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Hooke’s law for elastic string

1.प्रत्यास्थ डोरियों के लिए हुक्स का नियम का परिचय (Introduction to Hooke’s law for elastic string)-

प्रत्यास्थ डोरियों के लिए हुक्स नियम (Hooke’s law for elastic string) को जानने व समझने के लिए प्रत्यास्था व हुक्स के बारे में जानना आवश्यक है। साधारण भाषा में किसी वस्तु पर बाह्य बल लगाने पर कोई वस्तु फैलती या सिकुड़ती है तो इस गुण को प्रत्यास्था कहा जाता है।नीचे प्रत्यास्थ डोरियों  के लिए हुक्स नियम (Hooke’s law for elastic string) के बारे मे विस्तार से बताया गया है |
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2.प्रत्यास्था (Elasticity)-

(1.)बाह्य बलों द्वारा विकृत किए गए किसी पिण्ड से विकृति उत्पन्न करने बलों को हटाये जाने पर पिंड का अपने मूल रूप में लौट आने का गुणधर्म।
(2.)प्रत्यास्थ पिण्डों के अध्ययन से सम्बन्धित गणितीय सिद्धान्त। 
(3.) विकृति उत्पन्न करने वाली शक्तियों को हटा देने पर उनके आकार और आकार को पुनः प्राप्त करने वाले पदार्थों के पास गुणधर्म।
(The property possessed by substances of recovering their size and shape when the forces producing deformations are removed.)
(4.) प्रत्यास्थ निकायों के व्यवहार के अध्ययन से संबंधित गणितीय सिद्धांत। यह निर्धारित बलों या विकृतियों की कार्रवाई के अधीन प्रत्यास्थ पदार्थों में तनाव और उपभेदों की गणना से संबंधित है। प्रत्यास्था का सिद्धांत प्रत्यास्थ के निर्धारण की समस्या है वस्तु के आंतरिक भाग में तनाव और विकृति की अवस्था जब इसकी सतह को ज्ञात तरीके से विकृत किया जाता है। प्रत्यस्था की दूसरी मूलभूत समस्या वस्तु की आंतरिक स्थिति में तनाव और विरूपण की स्थिति के निर्धारण की समस्या है जब इसकी सतह बाहरी बलों के एक निर्दिष्ट वितरण के अधीन है।
(The mathematical theory concerned with the study of the bahavior of elastic bodies.It deals with the calculation of stresses and strains in elastic substances subjected to action of prescribed forces or deformations.The theory of elasticity is the problem of the determination of the state of stress and deformation in the interior of a body when its surface is deformed in a known way.The second fundamental problem of elasticity is the problem of the determination of the state of stress and deformation in the interior of a body when its surface is subjected to a specified distribution of external forces.)

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3.हुक्स का नियम (Hooke’s law)-

रॉबर्ट हुक द्वारा 1678 में प्रकाशित तनाव और तनाव की आनुपातिकता का मूल नियम। इसका सरल रूप यह बताता है कि सामग्री की प्रत्यास्था सीमा के भीतर तन्यता बल द्वारा उत्पन्न बढ़ाव तन्यता बल के समानुपाती है। यदि बढ़ाव e द्वारा निरूपित किया गया है और T से तन्यता का तनाव, फिर T = Ee, जहां E एक स्थिर सामग्री के गुणों पर निर्भर है। स्थिर E को तनाव का मापांक कहा जाता है। यह नियम प्रायोगिक रूप से कई पदार्थों के लिए मान्य पाया जाता है जब बलों और उनके द्वारा निर्मित विकृतियाँ बहुत बड़ी नहीं हैं।
(The basic law of proportionality of stress and strain published by Robert Hooke in 1678 .its simple form it states that within elastic limits of materials the elongation produced by the tensile force is proportional to the tensile force.If the elongation is denoted by e and the tensile stress by T ,then T= Ee,where E is a constant depanding on the properties of the material.The constant E is called the modulus of tension.This law is found experimentally to be valid for many substances when the forces and the deformations produced by them are not too great.)

4.प्रत्यास्थ डोरियों के लिए हुक्स नियम ( Hooke’s law for elastic string)-

इस प्रकार किसी प्रत्यास्थ डोरी के एक सिरे को स्थिर रखकर तथा दूसरे सिरे को खींचकर उसकी स्वाभाविक लम्बाई से बढ़ाया जाए तो डोरी का तनाव एक क्रियात्मक नियम द्वारा ज्ञात किया जाता है।
अतः प्रत्यास्थ डोरियों के लिए हुक्स नियम ( Hooke’s law for elastic string) इस प्रकार है-
” किसी विस्तरित प्रत्यास्थ डोरी का तनाव उसकी लम्बाई में प्रति इकाई विस्तार के समानुपाती होता है।”
यदि डोरी की स्वाभाविक लम्बाई l है तथा इसकी लम्बाई में विस्तार x है तो-

T=\lambda \frac { x }{ l }
यहां \lambda अचर है तथा इसे प्रत्यास्थ मापांक (modulus of elasticity) कहते हैं।

5.क्षैतिज प्रत्यास्थ डोरी (Horizontal elastic string)-

एक प्रत्यास्थ डोरी का एक सिरा एक चिकनी समतल मेज के एक बिन्दु से बंधा है और दूसरे सिरे से एक m संहति का कण बंधा है।कण को कुछ दूरी तक खींचा गया और छोड़ दिया जाता है।कण की गति का विवेचन करना:
(One end of an elastic string is fixed at a point on a smooth horizontal table and to the other end a particle of mass m is attached.The particle is pulled up to a small distance and then released.To discuss its motion:)
माना कि OA एक प्रत्यास्थ डोरी है जिसकी स्वाभाविक लम्बाई l (=OA) है तथा इसका एक छोर O स्थिर है।एक m संहति का कण A पर बंधा है।कण को मान लो B (जहां AB=b) तक खींचकर छोड़ दिया जाता है।यह भी माना कि t समय पर कण की स्थिति P है, जहां AP=x तथा इस समय डोरी में तनाव T हो तो हुक्स नियम(Hooke’s law for elastic string) के अनुसार

T=\lambda \frac { x }{ l }
अब कण की गति का समीकरण होगा-

m\frac { { d }^{ 2 }x }{ { dt }^{ 2 } } =-T=-\lambda \frac { x }{ l } \\ \Rightarrow \frac { { d }^{ 2 }x }{ { dt }^{ 2 } } =-\lambda \frac { x }{ ml } =-\mu x.............(1)

जहां माना कि\mu =\frac { \lambda }{ ml } है।
परन्तु यह समीकरण तो सरल आवर्त गति का है। अतः कण की गति A के सापेक्ष सरल आवर्त गति होगी जिसका आवर्तकाल ( T मान लो)
T=\frac { 2\pi }{ \sqrt { \mu } } =2\pi \quad \sqrt { \frac { ml }{ \lambda } } होगा।
समीकरण (1) के दोनों पक्षों को2\frac { dx }{ dt } से गुणा कर समाकलन करने पर
{ \left( \frac { dx }{ dt } \right) }^{ 2 }=-\frac { \lambda }{ lm } { x }^{ 2 }+c जहां c अचर है।
प्रारम्भ में कण को B तक खींचकर छोड़ा जाता है।अतः
t=0 ,x=b, \frac { dx }{ dt } =0 तब c=\frac { \lambda }{ ml } { b }^{ 2 }\\ v^{ 2 }={ \left( \frac { dx }{ dt } \right) }^{ 2 }=\frac { \lambda }{ lm } \left( { b }^{ 2 }-{ x }^{ 2 } \right)
अब कण जब A पर पहुंचेगा तब x=0 और A पर कण का वेग निम्न समीकरण से प्राप्त होगा।

v^{ 2 }=\frac { \lambda }{ ml } { b }^{ 2 } या v=b\sqrt { \frac { \lambda }{ lm } }
चूंकि A पर डोरी अपनी स्वाभाविक लम्बाई पर है, इसलिए A पर डोरी का तनाव=0, जिससे कण का त्वरण

{ \left( \frac { dx }{ dt } \right) }^{ 2 }=0
वेग v से कण A से O की तरफ गमन करेगा तथा A’ तक एक समान वेग \sqrt { \frac { \lambda }{ lm }}b से गमन करेगा।जैसे ही यह A’ से आगे बढ़ेगा वैसे ही डोरी में विस्तार होने के कारण इसमें तनाव उत्पन्न होगा।इसी कारण  A’ की बांई ओर कण की गति पुनः आवर्त गति हो जाती है।यह तब तक गमन करता रहेगा जब तक इसका वेग शून्य न हो जाए।
माना किB’ पर वेग शून्य है OB’=b अर्थात् x=-b। पुनः B’ पर वेग तो शून्य होगा परन्तु डोरी के तनाव के कारण कण में त्वरण होगा जिसकी दिशा A’ की ओर होगी।
अतः कण की गति निम्न छः प्रकार से होगी:-
(1.)B से A तक सरल आवर्त गति (S.H.M)
(2.) A से O तथा O से A’ तक एक समान वेग वाली
(3.) A’से B’ तक सरल आवर्त गति (S.H.M.)
(4.) B’ से A’ तक सरल आवर्त गति (S.H.M.)
(5.) A’से O तथा O से A’ तक एक समान वेग वाली
(6.) A से B तक पुनः सरल आवर्त गति (S.H.M)
अतः B से B’ तथा B’ से B तक का सम्पूर्ण दोलनकाल=
सरल आवर्त गति का पूर्ण आवर्तकाल+समान वेग से 4l दूरी का समय=

=2\pi \quad \sqrt { \frac { ml }{ \lambda } } +\frac { 4l }{ b\sqrt { \frac { \lambda }{ lm } } } \\ =2 \left( \pi +\frac { 2l }{ b } \right) \sqrt { \frac { ml }{ \lambda } }
यदि b=l तो दोलनकाल==2\left( \pi +2 \right) \sqrt { \frac { ml }{ \lambda } }

प्रत्यास्थ डोरियों  के लिए हुक्स नियम (Hooke’s law for elastic string) के निम्न उदाहरण है –
Question-1. m संहति का एक कण a तथा b स्वाभाविक लम्बाई वाली प्रत्यास्थ डोरियों से किसी चिकने समतल के क्रमशः दो स्थिर बिन्दुओं A तथा B से बांध दिया जाता है। बिन्दु A तथा B परस्पर a+b दूरी पर है।कण को B पर पकड़ कर छोड़ा जाता है।सिद्ध करो कि कण \frac { b\left( \sqrt { a } +\sqrt { b } \right) }{ \sqrt { a } } दूरी में होकर \pi\left( \sqrt { a } +\sqrt { b } \right) \sqrt { \frac { m }{ \lambda } } समक्ष में दोलन करेगा जहां प्रत्यास्थ मापांक है तथा a>b है।
(A particle of mass m resting on a smooth horizontal plane is attached to two fixed points A and B on the plane by elastic string of unstreched lengths a and b respectively (a>b) ;the points A and B being (a+b) apart.The particle is held at B and then released.Prove that the particle will osillate to and fro through a distance \frac { b\left( \sqrt { a } +\sqrt { b } \right) }{ \sqrt { a } } ,in periodic time \pi\left( \sqrt { a } +\sqrt { b } \right) \sqrt { \frac { m }{ \lambda } } where is the modulus of elasticity of each string.)
Solution-
जब कण को B पर पकड़कर छोड़ा जाता है तो डोरी का विस्तार AO तब OB ढीली पड़ जाती है।
माना B पर छोड़ने के बाद कण की स्थिति P (OP=x) है।

m\frac { { d }^{ 2 }x }{ { dt }^{ 2 } } =-T=-\lambda \frac { x }{ l } \\ \Rightarrow \frac { { d }^{ 2 }x }{ { dt }^{ 2 } } =-\lambda \frac { x }{ am } =-\mu x...........(1)
गति सरल आवर्त गति है और B से O तक समय=

\frac { \pi }{ 2\sqrt { \mu } } =\frac { \pi }{ 2 } \sqrt { \frac { am }{ \lambda } } ......(2)
(1)को पुनः निम्न प्रकार लिखने पर

v\frac { dv }{ dx } =-\frac { \lambda }{ am } x
समाकलन करने पर

v^{ 2 }=-\frac { \lambda }{ am } { x }^{ 2 }+A
जब x=b ,v=0 तोA=\frac { \lambda }{ am } { b }^{ 2 }\\ v^{ 2 }=\frac { \lambda }{ am } \left( { b }^{ 2 }-{ x }^{ 2 } \right)
केन्द्र O पर गति के लिए x=0

\\ v^{ 2 }=\frac { \lambda }{ am } { b }^{ 2 }
जब कण O के दूसरी तरफ जाता है तब डोरी OA ढ़ीली पड़ जाती है और BO तनी हुई हो जाती है।यदि कण O से x दूरी पर हो तो गति का समीकरण

m\frac { { d }^{ 2 }x }{ { dt }^{ 2 } } =-T=-\frac { \lambda }{ b } x\\ \frac { { d }^{ 2 }x }{ { dt }^{ 2 } } =-\frac { \lambda }{ bm } x=-\mu x........(4)

O से अन्तिम स्थिति C तक का समय

T=\frac { 1 }{ 4 } \frac { 2\pi }{ \sqrt { \mu } } =\frac { \pi }{ 2\sqrt { \mu } } \\ T=\frac { \pi }{ 2 } \sqrt { \frac { bm }{ \lambda } } ..............(5)
B से C तक तथा वापिस C से B तक का कुल समय=

2\left[ \frac { \pi }{ 2 } \sqrt { \frac { bm }{ \lambda } } +\frac { \pi }{ 2 } \sqrt { \frac { bm }{ \lambda } } \right]
[समीकरण (2) तथा (5) से]

=\pi\left( \sqrt { a } +\sqrt { b } \right) \sqrt { \frac { m }{ \lambda } }
पुनः समीकरण (4) का समाकलन करने पर

v^{ 2 }=-\frac { \lambda }{ bm } { x }^{ 2 }+B
जब x=0 तब v^{ 2 }=-\frac { \lambda }{ am } { b }^{ 2 }             (समी. 3 से )

B=\frac { \lambda { b }^{ 2 } }{ am } \\ v^{ 2 }=-\frac { \lambda }{ bm } x^{ 2 }+\frac { \lambda { b }^{ 2 } }{ am } \\ v^{ 2 }=\frac { \lambda }{ bm } \left( \frac { { b }^{ 3 } }{ a } -x^{ 2 } \right)

C पर v=0
जहां oc=x=\frac { b\sqrt { b } }{ \sqrt { a } } \\ BC=B0+OC=b+\frac { b\sqrt { b } }{ \sqrt { a } } \\ BC=\frac { b\left( \sqrt { a } +\sqrt { b } \right) }{ \sqrt { a } }
Question-2.m संहति का एक कण किसी भारहीन तार के लगा हुआ है जो दो स्थिर बिन्दुओं के बीच T तनाव द्वारा खींचा हुआ है।यदि तार के सिरों से कण की दूरियां a तथा b हो तो सिद्ध कीजिए कि m के एक छोटे अनुप्रस्थ दोलनकाल 2\pi \sqrt { \frac { mab }{ \left( a+b \right) T } } है।
(A particle of mass m is attached to a light wire which is streched tightly between two fixed points with a tension T.If a and b are the s distances of the particle from the two ends prove that the period of small transverse oscillation of m is 2\pi \sqrt { \frac { mab }{ \left( a+b \right) T } } )
Solution-
माना कि कण O से बंधा हुआ है तथा डोरी में O से लम्बवत दिशा में एक छोटा दोलन y है एवं t समय बाद यह P पर है-

PB=\sqrt { \left( { b }^{ 2 }+{ y }^{ 2 } \right) } \\ PB=b\sqrt { \left( 1+\frac { { y }^{ 2 } }{ { b }^{ 2 } } \right) } \\ PB=b(लगभग )
(y की उच्चतम घातों को नगण्य मानने पर)
इसलिए PB के अनुदिश तनाव समान रहता है जो T है।इसी प्रकार BA के अनुदिश तनाव T है।
अब तनाव T का BP के अनुदिश घटक BO दिशा में होगा=T\quad cos\theta

=T\quad \frac { y }{ \sqrt { \left( { b }^{ 2 }+{ y }^{ 2 } \right) } } \\ =\frac { T }{ b } \quad \frac { y }{ \sqrt { \left( 1+\frac { { y }^{ 2 } }{ { b }^{ 2 } } \right) } } \\ =\frac { Ty }{ b }
इसी प्रकार दूसरा घटक PO होगा==\frac { Ty }{ a }
गति का समीकरण-

p=mf=m\frac { { d }^{ 2 }y }{ { dt }^{ 2 } }   (बढ़ रहे y कि दिशा में )

m\frac { { d }^{ 2 }y }{ { dt }^{ 2 } } =-\left( \frac { Ty }{ a } +\frac { Ty }{ b } \right) \\ \frac { { d }^{ 2 }y }{ { dt }^{ 2 } } =-\frac { Ty }{ m } \left( \frac { a+b }{ ab } \right) =-\mu y

जहाँ \mu =\frac { T }{ m } \left( \frac { a+b }{ ab } \right)
उपर्युक्त समीकरण सरल आवर्त गति को प्रर्दशित करता है जिसका आवर्तकाल

t=\frac { 2\pi }{ \sqrt { \mu } } \\ =2\pi \sqrt { \left\{ \frac { mab }{ T\left( a+b \right) } \right\} }
इस प्रकार उपर्युक्त दोनों सवालों के माध्यम से प्रत्यास्थ डोरियों के लिए हुक्स नियम ( Hooke’s law for elastic string) को समझा जा सकता है।

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