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Argument Principle and Rouche Theorem

1.कोणांक सिद्धान्त और रुशे प्रमेय (Argument Principle and Rouche Theorem)-

कोणांक सिद्धान्त और रुशे प्रमेय (Argument Principle and Rouche Theorem)-रूचे के प्रमेय।बंद डिस्क युक्त C में एक डोमेन D में f और g होलोमोर्फिक फ़ंक्शन होने दें।यदि के लिए, तो f और g में शून्य की समान संख्या है (ध्यान दें कि परिकल्पना का अर्थ है कि f और g का सीमा पर कोई शून्य नहीं है)।
(1.)कोणांक सिद्धान्त (Argument Principle)-
प्रमेय (Theorem):यदि परिरेखा C के अन्दर अवस्थित परिमित अनन्तकों के अतिरिक्त शेषक्षेत्र में तथा C पर यदि फलन f(z) विश्लेषिक है तथा C पर f(Z) \neq 0 तो

N-P=\frac{1}{2 \pi} \Delta_{C}(\arg \{f(z)\})
यहां \Delta_{c}, \arg \{f(z)\} में विचरण को दर्शाता है जबकि z द्वारा संवृत्त परिरेखा C का एक बार परिभ्रमण किया जाता है (एक m कोटि का अनन्तक या शून्य की की गणना m बार की जाती है)।
(If a function f(z) be analytic within and on a closed contour C except for a finite number of poles inside C and suppose that on C,then

N-P=\frac{1}{2 \pi} \Delta_{C}(\arg \{f(z)\})
Where \Delta_{c}, denotes the variation in arg f(z) as z moves once round the closed contour C (a pole or zero of order m must be counted m-times).)
उपपत्ति (Proof):अनन्तकी फलन के अनन्तक एवं शून्य प्रमेय के अनुसार (zeros and poles of a Meromorphic Function Theorem)

N-P=\frac{1}{2 \pi i} \int_{c} \frac{f^{\prime}(z)}{f(z)} d z \\=\frac{1}{2 \pi i} \int_{c} \frac{d}{d z}\{\log f(z)\} d z \\=\frac{1}{2 \pi i}[\log f(z)]_{c} \\ =\frac{1}{2 \pi i} \Delta[\log f(z)]
यहां पर यह ज्ञातव्य रहे कि \Delta_{c}[\log f(z)\}] की गणना करने के लिए \log \{f(z)\} का वह मान, जहां से हमने आरम्भ किया,वह महत्त्वहीन है।हम C के किसी भी बिन्दु से इस गणना के लिए आरम्भ कर सकते हैं।अब

\log f(z)=\log |f(z)|+i \arg [f(Z)]
चूंकि C संवृत्त वक्र है तथा {\log |f(z)|} एकमानी है

\Delta_{c} ({\log |f(z)|})=0
तथा N-P=\frac{1}{2 \pi i} \Delta_{c}[i \text { arg }\{f(z)\}]
या N-P=\frac{1}{2 \pi} \Delta_{c}\left[arg \left\{ f(z)\right\}\right]
इस सर्वसमिका को कोणांक सिद्धान्त (Argument Principle) द्वारा जाना जाता है।
(2.)रुशे प्रमेय तथा इसके अनुप्रयोग ( Rouche Theorem and its Application)-
प्रमेय (Theorem):मान लें कि f(z) तथा g(z) संवृत्त परिरेखा C पर तथा उसके भीतर विश्लेषिक है तथा C पर प्रत्येक z के लिए |g(z)|<|f(z)| तो C के अन्दर f(z)+g(z) एवं f(z) के शून्यों की संख्या बराबर है।
(Suppose f(z) and g(z) are analytic inside and on a simple closed contour C,with |g(z)|<|f(z)| on C.Then f(z)+g(z) and f(z) have the same number of zeroes inside C.)
उपपत्ति (Proof):चूंकि C पर तथा ऋणात्मक नहीं है इसलिए C पर |f(Z)|>0 जिससे निष्कर्ष निकलता है कि C पर f(z) \neq 0
यदि C के किसी बिन्दु पर f(z)+g(z)=0 तो

f(z)=-g(z) \Rightarrow|f(z)|=|g(z)|
जो कि विरोधाभास है इसलिए C पर f(z)+g(z) \neq 0 इसलिए f(z) या f(z)+g(z) में से कोई भी C पर शून्य नहीं है।
मान लें कि C के अन्दर f(z) एवं f(z)+g(z) के शून्यों की संख्या क्रमशः N_{1}  तथा N_{2} है।तब कोणिक नियम द्वारा

2 \pi N_{1} =\Delta_{c} \text { arg }[f(z)] \\ 2 \pi N_{2} =\Delta_{c} \text { arg }[f(z)+g(z)] \\ =\Delta_{c}\left[\arg f(z)\left(1+\frac{g(z)}{f(z)}\right)\right] \\ =\Delta c \arg [f(z)]+\Delta_{c} \text { arg }\left[1+\frac{g(z)}{f(z)}\right] \\ =\Delta_{c}\left[\text {arg} f(z)+\text {arg} \left(1+\frac{g(z)}{f(2)}\right)\right]
इसलिए 2 \pi\left(N_{2}-N_{1}\right)=\Delta_{c} \text { arg } \left[1+\frac{g(z)}{f(z)}\right] \ldots(1)
अब हम सिद्ध करेंगे कि \Delta_{c} \arg \left[1+\frac{g(z)}{f(z)}\right]=0
मान लें कि w=1+\frac{g(z)}{f(2)^{\prime}} चूंकि C पर |g(z)|<|f(z)|
इसलिए |w-1|=| \frac{\partial(z)}{f(z)} \mid<1
रूपान्तरण w=1+\frac{g(z)}{f(z)}
z-तल के बिन्दुओं को w=1 पर केन्द्रित इकाई त्रिज्या के वृत्त |w-1|=1 के अभ्यन्तर प्रतिचित्रित करता है।यह वृत्त पूर्णतः काल्पनिक अक्ष से दायीं तरफ स्थित है इसलिए यदि इस वृत्त पर स्थित किसी भी बिन्दु को मूलबिन्दु से मिलाने वाली रेखा यदि वास्तविक अक्ष से कोण \phi बनाती है तो -\frac{\pi}{2} \leq \phi \leq \frac{\pi}{2} अर्थात् यदि w=\rho e^{i \phi} \\ \phi=\arg \left[1+\frac{f(z)}{g(z)}\right]
तो -\frac{\pi}{2} \leq \phi \leq \frac{\pi}{2}
अब यदि z परिरेखा C का पूर्ण प्रतिभ्रमण करता है तो संगत w अपने प्रस्थान बिन्दु पर लौट आता है। अतः एक प्रतिभ्रमण में \phi का के गुणांकों में बढ़ना या घटना संभव नहीं है। इसलिए

\Delta_{c} \text { arg }\left[1+\frac{g(z)}{f(z)}\right]=0
अतः (1) से हम प्राप्त करते हैं कि N _{2}- N _{1}=0 या N _{2}= N _{1} अतः
इससे प्रमेय का प्रमाण पूर्ण होता है।
वैकल्पिक: उपर्युक्त प्रमाण में हम सिद्ध कर चुके हैं कि f(z) या f(z)+g(z) में से कोई भी C पर शून्य नहीं है।
मान लें कि F(z)=\frac{g(z)}{f(z)},तब C पर |F(z)|<1
चूंकि C पर F(z)=\frac{g(z)}{f(z)} इसलिए g(z)=f(z) F(z)
तथा g^{\prime}(z)=f^{\prime}(z) F(z)+f(z) F^{\prime}(z)
मान लें कि C के भीतर f(z) तथा f(z)+g(z) के शून्यों की संख्या क्रमशः N _{1} तथा N _{2} है। चूंकि C के अन्दर इन फलनों के कोई अनन्तक नहीं है इसलिए

N_{1}=\frac{1}{2 \pi i} \cdot \int_{c} \frac{f^{\prime}(z)}{f(z)} d z
तथा N_{2}=\frac{1}{2 \pi i} \int_{c} \frac{f^{\prime}(z)+g^{\prime}(z)}{f(z)+g(z)} d z
अतः N_{2}-N_{1} =\frac{1}{2 \pi i} \int_{c}\left[\frac{f^{\prime}(z)+f(z) F(z)+f(z) F^{\prime}(z)}{f(z)[1+F(z)]}-\frac{f^{\prime}(z)}{f(z)}\right]dz \\ =\frac{1}{2 \pi i} \int_{c} \frac{F^{\prime}(z)}{1+F(z)} d z \cdots \text { (2) }
अब C पर 1+F(z) \neq 0 तथा C पर F(z) विश्लेषिक है अतः C पर F^{\prime}(z) विश्लेषिक है।अन्तत: \frac{F^{\prime}(z)}{1+F(z)} भी C पर विश्लेषिक है।अब काॅशी प्रमेय द्वारा

\int_{C} \frac{F^{\prime}(z)}{1+F(z)} d z=0
इसलिए (2) के द्वारा

N _{2}= N _{1}
(3.) बीजगणित का मूल प्रमेय (Fundamental Theorem of Algebra):
उपपत्ति (Theorem):हम जानते हैं कि  यदि a_{n} \neq 0 तो a_{n} z^{n} के ठीक n शून्य हैं तथा सभी शून्य मूलबिन्दु पर है।
मान लें P(z)=a_{0}+a_{1} z+a_{2} z^{2}+\cdots+a_{n} z^{n}, a_{n} \neq 0 अब यदि हम मान लें कि f(z)=a_{n} z^{n} तथा g(z)=a_{0}+a_{1} z+a_{2} z^{2}+\cdots+a_{n-1} z^{n-1}
तो p(z)=f(z)+g(z)
यदि मूलबिन्दु पर केन्द्रित वृत्त C की त्रिज्या R>1 है तो C पर

|f(z)|=\left|a_{n}\right| R^{n}
तथा |g(z)| \leq\left|a_{n}\right|+\left|a_{1}\right| R+\left|a_{2}\right| R^{2}+ \cdots+ \left|a_{n-1}\right| R^{n-1}
इसलिए

\left|\frac{g(z)}{f(z)}\right| \leq \frac{\left|a_{0}\right| +|a||R+| a_{2}\left|R^{2}+\cdots+\right| a_{n-1} \mid R^{n-1}}{\left|a_{n} \right| R^{n}} \\ = \frac{1}{\left|a_{n}\right| R}\left[\frac{a_{0}}{R^{n-1}}+ \frac{\left|a_{1}\right|}{R^{n-2}}+r-t\left|a_{n-1}\right|\right] \\ \leq \frac{\left|a_{0}\right|+\left|a_{1}\right|+\cdots+\left|a_{n-1}\right|}{\left|a_{n}\right| R} \rightarrow 0 \Rightarrow R \rightarrow \infty \left(\because \frac{1}{R}<1\right) 

इसलिए \left|\frac{g(z)}{f(z)}\right|<1 अर्थात् C पर  |g(z)|<|f(z)| तथापि f(z) एवं g(z) वृत्त C पर तथा C के अन्दर विश्लेषिक है। अतः रुशे प्रमेय के अनुसार p(z)=f(z)+g(z) ,f(z) एवं p(z) के शून्यों की संख्या बराबर हैं। चूंकि f(z) के n-शून्य है, इसलिए p(z) के भी n-शून्य हैं।
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2.कोणांक सिद्धान्त और रुशे प्रमेय के उदाहरण (Argument Principle and Rouche Theorem Examples)-

Example-1.सिद्ध कीजिए समीकरण z^{4}+z^{3}+1=0 का एक मूल धनात्मक पाद में स्थित है,कोणांक सिद्धान्त को प्रयोग में लीजिए।
(Show that one roots of the equation z^{4}+z^{3}+1=0 lies in the positive quadrant,using principle of argument.)
Solution- z^{4}+z^{3}+1=0 \\ \Rightarrow f(z)=z^{4}+z^{3}+1=0
f(z) के सभी गुणांक वास्तविक तथा धनात्मक हैं इसलिए यह z के किसी वास्तविक धनात्मक मान से संतुष्ट नहीं हो सकता है। अतः f(z)=0 का धनात्मक मूल विद्यमान नहीं है तथा ऋणात्मक मूल भी विद्यमान नहीं है।
z=-x रखने पर-
F(x)=x^{4}-x^{3}+1=0 \\ \Rightarrow F(x)=x^{3}(x-1)+1>0 जब x>1
तथा F(x)=x^{4}+(1-x)(x^{2}+x+1)>0 जब 0<x<1
इस प्रकार समीकरण f(z)=0 का कोई वास्तविक मूल नहीं है।इस समीकरण से विशुद्ध रूप से काल्पनिक मूल भी प्राप्त नहीं हो सकते हैं।
यदि z= i y 
तो F(i y) =(i y)^{4}+(i y)^{3}+1=0 \\ =y^{4}-i y^{3}+1=0
इसमें वास्तविक व काल्पनिक भाग समाप्त नहीं होते हैं।अब f(z)=0 से हमें कोणांक सिद्धान्त हे एक मूल प्रथम चतुर्थांश में प्राप्त होता है।
|Z|=R से जहां R बहुत छोटा है।
f(z)=w=u+iv रखने पर-
(i)x-अक्ष पर 0 से ∞ तक परिवर्तित होता है तो u, 1 से ∞ तक तथा कोणांक अचर रहता है तथा वास्तविक धनात्मक अक्ष पर शून्य के बराबर है।
(ii)|z| =R \\ \Rightarrow z=R d \theta \\ f(z) =z^{4}\left(1+\frac{1}{z}+\frac{1}{z^{4}}\right) \\ =R^{4} e^{i 4 \theta}\{1+F(z)\}
जब z \rightarrow ∞ तो z \rightarrow 0
जब z वृत्त के प्रथम चतुर्थांश में है तो f(z) का कोणांक

\arg f(z) =4(\frac{\pi}{2}) \\ =2 \pi
(iii)z=iy, y-अक्ष पर लेने पर-

f(y) =y^{4}-i y^{3}+1 \\ \arg f(i y) =\tan ^{-1}\left(\frac{-y^{3}}{y^{4}+1}\right)
अंश y=0 पर शून्य हो जाता है परन्तु किसी भी वास्तविक संख्या के लिए हर शून्य नहीं होता है।इस प्रकार y 0 से ∞ तक काल्पनिक अक्ष पर परिवर्तित होता है तथा प्रारम्भिक व अन्तिम मान शून्य है।
अतः \text { arg } f(z) =0+2 \pi+0 \\ =2 \pi
अतः प्रथम चतुर्थांश में मूलों की संख्या=\frac{1}{2 \pi}(2 \pi)
=1 (एक)

उपर्युक्त उदाहरण के द्वारा कोणांक सिद्धान्त और रुशे प्रमेय (Argument Principle and Rouche Theorem) को समझ सकते हैं।
Example-2.सिद्ध कीजिए कि z^{7}-5 z^{3}+12=0 के सभी मूल वृत्तों |Z|=1 एवं |Z|=2 के मध्य स्थित हैं।
(Prove that all roots of z^{7}-5 z^{3}+12=0 lie between circles and |Z|=1 and |Z|=2.)
Solution– माना वृत्त तथा वृत्त को प्रदर्शित करता है।
माना f(z)=12 तथा g(z)=z^{7}-5 z^{3}
f(z) तथा g(z) दोनों C_{1} के अन्दर तथा C_{1} पर विश्लेषिक है
\left|\frac{g(z)}{f(2)}\right| =\left|\frac{z^{7}-5 z^{3}}{12}\right| \\ \leq |z|^{7}+\left|-5 z^{3}\right| \\ \leq \frac{|2|^{7}+5|z|^{3}}{12} \\ \leq \frac{1+5}{12} \\ \leq \frac{1}{2} [जबकि |z|=1]

\Rightarrow|g(z)|<|f(z)|
अतः रुशे प्रमेय से f(z)+g(z)=z^{7}-5 z^{3}+12,C_{1} के अन्दर समान शून्य रखते हैं। जबकि f(z)=12 के कोई शून्य C_{1} में नहीं है। इसलिए f(z)+g(z)=z^{7}-5 z^{3}+12 के में कोई शून्य नहीं है।
अब C_{2} वृत्त के लिए,माना f(z)=z^{7},\phi(z)=12-5 z^{3}
f(z)=z^{7} तथा \phi(z) दोनों C_{2}  के अन्दर तथा C_{2}  पर विश्लेषिक है।
\left|\frac{\phi(z)}{F(z)}\right| =\mid \frac{12-5 z^{3} \mid}{|z|} \\ \leq \frac{|1|+5|z|^{3}}{|z|^{7}} \\ \leq \frac{12+5 \cdot(2)^{3}}{27} [जब |z|=2]

\leq \frac{52}{128} \\ <1 \\|\phi(z)|<|F(z)|
f(z)+\phi(z)=z^{7}-5 z^{3}+12 तथा f(z)=z^{7} ,C_{2} के अन्दर समान शून्य रखते हैं। f(z)=z^{7} के सभी सात शून्य |z|=2 के अन्दर हैं।
अतः f(z) के सभी शून्य C_{1} तथा C_{2} के मध्य स्थित हैं।

उपर्युक्त उदाहरण के द्वारा कोणांक सिद्धान्त और रुशे प्रमेय (Argument Principle and Rouche Theorem) को समझ सकते हैं।

Example-3.एक मानीय f(z) की विचित्रताएं केवल z=1 पर द्विकोटि एवं z=2 पर साधारण अनन्तक ही है।इन अनन्तकों पर अवशेष क्रमशः 1 एवं 3 है।यदि f(0)=\frac{3}{2},f(-1)=1 हो तो फलन ज्ञात कीजिए।
(The only singularities of a single valued function f(z) are poles of oreder 2 and 1 at z=1 and z=2 with residues these poles are 1 and 3 respectively.If f(0)=\frac{3}{2},f(-1)=1, determine the function.)

solution:-फलन f(z):z=1 पर  द्विकोटि पर अवशेष 3 एवं z=2 पर साधारण अंतक है जहां अवशेष 1 है

\frac{3}{z-2}+\frac{1}{z-1}+\frac{b}{(z-1)^{2}} \\ f(z)=\sum_{n=0}^{\infty} a_{n} z^{n}+\frac{3}{z-2}+\frac{1}{z-1}+\frac{b}{(z-1)^{2}}.......(1)
z=∞ पर f(z) की कोई विचित्रता नहीं है। इसलिए की w=0 पर कोई विचित्रता नहीं है।
अतः लौरा प्रसार से-

f\left(\frac{1}{w}\right)=a_{0} +\sum_{n=1}^{\infty} \frac{a_{n}}{\omega^{n}}+\frac{3 w}{1-2 \omega}+\frac{\omega}{1-w}+\frac{b w^{2}}{(1-w)^{2}}
f(\frac{1}{w}) का मुख्य भाग है-

\frac{a_{1}}{w}+\frac{a_{2}}{\omega^{2}}+\frac{a_{3}}{\omega^{3}}+\cdots
मुख्य भाग में कोई पद नहीं है अतः

a_{1}=a_{2}=a_{3}=\cdots \cdot=0
अतः f(z)=a_{0}+\frac{3}{z-2}+\frac{1}{z-1}+\frac{b}{(z-1)^{2}} \cdots(2)
प्रश्नानुसार f(0)=\frac{3}{2} तथा f(-1)=1 समीकरण (2) में रखने पर-

\frac{3}{2}=a_{0}-\frac{3}{2}+1+bi \Rightarrow a_{0}+b=4
तथा 1=a_{0}-1-\frac{1}{2}+\frac{1}{4} b \Rightarrow a_{0}+\frac{1}{4} b= \frac{5}{2}
हल करने पर-

a_{0}=2, b=2
उपर्युक्त मान समीकरण (2) में रखने पर-

f(z)=2+\frac{3}{z-2}+\frac{1}{z-1}+\frac{2}{(z-1)^{2}} \\ =2(z-2)(z-1)^{2}+3(z-1)^{2}+(z-2)(z-1)+2(z-2) \\ f(z)=\frac{2 z^{3}-4 z^{2}+3 z-3}{(z-2)(z-1)^{2}}

उपर्युक्त उदाहरण के द्वारा कोणांक सिद्धान्त और रुशे प्रमेय (Argument Principle and Rouche Theorem) को समझ सकते हैं।
Example-4. फलन f(z) का z=0 पर द्विकोटि का अनन्तक जिस पर अवशेष 2 तथा z=1 पर साधारण अनन्तक जिस पर अवशेष भी 2 है।z-तल के अन्य परिमित बिन्दुओं पर फलन परिमित है तथा |z| \rightarrow ∞ के लिए प्रतिबद्ध है।यदि f(2)=5 एवं f(-1)=2 तो f(z) ज्ञात कीजिए।
(The function f(z) has a double pole z=0 with residue 2,a simple pole at z=1 with residue 2,is analytic at all other finite points of the plane and is bounded as |z| \rightarrow ∞.If f(2)=5 and f(-1)=2 ,then find f(z).)
Solution- फलन f(z) में दिया है कि एक कोटि का अनन्तक z=1 पर अवशेष 2 तथा द्विकोटि का अनन्तक z=0 पर अवशेष 2 है, अतः f(z) का मुख्य भाग

=\frac{2}{z-1}+\frac{2}{2}+\frac{b}{z^{2}}
f(z) का लौरां प्रसार

f(z)=\sum_{n=0}^{\infty} a_{n} z^{n}+\frac{2}{z-1}+\frac{2}{z}+\frac{b}{z^{2}} \cdots(1)
f(z), जब |z| \rightarrow ∞ तो परिबद्ध है अतः एक धनात्मक संख्या M ऐसी हैं कि

f(Z) \leq M
अतः f(z) की z=∞ पर कोई विचित्रता नहीं है अर्थात् की w=0 पर कोई विचित्रता नहीं है।

f\left(\frac{1}{\omega}\right)=a_{0}+\sum_{n=1}^{\infty} \frac{a_{n}}{w^{n}}+\frac{2 \omega}{1-w}+2 w+b \omega^{2}
f\left(\frac{1}{\omega}\right) के मुख्य भाग के कोई पद नहीं है अतः

a_{1}=a_{2}=a_{3}=\cdots \cdot=0
अतः समीकरण (1) का रूप होगा-

f(2)=a_{0}+\frac{2}{z-1}+\frac{2}{z}+\frac{b}{z^{2}} \cdots(2)
प्रश्नानुसार f(2)=5,f(-1)=2
उपर्युक्त मान रखने पर-

5=a_{0}+2+1+\frac{1}{h} b \\ 2=a_{0}+1-2+b
हल करने पर-

a_{0}=1, b=4
उपर्युक्त मान समीकरण (2) में रखने पर-

f(z) =1+\frac{2}{z-1}+\frac{2}{z}+\frac{4}{z^{2}} \\ \Rightarrow f(z) =\frac{z^{3}+3 z^{2}+2z-4}{z^{2}(z-1)}
उपर्युक्त उदाहरणों के द्वारा कोणांक सिद्धान्त और रुशे प्रमेय (Argument Principle and Rouche Theorem) को समझ सकते हैं।

3.कोणांक सिद्धान्त और रुशे प्रमेय की समस्याएं (Argument Principle and Rouche Theorem Problems)-

(1.)रुशे प्रमेय के द्वारा यह सिद्ध कीजिए कि समीकरण z^{2}+15z+1 का एक मूल डिस्क |z|<\frac{3}{2} में है तथा चार मूल वलयिका \frac{1}{2}<|z|<2 में हैं।
(Use Riuche’s theorem to show that the equation z^{2}+15z+1 has one root in the disc |z|<\frac{3}{2} and four roots in the annulus \frac{1}{2}<|z|<2.)
(2.) समीकरण z^{8}-4 z^{5}+z^{2}-1=0 के वृत्त |z|=1 के अन्दर स्थित मूलों की संख्या ज्ञात कीजिए।
(Determine the number of roots the equation z^{8}-4 z^{5}+z^{2}-1=0 that lie inside the circle |z|=1.)
(3.)सिद्ध कीजिए कि बहुपद z^{5}+z^{3}+2z+3 का सम्मिश्र तल के प्रथम चतुर्थांश में केवल एक ही शून्य है।
(Show that the polynomial z^{5}+z^{3}+2z+3 has just one zero in the first quadrant of the complex plane.)
(4.) समीकरण z^{4}+z^{3}+4z^{2}+2z+3=0 के मूल कौनसे चतुर्थांश में स्थित हैं?
(In which quadrant do the roots of the equation z^{4}+z^{3}+4z^{2}+2z+3=0  lie?)
उत्तर (Answers):
(2.) 5
(4.) दो मूल द्वितीय चतुर्थांश में तथा शेष दो मूल तृतीय चतुर्थांश में स्थित हैं।
उपर्युक्त सवालों को हल करके कोणांक सिद्धान्त और रुशे प्रमेय (Argument Principle and Rouche Theorem) को समझ सकते हैं।

4.सम्मिश्र विश्लेषण में रुशे का प्रमेय (Theorem of Rouche in complex analysis)-

सम्मिश्र विश्लेषण में, बीजगणित के मौलिक सिद्धांत में कहा गया है कि यदि डिग्री संख्या के सम्मिश्र संख्या के साथ एक बहुपद, p है, तो बहुपद में बिल्कुल n मूल होती हैं।रुशे के प्रमेय के संदर्भ में, बहुपद को दो अलग-अलग फलनों में विभाजित किया जाता है, f (z) और g (z)। … C के अंदर प्रतिबन्ध के साथ कि z = 2।

5.रुशे प्रमेय का प्रमाण (Theorem of Rouche Proof)-

रुशे के प्रमेय में कहा गया है कि यदि f (z) और g (z) दोनों परिरेखा (कन्टूर) C के अंदर और अंदर विश्लेषणात्मक हैं, और यदि | g (z) |<| f (z) | C पर, फिर f (z) और F (z) + g (z) में C के अंदर समान संख्या में शून्य हैं।

6.व्यापक कोणांक सिद्धांत प्रमाण (Generalized Argument Principle Proof)-

कोणांक सिद्धांत का प्रमाण
चूंकि g (zZ), 0, यह इस प्रकार है कि g'(z)/g (z) का zZ में कोई विचित्रता नहीं है‌ और इस प्रकार zZ पर विश्लेषणात्मक है जिसका अर्थ है कि f′(z) /f(z) के अवशेष zZ पर k है। इसके अतिरिक्त, यह दिखाया जा सकता है कि f'(z)/f(z) का कोई अन्य अनन्तक नहीं है, और इसलिए कोई अन्य अवशेष नहीं है।

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