ा नहीं है या फिर लापरवाही से अध्ययन किया है तो आपको सही उत्तर चुनने में जरूर दिक्कत हो सकती है।
  • यदि आपने विषय को विवरणात्मक ढंग से पढ़ने के साथ-साथ विभिन्न एंगल से प्रश्नों के अनुसार उत्तर याद किए हैं तो आपको प्रश्न के उत्तर के लिए सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।आपका ध्यान सीधे सही उत्तर पर जा टिकेगा।
  • किसी भी प्रश्न का उत्तर देने से पहले उन पर अच्छी तरह विचार कर लेना चाहिए,क्योंकि उत्तरों के सभी विकल्पों में बहुत कम फर्क होता है।
  • परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न लंबे अध्ययन की मांग करते हैं,जिसका उत्तर रटकर नहीं दिया जा सकता।यदि आपने विषय का व्यापक और गहन अध्ययन किया है तो प्रश्न का उत्तर बताना मुश्किल नहीं होगा।
  • कुछ प्रश्न प्रायः सीधे-सीधे होते हैं,जिनके लिए अधिक माथापच्ची करने की जरूरत नहीं होती है।

4.कॉलेज व विश्वविद्यालय छात्रों को महत्त्वपूर्ण निर्देश (Important instructions to college and university students):

  • अध्ययन करते समय तथ्यों और घटनाओं पर विशेष ध्यान दें।उन्हें रेखांकित कर लें तथा साथ ही उन्हें अपनी नोटबुक में लिख भी लें।ऐसा करने से परीक्षा निकट होने पर आपको विस्तृत अध्ययन पर समय नहीं खर्च करना पड़ेगा,बल्कि आप उन्हीं रेखांकित और लिखित अंशों को दुहराकर पहले पढ़ी हुई सामग्री की याद ताजा कर सकते हैं।
  • कॉलेज व विश्वविद्यालयी परीक्षा को हल्का न समझकर उसके प्रति लापरवाही न बरते बल्कि पाठ्यपुस्तक के विभिन्न क्षेत्रों पर पर्याप्त ध्यान दें।ऐच्छिक विषय के लिए परीक्षा से कम से कम 2 महीने पहले से प्रतिदिन कम से कम दो से चार घंटे दें।
    पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्रों को भी हल करें,साथ ही मॉडल पेपर्स हल करें।प्रतिदिन कोई राष्ट्रीय तथा प्रादेशिक समाचार पत्र पढ़ने की आदत डाल लें।और प्रमुख घटनाओं को नोटबुक में लिखने की आदत डालें।इसके अतिरिक्त टीवी तथा आनलाईन वीडियो के समाचार भी ध्यान से सुने।
  • उत्तरों के सभी विकल्पों पर ध्यान दें कई बार ऐसा भी होता है कि सभी उत्तर मिलते-जुलते होते हैं और परीक्षार्थी अति-आत्मविश्वास के शिकार होकर ठीक से देखे बगैर किसी एक उत्तर को सही मान लेते हैं।परीक्षा भवन से बाहर निकलने के बाद जब वे अपने उत्तरों की जांच करते हैं तब सही उत्तर की जानकारी होने के बावजूद उत्तर गलत कर आने पर अपना सिर पीटते हैं।उत्तर देते समय थोड़ी सावधानी रखकर ऐसी आत्मघाती स्थिति से बचा जा सकता है।

5.विभिन्न वर्ग के छात्रों को मार्गदर्शन (Mentoring students of different classes):

  • प्रथम वर्ग के अंतर्गत आने वाले छात्र-छात्राओं की तैयारी बहुत ही अच्छी कही जा सकती है।लेकिन उन्हें अपनी तैयारी उसी गति से जारी रखनी होगी,जिस गति और रणनीति के तहत तैयारी कर रहे हैं।फिर भी यह देखना आवश्यक हो जाता है कि जो गलत हो गए हैं (माॅडल पेपर को हल करने,रिहर्सल के समय) वे किस क्षेत्र से संबंधित है।उस क्षेत्र को मजबूत करने का प्रयास करें।
  • द्वितीय वर्ग के अंतर्गत आने वाले छात्र-छात्राओं की तैयारी मध्य-स्तरीय कही जा सकती है।लेकिन सफलता के बारे में दावे के साथ कुछ नहीं कहा जा सकता है।जिस क्षेत्र से संबंधित प्रश्न गलत हुए हैं उस क्षेत्र की कमजोरी दूर करने पर ज्यादा समय दें।
    तीसरे वर्ग के अंतर्गत आने वाले छात्र-छात्राओं के बारे में कहा जा सकता है कि वे अपने अध्ययन के प्रति पूर्ण रूपेण गंभीर नहीं है।उन्हें अपने अध्ययन में गंभीरता लाने का प्रयत्न करना होगा।यह भी देखना होगा कि उनका कौन-सा विषय ज्यादा कमजोर है,उस पर वे ज्यादा ध्यान दें।
  • चौथे वर्ग के अंतर्गत आने वाले छात्र-छात्राओं से संभवतया सभी क्षेत्रों में समान रूप से मेहनत की आवश्यकता है।साथ ही साथ मन में सच्ची लगन व धैर्यता भी होनी चाहिए।यदि असफलता हाथ लगती है तो भी घबराना नहीं चाहिए क्योंकि सच्ची मेहनत कभी निष्फल नहीं होती है।
  • पांचवें वर्ग के अंतर्गत आने वाले छात्र-छात्राओं के बारे में कहा जा सकता है कि उन्होंने अभी-अभी परीक्षा की तैयारी प्रारंभ की है।इन लोगों को कड़ी से कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है।किसी भी परिस्थिति में घबराना नहीं चाहिए।मन को शांतचित्त करके सभी क्षेत्रों के विषय में समान रूप से समय देकर अध्ययन जारी रखें।आप पाएंगे कि कुछ ही समय की मेहनत के बाद आपके प्रश्नों की सफलता का प्रतिशत बढ़ना शुरू हो गया है।
  • छात्र-छात्राओं के स्वविवेक पर निर्भर करता है कि वे इस प्रकार के सुझाव पर अमल करें या नहीं।हमारा प्रयास सफलता के लिए केवल रास्ता दिखाना भर ही है।छात्र-छात्रा अपनी रणनीति के अनुसार,स्वयं के लिए कोई उपयुक्त अध्ययन नीति भी बना सकते हैं।

6.ऐच्छिक विषय के प्रति नीति (Policy towards Optional Subjects):

  • छात्र-छात्राओं को कॉलेज में ऐच्छिक विषय के चयन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।इसके लिए अनुभवी व वरिष्ठ लोगों से भी परामर्श लिया जा सकता है।वैसे ऐच्छिक विषय का चयन करते समय निम्न बातों का अवश्य ख्याल रखना चाहिए।
  • (1.)विषय ऐसा हो जो आगे जाकर आपके लिए प्रतियोगिता परीक्षा में सहायक और स्कोरिंग हो।(2.)उस विषय में छात्र-छात्रा की पर्याप्त रुचि हो।(3.)उस विषय पर पर्याप्त स्तरीय पुस्तकें और अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो।
  • छात्र-छात्रा स्नातक या स्नातकोत्तर स्तर पर किसी विषय को ठीक से पढ़ लेता है तो प्रतियोगिता में उसे काफी मदद मिलती है।
    ऐच्छिक विषय ऐसा हो जो आगे आपकी परीक्षाओं के सिलेबस के काफी हिस्से को कवर करता हो।
  • अक्सर कॉलेज विषय में लिया जाने वाला विषय प्रतियोगिता परीक्षा में भी आपका ऐच्छिक विषय बन सके या बन सकता है।
    स्कोरिंग होने के बावजूद विषय की दुरुहता व दुर्बोधता आपकी रुचि को कहीं कम न कर दे।
  • विश्वविद्यालयी परीक्षा और प्रतियोगिता परीक्षा में काफी अंतर होता है।पहली परीक्षा में 60% अंक पाकर छात्र प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हो जाता है जबकि प्रतियोगिता परीक्षा में 60% का कोई मतलब नहीं है।वहां मेरिट बहुत ऊपर जाती है।इसलिए उसमें 75-80% से ऊपर अंक पाकर ही सफल हुआ जा सकता है।
  • कॉलेज व विश्वविद्यालय में ऐच्छिक विषय के चयन के उपरांत जरूरत होती है,स्तरीय व प्रामाणिक पुस्तकों के संकलन की।जो छात्र-छात्रा प्रतियोगिता परीक्षा को अपना लक्ष्य बनाते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कॉलेज व विश्वविद्यालय स्तर पर अध्ययन सामग्री सुव्यवस्थित कर अध्ययन आरंभ कर दे।
  • प्रतियोगिता परीक्षा की तरह कॉलेज छात्र-छात्रा को वर्षभर तैयारी करते रहना चाहिए।यह एक विवादास्पद विषय है कि परीक्षा के लिए प्रतिदिन कितना पढ़ना चाहिए? यह आपकी स्मरणशक्ति,विषय को समझने और क्षमता के ऊपर है।यदि आपके पास पर्याप्त समय है तो 8-10 घंटे परीक्षा की तैयारी करें।परीक्षा निकट आने पर आप समय और बढ़ा सकते हैं।यदि आपकी स्मरणशक्ति काफी तेज है,आप विषय को शीघ्र समझ लेते हैं और आपके पास समय भी काफी है तो आप 6 से 8 घंटे प्रतिदिन अध्ययन करके भी अपनी तैयारी को सही दिशा दे सकते हैं।
  • ऐच्छिक विषय की तैयारी प्रायः प्रामाणिक संदर्भ ग्रन्थों पर आधारित होती है।कई बार ऐसा होता है कि परीक्षार्थी अंधाधुंध पुस्तकें खरीद कर इकट्ठा कर लेते हैं लेकिन उन्हें पढ़ने की फुर्सत ही नहीं होती।या फिर अधिक और अलग-अलग विचारधारा की पुस्तकें पढ़ कर छात्र-छात्रा किसी विषय पर भ्रमित हो जाता है और सही उत्तर नहीं दे पाता।इसलिए कम लेकिन श्रेष्ठ पुस्तकें और जो पढ़ें उसे पूरी तरह से आत्मसात कर लें।जो स्पष्ट ना हो रहा हो,उसे बार-बार पढ़ें।आवश्यक बातों को नोट भी कर लें।
  • पिछले वर्ष के प्रश्न-पत्रों को अपनी तैयारी के आधार पर हल करने का प्रयास करें और अपना मूल्यांकन अपने आप करें।
    कॉलेज व विश्वविद्यालयी परीक्षाओं की तैयारी हेतु सिरीज या प्रश्नों को हल करने के लिए तोते की तरह विषय को रटना जरूरी नहीं होता,बल्कि उसे अच्छी तरह समझना जरूरी होता है।

7.प्रश्नों के उत्तर देने की पद्धति (Method of answering questions):

  • वैसे तो सभी परीक्षार्थी अपने-अपने ढंग से प्रश्नों का उत्तर देते हैं,लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी प्रश्नों का उत्तर आता ही हो।कुछ कठिन प्रश्न ऐसे भी होते हैं,जिनसे सभी छात्र-छात्राओं को परेशानी होती है।
  • जिन प्रश्नों के चारों उत्तर सही लग रहें हों,उनके उत्तर तलाशने के लिए ऋणात्मक पद्धति अपनानी चाहिए। अर्थात् सबसे पहले उस विकल्प को ढूंढना चाहिए,जो सबसे गलत उत्तर लगता हो,उसके बाद उससे कम गलत उत्तर तलाशना चाहिए।इस प्रक्रिया में सबसे अंत में जो विकल्प बचे,उसे ही प्रश्न का सही उत्तर मानना चाहिए।
  • सुमेलित करने वाले प्रश्नों को हल करने के लिए भी एक विशेष शैली है।यदि परीक्षार्थी इस तरह के प्रश्न के किसी भी एक तथ्य का उत्तर जानता हो,तो उस उत्तर के आधार पर अन्य तथ्यों के सही उत्तर सुमेलित किए जा सकते हैं।इसके लिए ज्ञात युग्म को पहले मिला लें और फिर बारी-बारी से शेष विकल्पों का मिलान परीक्षण करें।
  • कथन-कारण पद्धति पर आधारित प्रश्नों का उत्तर ढूंढने के लिए समझदारी और तर्क क्षमता की आवश्यकता होती है।ऐसे प्रश्नों में सबसे पहले कथन तथा कारण की साम्य की परीक्षा बारी-बारी से करनी चाहिए।इसके बाद कथन का सही कारण तलाशना चाहिए।
  • प्रश्नों की भाषा पर विशेष ध्यान देना चाहिए,क्योंकि प्रश्न का गलत अर्थ निकालने पर उत्तर भी निश्चित रूप से गलत हो जाएगा।
    यदि बार-बार पढ़ने पर भी प्रश्न समझ में ना आए तो उसके चिपके ना रहें बल्कि उसे छोड़कर आगे बढ़ जाएं।जब सभी प्रश्नों को हल कर लें,तब शेष बचे समय में छूटे हुए प्रश्नों पर पुनः विचार करें और जो उत्तर सर्वाधिक उपयुक्त लगे उस पर निशान लगा दें।
  • कई बार ऐसे भी प्रश्न सामने आते हैं,जिनका उत्तर एक ही बार में पता चल जाता है,लेकिन उस पर जब आप सोच-विचार में और समय लगाने लगते हैं तब लगता है कि नहीं अन्य विकल्प भी सही हैं।ऐसी स्थिति से बचने के लिए प्रायः पहले वाले उत्तर को ही सही मानना चाहिए।

8.अध्ययन हेतु सुझाव (Suggestions for Study):

  • उच्छृंखल न पढ़े।अध्ययन की सुनियोजित रणनीति बनाएं।और बनाई गई रणनीति पर कड़ाई से अमल करें। रणनीति से ज्यादा क्रियान्वयन का महत्त्व है।
  • अध्ययन की गुणवत्ता पर ध्यान रखें,अध्ययन अवधि पर नहीं।अर्थात् जितना भी पढ़ा गया हो वह समझ में आना चाहिए और स्मरण रहना चाहिए।
  • सदैव तुलनात्मक अध्ययन करें,जैसे इस लेख में परीक्षा की तैयारी व उत्तर लिखने के लिए विश्वविद्यालयी और प्रतियोगिता परीक्षा की तुलना करते हुए लिखा गया है।
  • स्वयं के नोट्स बनाएं,बाजारू नोट्स तो कई छात्र-छात्राएं खरीदते हैं,उनकी भाषा शैली एक जैसी होती है।परंतु स्वयं के नोट्स अपनी मौलिक भाषा में होते हैं।अतः प्रश्न का उत्तर मौलिक भाषा में देने पर अधिक अंक अर्जित होते हैं।
    ज्ञानोपयोगी नहीं वरन् परीक्षापयोगी पढ़े।ज्ञान का कोई ओर छोर नहीं है।ज्ञान केंद्रित अध्ययन करने पर लक्ष्य से भटक जाते हैं और लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाते हैं।
  • हर विषयगत समस्याओं पर विचारों में स्पष्टता एवं संतुलित दृष्टिकोण रखें।अतिवादिता से बचें।कन्फ्यूज्ड (Confused) न रहें।
    अनावश्यक,विषयेत्तर,अनुपयोगी अध्ययन सामग्री से बचें।इससे समय नष्ट होता है और दिमाग में भी अनावश्यक बातें इकट्ठा हो जाती है जिनका परीक्षा के दृष्टिकोण से कोई उपयोग नहीं है।
  • सारगर्भित (सटीक) टू द पॉइंट (to the point) एवं पूर्णता के साथ उत्तर लिखें।विचारों में क्रमबद्धता और तर्कगत लय हो,असंबद्धता नहीं।
  • आम बोलचाल की नहीं वरन साहित्यिक,त्रुटिहीन,धारा प्रवाह भाषा में अभिव्यक्ति करें।
    आत्मविश्वास रखें।आप अपेक्षित योग्यता रखते हैं।सही दृष्टिकोण से निष्ठा पूर्ण काम करें।सफल होने के बाद स्वयं महसूस करेंगे कि परीक्षा कितनी सरल है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में श्रेष्ठ उत्तर लिखने की 9 स्वर्णिम टिप्स (9 Golden Tips to Write Best Answers),परीक्षा में श्रेष्ठ उत्तर कैसे लिखें? (How to Write Best Answer in Exam?) के बारे में बताया गया है।

Also Read This Article:परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें की 3 टिप्स

9.बेबस परीक्षार्थी (हास्य-व्यंग्य) (Helpless Examinee) (Humour-Satire):

  • टीचर:कोचिंग की छुट्टी होने के बाद,अभी अतिरिक्त कालांश में सभी को रुक कर पढ़ना है,कोई भी घर नहीं जाएगा।
  • छात्र:सर,आप हमारा दर्द और बेबसी नहीं जानते हो।सुबह से लेकर शाम तक पढ़ने के बाद भी पढ़ाए जा रहे हो।
  • टीचरःइसमें बेबस और लाचार होने की क्या बात है,आपको परीक्षा देनी है।
  • छात्रःलेकिन मैडम उसकी भी तो कोई सीमा होती है।परीक्षा की डोज दे देकर हमारी हालत पतली कर दी जाती है।

10.श्रेष्ठ उत्तर लिखने की 9 स्वर्णिम टिप्स (Frequently Asked Questions Related to 9 Golden Tips to Write Best Answers),परीक्षा में श्रेष्ठ उत्तर कैसे लिखें? (How to Write Best Answer in Exam?) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.अध्ययन सामग्री की टिप्स दें। (Give Study Material Tips):

उत्तरःविषय की तैयारी हेतु पिछले 5 वर्षों के प्रश्नों की प्रकृति,आवृत्ति,गहराई,व्यापकता इत्यादि का सूक्ष्म अध्ययन करें।इससे स्पष्ट होगा कि प्रश्न किस क्षेत्र से किस स्तर के आते हैं और कितने पुनरावृत्त होते हैं।इससे अपेक्षित अध्ययन की सीमा निश्चित हो जाएगी।

प्रश्न:2.अध्ययन सामग्री का अध्ययन करने हेतु क्या ध्यान रखें? (What to keep in mind to study the study material):

उत्तर:उपर्युक्त प्रश्न एक के उत्तर के आधार पर तदनुरूप अध्ययन सामग्री एकत्रित करें।भीमकाय पुस्तकों से बचें। क्या पढ़े,इससे अधिक जरूरी है कि क्या न पढ़ें।

प्रश्न:3.क्या ज्ञान केंद्रित अध्ययन करें? (What knowledge-focused studies do?):

उत्तर:ज्ञानोपयोगी नहीं बल्कि परीक्षापयोगी गुणवत्ता प्रदान उत्कृष्ट पुस्तकें लें और पढ़ें।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा श्रेष्ठ उत्तर लिखने की 9 स्वर्णिम टिप्स (9 Golden Tips to Write Best Answers),परीक्षा में श्रेष्ठ उत्तर कैसे लिखें? (How to Write Best Answer in Exam?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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