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Complete Guide to Develop Common Sense:3 Mantras for Developing Common Sense for Students

1.कॉमन सेंस विकसित करने की पूर्ण गाइड:विद्यार्थियों के लिए काॅमन सेंस विकसित करने के 3 मंत्र (Complete Guide to Develop Common Sense:3 Mantras for Developing Common Sense for Students):

  • कॉमन सेंस विकसित करने की पूर्ण गाइड (Complete Guide to Develop Common Sense) के आधार पर जानिए कॉमन सेंस क्या होता है? कॉमन सेंस को किस तरह विकसित किया जा सकता है? एक विद्यार्थी अपने कॉमन सेंस को कैसे विकसित कर सकता है?

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2.कॉमन सेंस की मुख्य बातें (Key Highlights of Common Sense):

  • कॉमन सेंस का अर्थ (Meaning of Common Sense):
    कॉमन सेंस आधुनिक युग में बहुत काम की चीज है। काॅमन सेंस वह न्यूनतम समझ है जिसकी एक विद्यार्थी (व्यक्ति) से अपेक्षा की जाती है कि उसमें उतनी समझ तो होगी ही।
  • अर्थात् कॉमन सेंस बुद्धि का वह स्तर है जो हर विद्यार्थी में पाई जानी चाहिए।यदि कॉमन सेंस नहीं है तो या तो वह वज्र मूर्ख है,ठस बुद्धि का है,पागल है,मानसिक रूप से विक्षिप्त है।परंतु अक्सर कहा जाता है:Common sense is very uncommon अर्थात् हर किसी की न्यूनतम समझ मेल नहीं खाती है।ऐसी स्थिति में कॉमन सेंस के अर्थ को समझना अधिक रोचक एवं महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
  • कॉमन सेंस वह चीज है जो किसी को सिखाई नहीं जाती,यह स्वतः ही विकसित होती है।कॉमन सेंस आप पुस्तकें पढ़ कर नहीं सीख सकते और न ही कोई आपको इसकी ट्रेनिंग देता है।वास्तव में यह आपकी क्विक थिंकिंग (quick thinking) और ज्ञान की मात्रा से उत्पन्न होती है।
    कॉमन सेंस का दृष्टांत (The Parable of Common Sense):
  • एक प्रिंसिपल कुछ दिनों के लिए रिफ्रेशर कोर्स करने के लिए दूसरे शहर जा रहे थे।उन्होंने अपने असिस्टेंट से कहा कि मेरे पीछे से कोई भी अभिभावक आए तो लिख लेना कि वह कब-कब आए।असिस्टेंट बोला:जी सर! आप चिंता ना करें मैं हर रोज आने वाले अभिभावक के बारे में लिख लूंगा कि वो कब आए।
    15 दिन के बाद रिफ्रेशर कोर्स करके प्रिंसिपल आए तो अपने असिस्टेंट से कहा कि वो नोटबुक ले आओ जिस पर तुमने लिखा है कि कौन-कौन अभिभावक कब आए और स्टूडेंट कब आए।और हां तुमने नोट तो किया है ना कि कौन कब-कब आया? असिस्टेंट बोला-“हां-हां सर मैंने सभी के बारे में लिखा है।असिस्टेंट ने नोटबुक लाकर प्रिंसिपल को दे दी।प्रिंसिपल उसे देखकर बुरी तरह से झल्ला उठे और असिस्टेंट पर बरस पड़े।क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि असिस्टेंट ने हर एक के बारे में क्या लिखा था?
  • उसने हर आने और मिलने वाले के सामने लिखा था,’आज आया’,’आज आया’,………. ‘आज आया’… ।
    इसे कहते हैं कॉमन सेंस का अभाव।प्रिंसिपल द्वारा यह बताना तो आवश्यक नहीं था कि हर आने वाले की तारीख लिखी जाए,लेकिन असिस्टेंट यह नहीं समझ पाया की प्रिंसिपल जो लिखवाना चाह रहे हैं उसका उद्देश्य क्या है।इसीलिए कहा जाता है कि कॉमन सेंस बहुत अनकॉमन होती है।
    कॉमन सेंस की क्यों और कहां आवश्यकता है? (Why and where is common sense needed?):
    कॉमन सेंस कोई स्थायी चीज नहीं है।यह वक्त,वातावरण और स्थिति के अनुसार बदलती है।’आपको हमेशा यह ध्यान रखना है कि किस परिस्थिति में आपसे किस प्रकार की समझ की अपेक्षा की जाती है।
  • उदाहरण:एक बातूनी और बोल्ड छात्र (Talkative and Bold Student) का एडमिशन कराने किसी स्कूल में जाते हैं तो वह भी वहां शांत,चुपचाप और सलीके से व्यवहार करता है।किसी मित्र के परिवार में कोई दुर्घटना हो गई हो तो उसके साथ खुलकर हंसी-मजाक तथा हंसी-ठट्ठा नहीं करते हैं। ये छोटी-छोटी बातें हैं जिनके लिए किसी प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं है लेकिन आपसे इनकी अपेक्षा की जाती है।
  • सत्यम कोचिंग सेंटर (Satyam Coaching Centre) के अनुभव का दृष्टान्त है कि एक बार एक विद्यार्थी को कंटेंट लिखने के लिए साक्षात्कार (Interview) दे रहा था।साक्षात्कारकर्ता ने उसे सीधे-सीधे पहला प्रश्न किया:’ आपकी स्पीड कितनी है?’ उसने पूछा-‘सर किस चीज की?’
    साक्षात्कारकर्ता ने बस इतना कहा-‘आप जा सकते हैं,शायद आपको पता ही नहीं कि हमें केवल लैपटॉप या कंप्यूटर से टाइपिंग स्पीड की जरूरत है दौड़ने या गाड़ी चलाने की स्पीड की नहीं।’
  • हमें हर प्रकार के वातावरण के हिसाब से अपनी कॉमन सेंस को मजबूत बनाने की जरूरत है।विस्तार से समझने के लिए कुछ सत्यम मैथमेटिक्स (Satyam Mathematics) ब्लॉग की तरफ से टिप्स यहाँ प्रस्तुत हैं:
  • (1.)अपने शिक्षक की बात ध्यान से सुनना।लोफर और सड़क छाप विद्यार्थी को मुँह न लगाना और अपने सहपाठियों से दोस्ती बनाकर रखना,एक कॉमन सेंस है।
  • (2.)परीक्षा भवन में मोबाइल फोन ना लेकर जाना।दुःख,विपत्ति में पड़े हुए मित्र से मिलने जाते समय तड़क-भड़क वाले कपड़े न पहनना।अध्ययन के दौरान इधर-उधर की फालतू बातों और राजनीति की बातों से परहेज करना-यह कॉमन सेंस है।
  • (3.)यदि आप साक्षात्कार देने जा रहे हैं तो साक्षात्कार के दौरान पैनल के किसी भी सदस्य से व्यर्थ बहस न करना,अपने पुराने नियोक्ता (Employer) की बुराई न करना,उत्तर देते समय पैनल के सभी सदस्यों को संबोधित करना-यह कॉमन सेंस है।
  • (4.)आप इंटरव्यू में अपनी सफलता/सकारात्मक पहलुओं का बखान करते हैं,असफलताओं/कमजोरी का नहीं-यह कॉमन सेंस है।
  • (5.)यदि आपका वायवा टेस्ट हो रहा है और वायवा (प्रैक्टिकल) की तैयारी में कोई गलत बात बात जुड़ गई है तो आप उसका जल्दी से वर्णन करके आगे बढ़ जाते हैं-यह कॉमन सेंस है।
  • (6.)आप एक विद्यार्थी है तो अपने मित्र से प्रैक्टिकल की फाइल लेने गए हैं,आप जब मित्र के पास पहुंचते हैं तो अचानक उसकी तबीयत खराब हो जाती है।आप उसे कहते हैं कि अपना ख्याल रखें और प्रैक्टिकल बुक के बारे में बिना बात किए चुपचाप चले आते हैं-यह कॉमन सेंस है।
    कॉमन सेंस की सबसे अधिक आवश्यकता वहां होती है जहां कोई काम आपकी योजना के अनुरूप नहीं होता और एक नई स्थिति उत्पन्न हो जाती है या आप किसी ऐसी परिस्थिति का सामना कर रहे हैं जो आपके लिए नई है।
  • जिस प्रकार आजकल चलन में है कि लड़कियां लड़कों से हाथ मिलाती (Girls shake hands with boys) है,लेकिन यदि आप जूनियर हैं और आपका सामना आपसे काफी सीनियर छात्रा से हो जो जो उम्र में आपसे काफी बड़ी है तो कॉमन सेंस यह है कि उसे आप अभिवादन करें,परंतु यदि वह अपना हाथ बढ़ा दे तो आप भी उससे हाथ मिलाएँ।
  • कभी किसी भी शक्तिशाली व्यक्ति,राजनेता आदि को नाराज ना करें भले ही आप सशक्त हैं परंतु समय का कोई पता नहीं रहता है।आज सशक्त हैं कल को अशक्त भी हो सकते हैं और नाराज व्यक्ति आप पर तब हमला करता है जब हम अशक्त होते हैं।
  • सोच समझकर और परिस्थिति के अनुरूप निर्णय लें क्योंकि परिस्थिति प्रतिकूल और अनुकूल हो सकती है।प्रतिकूल परिस्थिति में वही निर्णय कुछ और परिणाम दिखाता है जबकि अनुकूल परिस्थिति में वही निर्णय कुछ और परिणाम दिखा देता है।
  • विद्यार्थी के लिए ये व्यावहारिक ज्ञान के लिए कॉमन सेंस की बातें हैं।परंतु अध्ययन के दौरान कॉमन सेंस रखना जरूरी है।जैसे आप 10वीं और 12वीं में गणित के विद्यार्थी (Student of Mathematics) हैं तो यह कॉमन सेंस है कि आपको जोड़,गुणा,भाग,घटाना आदि का ज्ञान होना चाहिए।यदि आप गणित के विद्यार्थी नहीं है तो पुस्तक को पढ़ना,लिखना और बोलकर सुनाना आना चाहिए।
  • सामान्यतः छात्र-छात्राएं कॉमन सेंस से बेफिक्र रहते हैं लेकिन कई बार उन्हें अपने शब्दों और व्यवहार के कारण शर्मिंदगी उठानी पड़ती है,तब उन्हें पता चलता है कि कॉमन सेंस का जीवन में कितना महत्त्व है और कॉमन सेंस का जीवन में होना क्यों जरूरी है।
    उपर्युक्त आर्टिकल में कॉमन सेंस विकसित करने की पूर्ण गाइड:विद्यार्थियों के लिए काॅमन सेंस विकसित करने के 3 मंत्र (Complete Guide to Develop Common Sense:3 Mantras for Developing Common Sense for Students) के बारे में बताया गया है।
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3.कॉमन सेंस वाला विद्यार्थी (हास्य-व्यंग्य) (Common Sense Student) (Humour-Satire):

  • एक बार एक धनिक वर्ग की बेटी सुंदर छात्रा और एक बदमाश की बेटी छात्रा,दोनों में झगड़ा हो गया।दोनों अपने आपको सुंदर बता रही थी।जब फैसला नहीं हुआ तो दोनों ने किसी तीसरे से फैसला कराने का निश्चय किया।दोनों ने एक सामान्य छात्र से पूछा:हम दोनों में सुंदर कौन है?
  • छात्र:तुम दोनों ही सुंदर हो।
    दोनों सुंदर छात्राओं ने कहा:यह तो कोई बात नहीं हुई।
  • छात्र:अच्छा तुम उस पेड़ को छूकर आओ।
  • दोनों तुरंत पेड़ को छूकर आती है और पूछती हैं।अब बताओ।
  • छात्र:धनिक की बेटी से तुम जब मेरी तरफ आ रही थी तब सुंदर लग रही थी और बदमाश की बेटी से,जब तुम मेरे से दूर जा रही थी तब सुंदर लग रही थी।

4.कॉमन सेंस विकसित करने की पूर्ण गाइड:विद्यार्थियों के लिए काॅमन सेंस विकसित करने के 3 मंत्र (Frequently Asked Questions Related to Complete Guide to Develop Common Sense:3 Mantras for Developing Common Sense for Students) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.क्या कॉमन सेंस का एहसास हमें होता है? (Do we feel common sense?):

उत्तर:कॉमन सेंस ज्ञान का वह रूप है जो स्पष्ट दिखाई नहीं देता परंतु हमें उसके होने या न होने का एहसास हर पल होता है।

प्रश्न:2.समझदारी से क्या आशय? (What do you mean by prudence?):

उत्तर:क्या अच्छा है,क्या बुरा,क्या गलत है,क्या सही का ज्ञान होना समझदारी है।

प्रश्न:3.क्या समझ की सीमा है? (What is the limit of understanding?):

उत्तर:भगवान ने समझ की कोई सीमा नहीं रखी है।

  • *”यह आर्टिकल **Satyam Mathematics** ब्लॉग पर **Satyam Coaching Centre** के द्वारा तैयार किया गया है।”*
  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा कॉमन सेंस विकसित करने की पूर्ण गाइड:विद्यार्थियों के लिए काॅमन सेंस विकसित करने के 3 मंत्र (Complete Guide to Develop Common Sense:3 Mantras for Developing Common Sense for Students) के बारे में प्रारम्भिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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