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Ring Theory in Discrete Mathematics

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1 1.विविक्त गणित में वलय सिद्धान्त (Ring Theory in Discrete Mathematics):

1.विविक्त गणित में वलय सिद्धान्त (Ring Theory in Discrete Mathematics):

विविक्त गणित में वलय सिद्धान्त (Ring Theory in Discrete Mathematics) के इस लेख में पढ़ेंगे कि छात्र-छात्राओं को वलय सिद्धान्त को पढ़ना क्यों जरूरी है? क्या तकनीकी में वलय सिद्धान्त का प्रयोग होता है? वलय सिद्धान्त पढ़ना क्यों जरूरी है? आदि।
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2.परिचय:वलय क्या है और क्यों पढ़ना जरूरी है? (Introduction:Ring kya hai aur kun padhna zaroori hai?):

छात्र-छात्राएँ कहते हैं या समझते हैं कि गणित की दुनिया में ‘Ring’ का कोई वजूद नहीं है।छात्र-छात्राओं को लगता है कि ‘Ring’ के गुणधर्म रटने की चीज है।लेकिन विविक्त गणित में गुणधर्म ही “game changer” होता है।”Ring Theory” केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने के दृष्टिकोण से ही पढ़ना नहीं है बल्कि इसका तकनीकी की दुनिया में प्रयोग होने की वजह से पढ़ना भी उपयोगी होता है।

3.क्विक रिवीजन गाइड (Quick Revision Guide):

\begin{array}{|l|l|c|} \hline \begin{array}{l} \text { Property Type } \end{array} & \text{Property Name} & \begin{array}{c} \text{Mathematical} \\ \text { Rules } \end{array} \\ \hline \text {Addition(+) } & \text{ Clouse} & a+b \in R \\ & \text { Assciciative } & (a+b)+c=a+(b+c) \\ & \text { Identity } & a+0=a \\ & \text { Inverse } & a+(-a)=0 \\ & \text { Commutative } & a+b=b+a \\ \text { multiplication } & \text { Closure } & a \cdot b \in R \\ & \text { Associative } & (a \cdot b) \cdot c=a \cdot(b \cdot c) \\ \text { connection } & \text { Distributive } & a(b+c)=a b+a c \\ \hline \end{array}

उपर्युक्त आर्टिकल द्वारा विविक्त गणित में वलय सिद्धान्त (Ring Theory in Discrete Mathematics) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

4.वलय के गुणधर्म:रूल्स आफ गेम (Ring ki Properties:Rules of Game):

(1.)विजुअल प्रदर्शन (Visual Representation):
योगात्मक गुणधर्म (Addition Properties):
Closure,Associative,Identity,Inverse,Commutative कुल पाँच गुणधर्म शामिल हैं।
गुणन गुणधर्म (Multiplication Properties):
Closure,Associative कुल दो गुणधर्म शामिल हैं।
बंटनात्मक गुणधर्म (Distributive Property):
जो दोनों को जोड़ती है।
(2.)वलय के लिए कुल आठ नियमों का पालन करना होता है।जिन्हें ऊपर तीन हिस्सों में बाँटा गया है।
Level:I.योगात्मक गुणधर्म आबेली ग्रुप (Abelian Group) यहाँ वलय “Perfect” का व्यवहार करती है।
Closure में दो संख्याओं को जोड़ो तो परिणाम भी वलय के अन्दर ही मिलेगा।
साहचर्य (a+b)+c=a+(b+c) आर्डर परिवर्तन से फर्क नहीं पड़ता है।
तत्समक (Identity) (0):एक ऐसा अवयव है जो किसी में भी जोड़ो तो value नहीं बदलती है।
प्रतिलोम (Inverse):(a+(-a))=0 हर अवयव का एक विपरीत होता है जो मिलाने पर जीरो बनता है।
Level:2.गुणन के दो नियम (सेमीग्रुप):दो अवयवों को गुणा करो तो परिणाम वलय में ही रहेगा।
साहचर्य (Associative):(a.b).c=a.(b.c)
Level:3.Connection (Distributive Law):ये गुणधर्म योग और गुणन में दोस्ती करवाती है।
a.(b+c)=a.b+a.c
प्रो.टिप (Pro-Tip):यहाँ छात्र-छात्राएँ गलती करते हैं: वलय गुणन का क्रमविनिमेय या प्रतिलोम (Inverse) का होना जरूरी नहीं है।अगर ये दोनों गुण भी प्रदर्शित करेगी तो वह क्षेत्र (Field) बन जाती है।

उपर्युक्त आर्टिकल द्वारा विविक्त गणित में वलय सिद्धान्त (Ring Theory in Discrete Mathematics) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

5.विविक्त गणित में वलय सिद्धान्त के उदाहरण (Ring Theory in Discrete Mathematics Illustrations):

Illustration:1.माना M,समस्त आव्यूहों का समुच्चय है जो निम्न रूप में है: \left[\begin{array}{ll} 0 & a \\ 0 & b \end{array}\right] ; a, b \in R
सिद्ध कीजिए कि M,आव्यूह योग तथा आव्यूह गुणन संक्रियाओं के लिए एक शून्यभाजक सहित वलय है।
(Let M be set of all matrices of the form \left[\begin{array}{ll} 0 & a \\ 0 & b \end{array}\right] ; a, b \in R Prove that M,form a ring with zero divisor with respect to the matrix addition and matrix multiplication compositions.)
Solution:माना A, B \in M तब A=\left[\begin{array}{ll} 0 & a \\ 0 & b \end{array}\right]B=\left[\begin{array}{ll} 0 & c \\ 0 & d \end{array}\right] जहाँ a, b, c, d \in R \\ \therefore A+B=\left[\begin{array}{ll} 0 & a \\ 0 & b \end{array}\right]+\left[\begin{array}{ll} 0 & c \\ 0 & d \end{array}\right]=\left[\begin{array}{ll} 0 & a+c \\ 0 & b+d \end{array}\right] \\ \therefore A+B \in M
पुनः AB=\left[\begin{array}{ll} 0 & a \\ 0 & b \end{array}\right]\left[\begin{array}{ll} 0 & c \\ 0 & d \end{array}\right]=\left[\begin{array}{ll} 0 & a d \\ 0 & b d \end{array}\right]
इस प्रकार M,+ और \bullet दोनों संक्रियाओं के लिए संवृत है।
चूँकि वास्तविक संख्याओं का योग व गुणन साहचर्य होते हैं अतः आव्यूहों का योग व गुणन दोनों ही साहचर्य होते हैं अर्थात् A, B, C \in M
(A+B)+C=A+(B+C),(AB)C=A(BC)
यह भी सर्वविदित है कि जब A,B,C तीन आव्यूह है जिनके अवयव वास्तविक संख्याएँ हैं तो
A(B+C)=AB+AC
(B+C)A=BA+CA
वास्तविक संख्याओं का योग क्रमविनिमेय है अतः \forall A, B \in M \\ \Rightarrow A+B=B+A \\ A=\left[\begin{array}{ll} 0 & 0 \\ 0 & 0 \end{array}\right] शून्य आव्यूह \in M और यह शून्य (Zero element) है।योग संक्रिया के लिए प्रत्येक अवयव A=\left[\begin{array}{ll}0 & a \\ 0 & b\end{array}\right] का प्रतिलोम B=\left[\begin{array}{ll}0 & -a \\ 0 & -b\end{array}\right] \in M विद्यमान है।
अब A \neq 0, B \neq 0 तब भी AB=0=BA
अब A और B दोनों ही M के उचित शून्य भाजक है।
फलतः M,समस्त आव्यूहों का समुच्चय आव्यूह योग तथा आव्यूह गुणन संक्रियाओं के लिए एक शून्य भाजक सहित वलय है।
Illustration:2.समुच्चय Z में संक्रियाएँ * तथा \odot निम्न प्रकार परिभाषित हैं:
a*b=a+b+1 तथा a \odot b=a+b+ab \forall a, b \in Z
सिद्ध कीजिए कि (z, * , \odot) एक क्रमविनिमेय तत्समकी वलय है।
(The operations * and \odot in Z are defined as follows):
a*b=a+b+1 and a \odot b=a+b+ab \forall a, b \in Z
Prove that (z, * , \odot) is a commutative ring with unity element.)
Solution: * और \odot की Z में संवृतता
चूँकि \forall a, b \in R \\ a * b=a+b+1 \in z, a \odot b=a+b+a b \in z \\ \therefore \forall a * b \in z, a * b=a+b+1 \in z
और \Rightarrow a \odot b=a+b+a b \in z
अतः Z,* और \odot संक्रियाओं के लिए संवृत है। * और \odot की Z में साहचर्यता:Z के किन्हीं तीन अवयव a,b,c के लिए
(a * b) * c=(a+b+1) * c=a+b+1+c+1 \\ \Rightarrow (a*b) * c=a+(b+c+1)+1 \\ =a*(b+c+1) \\ \Rightarrow (a*b)*c=a*(b*c)
\therefore *,Z में सहचारी है
पुनः (a \odot b) \odot c=(a+b+a b) \odot c \\ =a+b+a b+c+(a+b+a b) c \\ =a+b+c+b c+(b+c+b c) \cdot a \\ =a \odot (b+c+b c) \\ (a \odot b) \odot c=a \odot(b \odot c)
अतः \odot संक्रिया Z में सहचारी है। * और \odot की Z में क्रमविनिमेयता:
\forall a, b \in z \\ a*b=a+b+1=b+a+1 \\ =b*a \\ \Rightarrow a*b=b*a
और a \odot b= a+b+a b \\ =b+a+b a \\ \Rightarrow a \odot b=b \odot a
अतः संक्रियाओं * और \odot दोनों ही Z में क्रमविनिमेय है।
Z में * और \odot संक्रियाओं के सापेक्ष तत्समक अवयवों का अस्तित्व:
Z में -1 इसका शून्य अवयव है और –\frac{a}{a+1} ; a का तत्समक है जो निम्न से स्पष्ट है:
a *(-1)=a-1+1=a
और a \odot\left(-\frac{a}{a+1}\right)=a-\frac{a}{a+1}+a\left(-\frac{a}{a+1}\right) \\ =\frac{a^2+a-a-a^2}{a+1}=0 \\ \Rightarrow a \odot\left(-\frac{a}{a+1}\right)=0
a(-1)=a-1+1=a और Z में प्रत्येक का ऋणात्मक अवयव:
a \in z \Rightarrow-2-a \in z \\ \therefore \forall a \in S , -2-a \in S और यह एक ऐसा अवयव है कि
a(-2-a)=a-2-a+1=-1
अतः -2-a,Z के अवयव a का Z में ऋणात्मक अवयव है।
Z में * और \odot की बंटनता:
\forall a, b, c \in z के लिए
a \odot(b * c)=a \odot(b+c+1) \\ =a+b+c+1+a(b+c+1) \\ =(a+b+a b) *(a+c+a c) \\ =(a \odot b) *(a \odot c) \\ \Rightarrow a \odot (b*c)=(a \odot b) *(a \odot c)
अतः Z में \odot संक्रिया * पर बंटनात्मक है।
इस प्रकार यह प्रमाणित हो गया है कि Z एक क्रमविनिमेय तत्समकी वलय है।
Illustration:3.सिद्ध कीजिए कि वलय \left(R,+,\bullet\right) क्रमविनिमेय है यदि और केवल यदि
(a+b)^2=a^2+2 a b+b^2 \quad \forall a, b \in R
(Prove that the ring \left(R,+,\bullet\right) is commutative if and only if (a+b)^2=a^2+2 a b+b^2 \quad \forall a, b \in R )
Solution:माना कि R एक क्रमविनिमेय वलय है।
\forall a, b \in R, a b=b a \\ (a+b)^2 पर बंटनात्मक गुणधर्म सेः
(a+b)^2=(a+b)(a+b) \\ =a(a+b)+b(a+b) \\ \Rightarrow(a+b)^2=a^2+a b+b a+b^2
चूँकि R क्रमविनिमेय है अतः ba=ab रखने परः
\Rightarrow (a+b)^2=a^2+a b+a b+b^2 \\ \Rightarrow (a+b)^2=a^2+2 a b+b^2
अतः R क्रमविनिमेय है।
अब माना (a+b)^2=a^2+2 a b+b^2 \forall a, b \in R
(a+b)^2 का विस्तार करने परः
(a+b)^2=a^2+a b+b a+b^2 \\ \Rightarrow a^2+a b+b a+b^2=a^2+2 a b+b^2
a^2 और b^2 दोनों पक्षों में घटाने परः
ab+ba = 2ab \\ \Rightarrow a b+b a=a b+a b \\ \Rightarrow b a=a b \\ \Rightarrow ab=ba \forall a ,b \in R
अतः R क्रमविनिमेय है।
अतः R क्रमविनिमेय वलय है यदि और केवल यदि
(a+b)^2=a^2+2 a b+b^2 \quad \forall a, b \in R
Illustration:4.सिद्ध कीजिए कि समुच्चय S=\{a+b \sqrt{3} ; a, b \in Q\} ,संख्याओं के सामान्य योग तथा गुणन के लिए एक पूर्णांकीय प्रान्त है।क्या यह क्षेत्र है?
(Prove that the set S=\{a+b \sqrt{3} ; a, b \in Q\} ,forms an integral domain w.r.t. the ordinary addition and multiplication of numbers?)
Solution:माना S=\{a+b \sqrt{3} ; a, b \in Q\}
(1.)संवृत गुणधर्म (Closure Property):
माना a_1+b_1 \sqrt{3}, a_2+b_2 \sqrt{3} \in S
अब \Rightarrow \left(a_1+a_2\right)+\left(b_1+b_2\right) \sqrt{3} \\ \Rightarrow a_1, a_2 \in Q \Rightarrow a_1+a_2 \in Q तथा b_1, b_2 \in Q \\ \Rightarrow b_1+b_2 \in Q \\ \therefore \left(a_1+a_2\right)+\left(b_1+b_2\right) \sqrt{3} \in S
अतः S योग संक्रिया के लिए संवृत है।
(2.) a+b \sqrt{3} वास्तविक संख्या है और वास्तविक संख्या योग के लिए सहचारी है।
(3.)तत्समक अवयव का अस्तित्व (Existence of Identity Element):
a \in Q \Rightarrow -a \in Q
यदि a+b \sqrt{3} \in R तब (-a)+(-b) \sqrt{3} \in S \\ \Rightarrow(a+b \sqrt{3})+[(-a)+(-b) \sqrt{3}]=(a-a)+(b-b \sqrt{3}=0+0 \cdot \sqrt{3}
अतः (-a)+(-b) \sqrt{3} योगात्मक प्रतिलोम है।
(4.)योग संक्रिया हमेशा क्रमविनिमेय होती है।
अतः (S,+) आबेली ग्रुप है।
(5.)गुणन संक्रिया के लिए संवृतता
यदि a_1+b_1 \sqrt{3}, a_2+b_2 \sqrt{3} \in R तब
\left(a_1+b_1 \sqrt{3}\right) \cdot\left(a_2+b_2 \sqrt{3}\right)=\left(a_1 a_2+2 b_1 b_2\right) +\left(a_1 b_2+b_1 a_2\right) \sqrt{3}
यदि a_1, a_2, b_1, b_2 \in Q तब a_1 a_2+2 b_1 b_2 \in Q और a_1 b_2+b_1 a_2 \in Q
इसी प्रकार \left(a_1 a_2+2 b_1 b_2\right)+\left(a_1 b_2+b_1 a_2\right) \sqrt{3} \in R
इस प्रकार S गुणन संक्रिया के लिए संवृत है।
(6.)गुणन संक्रिया योग पर हमेशा बंटनात्मक है।
(7.)गुणन हमेशा क्रमविनिमेय है।
अतः \left(S,+, \bullet \right) एक आबेली वलय है।
(8.)अब माना \left(a_1+b_1 \sqrt{3}\right) \cdot\left(a_2+b_2 \sqrt{3}\right)=0
और a_1+b_1 \sqrt{3} \neq 0 \Rightarrow a_1 \neq 0 या b_1 \neq 0
मान लो a_1 \neq 0 तब \left(a_1+b_1 \sqrt{3}\right) \cdot\left(a_2+b_2 \sqrt{3}\right)=0 \\ \Rightarrow \left(a_1 a_2+2 b_1 b_2\right)+\left(a_1 b_2+b_1 a_2\right) \sqrt{3}=0 \\ \Rightarrow a_1 a_2+2 b_1 b_2=0 तथा a_1 b_2+b_1 a_2=0 तथा a_1 \neq 0
\Rightarrow a_1 \cdot\left(a_1 b_2+b_1 a_2\right)=0 तथा a_1 a_2=-2 b_1 b_2
\Rightarrow a_1^2 b_2+b_1 \cdot a_1 a_2=0 तथा a_1 a_2=-2 b_1 b_2 \\ \Rightarrow a_1^2 b_2+ b_1\left(-2 b_1 b_2\right)=0 \\ \Rightarrow a_1^2 b_2-2 b_1^2 b_2=0 \\ \Rightarrow b_2 \left(a_1^2-2 b_1^2\right)=0 \quad \left[\because a_1 a_2=-2 b_1 b_2\right] \\ \Rightarrow b_2=0 \left[\because a_1^2-2b_1^2 \neq 0 \text{क्योंकि } a_1 \neq 0 \right]
साथ ही a_1 a_2=-2 b_1 b_2 \\ \Rightarrow a_1 a_2=0 तथा a_1 \neq 0 \Rightarrow a_2=0
अतः a_2+b_2 \sqrt{3}=0
इसी प्रकार यदि a_2 \neq 0 तो a_1=b_1=0 होगा।
\therefore \left(a_1+b_1 \sqrt{2}\right) \cdot\left(a_2+b_2 \sqrt{3}\right)=0 \Rightarrow \\ a_1+b_1 \sqrt{3}=0 या a_2+b_2 \sqrt{3}=0
अतः S एक पूर्णांकीय प्रान्त है।
अब यदि x=a_1+b_1 \sqrt{3} \in S का Q में गुणन संक्रिया के लिए प्रतिलोम ज्ञात करें तो पाएंगे कि x^{-1} \in Q और x^{-1}=\frac{1}{a_1+b_1 \sqrt{3}} \times \frac{a_1-b_1 \sqrt{3}}{a_1-b_1 \sqrt{3}} =\frac{a_1}{a_1^2-3 b_1^2}-\frac{b_1 \sqrt{3}}{a_1-3 b_1^2} \in Q
अतः समस्त S का समुच्चय,परिमेय संख्याओं के योग + तथा के साथ क्षेत्र है।
Illustration:5.यदि \left( R,+,\bullet \right) एक तत्समकी वलय है,तो सभी अवयवों a,b,c,d \in R के लिए सिद्ध कीजिए कि:
(If \left( R,+,\bullet \right) is a ring with unity element,then for elements a,b,c,d \in R Prove that):
(i) (-1) \cdot a=-a=a(-1) ; \forall 1 \in R
(ii) (-1)(-1)=1 ; 1 \in R
(iii)(a+b)^2=a^2+a b+b a+b^2
(iv) (a-b)(c-d)=(a c+b d)-(ad+bc)
(v) (a-b)-c=a-(b+c)
Solution:(i). (-1) \cdot a=-a=a(-1) ; \forall 1 \in R
चूँकि 1 तत्समक अवयव है,1.a=a
बंटनात्मक गुणधर्म से (1+(-1))a=1.a+(-1)a
\Rightarrow 1+(-1)=0 और 0.a=0,हम प्राप्त करते हैं:
0=a+(-1)a
\Rightarrow (-1)a,a का योगात्मक प्रतिलोम है।
अतः (-1).a=-a
यही तर्क a(1+(-1)) के लिए लागू होता है।
अतः a(-1)=-a
(ii)(-a)(-b)=ab ; \forall a,b \in R
(-1).a=-a गुणधर्म प्रयोग करने परः
(-a).(-b)=((-1)a)((-1)b)
(-1) के साहचर्य और क्रमविनिमेय सेः
(-a)(-b)=(-1)(-1)(a b) \\ \Rightarrow(-1)(-1)=1 \\ \Rightarrow 1(a b)=a b \\ \therefore \Rightarrow(-a)(-b)=a b
(iii). (a+b)^2=a^2+a b+b a+b^2
परिभाषा से (a+b)^2=(a+b)(a+b)
बंटनात्मक गुणधर्म सेः
=(a+b)a+(a+b)b
पुनः बंटनात्मक गुणधर्म से:
(a.a+b.a)+(a.b+b.b) \\ \Rightarrow (a+b)^2=a^2+b a+a b+b^2 \\ \Rightarrow ab=ba होगा यदि वलय क्रमविनिमेय है।
(iv). (a-b)(c-d)=(a c+b d)-(a d+b c) \\ \Rightarrow (a-b)(c-d)=a(c-d)-b(c-d)
पदों के विस्तार सेः
=(ac-ad)-(bc-bd)
=ac-ad-bc+bd
पुनर्व्यवस्थित करने पर:
=(ac+bd)-(ad+bc)
(v).(a-b)-c=a-(b+c)
(a-b)-c,a+(-b)+(-c) के समान हैः
योगात्मक प्रतिलोम गुणधर्म सेः
(-b)+(-c)=-(b+c)
पुनः ऊपर रखने पर
=a+(-(b+c))
=a-(b+c)
\Rightarrow (a-b)-c=a-(b+c)
Illustration:6.एक ऐसे वलय का उदाहरण दीजिए जो क्रमविनिमेय तथा तत्समकी वलय नहीं है परन्तु इसके सभी अवयवों x,y के लिए (x \cdot y)^2=x^2 \cdot y^2
(Give an example of a ring which is not commutative and without unity element but for all its elements x,y ; (x \cdot y)^2=x^2 \cdot y^2
Solution:इसका सबसे उपयुक्त उदाहरण 2×2 ऊपरी त्रिकोणीय आव्यूह (upper triangular matrices) का वलय है,जिसके अवयव किसी विशेष क्षेत्र (जैसे Z_2 ) से हों।
वलय R:माना R=\left[\left(\begin{array}{cc} a & b \\ 0 & a \end{array}\right), a, b \in z_2\right]
विशेषताएँ यह वलय क्रमविनिमेय नहीं होता है (आव्यूह गुणन आमतौर पर क्रमविनिमेय नहीं होता)।
इसमें तत्समक अवयव I=\left[\begin{array}{ll} 1 & 0 \\ 0 & 1 \end{array}\right] का अस्तित्व है।
इस विशिष्ट संरचना के लिए (x y)^2=x^2 y^2 की स्थिति सन्तुष्ट होती है।
Illustration:7.सिद्ध कीजिए कि अशून्य परिमित क्रमविनिमेय तत्समकी वलय R एक क्षेत्र होता है यदि और केवल यदि R शून्य भाजक रहित है।
(Prove that a nonzero finite commutative ring R with unity element is a field if and only if R is without zero divisor.)
Solution:यह बीजगणित की प्रसिद्ध प्रमेय है।इसे सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:
मान लीजिए R एक परिमित क्रमविनिमेय वलय है जिसमें कोई शून्य भाजक नहीं है (अर्थात् R एक परिमित पूर्णांकीय प्रान्त है)
सिद्ध करना है R के प्रत्येक अशून्य अवयव का गुणात्मक प्रतिलोम मौजूद है।
माना R=\left\{a_1, a_2, \ldots, a_n\right\}
किसी अशून्य a \in R के लिए,समुच्चय \left\{ a a_1, a a_2, \ldots, a a_n\right\} पर विचार करें।
चूँकि R में शून्य भाजक नहीं है,इसलिए ये सभी n के अवयव भिन्न-भिन्न होंगे।
अतः इनमें से कोई एक अवयव तत्समक के बराबर अवश्य होगा (जैसे a a_i=1)।
इससे सिद्ध होता है कि प्रत्येक अशून्य अवयव व्युत्क्रमणीय है इसलिए R एक क्षेत्र है।
Illustration:8.सिद्ध कीजिए कि एक अशून्य परिमित क्रमविनिमेय वलय जो शून्य भाजक रहित है,क्षेत्र होता है।
(Prove that a non-zero finite commutative ring without zero divisor is a field.)
Solution:इकाई अवयव (unity element) का अस्तित्व:
मान लीजिए R=\left\{a_1, a_2, \ldots a_n\right\} एक परिमित क्रमविनिमेय वलय है।किसी भी a \in R (a \neq 0) के लिए a a_1, a a_2, \ldots a a_n भी R के भिन्न-भिन्न अवयव होंगे।चूँकि R परिमित है,इनमें से एक अवयव स्वयं a के बराबर होगा (जैसे),जो इकाई अवयव (1) के अस्तित्व को दर्शाता है।
गुणात्मक प्रतिलोम (Mutiplicative inverse):
चूँकि और वलय के सभी अवयवों को कवर करते हैं,तो किसी के लिए भी R के भिन्न-भिन्न अवयव होंगे।चूँकि R परिमित है,इनमें से एक अवयव स्वयं a के बराबर होगा (जैसे a a_{k}=a ),जो इकाई अवयव (1) के अस्तित्व को दर्शाता है।
गुणात्मक प्रतिलोम (Mutiplicative Inverse):
चूँकि 1 \in R और a a_1, a a_2, \ldots, a a_n वलय के सभी अवयवों को कवर करते हैं,तो किसी a_i \in R के लिए a a_i=1 होना चाहिए।यह a_i को a का गुणात्मक प्रतिलोम सिद्ध करता है।
निष्कर्ष:क्योंकि R एक क्रमविनिमेय वलय है जिसमें इकाई अवयव मौजूद है और प्रत्येक शून्येतर (non-zero) अवयव का प्रतिलोम है,इस प्रकार R एक क्षेत्र (Field) है।
Illustration:10.माना R एक तत्समकी वलय है,जिसमें \forall a, b \in R,(a \cdot b)^2=a^2 \cdot b^2 ,तब सिद्ध कीजिए कि R एक क्रमविनिमेय वलय है।
(Set R be a ring with unity element in which \forall a, b \in R,(a \cdot b)^2=a^2 \cdot b^2 ,then Prove that R is a commutative ring.)
Solution:दिया गया है \forall a, b \in R \\ (a b)^2=a^2 b^2
इसे हम इस प्रकार लिख सकते हैं:
(ab) (ab)=(aa) (bb)
चूँकि R एक वलय है,इसलिए इसमें साहचर्य नियम (associative law) लागू होता है:
a(ba)b=a(ab)b
अब चूँकि R एक तत्समकी वलय है,तब a को x+1 से प्रतिस्थापित (replace) कर सकते हैं (यहाँ I गुणात्मक तत्समक है):
(1.)((x+1) b)^2=(x+1)^2 b^2
(2.)(x b+b)^2=\left(x^2+2 x+1\right) b^2
(3.)(x b+b)(x b+b)=x^2 b^2+2 x b^2 +b^2
(4.)(x b)^2+x b^2+b x b+b^2=x^2 b^2 +2 x b^2+b^2
दिया गया है \left(x b\right)^2=x^2 b^2 ,इसलिए
x b^2+bxb=x b^2 \\ \Rightarrow b x b=x b^2 \cdots(1)
अब समीकरण (1) में b को y+1 से प्रतिस्थापित करने परः
(1.)(y+1) x(y+1)=x(y+1)^2
(2.)(y+1)(x y+x)=x\left(y^2+2 y+1\right)
(3.) y x y+y x+x y+x=x y^2+2 x y+x
समीकरण (1) के अनुसार y x y=x y^2 \\ yx+xy=2xy \\ \Rightarrow y x=x y
चूँकि यह R के सभी तत्त्वों x,y के लिए सत्य है,इसलिए R एक क्रमविनिमेय वलय है।
Quick Question:क्या आप बता सकते हैं कि प्राकृत संख्याओं का समुच्चय N={1,2,3,…….,} एक वलय (Ring) बनायेगा या नहीं।
Hint: तत्समक (Identity) जाँच करें।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा विविक्त गणित में वलय सिद्धान्त (Ring Theory in Discrete Mathematics) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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6.विविक्त गणित में वलय सिद्धान्त (Frequently Asked Questions Related to Ring Theory in Discrete Mathematics) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

Q:1.रिंग की बेसिक डेफिनेशन क्या है? (Ring ki basic definition kya hai?):

Ans:रिंग एक ऐसा अरिक्त समुच्चय R है जो दो द्विआधारी संक्रियाओं (binary operations) (+ और \odot ) के साथ जुड़ती है:
\left[R_1\right] (R,+) एक आबेली समूह (abelian group) है।
\left[R_2\right] (R,\bullet) एक सामि समूह (semigroup) है,
\left[R_3\right] \forall a,b,c \in R
(i)a.(b+c)=a.b+a.c,(b+c).a=b.a+c.a
गुणन,योग पर बंटन (distributive law) होना चाहिए।

Q:2.समूह और वलय में क्या अन्तर है? (Group aur Ring mein kya antar hai?):

Ans:ग्रुप में सिर्फ एक द्विआधारी संक्रिया होती है जबकि वलय (Ring) मेंं दो संक्रियाएँ (+ और \bullet) होती है।हर वलय योग के सापेक्ष ग्रुप होता है लेकिन हर ग्रुप वलय नहीं होता है।

Q:3.क्रमविनिमेय वलय क्या होती है? (Commutative Ring kya hoti Hai?):

Ans:अगर किसी वलय में गुणन संक्रिया क्रमविनिमेय हो (a.b=b.a) तो उसे क्रमविनिमेय वलय कहते हैं।

Q:4.क्या हर वलय क्षेत्र होता है? (Kya har Ring Ek field hoti Hai?):

Ans:नहीं,एक वलय तभी क्षेत्र बनती है जब वो क्रमविनिमेय हो,उसमें गुणन तत्समक हो और हर अशून्य अवयव का गुणन प्रतिलोम मौजूद हो।

Q:5.वलय सिद्धान्त का वास्तविक संसार में क्या उपयोग है? (Ring Theory ke real-world applications kya hai?):

Ans:वलय सिद्धान्त का उपयोग क्रिपटोग्राफी (cryptography),कोडिंग थ्योरी (coding theory) और कम्प्यूटर साइंस (computer science) के एल्गोरिथ्म डिजाइन करने में किया जाता है।
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा विविक्त गणित में वलय सिद्धान्त (Ring Theory in Discrete Mathematics) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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Ring Theory in Discrete Mathematics

विविक्त गणित में वलय सिद्धान्त
(Ring Theory in Discrete Mathematics)

Ring Theory in Discrete Mathematics

विविक्त गणित में वलय सिद्धान्त (Ring Theory in Discrete Mathematics) के इस लेख में पढ़ेंगे
कि छात्र-छात्राओं को वलय सिद्धान्त को पढ़ना क्यों जरूरी है? क्या तकनीकी में वलय सिद्धान्त
का प्रयोग होता है? वलय सिद्धान्त पढ़ना क्यों जरूरी है? आदि।

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