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How is Progress from Shortcuts Deadly?

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1.शाॅर्ट कट से प्रगति कैसे घातक है? (How is Progress from Shortcuts Deadly?),बैक डोर से आगे बढ़ना घातक (Moving Through Back Door is Fatal):

  • शाॅर्ट कट से प्रगति कैसे घातक है? (How is Progress from Shortcuts Deadly?) के इस लेख में जानेंगे कि शॉर्टकट तरीका या बैक डोर हमारे लिए प्रगति या सफलता प्राप्त करने का अस्थायी मार्ग है।यह तरीका हमें भ्रम में रखता है,मृगतृष्णा के समान है।इसमें ऐसा आभास होता है कि हमें सफलता मिल गई है परंतु वास्तव में ऐसा होता नहीं है।
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  • काॅलेज और विश्वविद्यालयी छात्र-छात्राओं तथा प्रतियोगिता परीक्षाओं में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों के लिए विशेष रूप उपयोगी लेख।

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2.शॉर्टकट तरीका अनेक ऐबों का मार्ग (Short-cut method of many faults):

  • बात चाहे स्कूल-कॉलेज में दाखिले की हो,परीक्षा की तैयारी करने की हो,जाॅब प्राप्त करने की हो या सरकारी सुविधा प्राप्त करना हो या व्यापारिक लाभ लेने की हो,हर व्यक्ति की सोच यही रहती है कि उसका काम दूसरे की अपेक्षा शीघ्र,अच्छा और सस्ते में हो जाए।इस सोच ने ही व्यक्ति को इतना अधिक ईर्ष्यालु,मानसिक रूप से संकीर्ण और खुदगर्ज बना दिया है कि वह एक-दूसरे का प्रतिद्वन्द्वी बनकर रह गया है।
  • प्रतिद्वन्द्विता की यह सोच आजकल उन्नति,प्रगतिशीलता और विकास की सीढ़ी मानी जाती है,लेकिन इस सोच ने व्यक्ति में ईर्ष्या को ही बढ़ावा दिया है।आज की युवा पीढ़ी में यह एक आदत के रूप में पनप रही है।आगे दौड़ने वाले से भी आगे निकलने के लिए युवा पीढ़ी अपनी योग्यता क्षमता को बढ़ाने की अपेक्षा आगे दौड़ने वाले व्यक्ति की टांग खींच कर आगे बढ़ना चाहती है।यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि कुछ लोग इस तरीके से आगे बढ़ जाते हैं।उन्हें पदक तालिकाओं में स्थान भी मिल जाता है।पदोन्नतियां भी मिल जाती हैं,जबकि वास्तविक रूप से योग्य,अनुभवी और सुपात्र व्यक्ति हाथ मलते रह जाते हैं।इसलिए नैतिकता की शिक्षा देना आजकल ही अधिक मुश्किल हो गया है।
  • आज अभिभावक बच्चों से यह अपेक्षाएं तो रखते हैं कि उनके बच्चे चरित्रवान,प्रगतिशील सोच वाले हर-क्षेत्र में ए-वन,स्मार्ट और कमाने वाले हों,लेकिन जब इन बच्चों का पाला अपने आसपास के समाज में पड़ता है,जिसमें घूसखोरी,भ्रष्टाचार,अश्लीलता,अंग प्रदर्शन,चोरी,झूठ,दिखावे,ग्लैमर और चकाचौंध का ही बोलबाला है,तो उनकी कल्पनाओं के सारे आदर्श और सिद्धांत चकनाचूर होने लगते हैं।ये ‘पंप एंड शो’ की इस जिंदगी को ही जीवन का सच समझने लगता है,क्योंकि वे शॉर्टकट (छोटे मार्ग) से इतनी अधिक सफलताएं प्राप्त कर लेता है कि उसे हथियाई गई ये सफलताएं अपराध न लगकर आधुनिक जीवनशैली की सफलताएं लगने लगती हैं।चोरी,झूठ,धोखाधड़ी और विश्वासघाती व्यवहारों से प्राप्त की गई अपनी इन उपलब्धियों को वह कला मानते हैं और ‘सब चलता’ है कहकर इनमें प्रवीण होना चाहते हैं।
  • अभिभावकों को चाहिए कि वे इस सच को बच्चों को भली प्रकार समझा दें कि वे जीवन की इस ग्लैमरभरी चकाचौंध से प्रभावित न हों और न ही इस प्रकार की जिंदगी को लालायित नजरों से देखें,क्योंकि इस प्रकार की सोच का अंत अच्छा नहीं होता।गलत ढंग से सफलताएँ प्राप्त कर अथवा पिछले दरवाजे से जो लोग कहीं भी प्रवेश कर जाते हैं,जब उनका वास्तविकताओं से पाला पड़ता है,तो काफी नीचा देखना पड़ता है।दूसरे भी इस सच को समझ जाते हैं कि वे कितने पानी में हैं,और फिर ये लोग अपनी हीनताओं के कारण सबसे मुँह छिपाते फिरते हैं।अपनी हीनता को छिपाने के लिए अनुचित समझौते भी करते फिरते हैं।ऐसे बच्चे सामाजिक जीवन में वैसी मान-प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं कर पाते,जो उन्हें मिलनी चाहिए।

3.आपकी हर गतिविधि पर नजर (Watching your every move):

  • पीछे के दरवाजे से प्रशासनिक पदों को प्राप्त करने वाले ऐसे लड़कों को जब प्रशासनिक दायित्वों का निर्वाह करना पड़ता है,तो उन्हें ठंडा पसीना आने लगता है।निर्णय क्षमता उनमें होती नहीं,योग्यता एवं अनुभवों का नितांत अभाव होता है।
    ऐसे लोगों से सामाजिक न्याय की आशा करना बेमानी है,क्योंकि वे स्वयं नहीं जानते कि सामाजिक न्याय क्या होता है? ऐसे लोग शासन और सत्ता का सुख भोगते हैं और समय व्यतीत करते हैं या फिर दोनों हाथों से पैसा बटोरने के लिए तरह-तरह के घोटाले करते हैं,क्योंकि छोटे मार्ग से प्राप्त की गई सफलताएं व्यक्ति को स्वयं चोर,भीरु और कायर बनाती हैं।ऐसे चरित्रहीन व्यक्ति अपनी इस सोच के कारण स्वयं तनावग्रस्त रहते हैं अपने वर्तमान और भविष्य को अंधकारमय बना लेते हैं।
  • इस सत्य को स्वीकारें कि जिस प्रकार से हीरे की चमक विपरीत परिस्थितियों में भी कम नहीं होती,ठीक उसी प्रकार योग्यता,प्रतिभा और क्षमता कभी नहीं छिपती और न ही उसकी कहीं उपेक्षा होती है।इसलिए स्कूल-कॉलेज से निकले लड़कों को चाहिए कि वे अपने दायित्वों का निर्वाह बड़े सलीके से करें।अपने कार्य क्षेत्र की अपेक्षाओं को जानें,समझें और उसके बाद ही उसके अनुरूप अपनी मानसिक सोच बनाएं।केवल लाइट में आने के लिए किसी प्रकार के ‘शॉर्टकट’ न अपनाएं।अपने मन में इस प्रकार का विचार कभी ना लाएं कि ‘सब चलता है-क्या फर्क पड़ता है।’यदि सोचा-समझा जाए तो फर्क पड़ता है।कल्पना कीजिए उस फ्यूज की,जिस पर सारा सर्किट चलता है और इतने बड़े कारखाने का संचालन होता है।वास्तव में आपके कार्य-व्यवहार,शैली और सलीके पर सब की नजर होती है।लोग आपके अच्छे-बुरे आचरण से प्रभावित होते हैं।भले ही वे प्रत्यक्ष में आपसे कुछ ना कहें,लेकिन प्रभाव तो पड़ता ही है।आपके अच्छे अथवा बुरे आचरण का प्रतिफल तो आपको मिलता ही है।

4.शॉर्टकट नहीं,कड़ी मेहनत जरुरी (No Short cuts,hard work needed):

  • छोटे मार्ग से प्राप्त सफलताएँ जहां हमें उपेक्षित,अपमानित कर नीचा दिखाती हैं,वहीं साधनों की पवित्रता,मेहनत और आत्मविश्वास से अर्जित की गई सफलताएं हमें उत्तरोत्तर प्रगति का खुला आकाश प्रदान करती हैं,प्रगति के नए मानदंड स्थापित करती हैं,क्योंकि योग्यता कभी छिपती नहीं,सिर चढ़कर बोलती है।यह भी ध्यान रखें कि यदि आप वास्तव में किसी पद के योग्य हैं और जानबूझकर आपके साथ अन्याय हो रहा है,आपकी उपेक्षा की जा रही है,तो ऐसे व्यवहार का डटकर विरोध भी करें।अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए संघर्ष करें।अपनी बात को अधिकारियों तक ले जाएं।दूसरों की सहानुभूति प्राप्त करने के लिए अपनी हीनता का रोना लेकर बैठना कायरता है।अतः न किसी के साथ अनुचित व्यवहार करें और न किसी का अनुचित व्यवहार सहें।

5.शालीन व्यवहार के टिप्स (Tips for Decent Behavior):

  • (1.)अपनी योग्यता से अधिक किसी से कुछ अपेक्षा न करें।योग्यता से अधिक चाहत रखना या प्राप्त करना दूसरों के हक को मारना होता है।दूसरे के अधिकारों का हनन करना होता है।
  • (2.)सौंपे हुए काम को पूरे मनोयोग,आत्मविश्वास के साथ करें।क्योंकि यह काम ही हमें उन्नति के शीर्ष पर पहुंचाता है।इस काम को प्रभावी और उत्कृष्ट तरीके से तभी किया जा सकता है जब हम पूर्ण एकाग्रता और आत्मविश्वास के साथ उसे करते हैं।
  • (3.)प्रलोभनों की चमक से प्रभावित न हों।वास्तव में इस प्रकार के चुग्गे आपको फँसाने के लिए डाले जाते हैं,इनसे बचें।प्रलोभन हमें हमारे लक्ष्य से भटका देते हैं और लक्ष्य से भटकने वाला न तो उन्नति कर सकता है और न सफलता अर्जित कर सकता है।
  • (4.)दूसरों की योग्यता,विद्वता और प्रभाव को मान्यता दें।उससे कुछ सीखने की मानसिकता बनाएं और उसके इस उपकार को मन ही मन स्वीकारें।व्यक्ति सीखना चाहे तो दूसरों से ही क्या पशु-पक्षियों,कीट-पतंगों से सीख सकता है परंतु इसके लिए खुला दिमाग,व्यापक सोच,सीखने की ललक,जिज्ञासु वृत्ति का होना आवश्यक है।जो दूसरों में केवल बुराईयाँ ही देखता है वह नहीं सीख सकता है।
  • (5.)अपनी हीनता प्रदर्शित कर किसी प्रकार की सहानुभूति प्राप्त करने की कोशिश ना करें।हीन व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी होती है।जिसमें आत्मविश्वास नहीं होता है,उसे कुछ मिल भी जाए तो भी वह उसका सदुपयोग नहीं कर सकता है।
  • (6.)अपना पूरा समय संस्थान के कामों में दें।यदि कभी कोई अध्यापक-प्राध्यापक,बाॅस आप पर विशेष कृपा करता है,तो उसकी इस कृपा के सच को अच्छी तरह जानें।अच्छे कार्यों की परख अंततः होती ही है और इस अच्छे कार्य का रिवॉर्ड विशेष कृपा के द्वारा दिया जा रहा है तो उसका आभार मानें और समझें।
  • (7.)साधनों की पवित्रता को समझें।चोरी,डकैती,ठगी,लूटपाट,अपहरण,तस्करी आदि से पैसा कमाकर उससे कथा कराने का पुण्य प्राप्त करने की मानसिकता से बचें।
  • (8.)अपना पहनावा,आचरण और व्यवहार हमेशा शालीन रखें।क्योंकि यही व्यक्ति की असली पूंजी है। तड़क-भड़क,फैशन,दिखावा आदि से व्यक्ति की पहचान नहीं बनती हैं।
  • (9.)ना किसी के साथ अनुचित व्यवहार करें,न अनुचित व्यवहार सहें।अनुचित व्यवहार करने से दूसरों के आत्मसम्मान को ठेस लगती है और सहने से खुद का आत्मसम्मान गिरता है।
  • (10.)अपने अति विशिष्ट होने का भ्रम न पालें।अति विशिष्ट समझने का अर्थ है अपनी अवनति का रास्ता तैयार करना है।ऊपर चढ़ने के लिए साधारण बने रहना होता है।ज्योंही अपने आप को बड़ा मानने की धारणा घर कर जाती है तो हमारे अंदर अहंकार प्रवेश कर जाता है।अहंकार हमारे विनाश,अवनति और पतन का कारण होता है।

6.विद्यार्थी शॉर्टकट न अपनाएं (Students should not take shortcuts):

  • विद्यार्थी परीक्षा में सफल होने के लिए शॉर्टकट तरीके अपनाते हैं तो उनकी सही प्रकार से उन्नति नहीं हो पाती है।आजकल अधिकांश विद्यार्थी वन वीक सीरीज,सीरिज,गैस पेपर आदि पढ़ कर,रट कर उत्तीर्ण हो जाते हैं और डिग्री हासिल कर लेते हैं।ऐसे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण नहीं हो पाता है।डिग्री हासिल करने के बाद ऐसे छात्र-छात्रा येनकेन प्रकारेण जाॅब प्राप्त करने हेतु या नौकरी हेतु तिकड़में भिड़ाते हैं।पेपर लीक,भर्ती घोटाला इसी कारण तो होते हैं।उन्हें बैक डोर से जाॅब या नौकरी चाहिए।अपनी पहुंच का इस्तेमाल करके ऐसे विद्यार्थी पद हथिया लेते हैं या जाॅब प्राप्त करते हैं।पद प्राप्त करने के बाद ये रिश्वत और भ्रष्टाचार करने लगते हैं।इनके साथ इनके आका भी मिले हुए होते हैं।
  • यदि ऐसे विद्यार्थी कोई जॉब या नौकरी हासिल नहीं कर पाते हैं तो अपहरण,बैंक डकैती,ठगी,एटीएम उखाड़ना,चोरी,साइबर क्राइम आदि अनैतिक कार्यों में लिप्त हो जाते हैं।इसके साथ ही ये चरस,गांजा,अफीम,ड्रग्स,शराब,अय्याशी को अपना लेते हैं।बुरे व्यसन चोरी,डकैती आदि कार्यों की पड़ोसन बुरे व्यसन ही हैं।जो चोरी डकैती आदि करता है उसके बुरे बेसन भी लग जाते हैं।
  • अतः शॉर्टकट या बैक डोर से प्रगति या सफलता प्राप्त करने वाले का अंततः पतन ही होता है।सच्ची और स्थायी प्रगति और सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है।जो विद्यार्थी इस चीज को समझ लेते हैं वे कड़ी मेहनत करके और सही उत्तर लिखकर सफलता प्राप्त करने में विश्वास रखते हैं।सच्ची और स्थायी सफलता के लिए विद्यार्थी को कड़ी मेहनत तो करनी पड़ती है परंतु व्यक्तित्व का सही विकास भी तभी होता है,इसे विद्यार्थी समझें।
  • यहाँ Competittive तथा प्रवेश परीक्षाओं (Entrance Test) आदि में shortcut तरीकों से सवालों व प्रश्नों का उत्तर ढूँढकर कम समय में प्रश्न-पत्र को हल करने वाले तरीकों से तात्पर्य नहीं है।इस प्रकार की परीक्षाओं में shortcut तरीके सकारात्मक तरीकें हैं।इन परीक्षाओं में shortcut,tricky सूत्र किये जाने ही चाहिए,इससे परीक्षार्थियों का समय और ऊर्जा बचती है।जो shortcut तरीके नकारात्मक तरीकें हैं और विद्यार्थी तथा व्यक्तियों द्वारा गलत तरीकों से आगे बढ़ने के लिए अपनाएं जाते हैं,उनको न करने के बारे में बताया गया है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में शाॅर्ट कट से प्रगति कैसे घातक है? (How is Progress from Shortcuts Deadly?),बैक डोर से आगे बढ़ना घातक (Moving Through Back Door is Fatal) के बारे में बताया गया है।
  • माॅडल पेपर्स,माॅक टेस्ट,पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्रों,वन वीक सीरीज,गैस पेपर व सीरीज का प्रयोग रिवीजन,अभ्यास,रिहर्सल के लिए तो किया जा सकता है परन्तु मुख्य तैयारी के लिए नहीं,वो भी स्तरीय,सही जानकारी वाले माॅडल पेपर्स आदि से ही करना चाहिए क्योंकि इनमें अधिकांश में काफी त्रुटियाँ होती हैं जो छात्र-छात्राओं को दिग्भ्रमित करती हैं।मुख्य तैयारी तो प्रामाणिक कोर्स की पुस्तक,निजी नोट्स,सन्दर्भ पुस्तक आदि से ही करना चाहिए।

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7.छात्र की उलझन (हास्य-व्यंग्य) (Student’s Confusion) (Humour-Satire):

  • छात्रःसर ये सवाल बता दो,फटाफट।
  • टीचरःयह लो इस सवाल का हल।
  • छात्रःइतना बड़ा हल,कैसे याद होगा,सर कोई शॉर्टकट तरीका बताओ,जिससे जल्दी से याद हो जाए।
  • टीचर:यदि शॉर्टकट अपनाओगे तो परीक्षा में नंबर भी शॉर्टकट ही मिलेंगे।

8.शाॅर्ट कट से प्रगति कैसे घातक है? (Frequently Asked Questions Related to How is Progress from Shortcuts Deadly?),बैक डोर से आगे बढ़ना घातक (Moving Through Back Door is Fatal) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.नैतिकता का क्या महत्व है? (What is the importance of morality?):

उत्तर:नैतिकता एक ऐसा आचरण है,जिसकी चमक कभी क्षीण नहीं होती,उस पर किसी भी बाहरी प्रेरक का प्रभाव नहीं पड़ता।इस पर कभी जंग नहीं लगता।

प्रश्न:2.शॉर्टकट से सफलता पर टिप्पणी लिखो। (Write a comment on the success with a short cut):

उत्तरःजिस प्रकार अनैतिक तरीके से कमाया गया धन सुख और समृद्धि का आधार नहीं बन सकता,उसी प्रकार छोटे रास्ते (शॉर्टकट) या पिछले दरवाजे (बैक डोर) से प्राप्त की गई सफलताएं मानसिक संतुष्टि नहीं दे सकती।देर से आना और आगे की कुर्सियों को हथियाना सफलता न होकर चोरी और सीनाजोरी होती है।

प्रश्न:3.बच्चों में कैसी सोच विकसित करें? (What kind of thinking do children develop?):

उत्तर:बच्चों में यह सोच विकसित करें कि छोटे रास्ते से सफलताएं प्राप्त करना मृगतृष्णा से अधिक कुछ नहीं।जब बच्चे इस सत्य को पूरी ईमानदारी से स्वीकारेंगे तो उनके बिगड़ने के सारे अवसर समाप्त हो जाएंगे।

  • उपर्युक्त आर्टिकल में शाॅर्ट कट से प्रगति कैसे घातक है? (How is Progress from Shortcuts Deadly?),बैक डोर से आगे बढ़ना घातक (Moving Through Back Door is Fatal) के बारे में बताया गया है।
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