9 Important Tips to Develop Art of Job
1.जाॅब की कला विकसित करने की 9 महत्त्वपूर्ण टिप्स (9 Important Tips to Develop Art of Job),जाॅब करने की कला कैसे विकसित करें (How to Develop Art of Doing Job?):
- जाॅब की कला विकसित करने की 9 महत्त्वपूर्ण टिप्स (9 Important Tips to Develop Art of Job) से आप जानेंगे कि जाॅब में दक्षता और ग्रोथ कैसे हासिल करें? हालांकि जाॅब पर अनेक लेख इस साइट पर आपको मिल जाएंगे।हर लेख में महत्त्वपूर्ण और नई जानकारी हासिल होगी और उनके आधार पर आप परिपक्व हो सकते हैं।
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2.वर्कलोड को संतुलित करें (Balance the workload):
- अक्सर कई कारणों से वर्क लोड बढ़ जाता है।जैसे त्वरित गति से जॉब को न निपटाना,मैन्युअल काम करना अर्थात ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग न करना,फालतू सहकर्मियों से गपशप करना,काम के प्रति अरुचि और अन्य विषयों में रुचि लेना आदि और इसके अलावा वास्तविक कारण से भी वर्कलोड बढ़ जाता है। आप गंभीरतापूर्वक काम तो करते हैं फिर भी आपकी क्षमता से वर्कलोड अधिक है तो उसको अधिकारी से कहकर वर्कलोड का बंटवारा संतुलित रूप से करवाया जा सकता है।परंतु वर्कलोड आपकी लापरवाही,आपके जॉब करने के ढंग,लेटलतीफी के कारण बढ़ रहा है तो इसके लिए आपको खुद को ही अपने आप में बदलाव करना पड़ेगा।
- समय पर ऑफिस जाएं और तय समय सीमा में अपना ध्यान कार्य को निपटाने पर फोकस करें।प्राथमिकता तय करके काम को निपटाएं।जो कार्य सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है उसे सबसे पहले,उसके बाद महत्त्वपूर्ण और अंत में कम महत्त्वपूर्ण कार्य को निपटाएं।इस प्रकार रणनीति के साथ काम को निपटाएंगे तो वर्कलोड नहीं बढ़ेगा।वर्क को निपटाने पर आपका नियंत्रण रहेगा।आज की तेज रफ्तार जिंदगी के अनुसार वर्क को निपटाने के लिए तकनीकी का सहारा भी लेना होगा।तकनीकी का सहारा लेकर काम को द्रुतगति से निपटाया जा सकता है।यदि तकनीकी का प्रयोग,ऑनलाइन माध्यमों का प्रयोग करना आप नहीं जानते हैं तो उन्हें जानें और समझें,यदि प्रशिक्षण लेने की जरूरत है तो ऑनलाइन या ऑफलाइन प्रशिक्षण लें।
3.गलतफहमी से बचें (Avoid misunderstandings):
- अगर किसी मसले में आपको कोई सुझाव दिया गया है अथवा आप स्वयं किसी से सुझाव ले रहे हैं तो कई बार आपस में गलतफहमी हो जाती है।गलतफहमी का कारण यह हो सकता है कि आपने बात को ठीक से समझा नहीं है।लेकिन ज्यादातर एम्प्लॉइज यह स्वीकार करने से डरते हैं कि उन्होंने बात को ठीक से समझा नहीं है,इसे स्वीकारने में अपना अपमान समझते हैं।इसके बाद आपस में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप चालू हो जाता है और बात बिल्कुल बिगड़ नहीं जाती है तब तक आपको यह पता नहीं चलता कि सामने वाले की बात आपको या आपकी बात सामने वाले को ठीक से समझ नहीं आई।इससे बचने का तरीका है कि आप सुनने वाले से कहें कि वह आपकी बात को दोहराए,ताकि आप यह जान सकें कि वह ठीक से समझा या नहीं।इससे आप यह निश्चित कर पाएंगे कि आप दोनों कही गई बात का एक ही अर्थ ले रहे हैं।
- जैसे अपने बाॅस ने या सीनियर ने आपको कहा था कि आपको यह टास्क जल्दी करना है,पर आप यह नहीं समझ पाए कि टास्क को बहुत जल्दी करना है।अतः बात को दोहराने या स्पष्ट करने से वह बात ठीक से सभी को समझ में आ जाती है।
ऐसा बहुत बार होता है कि सुनने वाले का ध्यान कहीं और होता है और वह कुछ का कुछ समझ लेता है।अपने निर्देश ध्यान से दें या सुने।काम शुरू करने से पहले ही जांच ले की टास्क निर्देशानुसार किया जा रहा है या नहीं,चाहे आप एम्प्लाॅई हैं या बाॅस।दोनों को ही सचेत और सजग रहने की आवश्यकता है।अपनी कल्पना का प्रयोग करें कि अगर यह काम जो सौंपा गया है,समझदारी के साथ नहीं किया गया तो क्या होगा? क्या-क्या गलतियां हो सकती हैं? संभव गलतियों को पहले से ही पहचान लें और सकारात्मक तरीका अपनाते हुए काम को निपटाएं।
4.सूझ-बूझ कर कार्य करना जरूरी (It is important to act wisely):
- एम्प्लाॅई कितना ही अनुभवी हो लेकिन किसी न किसी मामले में वह नौसिखिया होता है।सारी बातें नहीं जान पाता है क्योंकि तकनीकी के इस दौर में तकनीक बदलती रहती है,अतः सीखते रहना जरूरी है।सीखते रहने के लिए अपने सहकर्मियों तथा बाॅस से सलाह-मशविरा करना जरूरी होता है।बिना सलाह-मशविरा के टास्क के गलत होने की संभावना रहती है।यह एक दिन एंप्लॉई के लिए मुसीबत का कारण बन सकता है।अगर आप अपने लोगों से सलाह-मशविरा नहीं करते तो फिर किससे करेंगे,कैसे सीखेंगे,आपके सीखने का माध्यम क्या होगा? याद रखें जो भी ज्ञान अर्जित होता है वह दूसरों के द्वारा होता है और अनुभव स्वयं के द्वारा अर्जित किया जाता है।बिना सलाह-मशविरा के आगे बढ़ते जाना आपके लिए भी एक समस्या बन सकती है।वैसे भी किसी काम के लिए एक की जगह चार दिमाग बेहतर होते हैं,हां यह अवश्य है कि ये दिमाग सुलझे हुए होने चाहिए,भटकाने वाले नहीं।
- अगर आप चाहते हैं कि आपका टास्क बेहतरीन तरीके से हो,बॉस के निर्देशन का सही पालन हो तो इसके बारे में उन लोगों से चर्चा जरूर करें जो आपके काम के बारे में जानकारी रखते हैं और आपको सही रास्ता दिखाते हैं।उच्च से उच्च पद पर आसीन व्यक्ति भी अपने से ओहदे में छोटे पद वाले व्यक्तियों से राय लेता है और जो ऐसा नहीं करता है,उसके गिरने के चांसेज अधिक होते हैं।कई बार एक छोटे से सुझाव या राय से किसी समस्या का रास्ता मिल जाता है और आप उस समस्या को हल कर लेते हैं।
5.काम के तरीके में बदलाव (Changes in the way work is done):
- कई बार अनाड़ी या नौसिखिया एम्प्लाॅई बाजी मार ले जाता है।शायद इसलिए कि वह औरों से अलग है,हटकर काम करता है।किसी काम को एक ही तरीके से करने का मतलब यह नहीं है कि वही उस काम को करने का सबसे अच्छा तरीका है।एम्प्लाॅईज एक मशीन की तरह नहीं होते।एक ही तरीके से काम बार-बार करने से बोरियत या ऊब पैदा होती है,जिससे काम पर बुरा असर पड़ता है।यह देखना एम्प्लाॅई का खुद का काम है कि वह ऊबे नहीं या फिर बाॅस देखे कि एम्प्लॉइज में बोरियत पैदा नहीं हो और काम रोचक बना रहे।
- काम को अलग तरीके से,नये तरीके से करने के लिए यदि आप एम्प्लाॅई हैं तो अपने सहकर्मियों या सीनियर्स से मदद ले सकते हैं और यदि बाॅस है तो एम्प्लॉइज को सुझाव दे सकता है।इससे काम को अपने ढंग से करने का अवसर मिलता है।नवीनता से बोरियत खत्म होती है।
- यदि आप काम को करने का नया ढंग जानते हैं तो उसको छुपाने से कोई फायदा नहीं है।कम से कम बातों का राज रखना चाहिए।इससे आपकी प्रतिभा में निखार आएगा।ज्ञान और अनुभव बांटने से बढ़ता है,कम नहीं होता है।बताने से कई नई चीजें भी पता चलती है और छिपाने से हम ज्ञान को भूलने लगते हैं और यह महसूस होने लगता है कि हमारे ज्ञान में कमी हो रही है।हम यह समझ ही नहीं पाते कि ऐसा क्यों हो रहा है।आज ज्ञान का जो विस्फोट हो रहा है,उसका कारण यह है कि विद्वान आपस में चर्चा करते हैं,संवाद करते हैं,अपने ज्ञान को दूसरों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर करते हैं।
6.समस्याओं का कोई अंत नहीं (There is no end to the problems):
- कई बार एंप्लॉई को समझाने के बाद भी बात समझ नहीं आती।छोटी-सी समस्या भी बड़ी समस्या का रूप ले लेती है।अक्सर ऐसा इसलिए होता है कि उत्तेजित होकर राई का पहाड़ बना दिया जाए।कई बार चिड़चिड़ेपन से एम्प्लाॅई को समझ नहीं आता कि वे क्या कर रहे हैं और स्थिति को निजी चुनौती मान लेते हैं।यदि आप काम को निजी काम समझ कर करेंगे तो समस्या उलझेगी नहीं,आप धीरज से काम लेंगे,टकराव की स्थिति पैदा होने से पहले ही उसका समाधान ढूंढ लेंगे।
- कई बार एंप्लॉई को बार-बार समझाने के बाद भी बात समझ नहीं आती।इसके लिए आप सीनियर या बाॅस से कहें कि वह करके दिखाएं।बेशक यह सभी चाहते हैं कि आपको एक बार में ही कोई बात समझ में आ जाए और उसके बाद आप काम को ठीक से कर सकें या कुछ समस्याओं को एक बार में ही सुलझाया जा सके।पर लोगों से जुड़ी समस्याएं इस तरह से हल नहीं होती।आप आज एक कस्टमर की समस्या हल करेंगे तो कल दूसरी समस्या खड़ी हो सकती है और हो सकता है कि वही समस्या अगले हफ्ते या महीने फिर खड़ी हो जाए।
- तात्पर्य यह है कि समस्याओं का ताँता लगा रहेगा,जब तक जीवन है तब तक समस्या भी रहेगी,आपका काम है समस्याओं का निपटारा करना।समस्याओं को निपटाने से ही आपके व्यक्तित्व का निर्माण होता है और आपके अनुभव में वृद्धि होगी।जिसके जीवन में समस्याएं नहीं है तो समझ लें कि वह मानव या एम्प्लाॅई नहीं है।यह जीवन ही खत्म हो जाएगा परंतु समस्याओं का अंत नहीं होगा।समस्याएं हमें सक्रिय रखती है,जीवन जीवन्त महसूस होता है।अतः समस्याओं से घबराएं नहीं,उनका डटकर सामना करें और उनको हल करने की कला सीखें।
7.वाद-विवाद के बजाय समझें (Understand rather than debate):
- क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि समझदार एंप्लॉई बहस में नहीं पड़ते? वे जानते हैं कि बहस करने से केवल समय बर्बाद होता है।मतभेद होना स्वाभाविक है,हर एंप्लॉई के विचार अलग-अलग होते हैं।मतभेद को सुलझाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप सामने वाले को यह जता दें कि आप उसके विचार को भी समझ रहे हैं।पहले उन बातों पर चर्चा करें जिन पर आप उनसे सहमत है और फिर तसल्ली से वे मुद्दे सुलजाएं या समझें जिन पर आपके विचार उनसे अलग हैं।
- सीधे किसी की बात न काटें।अगर आप जानते हैं कि सामने वाला एम्प्लाॅई गलत है तब भी उस पर ऐसा न जताएँ जैसे उसे आपकी बात माननी ही चाहिए।ऐसा बिल्कुल न करें।
- याद रखें कि इंसान या व्यक्ति केवल स्वयं में बदलाव कर सकता है।यदि आप दूसरों पर अपनी बात थोपेंगे तो वाद-विवाद खड़ा होगा और आप अपनी बात करने की शैली की वजह से अपना एक विरोधी खड़ा कर लेंगे।इसके बजाय सामने वाले को उसके विचारों के साथ स्वीकार करें।उसे समझाने और अपने विचार बताने के बाद भी वह अपनी बात पर कायम रहता है तो अपने आप को समझ लेना ही बेहतर है,यही समझदारी है।अतः वाद-विवाद करने की जगह समझें,समझदारी रखें,समझदारी दिखाएं।
8.आप स्वयं एक उदाहरण बनें (Be an example yourself):
- आप स्वयं कैसे उदाहरण बनेंगे? अगर आप ऐसा आदर्श प्रस्तुत करेंगे कि वह कंपनी या संगठन की नींव मजबूत करता है।आप ऐसा काम करते हैं जिससे कंपनी या संगठन की साख बढ़ती है।आप ऐसा आचरण करते हैं जिससे कंपनी या संगठन के प्रति लोगों की धारणा अच्छी बनती है।कस्टमर या अन्य लोग इन सब बातों पर ध्यान देते हैं।आप जैसा करते हैं वही वे देखते हैं वही वे समझते हैं।इसलिए आप जैसी तरक्की पाना चाहते हैं और इसमें नियमों व अनुशासन का पालन भी शामिल है,वैसा ही उनके सामने उदाहरण रखें।जो आप खुद नहीं करते वैसा दूसरे के सामने लेक्चर झाड़ने की,सिखाने की कोशिश ना करें।
- उदाहरणार्थ यदि आप समय पर ऑफिस नहीं पहुंचते हैं तो अपने सहकर्मियों,सीनियर्स व बाॅस पर अच्छी छाप नहीं छोड़ सकते हैं।समय पर न पहुंचने के कारण आपकी नुक्ताचीनी होने लगेगी।इसके बजाय कितनी भी विपरीत परिस्थिति होने पर भी आप ऑफिस में समय पर पहुंचते हैं।समय पर ऑफिस का काम निपटाते हैं तो इस बात पर सभी गौर करते हैं,विचार करते हैं।आपको वाहवाही तथा प्रशंसा मिलती है।
- आप बड़े पद पर हैं तब तो ऑफिस के नियमों और अनुशासन का पालन करने की अधिक जिम्मेदारी बनती है क्योंकि मातहत भी आप जैसा ही आचरण का पालन करने की कोशिश करते हैं।आप ऑफिस का जैसा डेकोरम रखेंगे मातहत भी वैसा ही डेकोरम रखेंगे।
- यदि आप छोटे पद पर भी हैं तब भी यदि आपका व्यक्तित्व और आचरण प्रभावी है,आदर्श है तो सीनियर और बाॅस भी कुछ कहने का साहस नहीं रखते हैं क्योंकि आचरण और व्यक्तित्व का बहुत ही नहीं बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है,केवल बड़े पद पर नियुक्त होना ही मायने नहीं रखता है।पद के अनुसार व्यक्तित्व व आचरण भी होना आवश्यक है।लेकिन इस तरह की कार्यशैली,इस तरह का व्यक्तित्व,इस तरह का आचरण एक दिन में निर्मित नहीं हो जाता है।वर्षों ही नहीं बल्कि पूरी जिंदगी खप जाती है।कुछ लोग कठोर संघर्ष,तप और साधना से ऐसा व्यक्तित्व गढ़ लेते हैं तो कई लोगों,एंप्लाइज और बॉस को अनेक वर्ष लग जाते हैं।यदि आंतरिक और बाह्य गुणों को विकसित करने की आपकी दिशा सही है तो देर-सवेर आपको सफलता मिल ही जाएगी।वस्तुतः बाह्य गुणों के बजाय हमारे आंतरिक गुण ही हमारे स्थायी व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।
- आप यदि कंपनी या संगठन के लिए उपयोगी हैं,काम के हैं,आपके बिना कंपनी का काम नहीं चलता है,आपका कोई विकल्प नहीं है,आप हुनरमंद हैं तो आप अद्वितीय उदाहरण हैं।कंपनी के अन्य एम्प्लॉइज,सीनियर्स या बाॅस आपका उदहारण देंगे,आप जैसा बनने की कोशिश करेंगे।आप खुद सोचिए आपको कंपनी या संगठन क्यों वेतन देगा,क्यों वेतन बढ़ाएगा,क्यों पदोन्नति करेगा,क्यों आपसे सुझाव लेगा,क्यों आपके सुझावों पर अमल करेगा,इसलिए कि आपमें काबिलियत है,दक्षता है,योग्यता है,आप कंपनी के काम के आदमी हैं।
- आप उपयोगी ही नहीं बल्कि कंपनी के लिए प्रोडक्टिव हैं।आपकी वजह से अन्य एम्प्लॉइज ऊर्जावान और स्फूर्ति महसूस करते हैं,प्रेरित होते हैं।आपके सुझाव उपयोगी और प्रोडक्टिव हैं।शीर्ष पर पहुंचे हुए किसी भी व्यक्ति का उदाहरण उठाकर देख लें,आपको वे अन्य एम्प्लॉइज से बिल्कुल हट कर दिखेंगे।उनकी कार्यशैली,उनके रहने का ढंग,उनकी दिनचर्या,उनकी वर्किंग स्टाइल,उनके जीने का ढंग बिल्कुल अलग ही नजर आएगा,हटकर नजर आएगा।ऐसे एम्प्लॉइज या अधिकारी कम्पनी के हीरे होते हैं,साखपत्र होते हैं।कंपनी उनके आदर्शों पर चलती है,कंपनी की वे अमूल्य निधि होते हैं।आप सोच रहे होंगे कि ऐसे व्यक्तित्व तो चिराग जलाकर ढूंढने से भी नहीं मिलेंगे।यह बात कुछ हद तक ठीक है,परंतु मिलेंगे ही नहीं ऐसा नहीं कहा जा सकता है।हैं और उन्हीं की वजह से कंपनियां शीर्ष पर पहुंचती है,परंतु हमारी नजर उन पर नहीं पड़ती हैं क्योंकि हम अपनी ही दुनियादारी में खोए रहते हैं।आप भी ऐसा ही बनने की कोशिश करें।
- उपर्युक्त आर्टिकल में जाॅब की कला विकसित करने की 9 महत्त्वपूर्ण टिप्स (9 Important Tips to Develop Art of Job),जाॅब करने की कला कैसे विकसित करें (How to Develop Art of Doing Job?) के बारे में बताया गया है।
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9.घर और ऑफिस में अंतर (हास्य-व्यंग्य) (Difference Between Home and Office) (Humour-Satire):
- बाॅस (एम्प्लाॅई से):बताओ घर और ऑफिस में क्या अंतर है?
- एम्प्लाॅई (बॉस से):अगर बुरा न माने तो सच कहूं।
- बाॅस:बिल्कुल निडर होकर कहो।
- एम्प्लाॅई:कोई अंतर नहीं।ऑफिस में आपकी डांट-फटकार सुननी पड़ती है।वही काम हमारे घर वाले करते हैं।
10.जाॅब की कला विकसित करने की 9 महत्त्वपूर्ण टिप्स (Frequently Asked Questions Related to 9 Important Tips to Develop Art of Job),जाॅब करने की कला कैसे विकसित करें (How to Develop Art of Doing Job?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.आंतरिक गुण कौन-कौनसे हैं? (What are the intrinsic qualities?):
उत्तर:सकारात्मक दृष्टिकोण,स्पष्टता,विनम्रता,सीखने की ललक,संयम,अनुशासन,कठिन परिश्रम,दृढ़ निश्चय,वाक्पटुता,सत्यवादिता,आत्मविश्वास,उदारता,सहनशीलता,जोश,व्यावसायिक दृष्टिकोण,देशभक्ति दिल से काम करना आदि।
प्रश्न:2.दुर्गुण कौन-कौनसे हैं? (What are the vices?):
उत्तर:नकारात्मक दृष्टिकोण,कठोरता,सीमित ज्ञान प्राप्त करके संतुष्ट रहना,कामचोरी,अनिश्चयी,वाक्हीनता,मिथ्यावादिता,निर्दयता,क्रोध, ईर्ष्या करना,शिथिलता,देशद्रोह आदि।
प्रश्न:3.एम्पलाॅई सफल कैसे हो सकता है? (How can an employee be successful?):
उत्तर:एम्प्लाॅई यदि मैनेजमेंट व व्यावसायिक गुणों के साथ-साथ आंतरिक गुणों को भी विकसित करता है तो वास्तव में सफल हो सकता है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा जाॅब की कला विकसित करने की 9 महत्त्वपूर्ण टिप्स (9 Important Tips to Develop Art of Job),जाॅब करने की कला कैसे विकसित करें (How to Develop Art of Doing Job?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
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