11 Techniques to Succeed in Any Work
1.किसी भी काम में सफल होने की 11 तकनीक (11 Techniques to Succeed in Any Work),किसी भी काम में सफल कैसे हों? (How to Succeed in Any Job?):
- किसी भी काम में सफल होने की 11 तकनीक (11 Techniques to Succeed in Any Work) के आधार पर आप जान सकेंगे कि किसी भी काम अर्थात् जाॅब,अध्ययन,व्यवसाय,प्रोफेशन आदि में ऐसी कौनसी जनरल क्वालिटीज हैं जिनके आधार पर सफलता अर्जित की जा सकती है।
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2.सफलता प्राप्ति के लिए सामान्य गुण (Common Traits for Success):
- सफलता का रहस्य है कार्य कुशलता एवं समय का प्रबंधन।जो इस रहस्य को जानते हैं,वे सफलता के शिखर तक पहुंचते हैं,परंतु इससे अनभिज्ञ एवं इस क्षेत्र को नजरअंदाज करने वाले अथक श्रम के बावजूद असफल होते देखे जाते हैं।सफलता कोई अलादीन का चिराग नहीं है कि जो चाहे मिल गया और जब चाहे हाजिर हो गया।यह कुशलतापूर्वक किए जाने वाले कार्य का,आत्मविश्वास,कमिटमेंट (समर्पण) एवं समय को ध्यान में रखकर किए जाने वाले कार्य का परिणाम है।
- सफलता के लिए किसी भी जाॅब,अध्ययन या कार्य में कुछ सामान्य गुण होते हैं तो कुछ विशिष्ट गुण भी होते हैं।इस लेख में सामान्य गुणों के बारे में ही बताया गया है परंतु इससे पहले सामान्य गुण और विशिष्ट गुणों के बारे में फर्क समझ लें।जैसे किसी भी काम के लिए सामान्य गुण हैं:कठिन परिश्रमी होना,समय प्रबंधन,लक्ष्य पर नजर,सकारात्मक सोच,योजना और उसके क्रियान्वयन की क्षमता आदि।एक विद्यार्थी के लिए विशिष्ट गुण हैं पुस्तकों का अध्ययन करना,कोर्स की पुस्तकें पढ़ना,नोट्स बनाने की काबिलियत का होना,पढ़े हुए का रिवीजन करना आदि जबकि एक व्यवसायी के लिए विशिष्ट गुण हैं जाॅब में कुशल होना,जॉब करने की स्किल का होना,व्यवसाय प्रबंधन,प्रोफेशनल नजरिया रखना आदि।
- किसी भी विद्यार्थी,अभ्यर्थी या एम्प्लॉइज में जितना जरूरी उसमें सामान्य गुणों की मौजूदगी होना है उतना ही उसमें विशिष्ट गुणों का होना भी जरूरी है।यदि आप में सामान्य गुण हैं परंतु विशिष्ट गुणों का अभाव है तो आप सफल नहीं हो सकते।इसी प्रकार आपमें विशिष्ट गुण हैं परंतु सामान्य गुणों का अभाव है तो कहीं ना कहीं जाकर आपकी प्रगति रुक जाएगी,आप शिखर पर नहीं पहुंच सकते हैं।
- अतः किसी भी लेख में कुछ गुणों और स्किल का अध्ययन करके यह नहीं समझ लेना चाहिए कि केवल इन गुणों को विकसित करके वह सफल हो जाएगा या शिखर पर पहुंच जाएगा।यों अनुभव से धीरे-धीरे व्यक्ति में यह समझ विकसित होती जाती है कि उसे किन-किन गुणों को विकसित करना है और कैसे करना है? परंतु इसके लिए आपको जागरूक,सचेत रहना पड़ेगा तभी अपने कार्य के लिए आवश्यक गुणों व स्किल को पहचान पाएंगे और विकसित कर पाएंगे।
- यदि परंपरागत तरीके से,एक ही तरीके से काम करते रहेंगे तो आपका विकास रूक जाएगा,सफल होने से वंचित हो जाएंगे।तब न तो आप यह सोच पाएंगे कि आपको असफलता किन कारणों से मिल रही है।आज की तेज रफ्तार जिंदगी में समय-समय पर अपने आप को अपडेट एवं अपग्रेड करते रहना होगा अन्यथा आप समय के साथ नहीं चलेंगे तो पिछड़ जाएंगे और जीवन में प्रत्येक कार्य में पिछड़ते चले जाएंगे।यहां सामान्य गुणों के कुछ मुख्य तत्त्वों की चर्चा करेंगे क्योंकि सभी की इस लेख में चर्चा करना संभव नहीं है।
3.लक्ष्य पर कड़ी नजर (A close eye on the target):
- सफलता प्राप्त करने के लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए,जिनमें सबसे पहले टारगेट यानी कि लक्ष्य पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।सर्वप्रथम अपना सही लक्ष्य तैयार करना चाहिए।लक्ष्य बेशक बड़ा हो,परंतु उसे प्राप्त करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाने चाहिए।लक्ष्य को क्रमशः बड़ा बनाना चाहिए और उसके लिए एक योजना की जरूरत पड़ती है,जिसे अपनी डायरी में लिख लेना चाहिए,ताकि छोटी परंतु आवश्यक बातें छूट न जाएँ।यदि इन सब के बावजूद कार्य की दिशा में कोई वांछित सफलता नहीं मिल रही हो तो कार्य करने के तरीके में बदलाव करना चाहिए।असफलता हमारे मन-मस्तिष्क को निराशा से भर देती है,अतः बीती एवं कड़ुई बातों पर अधिक सोच-विचार करने की अपेक्षा वर्तमान क्षण को सर्वश्रेष्ठ बनाना चाहिए।
- सही लक्ष्य तैयार करने और उस पर आगे बढ़ना दिशासूचक यंत्र की तरह कार्य करता है।जैसे दिशासूचक यंत्र हमें सही दिशा का ज्ञान कराता है उसी तरह सही लक्ष्य हमें भटकने से बचाता है।अतः सबसे पहले सही लक्ष्य तय करना चाहिए।यदि लक्ष्य बड़ा है तो उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँटकर तय करना चाहिए।जैसे आपको गणित की पूरी पुस्तक को 3 महीने में पढ़ना है तो उसके अमुक चैप्टर एक सप्ताह में तैयार करने है।इस तरह साप्ताहिक और मासिक रूप से लक्ष्य तय कर लेंगे तो लक्ष्य को प्राप्त करना आसान हो जाता है।
- लक्ष्य को तय करते समय सहपाठियों और शिक्षकों से मतभेद भी हो सकता है,कुछ खट्टी-मीठी बातें भी हो सकती हैं,आपस में कुछ कहा-सुनी भी हो सकती है।अतः कुछ कड़ुवे घूंट भी पीने पड़ते हैं तभी आप अपने लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे अन्यथा कड़वी बातों को लेकर बैठे रहने से लक्ष्य से भटक जाएंगे।
4.सकारात्मक सोच (Positive thinking):
- वर्तमान को सार्थक बनाने एवं लक्ष्य की ओर अग्रसर होने के लिए अगली महत्त्वपूर्ण बात है सकारात्मक सोच (पॉजिटिव थिंकिंग)।सकारात्मक सोच से लक्ष्य का आधा भाग तय कर लिया जाता है।देखने का नजरिया हमारी सफलता और असफलता का दिशा निर्धारण करता है।सफलता की राह में आने वाली हर बाधा से जो समस्या पैदा होती है और समस्या के कारण जो निराशा,हताशा उत्पन्न होती है,उसके निराकरण एवं समाधान में सकारात्मक सोच ही एक मात्र सहायक होती है।हम चीजों को जैसे देखते हैं,वे हमारे लिए वैसी ही बन जाती हैं।अगर चीजों को अपने अनुकूल देखना हो तो उन्हें सही नजर एवं विश्लेषण की दृष्टि से देखना चाहिए,अन्यथा नकारात्मक दृष्टि बताती है कि हमारी किस्मत कितनी खराब है और हम इस संसार में कितने अक्षम एवं असमर्थ व्यक्ति हैं।सही सोच न केवल पर्सनल जीवन में बल्कि प्रोफेशनल जीवन में भी सफलता का मापदंड तय करती है।
- सकारात्मक सोच से बहुत दूर का लक्ष्य भी निकट ही महसूस होता है।बहुत लंबा समय भी अखरता नहीं है। जबकि नकारात्मक सोच से निकट का लक्ष्य भी बहुत दूर हो जाता है,बल्कि हाथ से फिसल जाता है।अतः सही लक्ष्य को प्राप्त करने में सकारात्मक सोच की बहुत बड़ी भूमिका होती है।सकारात्मक सोच का अर्थ यह नहीं है कि हमेशा अच्छा ही हो तथा अनुकूल हो।सकारात्मक सोच से तात्पर्य यह है कि जो हो रहा है उसमें से अच्छाई ढूंढ लेना और लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रतिकूलता में से भी मार्ग निकाल लेना।नकारात्मक सोच अच्छाई देखने और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मार्ग को ढूंढने का रास्ता बंद कर देती है।कितनी ही अनुकूलता होने पर भी नकारात्मक सोच हमें उसका फायदा नहीं उठाने देती है।
5.समय प्रबंधन (Time Management):
- सकारात्मक सोच से समय के प्रबंधन का संबंध भी जुड़ा हुआ है।समय प्रबंधन के बारे में कई लेख इस साइट पर मिल जाएंगे,उन्हें पढ़कर समय प्रबंधन के बारे में जान सकते हैं और समय प्रबंधन की कला सीख सकते हैं।काम को निश्चित समय एवं अवधि के अंदर पूरा करने की आदत डालनी चाहिए।समय पर किया गया कार्य हमारे अनुशासन को दर्शाता है।अनुशासन और समय-प्रबंधन का गहरा संबंध है।अनुशासित जीवन पद्धति सबसे पहले समय का ध्यान रखती है।समय की महत्ता है।समय के साथ कार्य को अंजाम देना चाहिए।इससे औरों के समय का भी सम्मान होता है;क्योंकि हम अकेले नहीं हैं किसी कार्य को करने में,हमारे साथ और भी जुड़े होते हैं।हम यदि अपने कार्य को उचित ढंग से निश्चित समय में पूरा करते हैं तो हमारे साथ काम करने वालों का भी समय बचता है।अतः हमें टाल-मटोल न करते हुए एवं आज के कार्य को कल पर डालकर,आज के काम को आज ही पूरा करना आना चाहिए।समय के साथ काम को अंजाम देना एक चुनौती है,पर चुनौती लक्ष्य के साथ सदैव जुड़ी रहती है।
- समय पर काम करने की आदत तभी पड़ सकती है जब हम एक-एक पल का महत्त्व जानते-समझते हैं और उसका उपयोग करते हैं।दुरुपयोग नहीं करते।दुरुपयोग करने वाले सोचते हैं कि अभी तो काफी उम्र पड़ी है,काफी समय है,यह जिंदगी यूं ही गुजर जाएगी,इसको एंजॉय कर लो,मौज मस्ती कर लो।इस प्रकार वे अपने समय को वाहियात बातों में गुजारते हैं।समय अनमोल है,गुजरा हुआ समय किसी भी कीमत पर वापस हासिल नहीं किया जा सकता है चाहे आप उसके लिए कितनी कीमत चुका दें।
6.साहस के साथ चुनौतियों का सामना करें (Face challenges with courage):
- लक्ष्य के लिए चल पड़े हों तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए।आगे की ओर आने वाली हर कठिनाई का डटकर सामना करना चाहिए।पीठ दिखाने वाले कायर कहलाते हैं और उनका उपहास उड़ाया जाता है; जबकि चुनौती का सामना करने वाले बहादुर कहे जाते हैं और उनके सिर पर सेहरा सजता है और चुनौती हमें एक नई सीख दे जाती है कि किस प्रकार हम अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाएँ।लक्ष्य की ओर बढ़ने वाला हर कदम एक नई एवं अनजान राह पर बढ़ता है।अतः हमें कभी भी डरना नहीं चाहिए तथा सूझ-बूझ के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए।
- याद रखें जब दिमाग कमजोर होता है यानी हम डरपोक होते हैं तो परिस्थितियाँ समस्या,जब दिमाग स्थिर होता है तो परिस्थितियाँ चुनौती,जब दिमाग मजबूत अर्थात् हम निडर होते हैं तो परिस्थितियाँ अवसर बन जाती हैं।एक बार लक्ष्य पर चल पड़ने के बाद कितनी ही बाधाएँ आएं उनका डटकर मुकाबला करें,घबराए नहीं।
7.काम को करने की कुशलता (Efficiency in getting the job done):
- चुनौती तो होगी,परंतु उसे हम किस कुशलता के साथ पूरा करते हैं,यह हमारी कार्यशाली पर निर्भर करता है।जिस काम को हमें करना है,उसे बेहतर ढंग से करने के लिए और भी अच्छे ढंग से करने के लिए हमें अपनी स्किल्स (कुशलता) को विकसित करना चाहिए।यों ही किसी काम को करने से उसकी महत्ता कम होती है,जिससे हम वर्तमान समय में टिक नहीं पाएंगे।आज कार्य की गुणवत्ता पर अधिक बल दिया जाता है;क्योंकि प्रतियोगिता खूब बढ़ गई है।गुणवत्ता के लिए हमें कुशलता की जरूरत पड़ती है और यह तभी संभव है,जब हम आपस में एवं स्वयं में अच्छा तालमेल स्थापित कर सकें।हमें अपने समय,कुशलता,बुद्धि,भावना एवं क्षमता के बीच तालमेल रखना चाहिए।इसके अलावा हम जिसके साथ काम करते हैं या जो हमारे साथ काम करते हैं,उनके बीच बेहतर तालमेल का होना भी आवश्यक है।इसके अभाव में उत्पन्न गलतफहमी से परेशानी खड़ी हो जाती है।अतः सफलता के लिए हमें कुशलता के साथ अच्छा तालमेल बिठाना आना चाहिए।
- जाॅब या अध्ययन अथवा काम को श्रेष्ठ तरीके से करने के लिए उसको करने की स्किल्स तो होनी चाहिए,उस काम को करने की विधि भी जाननी चाहिए साथ ही तालमेल बिठाने में पारंगत होना चाहिए।तालमेल वही बिठा सकता है जो व्यक्ति व्यवहारकुशल हो।लोगों के साथ,कस्टमर,सहकर्मी या अधिकारी के साथ व्यवहार करने की कला जानता हो।एक छात्र भी व्यवहारकुशल होगा तभी वह अपने शिक्षकों से,सहपाठियों और मित्रों से विद्या ग्रहण कर सकता है।
8.वायदा पूरा करें (Deliver on the Promise):
- अपने लक्ष्य को पाने के लिए सर्वाधिक महत्त्व की बात है कमिटमेंट।कमिटमेंट अर्थात् जो हम कहते हैं,उसे निभाना आना चाहिए।कमिटमेंट लक्ष्य प्राप्ति का उत्तम साधन है।जो अपने दिए गए वचन पर अडिग रहता है,वही प्रामाणिक होता है।ऐसे व्यक्ति को सहयोग एवं सहायता भी मिलती है और उसके लिए सफलता का द्वार खुल जाता है,परंतु जो आए दिन अपनी बातों से मुकरता है,वह कोई बड़ा काम नहीं कर सकता।ऐसा व्यक्ति अप्रामाणिक कहलाता है।उस पर कोई विश्वास नहीं करता और अंततः उसे असफलता ही हाथ लगती है।हालांकि कमिटमेंट करके उसे अंत तक निभाना बड़ा कठिन काम है,परंतु यदि वचन दिया है तो फिर उसे अंत तक निभाना चाहिए।सफलता के लिए यह एक अपरिहार्य शर्त है।
- आज अक्सर व्यवसायी कस्टमर से,शिक्षक छात्र-छात्रा से जो वायदा करते हैं तो दूसरे पल ही उस वायदे को भूल जाते हैं फलतः वे अपनी प्रतिष्ठा खो देते हैं।मार्केट में टिकने के लिए कमिटमेंट को पूरा और समय पर करना जरूरी है अन्यथा मार्केट में हमारी साख गिर जाती है,कोई भी हमारी बातों पर विश्वास करने के लिए तैयार नहीं होता है।काठ की हांडी एक बार चढ़ती है।
9.मौलिक पहचान बनाएं (Create a Fundamental Identity):
- सफलता के लिए मौलिकता का होना भी जरूरी है। मौलिकता का अर्थ है,अपनी क्षमता के अनुरूप निजी विशेषता।हमें अपने जैसा बनना चाहिए,किसी और जैसा नहीं।मौलिक क्षमता यदि प्रबल हो तो हम उसी के अनुरूप प्रतिष्ठित एवं सम्मानित हो सकते हैं।ऐसा व्यक्ति जो अपनी मौलिकता को बढ़ा लेता है,उसका व्यक्तित्व बड़ा ही आकर्षक होता है।उसके अंदर एक चुंबकीय गुण पैदा हो जाता है।वह सफलता को आकर्षित कर लेता है और अंत में अनेक उपलब्धियों को हस्तगत कर लेता है।
- हर व्यक्ति कुछ मौलिक गुण लेकर जन्म लेता है परंतु वे सुप्त अवस्था में रहते हैं।अतः हमें अपनी मौलिकता की पहचान करके उसे तराशना,निखारना और उभारना चाहिए।अपनी मौलिकता की पहचान करने के लिए आप अपने गुरु,शिक्षक,मित्र,माता-पिता तथा काउंसलर की सहायता ले सकते हैं।दूसरों की भौंडी नकल करने वाला कहीं का नहीं रहता है।परंतु जो अपनी मौलिकता के अनुसार कार्य करता है वही सफल होता है।
10.योजना को चरणबद्ध ढंग से पूरा करें (Complete the plan in a phased manner):
- लक्ष्य का निर्धारण करने के बाद उस कार्य को करने की योजना बनाई जाती है।सफलता एक योजना है,जिसे चरणबद्ध ढंग से सुनियोजित तरीके से पूरा किया जाता है।उपर्युक्त ढंग से यदि कार्य किया जाए तो सफलता अवश्य ही उपलब्ध होगी।फिर हम असफलता का रोना नहीं रोएंगे और निराशा-हताशा के गर्त में नहीं पहुंचेंगे। सफलता के लिए इस योजना को क्रियान्वित करना चाहिए।यदि फिर भी असफलता मिलती है तो उसके पीछे के कारणों को ढूंढ कर उनका निराकरण करते हुए परिवर्तित योजनापूर्वक फिर से ईमानदार प्रयास करना चाहिए।इससे सफलता अवश्य प्राप्त होगी।
- उपर्युक्त आर्टिकल में किसी भी काम में सफल होने की 11 तकनीक (11 Techniques to Succeed in Any Work),किसी भी काम में सफल कैसे हों? (How to Succeed in Any Job?) के बारे में बताया गया है।
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11.सफल होने का नुस्खा (हास्य-व्यंग्य) (Recipe to Succeed) (Humour-Satire):
- रमा:लोग कहते हैं कि सपने देखने वाले सफल होते हैं,परंतु मैंने पूरे साल सफल होने के सपने देखे परंतु फिर भी फेल हो गई।
कावेरीःवो कैसे? - रमा:गणित तथा अन्य विषयों के कालांश में मैं सपने ही देखती रहती थी कि मैं सफल हो जाऊंगी परंतु परीक्षा देने के बाद रिजल्ट आया तो पाया कि मैं फेल हो चुकी हूं।
12.किसी भी काम में सफल होने की 11 तकनीक (Frequently Asked Questions Related to 11 Techniques to Succeed in Any Work),किसी भी काम में सफल कैसे हों? (How to Succeed in Any Job?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.सफलता किनको मिलती है? (Who gets success?):
उत्तर:सफलताएँ उन्हीं की होती है,जो संघर्षों की क्षमता रखते हैं,जो लक्ष्य को पाने के लिए पल-पल संघर्ष करता है।मंजिल सुखद और शानदार होती है परंतु इसकी डगर कांटों भरी है।
प्रश्न:2.कांटों भरी डगर को कौन पार कर सकता है? (Who can cross a path full of thorns?):
उत्तर:कठिन तप,अदम्य जिजीविषा,जूझते संघर्षों के प्रलयंकारी झंझावातों से गुजर कर ही इन तक पहुंचा जा सकता है।जिनकी आंखें इस सत्य को देख पा रही हैं,वही कठिन डगर को पार कर सकता है।
प्रश्न:3.मंगल कामनाएं किनके लिए हैं? (Who are you wishing for?):
उत्तर:जो हृदय की तुच्छ दुर्बलता को त्याग कर संघर्ष के लिए खड़ा होता है।नववर्ष में परीक्षाएं आपका स्वागत कर रही है अतः उन सभी परीक्षार्थियों को मंगल कामनाएं जो परीक्षा में सफल होने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा किसी भी काम में सफल होने की 11 तकनीक (11 Techniques to Succeed in Any Work),किसी भी काम में सफल कैसे हों? (How to Succeed in Any Job?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
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