How to Realize Test-taker Fantacies?
1.परीक्षार्थी कल्पनाओं को साकार कैसे करें? (How to Realize Test-taker Fantacies?),कल्पनाओं को साकार कैसे करें? (How to Make Fantacies Come True?):
- परीक्षार्थी कल्पनाओं को साकार कैसे करें? (How to Realize Test-taker Fantacies?) कल्पनाओं के सहारे हम ऊंचाइयां भी प्राप्त कर सकते हैं और कल्पनाओं के सहारे भूत और भविष्य में खोये रहने पर वे वास्तविकता से दूर भी ले जाती हैं।इसी को कल्पना लोक में विचरण करना या सब्जबाग देखना कहा जाता है।
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2.अतीत और भविष्य दोनों स्वप्न हैं (Both past and future dreams):
- हम विगत की चर्चा करते हुए प्रायः गर्व और गौरव का अनुभव करते हैं,परन्तु हम भूल जाते हैं कि अतीत एक स्वप्न होता है और वर्तमान के लिए उसका कुछ भी उपयोग नहीं होता है।भविष्य भी एक स्वप्न होता है और उस स्वप्न को वर्तमान में उतारने का अवसर हमारे पास होता है।अतः जो व्यक्ति वर्तमान में जीने की कला जानता है,वर्तमान उसी का होता है।भोगवादियों के अनुसार,हम न तो वर्तमान को मात्र यथार्थ मानते हैं और न वैरागियों की तरह उसको स्वप्नवत् मानते हैं।हम उसको कर्मभूमि मानते हैं जिसका स्वरूप हमारे स्वप्नों के अनुसार निर्मित होता है और अतीत जिसको नींव प्रदान करता है।हम अस्तित्ववादियों की भाँति जीवन को क्षणवादी नहीं मानते हैं,क्योंकि वह क्षण-क्षण करके हमें जीवन की समग्रता प्रदान करने वाला होता है।जीवन को सार्थक बनाने के लिए उचित यही है कि हम सदैव स्वर्णिम भविष्य का स्वप्न देखें और उसी के अनुसार अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करें।जो व्यक्ति चांदी का विचार या व्यापार करता है,वह स्वर्ण प्राप्त करने-कराने वाले कार्य कर ही नहीं सकता है।
- अतीत और भविष्य दोनों स्वप्न हैं।एक वह स्वप्न है जिसे हम देख चुके होते हैं और भविष्य वह स्वप्न है जिसे हम जागते हुए देखते हैं।इन दोनों के मध्य जो क्षीण रेखा है,वही हमारा वर्तमान है।क्षुरस्य धारा रूप वर्तमान में हमको कार्य करना होता है,क्योंकि आने वाला क्षण वर्तमान की सीढ़ी को पार करता हुआ अतीत बन जाता है।इस प्रकार हम केवल भविष्य के सुधारक भी बन सकते हैं और उससे लाभ भी उठा सकते हैं,यदि हम इच्छानुसार कुछ कर सकते हैं,तो भविष्य के सुंदर स्वप्न देखकर उसके अनुसार योजना बना सकते हैं और तदनुरूप वर्तमान में प्राप्त अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।इसीलिए कहा जाता है कि समय सपने के शोक गीत लिखने का नहीं,नए सपनों को जन्म देने का है,इसी के साथ हम जो भी करें,अभी करें और यही करें।
- वर्तमान कर्मठ और कर्त्तव्य पालन की अपेक्षा करने के कारण कठोर होता है तथा भविष्य अंधकारमय अथवा अनिश्चित होता है।जीवन के इस तथ्य को लक्ष्य करके कहा गया है कि अतीत चाहे दुःखद क्यों ना हो,उसकी स्मृतियां सुखद होती हैं,परंतु वे हमारे किस काम की? हमारे विचार से सुखद स्मृतियों का लाभ यह होता है कि वे हमारे मन में वर्तमान के प्रति असंतोष उत्पन्न करके स्वर्णिम भविष्य के निर्माण की प्रेरणा प्रदान करती है।चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस ने ठीक ही कहा है कि भविष्य का निर्माण करने के लिए अतीत का अध्ययन कीजिए।हमारे परीक्षार्थी युवक-युवतियां भी यही तो करते हैं-वे भविष्य की परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए अतीत में पूछे गए प्रश्नों की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं।जो समझदार परीक्षार्थी होते हैं वे यह भी चाहते हैं कि हमारी परीक्षाएं टाली न जाएं,आगे न खिसकायी जाएं क्योंकि भविष्य की सुखद कल्पनाओं का कम-से-कम समय रहना ही उचित होता है।वे वस्तुतः भविष्य की कल्पनाओं को शीघ्रतम वर्तमान में ढालना चाहते हैं।
3.भविष्य या अतीत में खोए न रहें (Don’t get lost in the future or the past):
- भविष्य की शोभा वर्तमान में ढलने में होती है।एक बार अभावग्रस्त एक व्यक्ति महाराज युधिष्ठिर के पास कुछ याचना कर रहा था,”अच्छी बात है,आपका कार्य कल कर दूंगा” युधिष्ठिर ने याचक को आश्वस्त कर दिया।इतने में ही महाबली भीम ने विजयसूचक घंटा बजा दिया “यह क्या किया तुमने भीम?” युधिष्ठिर ने चौंककर कहा।”इस घंटे को बजाने के लिए इससे उपयुक्त अवसर कौनसा हो सकता है? आपने तो काल पर विजय प्राप्त कर ली।कल तक काल देवता आपका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकेगा।” भीम का कथन सुनकर युधिष्ठिर की आंखें खुल गई।उन्होंने याचक का मनोरथ तत्काल पूरा कर दिया।उक्त प्रसंग का निष्कर्ष स्पष्ट है,भविष्य के विषय में चिंतन अवश्य करो,परंतु उसमें रहने का प्रयत्न कदापि मत करो।
- छात्र-छात्राएं परीक्षा की तैयारी कर रहे होते हैं जो भविष्य में होने वाली होती है।भविष्य में होने वाली परीक्षा की तैयारी हेतु रणनीति बनाते हैं और उसका कार्यान्वयन भी करते हैं (वर्तमान में)।यहां भविष्य और अतीत के बारे में कुछ बिंदु हैं।पहला अतीत व भविष्य के बारे में चिंता करें।यह गलत है क्योंकि कहा गया है कि चिता मुर्दे को जलाती है,जबकि चिंता जीवित व्यक्ति को खोखला कर देती है।अतीत में कोई दुःखद घटना हो गई है,असफलता मिल गई है तो उसके बारे में चिंता न करके उस असफलता के कारणों का पता लगाकर उन्हें दूर करना चाहिए न कि चिंता करना चाहिए।भविष्य में कोई जटिल समस्या है,कोई कठिन परीक्षा देनी है तो उसके बारे में चिंता करने से कोई फायदा नहीं है।क्योंकि परीक्षा की तैयारी करने से ही परीक्षा में सफल हुआ जा सकता है।चिंता करने से नुकसान के सिवाय फायदा कुछ नहीं है।
- अतीत की यादों और भविष्य की सुखद कल्पनाओं में खोये रहने से भी कोई फायदा नहीं है।जितना समय हम भविष्य व अतीत में खोये रहने में व्यतीत करें तो उसके बजाय हम अध्ययन करें तो हमारी परफॉर्मेंस बढ़ेगी साथ ही समय का सदुपयोग होगा जबकि अतीत और भविष्य में खोये रहने से उतना समय बर्बाद होता है।अतीत व भविष्य के बारे में खोये रहने से हासिल कुछ नहीं हो सकता है।अतीत में जो कुछ हो गया उसे बदल नहीं सकते और भविष्य में किसी भी योजना,लक्ष्य,परीक्षा में उत्तीर्ण होने को तब तक प्राप्त नहीं कर सकते जब तक हम उसकी पूर्ण एकाग्रता के साथ तैयारी नहीं करते हैं।अतीत और भविष्य में खोये रहने से दो नुकसान होते हैं पहले उतना समय बर्बाद होता है जितने समय तक खोए रहते हैं।दूसरा नुकसान यह है कि वर्तमान में अध्ययनरत रहने के लिए एकाग्रता की आवश्यकता होती है वह एकाग्रता अतीत व भविष्य में खोये रहने से भंग होती है।
- सवाल यह है कि क्या हमें अतीत और भविष्य के बारे में चिंतन नहीं करना चाहिए? यदि नहीं तो लक्ष्य का बीज,परीक्षा आदि भविष्य में होते हैं फिर उसको प्राप्त करने,उसकी तैयारी क्यों करें? वस्तुतः अतीत का उतना ही चिंतन करना चाहिए जो हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है।जैसे अतीत में आपको असफलता मिली है तो उस अतीत की असफलता के कारणों को जानने के लिए चिंतन करें और वर्तमान में उन कमियों को दूर करें।इसके अलावा उसका चिंतन ना करें।भविष्य में जो लक्ष्य प्राप्त करने की योजना बनायी है,भविष्य में जो परीक्षा देनी है उसके बारे में चिंतन करें कि उसको प्राप्त करने,उत्तीर्ण होने के लिए क्या रणनीति अपनाएं।हमें क्या-क्या करना होगा,किस तरीके से करना होगा कि हमारा निशाना सटीक लक्ष्य पर लगे।इतना चिंतन करके रणनीति और योजना बनाएं परंतु भविष्य में खोये रहने,सुखद कल्पनाओं में खोये रहने का कोई फायदा नहीं है।
4.भविष्य की कल्पनाओं को सार्थक करने के लिए कर्म करें (Karma to make future fantasies meaningful):
- भविष्य पर अत्यधिक विश्वास करने वाले लोग अपने वर्तमान को कष्टमय बना लेते हैं।आने वाले धन के भरोसे वर्तमान का बजट बना लेने वाले व्यक्ति को मूर्ख कौन नहीं कहता है? आपने जो परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है,परंतु यदि आप अपने को उसमें उत्तीर्ण मानकर आचरण करने का प्रयास करेंगे,तो आप कल्पना लोक के निवासी बनकर रह जाएंगे,क्योंकि वैसी स्थिति में आप परीक्षा में उत्तीर्ण हो ही नहीं सकेंगे।आप भविष्य को बनाने वाली परीक्षा के प्रति यदि प्रतिबद्ध बने रहेंगे,तो भविष्य आपका आज्ञाकारी बनकर आएगा अन्यथा आपका स्वामी बन जाएगा और भविष्य को वर्तमान न बना पाना हमारी नियति बन जाएगी।
- आप भविष्य की कल्पनाओं को सार्थक करने के लिए वर्तमान में प्रयत्न करते हैं फलतः वर्तमान और भविष्य एक सूत्र में बंध जाते हैं और एक अवस्था ऐसी आती है जब वर्तमान और भविष्य अन्योन्याश्रित बन जाते हैं। भविष्य में होने वाली परीक्षाओं के संदर्भ में तैयार की हुई अध्ययन-योजना को आप वर्तमान में ही तो कार्यान्वित करते हैं।हमें यह कल्पना नहीं करना चाहिए कि भविष्य में नर्क में रहना पड़ेगा परंतु यह सही है कि भविष्य के स्वर्ग के लिए वर्तमान में ही गहरी नींव देनी पड़ेगी।शास्त्रों का वचन डंके की चोट बताता है कि भविष्य द्रष्टा बनने के लिए वर्तमान का स्रष्टा बनना परम आवश्यक होता है।आप वर्तमान में जितना कठिन परिश्रम करेंगे,भविष्य का स्वरूप उतना ही निखर उठेगा।ऐसे व्यक्ति का सर्वस्व भले नष्ट हो जाए,परंतु उसके सामने प्रेरक भविष्य सदैव बना रहता है,क्योंकि वह व्यक्ति निर्माण करने के अपने अधिकार को किसी मूल्य पर नहीं छोड़ना चाहता।भविष्य वस्तुतः होता नहीं है,उसका निर्माण किया जाता है।स्वप्न के अनुसार और स्वप्न बनते हैं।निर्माण एवं सृजन की भावभूमि पर जब तक आप पूर्णनिष्ठा एवं विश्वास के साथ भविष्य के निर्माण में प्रयत्नशील रहेंगे,तब तक भविष्य आपकी प्रतीक्षा करता रहेगा,आपके लिए उसके द्वार सदैव उन्मुक्त बने रहेंगे।
- हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने तथा अमर शहीदों ने स्वतंत्र भारत का स्वप्न देखा था और उन्होंने स्वप्न को स्वप्न ही न रहने देकर यथार्थ बनाने का प्रयत्न किया और वे सफल हुए।
- भारत सदियों से गुलाम था क्योंकि प्रारंभ में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले स्वप्न-लोक से बाहर नहीं आना चाहते थे।उनका स्वप्न भंग हो गया,क्योंकि उनको गुलामी का गम तो था,परंतु आराम के साथ।उनकी मृत्यु हो गई और उनको आज कोई याद नहीं करता है।परंतु सुभाष चंद्र बोस,सरदार भगत सिंह आदि ने अत्यधिक शोषण और गुलामी के विरुद्ध संघर्ष किया और शहीद हो गए,परंतु उनके द्वारा क्रांति की जलाई हुई मशाल को बाद के क्रांतिकारियों ने थामें रखा,स्वर्णिम भविष्य को सार्थक करने के लिए संघर्ष किया और जीवित रहे।फलतः वे अमर हो गए।
- स्वप्न को प्रेरक बनाकर वर्तमान के यथार्थ का निर्माण करना सच्चे स्वप्नद्रष्टा का कर्त्तव्य है।जो ऐसा नहीं करता है वह अवसर की,वर्तमान की उपेक्षा करता है।ऐसा करना सब कुछ नष्ट करने के समान होता है।हमारा प्रेरणा स्रोत होना चाहिए:भविष्य को वर्तमान द्वारा खरीदा जा सकता है।
5.पढ़ते तो सभी विद्यार्थी हैं (All students are reading also):
- शैक्षिक परीक्षा,प्रवेश परीक्षा या प्रतियोगिता परीक्षा के अभ्यर्थियों में से अधिकांश पढ़ते हैं।ऐसे बहुत कम छात्र-छात्रा या अभ्यर्थी होते हैं जो बिल्कुल नहीं पढ़ते हैं,ऐसे विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों की हम चर्चा नहीं कर रहे हैं,चर्चा नहीं करना चाहते हैं।क्यों ऐसे विद्यार्थी दरअसल सोए हुए नहीं रहते हैं बल्कि अधजगे होते हैं। अब जो जगा हुआ है और सोने का नाटक कर रहा हो उसे किसी भी ढंग से,किसी भी तरीके से नहीं जगाया जा सकता है।हम तो उनको उनकी बात कर रहे हैं जो पढ़ते हैं और सफल और असफल हो जाते हैं।पढ़ते हुए असफल होने के कुछ कारण होते हैं।ऊपर उसका वर्णन कर चुके हैं।पहले वे जो अतीत व भविष्य की चिंता में डूबे रहते हैं।ऐसे विद्यार्थी थोड़ा-बहुत पढ़ते हैं और फिर अध्ययन छोड़कर भविष्य व अतीत के बारे में चिंता करने लगते हैं।जैसे अतीत में सफलता मिलने पर उसके सुखद पलों की याद करके मन ही मन खुश होते हैं।यदि असफल होते हैं तो मन ही मन दुखी होते रहते हैं।या फिर भविष्य की लंबी-चौड़ी प्लानिंग बनाने लगते हैं।जैसे यदि में जेईई प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण हो गया तो ऐसा करूंगा वैसा करूंगा।ऐसे में आधे-अधूरे मन से परीक्षा की तैयारी से मनोवांछित सफलता कैसे पाई जा सकती है या कैसे उत्तीर्ण हुआ जा सकता है।
- आधुनिक युग कड़ी प्रतिस्पर्धा का युग है।इस युग में वही छात्र-छात्रा बाजी मारता है जो पूर्ण एकाग्रता,समर्पण,कठिन परिश्रम,समय का सदुपयोग,लक्ष्य पर नजर आदि के साथ तैयारी करता है।केवल कल्पना लोक में विचरण करने वाले,सब्जबाग देखने वाले ऐसे मुंह के बल गिरते हैं कि ऐसे कैसे हो गया,ऐसा क्यों कर हो गया? कल्पनाएं हमें शीर्ष पर पहुंचा सकती है तो रसातल में भी पहुंचा सकती हैं।कल्पनाओं को साकार करने का जो प्रयत्न करते हैं वे शीर्ष पर जा विराजते हैं और जो प्रयत्न नहीं करते हैं या आधा-अधूरा प्रयत्न करते हैं वे नीचे गिर पड़ते हैं।कल्पनाओं को सही दिशा देकर साकार करने का काम करती है हमारी सद्बुद्धि अर्थात सतोगुण वाली बुद्धि और तमोगुण वाली बुद्धि कल्पनाओं को गलती दिशा की तरफ मोड़ देती है।
- जनवरी के बाद बोर्ड परीक्षार्थियों,कॉलेज के छात्र-छात्राओं,प्रवेश परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए अग्नि परीक्षा है।वे साल भर में जो कुछ अध्ययन किया गया है उसका निचोड़ सामने आ जाएगा।लेकिन इस अंतिम समय में थोड़ी-सी भी ढिलाई,ढीलपोल,लापरवाही,असावधान हो जाते हैं और उसका परिणाम होता है परीक्षा में असफलता। प्रतियोगिता परीक्षाएँ तो साल भर चलती रहती हैं,यों शैक्षिक परीक्षार्थियों की परीक्षाएं भी साप्ताहिक टेस्ट,रैंकिंग टेस्ट,मासिक टेस्ट,अर्द्ववार्षिक परीक्षा,प्री बोर्ड आदि के नाम पर चलती रहती है,अतः अभ्यर्थियों की अग्नि परीक्षा तो साल भर चलती रहती है।प्रतियोगिता परीक्षार्थियों का तो जब तक सिलेक्शन नहीं होता है तब तक अग्नि परीक्षा चलती रहती है,इस अग्नि परीक्षा में ऐसे कर्मठ और भाग्यशाली अभ्यर्थी बहुत कम होते हैं जो सफल हो पाते हैं।अपनी पूर्ण सामर्थ्य,योग्यता और शक्तिभर पुरुषार्थ करना चाहिए और फिर भी यदि सफलता न मिले तो इसमें अपना दोष नहीं समझना चाहिए।
6.परीक्षा के दिन और उससे कुछ पूर्व क्या करें? (What to do on and before the exam?):
- परीक्षा के दिनों में भोजन सात्विक और संतुलित लेना चाहिए।तेज मिर्च मसाला,तला-भुना,चाय-कॉफी आदि से युक्त भोजन से बचना चाहिए।मन को शांत रखने के लिए ध्यान व प्राणायाम करें।हल्की एक्सरसाइज करें। अपने परमिशन लेटर को सहेज कर रखें।पेन की अच्छी तरह जांच कर लें।रबड़,पेंसिल और ड्राइंग बॉक्स लेकर जाएं ताकि किसी से मांगने की जरूरत ना पड़े।परीक्षा कक्ष में रोल नंबर पहले दिन जांच कर आए और यह भी देख लें कि जाने में कितना समय लगेगा।परीक्षा कक्ष में या सेन्टर पर आधे घंटे पहले पहुंचे।परीक्षा प्रश्न-पत्र वाले दिन की पिछली रात को भरपूर नींद लें जिससे परीक्षा प्रश्न-पत्र को हल करते समय नींद,झपकी,आलस्य न आए और तनाव हावी न हो।
- प्रातः काल प्रार्थना करें।प्रार्थना से आत्मबल बढ़ता है।सकारात्मक सोच रखें,घबराहट न रखें।साथियों से परीक्षा केंद्र पर किसी भी टॉपिक पर चर्चा करने से बचें।पानी की बोतल साथ लेकर जाएं।बीच-बीच में पानी पीते रहें ताकि शरीर हाइड्रेट रहे।भगवान का स्मरण करके प्रश्न-पत्र का उत्तर देना प्रारंभ करें।घर से माता-पिता और बड़ों का आशीर्वाद लेकर निकले।मन में किसी प्रकार की शंका,कुशंका न रखें।जो होगा वह भगवान पर छोड़ दें।
- उपर्युक्त आर्टिकल में परीक्षार्थी कल्पनाओं को साकार कैसे करें? (How to Realize Test-taker Fantacies?),कल्पनाओं को साकार कैसे करें? (How to Make Fantacies Come True?) के बारे में बताया गया है।
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7.विद्यार्थी को नहीं सूझता (हास्य-व्यंग्य) (Student Doesn’t Understand) (Humour-Satire):
- विक्की:सर,मेरी एक समस्या है।जब मैं कल्पना करता हूं तो मुझे कुछ भी नहीं सूझता है।
- टीचर:ऐसा कब होता है?
- विक्कीःजब आप सवाल हल करने के लिए देते हैं।मैं सवाल हल करने के लिए कल्पना करता हूं और मुझे कुछ नहीं सूझता।अंधेरा छा जाता है।
8.परीक्षार्थी कल्पनाओं को साकार कैसे करें? (Frequently Asked Questions Related to How to Realize Test-taker Fantacies?),कल्पनाओं को साकार कैसे करें? (How to Make Fantacies Come True?) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.परीक्षा का डर किन विद्यार्थियों को ज्यादा होता है? (Which students are more afraid of exams?):
उत्तर:वे विद्यार्थी जो सालभर तैयारी नहीं करते हैं,पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं और जब परीक्षा निकट आती है तो उन्हें सब कुछ हाथ से निकलता दिखाई देता है।उन्हें परीक्षा का डर सताता है।
प्रश्न:2.हरदम पढ़ाई करने वाले क्यों तनावग्रस्त होते हैं? (Why are students stressed all the time?):
उत्तर:कुछ ऐसे भी विद्यार्थी होते हैं जो हरदम पढ़ाई में ही लगे रहते हैं,लेकिन अव्वल आने की चिंता में दुबले हुए जाते हैं।एक बात याद रखो,पढ़ाई को गंभीरता से लेना तो ठीक है पर परीक्षा तनाव नहीं बनाना चाहिए।
प्रश्न:3.कौनसे विद्यार्थी परीक्षा में सेफ रहते हैं? (Which students are safe in the exam?):
उत्तर:जो परीक्षार्थी परीक्षा के दिनों में तरोताजा रहते हैं और अपनी तैयारी पर विश्वास रखते हैं वे अच्छा स्कोर कर जाते हैं।जितनी भी तैयारी करें,आत्म-विश्वास से करें।थोड़ी देर के लिए सकारात्मक होकर सोचें कि मैरिट में आने वाले छात्र-छात्राओं के भी सौ में से सौ तो नहीं मिलते।
उपर्युक्त के द्वारा परीक्षार्थी कल्पनाओं को साकार कैसे करें? (How to Realize Test-taker Fantacies?) के बारे में जान सकेंगे।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा परीक्षार्थी कल्पनाओं को साकार कैसे करें? (How to Realize Test-taker Fantacies?),कल्पनाओं को साकार कैसे करें? (How to Make Fantacies Come True?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
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