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6Points to Teach Backward Boys in Math

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1.गणित में पिछड़े बालकों को पढ़ने के 6 बिंदु (6Points to Teach Backward Boys in Math),गणित में कमजोर बालकों को कैसे पढ़ाएं? (How to Weak Children in Mathematics?):

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  • गणित में पिछड़े बालकों को पढ़ने के 6 बिंदु (6Points to Teach Backward Boys in Math) के आधार पर कमजोर बालकों को गणित पढ़ने की तकनीक जानेंगे।अक्सर कमजोर छात्र-छात्रा कक्षा के प्रखर एवं मध्यम स्तर के बालकों के साथ न चल पाने के कारण पिछड़ जाते हैं।यदि समय रहते उन पर ध्यान न दिया जाए तो वे समस्या बन जाते हैं।
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  • यह लेख बोर्ड परीक्षार्थियों,काॅलेज परीक्षार्थियों तथा अन्य परीक्षार्थियों को दृष्टिगत रखते हुए लिखा गया है।

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2.गणित में पिछड़ने के कारण (Reasons for lagging behind in mathematics):

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  • गणित में केवल कमजोर छात्र-छात्रा ही पिछड़ते हैं ऐसी बात नहीं है बल्कि प्रखर बालक भी पिछड़ जाते हैं।
  • (1.)पिछली कक्षा में चली आ रही कमजोरी गणित पढ़ने में रुकावट पैदा करती है।यदि छात्र-छात्रा को जोड़,गुणा,भाग,बाकी,भिन्नों के जोड़,गुणा,भाग,बाकी,सरलीकरण (BODMAS),वर्गमूल आदि का भली प्रकार ज्ञान नहीं है तो वे उच्च गणित या आगे की गणित के सवालों,सिद्धांतों,प्रमेयों को नहीं समझ पाते हैं।जब तक उनकी पिछली कमियों को नहीं सुधारा जाए तब तक वे आगे नहीं बढ़ पाएंगे।गणित को हल करने में रुचि नहीं लेंगे।
  • (2.)कमजोर छात्र-छात्राओं को प्रखर व मध्यम स्तर के बालकों के साथ पढ़ाए जाने के कारण भी वे पिछड़ते चले जाते हैं।प्रखर बुद्धि बालक तेजी से सीखते हैं और फौरन सवालों और समस्याओं को हल कर लेते हैं जबकि कमजोर बालकों को समझने और हल करने में समय लगता है।
  • (3.)बालक-बालिका की गणित में रुचि ना हो और न आवश्यक प्रेरणा प्रदान की जाए तो वे गणित में पिछड़ते चले जाते हैं।वे भविष्य का पूर्वानुमान लगाकर यह नहीं सोचते हैं कि इससे उनका भविष्य चौपट हो जाएगा।उनके दिमाग में एक ही बात घूमती रहती है कि किसी भी तरह गणित से मुक्ति मिल जाए।
  • (4.)कुछ बालकों का लक्ष्य खिलाड़ी,व्यवसायी आदि बनने का होता है अतः इनके लिए गणित का ज्ञान प्राप्त करना वे जरूरी नहीं समझते हैं।हालांकि गणित का प्रारंभिक ज्ञान हर क्षेत्र के बालक को होना चाहिए तभी वह आगे बढ़ सकता है।
  • (5.)गणित के प्रत्यय विशिष्ट प्रकार के होते हैं जैसे प्राचल,कार्तिकीय निर्देशांक,ध्रुवीय निर्देशांक,साई,फाई,स्वेच्छ चर आदि छात्र-छात्राओं को स्पष्ट नहीं हो पाते हैं।यदि कमजोर बालकों को सरल भाषा में इन प्रत्ययों को स्पष्ट नहीं कराया जाएगा तो वे पिछड़ जाते हैं।गणित सिंबॉलिक (symbolic) भाषा अधिक है और उसमें लिखित थ्योरेटिकल भाषा का कम ही प्रयोग होता है।
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  • (6.)यदि गणित से संबंधी पुस्तकें,सहायक पुस्तकें,संदर्भ पुस्तकें ना हो तो शिक्षण को रोचक बनाने में कठिनाई महसूस होती है।अक्सर शिक्षक और शिक्षण संस्थान का एक ही बात पर फोकस रहता है कि सिलेबस को पूरा करवा दिया जाए और छात्र-छात्राओं को किसी तरह उत्तीर्ण करवा दिया जाए।उन्हें इस बात से कोई सरोकार नहीं रहता है कि बालक के गणित विषय कितना समझ में आया है।
  • (7.)गणित का सिलेबस छात्र-छात्राओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाया जाता है तब भी वे गणित में पिछड़ जाते हैं।उपयुक्त सिलेबस के अभाव में गणित विषय का ज्ञान स्पष्ट नहीं हो पाता है।
  • (8.)गणित का शिक्षक गणित की विषय वस्तु को उचित विधि,नवीन विधियों के द्वारा नहीं पढ़ाता है तो कमजोर और पिछड़े बालकों को गणित विषय को समझने में कठिनाई का अनुभव होता है।
  • (9.)माता-पिता या घर-परिवार में लड़ाई-झगड़ा,बीमारी,पारिवारिक पृष्ठभूमि अशिक्षा की हो,गरीबी,बच्चे के रहने वाला वातावरण शोरगुल व अशांत हो,दुर्घटना आदि कारणों से बालक का ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित नहीं हो पाता है और वे पिछड़ जाते हैं।
  • (10.)शिक्षण संस्थान में गणित शिक्षक के अभाव,गणित शिक्षक के रूढ़ व्यवहार,शिक्षण संस्थान का गंदा और आकर्षणहीन वातावरण,कक्षा में अनुशासनहीनता,कुछ बालकों द्वारा कक्षा में उत्पात करना आदि कारणों से भी बालक गणित विषय में पिछड़ जाते हैं।

3.पिछले बालकों की पहचान कैसे करें? (How to identify backward children?):

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  • (1.)समय-समय पर प्रश्नोत्तर से यह पता चलता है कि उनमें क्या-क्या कमियां है,इन कमियों को लगातार नोट करते रहना चाहिए।कक्षा तथा कक्षा से बाहर गणित संबंधी प्रश्न पूछे जाने चाहिए।प्रश्नों के उत्तरों से बालकों की कमजोरी का ज्ञान हो जाता है।
  • (2.)गणित में मौखिक कार्य का भी महत्त्व होता है।कुछ प्रश्न मौखिक भी हल करवाने चाहिए।मौखिक सवालों को हल करने से भी उनकी कमी का पता चलता है।
  • (3.)बालकों को कुछ गृहकार्य भी दिया जाता है।गृहकार्य की नोटबुक की जांच करने पर भी पता चलता है कि वे किस तरह की गलतियां करते हैं।
  • (4.)कुछ समय या कुछ अतिरिक्त समय देकर बालकों से वार्ता या साक्षात्कार करके भी उनकी गणित की कमजोरी का पता लगाया जा सकता है।
  • (5.)इसके अतिरिक्त अनौपचारिक परिस्थितियों जैसे: गणित प्रयोगशाला,गणित पुस्तकालय,गणित संबंधी गोष्ठियां,गणित मेला आदि में उनके व्यवहार का निरीक्षण करके भी छात्र-छात्राओं की गणित में कमजोरी का पता चलता है।
  • (6.)क्लास टेस्ट,मासिक,पाक्षिक टेस्ट,रैंकिंग टेस्ट,अर्द्धवार्षिक परीक्षा,प्री बोर्ड आदि के द्वारा भी छात्र-छात्राओं की गणित में त्रुटियों का पता चलता है।इन टेस्टों में वे किस प्रकार की त्रुटियां करते हैं इसका भी पता चल जाता है।
  • (7.)मॉडल पेपर्स,एग्जाम किट,प्रैक्टिस सेट,पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों को हल करने और उनकी जांच करने पर उनकी गणित में त्रुटियों का पता चलता है।

4.कमजोर बालक गणित में कैसी त्रुटियां करते हैं? (What kind of errors do weak children make in mathematics?):

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  • (1.)गणित में ब्रैकेट से पहले माइनस का चिन्ह आने पर ब्रैकेट के अंदर संख्याओं के चिन्ह को नहीं बदलते हैं।
  • (2.)प्लस की जगह माइनस और माइनस की जगह प्लस चिन्ह का प्रयोग कर देते हैं।
  • (3.)गुणा और भाग की क्रियाओं को करते समय त्रुटि कर देते हैं।सही गुणा या भाग नहीं कर पाते हैं।गुणा करने में हासिल का गलत प्रयोग कर बैठते हैं।
  • (4.)भिन्नों को जोड़ने में LCM (एलसीएम) लेना नहीं आता है जिससे भिन्नों को सही प्रकार से नहीं जोड़ पाते या घटा पाते हैं।गुणा करने वाली भिन्नों में भी LCM (एलसीएम) का प्रयोग कर देते हैं।भाग वाली भिन्नों को हल नहीं कर पाते हैं।
  • (5.)संख्याओं तथा दशमलव संख्याओं का वर्गमूल नहीं निकाल पाते हैं।
  • (6.)सरलीकरण के समय परिमेयकरण करने में भूल कर देते हैं।
  • (7.)द्विघात समीकरण को ठीक से हल नहीं कर पाते हैं।शाब्दिक भाषा से द्विघात समीकरण या दो चरों के रैखिक समीकरण नहीं बना पाते हैं।
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  • (8.)द्विघात समीकरण तथा बहुपद के गुणनखंड नहीं कर पाते हैं फलतः मूल तथा शून्यक गलत निकाल देते हैं।
  • (9.)द्विघात समीकरण तथा द्विघात बहुपद को घात के अनुसार नहीं लिखते हैं और गलती कर देते हैं।
  • (10.)एक इकाई का दूसरी इकाई में परिवर्तन में गलती कर देते हैं।जैसे किलोमीटर को मीटर या सेमी में और विपरीत क्रम में तथा घन मीटर को लीटर में और विलोम क्रम में परिवर्तन नहीं कर पाते हैं।
  • (11.)प्रश्न में ज्ञात राशियाँ क्या हैं और अज्ञात राशियाँ क्या हैं तथा प्रश्न में क्या पूछा जा रहा है इसका पता नहीं लगा पाते हैं।
  • (12.)रेखागणित में डायग्राम बनाने में,ग्राफ पेपर पर सही बिंदु लेने पर,त्रिकोणमितीय दूरियों में कच्चा चित्र बनाने में अक्सर गलतियां करते हैं।त्रिकोणमितीय अनुपातों में गलतियां करते हैं।इस प्रकार अनेक छोटी-छोटी गलतियां करते हैं।

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5.पिछड़े बालकों में सुधार (Improvement in Backward Children):

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  • (1.)अध्यापक द्वारा पिछड़े छात्र-छात्राओं की पहचान करके व्यक्तिगत प्रयास द्वारा उनकी कमजोरियों को दूर किया जाए जिससे वे निरंतर प्रगति करते रहें।कक्षा में विषय-सामग्री का प्रस्तुतीकरण इस तरह से किया जाए जिससे उन्हें पाठ्य-सामग्री रुचि कर एवं आकर्षक लगे।
  • (2.)घरेलू समस्याओं बीमारी,झगड़ों आदि के कारण बालक पिछड़ रहा हो तो उनके प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार एवं अपने कार्य के प्रति निष्ठा द्वारा उनकी अनेक समस्याओं का समाधान कर सकता है।किसी भी समस्या का कोई निश्चित हल बता पाना तो अत्यंत कठिन है क्योंकि मानवीय समस्याओं के मानवतावादी दृष्टिकोण पर ही निर्भर है।
  • (3.)पिछली कक्षाओं की कमजोरी है तो जो विषयवस्तु पढ़ाई जाए उसके साथ-साथ या अतिरिक्त कालांश लेकर उनकी कमजोरियों को दूर किया जाए।जोड़,गुणा,भाग,बाकी भिन्नों को सरल करना,वर्गमूल आदि की कमजोरियों को दूर करने का प्रयास किया जाए क्योंकि इन कमियों के कारण गणित कठिन विषय लगने लगता है।चिन्हों,सूत्रों,परिभाषाओं आदि की कठिनाइयों को दूर किया जाए।
  • (4.)बालकों को थ्योरी,सूत्र और प्रमेयों को समझाने के बाद उदाहरण द्वारा उन्हें समझाया जाए और उसके बाद पर्याप्त अभ्यास कार्य करवा कर उनसे भी कक्षा में सवाल व प्रश्नों को हल करवाया जाए।
  • (5.)श्याम पट्ट पर जो भी लिखा जाए वह स्पष्ट और व्यवस्थित हो तथा जहां आवश्यक हो वहां डायग्राम द्वारा समझाया जाए।समझाते समय बालकों का सक्रिय सहयोग भी लिया जाना चाहिए।बालकों को जागरूक रखने के लिए प्रश्नोंत्तर-विधि का प्रयोग किया जाए।
  • (6.)किसी भी सवाल व प्रश्न को हल करने से पहले उन्हें बताया जाए कि प्रश्न में क्या दिया गया है और क्या ज्ञात करना है।समस्याओं की भाषा स्पष्ट व सरल हो।
  • (7.)अक्सर छात्र-छात्रा गणना करते समय त्रुटियां करते हैं अतः गणना में त्रुटियां करने से कैसे बचा जाए इसकी तकनीक बताई जाए।
  • (8.)बालकों को कक्षा में तथा कक्षा के बाहर आवश्यकतानुसार व्यक्तिगत परामर्श देकर गणित को सीखने में सहायता दी जानी चाहिए।
  • (9.)बालकों को रिवीजन करवा दिया जाए और उन्हें स्वयं भी रिवीजन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
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  • (10.)बालकों को कक्षा में सोचने एवं तर्क करने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।एक गणित की अच्छी कक्षा में छात्र स्वयं सोचते हैं तथा विभिन्न स्टेप्स की उपयुक्तता की मानसिक एवं लिखित कार्य द्वारा जांच करते हैं।कमजोर बालकों की कल्पना शक्ति कमजोर होती है तथा उन्हें अमूर्त विचारों को समझने में उनके वातावरण से संबंधित तथ्यों का प्रयोग करना चाहिए।
  • (11.)कमजोर छात्रों को मौखिक तथा मानसिक गणित का पर्याप्त अभ्यास कक्षा में देना चाहिए।उनकी कक्षा में हँसी नहीं उड़ानी चाहिए।उन्हें छोटे-छोटे व सरल-सरल सवालों व प्रश्नों को हल करवाकर कमियों को दूर करवाना चाहिए।
  • (12.)अधिक अभ्यास करने से कमजोर छात्रों के चिंतन में स्पष्टता आती है।प्रत्येक एक्सरसाइज को अनेक बार हल करना गणित अध्ययन में लाभकारी है।
  • (13.)बालकों की गणित में रुचि बनाए रखने के लिए उन्हें पजल,मैजिक स्क्वायर,पहेली,मनोरंजक गणित के सवाल आदि हल करवाए जाने चाहिए।
  • (14.)बालक की छिपी हुई विशिष्ट प्रतिभा,योग्यता,कुशलता का आभास करायें और उनकी हीन भावना दूर करें।उसमें आत्मविश्वास पैदा करें।
  • (15.)इस बात के लिए प्रयास किए जाएं कि छात्र सुधारी गई त्रुटियों को भविष्य में न दोहराएं।उन्हें सचेत होकर सवाल को लिखने तथा गणना को पुनः जाँचने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • (16.)कमजोर छात्र-छात्रा की थोड़ी-सी प्रगति पर उसकी प्रशंसा करते हुए उसे प्रोत्साहित करते रहना चाहिए।
  • (17.)कमजोर छात्र-छात्रा को भी अपनी कमजोरी को दूर करने का भरसक प्रयास करना चाहिए।जब तक कमजोर छात्र-छात्रा में जिज्ञासा नहीं होगी,कुछ जानने की ललक नहीं होगी,आगे बढ़ने की आकांक्षा नहीं होगी तब तक एक अकेला शिक्षक कुछ नहीं कर सकता है।
  • (18.)अध्यापक द्वारा बताई गई बातों को एकाग्र होकर समझने का प्रयास करना चाहिए।जो भी बात समझ में ना आए उसे शिक्षक से या अपने सहपाठी से पूछ कर समझना चाहिए।जिस टॉपिक को समझने में कठिनाई महसूस होती है उसका बार-बार रिवीजन करें,घर पर भी अभ्यास करें।पूछने में झिझक व संकोच नहीं करना चाहिए।विद्यार्थी काल ही सीखने,समझने का समय होता है।इस समय का भरपूर उपयोग करके अपनी कमजोरियों को दूर कर लेना चाहिए।पिछली कक्षाओं की कमजोरियों को दूर करने में संकोच अनुभव न करें,मालूम होते ही उन्हें दूर करने का भरसक प्रयास करें।
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  • (19.)परीक्षार्थियों को एग्जाम में किसी सवाल को हल करने के लिए गुणा,भाग,बाकी,जोड़ आदि को दुबारा जाँच लेना चाहिए।किसी भी गणना कार्य को पुनः जाँचने से की गई त्रुटि में सुधार हो जाता है।क्योंकि गणना में कहीं न कहीं अक्सर गलती हो जाती है।पूरे प्रश्नों को हल करने की रणनीति इस तरह तैयार करें कि प्रश्न-पत्र को पन्द्रह मिनट पूर्व हल कर दें।पन्द्रह मिनट में देख लें कि कोई सवाल या प्रश्न छूट तो नहीं गया है।उत्तर में इकाई,यूनिट वगैरह लिखी गई है या नहीं।जिन यूनिट्स को परिवर्तित करने की जरूरत है उन्हें परिवर्तित कर लें।जैसे ऊँचाई मीटर में हो और त्रिज्या सेमी में हो तो दोनों को एक यूनिट में परिवर्तित कर लें।घबराहट या हड़बड़ाहट न रखें।प्रश्न-पत्र को पूर्ण आत्म-विश्वास के साथ हल करें।एग्जाम फीवर से बचें।किसी भी तरह के प्रश्न-पत्र से न तो डरें और न तनावग्रस्त हों।मानसिक सन्तुलन बनाएं रखें।क्योंकि तनाव वगैरह से नुकसान के सिवाय फायदा कुछ भी नहीं होता है।
  • (20.)हल्के पेन का प्रयोग करें जिससे सवालों को हल करने की गति बढ़ेगी।घर से निकलने से पहले त्रिकोणमितीय कोणों के मान की सारणी तैयार करने को सीख लें और एग्जाम हाल में रोल नम्बर आदि लिखने के बाद,प्रश्न-पत्र देने से पहले उत्तर-पुस्तिका के पीछे लिख लें ताकि आपका समय बच जाए और भूलेंगे भी नहीं।समय का पूरा ध्यान रखें।छोटे प्रश्नों में कितना समय देना है और बड़े सवालों में कितना समय देना है इसकी रणनीति बना लें।अक्सर छात्र-छात्राएं छोटे सवालों को हल करने में अधिक समय लगा देते हैं और बड़े सवालों को हल करने के लिए बहुत कम समय बचता है।बाद में हड़बड़ाहट में बड़े प्रश्नों को हल करते हैं जिससे गलत होने के चांसेज बढ़ जाते हैं।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गणित में पिछड़े बालकों को पढ़ने के 6 बिंदु (6Points to Teach Backward Boys in Math),गणित में कमजोर बालकों को कैसे पढ़ाएं? (How to Weak Children in Mathematics?) के बारे में बताया गया है।

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6.गणित शिक्षक का धमाल (हास्य-व्यंग्य) (Maths Teacher’s Gambols) (Humour-Satire):

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  • एक बार गणित शिक्षक ने एक कमजोर छात्र को कक्षा में भी गणित पढ़ाई और ट्यूशन भी करवाई।परीक्षा में फेल होते-होते बच गया।
  • अभिभावकःछात्र ग्रेस से पास हुआ है।
  • टीचरःअभिभावक से,आप किस्मत वाले हो।
  • अभिभावकःएक तो ग्रेस से उत्तीर्ण हुआ है और ऊपर से मुझे किस्मत वाला (छात्र को) बता रहे हो।
    टीचरःमैंने इसको 12वीं कक्षा में गणित ही पढ़ाई है,वरना मैं जेईई की तैयारी भी करवाता हूं।

7.गणित में पिछड़े बालकों को पढ़ने के 6 बिंदु (Frequently Asked Questions Related to 6Points to Teach Backward Boys in Math),गणित में कमजोर बालकों को कैसे पढ़ाएं? (How to Weak Children in Mathematics?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न::

प्रश्न:1.छात्र गणित में कमजोरी दूर कैसे करें? (How to overcome weakness in mathematics for students?):

उत्तर:छात्र को रुचिपूर्वक कक्षा में पढ़ाई जाने वाली बातों को समझना चाहिए।कोई सवाल या थ्योरी समझ में नहीं आती है तो अपने मित्रों,शिक्षकों या माता-पिता की मदद से समझना चाहिए।

प्रश्न:2.रिवीजन का क्या महत्व है? (What is the importance of revision?):

उत्तर:कमजोर छात्र-छात्रा के लिए रिवीजन सोने पे सुहागा का काम करता है।बार-बार अभ्यास और रिवीजन से जटिल से जटिल विषय भी सरल हो जाता है।

प्रश्न:3.छात्र को अपनी कमजोरी कैसे पता लगे? (How does the student know his weakness?):

उत्तर:कक्षा में विभिन्न टेस्टों,परीक्षाओं के द्वारा तथा मॉडल पेपर्स को हल करके अपनी कमजोरी का पता लगा लेना चाहिए।

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  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित में पिछड़े बालकों को पढ़ने के 6 बिंदु (6Points to Teach Backward Boys in Math),गणित में कमजोर बालकों को कैसे पढ़ाएं? (How to Weak Children in Mathematics?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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