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Home Work in Mathematics

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1.गणित में गृहकार्य (Home Work in Mathematics), गणित में गृहकार्य का महत्त्व (Importance of Home Work in Mathematics):

  • गणित में गृहकार्य (Home Work in Mathematics) कक्षा में अभ्यास कार्य समाप्त होने के बाद दिया जाना चाहिए।गृह कार्य की इसलिए आवश्यकता होती है क्योंकि कक्षा में सवालों,समस्याओं को छात्र-छात्राएं अध्यापक व अपने सहपाठियों की मदद से हल कर लेते हैं। उनको स्वयं हल करने तथा ज्ञान ग्रहण करने में उनका विकास करने के लिए कुछ सवाल व समस्याएं गृह कार्य के रूप में दिया जाना चाहिए। गृह कार्य अभ्यास कार्य की तरह ही होता है बस फर्क यह होता है कि अभ्यास कार्य को शिक्षक व सहपाठियों की मदद से हल कर सकते हैं जबकि गृह कार्य शिक्षक व सहपाठियों की मदद के बिना स्वयं को हल करना होता है।
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2.गृह कार्य देने में ध्यान रखी जाने वाली बातें (Things to Keep in Mind in Giving Home Work):

  • गृह कार्य बालकों को स्वयं नियमित रूप से अध्ययन करने की आदत डालने तथा उनके चिन्तन व तर्क शक्ति का विकास करने के लिए दिया जाता है।
  • गृह कार्य संबंधित अभ्यास माला का ही दिया जाना चाहिए जिसका अध्ययन कक्षा में कराया गया हो। गृह कार्य बहुत अधिक जटिल तथा बहुत अधिक सरल भी नहीं दिया जाना चाहिए।
  • गृहकार्य में छात्र-छात्राओं की चिन्तन शक्ति का विकास होने की प्रेरणा मिलनी चाहिए।
  • गृहकार्य छात्र-छात्राओं की योग्यता के अनुसार दिया जाना चाहिए।गृहकार्य इस प्रकार देना चाहिए जिससे बालक-बालिकाओं में उत्साह का संचार हो।
  • गृहकार्य देने के बाद उसकी जाँच अवश्य करनी चाहिए।गृह कार्य की जांच के लिए निपुण छात्र-छात्राओं का सहयोग लिया जा सकता है।

3.गृह कार्य कितना दिया जाए? (How much Home work Should be Given?):

  • गृह कार्य बहुत अधिक मात्रा में नहीं दिया जाना चाहिए।गृह कार्य की अधिकता के कारण कई छात्र-छात्राएं उसे पूरा करने के लिए पासबुक की सहायता ले लेते हैं अथवा होशियार छात्र-छात्राओं के गृह कार्य की नकल कर लेते हैं।बहुत अधिक गृहकार्य बोझिल हो जाता है।कई अध्यापक पूरी-की-पूरीं प्रश्नावली छात्र-छात्राओं को देते हैं। इस कारण छात्र-छात्राएं इसे बोझ समझते हैं। क्योंकि हर विषय में गृहकार्य दिया जाएगा तो छात्र-छात्राएं कक्षा में शिक्षण कार्य को पढ़ने का समय नहीं मिलेगा।ओर न ही आगे पाठ पढ़ने की पूर्व तैयारी कर सकता है।
  • विद्यालय में 5-6 घंटे पढ़ने के बाद घर पर इतना समय नहीं मिलता है कि वह अध्ययन भी करें और हर विषय का पूरा गृह कार्य निपटाए।
  • गृहकार्य इतना ही देना चाहिए जिससे छात्र छात्राएं लगभग दो-तीन घंटे में (सभी विषयों का) निपटा सके।

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4.गणित में गृह कार्य का स्तर (Level of Home Work):

  • गणित में गृह कार्य इस प्रकार का नहीं दिया जाना चाहिए कि छात्र-छात्राएं नकल करके पूरा कर सके बल्कि गृह कार्य इस प्रकार का दिया जाना चाहिए जिसे छात्र-छात्राएं स्वयं हल करें जिससे उनकी बौद्धिक क्षमता बढ़ सके।
  • गृह कार्य स्वयं हल करने से बालकों में आगे कक्षाओं में गणित को रुचिपूर्वक पढ़ने की प्रेरणा मिलनी चाहिए।गृह कार्य सभी को समान न देकर एक ही स्तर के छात्र-छात्राओं के समूह को अलग तथा निपुण छात्र-छात्राओं को अलग गृह कार्य दिया जा सकता है।
  • गृह कार्य देने में विद्यार्थियों के घर के वातावरण का ध्यान भी रखना चाहिए।बहुत अधिक शोर-शराबे, अशांत वातावरण में गृह कार्य प्रैक्टिकल सवाल दिया जा सकता है।शांत वातावरण है तो थ्योरीटिकल गृहकार्य भी दिया जा सकता है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गणित में गृहकार्य (Home Work in Mathematics), गणित में गृहकार्य का महत्त्व (Importance of Home Work in Mathematics)के बारे में बताया गया है।

5.गणितज्ञ का भाषण (हास्य-व्यंग्य) (Mathematician’s Speech) (Humour-Satire):

  • एक गणितज्ञ भाषण के दौरान सृजनात्मक शिक्षक और व्यावसायिक शिक्षक की परिभाषा बता रहे थे। सृजनात्मक शिक्षक की परिभाषा बताते हुए उन्होंने कहा कि जब शिक्षक प्रेमपूर्वक छात्र-छात्राओं को गणित के सवाल,समस्याओं और कठिनाइयों को बताता है।सम्बन्धित टाॅपिक पर कुछ नवीन बातें  बताता है तो उसे सृजनात्मक शिक्षक कहते हैं।
    श्रोता छात्र:और व्यावसायिक शिक्षक किसे कहते हैं?
  • गणितज्ञ:जब व्यावसायिक शिक्षक गणित के टाॅपिक को पढ़ा चुका होता है तो बाद में कहता है कि लो मैंने पढ़ा दिया है।बस मेरी ड्यूटी खत्म हुई। अब प्रश्नावली के सवाल तुम खुद हल करो।मेरी जान मत खाओ।मुझे शांति से आराम करने दो।मुझे परेशान मत करना।चुपचाप शांति से बैठकर सवालों को हल करना।
  • मुझे इतना ही वेतन मिलता है जितना मैंने पढ़ा दिया है।मेरी किस्मत फूटी हुई थी जो मुझे गणित अध्यापक बनना पड़ा वरना ओर विषय के अध्यापक तो ऐशोआराम करते हैं बल्कि अपनी क्लास में सोते हुए मिल जायेंगे।कमबख्त यह गणित कैसी है जो न दिन में आराम करने देती है और न रात को आराम से सोने देती है।जब देखो सवाल! सवाल! सवाल!
  • इसके बजाय तो गधे पर मिट्टी के बोरे लादकर आंगन लीपने की मिट्टी बेच लो वो ठीक है।परंतु गणित की अध्यापकी नरक में जीने के समान है।

6.गणित में गृहकार्य (Home Work in Mathematics), गणित में गृहकार्य का महत्त्व (Importance of Home Work in Mathematics) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.कुछ शिक्षाशास्त्री गृहकार्य की आलोचना करते हैं? आप कहाँ तक सहमत हैं? (DO some academics criticize homework?How far do you agree with that?):

उत्तर:कुछ शिक्षाशास्त्री इस आधार पर आलोचना करते हैं कि छात्र-छात्राओं को स्कूल में बिल्कुल विश्राम नहीं दिया जाता है।घर पर भी कोल्हु के बैल की तरह पढ़ता रहे।इससे उनमें गणित पढ़ने की रुचि समाप्त हो जाती है।हर विषय का अध्यापक चाहता है कि बालक उसके गृह कार्य को पूरा करके लाए। बहुधा गणित के शिक्षक बहुत अधिक गृह कार्य देते हैं।वे इतने अधिक सवाल दे देते हैं कि उनको हल करना विद्यार्थी के लिए असंभव है।सवाल (गृह कार्य) न करने पर शिक्षक डांटते-डपटते हैं बल्कि कई शिक्षक तो मारपीट भी कर देते हैं।ऐसे अध्यापक के गृह कार्य को पूरा करने के लिए विद्यार्थी स्कूल खुलने से पहले ही आ जाते हैं और होशियार छात्र-छात्राओं की उत्तर पुस्तिका से नकल कर लेते हैं।
इसमें सन्देह नहीं कि इस प्रकार का गृहकार्य बालकों को नुकसान पहुंचाता है।बल्कि बालकों में झूठ बोलने, धोखा देने, नकल करने की आदतों का निर्माण होता है।
परंतु ऐसा तभी होता है जबकि गृह कार्य का संचालन ठीक से न किया जाए।बालक गृह कार्य न करके लाए तो उसके कारण को जानकर उसे दूर करने का प्रयास करें।किसी भी कार्य में गुण-दोष होते हैं।ऊपर वर्णित किया गया है वह नकारात्मकता है।गृह कार्य छात्र-छात्राओं की योग्यता के अनुसार दिया जाए तथा बहुत अधिक मात्रा में गृह कार्य न दिया जाए।

प्रश्न:2.गणित में गृहकार्य से क्या तात्पर्य है? (What is Meant by Home Work in Mathematics?):

उत्तर:जब गणित का कोई टाॅपिक कक्षा में पढ़ाया जाता है उससे संबंधित सवाल, समस्याएं,प्रमेय घर पर करने के लिए दी जाती है तो उसे गृह कार्य कहते हैं।

प्रश्न:3.गृह कार्य देने में सबसे प्रमुख किस बात का ध्यान रखा जावे? (What is the most important thing to be taken care of in giving home work?):

उत्तर:गृह कार्य इस प्रकार का नहीं देना चाहिए कि बालक-बालिकाओं को नीरस तथा ऊबाऊ लगे।वे गृह कार्य को बोझिल और अनावश्यक न समझे। गृहकार्य को देने में विविधता लाना परम आवश्यक है।एक ही प्रकार के कार्य करते-करते विद्यार्थी ऊब जाते हैं।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित में गृहकार्य (Home Work in Mathematics), गणित में गृहकार्य का महत्त्व (Importance of Home Work in Mathematics)के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Home Work in Mathematics

गणित में गृहकार्य
(Home Work in Mathematics)

Home Work in Mathematics

गणित में गृहकार्य (Home Work in Mathematics) कक्षा में अभ्यास कार्य समाप्त होने के
बाद दिया जाना चाहिए।गृह कार्य की इसलिए आवश्यकता होती है
क्योंकि कक्षा में सवालों,समस्याओं को छात्र-छात्राएं अध्यापक

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