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7 Top Tips for Success with Regularity

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1.नियमितता से सफलता की 7 टॉप टिप्स (7 Top Tips for Success with Regularity),नियमितता से सफल कैसे हों? (How to Succeed with Regularity?):

  • नियमितता से सफलता की 7 टॉप टिप्स (7 Top Tips for Success with Regularity) से आप जानेंगे कि एक विद्यार्थी,अभ्यर्थी और जॉब करने वाले के लिए परीक्षा की तैयारी हेतु नियमितता कितनी जरूरी है?सफलता प्राप्त करने में नियमितता बहुत बड़ी भूमिका निभाती है।
  • बोर्ड,काॅलेज,प्रवेश तथा प्रतियोगिता परीक्षार्थियों के लिए विशेष लेख।
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2.सफलता से दूर रहने का कारण (Reason for staying away from success):

  • कहा जाता है कि भगवान अपने कार्य क्षेत्र में हाथ बँटाने के लिए मनुष्य को वरिष्ठ राजकुमार के रूप में एक सुनिश्चित आयु व गिनी हुई सांसे देकर इस धरती पर भेजता है।अत हमारे जीवन का एक-एक पल बहुमूल्य है।इतने पर भी हम इस तथ्य से अंजान बने रहते हैं कि हमारी साँसे गिनी हुई हैं।एक श्वास के साथ ही जीवन की इस अमूल्य निधि की एक इकाई कम हो जाती है।एक स्वस्थ व्यक्ति सामान्यतया एक मिनट में लगभग 30 बार श्वास-प्रश्वास लेता है।इस हिसाब से वह एक घंटे में 1800 तथा 24 घंटे में 43200,एक माह में 1296000 बार एवं एक वर्ष में एक करोड़ पचपन लाख बावन हजार बार सांसें लेता है।अब यदि मनुष्य की औसत सक्षम आयु 70 वर्ष मान ली जाए,तो उसे जीवन में प्रकृति-प्रदत्त  1,08,86,40,000 अर्थात् एक अरब आठ करोड़ छियासी लाख चालीस हजार साँसे ही मिली हुई है।इनमें से यदि एक-एक इकाइयाँ यों ही कम होती जाएँ तो जीवन की पूंजी एक दिन चुक जाती है।उस समय यमराज के मृत्युदूत कालपाश लेकर लेने आ जाते हैं।उसके साथ-साथ व्यक्ति पीछे मुड़कर देखता है तो उसे ज्ञात हो जाता है कि उसने कितनी बेदर्दी से सांसों को खर्च किया और समय को गँवाया है या उसके एक-एक कण व एक-एक क्षण का सदुपयोग किया है।
  • यों तो हर रोज यह सभी देखते और समझते हैं कि प्राची में सूर्योदय हुआ और पश्चिम में अस्त हो गया और इस तरह एक दिन समाप्त हो गया।लेकिन कितने लोग हैं जो यह जानने का गंभीरतापूर्वक प्रयास करते हैं कि लो आज हमारी आयु में से एक दिन कम हो गया।आज हमारी 43200 साँसे किस कार्य में खर्च हो गई? समय तो अपनी गति से चल रहा है।चल ही नहीं तीव्रगति से भाग रहा है।हमारी सांसे भी खर्च हो रही है।निरंतर गतिमान इस समय के साथ कदम-से-कदम मिलाकर चलने पर ही जीवन की सार्थकता है।इसके साथ कदम-से-कदम मिलाकर नहीं चलने वाला व्यक्ति पिछड़ जाता है और पिछड़ना-सफलता से दूर हटना है,उसकी ओर गतिशील होना नहीं।
  • धन-संपदा का,विद्या का,प्रतिभा का रोना सभी को रोते देखा जाता है।कोई धन के अभाव में दुखी है,तो किसी के पास ज्ञान नहीं,विद्या नहीं,प्रतिभा नहीं।उसके लिए वह सिर्फ सिर पीट रहा है।समझ में नहीं आता कि वह कौन से जामवंत की प्रतीक्षा कर रहा है,जब वह उसकी सामर्थ्य का बोध कराएंगे और तब वह हनुमान अपनी सामर्थ्य को समझेंगे तथा एक छलांग मार कर लंका पहुंच जाएंगे।विश्व की संपदाएँ,विश्व का ज्ञान तथा दिव्य-आध्यात्मिक शक्तियां तो उनकी बाट जो रही हैं।समय जैसी मूल्यवान संपदा का भंडार भरा होते हुए भी जो नियोजन कर धन,ज्ञान,प्रतिभा तथा लोकहित को नहीं पा सकते,उनसे अधिक अज्ञानी किसे कहा जाए।

3.विद्यार्थी का समय मूल्यवान है (Student time is valuable):

  • समय अमूल्य है।समय को जिसने बिना सोचे-समझे खर्च कर दिया,वह जीवन पूंजी भी यों ही गँवा देता है। सांसों की तरह यह पूंजी भी अपने आप खर्च होती है।हम कृपण बनकर भी उसे सोने-चांदी के सिक्कों की तरह जोड़कर नहीं रख सकते।यह गतिवान है।हम अपनी अन्य संपदाओं की तरह उस पर अधिकार जमा नहीं सकते।हमारा उस पर स्वामित्व वहीं तक है कि हम उसका सदुपयोग कर लें।वस्तुतः जिस व्यक्ति में समय को खर्च करने की,उसका सदुपयोग करने की सामर्थ्य नहीं होती,तो समय ही उसे खर्च कर देता है।दिन-रात के 24 घंटे कम नहीं होते।इस समय को हम किस प्रकार व्यतीत करते हैं,यदि इसका लेखा-जोखा करते चलें तो हमें ज्ञात हो जाता है कि हम जी रहे हैं या समय को व्यर्थ गंवाकर एक प्रकार से जीवन की इतिश्री कर रहे हैं।
  • उदाहरण के लिए,विद्यार्थी जीवन को लिया जाए तो अमूमन यह काल 25 वर्ष का माना जाता है।इस अवधि में हम इस प्रकृति प्रदत्त धरोहर का कितना सदुपयोग कर पाते हैं।यदि इसका लेखा-जोखा किया जाए तो पता चलेगा कि मुश्किल से 9-10 वर्षों का ही हम सदुपयोग कर पाए।क्योंकि बचपन में इतना ज्ञान नहीं होता कि हम इसका मूल्य समझें।अतः 5 वर्ष तक खेलकूद तथा मित्रों व भाई-बहनों के झुंड के साथ यों ही इस संपदा को लुटा देते हैं।अब बचे 20 वर्ष।इसमें यदि सोने का समय 8 घंटे प्रतिदिन मान लिया जाए अर्थात् 10:00 बजे रात में सोकर 6:00 बजे सुबह उठने का क्रम निर्धारित कर लिया जाए तो 8 घंटे प्रतिदिन के हिसाब से एक माह में 240 घंटे और एक वर्ष में 2920 घंटे अर्थात् लगभग साढ़े चार महीने होते हैं।इस तरह 20 वर्ष में 6 वर्ष 8 माह तो नींद में निकल जाते हैं।नित्य-नैमित्तिक दैनिक कार्यों जैसे-शौच,स्नान,दोनों समय भोजन,स्कूल-कॉलेज आने जाने आदि अनिवार्य दैनिक कार्यों में कुल मिलाकर 4 घंटे तथा अन्य फुटकर कामों के लिए अतिरिक्त एक घंटा मान लें तो कुल मिलाकर 5 घंटे लेते हैं।5 घंटे प्रतिदिन के हिसाब से एक माह में 150 घंटे,एक वर्ष में 1800 घंटे अर्थात् दो माह 15 दिन एवं 20 वर्ष में लगभग 4 वर्ष 2 माह दैनंदिन कार्यों में खर्च हो गए।
  • इस तरह मोटे हिसाब से 20 वर्ष के जीवन काल में 10 वर्ष 10 माह खर्च हो जाने पर सार्थक कार्यों के लिए मात्र नौ वर्ष दो माह ही बचते हैं।इसमें से भी यदि खेलकूद,सिनेमा,टेलीविजन आदि मनोरंजन के अवसरों को भी निकाल दिया जाए,तो फिर कितना समय सार्थक कार्यों के लिए बचेगा,यह सहज ही अंदाज़ लगाया जा सकता है।
  • मनुष्य को युवावस्था भगवद्-प्रदत समय के बहुमूल्य वरदान के रूप में मिलती है।यह वह सामर्थ्य होती है जिसे यदि अधिक समय तक स्थायी बनाया जा सके तथा तन से-मन से बूढ़े न हो जाएँ तो गिनी हुई सांसों के इस जीवन में हम बहुत काम कर सकते हैं।उदाहरण के लिए,यदि हम प्रतिदिन एक घंटा एकाग्रता के साथ 20 पृष्ठ भी पढ़े तो महीने में 600 और सालभर में 7200 पृष्ठों का अध्ययन कर सकते हैं।इसी तरह से यदि नियमित रूप से 15 वर्षों तक पढ़ते रहें,तो यह पृष्ठ संख्या बढ़कर 1,80,000 हो जाती है।इतने अधिक पृष्ठों में कितने ही विविध विषयों की पुस्तकें समाहित हो जाती हैं।यदि एक ही विषय रखा गया हो तो वह भारी-भरकम ‘एनसाइक्लोपीडिया’ बन जाता है और पढ़ने वाला उसका विशेषज्ञ।
  • किसी दार्शनिक ने ठीक ही कहा है-मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी समय है।यदि उसे खर्च करना सीख लिया जाए तो उससे बहुमूल्य सफलता भी खरीदी जा सकती है।निश्चय ही जिन व्यक्तियों ने समय के मूल्य को समझा और अपने जीवन के एक-एक क्षण,एक-एक श्वास का सदुपयोग किया उनकी गणना महामानवों में हुई।

4.नियमितता से असंभव कार्य (Impossible tasks with regularity):

  • सामान्य क्रम में देखते-देखते जिंदगी के कितने वर्ष ऐसे ही हंसते-हंसते,रोते-कलपते व्यतीत हो जाते हैं और शरीरयात्रा पूरी करने के अतिरिक्त कोई और महत्त्वपूर्ण कार्य नहीं हो पाता।किंतु यदि दिनचर्या बनाकर समय के एक-एक क्षण का ठीक तरह से उपयोग करने का क्रम बना लिया जाए,तो मनचाही दिशा में कितनी बड़ी प्रगति संभव हो पाती है।यदि कोई व्यक्ति एक घंटे का समय अध्ययन में लगाएँ तो कुछ ही दिनों में किसी भी विषय में प्रवीणता प्राप्त कर सकता है।
  • मनस्वी दूरदर्शी होते हैं और विवेकवान भी।वे जो निर्णय करते हैं,उस पर दृढ़तापूर्वक आरूढ़ रहते हैं।आवश्यक साधन जुटाने के लिए वे सूझबूझ का पूरा प्रयोग करते और समय के एक-एक क्षण का सदुपयोग करके अपने संकल्पों को पूरा करते हैं।
    प्रकृति ने किसी को गरीब-अमीर या विद्वान-मूढ़ नहीं बनाया।उसने तो सबको मुक्तहस्त से अपना अमूल्य वैभव लुटाया है।श्रम करने की सामर्थ्य तथा समय का अनुदान-इन दो अस्त्रों से सुसज्जित करके उसने अपने राजकुमारों को जीवन के समरांगण में मस्तक पर तिलक लगाकर विजयश्री वरण करने के लिए ही भेजा है।
  • संपदा धन से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है।इसलिए विवेकशील व्यक्ति उसका भी उसी प्रकार बजट बनाते हैं-समय सारणी बनाते हैं,जैसा कि कोई समझदार व्यक्ति बजट बनाकर पैसे-पैसे का हिसाब रखता और आवश्यकतानुसार खर्च करता है।दिनभर के 24 घंटे में किस विषय के किस समय तक क्या-क्या काम होंगे,इस प्रकार का टाइमटेबुल बनाकर उस पर चलने से समय का सदुपयोग तो होता ही है,गुणात्मक रूप से भी काम अधिक और अच्छा होता है।साथ ही जीवन में समरसता बनी रहती है।जो उसका विभाजन नहीं करते,वे दिनभर कोल्हू के बैल की तरफ लगे भले ही रहें,कम ही काम कर पाते हैं और परिणामस्वरूप खीज,मानसिक थकान,अरुचि व निराशा ही हाथ लगती है।समय का विभाजन हो जाने से काम करने तथा विश्राम करने में सामंजस्य बना रहता है।
  • मनुष्य का जीवनकाल भगवान ने निर्धारित करके उसे गिनी हुई सांसे प्रदान की है।अपनी इन अमूल्य संपदाओं-समय और श्वास की महत्ता को समझकर विवेकपूर्ण ढंग से खर्च करके हम अपने जीवन को उसी तरह सफल और सार्थक बना सकते हैं जिस प्रकार महान गणितज्ञों एवं वैज्ञानिकों ने इनका सदुपयोग करके अपने को धन्य बनाया।उनके पदचिह्न आज भी हमारा पथ-प्रदर्शन कर रहे हैं,जिन पर चलकर हम अपना ही नहीं,समाज का भी उद्धार कर सकते हैं।

5.समय का नियमित सदुपयोग के दृष्टांत (Illustrations of Regular Use of Time):

  • समय को,जिस पर सर्वसाधारण कुछ भी ध्यान नहीं देते,उसी समय के एक-एक क्षण का सदुपयोग करके लोगों ने अनेकों महत्त्वपूर्ण कार्य कर दिखाए।संयुक्त राज्य अमेरिका के जाने-माने गणितज्ञ चार्ल्स फास्ट ने प्रतिदिन एक घंटा गणित के अभ्यास में लगाया और उनका यह क्रम जीवनपर्यंत चलता रहा।परिणामस्वरूप वे गणित के प्रख्यात आचार्य बन गए।
    विश्व विख्यात खगोलशास्त्री एमिग्वे की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।एमिग्वे पुस्तक विक्रेता की दुकान पर फटी-पुरानी पुस्तकों पर जिल्द चढ़ाने का काम करते थे।उसी मेहनत-मजदूरी से वे अपना व अपने परिवारजनों का भरण-पोषण करते थे।रात्रि में वे उसी दुकान के बाहर बने बरामदे के धुंधले उजाले में अध्ययन करते।जब तक वे उस दुकान में कार्यरत रहे,उनका अध्ययन नियमित रूप से चलता रहा।समय के सदुपयोग,लगन व मेहनत की त्रिवेणी ने अपना रंग दिखाया और एक दिन वे विश्व प्रसिद्ध खगोलवेत्ता और विविध विषयों के प्रकांड विद्वान बन गए।
  • समय,श्रम तथा विचारों का महत्त्व समझाने वाले कितने ही व्यक्तियों ने जेल के घुटन भरे अंधकारपूर्ण जीवन में साहित्य,ज्ञान व विज्ञान के क्षेत्र को प्रकाशित किया।जर्मनी के जाइगोर नामक एक नवयुवक की कहानी कुछ इसी प्रकार है।किसी अपराध में वह पकड़ा गया और कारागार में डाल दिया गया।जेल की इस एकांत कोठरी में रहते हुए उसने उस समय का उपयोग अध्ययन-मनन में किया और कालांतर में एक सफल लेखक बना।जेल अधिकारियों ने उसकी लगन और श्रमशीलता को देखकर सुविधाएँ प्रदान की।कुछ समय पश्चात उसकी प्रथम साहित्यिक रचना ‘दी फोट्रेस’ प्रकाशित हुई और जर्मनी में काफी लोकप्रिय हुई।जेल में बंद मुलजिम जाइगोर समय के सदुपयोग एवं अपनी श्रमनिष्ठा से साहित्य जगत का सिरमौर बन गया।

6.छात्र नियमितता की आदत डालें (Get used to regularity):

  • उपर्युक्त विवरण और दृष्टांत के आधार पर यह समझा जा सकता है कि नियमितता की आदत और समय का सदुपयोग करके विद्यार्थी प्रगति के शिखर पर पहुंच सकता है।विद्यार्थी नियमित अध्ययन करें,एक-एक क्षण का सदुपयोग करें तो परीक्षा में असाधारण प्रदर्शन करके चमकृत कर सकता है।परंतु हम कभी-कभी पढ़ने,कभी न पढ़ने के आदी हो जाते हैं और यह अनियमितता हमारे कठिन परिश्रम पर पानी फेरने के लिए पर्याप्त है।जो विद्यार्थी नियमित रूप से अध्ययन करते हैं,एक-एक क्षण का महत्त्व समझते हैं वे श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं,उनकी विषय पर मजबूत पकड़ हो जाती है।टाइमटेबुल बनाकर उसका नियमित रूप से पालन करने पर थोड़े से समय में भी साधारण छात्र-छात्रा असाधारण बन जाते हैं।समय एवं कठिन परिश्रम का सही समुचित सदुपयोग किया जा सके,तो किसी भी दिशा में विद्यार्थी शानदार सफलता प्राप्त कर सकता है।
  • इसके अलावा भी ढेरों ऐसे उदाहरण दिए जा सकते हैं जिसमें महान गणितज्ञों और वैज्ञानिकों ने विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए नियमितता और समय का पालन करके अनुसंधान और खोज कार्य कर दिखाया।लेकिन मूल बात यह है कि दूसरों के उदाहरण से हमारा भला होने वाला नहीं है,हमारा भला तो तब होगा जब इन मंत्रों को अपने जीवन में अपनाने से होगा। अक्सर ऐसा होता है कि ऐसे दृष्टांत और विवरण पढ़-सुनकर छात्र-छात्रा जोश-जोश में नियमित रूप से पढ़ने का विचार करता है परंतु कुछ दिनों बाद उसका जोश ठंडा पड़ जाता है,फिर उसकी दिनचर्या पुराने ढर्रे पर चल पड़ती है।इसका कारण हमारी बुरी आदतें,मनोबल की कमजोरी तथा संकल्पशक्ति का अभाव।
  • जो संकल्प के धनी होते हैं,अध्ययन करने में जोश के साथ होश भी रखते हैं वे कितनी कठिनाइयाँ आने पर भी अपने पथ से विचलित नहीं होते हैं।उन्हें सफलता ऐसे ही नहीं मिल जाती है।उनके परिश्रम,नियमित रूप से अध्ययन करने,समय का सदुपयोग करने को श्रेष्ठ व्यक्ति ही समझ सकते हैं।जैसे हीरे की परख जौहरी ही कर सकता है,शुद्ध सोने की परख सुनार कर लेता है।
  • बोर्ड,कॉलेज और प्रवेश परीक्षाओं का समय निकट ही है।अतः विद्यार्थियों को इस समय नियमित रूप से अध्ययन करना चाहिए।आप एक माह ही नियमित रूप से अध्ययन करके जांच लें कि अध्ययन में नियमितता कितना जरूरी है,क्यों जरूरी है तथा कितना फायदा है? नियमित अध्ययन के बिना पिछला याद किया भूल जाते हैं,कोर्स पूरा नहीं होता है,समय की कमी खलती है। ट्रायल के तौर पर नियमितता की आदत डालकर देख लें की नियमित अध्ययन का परिणाम कितना सुखद और आश्चर्यजनक है।जब नियमित रूप से अमेरिका का एक मोची प्रतिदिन एक घंटा गणित का अध्ययन करके एक महान आचार्य बन सकता है तो आप क्यों नहीं अपने विषय में शीर्ष पर पहुंच सकते हैं।अनियमितता के कारण हम गई गुजरी स्थिति में पड़े रहते हैं और नियमितता हमें प्रगति के शीर्ष पर पहुंचा देती है।नियमितता को जीवन में अपनाने पर समय का पालन,दिनचर्या और टाइमटेबुल का पालन जैसी आदतें भी हमारे जीवन शैली का अंग बन जाती है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में नियमितता से सफलता की 7 टॉप टिप्स (7 Top Tips for Success with Regularity),नियमितता से सफल कैसे हों? (How to Succeed with Regularity?) के बारे में बताया गया है।

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7.सफलता का सूत्र (हास्य-व्यंग्य) (Formula for Success in Written) (Humour-Satire):

  • छात्र (बुकसेलर से):देखिए इस पुस्तक के लेखक के नाम पर लिखा है की सक्सेस के गारंटेड सूत्र।परन्तु मुझे तो परीक्षा में सफलता नहीं मिली।
  • बुकसेलर:ठीक ही तो लिखा है,ये मंत्र लेखक को सक्सेस दिलाने की गारंटी देते हैं,आपको नहीं।

8.नियमितता से सफलता की 7 टॉप टिप्स (Frequently Asked Questions Related to 7 Top Tips for Success with Regularity),नियमितता से सफल कैसे हों? (How to Succeed with Regularity?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.नियमितता से कौनसे गुण जुड़े हुए हैं? (What qualities are associated with regularity?):

उत्तर:कठिन परिश्रम,दिनचर्या का पालन,समय के एक-एक क्षण का सदुपयोग आदि गुण नियमितता से जुड़े हुए हैं।

प्रश्न:2.व्यस्त दिनचर्या में कुछ समय कैसे निकालें? (How to take some time out of a busy routine?):

उत्तर:अपने व्यस्त कार्यों में से कुछ समय निकालने के लिए टाइमटेबुल बनाकर उसका सख्ती से पालन करें।इस थोड़े से समय को बचाकर अध्ययन-मनन-चिंतन करके असाधारण कार्य किया जा सकता है।

प्रश्न:3.नियमितता में सबसे बड़ी बाधा क्या है? (What is the biggest obstacle to regularity?):

उत्तर:आलस्य,गलत आदतें,लापरवाही,समय की महत्ता न समझना,मन की निर्बलता आदि बाधाएँ हैं।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा नियमितता से सफलता की 7 टॉप टिप्स (7 Top Tips for Success with Regularity),नियमितता से सफल कैसे हों? (How to Succeed with Regularity?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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