Integration of parts
खण्डशः समाकलन का परिचय (Introduction to Integration of parts):
- खण्डशः समाकलन (Integration of parts):अब तक हमने त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं, प्रतिस्थापन विधियों तथा बीजीय फलनों के समाकलन ज्ञात करने की विधियों का अध्ययन किया है।परन्तु कुछ फलनों का समाकलन उपर्युक्त विधियों से ज्ञात करना या तो कठिन होता है या फिर संभव नहीं होता है।ऐसी स्थिति में हम फलनों को खण्डों में व्यक्त कुछ साधारण नियमों के अनुसार इनका समाकलन ज्ञात करते हैं।
इनमें अबीजीय फलन तथा चरघातांकी,लघुगणकीय तथा प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों का समाकल ज्ञात करना प्रमुख है। - आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस गणित के आर्टिकल को शेयर करें।यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें।जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके । यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए । आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं।इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।
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खण्डशः समाकलन (Integration of parts):
- खण्डशः समाकलन का नियम या फलनों के गुणनफल का समाकलन (Rule of integration by parts or integration of product of functions):
\int{uv}dx=u\left(\int{v}dx\right)-\int{\left[\frac{du}{dx}\int{v}dx\right]}dx
खण्डशः समाकलन विधि की सफलता प्रथम व द्वितीय फलन के सही चयन पर निर्भर करती है। फलनों का चयन इस प्रकार करना चाहिए कि द्वितीय फलन का आसानी से समाकलन ज्ञात किया जा सके।यद्यपि फलनों के चयन का कोई व्यापक नियम नहीं है फिर भी निम्न बिन्दु ध्यान में रखने चाहिए। - (1.)यदि समाकल्य x की घात तथा चरघातांकी या त्रिकोणमितीय फलनों का गुणनफल हो तो चरघातांकी या त्रिकोणमितीय फलन को द्वितीय फलन लेना चाहिए।
- (2.)अकेले प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन या लघुगणकीय फलनों के समाकलन हेतु इकाई 1 को द्वितीय फलन लेकर समाकलन करना चाहिए।
- (3.)खण्डशः समाकलन करते समय दांयी ओर समाकलन मूल रूप में लौटकर आ जाता है ऐसी स्थिति में पक्षान्तरण कर समाकलन करना चाहिए।
- (4.)आवश्यकतानुसार खण्डशः समाकलन का सूत्र एक से अधिक बार प्रयोग में लिया जा सकता है।
- उपर्युक्त आर्टिकल में खण्डशः समाकलन (Integration of parts) के बारे में बताया गया है।
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About my self
Lekhak Ke Baare Mein (About the Author)
**Satyam Narain Kumawat**
**Website Name:Satyam Mathematics**
*Owner:satyamcoachingcentre.in*
*Sthan:Manoharpur,Jaipur (Rajasthan)*
**Teaching Mathematics aur Anya Anubhav**
***Shiksha:**B.sc.,B.Ed.,(M.sc. star Ke Mathematics Ko Padhane ka Anubhav),B.com.,M.com. Ke vishayon Ko Padhane ka Anubhav,Philosophy,Psychology,Religious,sanskriti Mein Gahri Ruchi aur Adhyayan
***Anubhav:**phichale 23 varshon se M.sc.,M.com.,Angreji aur Vigyan Vishayon Mein Shikshaka Ka Lamba Anubhav
***Visheshagyata:*Maths,Adhyatma (spiritual),Yog vishayon ka vistrit Gyan*
****In Brief:I have read about M.sc. books,psychology,philosophy,spiritual, vedic,religious,yoga,health and different many knowledgeable books.I have about 23 years teaching experience upto M.sc. ,M.com.,English and science.


