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7 Spells of How to Get Rid of Mistakes

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1.गलतियों से छुटकारा कैसे पाएं के 7 मंत्र (7 Spells of How to Get Rid of Mistakes),गलतियों से छुटकारा कैसे पाएं? (How to Get Rid of Mistakes?):

  • गलतियों से छुटकारा कैसे पाएं के 7 मंत्र (7 Spells of How to Get Rid of Mistakes) के आधार पर हम सीखेंगे की ऐसी गलतियां जो हमें नहीं करनी चाहिए,जो हमारे लिए परेशानी खड़ी करती है,जो हमारी उन्नति में बाधक हैं उनसे कैसे मुक्ति पाएँ?
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2.गलतियाँ क्यों करते हैं? (Why make mistakes?):

  • जीवन में बारंबार गलतियाँ क्यों होती हैं? गलती न करने का संकल्प लेकर भी फिर वही गलती क्यों हो जाया करती है? इसके साथ ऐसा कौन-सा महाबल जुड़ा है कि यह सबको अपने प्रवाह में जोड़ लेता है और इंसान विवश खड़ा फिर से अपने किए हुए पर पश्चात्ताप करने लगता है।हमारे सारे प्रयास-पुरुषार्थ धरे के धरे रह जाते हैं और हम कुछ भी नहीं कर पाते।यह महाप्रश्न हम सभी के जीवन में उत्तर की तलाश में खड़ा रहता है,परंतु ऐसा भी नहीं है कि गलतियों को सुधारा न जा सके।इन्हें सुधारने के लिए आवश्यक है इनके मूल तक पहुंचना,इनकी तह तक जाना,जहां से ये पैदा होती हैं,उस बल को पहचानना जिससे इनकी तीव्रता बढ़ती है।
  • गलतियों का स्वरूप भिन्न-भिन्न हो सकता है,परंतु इनका मूल एक है।इसका निराकरण करें,इससे पहले यह तो समझ लें कि गलती है क्या? वह कौन-सा कर्म है,जो इस श्रेणी में आता है।ऋषि कहता है कि हर वह कर्म,जो हमारी चेतना को धूमिल करता है,नीचे गिराता है,पतित करता है,पापकर्म कहलाता है।पापकर्म करना ही तो गलती करना है।सामाजिक परिप्रेक्ष्य में देखे तो सामाजिक नियम,मर्यादा एवं नीति के विरुद्ध किया जाता है,उसे गलती कहते हैं,परंतु यहां कुछ विरोधाभास नजर आता है।नैतिकता के दृष्टिकोण से ऐसे तमाम कार्य हैं,जिनको करने पर हमारी चेतना प्रभावित होती है और आध्यात्मिक दृष्टि से ऐसे बहुत से कर्म हैं,जिन्हें करने पर नैतिकता,सामाजिकता आड़े आती है।इसका समाधान है कि वह कर्म,जो हमारी अंतरात्मा को प्रसन्नता प्रदान करें,श्रेष्ठकर्म और जो पीड़ा दे,वह नीचकर्म है।
  • गलती करना अर्थात् अपनी नजरों से गिरने वाला कर्म करना।यह होता है लोभ के वशीभूत होने से,मोह होने से,क्रोध एवं कामना-वासना के उपजने से।काम,क्रोध,लोभ,मोह से उपजा हर कर्म इस श्रेणी में माना जाता है।सभी इन कामों का तिरस्कार करते हैं,परंतु कोई भी यह नहीं बताता कि इन्हें ठीक कैसे किया जाए? यदि ठीक ना हो सके तो इनको नियंत्रित-नियमित कैसे किया जाए? दरअसल ये सारे मनोविकार जो कि शक्तियों के स्रोत है,अपने में अचेतन के बल को समेटे हुए होते हैं।अचेतन का बल बहुत होता है,क्योंकि इसके साथ हमारे पिछले कई जीवन शामिल होते हैं।अचेतन उस हिमशिखर (आइसबर्ग) के समान होता है,जिसका केवल दसांश भाग ही दृष्टिगोचर होता है,शेष तो इसके नीचे दबा रहता है।यह अंधेरी कोठरी हमारी सारी गलतियों की जड़ है।

3.गलतियाँ अचेतन के बल से होती हैं (Mistakes are made by the force of the unconscious):

  • जब अचेतन का बल उभरता-उमड़ता है तो सब कुछ इसके बल से बहने लगता है।इसके उभरने पर सबसे पहले हम कमजोर हो जाते हैं,दुर्बल हो जाते हैं तथा यह कमजोरी एवं दुर्बलता ही हमें गलती करने के लिए विवश करती है।इस अवस्था में हमें उचित-अनुचित का ज्ञान नहीं होता है,परंतु क्रोधरूपी मनोविकार के उठने पर सबसे पहले हमारी उचित-अनुचित करने वाली प्रणाली,जिसे विवेक कहते हैं,कमजोर हो जाती है,विवेक के कमजोर होते ही क्रोध अपना नंगा नाच दिखाने लगता है।अतः यदि क्रोध को हावी होने नहीं देना है तो हमें अपने विवेक को मजबूत रखना पड़ेगा और ऐसा तभी संभव होगा,जब क्रोध की जड़ में ही कुठाराघात किया जाए।
  • सभी प्रकार की गलतियों की जड़ अचेतन में दबी-छिपी रहती है।अचेतन के परिष्कार एवं परिमार्जन करने से ही गलतियों की पुनरावृत्ति को रोका जा सकता है।यदि किसी को अपनी गलतियों से पूरी तरह छुटकारा पाना हो तो उनकी उन की गई गलतियों पर चिंतन करने की अपेक्षा उनकी जड़ के निराकरण पर ध्यान देना चाहिए और यह निराकरण तभी संभव है,जब जड़ को पूरी तरह नष्ट किया जाए।भारतीय साधना पद्धति में इसलिए अचेतन के परिष्कार पर अधिक जोर दिया जाता है।साधना का तात्पर्य ही है जो हमारे अचेतन की सफाई एवं धुलाई करे।साधना का मूल अचेतन को स्वच्छ एवं साफ करने में छिपा है।
  • अचेतन के क्षेत्र में कार्य करना इतना आसान नहीं है।यह कार्य किसी कुशल अध्यात्म चिकित्सक के द्वारा ही संभव हो सकता है;क्योंकि अचेतन का बल बहुत होता है।यह पूर्वजन्म के बहुत सारे जीवन को अपने में समेटे रहता है।अचेतन में स्थित संस्कार जब उभरता है तो इंसान तूफान में सूखी पत्तियों के समान उड़ने लगता है,कुछ भी उसके वश में नहीं होता,वह उसी के नियंत्रण से नियंत्रित होता है,परंतु जो जानकार हैं,इसकी तकनीकी से परिचित हैं,वे संस्कार के अनुरूप साधना-चिकित्सा का प्रयोग करते हैं।जैसे काम-वासना से जब मन पीड़ित होता है,तब उसी तरह के विचार उठते हैं एवं गलत संबंध बनते हैं।आवेग और आवेश में हम हर बार वह सब कुछ कर बैठते हैं,जिसे हम करना नहीं चाहते हैं।ऐसे में कहा जाता है कि कुछ विशिष्ट मंत्रों का जप करना चाहिए तथा इससे संबंधित कुछ क्रियाओं का अनुपालन करना चाहिए।यह मंत्र एवं क्रिया की जानकारी व्यक्ति के समस्या के अनुरूप उसका मार्गदर्शक ही बता सकता है,परंतु यह सुनिश्चित तथ्य है कि इस विकार में इस तकनीकी से निजात पाई जा सकती है।
  • मंत्र के जप से मंत्र की ध्वनि हमारे अचेतन में गुंजायमान होने लगती है।हर मंत्र की ध्वनि विशिष्ट प्रकार की होती है।उसकी लय एवं आवृत्ति भिन्न-भिन्न होती है।यदि समस्या,जो अचेतन में जड़ जमाए बैठी है,उसको दूर करने वाले मंत्र का जप किया जाए तो मंत्र की ध्वनि से वहां कंपन पैदा होता है।यह कंपन बढ़ता जाता है।जब जप की प्रक्रिया को निरंतर बढ़ाया जाता है,तब मंत्र की तीव्रता से अंततः जड़ जमी हुई उस समस्या का निराकरण हो जाता है।जब जड़ ही समाप्त हो जाएगी तो उससे संबंधित गलतियां होंगी ही नहीं।इसलिए मंत्रवेत्ता कहते हैं कि रोग के लिए मंत्र की सही जानकारी आवश्यक है।जैसे सरस्वती मंत्र,गायत्री मंत्र,महामृत्युंजय मंत्र आदि सदा निरापद माने जाते हैं और इनका प्रभाव व्यापक रूप से होता है।
  • मानव मन के मर्मज्ञ ऋषि कहते हैं की गलतियां बारंबार होती हैं,एक ही गलती को हम बार-बार दोहराते हैं और परेशान होते हैं।इसका कारण है सही तकनीक का अभाव,सही धारणा का अभाव एवं अचेतन की उपेक्षा। यदि सही तकनीक एवं धारणा का ज्ञान हो जाए एवं कोई व्यक्ति लंबे समय तक साहस के साथ इस प्रयास में जुट जाए तो उसके जीवन से अमावस की कालरात्रि छँटेगी अवश्य और स्वर्णिम सूर्योदय का भाग्योदय अवश्य हो सकेगा।इसके लिए मंत्र जप,ध्यान एवं विभिन्न क्रियाओं का सहारा लेना चाहिए।सकारात्मक चिंतन एवं आशावादी सोच से भी इन गलतियों से छुटकारा पाने में सहायता मिलती है।सतत जीवन में इनका अभ्यास करते रहना चाहिए।

4.क्या मंत्र जप गलतियों के परिमार्जन हेतु पर्याप्त है? (Is chanting mantras enough to correct mistakes?):

  • प्रश्न उठता है कि क्या मंत्र का जप करने से गलतियों के होने से छुटकारा मिल सकता है।मंत्र जप में शक्ति तो होती है परंतु मंत्र जप तभी सार्थक होता है जब वैसा कर्म न किया जाए जैसा नहीं करना चाहिए।ऐसा संकल्प शक्ति और विवेक तथा धैर्य के साथ कर्म किया जाए तो गलतियों से छुटकारा पाया जा सकता है।मंत्र जप से मन में गलत विचार पैदा नहीं होते याकी मन गलत विचार नहीं करता है।परंतु हमारे कर्म भी शुभ ही हो इसका भी ध्यान रहना चाहिए।
  • यदि केवल मंत्रों,ताबीजों से ही गलतियां सुधरती तो मंत्रोच्चारण करने वाले पंडितों से कभी कोई गलती ही नहीं होती क्योंकि वे चौबीसों घंटे मंत्र का जप करते रहते हैं।मंत्र शक्ति का प्रभाव तभी पड़ता है जब तदनुकूल आचरण भी किया जाए।गलतियां बार-बार करते हैं क्योंकि संस्कार हमें गलतियां करने के लिए प्रेरित करते हैं।ये संस्कार अचेतन मन में जड़ जमाएँ रहते हैं।अतः इन अशुभ संस्कारों को जड़ से खत्म करने के लिए मन ही मन मंत्र का जाप करना,रोजाना एकाग्रता को साधने के लिए ध्यान करना,अपने किए जाने वाले कर्मों पर पैनी नजर रखना अर्थात् जागरूक और होशपूर्वक कर्म करना तथा सुदृढ़ संकल्पशक्ति के साथ विवेक और धैर्यपूर्वक गलत संस्कारों का परिमार्जन करना आदि करते रहने से गलतियां होना बंद हो सकते हैं।
  • गलती होने पर यह समझने की जरूरत है कि इसका फल हमें ही भोगना पड़ता है।कष्ट,विपदा,आपदा,असफलता,दुःख आदि गलतियों के ही तो परिणाम है।हम बार-बार गलतियां करते हैं और दुःख व कष्ट भोगते रहते हैं।आदतों की गुलामी हमें गलतियां करने के लिए विवश करती हैं।संस्कार और आदतें तथा स्वभाव अलग-अलग दिखाई देते हैं परंतु गहराई से देखने पर ये जुड़े हुए दिखाई देने लगते हैं।
  • ये गलतियां इसलिए करते रहते हैं क्योंकि हम जो भी गलतियां करते हैं और बार-बार करते हैं उसे गलती मानते ही नहीं।दूसरा कारण यह है कि संकल्पशक्ति तथा और दृढ़ इच्छाशक्ति का अभाव होने के कारण जानते हुए भी गलतियां करते रहते हैं।गलतियों को जानते हुए बार-बार दोहराने का एक कारण और भी होता है कि गलतियों से छुटकारा पाने की प्रक्रिया का ज्ञान नहीं होना।जिस प्रकार की प्रक्रिया कोई गलती करने में की जाती है उससे ठीक उल्टी प्रक्रिया यानी वापस लौटने से गलतियों में सुधार होता है।जिस इच्छाशक्ति और संकल्पशक्ति के साथ गलतियों को बारंबार दोहराते हैं उससे भी अधिक दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्पशक्ति की आवश्यकता होती है,गलतियों से छुटकारा पाने के लिए।
  • बहुत से व्यक्ति शराब पीना,सिगरेट पीना,गुटखा व तंबाकू खाना,ड्रग्स का सेवन करना आदि को गलती मानते ही नहीं है इसलिए वे लगातार इनका सेवन करने लगते हैं।जो जानते भी हैं वे दुर्बल मनोबल के कारण भी दुर्व्यसनों को अपनाये रहते हैं,छोड़ने की कोशिश करते हैं और फिर तलब हो जाती है तो सेवन करने लगते हैं।

5.छात्र-छात्राएं क्या गलतियाँ करते हैं (What mistakes do students make?):

  • अक्सर छात्र-छात्राएं शिक्षण संस्थानों में देरी से पहुंचते हैं और धीरे-धीरे यह आदत पड़ जाती है।इसी प्रकार परीक्षा में नकल करते हैं और पकड़े नहीं जाते हैं तो वे नकल करने की नई-नई तरकीब ढूंढ कर नकल करते हैं।छात्र-जीवन से ही कुछ छात्र-छात्राएं बीड़ी-सिगरेट पीना,गुटखा खाना,शराब पीना,ड्रग्स का सेवन करना आदि बुरी आदतें अपना लेते हैं।पहले तो वे इन्हें छुपकर करते हैं और जब वयस्क हो जाते हैं तो खुलेआम करते हैं।वयस्क हो जाने के बाद उन्हें शिक्षकों,माता-पिता तथा किसी का भी डर नहीं रहता है।
  • एक-दो बार गलती करने पर तो यह गलती ही रहती है परंतु बारंबार करते रहने पर यह पाप और अपराध हो जाती है।जैसे किसी ने पहली बार अपहरण किया,चोरी की या डकैती डाली तो यह गलती ही रहती है।अब बार-बार अपहरण,डकैती,चोरी-चकोरी,गुंडागर्दी करेगा तो फिर यह अपराध हो जाता है।और अपराध का दण्ड भुगतना ही पड़ता है।छात्र-छात्राएं एक बार राह से भटक जाते हैं और कोई रोकने-टोकने वाला नहीं होता तो वे बड़े-बड़े अपराध करने लगते हैं।उन्हें पुलिस,कानून,माता-पिता आदि किसी का भी खौफ नहीं रहता है।हालांकि इन छात्र-छात्राओं के राह से भटकने का कारण पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव,सोशल मीडिया,संगी-साथी तथा वातावरण ही अधिक जिम्मेदार होता है।
  • आजकल साइबर क्राइम,बैंक डकैती,एटीएम को उखाड़ना,चोरी,गुंडागर्दी आदि कुकृत्य,अपराध पढ़े-लिखे युवक-युवतियां ही करते हैं।ऐसे-ऐसे दुष्कृत्य वे एकाएक नहीं करते हैं बल्कि बचपन से ही छोटे-छोटे दुष्कृत्य करते-करते बड़े होकर बड़े अपराधी बन जाते हैं।यदि इन कुकृत्यों को प्रारंभिक अवस्था में ही रोक दिया जाए तो वे अपराधी बड़े अपराधी बनने से बच सकते हैं।
    अब प्रश्न यह है कि गलतियां करते-करते हमारी बुरी आदतें,स्वभाव बन जाती हैं और फिर पाप और अपराध बन जाती है तो इसकी रोकथाम के लिए क्या किया जाए? जो अपराधी नहीं है उनकी परवरिश कैसे की जाए तथा जो अपराधी बन चुके हैं उनको सही दिशा की ओर कैसे मोड़ा जाए।यों फुटकर रूप से तो गलतियों से छुटकारे के लिए कुछ उपाय ऊपर बताए गए हैं और कुछ और उपाय निम्न हैं।

6.छात्र-छात्राएं गलतियों से कैसे छुटकारा पाएं? (How do students get rid of mistakes?):

  • माता-पिता व घर का वातावरण इस तरह का होना चाहिए जिससे बच्चों में सात्विक विचार उत्पन्न हों।उन्हें प्रारंभ से ही ध्यान,योग,प्रार्थना का पाठ पढ़ाना चाहिए।धार्मिक बोध कथाओं द्वारा उन्हें अच्छा आचरण अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।शिक्षा संस्थानों में भी इस तरह का वातावरणगलतियों से छुटकारा कैसे पाएं के 7 मंत्र (7 Spells of How to Get Rid of Mistakes) के आधार पर हम सीखेंगे की ऐसी गलतियां जो हमें नहीं करनी चाहिए,जो हमारे लिए परेशानी खड़ी करती है,जो हमारी उन्नति में बाधक हैं उनसे कैसे होना चाहिए कि बालक नैतिक,धार्मिक व आध्यात्मिक तथा व्यावहारिक ज्ञान अर्जित कर सके।केवल कोर्स की पुस्तकें पढ़ाने,जॉब की कला सिखाने की शिक्षा ही नहीं दी जानी चाहिए।बालकों को सही राह पर लाने के लिए उनकी काउंसलिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए।किसी भी तरह की परेशानी का समाधान,करियर संबंधी परेशानियों को वे काउंसलर से प्राप्त कर सकें ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए।केवल किताबी ज्ञान,रटाऊ शिक्षा तथा डिग्री प्रदान करने का ही काम न किया जाए।
  • जो बालक भटक गए हैं,उन्हें प्रेम और प्यार की भाषा से सुधार के मार्ग पर लाया जाना चाहिए।उन्हें गलतियां करने के दुष्परिणाम बताएं जाएं और एक अच्छी जिंदगी की शुरुआत करने की तकनीक सिखानी चाहिए।जब अंगुलिमाल,डाकू वाल्मीकि जैसे दुर्दांत व्यक्ति सुधर सकते हैं तो कोई कारण नहीं है कि बड़े से बड़ा अपराधी बच्चा सुधर नहीं सकता।सतत प्रयास करने पर सुधार संभव है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गलतियों से छुटकारा कैसे पाएं के 7 मंत्र (7 Spells of How to Get Rid of Mistakes),गलतियों से छुटकारा कैसे पाएं? (How to Get Rid of Mistakes?) के बारे में बताया गया है।

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7.गलती किसने की है? (हास्य-व्यंग्य) (Who Has Made Mistake?) (Humour-Satire):

  • टीचर:इस गृह कार्य में इतनी गलतियां किसने की है,सवालों में इतनी गलतियां किसने की है?
  • छात्र:सर इतनी बड़ी गलतियाँ मेरे माता-पिता ही कर सकते हैं और वे गलतियां करेंगे तो हमसे तो होंगी ही।

8.गलतियों से छुटकारा कैसे पाएं के 7 मंत्र (Frequently Asked Questions Related to 7 Spells of How to Get Rid of Mistakes),गलतियों से छुटकारा कैसे पाएं? (How to Get Rid of Mistakes?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.ज्ञान की शिक्षा क्या है? (What is the education of knowledge?):

उत्तर:गलती ज्ञान की शिक्षा है।जब तुम गलती करो तो उसे बहुत देर तक मत देखो उसके कारण को ले लो और आगे की ओर देखो।भूत बदला नहीं जा सकता,भविष्य अब भी तुम्हारे हाथ में है।

प्रश्न:2.हम अधिक किससे सीखते हैं? (Who do we learn more from?):

उत्तर:हम प्रायः दूसरे के गुणों की अपेक्षा उसकी गलतियों से अधिक सीख लेते हैं।

प्रश्न:3.बुद्धिमान कौन है? (Who is wise?):

उत्तर:बुद्धिमान मनुष्य वह है जो दूसरों की गलतियों से अपनी गलती सुधारते हैं।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गलतियों से छुटकारा कैसे पाएं के 7 मंत्र (7 Spells of How to Get Rid of Mistakes),गलतियों से छुटकारा कैसे पाएं? (How to Get Rid of Mistakes?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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