Menu

Elementary Properties of Group

Contents hide

1.ग्रुप के प्रारम्भिक गुण (Elementary Properties of Group),विविक्त गणित में ग्रुप (Group in Discrete Mathematics):

ग्रुप के प्रारम्भिक गुण (Elementary Properties of Group) के इस आर्टिकल में कुछ विशिष्ट सवालों को ग्रुप के गुणधर्मों के आधार पर ग्रुप सिद्ध करेंगे तथा उन्हें समझने का प्रयास करेंगे।
आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस गणित के आर्टिकल को शेयर करें।यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें।जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके।यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए।आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं।इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

Also Read This Article:- Groups in Discrete Mathematics

2.ग्रुप के प्रारम्भिक गुण पर आधारित उदाहरण (Illustrations Based on Elementary Properties of Group):

Illustration:1.इकाई के n,nवें मूलों का समुच्चय G=\left\{e^{\left(\frac{2 \pi i r}{n}\right)}, r=0,1,2, \cdots, n-1\right\} सम्मिश्र संख्याओं के गुणन के सापेक्ष एक सीमित आबेली ग्रुप है।
(The set G=\left\{e^{\left(\frac{2 \pi i r}{n}\right)}, r=0,1,2, \cdots, n-1\right\} of all n,nth roots of unity is a finite abelian group with respect to the multiplication of complex numbers):
Solution: G=\left\{e^{\left(\frac{2 \pi i r}{n}\right)}, r=0,1,2, \cdots, n-1\right\}
यदि \frac{2 \pi i}{n} को w से व्यक्त करें तो
G=\left\{1, \omega, \omega^2, \ldots, \omega^{n-1}\right\} जहाँ \omega^n=1, \omega=\cos \frac{2 \pi}{n}+i \sin \frac{2 \pi}{n}
(1.)संवृतता (Closure Property):
माना कि w^{r}, w^s \in G जहाँ 0 \leq r, s \leq n-1
अतः w^r-w^s=\omega^{r+s}, 0 \leq r+s \leq 2 n-2
यहाँ दो सम्भावनाएँ हैं:
(अ) 0 \leq r+s \leq n-1 , इस स्थिति में w^{r+s} \in G
(ब) n \leq r+s \leq 2 n-2 तो माना कि r+s=n+q जहाँ 0 \leq q \leq n-2
इस स्थिति में w^{r+s}=w^{n+q}=w^n \cdot w^q=1 \cdot w^q=w^q \in G
(2.)साहचर्यता (Associativity):
चूँकि G \subset C तथा C में गुणन संक्रिया सहचारी है अतः यह G में भी सहचारी होगी।
(3.)तत्समक अवयव का अस्तित्व (Existence of Identity Element):
अवयव 1 \in G ,तत्समक अवयव है क्योंकि किसी भी अवयव w^r \in G(0 \leq r \leq n-1) के लिए 1 \cdot w^r=w^r=w^r \cdot 1
(4.)प्रतिलोम अवयव का अस्तित्व (Existence of Inverse Element):
किसी भी अवयव w^{r} \in G(1 \leq r \leq n-1) का प्रतिलोम w^{n-r}(\because 1 \leq n-r \leq n-1) है क्योंकि
w^r \cdot w^{n-r}=w^{r+n-r}=w^n=1
तथा w^{n-r} \cdot w^r=w^{n-r+r}=w^n=1
साथ ही r=0 के लिए w^0=1 \in G का प्रतिलोम 1 \in G है।
अतः G के प्रत्येक अवयव का प्रतिलोम G में विद्यमान है।
(5.)क्रमविनिमेयता (Commutativity):
माना कि w^r \cdot w^s \in G, 0 \leq r, s \leq n-1
तो w^r \cdot w^s=w^{r+s}=w^{s+r}=w^s \cdot w^r
अतः गुणन संक्रिया G में क्रमविनिमेय है।
इस प्रकार सिद्ध होता है कि इकाई के n,nवें मूलों का समुच्चय,गुणन संक्रिया के सापेक्ष आबेली समूह है।
Illustration:2.पूर्णांकों पर m×n मैट्रिक्सों का समुच्चय,मैट्रिक्स योग के लिए एक अपरिमित आबेली ग्रुप है।
(The set of m×n matrices over set of integers is an infinite abelian group with respect to the addition of matrices.)
Solution:(1.)संवृतता (Closure Property):
किन्हीं दो पूर्णांक का योग सदैव एक पूर्णांक होता है अतः मैट्रिक्सों का समुच्चय,साधारण योग संक्रिया के लिए संवृत है।
(2.)साहचर्यता (Associativity):
माना कि a, b, c \in z तो हम जानते हैं कि
(a+b)+c=a+(b+c)
अर्थात् साधारण योग संक्रिया में मैट्रिक्स योग सहचारी होता है।
(3.)तत्समक अवयव का अस्तित्व (Existence of Identity Element):
अवयव 0 \in Z योग संक्रिया के लिए तत्समक अवयव है क्योंकि
a+0=a=0+a, \forall a \in z
अतः Z में तत्समक अवयव विद्यमान है।
(4.)प्रतिलोम का अस्तित्व (Existence of Inverse):
प्रत्येक a \in Z के लिए अवयव ऐसा होता है कि
a+(-a)=0=(-a)+a
अतः Z में प्रत्येक अवयव a का प्रतिलोम (-a) है।
(5.)क्रमविनिमेयता (Commutativity):
मैट्रिक्सों के समुच्चय Z में,योग क्रमविनिमेय होता है अर्थात्
a+b=b+a, \forall a, b \in z
अतः (Z,+) एक अपरिमित आबेली ग्रुप है।

Illustration:3.परिमेय संख्याओं पर n×n व्युत्क्रमणीय मैट्रिक्सों का समुच्चय,मैट्रिक्स गुणन के लिए एक अपरिमित अनआबेली ग्रुप है।
(The set of all n×n invertable (non-singular) matrices over the set of rational numbers is an infinite non-abelian group with respect to multiplication of matrices.)
Solution:A व्युत्क्रमणीय मैट्रिक्स है अतः |A| \neq 0
माना A,n×n कोटि का व्युत्क्रमणीय मैट्रिक्सों का समुच्चय है जिसके अवयव परिमेय संख्याएँ हैं
(1.)संवृतता (Closure Property):
माना A \in M \Rightarrow A ,n×n कोटि का मैट्रिक्स है,A के सभी अवयव परिमेय संख्याएँ हैं।
इसी प्रकार B \in M ,अब AB , n×n कोटि का मैट्रिक्स है तथा AB के सभी अवयव परिमेय संख्याएँ हैं।
A \neq 0
अतः |A B|=|A| \quad |B| , जबकि |A| \neq 0
तथा |B| \neq 0
इसलिए |A B| \neq 0 इस प्रकार |A B| \in M
इसलिए M,मैट्रिक्स गुणन के लिए संवृत है।
(2.)साहचर्यता (Associativity):
मैट्रिक्स गुणन सहचारी है।
(3.)वाम तत्समक का अस्तित्व (Existence of Left Identity):
यदि I,n×n कोटि का इकाई मैट्रिक्स है तो I के सभी अवयव परिमेय संख्याएँ हैं।
|I|=1 \neq 0
अतः I \in M यदि A \subset M तो IA=A
अतः I वाम तत्समक है।
इसी प्रकार दक्षिण तत्समक का अस्तित्व है।
(4.)वाम प्रतिलोम का अस्तित्व (Existence of Left Inverse):
हम जानते हैं कि प्रत्येक व्युत्क्रमणीय मैट्रिक्स का प्रतिलोम होता है।अतः A \in M एक व्युत्क्रमणीय मैट्रिक्स का अस्तित्व है
A^{-1}=\frac{1}{|A|}(\operatorname{Adj} A) \\ \Rightarrow A^{-1} A=I
हम जानते हैं कि मैट्रिक्स गुणन सामान्यतया क्रमविनिमेय नहीं होता है।
अतः M एक अपरिमित अक्रमविनिमेय समूह है।
उपर्युक्त उदाहरणों द्वारा ग्रुप के प्रारम्भिक गुण (Elementary Properties of Group),विविक्त गणित में ग्रुप (Group in Discrete Mathematics) को समझ सकते हैं।

3.ग्रुप के प्रारम्भिक गुणधर्म पर आधारित महत्त्वपूर्ण प्रमेय (Important Theorems Based on Elementary Properties of Group):

(1.)ग्रुप (G,o) में तत्समक अवयव अद्वितीय होता है
(The identity element in a group is unique)
(2.)ग्रुप (G,o) में प्रत्येक अवयव का प्रतिलोम अद्वितीय होता है।
(The inverse of each element in the group (G,o) is unique)
(3.)यदि (G,o) एक ग्रुप है,तो
(If (G,o) is a group,then)
\left(a^{-1}\right)^{-1}=a \forall a \in G
(4.)यदि (G,o) एक ग्रुप है,तो
(If (G,o) is a group,then)
(a \circ b)^{-1}=b^{-1} \circ a^{-1} \forall a, b \in G [उत्क्रमण नियम (Reversal law)]
उपपत्ति (Proof):(1.)माना G एक ग्रुप है और e तथा e’,G के दो तत्समक अवयव हैं।
अब चूँकि e,G का तत्समक अवयव है अतः
eoe’=e’=e’oe     ….. (1)
इसी प्रकार e’,G का तत्समक अवयव है अतः
e’oe=e=eoe’     ……. (2)
अतः समीकरण (1) तथा (2) से सिद्ध होता है कि
e=e’
अर्थात् G में तत्समक अवयव अद्वितीय है।
(2.)माना कि a ग्रुप (G,o) के समुच्चय G का कोई अवयव है तथा b और c इसके G में दो प्रतिलोम है।अतः प्रतिलोम की परिभाषा से:
aob=e=boa   ….. (1)
तथा aoc=e=coa  …… (2.)
जहाँ e \in G समूह (G,o) का तत्समक अवयव है।
अब b=boe  [ \because e तत्समक अवयव है]
=bo(aoc) [(2) से]
=(boa)oc [ \because G में सहचारी है]
=eoc  [(1) से]
=c
अतः किसी अवयव a \in G के दो प्रतिलोम नहीं हो सकते अर्थात् G के प्रत्येक अवयव का प्रतिलोम G में अद्वितीय है।
(4.)प्रतिलोम की परिभाषा से
प्रत्येक अवयव a \in G के लिए
a \circ a^{-1}=e=a^{-1} \circ a
\Rightarrow a^{-1} का प्रतिलोम a है अर्थात् (a^{-1})^{-1}=a
(4.) a, b \in G के लिए a^{-1}, b^{-1} \in G अतः
o की साहचर्यता से
\left(a \circ b\right) \circ \left(b^{-1} \circ a^{-1}\right)=((a \circ b) \circ b^{-1}) \circ a^{-1} \\ =(a \circ(b \circ b^{-1}) \circ a^{-1}) \\ =(a \circ e) \circ a^{-1} \quad [\because b \circ b^{-1}=e] \\ =a \circ a^{-1} [ \because e तत्समक अवयव है]
=e
इसी प्रकार सिद्ध कर सकते हैं कि
\left(b^{-1} \circ a^{-1}\right) \circ(a \circ b)=e
अतः (a \circ b) \circ\left(b^{-1} \circ a^{-1}\right)=e=\left(b^{-1} \circ a^{-1}\right) \circ (a \circ b) \\ \Rightarrow (a \circ b)^{-1}=b^{-1} \circ a^{-1}
इस नियम को उत्क्रमण नियम (reversal law) कहते हैं।

Also Read This Article:- Group in Discrete Mathematics

4.ग्रुप के प्रारम्भिक गुण (Frequently Asked Questions Related to Elementary Properties of Group),विविक्त गणित में ग्रुप (Group in Discrete Mathematics) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.ग्रुप पर टिप्पणी लिखो। (Write a Note on Group):

उत्तर:माना G एक अरिक्त समुच्चय है तथा “a” G पर परिभाषित कोई संक्रिया है।तब संरचना (G,o) एक ग्रुप कहलाती है यदि
(1) a \circ b \in G, \forall a, b \in G(साहचर्य नियम)
(2.) (a \circ b) \circ c=a \circ(b \circ c) \forall a, b \in  G(साहचर्य नियम)
(3.)सभी a \in G के लिए एक अद्वितीय अवयव e \in G इस प्रकार है कि
aoe=a=eoa
e को G का तत्समक अवयव कहते हैं।
(4.)प्रत्येक अवयव a \in G के लिए एक अद्वितीय अवयव b \in G इस प्रकार है कि
aob=e=boa
b को a का प्रतिलोम अवयव कहते हैं तथा इसे a^{-1} से प्रकट करते हैं
\therefore a \circ a^{-1} =e=a^{-1} \circ a

प्रश्न:2.ग्रुप के प्रारम्भिक गुणधर्म पर टिप्पणी लिखो। (Write a Comment on Elementary Properties of Group):

उत्तर:ग्रुप अभिगृहीतियों (Group Axioms) के द्वारा प्रत्येक ग्रुप में तत्समक अवयव होना चाहिए परन्तु इस अभिगृहीत इस सम्भावना से इन्कार नहीं करता कि एक ग्रुप में एक से अधिक तत्समक अवयव जैसा अवयव नहीं हो सकते इसी प्रकार ग्रुप में प्रत्येक अवयव का कम से कम एक प्रतिलोम अवश्य होना चाहिए इस अभिगृहीत से अभिप्राय नहीं निकलता कि एक अवयव का प्रतिलोम अवयव एक से अधिक प्रतिलोम नहीं हो सकते हैं।

प्रश्न:3.संवरक नियम से क्या आशय है? (What is Meant by the Closure Law?):

उत्तरःमाना कि (G,*) एक ग्रुप है तथा a \in G तब संवरक नियम से a * a \in G ,इसे a^2 से व्यक्त करते हैं।पुनः a^2 \in G , a \in G \Rightarrow a^2 \cdot a \in G इसे a^3 से व्यक्त करते हैं।इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराते जाने पर हम प्राप्त करते हैं:
a^{n-1} * a= a^n \in G
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा ग्रुप के प्रारम्भिक गुण (Elementary Properties of Group),विविक्त गणित में ग्रुप (Group in Discrete Mathematics) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

No. Social Media Url
1. Facebook click here
2. you tube click here
3. Instagram click here
4. Linkedin click here
5. Facebook Page click here
6. Twitter click here
7. Twitter click here

Elementary Properties of Group

ग्रुप के प्रारम्भिक गुण
(Elementary Properties of Group)

Elementary Properties of Group

ग्रुप के प्रारम्भिक गुण (Elementary Properties of Group) के इस आर्टिकल में कुछ विशिष्ट
सवालों को ग्रुप के गुणधर्मों के आधार पर ग्रुप सिद्ध करेंगे तथा उन्हें समझने का प्रयास करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *