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How to increase children confidence in mathematics?

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1 1.बच्चों का आत्मविश्वास गणित में कैसे बढ़ाएं?(How to increase children confidence in mathematics?)-

1.बच्चों का आत्मविश्वास गणित में कैसे बढ़ाएं?(How to increase children confidence in mathematics?)-

  • बच्चों का गणित में आत्म-विश्वास बढ़ाने (increase children confidence in mathematics) के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा । आत्मविश्वास से गणित के सवाल तो हल नहीं किए जा सकते हैं परंतु आत्मविश्वास हमें गणित के सवालों का सामना करने की हिम्मत प्रदान करता है,खड़ा होने की हिम्मत प्रदान करता है।इस आर्टिकल में कुछ ऐसे टिप्स के बारे में बताया जा रहा है जिनका पालन करने पर बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाया जा सकता है।आए दिन हमारे सामने यह समस्या खड़ी हो जाती है कि बच्चों का आत्मविश्वास कैसे बढ़ाया जाए।जहां चाह होती है वहां राह भी मिल जाती है परंतु आप बालकों को शिक्षा संस्थानों के भरोसे छोड़ दें तो इसका अर्थ है कि आप बच्चों के भविष्य के प्रति,बच्चों के प्रति सजग,सतर्क और चौकस नहीं है।फिर वही होगा जो प्रकृति या शिक्षा संस्थान बच्चों को डालना चाहते हैं।यदि आप वाकई में बच्चों की गणित से संबंधित समस्या का समाधान करना चाहते हैं,बच्चों के मन से भय को दूर करना चाहते हैं तो कोई न कोई रास्ता निकालना ही होगा।सबसे प्राथमिक रास्ता यही है कि उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएं,तो लीजिए आत्मविश्वास बढ़ाने के कुछ टिप्स जिनका पालन आपके और आपके बच्चों को फायदा अवश्य पहुंचाएगा।
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2.बच्चों का गणित में आत्म-विश्वास बढ़ाने की पहली टिप्स है कि बच्चों के साथ अधिक समय व्यतीत करें (The first tips to increase children confidence in mathematics is to spend more time with children):

  • हर माता-पिता,अभिभावकों का सपना होता है कि बच्चा पढ़ाई में सबसे प्रथम आए। बच्चों के प्रथम आने में सबसे बड़ी समस्या गणित विषय को लेकर आती है।बच्चा अकेला होता है तो अपनी गणित संबंधी समस्या को शर्म तथा झिझक के कारण किसी को बताता नहीं है।जबकि माता-पिता सोचते हैं कि उनका बच्चा बड़ा होकर एक कामयाब और अच्छा इंसान बने लेकिन इसके लिए बच्चे में आत्मविश्वास का होना जरूरी है।बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए माता-पिता,अभिभावकों और शिक्षकों का काफी योगदान होता है।इसलिए आप बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ाने में अपना सहयोग करें,योगदान दें।आप यथासंभव बच्चों के साथ अधिक समय व्यतीत करें आप जब बच्चों के साथ अधिक समय व्यतीत करेंगे तो बच्चों को ठीक तरह से समझ पाएंगे।उनके साथ समय व्यतीत करने से आप बच्चों के नजरिए से देखना प्रारंभ करेंगे।बच्चे आपको गणित से संबंधित समस्या बताएंगे तो या तो आप खुद समाधान करने में सक्षम होंगे या किसी ट्यूटर का प्रबंध करेंगे।याद रखें बच्चे आपको अपनी छोटी-छोटी समस्याएं तभी बताएंगे जब आप उनके साथ समय व्यतीत करेंगे। उनके साथ समय व्यतीत करने से बालक अपने आपको अकेला महसूस नहीं करेगा और गणित की समस्या को बताने में संकोच भी नहीं करेगा।यदि बालक नहीं भी बताता है तो आप प्यार व स्नेह के साथ उनसे पूछ सकेंगे और वे सहज ही आपको बता देंगे।

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3.गहरा रिश्ता बनाएं (Make a deep connection):

  • यदि आप यानी माता-पिता और शिक्षक बच्चों के साथ गहरा तथा पक्का रिश्ता कायम करना चाहते हैं तो बच्चों के साथ प्रेमपूर्वक सद्व्यवहार करें।आपको बच्चों के साथ सुरक्षित और पक्का रिश्ता कायम करने का प्रयास करना चाहिए।जब आप प्रेम और सद्भाव के साथ बच्चों के साथ व्यवहार करेंगे तो बच्चा अपने आप को अधिक सुरक्षित और आश्वस्त महसूस करेगा।वह समझ जाएगा कि माता-पिता व शिक्षक उसके साथ आत्मीयता रखते हैं।जब बच्चा आत्मीयता महसूस करेगा तो हर बात आपके साथ शेयर करेगा। अपने दुख,तकलीफ व कष्टों के साथ-साथ आनंददायक क्षणों को भी शेयर करेगा ।ऐसी स्थिति में आप गणित संबंधी समस्याओं को हल करने के आसान टिप्स दे सकते हैं जिनका पालन बालक अवश्य करेगा।बच्चा उन्हीं की बात को मानता है और उनकी आज्ञा का पालन करता है जो उनसे आत्मीयता रखते हैं।यदि हम बच्चों के साथ गहरा और पक्का रिश्ता नहीं रखेंगे तो वे अपने मन की, अन्तर्मन की बात नहीं बताएंगे।बालक उन्हीं को सारी बातें शेयर करता है जिनके साथ पक्का गहरा संबंध होता है।

4.अच्छे काम की प्रशंसा करें (Admire the good work):

  • बच्चे के मेहनत और अच्छे काम की प्रशंसा करें।मेहनत करने के बाद भी गणित में अच्छे नंबर नहीं आते हैं तो भी उनकी मेहनत की सराहना करें।वास्तविक परिणाम कुछ भी हो परंतु कोशिश की प्रशंसा होनी चाहिए ताकि बच्चा अनुभव करें कि उसके काम की तारीफ हो रही है।इससे उसके आत्मबल में वृद्धि होती है।उसमें दुबारा मेहनत और प्रयास करने का साहस पैदा होता है।किसी भी कार्य का परिणाम माता-पिता,शिक्षकों के हाथ में होता भी नहीं है। फिर बेवजह परिणाम कमजोर रहता है तो उसके लिए बच्चों को दोष देना, डांटना,फटकारना उचित नहीं है।बालक अकेला पड़ जाता है,वह पुनः हिम्मत व कोशिश करने का प्रयास नहीं कर पाता है।

5.खतरों का सामना करना सिखाएं (Teach to face the dangers):

  • कोई भी माता-पिता यह नहीं चाहते हैं कि बच्चा किसी भी तरह के ख़तरे का सामना करें।उदाहरणार्थ यदि गणित में कोई कठिन सवाल या समस्या सामने आती है तो माता-पिता या शिक्षक उनको तत्काल सवाल का  हल बता देते हैं।इस प्रकार माता-पिता व शिक्षक उसके लिए ढाल बनकर रहते हैं परिणामस्वरूप बालक हर गणित के कठिन सवालों को स्वयं हल न करके माता-पिता व शिक्षक से पूछ लेते हैं।परंतु माता-पिता व शिक्षक को चाहिए कि बालक को हर कठिन सवाल या समस्या का सामना करना सीखने का मौका देना चाहिए।इसलिए कठिन सवाल या समस्या में ढाल बनने की बजाय उन्हें सहारा देने का काम करे।कठिन सवालों तथा समस्याओं से निपटने के लिए उन्हें स्वयं तैयार होने का,जूझने का मौका देना चाहिए।जब बालक जूझने और प्रयास करने पर भी हल नहीं कर पाए तब माता-पिता व को सहारा देना चाहिए।

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6.बालकों की क्षमता पर भरोसा रखें (Trust the ability of children):

  • माता-पिता व शिक्षक होने के नाते आपकों बच्चों की क्षमता पर विश्वास रखना चाहिए।बच्चों से बहुत अधिक आशा भी नहीं रखनी चाहिए और न ही बच्चे को मनमर्जी करने की छूट देनी चाहिए।गणित संबंधी कार्य में मध्यम मार्ग अपनाना चाहिए।यदि बहुत ज्यादा आशावादी रहेंगे तो बच्चे को जबरदस्ती गणित विषय को ऐच्छिक विषय के रूप में चुनने के लिए कहेंगे तथा बच्चे की मनमर्जी को छूट दे देंगे तो परिपक्वता के अभाव के कारण उनके निर्णय परिवर्तित होते रहने से कभी कहेगा कि मैं गणित विषय को ऐच्छिक विषय ले लूं तथा कभी कहेगा कि नहीं मुझे नहीं लेना चाहिए यानी किसी भी निर्णय पर नहीं पहुंच पाएगा।बहुत अधिक आशावादी होने से काम नहीं चलेगा क्योंकि उस स्थिति में बच्चा अगर गणित में असफल हो जाता है तो असफलता को बच्चा सहन नहीं कर पाएगा। हां बच्चे को असफलता मिलने से पहले उन्हें उनके मनमाफिक कार्य करने का पर्याप्त मौका अवश्य दिया जाना चाहिए।

7.बच्चों के व्यवहार पर घटिया टीका टिप्पणी न करें (Do not comment lousy comment on children’s behavior):

  • बच्चों के व्यवहार पर ओछी टीका टिप्पणी नहीं करना चाहिए।न ही बच्चों पर ऐसा ठप्पा लगाना चाहिए कि गणित को हल करना तुम्हारी वश में नहीं है, गणित को तुम हल नहीं कर सकते हो,तुम तो बिल्कुल बुद्धू हो। इस प्रकार की टीका टिप्पणी करने से बच्चे का आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है और वे अपनी ही नजरों में गिर जाता है।

8.बच्चों की तुलना अन्य से न करें (Do not compare children to others):

  • बच्चों की तुलना भाई-बहनों,साथियों या अपने आप से करने का बच्चे की कुशलता पर बहुत विपरीत प्रभाव पड़ता है।जब हम कहते हैं कि देखो तुम्हारा भाई या अमुक लड़का गणित में कितना प्रखर व तेज है और एक तुम हो जिससे साधारण गुणा,भाग भी नहीं आते हैं।इस प्रकार की तुलना न करें।

9.बच्चों की कमजोरियों के बजाय अच्छाइयों पर ध्यान दें (Focus on the good rather than the weaknesses of children):

  • हमेशा बच्चों को उनकी कमजोरियों को गिनाने के बजाय उसके गुणों पर ध्यान देना जरूरी है।हर बच्चे में कोई न कोई प्रतिभा होती है।यह आवश्यक नहीं है कि हर बच्चा गणित में होशियार हो या पढ़ने में होशियार हो । बच्चों की रुचि व प्रतिभा को पहचाने और उस तरफ उनको आगे बढ़ने दें। समय-समय पर उनकी तारीफ करने और बधाई देने में कंजूसी न करें।

10.जीवन में आने वाली चुनौती को समझने दें (Let us understand the challenge that comes in life):

  • बच्चों के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि आगे की जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे।बहुत आशावादी होने से काम नहीं चलता क्योंकि गणित में असफलता या हार को सह पाना ओर कठिन हो जाता है।ऐसे में बच्चों को उन बातों और कारणों को समझना सीखने में मदद देनी चाहिए जिन पर उनका वश नहीं है। उन्हेंं बड़ी-बड़ी काल्पनिक उम्मीदों से बचाना चाहिए।

11.सफलता-असफलता में संतुलन बनाना सिखाएं (Teach balance between success and failure):

  • मजबूत और आश्वस्त होने के लिए उन्हें हर असफलता या निराशा में नाउम्मीद न होना सीखना पड़ेगा। उन्हें जोश व होश रखना है और हार नहींं माननी है।जीवन में सफलता व  सफलता दोनों मिलती है,दोनों जीवन के अंग हैं।असफलता के बिना सफलता का स्वाद अच्छा नहीं लगता है।जीवन में हम सबको असफलता का सामना करना ही पड़ता है।ऐसे वक्त में यदि गणित में या पढ़ाई में असफलता मिलती भी है तो ऐसे वक्त में बच्चे को सहारा देने के लिए हमारा मौजूद रहना जरूरी है।
    वस्तुत: आत्मविश्वास बच्चे को सिखाया नहीं जा सकता है। आत्मविश्वास उन्हें स्वयं ही अर्जित करना पड़ता है।लेकिन हम उनके लिए ढाल न बनकर सहायक बने तो उनमें आत्मविश्वास आ जाता है।बच्चों के मन पर हर बात की छाप बहुत जल्दी और गहरी लगती है।वे अपने आसपास की घटनाओं को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं।माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के लिए रोल मॉडल यानी आदर्श बनना होगा।
  • यदि आप इन टिप्स का पालन करेंगे तो आपको गणित विषय को हल करने तथा जीवन की समस्याओं का समाधान ढूंढने में काफी मदद मिल सकेगी।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में बच्चों का गणित में आत्म-विश्वास बढ़ाने (increase children confidence in mathematics) के बारे में बताया गया है।
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बच्चों का गणित में आत्म-विश्वास बढ़ाएं
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बच्चों का गणित में आत्म-विश्वास बढ़ाने (increase children confidence in mathematics)
के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा । आत्मविश्वास से गणित के सवाल तो हल नहीं
किए जा सकते हैं परंतु आत्मविश्वास हमें गणित के सवालों का सामना करने की हिम्मत प्रदान करता है,

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