How to Forget Bitter Experiences?
1.कटु अनुभवों को कैसे भुलायें? (How to Forget Bitter Experiences?),कटु अनुभवों को भुलाने के रहस्य (Secrets for Forgetting Bitter Experiences):
- कटु अनुभवों को कैसे भुलायें? (How to Forget Bitter Experiences?) क्योंकि इनको न भुलाएं तो ये हमारी जड़ों को खोखली कर देते हैं।इस लेख में बताया गया है कि कटु अनुभव क्या-क्या हो सकते हैं और उन्हें कैसे हटाएं।
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2.कटु अनुभवों को मस्तिष्क से निकालें (Remove bitter experiences from the brain):
- हममें असंख्य लोग ऐसे मिलेंगे जो निरर्थक तथा व्यर्थ का बोझ लिए-लिए फिरते हैं।हम ऐसे बिस्तर और भार उठाए फिरते हैं,जो हमें लाभ तो क्या उल्टे हानि पहुंचाते हैं,जो हमारी शक्ति नष्ट कर देते हैं और हमसे काम करने की सामर्थ्य छीन लेते हैं।यदि हम यह आदत डाल लें कि सिर्फ काम की बातें तो याद रखें और व्यर्थ तथा निरर्थक बातें भूल जाएं और उन बातों को भी जो हमारी उन्नति में बाधक होती हैं,विस्मृत कर दें तो हम न केवल सफलता की मंजिल तय करने लग जाएंगे,वरन हमारे सुख में भी वृद्धि हो जाएगी।
- सही ढंग से जीवन व्यतीत करने का एक भेद तो यह है कि जो हमारी सामर्थ्य तथा शक्ति को नष्ट करें,हमारी भावी उन्नति के मार्ग में रोड़े अटकाए उसको मिटा दिया जाए।हमें चाहिए कि अपने विगत कटु अनुभवों को भूल जाएं,उनकी याद तक मस्तिष्क से निकाल दें।हमें अपनी त्रुटियों और दुर्बलताओं को याद नहीं रखना चाहिए;हां,यदि उद्देश्य यह हो कि कहीं दोबारा गलती ना हो जाए तो पहली भूलों पर दृष्टिपात करना अच्छा है किंतु उन्हें बार-बार मस्तिष्क में घुमाना ठीक नहीं है।यदि उनकी याद रह-रहकर सताती है तो बेहतर यह है कि उन्हें अपने मानस पटल से खुरच डालें ताकि उनका कोई चिन्ह शेष न रहे,ताकि जो आप आइंदा करने वाले हैं,उनकी सामर्थ्य न खो बैठें।जो पाठ आपने सीखे हैं,उनसे लाभान्वित हों,आपको कोई नहीं रोकता,किंतु उन्हें बार-बार याद करके व्यर्थ ही अपना दिल ना दुखाएं।जो चीज आपको आगे बढ़ने से रोकती है उससे चिपटे रहने से क्या लाभ? जिस घटना की स्मृति से आपको दुख होता है,उसे दोबारा क्यों याद करें? शोक-संताप को छोड़ें,दुःख तथा चिंता से बचें,ईर्ष्या-द्वेष तथा डाह रखना त्याग दें,स्वार्थ को तिलांजलि दें-मूर्खों,निरक्षरों,निकम्मों,आलसियों और कामचोरों की संगति में न बैठें-झूठ तथा आडम्बर को छोड़ दें;और उस नाक को काट डालें,जो लोगों के सामने बार-बार कटती है और फिर भी ज्यों-की-त्यों पूरी होठों के ऊपर और आंखों के नीचे मौजूद रहती है।
- उन दुर्विचारों को मन में ना लाएं,जो आपकी वासना की प्यास को भड़काते हैं,आपको दुराचार की ओर प्रवृत्त करते हैं।यदि आपने ये सब बातें छोड़ दीं तो आप यह देखकर चकित रह जाएंगे कि आपका बोझ कितना हल्का हो गया है-आप कितने स्वतंत्र हैं।जीवन की दौड़ में भाग लेने के लिए आप अपने अंदर अधिक शक्ति और उत्साह का अनुभव करेंगे।आपको अपनी सफलता तथा विजय पर और भी अधिक विश्वास हो जाएगा।
- अनगिनत लोग ऐसे भी हैं,जो इन बातों को छोड़ना जानते ही नहीं।परिणामस्वरूप उनके अवयव सर्वथा तने रहते हैं।उनकी नसें और पुट्ठे खिंचे रहते हैं।संसार में उनके लिए कठिनतम कार्य यही होता है कि वे कैसे अपनी त्रुटियों को भूलें।अभी इसी समय यह प्रण कर लें कि कुछ भी हो,आप मृत तथा भग्न ढांचों के स्वप्न नहीं देखा करेंगे,आप बीती हुई बिसार देंगे और आगे की सुध लेंगे।दृढ़ निश्चय कर लें कि अपने मस्तिष्क व हृदय से उन सभी विचारों को निकाल देंगे।वे कितने भी भयानक क्यों ना हों,कोई भय की बात नहीं।वे आपके मन में कितनी बार क्यों ना आएं,आप उन्हें भूल जाएं और उनसे कोई संबंध न रखें।चिंता तथा परेशानी को दूर करें।कहीं ऐसा ना हो कि वे आपकी शक्ति तथा सामर्थ्य को नष्ट कर रहे हैं क्योंकि आपकी शक्ति ही आपकी आगामी कामनाओं की पूंजी है।
3.जो बातें स्वभाव को बिगाड़े उन्हें भूलें (Forget the things that spoil your nature):
- जो बातें आपको अच्छी नहीं लगती,आपके स्वभाव को दूषित करती हैं या आपके मानसिक संतुलन को बिगाड़ देती हैं,उन्हें भूल जाएं और उनके बारे में कभी कुछ न सोचें।आपका समय इससे अधिक मूल्यवान है कि आप उसे भूली-बिसरी त्रुटियों और भूलों पर खेद प्रकट करने में नष्ट कर दें।यदि आप निराश तथा हतोत्साहित रहते हैं तो निराशा तथा उत्साहहीनता को इस प्रकार मन से निकाल दें,जैसे चोर को घर से बाहर धकेल दिया जाता है।
- अपनी कमजोरियों के लिए द्वार बंद कर दें और उसे बंद ही रखें।सुस्वभाव,जिंदादिली और प्रसन्नता की प्रतीक्षा न करें कि वह कब आएगी,बल्कि उसका पीछा करें और उसे प्राप्त करें,फिर अपने पास से जाने ही ना दें।
- यदि आपको कोई कटु अनुभव हो चुका है तो उसे भूल जाएं।यदि आपको भाषण देने में असफलता मिली है,यदि गीत गाते समय आपसे कोई चूक हो गई है,यदि आपकी लिखी हुई पुस्तक व लेख में कोई त्रुटि रह गई है,यदि किसी परिस्थिति विशेष के कारण आपका कदम गलत पड़ गया है,गिर पड़े और चोट आ गई है,यदि आप पर लांछन लगाया गया है,आपको गालियां दी गई हैं,तो इन सब बातों के बीत जाने पर उन्हें दोबारा याद करने से क्या लाभ? यदि आप उन्हें बार-बार दोहराएंगे तो बहुत हानि होगी,संतोष तथा सुख के अनेक क्षण नष्ट हो जाएंगे।
- यदि आपसे कोई भूल हो गई है,आपकी ख्याति को कोई ठेस पहुंची है और आपको शंका है कि आप पुनः उस पद तक नहीं पहुंच सकते तो भगवान के लिए यह भयानक पिंजर और डरावने साए अपने साथ-साथ लिए मत फिरिए।उन्हें अपने स्मृति पटल से मिटा दें और सर्वथा विस्मृत कर दें।यदि आप भविष्य में अपने मस्तिष्क को साफ रखेंगे,उसे प्राचीन स्मृतियों से दूषित नहीं होने देंगे तो आप यह देखकर चकित रह जाएंगे कि आपके जीवन में एक नया सूर्य उदय हो गया है और आपके आस-पास के लोग भी आपको एक नया और बदला हुआ इंसान पाएंगे।
4.विद्यार्थियों के कुछ कड़वे अनुभव (Some of the bitter experiences of the students):
- विद्यार्थी घर छोड़कर स्कूल,कोचिंग या ट्यूशन करने जाते हैं तो उन्हें विभिन्न विचारधाराओं,दृष्टिकोणों के विद्यार्थियों के साथ रहकर अध्ययन करना पड़ता है।यों भी व्यक्ति सामाजिक प्राणी है अतः एक अकेला रहकर जीवनयापन नहीं कर सकता है।यदि कुछ काल तक जंगलों,कन्दराओं में रहकर एकांतवास कर भी लेता है तो उसे वापस समाज के बीच आना पड़ता है।मनुष्य ही नहीं पशु-पक्षी भी सहजीवन से अपना जीवन व्यतीत करते हैं।विद्यार्थियों का आपस में उठना बैठना,वार्तालाप करना,विचारों का आदान-प्रदान करना होता रहता है।आपस में एक दूसरे से सवाल या प्रश्न पूछते हैं,कोई समस्या होती है तो एकदूसरे को बताते हैं,किसी से कोई शिकवा-शिकायत हो तो उसका समाधान पूछते हैं।
- ऐसी स्थिति में कई बार उनमें आपस में टकराव उत्पन्न हो जाता है,लड़ाई-झगड़ा या मारपीट हो जाती है।आपस में बोलचाल बंद हो जाती है,एकदूसरे के प्रति द्वेष-कटुता का भाव पाल लेते हैं।अबोध बच्चों में विशेषता होती है कि वे आपस में लड़-झगड़ लेते हैं दो तत्काल आपस की लड़ाई भूलकर फिर से खेलने लगते हैं परंतु किशोर और युवाओं के दुनियादारी का रंग चढ़ चुका होता है।वे छल,कपट,लड़ाई-झगड़ा करना,गाली गलोज करना,मारपीट करना आदि सीख जाते हैं।ये सब बातें वे माता-पिता,मित्रों,सहपाठियों और शिक्षकों आदि से ही सीखते हैं।
- अब यदि वे इन राग-द्वेषों आदि को मन पर लादे रहेंगे तो ये विकार मन पर जड़ जमा लेते हैं।धीरे-धीरे हमारे स्वभाव व आदतों में शामिल हो जाते हैं,अंतर्मन पर इनकी ऐसी छाप पड़ चुकी होती है,संस्कार पड़ चुके होते हैं कि हम संस्कारों के वशीभूत होकर ही अधिकांश कार्य करते हैं।विवेक भी इन संस्कारों,आदतों से मजबूर होकर दब जाता है,विवश और निष्क्रिय हो जाता है।
- राग-द्वेष और कड़वी बातें दूसरों के साथ व्यवहार करने से ही नहीं पनपती हैं,बल्कि खुद की कमजोरियों से भी कटु अनुभव संचित हो जाते हैं।जैसे आपको किसी परीक्षा,प्रतियोगिता परीक्षा,प्रवेश परीक्षा आदि में कठिन परिश्रम करने के बावजूद असफलता मिल गई हो।आपको रह-रहकर इस प्रकार की असफलता कचोटती रहती है,आप निराश,हताश और मायूस हो जाते हैं,अध्ययन में बिल्कुल मन ही नहीं लगता है।दुर्घटना में गंभीर चोट लग गई हो।आप 8 घंटे नियमित रूप से पढ़ने का संकल्प लेते हैं परन्तु इस संकल्प को पूरा नहीं कर पाते हैं।
- बार-बार कोशिश करने पर भी गणित के सवालों,प्रमेयों और समस्याओं को हल नहीं कर पाते हो।किसी अन्य विषय के प्रश्नोत्तर को स्मरण करते हो और फिर भूल जाते हो।सूत्र याद नहीं रहते हैं।पुस्तकों या अध्ययन की अन्य चीजें कहीं रखकर भूल जाते हैं और आप इस तरह से बार-बार भूलने की आदत से अपने आप पर खीझ उठते हैं।आप सुबह जल्दी उठना चाहते हैं परंतु उठ नहीं पाते हैं अर्थात देरी से उठते हैं।रात को जल्दी सो जाते हैं,नींद खूब आती है।अपने आप पर नियंत्रण नहीं है।जिस क्षेत्र में भी हाथ डालते हैं,उस कार्य को पूर्णता के साथ नहीं कर पाते हैं।
- भाई -बहन कहना नहीं मानते हैं,लड़ाई-झगड़ा करते हैं। माता-पिता की आज्ञा का पालन न करने या परीक्षा में असफलता मिलने पर जली-कुटी,खरी-खोटी बातें सुनाते हैं।आप सोचते रहते हैं कि आखिर उसके साथ ही ऐसा दोयम दर्जे का व्यवहार क्यों होता है,आखिर वह बार-बार क्यों असफल हो जाता है,आखिर भगवान उसके साथ अन्याय क्यों करता है? अथवा वह क्यों अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाता है।इस प्रकार के आपको अपने विद्यार्थी काल में अनेक कड़वे अनुभव होते हैं।इन सभी समस्याओं का मूल कारण ढूंढेंगे तो आपको पता चलेगा कि इन कटु अनुभवों को लादे रहना ही समस्या की जड़ है।
- यदि आप इनसे छुटकारा नहीं पाएंगे,समय-समय पर मन को इनसे खाली नहीं करेंगे,भूलना नहीं सीखेंगे तो आप मार्ग से भटक जाएंगे,आप गलत रास्ता अपना लेंगे।चोरी,उठाईगिरी,शराबी,अय्याश,बदमाश,लुटेरे आदि में से कुछ भी बन सकते हैं।यदि इन कटु अनुभवों को भुला देंगे,भुलाने की तकनीक सीख जाएंगे तो आपका जीवन आबाद हो जाएगा।
5.दृढ़ इच्छाशक्ति और संघर्ष (Strong will and struggle):
- इन कटु अनुभवों को समय -समय पर भुलाते रहना चाहिए।मन को इनसे खाली करते रहना चाहिए।जिस प्रकार बसंत ऋतु में पेड़ अपने पत्तों को बदल देते हैं और नए पत्ते धारण कर लेते हैं।उसी प्रकार कटु अनुभवों को भुलाकर जिंदगी की नई सिरे से शुरुआत करनी चाहिए।विद्यार्थी काल में ही कटु अनुभवों को भुलाने की कला सीख जाएंगे तो पूरा जीवन आनंदपूर्वक व्यतीत होगा।
- इन कटु अनुभवों को भुलाने के लिए पहले यह समझना होगा कि इनकी जड़े कितनी गहरी है,अतः उनको विदा करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति से काम लेकर शुभ कर्म कर्म करना होगा और इन अनुभवों के विपरीत आचरण (अच्छा,शुभ) करना होगा।संघर्ष करना होगा।यदि दो-चार माह पुराने कटु अनुभव हैं तो ज्यादा परेशानी नहीं होगी,परन्तु चार-पांच वर्ष पुराने कटु अनुभव हैं और आप रह-रह कर उनको याद करते हैं तो वे जड़ जमा चुके होते हैं,अतः उनको भूलने के लिए घोर संघर्ष करना होगा,दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रयत्न करना होगा।
- विद्यार्थियों को जैसे स्मरण शक्ति की आवश्यकता है,उसी प्रकार भूलने की भी आवश्यकता होती है।कटु अनुभवों को विदा करने के लिए भूलने की आदत की जरूरत है,तो पाठ याद करने,पढ़ाई की गई विषयवस्तु को याद करने के लिए स्मरणशक्ति की जरूरत है।जैसे कटु अनुभव होते हैं तो उसको अंदर आने के लिए हम आमंत्रण देते हैं अर्थात् उनको याद रखते हैं तो उन्हें भूलने की कला भी सीखनी चाहिए।ज्यादा पुराने कटु अनुभवों को भूलने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति,संघर्ष,धैर्य और विवेक की जरूरत होती है।केवल सोचने-विचारने से कटु अनुभवों को नहीं भूलते हैं बल्कि केवल सोचने-विचारने से तो कटु अनुभव और ताजा होते रहते हैं और उनकी याद कायम रहती है।यह याद हमारे मन को बार-बार कचोटती रहती है।जब तक आप पूरे मनोयोग,मनोबल,सुदृढ़ संकल्प और विवेक से काम लेकर प्रयत्न नहीं करते तब तक सोचने-विचार करने से,छोड़ने के उपाय करने और शपथ खाकर भूलने उनके टूटने पर पश्चाताप करने से कुछ नहीं हो सकता।कटु अनुभव जब आदत और संस्कार के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं तो फिर उनके वशीभूत किए गए कार्यों के बुरे परिणाम होंगे,बुरे परिणामों को भोगना भी उसे ही पड़ेगा।
6.स्वाध्याय और सत्संग करें (Do Swadhyaya and Satsang):
- कटु अनुभवों की जड़ लगते ही उन्हें समाप्त करना और भूलना बहुत आसान होता है।अतः विद्यार्थी को सावधान और सतर्क रहकर चलने की जरूरत है।मन को वश में रखें,मन वश में कर लिया तो समझ लें आपने बहुत बड़ा मैदान मार लिया है।मन,विवेक और आत्मिक नियंत्रण से ही वश में होता है।मन चंचल ही नहीं बहुत ताकतवर भी है इसीलिए हमसे अपनी मनमानी करवा लेता है।
- इसके अलावा मन के कटु अनुभवों को भुलाने का उपाय हैःस्वाध्याय और सत्संग करना।अपने अध्ययन करने में व्यस्त रहें,कोर्स की पुस्तकें पढ़ें और व्यावहारिक जीवनोपयोगी,ज्ञान की पुस्तकें,सत्साहित्य और कुछ आध्यात्मिक पुस्तकें पढ़ें।इससे आपका मन बार-बार कटु अनुभवों की याद दिलाने की तरफ दौड़ नहीं लगाएगा।मन को खाली छोड़ते ही यह अपने संस्कारों से प्रभावित होकर पुरानी यादों या अयथार्थ काल्पनिक बातों में रस लेने लगता है।
- असफलता या कटु अनुभव का इतना ही महत्त्व है कि आप अपनी कमजोरियों को पहचान लें और उसको दूर करने का प्रयास करें।आप कहेंगे कि 24 घंटे लगातार अध्ययन तो नहीं करते रहेंगे।मित्रों,सहपाठियों से मिलना भी होता है।कुछ मनोरंजन भी करना होता है।इसका उपाय यह है कि आप ऐसे ही मित्रों व सहपाठियों के साथ समय बिताएं जो अच्छी-अच्छी बातें करते हैं,ज्ञानवर्धक बातें करते हैं,आपकी तरक्की से प्रसन्न होते हैं और आपको सही परामर्श देते हैं,आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।आप कहेंगे कि ऐसे सज्जन और नेक लोग तो चिराग लेकर ढूंढने से भी नहीं मिलते हैं।आपकी बात आंशिक रूप से ही सही है।यदि आप कोशिश करेंगे तो ऐसे एक-दो सहपाठी,मित्र मिल ही जाएंगे।यदि नहीं भी मिलते हैं तो फिर अकेला रहना ही अच्छा है,बुरे लोगों की संगत में भूलकर भी नहीं रहना चाहिए।
- खाली समय में मनन-चिंतन करें,अपने कोर्स की पढ़ी हुई बातों को मन ही मन दोहराएं।मनोरंजन करें तो टीवी पर आस्था या ज्ञानवर्धक बातें बताने वाले चैनल ही देखें।इंटरनेट पर सर्फिंग करें तो अपने कोर्स या ज्ञान से संबंधित वेबसाइट पर ही लेख पढ़ें।अपने कटु अनुभवों की तरफ से आपका ध्यान हट जाएगा,समय के साथ स्वतः कटु अनुभवों की विस्मृति हो जाएगी।विद्यार्थी चाहे तो क्या नहीं कर सकता परंतु यदि आप पहले ही हार मान लेंगे,कटु अनुभवों और बुरी आदतों के सामने अपने आप को सरेंडर कर दोगे तो फिर दूसरा व्यक्ति,मार्गदर्शन देने वाला या अच्छा सुझाव देने वाला क्या कर सकता है? क्योंकि आखिर तो आपको ही निर्णय करना है और अमल भी विद्यार्थी को ही करना है।अब कोई जबरदस्ती आप पर कोई बात थोपे या आप स्वयं अपने आप पर थोपे तो ज्यादा टिकाऊ नहीं होती।आप पर अनाज की बोरी कोई जबरदस्ती लाद दे,तो गेट के पास जाते ही उसे पटक देंगे।
- उपर्युक्त आर्टिकल में कटु अनुभवों को कैसे भुलायें? (How to Forget Bitter Experiences?),कटु अनुभवों को भुलाने के रहस्य (Secrets for Forgetting Bitter Experiences) के बारे में बताया गया है।
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7.छात्र रो क्यों रहा है? (हास्य-व्यंग्य) (Why is Student Weeping?) (Humour-Satire):
- एक बार परीक्षा में बहुत से छात्र फेल हो गए।उसमें फेल होने वाले बहुत से छात्र-छात्राओं के कई विषयों में तो जीरो नंबर आए।उसी समय एक छात्र जोर-जोर से रोने लग गया।
- चिल्लाने लगाःहे भगवान मैं अब क्या करूं,मैं तो बिल्कुल बर्बाद हो गया हूँ।पास में बैठा चमन चिल्लाया: अबे! सब्र कर…….. इतनी जोर से क्यों रो रहा है? पीछे उस छात्र को देख,जो बेसुध हो गया है,पांच बार से इसी कक्षा में फेल हो रहा है और चुपचाप लेटा है।
8.कटु अनुभवों को कैसे भुलायें? (Frequently Asked Questions Related to How to Forget Bitter Experiences?),कटु अनुभवों को भुलाने के रहस्य (Secrets for Forgetting Bitter Experiences) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.कटु अनुभव क्यों भूलें? (Why forget the bitter experience?):
उत्तर:कटु अनुभवों को याद रखने से धीरे-धीरे व्यक्ति दुर्जन हो जाता है या हीनभावना से ग्रसित हो जाता है।निर्मल से निर्मल चरित्र पर भी कलंक लग जाता है।बसंत ऋतु के नए फलों में भी घुन लग जाता है और कलियां खिलने से पहले ही हवा के झोंको से मुरझा जाती है।
प्रश्न:2.दूसरों के दोष क्यों नहीं देखना चाहिए? (Why not see the faults of others?):
उत्तर:दूसरे के दोष पर ध्यान देते समय हम स्वयं भले बन जाते है।परंतु जब हम अपने दोषों पर ध्यान देंगे,तो अपने आप को कुटिल और कामी पाएंगे।
प्रश्न:3.कटु अनुभवों को भूलने का क्या लाभ है? (What is the use of forgetting bitter experiences?):
उत्तर:जब कटु अनुभवों को विद्यार्थी भूलता है तभी सही मायने में वह अध्ययन एकाग्रतापूर्वक कर पाता है।चंचल व अस्थिर मन से अध्ययन करना फलदायी नहीं होता है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा कटु अनुभवों को कैसे भुलायें? (How to Forget Bitter Experiences?),कटु अनुभवों को भुलाने के रहस्य (Secrets for Forgetting Bitter Experiences) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
About my self I am owner of Mathematics Satyam website.I am satya narain kumawat from manoharpur district-jaipur (Rajasthan) India pin code-303104.My qualification -B.SC. B.ed. I have read about m.sc. books,psychology,philosophy,spiritual, vedic,religious,yoga,health and different many knowledgeable books.I have about 15 years teaching experience upto M.sc. ,M.com.,English and science.










