9 Top Tips for Using Biological Clock:How to Know Secret of Biological Clock?
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1.बायोलाॅजिकल क्लाॅक का उपयोग करने के 9 टॉप टिप्स:जैविक घड़ी के रहस्य को कैसे जानें? (9 Top Tips for Using Biological Clock:How to Know Secret of Biological Clock?):
- बायोलाॅजिकल क्लाॅक का उपयोग करने के 9 टॉप टिप्स (9 Top Tips for Using Biological Clock) के द्वारा जानिए कि जैविक घड़ी कैसे काम करती है और हम इसका उपयोग कैसे करते है? जैविक घड़ी का सन्तुलन हम स्वयं बिगाड़ देते है तो कैसे जीवन में अन्तुलन पैदा हो जाता है।
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2.सत्यम कोचिंग सेन्टर में हमारी कार्यप्रणाली (Our Functioning at Satyam Coaching Centre):
- विद्यार्थी काल से ही हमने जैविक घड़ी का उपयोग करना सीख लिया था।हम रात को 10-11 बजे तक अध्ययन करके सो जाते थे और सोते समय जैविक घड़ी को निर्देश दे देते थे कि इस समय उठना है और ठीक उस समय हमारी नींद खुल जाती थी।
चूंकि जैविक घड़ी के बारे में उस समय तो पूर्ण जानकारी नहीं थी परन्तु मन के द्वारा स्वयं को स्वसंकेत (Autosuggestion) दे देते थे।यह स्वसंकेत ही जैविक घड़ी के लिए पर्याप्त था।सत्यम् कोचिंग सेन्टर (Satyam Coaching Centre) में अध्ययन कराते समय तो हमें इसकी कार्यप्रणाली के बारे में काफी पता लग चुकी थी। - कब पानी पीना है,कब नाश्ता करना है,कब भोजन करना है,कब सोना है और कब प्रातःकाल में उठना है? उपर्युक्त सभी कार्य करने के हम अभ्यस्त हो गए थे। परन्तु इसका सबसे ज्यादा उपयोग हमने प्रातःकाल उठने के रूप में किया था।कभी तीन बजे उठकर काम करना है तो चाहे कितनी ही देर से सोये हों परन्तु सुबह 3 बजे आँख खुल जाती थी।ऐसी धटना कभी घटी नहीं कि हमने जैविक घड़ी (Biological Clock) को निर्देश दिया हो और हमारी आँख न खुली हो।
सत्यम कोचिंग सेन्टर में तो इस जैविक घड़ी के कारण काम को ठीक समय पर करने के अभ्यस्त हो गए थे। हम स्वयं इसकी कार्यप्रणाली से चकित थे,इसलिए इसके बारे में जानने की जिज्ञासा पैदा हुई।
2.सत्यम् मैथेमेटिक्स ब्लॉग के बाद कार्यप्रणाली (Methodology after Satyam Mathematics Blog):
- हमने इसके बारे में लेख पढ़ा,लेकिन लेख पढ़ने से केवल हमें इसकी सैद्धान्तिक जानकारी ही प्राप्त हो पाई थी।जब दैनिक जीवन में इसका उपयोग और बहुत वर्षों से इसका अनुभव सटीक साबित हुआ तब हमें पक्का विश्वास हुआ कि वाकई में जैविक घड़ी अपने आपमें एक अद्भुत चीज है जिसे भगवान ने हमारे अन्दर सेट किया हुआ है।
- कभी हम इसे निर्देश नहीं देते हैं क्योंकि कभी-कभी थके होने के कारण विश्राम करना चाहते है तो पूर्ण विश्राम के बाद हमारी आँखे स्वतः खुल जाती है।सत्यम मैथेमेटिक्स ब्लॉग (Satyam mathematics) पर आर्टिकल लिखने के बाद तो ठीक समय पर काम करने के आदी हो गए।कभी-कभी पारिवारिक कार्य या अन्य जरूरी काम के कारण समय पर पोस्ट न लिखी हो या आर्टिकल पोस्ट न किया हो परन्तु हमारी दिनचर्या उसी समय पर प्रारम्भ हो जाती है।
- प्रातःकाल जल्दी उठकर रात को 10-11 बजे तक व्यस्त रहकर काम को निपटा देते हैं।लेकिन जैविक घड़ी समय पर सभी काम तभी कर पाएगी जब आप इसके सिस्टम को समझकर उसके अनुसार कार्य करेंगे।
- अक्सर विद्यार्थियों की आम शिकायत रहती है कि वे जल्दी उठने का प्रयास करते हैं परन्तु उठ नहीं पति हैं। यहाँ तक कि वे अलार्म लगाकर सोते हैं और सुबह अलार्म के बजते ही उसे बन्द कर देते हैं।हमने इसीलिए इसके बारे में लेख लिखने का विचार किया।
4.छात्र-छात्राएँ अपने सिस्टम को सुधारें (Students should improve their system):
- इसके लिए आपको कुछ बातों का पालन करना होगा ताकि आप जैविक घड़ी का सही से उपयोग कर सकें। जैविक घड़ी ही क्या किसी भी सिस्टम को,चाहे वह सजीव हो या निर्जीव हो,उसकी कार्यपद्धति के अनुसार,उसकी शर्तों के अनुसार काम करोगे तो वह सिस्टम सही से काम करेगा।
- यदि आप मनमानी करेंगे,नियमों का पालन नहीं करेंगे तो वह सिस्टम बिल्कुल काम नहीं करेगा या फिर सही ढंग से काम नहीं करेगा।फिर आप उस सिस्टम या अंग (system or organ) में कमी खामी निकलोगे तो पर दोष दर्शन करना ही हुआ।
- खुद की कमियों का विश्लेषण करना नहीं,आत्म-विश्लेषण करना नहीं और अपनी कमियों,कमजोरियों को सिस्टम या अंग पर थोपने का मतलब है अपने दोषों को छिपाना ताकि आप अपने आपको सही साबित कर सकें।
- बायोलॉजिकल घड़ी सही,नियमित रूप से काम करे इसके लिए पहली शर्त यह है कि भोजन संतुलित लें,तला-भुना,चरपरा,बहुत तीखा न लें।लेकिन अक्सर होता यह है कि हम भोजन ठूँसकर खा लेते हैं और भारी भोजन या अति मात्रा में भोजन किया हुआ हो तो अपना असर दिखाएगा ही और दिखाता ही है।अधिक भोजन से नशा छा जाता है।गहरी नींद आती है और आवश्यकता से अधिक नींद आती है।फिर आप अलार्म लगाकर ही सो जाएं।अव्वल तो अलार्म बजकर रह जाती है और हमारी नींद खुलती ही नहीं है।यदि खुल भी जाती है तो खुमारी छायी रहती है इसलिए अलार्म को बन्दकर फिर से सो जाते हैं।
- दूसरी बात यह है कि शराब,मादक द्रव्यों और ड्रग्स (Drugs) का सेवन न करें।मादक द्रव्यों और ड्रग्स (Drugs) का सेवन करने से ये हमारी चेतना से हमारा सम्बन्ध विच्छेद कर देते हैं।हमें होश नहीं रहता है तो जैविक घड़ी कैसे काम करेगी?
- जीवन में चारित्रिक गुणों यथा संयम,नियम,ब्रह्मचर्य,विनम्रता,ईमानदारी,सज्जनता,सरलता,धर्म,साहस,सद्बुद्धि (Characteristics virtues) आदि को विकसित करते रहें।जितना आप इन गुणों को अपने अन्दर विकसित करेंगे उतना ही आपका शरीर,आपके शरीर के अंग,आपकी कार्यप्रणाली और जैविक घड़ी उचित ढंग से काम करेगी।
5.अपने सिस्टम को पहचानें (Identify your system):
- यदि छात्र-छात्राएँ ऊपर बताई गई तीनों बातों का पालन करना भी चालू कर देंगे तो आपके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आएगा।इन तीन बातों का पालन करने से आप अपने शरीर,मन और आत्मा की कार्यप्रणाली को समझ सकेंगे।एक बार आपने पालन करना चालू कर रिया और उससे आपको फायदा होगा तो खुद-ब-खुद आप इनका पालन करना चालू कर देंगे।
- हम यह नहीं कहते कि सभी नियमों का पालन एक साथ चालू करें।धीरे-धीरे एक-एक नियम का पालन करना प्रारम्भ करें।जब एक नियम का पालन करने में आप सिद्धहस्त हो जाएँ तो फिर दूसरे और फिर तीसरे नियय का पालन पादांशिक क्रम (Step-by-step) से चालू करें।
- बहुत से नियमों को एक साथ पालन करने में होता यह है कि हमारी आदतें उन नियमों के विपरीत काम करने की अभ्यस्त होती हैं अतः कुछ दिन तो पालन करते हैं और फिर छोड़ देते हैं।बहुत बड़े और अधिक संकल्प करने के बजाय छोटे-छोटे संकल्प करें और उनका पालन करें।
- संकल्प करना महत्त्वपूर्ण नहीं है उससे ज्यादा महत्त्वपूर्ण है उसको पूरा करना।जब संकल्प करते हैं और उस संकल्प को पूरा नहीं कर पाते हैं तो हमारा हौसला टूटता है।हममें फिर से संकल्प करने की हिम्मत नहीं होती है।
6.हमारी जैविक घड़ी का रहस्य (The Secret of Our Biological Clock):
- जैविक घड़ी प्रकृति का अनमोल उपहार है।नियत समय पर नींद आना,भूख लगना आदि शारीरिक क्रियाओं का संचालन इसी घड़ी के द्वारा होता है।जैविक घड़ी शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करती है और यह मेलाटोनिन नामक हॉर्मोन (Melatonin Hormone) से नियंत्रित होती है।यह घड़ी नियत समय एवं परिस्थिति के अनुरूप हमारी मानसिक एवं भावदशा को विनिर्मित करती है,जिसकी सटीक जानकारी व्यवहार-जगत में लाभदायक सिद्ध हो सकती है।
अतः जैविक घड़ी हमारे शारीरिक क्रिया-कलापों को संचालित करने के साथ-साथ हमारे व्यवहार-जगत को भी प्रभावित करती है।जैविक घड़ी अनेक रहस्यों को समेटे हुए है। - मनुष्य के शरीर की जैविक घड़ी के अनुसार व्यक्ति की शरीर-कायिकी 24 घंटे के अंतराल में बदलती रहती है।इस घड़ी को नियमित-नियंत्रित करने के लिए मेलाटोनिन हॉर्मोन की भूमिका महत्त्वपूर्ण है।
- जीवन की दैनिक क्रियाओं को सुचारु रूप से संचालित करने वाले इस हॉर्मोन की खोज येल विश्वविद्यालय के त्वचा विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ० आरोन लरनर ने सन् 1958 में की थी।मैलाटोनिन को एन-एसीटायल-5 मैथाक्सी ट्रीप्टामाइन भी कहते हैं।इसकी खोज से मानव जीवन का एक अनछुआ पहलू उजागर हुआ।डॉ० लरनर के अनुसार यह रसायन त्वचा में उपस्थित कोशिकाओं में वर्णकों के संघनन को बाधित करके त्वचा के रंग को गहरा होने से रोकता है।
- इसकी खोज के पश्चात इस हॉर्मोन का प्रयोग विभिन्न प्राणियों एवं मनुष्यों में किया गया।प्रयोग अध्ययन से पता चला कि मेलाटोनिन हॉर्मोन पीनियल ग्रंथि से स्रावित होता है।यह ग्रंथि मस्तिष्क के मध्य भाग में स्थित एक अंतःस्रावी ग्रंथि है,जो मटर के दाने के समान होती है।कुछ मात्रा में मेलाटोनिन नेत्र के रेटिना से भी स्रावित होता है।
7.जैविक घड़ी की कार्यप्रणाली (Functioning of the biological clock):
- मेलाटोनिन के स्रावण में एक विशेष प्रकार की दिन-रात की लयबद्धता (rhythmic) पाई जाती है।नेत्र की प्रकाशीय झिल्ली सूर्य के प्रकाश से उद्भासित होती है।इसकी संवेदना मस्तिष्क तक पहुँचती है और मेलाटोनिन का स्रावण बंद हो जाता है।यह केवल रात्रि में ही स्रावित होता है,अतः इसे ‘निशा हॉर्मोन’ (Night hormone) कहा जाता है तथा पीनियल ग्रंथि को ‘तृतीय नेत्र’ की संज्ञा दी जाती है।इस हॉर्मोन के नियमित स्राव से मानव शरीर में नियत लयबद्धता (Fixed Rhythm) का प्रादुर्भाव होता है।
- यह लयबद्धता दो प्रकार की होती है।प्रथम- दैनिक प्रक्रिया जैसे- सोना,उठना,भूख लगना आदि।इसे ‘सरकेडियन लय’ कहते हैं।ऐसी ही प्रक्रिया जब वर्षभर में दोहरायी जाती है तो इसे ‘सरकेअनुअल लय’ कहते हैं।मानव जीवन की शारीरिक प्रक्रियाएँ अपने ढंग से पुनरावृत्ति करती हैं।यह प्रक्रिया दिन और वर्ष में भी होती हैं।
- आस्ट्रेलिया में ट्रोबे विश्वविद्यालय के डॉ० जेनि रेडमान और उनके सहयोगियों ने अपने प्रयोग-परिणामों से कुछ रोचक तथ्यों को उद्घाटित किया है।इनके अनुसार मेलाटोनिन का प्रभाव निद्राकारी होने के साथ-साथ हिप्नोटिक भी होता है।यह मनुष्य के स्वभाव को शांत और उदारवादी बनाता है।मानवीय व्यवहार के इस पक्ष को मेलाटोनिन से जोड़कर देखने वाले वैज्ञानिकों का तो यहाँ तक कहना है कि यह अँधेरे में स्रावित होता है और ध्यानी,ऋषि-मुनि आदि अँधेरे कक्ष में दीर्घकाल तक साधना करते हैं,जिससे उनके रक्त में इस हॉर्मोन की प्रचुरता होती है।इसी वजह से ये सामान्य व्यक्तियों से अधिक उदारवादी होते हैं।
8.जैविक घड़ी के प्रभावित होने के कारण (Causes of Biological Clock Affected):
- जैविक घड़ी हमारे दैनिक जीवन के क्रिया-कलापों की निरंतरता को नियमित करती है।यह हमारे स्वस्थ जीवन का प्रतीक एवं पर्याय भी है।यह कई कारणों से प्रभावित होती है।इसके प्रभाव के परिणाम बड़े घातक होते हैं। आज के जैवविदों के अनुसार आधुनिक जीवन की अव्यवस्थित एवं असंयमित जीवनशैली इसके व्यतिक्रम में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है।
- सोने के समय पर जागना,खाना और इसके विपरीत कार्य करने वाले समय पर नींद लेना आदि जैविक घड़ी की लय को तोड़ते-मरोड़ते हैं।अमेरिका के टेक्सास यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जे० राइटर का कहना है कि यह निषेधात्मक विचारों से भी प्रभावित होती है।इनके अनुसार निषेधात्मक विचार (negative thinking) हमारी शारीरिक क्रियाओं को सबसे पहले प्रभावित करते हैं और इसके परिणामस्वरूप हमारी जैविक घडी की लयबद्धता में कमी आती है।
- रात्रि में कार्य करने वाले लोगों की भी नियमित जैविक घड़ी में व्यवधान आ जाता है और वे अनिद्रा के शिकार हो जाते हैं।रात्रि जागरण करने वाले व्यक्ति जब दिन में सोते हैं तो उन्हें सलाह दी जाती है कि शयनकक्ष में पूर्ण अंधकार हो,ताकि मेलाटोनिन की अधिकाधिक संश्लेषण हो सके और नींद चक्र पूरा हो।इसके अलावा जब कोई व्यक्ति किसी तीव्रगामी वाहन,यानी हवाई जहाज में यात्रा करता है तो पूर्व-पश्चिम या पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर जाते समय नियमित प्रकाशीय अवधि में बदलाव आ जाता है।नियमित जैविक घड़ी बाधित होने से अनिद्रा,भूख की कमी,सिरदर्द और मानसिक तनाव आदि घर कर जाते हैं।एक बार इसके बाधित होने के पश्चात इसके नियमित होने में 5 से 7 दिन लग जाते हैं।ऐसी स्थिति में मेलाटोनिन दवाओं का भी प्रयोग किया जाता है।
- परिवर्द्धन विज्ञान के विशेषज्ञों ने अपने अनुसंधान में पाया है कि शिशु एवं बाल्यावस्था में मेलाटोनिन का स्तर अधिक होता है,परंतु अवस्था एवं उम्र के बढ़ने के साथ-साथ पीनियल ग्रंथि से इसके स्राव की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है।इसी कारण बच्चों को वृद्ध लोगों की अपेक्षा अधिक एवं अच्छी नींद आती है।वृद्धों का अपनी उम्र के प्रति नकारात्मक भाव शारीरिक के साथ मानसिक रोगों (Mental Diseases) को जन्म देता है,जिससे जैविक घड़ी प्रभावित होती है।इस उम्र में सबसे अधिक अनिद्रा की शिकायत रहती है।
- ऋतुजन्य परिस्थिति में जैविक घडी प्रभावित होती है।शीत ऋतु में रातें लंबी और दिन छोटे होते हैं।इस कारण लोगों को अधिक समय तक अँधेरे में रहना पड़ता है।सर्दी के कारण दिन में कम प्रकाश रहता है।ये सब कारक मेलाटोनिन हॉर्मोन के स्राव में सहायक होते हैं। अतः इन परिस्थितियों में नींद की अधिकता होती है। भूख अधिक लगती है और तनाव भी बढ़ जाता है।ये विकार अधिक समय तक बने रहने पर कई प्रकार की बीमारियों को जन्म देते हैं।अतः इन्हें समय रहते दूर करने की सलाह दी जाती है।वर्तमान समय में यौगिक आसनों एवं प्राणायामों के माध्यम से जैविक घड़ी की नियमितता (Regularity of Biological Clock) को बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।यह प्रयास उत्साहवर्द्धक सिद्ध हो रहा है।
- प्राचीन ऋषियों-मनीषियों के अनुरूप आज वैज्ञानिक मानने लगे हैं कि समय विशेष के अनुसार कार्य करना चाहिए,क्योंकि उस समय शरीर में विशेष हॉर्मोन (Special Hormone) का स्राव होता है।वैज्ञानिक कहते हैं कि किसी अधिकारी,विद्वान से वैचारिक कार्य करने के लिए उसके पास प्रातःकाल जाना चाहिए।
- किसी को यदि भावनात्मक रूप से अपने पक्ष में करना हो तो उससे संध्या समय मिलना चाहिए।ऐसे अनेक काल एवं समय हैं,जो दैनिक जीवन में बारंबार पुनरावृत्ति (Repetition) करते हैं,जिन्हें जान-समझकर उनका कुशलतापूर्वक उपयोग किया जा सकता है।इस तरह जैविक घड़ी जीवन के कई अनछुए पहलुओं को समेटे हुए है।उन्हें अनावृत कर यदि इसका उपयोग किया जा सके तो इसके कई लाभ हो सकते हैं। प्राकृत जीवनचर्या (Natural Routine) ही इसका प्रमुख आधार है।अतः हमें संयमित,सहज,सरल प्राकृतिक जीवनचर्या को अपनाना चाहिए,ताकि जैविक घड़ी अपना सुचारु से कार्य कर सके।
- उपर्युक्त आर्टिकल में बायोलाॅजिकल क्लाॅक का उपयोग करने के 9 टॉप टिप्स:जैविक घड़ी के रहस्य को कैसे जानें? (9 Top Tips for Using Biological Clock:How to Know Secret of Biological Clock?) के बारे में बताया गया है।
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9.जैविक घड़ी का करिश्मा (हास्य-व्यंग्य) (The charisma of the biological clock) (Humour-Satire):
- टीचर:सोनू तुम लेट क्यों आते हो?
- सोनू:क्योंकि आजकल जैविक घड़ी जब मुझे उठाती है तब ही आता हूँ।
- टीचर:लेकिन जैविक घड़ी को स्वाभाविक काम करने के काम भी करो।
- सोनू:फिर जैविक घड़ी के अनुसार उठने का फायदा ही क्या है?
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10.बायोलाॅजिकल क्लाॅक का उपयोग करने के 9 टॉप टिप्स:जैविक घड़ी के रहस्य को कैसे जानें? (Frequently Asked Questions Related to 9 Top Tips for Using Biological Clock:How to Know Secret of Biological Clock?) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.जैविक घड़ी स्वाभाविक रूप से काम कब करती है? (When does the biological clock work naturally):
उत्तर:जब हमारा खान-पीन संतुलित हो,आचरण अच्छा हो और बुरी आदतें गले नहीं लगा रखी हो।
प्रश्न:2.हमारे जीवन में लयबद्धता के लिए कौनसा हार्मोन स्रावित है? (Which hormone is secreted for rhythm?):
प्रश्न:2.हमारे जीवन में लयबद्धता के लिए कौनसा हार्मोन स्रावित है? (Which hormone is secreted for rhythm?):
उत्तर:जीवन में लयबद्धता और सही समय पर काम करने के लिए मैलाटोनिन हार्मोन स्रावित होता है।
प्रश्न:3.जैविक घड़ी किससे नियंत्रित होती है? (What is the biological clock regulated?):
उत्तर:जैविक घड़ी मैलाटोनिन हार्मोन से नियंत्रित होती है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा बायोलाॅजिकल क्लाॅक का उपयोग करने के 9 टॉप टिप्स:जैविक घड़ी के रहस्य को कैसे जानें? (9 Top Tips for Using Biological Clock:How to Know Secret of Biological Clock?) की प्राइमरी टर्म्स के बारे में बताया गया है।
*”यह आर्टिकल **Satyam Mathematics** ब्लॉग पर **Satyam Coaching Centre** के द्वारा तैयार किया गया है।”*
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