Taslima Nasrin:Biography/Books and Literary Journey
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1.तस्लीमा नसरीन जीवनी:पुस्तकें और साहित्यिक यात्रा (Taslima Nasrin:Biography/Books and Literary Journey):
- तस्लीमा नसरीन जीवनी:पुस्तके और साहित्यिक यात्रा (Taslima Nasrin:Biography/Books and Literary Journey) के द्वारा जानिए कि उनकी कौनसी पुस्तकें चर्चित हैं और उनके पुस्तकों को लिखने से विवादास्पद व्यक्तित्व परन्तु संघर्षपूर्ण जीवन कैसे बन गया?
हर तरह के काॅम्पीटेटिव एग्जाम में फेमस लेखक,उनके द्वारा लिखी गई नई,पुरानी साहित्य (literature) और उनसे जुड़े सामाजिक मुद्दों पर लगातार प्रश्न पूछे जाते हैं।तस्लीमा नसरीन का साहित्यिक योगदान और उनका महिला सशक्तिकरण (women empowerment) पर नजरिया हर उस छात्र-छात्रा के लिए जानना जरूरी है जो सामाजिक मुद्दों (Social Issues) या निबन्ध लेखन की तैयारी कर रहे हैं।
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2.तस्लीमा नसरीन का जीवन परिचय (Taslima Nasreen’s Biography):
- तस्लीमा नसरीन का जन्म 25 अगस्त 1962 को मयमनसिंह (बांग्लादेश) में मुस्लिम परिवार में हुआ था।उनके पिता का नाम डॉक्टर रजब अली और माँ का नाम एडुल आरा था।
- नसरीन ने बांग्लादेश में रहते हुए 13 वर्ष की आयु में लिखना प्रारम्भ किया।वह स्त्रियों पर होने वाले अत्याचारों पर अपने सशक्त कार्यों और धर्मान्ध व्यक्तियों की आलोचना के लिए जानी जाती है।भले ही उन्हें अपनी मातृभूमि बांग्लारेश से जबरन निर्वासन (Forced deportation) का सामना करना पड़ा और इस्लाम धर्म के मुल्ला,मौलवियों द्वारा कई बार मौत की सजा के फतवे जारी किए गए।
- चिकित्सा के अध्ययन और प्रैक्टिस के दौरान उन्होंने रेप की शिकार लड़कियों को देखा,उन्होंने प्रसव कक्ष में उन स्त्रियों को भी हताशा और निराशा में बिलखते हुए सुना जिनकी बच्ची पैदा हुई थी।मुस्लिम परिवार में जन्मी वह समय के साथ नास्तिक (atheist) बन गई।इसीलिए उसने नारी के अधिकारों और उत्पीड़न के खिलाफ अपने लेखन के द्वारा आवाज उठाई।समय के साथ-साथ उसने नारीवादी दृष्टिकोण (Feminist Perspectives) अपनाया।
- 1994 में मुस्लिम कट्टरपंथियों की धमकियों और मौत के फतवों के कारण उसे अपनी मातृभूमि बंगलादेश को छोड़ना पड़ा और उन्होंने यूरोप व अमेरिका की शरण ली।यूरोप और अमेरिका में कुछ वर्ष बिताने के बाद वह 2004 से लगातार भारत में रह रही है।पहले पश्चिम बंगाल में रही लेकिन कुछ वर्ष के बाद पश्चिम बंगाल भी छोड़ना पड़ा।लेकिन हाल ही में भारत सरकार के केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह भारत में कहीं भी आ-जा सकती है।उस पर कोई रोक टोक नहीं है।क्योंकि उन्हें भारत में लॉन्ग टर्म रेजिडेंट परमिट और मल्टी स्टेट वीजा मिल हुआ है।अतः वह भारत में कहीं भी स्वतन्त्र रूप से रह सकती है और घूम सकती है। वर्तमान में तस्लीमा नसरीन दिल्ली शहर (भारत की राजधानी) में रह रही है।
- सवाल यह उठता है कि उसने ऐसा क्या लिख दिया जो बांग्लादेश के मुसलमानों को नागवार गुजरा क्योंकि अब 2004 से यानी पिछले 22 वर्ष से वह भारत में रह रही है और भारत के मुस्लिमों को कोई आपत्ति नहीं है। जबकि आबादी में भारत में मुस्लिम बांग्लादेश और पाकिस्तान से ज्यादा हैं।
- बांग्लादेश के मुसलमानों (कट्टरपंथी) का मानना था कि उनके लेखन से इस्लाम की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है। तो “क्या इस्लाम धर्म इतना कमजोर है या कोई भी धर्म इतना कमजोर है कि एक लेखक के लिखने से उसकी प्रतिष्ठा घट जाएगी या गिर जाएगी या उसकी नींव की चूलें हिल जाएंगी।आइए जानते हैं कि उन्होंने कौन-कौनसी पुस्तकें लिखी और वे विवादास्पद कैसे हो गई,उन पुस्तकों की मेन थीम क्या-क्या है?
3.तस्लीमा नसरीन की प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ (जनरल नाॅलेज सेक्शन) (Major literary works of Taslima Nasreen (GK Section)):
- तस्लीमा नसरीन की सबसे विवादास्पद पुस्तक (contraversial Book) और चर्चित ‘लज्जा’ (Lajja) है।इस उपन्यास में बांग्लादेश में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद वहाँ अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय पर हुए अत्याचारों और साम्प्रदायिकता का वास्तविक चित्रण और वर्णन है।यह एक ऐसा उपन्यास है जो हमें हमारे काल्पनिक भगवानों के संसार से बाहर निकाल कर रियल वर्ल्ड के शैतानों का परिचय कराता है।ऐसे लोग भारत और बांग्लादेश में ही नहीं,दुनिया के हर कोने में मिल जाएंगे।यह उपन्यास वाकई में धर्मनिरपेक्षता क्या है इसकी समझ पैदा करता है।इस पुस्तक ने बांग्लादेश के मुस्लिम कट्टरपंथियों को इतना नाराज कर दिया कि उन्होंने तस्लीमा को जान से मारने का फतवा जारी कर दिया।
- तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि इस उपन्यास पर भारत के बॉलीवुड में फिल्म लज्जा बनाई गई थी जो बॉक्स ऑफिस पर फ्लाप रही थी।बांग्लादेश में फ्लाप होती हो बात समझ में आती है,परन्तु भारत में अधिकांश हिन्दू है और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिन्दुओं के उत्पीड़न पर लिखी गई पुस्तक पर आधारित फिल्म फ्लाप हो गई।इसके फ्लाप होने का कारण इसका उच्च बजट और वितरण लागत थी।
- इस पुस्तक के अलावा भी कई पुस्तकें उन्होंने लिखी और वे भी विवादित रहीं।कहा जाता है कि फर्स्ट इम्प्रेशन इज लास्ट इम्प्रेशन।एक बार किसी व्यक्ति के प्रति कोई धारणा बन जाती है तो उस पर उस धारणा और दृष्टिकोण का लेबल लग जाता है।
- उनकी दूसरी पुस्तक है:द्विखण्डित (Dwikhandit):यह भी बहुचर्चित और आत्मकथात्मक पुस्तक है।भारत के पश्चिम बंगाल में भी इस पुस्तक के कुछ हिस्सों को लेकर काफी विवाद हुआ था और इसे प्रतिबंधित (Restricted) करने की माँग की गई थी।
अगली विवादास्पद पुस्तक है:’शर्म’ (sharm):यह भी तस्लीमा नसरीन की सनसनीखेज और साहसी पुस्तक है।इस पुस्तक में उन्होंने बांग्लादेश के छोटे हिन्दू समुदाय के एक परिवार की भयानक नियति (destiny) का वर्णन किया गया है।उनकी इस पुस्तक ने मुस्लिम नेताओं को इतना नाराज कर दिया कि यह लेखिका उनके आँखों की किरकिरी बन गयी।बांग्लादेश में उसका रहना उनको (मुस्लिम नेताओं) को खटकने लगा।उन्होंने नसरीन को जान से मारने वाले को हजारों डॉलर का इनाम देने की घोषणा कर दी।
- इन पुस्तकों के अलावा उन्होंने शब्दवेधी (Shabvedhi) लिखी जिसमें उनकी लेखन स्वतन्त्रता,वैयक्तिक गरिमा (personal dignity) और वैचारिक प्रतिबद्धता का पता चलता है।उनकी अन्य आत्मकथाएँ हैं जैसे मेरे बचपन के दिन और उताल हवा।ये पुस्तकें भी काफी विवादास्पद रही।इन पुस्तकों के अलावा अन्य पुस्तकें भी लिखी है परन्तु उनके साथ विवाद शब्द इस तरह चिपक गया है जैसे शरीर के जोंक चिपक जाती है। हालाँकि उनकी इन पुस्तकों से उनके व्यक्तित्व और बोल्डनेस का पता चलता है।एक महिला होते हुए मुस्लिम कट्टरपंथियों के सामने मोर्चा खोलना और सबसे बड़ी बात अपने दृष्टिकोण और नजरिये पर कायम रहना।
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4.तस्लीमा नसरीन को अवार्ड मिले (What awards did Taslima Nasreen get?):
- बांग्लादेश मूल की तस्लीमा नसरीन को उनके नारीवादी लेखन,मानवाधिकारों की रक्षा और वकालत तथा अभिव्यक्ति की आजादी के लिए संसार के कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।उन्हें मिले प्रमुख पुरस्कारों का विवरण निम्न हैं:
सखारोव प्राइज फार फ्रीडम ऑफ थाॅट (1994):यह पुरस्कार यूरोपीय संसद (European parliament) द्वारा विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हित के लिए दिया जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित अंतराष्ट्रीय पुरस्कार है। - यूनेस्को मदनजीत सिंह पुरस्कार (2004):शांति,अहिंसा और सहिष्णुता को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को द्वारा यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
- आनन्द पुरस्कार (1992 और 2000):यह प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान उन्हें भारत में बांग्ला साहित्य के लिए दो बार मिला।पहली बार ‘निर्वाचित कालम’ और दूसरी बार ‘आत्मकथा’ के लिए।
- फ्रांस सरकार का मानवाधिरार पुरस्कार (1954):फ्रांसीसी सरकार द्वारा मानवाधिकारों के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया।
सिमोनडी ब्यूवोइर प्राइज (2008):महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता के लिए उनके संघर्ष के लिए यह ख्यातिप्राप्त अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। - कुर्त टुचोल्स्की पुरस्कार (1994):स्वीडिश पेन (Swedish PEN) द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
- एडिक्ट ऑफ नान्तेस प्राइज (1994):धार्मिक उन्माद,धार्मिक कट्टरता और धार्मिक उग्रवाद के खिलाफ मोर्चा खोलने और लड़ने के लिए फ्रांस द्वारा यह पुरस्कार दिया गया।
- नेशनल अवार्ड फॉर जेंडर जस्टिस (2017):अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर यह पुरस्कार लैंगिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए दिया गया।इसके अलावा तस्लीमा नसरीन को बेल्जियम की कई यूनिवर्सिटीज से डॉक्टरेट की मानद उपाधियाँ भी प्राप्त हो चुकी है।
एग्जाम के लिए मुख्य तथ्यों की सारणी (Table of Main Points for Exams):
5.तस्लीमा नसरीन नास्तिक क्यों बनी? (Why did Taslima Nasreen become an atheist?):

Taslima Nasrin:Biography/Books The real aspect of the book depicts the pain inside her
- नास्तिक का अर्थ है जो भगवान के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है वह नास्तिक है और जो भगवान में आस्था (विश्वास) रखता है वह आस्तिक है।साधारण धरातल पर और लौकिक व्यवहार के लिए तो यह परिभाषा ठीक है। परन्तु भगवान में विश्वास न रखने वाला दर्शन मीमांसा दर्शन को परम आस्तिक माना जाता है।
- यदि पुनर्जन्मः के अस्तित्व के आधार पर आस्तिक व नास्तिक का वर्गीकरण करें तो बौद्ध व जैन दर्शन पुनर्जन्म में विश्वास रखते हैं परन्तु इन्हें नास्तिक माना जाता है।
- यदि वेद को प्रमाण मानने के आधार पर वर्गीकरण करते हैं तो जो वेदों को मानता है वे आस्तिक और जो वेदों की प्रामाणिकता नहीं मानते हैं वे नास्तिक माने जाते हैं।इस प्रकार पूर्णतः नास्तिक ‘चार्वाक दर्शन’ को मानने वाले हैं।अब तस्लीमा नसरीन के बारे में चर्चा करें तो वह किस प्रकार की नास्तिक है यह तो स्पष्टतः वे ही बता सकती है।परन्तु हमारे अनुसार सम्भवतः भगवान में आस्था (विश्वास) हैं और इसी आधार पर अपने आपको नास्तिक मानती है।उनके नास्तिक बनने का कारण यह रहा है कि उन्होंने कुरीतियों (Evils),अन्याय का विरोध किया तो जो धर्म के ठेकेदार थे वे ही उनके जान के दुश्मन बन गए।
- एक लड़की जो छोटी उम्र में हो उसकी सृजनात्मक क्षमता को कुचलने का प्रयास किया गया हो तो उसकी अन्तरात्मा ने महसूस किया कि वास्तव में ये धर्म के चौकीदार हैं,धर्म का चोगा इन्होंने पहन रखा है,ये धूर्त (ठग),भाण्ड और निशाचर (रासस) है।इसलिए उनके कोमल मन पर यह छाप पड़ गई कि भगवान का यह झूठा चोगा पहनकर,झूठ और पाखण्ड को अपनाकर रहने के बजाय नास्तिक रहना ही बढ़िया है।
पर वाकई में क्या तस्लीमा को नास्तिक मानना चाहिए? क्या तस्लीमा,स्वयं स्वीकार करती है,इस आधार पर उन्हें नास्तिक मान लेना चाहिए?हमारी राय में ऐसा मानना सही नहीं होगा।इसका कारण यह है कि जो दूसरों के अधिकारों के लिए लड़ता है,संघर्ष करता है और अपनी मौत के फतवे की भी फिक्र नहीं करता है क्या उसे नास्तिक कहा जाना चाहिए।भगवान तो हम सभी में समाया हुआ है,व्याप्त है।जिस प्रकार हमारे शरीर में आत्मा है पर दिखाई नहीं देती उसी प्रकार भगवान तो सृष्टि में व्याप्त हैं। - उसकी शक्ति से ही हम कोई भी कार्य कर सकते हैं,करते हैं,उसकी शक्ति खत्म तो हमारा शरीर शव मात्र रह जाता है।अब यह हम पर है कि हम उसकी शक्ति का उपयोग करते हैं या दुरुपयोग करते हैं।आपका प्रश्न यह हो सकता है कि जब भगवान की शक्ति सर्वव्यापी है तो किसी को अन्याय करने से रोकती क्यों नहीं है? वस्तुतः भगवान ने मनुष्य को कर्म करने में स्वतन्त्रता प्रदान की है यदि स्वतन्त्रता प्रदान नहीं करता तो हम भगवान के कठपुतली मात्र रह जाते है।
- इस प्रकार दूसरों की पीड़ा और दर्द को समझकर,उनके लिए कोई लड़ता है तो वह हमारी नजर में आस्तिक ही कहा जाना चाहिए।केवल पूजा-पाठ,प्रार्थना,मंत्र जाप आदि करने से कोई आस्तिक या भगवान का बंदा नहीं कहला सकता है।इस प्रकार कई ढोंगी है जो पूजा-पाठ व प्रार्थना करते हैं परन्तु लोगों को चूसते हैं और उल्लू बनाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं।जिसमें संवेदना है,पीड़ा और दर्द को समझने की क्षमता ही नहीं बल्कि उसके लिए लड़ता है वही सच्चा आस्तिक कहा जाना चाहिए।चालाक,अहंकारी,पाखण्डी,बेईमान,दूसरों को मूर्ख बनाने और शोषण करने में कुशल,छल-कपट,तिकड़मबाजी,दिखावा करने वाले को नास्तिक ही कहा जाना चाहिए।
- पर अफसोस की बात यह है कि उन्होंने तीन शादियाँ की हैं और तीनों शादियाँ ही तलाक पर खत्म हुई।पहली रूद्र मोहम्मद शहीदुल्लाह (Rudra Mohammed Shahidullah) कवि (1982 में शादी,1986 में तलाक) नाईमुल इस्लाम खान (Nayeemul Islam khan) पत्रकार और सम्पादक (1990 में शादी,1991 में तलाक),मिनार महमूद (minazmahmood) सम्पादक (1991 में शादी,1992 में तलाक) से।
- जब 2022 में दिल्ली का चर्चित ‘श्रद्धा वालकर मर्डर केस’ हुआ था तो उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया था कि अपराध के लिए पुरुष की संकीर्ण सोच जिम्मेदार है,ना कि उनका लिव इन में रहना।
उपर्युक्त आर्टिकल में तस्लीमा नसरीन जीवनी:पुस्तकें और साहित्यिक यात्रा (Taslima Nasrin:Biography/Books and Literary Journey) की मुख्य-मुख्य पुस्तकें,उनकी साहित्यिक यात्रा और संघर्ष के बारे में बताया गया है। - ### 📢 यदि आपको यह गणित का आर्टिकल पसंद आया हो:
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6.बच्चों का धमाल (हास्य-व्यंग्य) (Children’s Fun) (Humour-Satire):
- अब्बूः(बच्चों से):मैं स्टेशन जा रहा है।
- चुन्नू:अच्छा अब्बू।
- अब्बू:पलटकर मुझे डर है कि कहीं तुम्हारे आस्ट्रेलिया वाले चाचा पागलखाने में उन लोगों के हाथों से भागकर यहाँ न आ जाएं।उन्होंने हमारा मकान देखा है।अगर मेरे जाने के बाद वह यहाँ आ जाएँ तो अन्दर बन्द कर लेना।
- दरवाजे पर दस्तक।इसके साथ ही किसी की आवाज आती है।
पिंकी:दरवाजा खोलकर उन्हें जल्दी से बन्द कर लेना चाहिए।पिंकी और चुन्नू:बिठाकर।उनके इर्द-गिर्द तीन-बार घूमकर उनको रस्सी से जकड़ देते हैं। - आदमी:(हाथ-पाँव मारकर) यह क्या बदतमीजी है? तुम पागल तो नहीं हो गए हो?
चुन्नू:खुदा आपको सेहत दे चचा जान!रस्सी को गाँठ लगाते हुए। - इतने में अब्बू और अम्मी आ जाते हैं (चुन्नू और पिंकी से):यह क्या बदतमीजी है? ये अफ्रीका बाले चाचा नहीं,ये अमरीका वाले दोस्त इंजीनियर हैं।अफ्रीका वाले चाचा तो हमारे साथ आएं हैं।
7.तस्लीमा नसरीन जीवनी:पुस्तकें और साहित्यिक यात्रा (Frequently Asked Questions Related to Taslima Nasrin:Biography/Books and Literary Journey) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.तसलीमा को बांग्लादेश क्यों छोड़ना पड़ा? (Why did Taslima Nasreen have to leave Bangladesh?):
उत्तर:विवादास्पद लेखन के कारण अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि कई मुसलमानों का मानना था कि उनके लेखन से इस्लाम की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है।
प्रश्न:2.तस्लीमा के लेख का नजरिया क्या है? (What is the point of view of Taslima’s article?):
उत्तर:तस्लीमा एक नारीवादी लेखिका है।उनके लेख में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने को देखा जा सकता है।
प्रश्न:3.क्या तसलीमा के कोई संतान है? (Does Taslima have any children?):
उत्तर:तस्लीमा ने तीन शादियाँ की परन्तु उनके कोई संतान नहीं है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा तस्लीमा नसरीन जीवनी:पुस्तकें और साहित्यिक यात्रा (Taslima Nasrin:Biography/Books and Literary Journey) की कुछ मूख्य बातें बताई गयी है।
- *”यह आर्टिकल **Satyam Mathematics** ब्लॉग पर **Satyam Coaching Centre** के द्वारा तैयार किया गया है।”*









