The Important Rung of Ladder to Success : 7 Techniques of Essay Writing
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2.निबन्ध लेखन की 7 तकनीक की भूमिका (Introducution to 7 Techniques of Essay Writing):
1.सफलता की सीढ़ी का महत्त्वपूर्ण पायदान: निबन्ध लेखन की 7 तकनीक (The Important Rung of Ladder to Success : 7 Techniques of Essay Writing):
- निबन्ध लेखन की 7 तकनीक (7 Techniques of Essay Writing) में आप जानिए कि शैक्षिक और प्रतियोगिता परीक्षाओं में निबन्ध कैसे लिखें? निबन्ध लेखन एक व्यापक विषय है इसलिए निबन्ध लेखन का जितना अभ्यास और पठन-पाठन किया जाये उतना ही कम है।
- निबन्ध के लिए शब्दकोश पर पकड़,लोकोक्ति और मुहावरों का प्रयोग तथा विषय का गहरा ज्ञान होना चाहिए।इसके लिए अधिक जानकारी हेतु हमारा लेखHow to Write Essay for Competition?पढ़ें।
2.निबन्ध लेखन की 7 तकनीक की भूमिका (Introducution to 7 Techniques of Essay Writing):
- आजकल विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं और शैक्षिक परीक्षाओं में निबन्ध का प्रश्न-पत्र अनिवार्य होता है।विशेषकर हिन्दी भाषी क्षेत्रों की परीक्षाओं में।इन परीक्षाओं में निबन्ध का प्रश्न-पत्र पर्याप्त महत्त्व रखता है।यही कारण है कि परीक्षार्थियों को इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।प्रतियोगिता परीक्षाओं में निबन्ध के अंक सफलता में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
- इस पत्र की एक सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें परीक्षार्थी के पास पर्याप्त से अधिक समय रहता है।शैक्षिक परीक्षा में पर्याप्त समय मिलता है और प्रतियोगिता परीक्षाओं में भी परीक्षार्थी के पास पर्याप्त से अधिक समय मिलता है।परीक्षार्थी के पास दिए गए विषयों में से अपनी रुचि (Your interest in the given topics),क्षमता तथा जानकारी के अनुरूप विषय चुनने का पर्याप्त समय तथा सुविधा होती है।
- निबन्ध प्रश्न-पत्र में अन्य वैकल्पिक विषयों तथा अनिवार्य विषयों की अपेक्षा कम मेहनत कर के अधिक अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।मानविकी विषयों में 50 प्रतिशत से अधिक अंक लाने के लिए भी महीनों तक काफी जी-तोड़ मेहनत (Hard work) करनी होती है।जबकि निबंध में कम समय में इन विषयों की अपेक्षा कम मेहनत कर अच्छे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।
- इसका उद्देश्य उम्मीदवार की सम्प्रेषण क्षमता तथा उसके द्वारा विचारों को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने की योग्यता की जाँच करना है।इस संदर्भ निबन्ध पत्र में दिए गए निर्देश में उम्मीदवार के समक्ष स्पष्ट रूप से उन बातों को रखते हैं,जिनकी मुख्य रूप में इस पत्र में अपेक्षा की जाती है।
उम्मीदवार की विषय-वस्तु की पकड़,चुने गए विषय के साथ उसकी प्रासंगिकता,रचनात्मक तरीके से सोचने की उसकी योग्यता और विचारों को संक्षेप में युक्तिसंगत तथा प्रभावी तरीके (Effective methods) से प्रस्तुत करने की तरफ परीक्षक विशेष ध्यान देंगे।
(1.)उम्मीदवार की विषय-वस्तु पर पकड़ (Candidate’s grasp on the subject matter):
- परीक्षार्थी के पास पर्याप्त विकल्प रहते हैं।6-7 विषयों में से मात्र एक विषय पर निबंध लिखना (Writing Essay) होता है।इसलिए उम्मीदवार को दिए गए विषयों में से अपनी अभिरुचि,अपनी तैयारी तथा विषय के बारे में जानकारी के अनुसार विषय का चयन करना चाहिए।उसके पास पर्याप्त समय रहता है कि वह 10-15 मिनट तक दिए गए विषयों में से जो दो-तीन जंचे,उनमें से अपने लिए सबसे बेहतर विकल्प चुन सके।उम्मीदवार विषय चुनते समय अपने वैकल्पिक विषयों,जैसे राजनीति,लोकप्रशासन,इतिहास,अर्थशास्त्र तथा साहित्य आदि विषय में से सम्बन्धित विषय या अपनी रुचि का विषय चुनने के प्रति सचेत रहे।
- चुने गए विषय के साथ उसकी प्रासंगिकता (Its relevance with the chosen topic)
निबन्ध लिखते समय उम्मीदवार को सदैव सतर्क रहना चाहिए कि वह विषय की प्रासंगिकता को ध्यान में रखे।
(2.)रचनात्मक तरीके से सोचने की योग्यता (Ability to think creatively):
- निबंध को पाठ्यक्रम में शामिल करने का यह महत्त्वपूर्ण लक्ष्य था कि इसके माध्यम से उम्मीदवार की रचनात्मक सोच की योग्यता को परखा जाये।इसलिए निबन्ध को साक्षात्कार के पूर्व साक्षात्कार की संज्ञा दी जा सकती है। हाँ,एक तरफ जहाँ साक्षात्कार में मात्र 20-30 मिनट में 10-15 प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं,वहीं निबन्ध में पूरे 180 मिनट में एक विषय पर उम्मीदवार की अपनी पूरी रचनात्मक सोच को काफी इत्मीनान के साथ सिलसिलेवार ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है,जिसका लाभ प्रत्येक सफल होने की आकांक्षा (Aspiring to succeed) रखने वाले उम्मीदवार को जरूर उठाना चाहिए।
- इसमें उम्मीदवार से अपेक्षा की जाती है कि वह दिए गए विषय को अपने तरीके से समझे:विचारे तथा उस पर अपनी रचनात्मक सोच को अभिव्यक्त करे।परीक्षार्थी के पास पर्याप्त मौका रखता है कि वह मनमाफिक विषय पर उसे ढंग से प्रस्तुत करे।ऐसे विषय पर उम्मीदवार परम्परागत तरीके के स्थान पर उससे कहीं अधिक उपयोगी,ग्राह्य और अद्यतन पद्धति का स्वरूप सामने रख सकता है तथा परम्परागत प्रणाली से पुनः संरचित प्रणाली की श्रेष्ठता को अपने सुदृढ़ तर्कों तथा तथ्यात्मक आँकड़ों से प्रस्तुत किया जा सकता है।
- पारम्परिक ढर्रे से हटकर नए दृष्टिकोण प्रस्तुत करे।यह आपके निबन्ध को अन्य उम्मीदवारों से अलग और प्रभावशाली बनाता है।
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संक्षिप्त में विचारों को लिखने की कला (The Art of Writing Ideas in a Nutshell):
- यद्यपि 3 घंटे का समय इतना अधिक है कि काफी पन्ने रंगे जा सकते हैं,लेकिन यहाँ ज्यादा लिखना अधिक महत्त्व नहीं रखता,बल्कि संक्षेप में विचारों को रखना ज्यादा लाभप्रद होता है।इसके लिए एक सावधानी तो यह बरतनी चाहिए कि एक ही तथ्य या विचार की पुनरावृत्ति न हो।एक ही बात को बार-बार दुहराने से पढ़ने वाले पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
- अपनी बात को संक्षेप में तथा सटीक ढंग से लिखने (Writing accurately) के लिए निरन्तर अभ्यास की जरूरत है।संक्षेप में कही या लिखी गई बात ज्यादा प्रभावकारी होती है।उसे समझने में काफी सुविधा होती है।अभिव्यक्ति जितनी कसी हुई होगी,उतनी ही असरकारक होगी।संक्षिप्तता के लिए यह अनिवार्य हो जाता है कि परीक्षार्थी दिए गए विषय से विषयांतर न करे।उदाहरणों का अम्बार न लगाए,वाक्यों को लम्बा न करके शब्दों में मितव्ययिता लायें।
(3.)विचारों की युक्तिसंगत प्रस्तुति (Rational presentation of ideas):
- विचारों की संक्षिप्तता के साथ ही उसका युक्तिसंगत होना भी अनिवार्य है।विचारों की युक्तिसंगतता परीक्षक पर अनुकूल प्रभाव डालती है।किसी भी विचार को युक्तिसंगत्त तरीके से प्रस्तुत करने पर उसको समझने में काफी आसानी होती है।विचार को प्रभावी (Making ideas effective) बनाने के लिए युक्तिसंगत होना अनिवार्य है।इसके अभाव में विचार “बिन पतवार के नाव” की तरह हो जाते हैं।
- विचारों का क्रम तर्कसंगत (Rational) होना चाहिए। हर अगला वाक्य पिछले वाक्य से जुड़ा हो और भाषा शैली में प्रभाव हो।
विचारों की प्रभावकारी ढंग से प्रस्तुति (Presentation of ideas effectively):इसके लिए बहुत-सी बातों की जरूरत होती हैं।निबंध का प्रारम्भ किसी उद्धरण से किया जा सकता है।बस,ध्यान इस बात का रखना चाहिए कि उद्धरण लिखे जाने वाले विषय से ही सम्बन्धित हो या जो विचार उम्मीदवार लिखना चाहता है,उससे मेल खाता हो।कुल मिलाकर यह कि वह उद्धरण “औचित्यपूर्ण” (Quote “Justified”) होना चाहिए।उदाहरण बीच में भी दिए जा सकते हैं तथा कई बार प्रभावकारी अन्त करने के लिए भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।लेकिन उदाहरणों की भरमार नहीं करनी चाहिए।
(4.)शब्द सीमा का ध्यान (Attention to Word Limit):
- हालांकि प्रतियोगिता परीक्षाओं में निबंध पत्र के निर्देश में शब्द सीमा का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया जाता है,जबकि कुछ में ऐसा प्रावधान है जैसे शैक्षिक परीक्षाओं में। इसलिए उम्मीदवार को स्वयं शब्दों की सीमा तय करनी होती है और यह काम काफी मुश्किल में डाल देता है।
- 3 घंटे की समय सीमा इतनी अधिक है कि इसमें काफी शब्द लिखे जा सकते हैं।लेकिन दूसरी तरफ निर्देश में विचारों को संक्षिप्तता का स्पष्ट उल्लेख रहता है जिससे उम्मीदवार को यह संकेत तो मिल ही जाता है कि शब्द सीमा बहुत अधिक न हो जाए।एक उत्कृष्ट निबंध 1200-1500 शब्दों में लिखा जा (Writing an excellent essay) सकता है।ज्यादा लम्बा निबंध पढ़ने वाले को भी बोर करता है तथा कई बार इसमें विषयांतर और दुहराव का खतरा भी अधिक बढ़ जाता है।
- दी गई शब्द सीमा के भीतर ही निबंध पूरा करें।न तो बहुत छोटा लिखें और न ही सीमा से बहुत बाहर जाएँ।
(5.)व्याकरणिक परिशुद्धता (Grammatical Precision):
- वैकल्पिक विषयों में भाषा साहित्य,जैसे हिन्दी,अंग्रेजी आदि को छोड़ दें तो अन्य किसी विषय में व्याकरणिक परिशुद्धता पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता,जितना कि निबंध प्रश्न-पत्र में दिया जाता है।इसलिए उम्मीदवार को इस बात की पर्याप्त सावधानी बरतनी चाहिए कि वह यथासंभव अपने द्वारा लिखे जा रहे निबंध की व्याकरणिक शुद्धता (Grammatical precision of the essay) का पूरा-पूरा ध्यान रखें।इसके लिए उसे जिस भाषा में निबन्ध लिखना हो,उस भाषा में व्याकरण की पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए।
- इसके अभाव में तर्कसंगत ढंग से तथ्यात्मक रूप में प्रस्तुत निबन्ध भी परीक्षक पर अपना पूरा प्रभाव नहीं डाल पाता।परीक्षक का ध्यान बार-बार आने वाली व्याकरणिक त्रुटियों की तरफ जरूर जाएगा,जिसके परिणामस्वरूप अंकों में कमी आनी निश्चित हो जाएगी,क्योंकि एक तो व्याकरणिक त्रुटियों के कारण निबन्ध की प्रभावशीलता (Effectiveness of the essay) कम होती ही है,दूसरी तरफ परीक्षक को इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण मिलते हैं कि उम्मीदवार को व्याकरणिक नियमों की सही जानकारी नहीं है।निबन्ध पत्र का उद्देश्य विचारों की जाँच के साथ ही भाषा की जाँच का भी रहता है,इसलिए उम्मीदवार को इन दोनों मानदंडों पर खरा उतरने का प्रयास करना चाहिए।
- सही वर्तनी (Spelling),विराम चिह्नों का उचित प्रयोग और सुगठित वाक्य रचना भाषा का सौंदर्य बढ़ाती है।
(6.)निबन्ध लिखने की शैली (Style of Writing Essay):
- प्रत्येक व्यक्ति का किसी भी बात को कहना या लिखने का अपना एक ढंग होता है।यह बात अपनी जगह सही है कि बचपन से ही धीरे धीरे बड़ा होने के क्रम में हम अपने परिवार,शैक्षणिक परिवेश,समाज तथा अपनी व्यक्तिगत रुचियों तथा प्रयास से काफी कुछ सीखते हैं। कई बार तो किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की नकल तक करने का प्रयास करते हैं, लेकिन इन सबके बावजूद लगभग प्रत्येक व्यक्ति का अपना एक अन्दाज विकसित होता चला जाता है।
- अगर वह हूबहू किसी की नकल करने या किसी चीज को पूरी तरह याद करने या रटने में माहिर न हो तो। इस तरह शैली कोई तत्काल प्रकट होने वाली या बनने वाली चीज नहीं है।इसके लिए निरन्तर प्रयास (Continuous effort) करने की जरूरत होती है।अपने विचारों को रोचक तथा प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने के लिए शैली एक महत्त्वपूर्ण अस्त्र है।अपनी शैली को प्रभावशाली बनाने के लिए (To make the style impressive) निरन्तर अपने परिवेश के माध्यमों पर सतर्क निगाह रखने की जरूरत है।विभिन्न सूचना माध्यमों,जैसे समाचार पत्र,पत्रिका,दूरदर्शन,केबल टी.वी.,रेडियो तथा इन्टरनेट आदि से हम निरन्तर अलग-अलग अन्दाज से सूचनाओं को प्राप्त करते हैं।
- इससे जाने अनजाने हमारी शब्द-शक्ति (Word Power) तथा विभिन्न विचारों को प्रस्तुत करने की विभिन्न शैलियों की जानकारी होती है तथा हम निरन्तर कुछ-न-कुछ सीखते चले जाते हैं।हाँ,यह सम्भव है कि हम अगर सजग तथा सतर्क प्रयास करें तो इसका ज्यादा लाभ उठा सकते हैं।
(7.)विचारों की निरंतरता (Continuity of ideas): - निबंध का यह अति आवश्यक पहलू है।इसके अभाव में निबन्ध का प्रभाव काफी कम हो जाता है तथा परीक्षक को उम्मीदवार द्वारा व्यक्त विचारों को समझने में कठिनाई होती है जिसके फलस्वरूप कम अंक आते हैं। विचारों की निरन्तरता का अभिप्राय है कि विचार कड़ी-दर-कड़ी जुड़े होने चाहिए,उनमें किसी तरह का अवरोध नहीं आना चाहिए या कहीं से भी यह नहीं लगना चाहिए कि प्रवाह टूट-सा (The flow broke) गया है।विचारों की निरन्तरता से पढ़ने वाले की रुचि बनी रहती है।उसका ध्यान भटकता नहीं है तथा निरंतरता के कारण विचारों का सही ढंग से स्पष्टीकरण होता चला जाता है।
- इनके अतिरिक्त परीक्षा के पूर्व उम्मीदवार को उन विषयों के बारे में अपना अनुमान (गेस) लगाना चाहिए जो कि परीक्षा में पूछे जा सकते हैं।इसके लिए सबसे पहले तो परीक्षार्थी को अपने समूचे परिवेश के प्रति सजग होना होगा।अपने देश,समाज,शहर तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में जो घटनाएँ घट रही हैं,उनके बारे में विभिन्न संचार माध्यमों से जो जानकारियाँ प्रसारित तथा प्रकाशित हो रही हैं,उन पर सतर्क दृष्टि रखने (Keeping a watchful eye) की जरूरत है।
- इन घटनाओं में से उन पर विशेष दृष्टि डालने तथा समझने की जरूरत है जो इस परीक्षा में सुविधा के लिए परीक्षा के विगत तीन वर्षों में पूछे गए विषयों को देख सकते हैं।
- प्रस्तावना (Introduction),मुख्य भाग (Body) और निष्कर्ष (Conclusion) के बीच एक सहज प्रवाह होना चाहिए।इनके बारे में हमने परीक्षाओं में निबन्ध की तैयारी करने के लिए “5 Techniques of Writing Essay in Exam” लेख लिखा है।इसके बारे में जानकारी हेतु इसे पढ़ें।
3.निबन्धन लेखन के महत्त्वपूर्ण बिन्दु (Important Points of Essay Writing):
- (i)विषय की समझ (Umderstanding of the Subject):लिखना शुरू करने से पहले विषय को दो-तीन बार ध्यान से पढ़े और उसकी मूल मांग को समझें।
(ii)विचारों में स्पष्टता (Clarity of Ideas):आपके विचार उलझे हुए न हों।पाठक या परीक्षक को आपकी बात समझने में कोई भ्रम नहीं होना चाहिए।
(iii)प्रभावी और सहज भाषा (Dominant Language): बहुत कठिन या जटिल शब्दों के बजाय सटीक,शिष्ट और प्रवाहपूर्ण भाषा का चयन करें।
(iv)तर्क और ठोस उदाहरण (Arguments and Examples):अपनी बातों की पुष्टि के लिए प्रासंगिक तर्क,केस स्टडीज,आंकड़े या महापुरुषों के उद्धरण (Quotes) दें।
(v)संतुलित निष्कर्ष (Balanced Conclusions): निबंध का अंत हमेशा सकारात्मक,दूरदर्शी और संतुलित विचारों के साथ करें।
(vi)पुनरीक्षण और सुधार (Revision and Correction):अंत में 3–5 मिनट निबंध को दोबारा पढ़ने के लिए ज़रूर निकालें ताकि वर्तनी या वाक्य संरचना की छोटी-मोटी गलतियों को सुधारा जा सके।
4.निबन्ध लेखन का निष्कर्ष (Conclusion of essay writing):
- सावधानी हटी दुर्घटना घटी (Caution Removed Accident):प्रश्न-पत्र का स्वभाव ऐसा है कि यह आपको जहाँ परीक्षा में अच्छा स्थान दिला सकता है,वहीं दूसरी तरफ सारी मेहनत पर पानी भी फेर सकता है।इस पत्र में में अधिक अंक लाये जा सकते हैं तथा मार्के की बात यह है कि अगर एक बार आपने अच्छे अंक लाये तथा दूसरी बार थोड़ा असावधान या कहें ओवर कांफिडेंट रहे तो हो सकता है कि यह पत्र कम अंक देकर आपको कहीं का न छोड़े।इसलिए निरन्तर सजग? (Staying Constantly Vigilant) रहने की जरूरत है।यह सही है कि इस पत्र में अपने विचार तर्कबद्ध और सिलसिलेवार ढंग से पेश करने चाहिए,लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि यह प्रतियोगिता परीक्षा है,इसलिए आप पर अप्रत्यक्ष रूप से कुछ बंदिशें रहती हैं,जिन्हें नजरअंदाज करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।विशेषकर राजनीतिक विषयों से सम्बन्धित निबन्ध लिखते समय विशेष एहतियात बरतने की जरूरत होती है।संस्कृत की कहावत है कि “अति सर्वत्र वर्जयेत”।इसे ध्यान में रखते हुए लिखने के क्रम में सरकार की नीतियों,कार्यक्रमों तथा जो भी राजनीतिक व्यवस्था प्रचलन में है,उसकी एकदम एकतरफा तौर पर आलोचना करने की छूट,इसमें समाचार पत्रों में लिखे जाने वाले लेख की तरह नहीं होनी चाहिए।इसलिए संतुलित निबंध में ‘समालोचना’ करनी चाहिए।
- निबन्ध पत्र में बर्तनी संबंधी भूलें (Spelling mistakes in essays) जितनी कम होंगी,परीक्षक को निबन्ध उतना ही प्रभावित करेगा।इसलिए निरन्तर यह प्रयास करना चाहिए कि वर्तनी सम्बन्धी भूलों को दूर किया जाए।इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए कि महत्त्वपूर्ण तथ्यों,विचारों को पहले प्रस्तुत किया जाए तथा उन पर ही विशेष ध्यान केंद्रित रखा जाए।कम महत्त्वपूर्ण तथ्यों को कम शब्दों में लिखने का प्रयत्न करना चाहिए।
- इस पत्र में ऐसे भी विषय दिए जाते हैं,जिनमें कल्पना की उड़ान को पर्याप्त अवसर दिए जाते हैं।इस तरह के विषयों में स्वअनुशासन की विशेष जरूरत होती है,क्योंकि ऐसे विषयों में विषयांतर तथा अनावश्यक लेखन की सम्भावना सबसे अधिक बढ़ जाती है।
- प्रारम्भ अच्छा रहने पर परीक्षक को निबन्ध पढ़ने में अच्छा लगता है।उसका मध्य भाग अगर युक्तिसंगत प्रभावशाली,सिलसिलेवार ढंग से प्रस्तुत करने में सफल रहता है तो सबसे अन्तिम जिम्मेवारी को पूरा करने के लिए निबन्ध का अन्त भी प्रभावशाली ढंग से करना चाहिए।यह भाग अच्छे अंक दिलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।इस अन्तिम भाग में निबन्ध के विषय से जुड़ा कोई उदाहरण सूझ जाए तो उसे रखना अच्छा रहता है।
निबन्ध का अन्त करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह यकायक समाप्त होता न लगे।उसे स्वाभाविक समाप्ति लगना चाहिए।इस पैराग्राफ में निबंध का निष्कर्ष तथा अपने विचारों का निचोड़ रखा जाता है।अगर अन्त प्रभावशाली बन जाता है तो कहा जा सकता है कि “अन्त भला तो सब भला” तथा अच्छे अंकों की उम्मीद रखी जा सकती
5.निबन्ध लेखन की 7 तकनीक का सारांश (Summary of 7 Techniques of Essay Writing):
- (A)छात्र-छात्राओं के मन को झकझोरने वाले निबन्ध लिखने की तकनीक से सम्बन्धित प्रश्न (Questions related to the technique of writing essays that will make students feel more engaging):
(1.) निबन्ध लिखने या लिखवाने का क्या उद्देश्य है? (What is the purpose of writing or writing an essay?)
(2.) क्या आप निबन्ध लिखने के पक्ष में कुछ तर्क दे सकते हो? (Can you give some arguments in favor of writing an essay?)
(3.) निबन्ध लिखने से हमारे व्यक्तित्व के कौनसे पक्ष का विकास होता है? (Which aspect of our personality is developed by writing an essay?)
(4.)हम निबन्ध लिखने की तकनीक के बारे में आपकी क्या मदद कर सकते है? (How can we help you with essay writing techniques?)
(5.)किस तरह के निबन्ध आपको रोचक लगते हैं?सामयिक विषय,राजनीतिक,धार्मिक या अन्य? (What kind of essays do you find interesting? Current topics,political,religious or other?)
(6.)आपके विचार से निबन्ध लिखने के लिए किस प्रकार से तैयारी करनी चाहिए? (How do you think you should prepare for writing an essay?)
(7.)क्या निबन्ध लिखने के लिए विशेष प्रतिभा की जरूरत होती है? (Does special talent is needed to write an essay?
(8.)आज के दौर में निबन्ध लिखने की कितनी महत्ता है? (How important is it to write an essay in today’s world?
(9)परीक्षा में निबन्ध लिखवाने के लिए किस तरह का बदलाव करना चाहिए? (What kind of changes should be made to write an essay in the exam?)
- (B.)निबन्ध लेखन की 7 तकनीक की महत्त्वपूर्ण बातें (Important HIGHLIGHTS for 7 Techniques of Essay Writing):
(1.) उम्मीदवार की विषयवस्तु पर पकड़ (Candidate’s grasp on the subject matter)
(2.) रचनात्मक तरीके से सोचने की योग्यता (Ability to think creatively)
(3.)संक्षिप्त में विचारों को लिखने की कला (The Art of Writing Ideas in a Nutshell)
(4.)विचारों की युक्तिसंगत प्रस्तुति (Rational presentation of ideas)
(5.)विचारों को प्रभावकारी ढंग से प्रस्तुति (Presentation of ideas effectively)
(6.)शब्द सीमा का ध्यान (Attention to Word Limit)
(7.) व्याकरणिक परिशुद्धता (Grammatical Precision)
(8.)विचारों की निरन्तरता (Continuity of ideas)
(9.)निबन्ध लेखन की महत्त्वपूर्ण बिन्दु (Important points of essay writing)
(i) विषय की समझ (Understanding of the subject)
(ii) विचारों की स्पष्टता (Clarity of ideas)
(iii) प्रभावी भाषा (Dominant language)
(iii) तर्क और उदाहरण (Arguments and Examples)
(iv)संतुलित निष्कर्ष (Balanced Conclusions)
(v)पुनरीक्षण और सुधार (Revision and Correction)
उपर्युक्त आर्टिकल में सफलता की सीढ़ी का महत्त्वपूर्ण पायदान: निबन्ध लेखन की 7 तकनीक (The Important Rung of Ladder to Success : 7 Techniques of Essay Writing) के बारे में विस्तार व गहराई समझाया गया है।
7.छात्र-छात्राओं को नसीहत,टीचर मियां फजीहत (हास्य-व्यंग्य) (Teacher does not practice what he preaches) (Humour-Satire):
- टीचर (छात्रों से):सुलेख कैसे लिखे,इस पर निबन्ध लिखों,250 शब्दों में।
- छात्र-छात्राएँ:मन मुताबिक लेख लिखने के लिए देने पर बहुत खुश हुए।निबन्ध लिख चुकने के बाद।
- टीचर उत्तर-पुस्तिका जांच करते हैं।
- टीचर (सुन्दरदास से):अरे उत्तर पुस्तिका में क्या लिखा है?घसीटकर क्या लिखा है? उस पर नोट डालते हैं लेख सुन्दर लिखें।
- सुन्दरदास (टीचर से) : सर,आपने क्या नोट लिखा है?
- टीचर:यह भी समझ में नहीं आता क्या? यही लिखा है कि लेख स्पष्ट (सुन्दर) लिखो।
- सुन्दरदासःसर,आपने भी तो नोट घसीट कर लिखा है।
- टीचरःपरीक्षा मेरी थोड़े ही है।परीक्षा में फेल होंगे तो तुम,पास होंगे तो तुम।
- सुन्दरदास (व्यंग्यपूर्वक):सर परीक्षा छात्र अवश्य देता है।पर रिजल्ट टीचर और छात्र दोनों का होता है।छात्र पास तो टीचर पास और छात्र फेल तो टीचर फेल।
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8.सफलता की सीढ़ी का महत्त्वपूर्ण पायदान: निबन्ध लेखन की 7 तकनीक (Frequently Asked Questions Related to The Important Rung of Ladder to Success : 7 Techniques of Essay Writing) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.निबन्ध लेखन की महत्ता क्या है? (What is the importance of essay writing?):
उत्तर:आजकल निबन्ध बोर्ड,काॅलेज और प्रतियोगिता परीक्षाओं में किसी न किसी विषय पर लिखने को कहा जाता है।इसी से इसकी महत्ता जाहिर हो जाती है।
प्रश्न:2.श्रेष्ठ निबन्ध के लिए क्या जरूरी है? (What is needed for the best essay?):
उत्तर:यों तो निबंध लिखना काफी आसान समझा जाता है,लेकिन यह उतना आसान है नहीं।दो-चार विषयों पर नोट बुक में निबंध लिखना और उसे रट कर परीक्षा में उतार देना श्रेष्ठ निबंध लेखन नहीं कहा जा सकता।सर्वोत्तम निबंध लिखने के लिए लेखन अभ्यास जागरुकता,सरल व सुबोध शैली तथा अच्छी भाषा की जरूरत होती है।
प्रश्न:3.उपर्युक्त विशेषताएँ कैसे हासिल करें? (How to earn the above-mentioned attributes?):
उत्तर:ये सभी विशेषतायें आसानी से अभ्यास द्वारा अर्जित की जा सकती हैं।उत्कृष्ट निबंध लिखकर आप न केवल इस प्रश्न-पत्र में अधिकाधिक अंक ही हासिल कर सकते हैं,बल्कि परीक्षा में अपनी सफलता भी सुनिश्चित करा सकते हैं।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा सफलता की सीढ़ी का महत्त्वपूर्ण पायदान: निबन्ध लेखन की 7 तकनीक (The Important Rung of Ladder to Success : 7 Techniques of Essay Writing) की प्राइमरी टर्म्स के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- *”यह आर्टिकल **Satyam Mathematics** ब्लॉग पर **Satyam Coaching Centre** के द्वारा तैयार किया गया है।”*












