How to Know Truth World of Glamour?
1.ग्लैमर की दुनिया का सच कैसे जानें? (How to Know Truth World of Glamour?),ग्लैमर की दुनिया का असली सच कैसे जानें? (How to Know Real Truth World of Glamour?):
- ग्लैमर की दुनिया का सच कैसे जानें? (How to Know Truth World of Glamour?) अर्थात ग्लैमर का अर्थ क्या है? आज हर क्षेत्र में अलग हटकर ग्लैमरस क्यों दिखना चाहते हैं? वास्तविक ग्लैमर क्या होना चाहिए? क्या हम वास्तविक ग्लैमर को अपना रहे हैं आदि के बारे में जानेंगे।
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2.ग्लैमर का प्रचलन कैसे हुआ? (How did glamour become prevalent?):
- ग्लैमर आज जीवन का अभिन्न अंग बनता जा रहा है।यह समाज और बाजार का मुख्य केंद्र बिंदु बन चुका है।इसके दायरे बढ़ने के साथ-साथ इसकी परिभाषा भी व्यापक हो गई है।ग्लैमर का मूल अर्थ है:किसी पर जादू करना,परंतु आधुनिक संदर्भ में इसे सम्मोहन,करिश्मा,आकर्षण आदि के रूप में लिया जाता है।इस शब्द का पहली बार प्रयोग 1720 में हुआ था। किस्ट्रोफर प्रिस्ट के 1984 के फैंटेसी उपन्यास:’दि ग्लैमर’ में इसका प्रचलन हुआ था।इसमें नायक द्वारा स्वाभाविक रूप से स्वयं को अदृश्य करने की कला को ग्लैमर कहा गया।अपनी किताब ‘इट’ में स्टीफन किंग ने ग्लैमर को एक ऐसे जीव के रूप में प्रतिपादित किया,जो या तो अपने शरीर को रूपांतरित करने की क्षमता रखता है या जिसे अलग-अलग लोग,भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण से देखते हैं।
- ग्लैमर ने आज बाजार का रूप ले लिया।इसकी उत्पत्ति स्कॉटलैंड से हुई,जहां इसका अभिप्राय जीवनशैली था। वर्ष 1720 के आस-पास प्रसिद्ध कवि रॉबर्ट बर्न्स ने सर्वप्रथम इस शब्द का प्रयोग किया,जिसका प्रचलन आज संसार में गंभीर रूप से होने लगा है।वहां भी इस शब्द का अर्थ फैशन से संबंध रखना था।यह शब्द लोकप्रिय हुआ 18वीं शताब्दी में।उन दिनों ब्रिटेन का एक उच्च वर्ग अपने आप को ग्लैमर से जुड़कर कहलवाना पसंद करता था।इसके पश्चात हॉलीवुड ने इसे अपना लिया और यह सिनेमा के सितारों के संसार का बेहद पसंदीदा संबोधन बन गया।हॉलीवुड से उसकी यात्रा काफी अंतराल बाद बॉलीवुड अर्थात् भारतीय सिनेमा जगत में हुई तथा वहां के बाजार से होते हुए आज यह मध्यम वर्ग के लोगों तक पहुंच चुका है।
- अपने संस्कृति प्रधान देश में ग्लैमर पहले न कभी इतना प्रचलित हुआ था और न बिकाऊ था।पहले भी ग्लैमर था,परंतु एक वर्ग में सिमटा हुआ।शेष के लिए यह एक कल्पना की चीज थी,जिसे देखा तो जा सकता है,परंतु छुआ,अपनाया नहीं जा सकता था।मध्यम वर्ग के लिए तो यह आसमान की वस्तु थी,पहुंच से बहुत दूर।यह घटना कोई ज्यादा दिन की नहीं है।छोटे-छोटे शहरों में ग्लैमर नहीं था और न वहां यह अपने पैर ही पसारे था। महानगरों के विशिष्ट वर्गों में फैला था।मध्यम वर्ग के लोग इसे अपनाने में कतराते भी थे,क्योंकि इसे अच्छी बात नहीं माना जाता था।समाज में इसका सम्मान भी नहीं था।कोई फिल्मी कलाकार ही सालोसाल अपनी ग्लैमर छवि को बनाए रख सकता था।आज यह दैनिक आकर्षण संपन्नता और प्रतिष्ठा का अंग बन गया है,जबकि दो दशक पहले तक ग्लैमरस दीखना बहुत शालीन नहीं माना जाता था।बीती सदी के सत्तर और अस्सी के दशक में कैबरे डांस करने वाली सहअभिनेत्रियां ही इस श्रेणी में अपनाती थीं,जबकि मुख्य भूमिका की अभिनेत्रियां इस संबोधन से परहेज करती थीं।तब खेल,संगीत और मीडिया में ग्लैमर की घुसपैठ नहीं के बराबर थी।
3.आज ग्लैमरस दिखना हरेक को पसंद (Everyone likes to look glamorous today):
- आज परिस्थितियाँ तेजी से बदली हैं।बाजार में टिकने के लिए वर्तमान समय में ग्लैमर की जरूरत मानी जाती है।कहने-सुनने में अजीब और अटपटी-सी लगने वाली यह बात कि आज इमेज बदलते हुए परिधान एवं श्रृंगार के समान हो गई है।श्रृंगार विशेषज्ञों के अनुसार आभूषण,वस्त्रालंकार आदि अपने लिए कम और औरों के लिए अधिक धारण किए जाते हैं।भोजन भी अपनी पसंद से करने का प्रचलन टूटा है।आज यह भी ग्लैमर के अंतर्गत आ चुका है और हमारा खान-पान कैसा होना चाहिए यह एक चिकित्सक नहीं,वरन् एक बाजार का ग्लैमर छवि वाला व्यक्ति निर्धारण करता है।वर्तमान दौर अत्यधिक तीव्र मुकाबला का है।आज से 20 साल पहले ग्लैमर छवि वाले सितारे (स्टार) अधिक से अधिक 20-25 होते थे,परंतु आज के दिनों में उनकी संख्या बहुत अधिक हो चुकी है।अब फिल्म स्टार हैं,टी०वी० सीरियलों के स्टार हैं,विभिन्न टी०वी० काम्पटीशन के बनाए हुए स्टार हैं,वीडियो जाॅकी हैं,मीडिया के स्टार हैं,राजनीतिक विश्लेषक हैं और यहां तक की धार्मिक नेता भी ग्लैमर छवि लेकर अवतरित हो चुके हैं।
- ये अपनी छवि इसी रूप में बनाते हैं और ध्यान रखते हैं कि वे सबसे अलग,जुदा दीखें और लोग उन पर आकर्षित हों।मशहूर रहने की अवधि आज बहुत कम हो गई है।पहले कभी ख्याति प्राप्त व्यक्ति लंबे समय तक जाना जाता था।आज ऐसी स्थिति नहीं है।जो लोग स्टेटस उपलब्ध कर रहे हैं या कर चुके हैं,वे चाहते हैं कि छवि का कम से कम समय में अधिक से अधिक लाभ उठाया जा सके।सेलिब्रिटी को अपने फायदे एवं लाभ के लिए अपने हितों का भी ध्यान रखना पड़ता है,क्योंकि इस कार्य के लिए उनको श्रम,समय एवं संपदा आदि का निवेश करना पड़ता है।अर्थात् बड़े बनने के लिए मीडिया का सहारा लेकर अपना प्रचार स्वयं करना पड़ता है।इसलिए ये ग्लैमर कुछ भी करते हैं तो इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में खबर बनती है।यों तो जानवरों का वध जघन्य अपराध है,परंतु जब कोई सितारा इस कार्य में शरीक और शामिल होता है तो इसका खूब प्रचार होता है।जेल काटने वाले सितारों के लिए भीड़ उमड़ती है,ताकि वे एक नजर उन्हें देख सकें,क्योंकि वे बड़े कुख्यात हैं।
- बड़े कार्य के लिए निष्ठावान व्यक्ति जब कार्य प्रारंभ करता है या समाज के हितो के लिए अनगिनत व्यक्ति अपना सर्वस्व निछावर कर देते हैं तो वहां किसी का ध्यान नहीं जाता है,परंतु इसी जगह कोई ग्लैमर छवि वाला सितारा खड़ा हो जाए तो वह बहुत बड़ी खबर बन जाती है।आज का बाजार लोगों की इसी मानसिकता को भुना रहा है या ऐसी मानसिकता लाकर अपना स्वार्थ साध रहा है।ग्लैमर की इस चकाचौंध में केवल फिल्मी सितारे ही शामिल नहीं हैं,बल्कि खेल एवं टी०वी० कलाकार भी इस होड़ में शामिल हो चुके हैं।उनको बड़ी सेलिब्रिटी के रूप में देखा जा रहा है।क्रिकेट खिलाड़ी आज ग्लैमर में सबको पीछे छोड़ चुके हैं।आज एक प्रमुख खिलाड़ी की कीमत 125 करोड़ से अधिक है।चार खिलाड़ियों की विगत 3 सालों में सैकड़ों करोड़ थी,जो कि किसी बड़ी फैक्ट्री के उत्पादन के समान है।ये अपनी ख्याति को बेचकर विज्ञापनों से पैसा कमाते हैं।यह ग्लैमर का बाजार ही है,जिसने टैलेंट शो को दिखावटी शो में बदल दिया है।आज कोई प्रतिभाशाली है,इसकी महत्ता नहीं है,वरन कौन कितना आकर्षक दीखता है,यही बड़ी कसौटी बन गई है।इसलिए राजनीतिक नेता,खिलाड़ी आदि नवयुवतियों के समान सौंदर्य के सबसे अहम ग्राहक बन चुके हैं।ये अपने क्षेत्र में आने से पहले सौंदर्य विशेषज्ञों के पास अपने रूप-सौंदर्य को निखारने के लिए पहुंचते हैं।
4.ग्लैमर के बजाय प्रतिष्ठा किसकी हो? (Who has prestige instead of glamour?):
- ग्लैमर के बाजार में ब्यूटीशियन,न्यूट्रिशनिस्ट,हेयर स्टाइलिस्ट,डिजाइनर,कॉस्मेटिक सर्जन,डेंटिस्ट,डांस इंस्ट्रक्टर,स्पीच थैरेपिस्ट अहम भूमिका निभा रहे हैं।इसके बिना ग्लैमरस छवि अधूरी रह जाती है।आंतरिक सौंदर्य से शारीरिक सौंदर्य की प्रतिष्ठा बढ़ी है।शालीनता,निष्ठा,आस्था,सेवा,सद्भावना जैसी चारित्रिक विशेषताओं के स्थान पर दैहिक सौंदर्य एवं आकर्षण का प्रभाव बढ़ चुका है।मीडिया ने इसे और हवा दी है।आज हर वह व्यक्ति ग्लैमरस है,जिसका नाम है,जो परदे के सामने है,जो महंगा एवं डिजाइनर पोशाक पहना है और विशिष्ट प्रकार का लाइफस्टाइल जी रहा है।जो ऐसा कर रहा है,वही समाज में प्रतिष्ठित है और जो नहीं कर रहा है,वह अजीब-सी बेचैनी में जी रहा है,उसमें भी एक तड़प है इस चकाचौंध में जीने की।वह भी जल्द से जल्द ग्लैमर के इस बाजार का हिस्सा बनने के लिए आतुर है।कोई इस दौड़ में पिछड़ना नहीं चाहता।यही वजह है कि किसी विशेष शेयर या म्यूचुअल फंड में आखिरी तारीख से पहले अपार संपदा संग्रहीत हो जाती है।शेयर मार्केट की उछाल भी इससे अछूती नहीं है।आसमान छूता रियल एस्टेट,महंगी प्रोफेशनल एजुकेशन तथा शाही लाइफस्टाइल,मल्टीप्लेक्स में खरीदारी,विदेशी भ्रमण तथा पानी के समान पैसा बहाना ग्लैमर का खास अंदाज बन चुके हैं।
- आधुनिक समाजशास्त्रियों ने ग्लैमर के बाजार का भविष्य उज्ज्वल बताया है।बुद्धिजीवियों के अनुसार यह परिवर्तन का दौर है।समाज बदलाव के कगार पर खड़ा है।समाज का अधिकतर वर्ग एवं लोग इसी दौड़ में शामिल चंद पल की प्रसिद्धि पाकर ही संतुष्ट हो जाना चाहते हैं,परंतु यह आत्मघाती कदम ना तो व्यक्ति के लिए और न समाज के लिए ही अच्छा हो सकता है।पानी के बुलबुलों में कोई आशियाना नहीं बुन सकता।बुलबुलों को तो फूटना ही है।मजबूत भवन बनाने के लिए बुनियाद भी उतनी ही सुदृढ़ एवं गहरी होनी चाहिए।दो पल की चकाचौंध भरी प्रसिद्धि से आत्मसंतोष नहीं मिल सकता है और न चकाचौंध भरी रोशनी से कोई सार्थक काम ही किया जा सकता है।समाज,व्यक्ति और बाजार प्रतिपूरक हैं।समाज में जिस चीज को प्रतिष्ठा मिलेगी,उसी के प्रति लोगों का रुझान होगा और उसी को पाने की चाहत बलवती होगी।अतः समाज में ग्लैमर की नहीं,वरन
- त्याग,सेवा,सहिष्णुता,भाईचारा,ईमानदारी,निष्ठा, श्रम,सद्भावना,सहयोग आदि सामाजिक एवं मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा होनी चाहिए।हमारे आदर्श खिलाड़ी,सेलिब्रिटी या फिर कोई अभिनेता नहीं हो सकते।हमारे आदर्श वह चरित्रनिष्ठ,तपस्वी,संत,महात्मा,समाजसेवी,विद्वान आदि होने चाहिए,जिन्होंने अपने त्याग,तपस्या और सेवा से अपने एवं अपने परिवार को बदलकर रख दिया हो।वास्तव में इसी ग्लैमर की प्रतिष्ठा होनी चाहिए,जिसके अनुकरण से स्वयं भी धन्य हो सकें और समाज भी लाभान्वित हो सके।हम जैसे हैं हमें वैसे ही बनकर अपनी मौलिकता एवं सामर्थ्य का विकास करना चाहिए,किसी सेलिब्रिटी का अंधानुकरण नहीं करना चाहिए।समाज में प्रसिद्धि की चाहत होना बुरी बात नहीं,परंतु प्रसिद्धि की किरणें श्रेष्ठ कर्म एवं विचारों से निकलनी चाहिए।ग्लैमर की खुमारी एवं नशा हमें किसी भी मुकाम पर नहीं पहुंचा सकते,बल्कि विनाश के दलदल में झोंक देंगे।
- ईमानदारी,निष्ठापूर्वक किए गए श्रम से प्राप्त सफलता का संतोष किसी भी ग्लैमरस छवि से बड़ा होता है।हमें ग्लैमर को नहीं वरन श्रेष्ठ कर्मों एवं विचारों को जीवन एवं समाज का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।शरीर के सौंदर्य एवं आकर्षण की आवश्यकता है तो आंतरिक सद्गुणों का विकास भी जरूरी है,केवल दैहिक,आकर्षण पर्याप्त नहीं है।यह समस्याओं को प्रश्रय देता है।समाधान है,जीवन एवं समाज के सभी अंगों का पूर्णरूप से विकास हो।यही आज की सर्वोपरि आवश्यकता है।
5.छात्र-छात्राएं किसको आदर्श मानें? (Who should students consider to be a role model?):
- पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव तथा शारीरिक शिक्षा के अभाव के कारण आज के अधिकांश छात्र-छात्राओं के आदर्श फिल्मी चरित्र नायक-नायिकाएं होती हैं।इसका प्रबल प्रमाण है:सोशल मीडिया।इंस्टाग्राम,यूट्यूब चैनल तथा ट्विटर पर किसी भी फिल्मी नायक-नायिका और सेलिब्रिटी के लाखों फॉलोअर्स मिल जाएंगे।कहीं किसी शहर-गांव में उनकी शूटिंग होती है तो उनको देखने के लिए युवक-युवतियां उमड़ पड़ते हैं।किसी शहर में आ जाए,कहीं किसी फंक्शन में जाना हो तो उनका वहां से निकलना मुश्किल हो जाता है।किसी फिल्म को देखने के लिए युवक-युवतियां इस तरह टूट पड़ते हैं जैसे शहद पर मक्खियाँ या मीठे पर मक्खियाँ टूट पड़ती हैं। किसी धर्मगुरु,उपदेशक,कथावाचक,ऋषि,संत,महापुरुष के प्रवचनों में इस तरह से लोग नहीं जुटते हैं।
- यदि किसी छात्र-छात्रा के अध्ययन कक्ष का अवलोकन करें तो दीवारों पर सिलेब्रिटीज के चित्र,नायक-नायिकाओं के चित्र मिलेंगे।परंतु किसी महापुरुष,राम-कृष्ण,शंकर,सीता माता,राधा,रुक्मणी आदि के चित्र नहीं मिलेंगे।हाथों पर टैटू गुदवाना,एक-दूसरे की होड़ करना क्या दर्शाता है? यही कि भारतीय संस्कृति,भारतीय जीवन मूल्यों,भारतीय आदर्शों पर हमारी आस्था नहीं है।हो भी कैसे सकती है,आज के शिक्षक,माता-पिता भी पाश्चात्य संस्कृति में रंगे हुए हैं।
- ऐसे माता-पिता अपने बच्चों को रोकते टोकते नहीं है बल्कि सुंदर दिखने,आकर्षक दिखने के लिए उकसाते हैं।एक बार एक रिश्तेदार अपने संबंधी के गए हुए थे तो उन्होंने बात-बात में कहा कि आपका लड़का शराब पीता है और मांसाहारी है तथा ऐसा कोई ऐब नहीं है जो उसमें मौजूद न हो तो उस बच्चे की मां छूटते ही क्या बोलती है कि आपके बच्चे भी ऐसा ही करते होंगे और इसमें बुरा क्या है,आज का चलन है।दिन भर काम करके आता है तो अपनी थकान उतारने के लिए ड्रिंक कर लेता है तो उसमें क्या बुरा है?
- अब माता-पिता ही अपने बच्चों के ऐबो की अनदेखी करेंगे तो दूसरा क्या कुछ कर सकता है।आज के युवक-युवतियों में अपनी प्रतिभा को तराशने,चारित्रिक गुणों को विकसित करने की होड़ नहीं है परंतु सेलिब्रिटीज जैसा दिखने की होड़ मची रहती है।अब ऐसे युवक-युवतियां गलत राह पर चल पड़ते हैं तो समाज व देश की तस्वीर भी कैसे उज्जवल हो सकती है।
यहां फिल्मों का उदाहरण प्रस्तुत करके यह नहीं कहा जा रहा है कि सेलिब्रिटीज का चरित्र उज्जवल नहीं है।कोई विरला ही सेलिब्रिटी ऐसा होगा जो भारतीय संस्कृति व आदर्श का पालन करता हो क्योंकि ऐसा करके वह सिनेमा हॉल पर भीड़ नहीं खींच सकता है।ग्लैमरस छवि प्रस्तुत करके ही वह अधिक से अधिक युवक-युवतियों को अपनी फिल्म को देखने के लिए उत्साहित कर सकता है।क्रिकेट खिलाड़ियों के प्रति भी युवाओं की ऐसी दीवानगी देखने को मिलती है। - युवा पीढ़ी को सोचना होगा कि उसे ग्लैमर की दुनिया में जीना है या राम-कृष्ण के आदर्श को जीना है।त्याग,तप,सेवा से ही खुद का,परिवार व समाज तथा देश का भला हो सकता है और देश का चरित्र ऊंचा उठ सकता है।हमारे आदर्श हमारे ऋषि,मुनि,संत,महात्मा ही हो सकते हैं।
- उपर्युक्त आर्टिकल में ग्लैमर की दुनिया का सच कैसे जानें? (How to Know Truth World of Glamour?),ग्लैमर की दुनिया का असली सच कैसे जानें? (How to Know Real Truth World of Glamour?) के बारे में बताया गया है।
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6.गर्लफ्रेंड का व्यवहार (हास्य-व्यंग्य) (Girlfriend Behavior) (Humour-Satire):
- मेरी गर्लफ्रेंड न तो मेरा होमवर्क करती है और ना बुलाने पर पास में आती है,बहुत नखरे,नौटंकी करती है।
- दूसरा दोस्त:लेकिन मैं तो जितना होमवर्क करवाना चाहूं और जहां चाहूं वैसे ही फौरन हाजिर हो जाती है।
- पहलाःलेकिन कैसे?
- दूसरा:सवेरे सवेरे 2 सिनेमा की टिकट हाथ में दे देता हूं।
7.ग्लैमर की दुनिया का सच कैसे जानें? (Frequently Asked Questions Related to How to Know Truth World of Glamour?),ग्लैमर की दुनिया का असली सच कैसे जानें? (How to Know Real Truth World of Glamour?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.ग्लैमरस दिखने के लिए युवा क्या-क्या करते हैं? (What do young people do to look glamorous?):
उत्तर:आधे-अधूरे कपड़े पहनना,शरीर की अधिक से अधिक नुमाइश करना,शरीर,हाथ,पैर पर टैटू गुदवाना,फिल्मी हीरो की तरह कपड़े पहनना,चलना शरीर की सुंदरता बढ़ाना आदि।
प्रश्न:2.क्या शरीर की सुंदरता पर ध्यान नहीं देना चाहिए? (Shouldn’t you pay attention to the beauty of the body?):
उत्तर:शरीर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ सौम्य कपड़े पहनना चाहिए।भद्रता,सौम्यता झलकनी चाहिए।शरीर की सुंदरता बढ़ाने से अधिक आंतरिक सौंदर्य बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।आन्तरिक सुंदरता चारित्रिक गुणों को विकसित करने से बढ़ते हैं।
प्रश्न:3.फैशन से क्या तात्पर्य है? (What is meant by fashion?):
उत्तर:फैशन से आज यह आशय लिया जाता है कि कम से कम कपड़े पहनो,ऐसे कपड़े पहनो जिसे दूसरों को लुभाया,आकर्षित किया जा सके।ऐसे कम कपड़ों और अध नंगे शरीर को देखकर दूसरे फब्तियां कसते हैं और यही तो वे चाहते हैं।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा ग्लैमर की दुनिया का सच कैसे जानें? (How to Know Truth World of Glamour?),ग्लैमर की दुनिया का असली सच कैसे जानें? (How to Know Real Truth World of Glamour?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
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