Menu

How is Behavior Glimpse of Personality?

Contents hide

1.व्यवहार व्यक्तित्व की झलक कैसे है? (How is Behavior Glimpse of Personality?),व्यवहार में व्यक्तित्व की झलक (Glimpses of Personality in Behavior):

  • व्यवहार व्यक्तित्व की झलक कैसे है? (How is Behavior Glimpse of Personality?) के द्वारा हम समझेंगे कि छात्र-छात्रा के लिए व्यवहार शिष्ट और शालीन रखना कितना जरूरी है? व्यवहार केवल इंटरव्यू के लिए जरूरी नहीं है बल्कि जाॅब,शिक्षा प्राप्त करने और व्यावहारिक जीवन के लिए भी जरूरी है।
  • आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस गणित के आर्टिकल को शेयर करें।यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें।जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके।यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए।आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं।इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।
  • प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी लेख।

Also Read This Article:गणित के विद्यार्थी व्यवहार कुशल बनें

2.व्यवहार से हमारी इमेज बनती है (Behavior builds our image):

  • व्यवहार में व्यक्तित्व की झलक झलकती है,हमारी छवि प्रतिबिंबित होती है।व्यवहार में हमारी सोच,हमारे निजी विचार,विश्वास एवं मर्म छिपा रहता है।व्यवहार से इन सभी की अभिव्यक्ति होती है।हर व्यक्ति की अपनी एक विशिष्ट छवि होती है और यह छवि हमारे व्यवहार के द्वारा परिलक्षित होती है।बाह्य जगत में व्यवहृत व्यवहार  कुछ नहीं है,बल्कि अंदर में हम जो कुछ है,उसकी झलक मात्र है।हम जैसे होते हैं,वैसा ही हम व्यवहार करते हैं।होने एवं झलकने के बीच एक गहरा संबंध है,जिसे नकारा नहीं जा सकता है।
  • हर व्यक्ति के व्यक्तित्व की संरचना होती है।उस संरचना में अनेक तत्त्व होते हैं,जिनमें कुछ दृश्य होते हैं एवं कुछ अदृश्य।जो दिखाई देता है,वह हमारा व्यवहार होता है और जो अदृश्य के पटल पर छिपा रहता है,उसमें हमारी आस्था,विश्वास,विचार एवं भाव सम्मिलित होते हैं।इन दृश्य एवं अदृश्य तत्त्वों के आधार पर हमारी इमेज (छवि) बनती है,जिसे सेल्फ इमेज कहते हैं।यदि हमारी इमेज स्वच्छ,साफ एवं विधेयात्मक है,तो हमारी कार्यक्षमता बढ़ जाती है और हमारा व्यवहार शिष्ट एवं शालीन होता है।हम जो कुछ भी करते हैं,उसका गहरा असर पड़ता है औरों पर।सामान्य रूप से ऐसे व्यक्ति को सज्जन एवं सभ्य कहा जाता है।
  • सज्जन एवं श्रेष्ठ व्यक्ति की इमेज (छवि) आंतरिक एवं बाह्य,दोनों रूपों में परिष्कृत होती है।अतः इनके व्यवहार का असर पड़ना स्वाभाविक है।इनका व्यवहार इतना आकर्षक एवं प्रभावोत्पादक होता है कि लोग बरबस इनके पास खिंचे चले आते हैं;क्योंकि इनके व्यवहार का आधार होता है उनका गहरा विश्वास,प्रगाढ़ आस्था,संवेदनशील हृदय एवं परिपक्व विचार।इन आंतरिक तत्वों से संचालित होने के कारण इनके व्यवहार एवं प्रभाव का,गुणों का किसी के हृदय में उतर जाना स्वाभाविक है।ऐसे श्रेष्ठ व्यक्तियों से जो भी मिलता है,बस उनका हो जाता है,फिर उन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकता।हमारे अंदर में उनकी अमिट छाप पड़ जाती है,जिसे मिटा पाना संभव नहीं होता।
  • ऐसे श्रेष्ठ व्यक्तियों को कभी भी असफलता नहीं मिलती और यदि असफलता मिलती भी है तो वे उसके कारणों का निराकरण करके अंततः सफल ही हो जाते हैं।वस्तुतः सफलता और असफलता तो देखने का नजरिया भी है।सफलता और असफलता के मायने बाह्य जगत में महत्त्वपूर्ण हैं,परंतु इनकी दृष्टि से देखें तो इनके मायने बड़े ही भिन्न एवं जुदा हैं।ये सफलता उसे मानते हैं,जिससे किसी सत्पात्र का भला हो,समाज एवं राष्ट्र के विकास में सहायक हो तथा इसके मिलने से आंतरिक प्रसन्नता और उल्लास की छटा छा गई हो।इनके लिए सफलता अहंकार का पोषण एवं परिवर्द्धन मात्र नहीं है।

3.नकारात्मक लोगों का प्रभाव (Influence of negative people):

  • सामान्य व्यक्तियों की छवि बड़ी ही धुंधली एवं अस्पष्ट होती है,इसलिए इनके विचार एवं व्यवहार में कोई तारतम्य नहीं होता,सब कुछ बड़ा ही बिखरा-बिखरा सा होता है;क्योंकि ये लोग सदा ही अपनी पिछली असफलताओं एवं उनसे मिली हताशा से इस कदर चिपके रहते हैं कि वे सोच ही नहीं पाते कि कभी अच्छा भी किया जा सकता है।ये सदा डरते रहते हैं कि कहीं कोई गलती न हो जाए और गलती हो जाने से अच्छा-खासा कोई नुकसान ना हो जाए।इनकी सोच इतनी नकारात्मक होती है कि न तो ये कोई बड़ी योजना बना सकते हैं और न ही किसी को श्रेष्ठ सलाद दे पाते हैं।कैसे काम बिगड़ेगा,इस पर इनका अधिक ध्यान रहता है,न कि कैसे काम बनेगा।
  • ऐसे व्यक्तियों को सुख की अपेक्षा दुःख अधिक अच्छा लगता है।ये सुख की तो कल्पना ही नहीं कर सकते,सदा दुःख एवं दर्द की कराह से चिपके रहते हैं।इनकी मानसिक संरचना कुछ ऐसी बन जाती है कि ये किसी व्यक्ति को ना तो सुखी एवं स्वस्थ देख पाते हैं और ना इस तरह की सलाह ही दे पाते हैं।जब भी ये किसी को असफल होते देखे हैं तो इनको आंतरिक प्रसन्नता होती है।असफलता की घटना एवं कहानी इनको बड़ी प्रिय होती है।ये अपने आस-पास इसी तरह की चीजों को आकर्षित करते हैं।अतः इनके आसपास आसुरी शक्तियों एवं अँधेरे का जमघट होता है।ऐसे लोग जहां पर भी उपस्थित होते हैं,वहां बुरी घटनाएं होना स्वाभाविक हो जाता है।इनका व्यक्तित्व आसुरी शक्तियों के द्वारा संचालित होता है,अतः ये सदा ही हताशा-निराशा के शिकार होते हैं।इनके अंदर नकारात्मक विचारों का जमघट होता है।
  • आपने देखा होगा कि ऐसे विद्यार्थी जहां कहीं जाते हैं,वहां ही कुछ अनहोनी दुर्घटना घटित हो जाती है।यदि कक्षा में सब छात्र-छात्राएं शिष्ट और शालीन होते हैं तो कक्षा का संचालन ठीक-ठाक चल रहा होता है।यदि कोई नकारात्मक चिंतन एवं व्यवहार का विद्यार्थी कक्षा में प्रवेश ले लेता है तो कक्षा का संतुलन डगमगाने लगता है,कक्षा में अशांति का वातावरण बन जाता है।एक नकारात्मक व्यवहार वाला विद्यार्थी पूरी कक्षा को अशांत कर देता है।अध्यापक और छात्र-छात्राएं भी समझ नहीं पाते हैं कि सब कुछ ठीक-ठाक होने के बावजूद कक्षा में अचानक शोरगुल होना,अशांत होना,उत्पात होना कैसे चालू हो गया।
  • ऐसे नकारात्मक छात्र अपने साथ अन्य छात्र-छात्राओं के व्यवहार को भी बदल देते हैं।बुरे कार्यों की तरफ आकर्षण होता है अतः छात्र-छात्रा जल्दी से सीख जाते हैं।इसीलिए जो प्राचार्य सजग एवं जागरूक होते हैं वे नए प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्रा की ठीक से जांच परख करते हैं,कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं है इसे भी देखते हैं।यहां तक कि कई प्राचार्य तो माता-पिता का मूल्यांकन भी करते हैं।
  • ऐसे विद्यार्थी नकारात्मक ऊर्जा का सघन पुंज होता है। वह आसुरी शक्तियों का आकर्षण का केंद्र होता है।आसुरी शक्तियां उसके माध्यम से अपना खेल खेलती है।बसों,ट्रकों व वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का यह भी एक बड़ा कारण होता है।ऐसे व्यक्तियों की छवि बड़ी ही नकारात्मक होती है तथा इनके चिंतन एवं व्यवहार बबूल के पेड़ में उगे कांटे के समान कँटीले होते हैं।ऐसे लोगों और विद्यार्थी से एवं इस तरह के नकारात्मक चिंतन एवं व्यवहार से जितनी अधिक दूरी बनाई जा सके,उतना ही श्रेयस्कर है।
  • व्यवहार में शिष्टता एवं विनम्रता होनी चाहिए तथा चिंतन को श्रेष्ठ बनने के लिए स्वाध्याय की आदत डालनी चाहिए।नकारात्मक ऊर्जा को दूर हटाने के लिए जप करना चाहिए।इस क्रम में सरस्वती,गायत्री एवं महामृत्युंजय मंत्र अतिशय चमत्कारी-लाभकारी होते हैं। मंत्र के जप से हमारे अंदर की नकारात्मक ऊर्जा घटती है,जिससे हमारा व्यक्तित्व निखरने लगता है।इससे भाव,विचार एवं व्यवहार सभी सधने एवं परिष्कृत होने लगते हैं।

4.सौम्य और मधुर व्यवहार से छात्र-छात्राओं को लाभ (Gentle and sweet behavior benefits students):

  • सौम्य,मधुर,शिष्ट,शालीन और विनम्र व्यवहार के यों तो अनेक लाभ और उपयोगिता है परन्तु हम छात्र-छात्राओं के लिए मुख्य रूप से उपयोगी व लाभप्रद बिंदुओं की ही चर्चा करेंगे।आज का छात्र-छात्रा सबसे प्रमुख करियर,जॉब व भविष्य निर्माण को ही वरीयता देता है। उसे जाॅब मिल जाए,इसी के इर्द-गिर्द अपना ताना-बाना बुनता है और इसीलिए भी शिक्षा प्राप्त करता है।परंतु डिग्री प्राप्त कर लेना और स्किल का होना ही किसी जाॅब या करियर की सफलता का मापदंड नहीं है।डिग्री और स्किल के आधार पर जाॅब या नौकरी तो मिल सकती है परंतु उसमें सफल होना केवल स्किल और डिग्री पर निर्भर नहीं है।हालांकि आजकल जाॅब या नौकरी के लिए जो इंटरव्यू लिया जाता है उसमें आपके व्यवहार और व्यक्तित्व का भी परीक्षण किया जाता है।अतः स्किल और डिग्री 100% गारंटी नहीं देते हैं कि आपको जाॅब या नौकरी मिल ही जाएगी।
  • अतः सबसे प्रथम लाभ यह है कि यदि आप व्यवहारकुशल हैं तो आप इंटरव्यू का सामना पूर्ण आत्मविश्वास से कर सकते हैं और उसमें सफल हो सकते हैं।इंटरव्यू में आपकी सरलता,स्पष्टता,मधुर तथा विनम्र व्यवहार,धैर्य,शिष्टता,विचारों की अभिव्यक्ति तथा समस्याओं को निपटने की क़ूवत आदि को जाँचा-परखा जाता है।जो छात्र-छात्रा इस बात को जानते हैं वे शुरू से अपने आप को व्यवहारकुशल बनाने का प्रयास करते हैं और सफल होते हैं।परन्तु जो छात्र-छात्रा इस तरफ से लापरवाह रहते हैं और केवल डिग्री व स्किल पर ही ध्यान देते हैं,वे मात खा जाते हैं।
  • दूसरा लाभ यह है कि छात्र जीवन में प्रत्येक छात्र-छात्रा को अपने सहपाठियों से वार्तालाप,डिस्कस,संवाद करना पड़ता है,एक दूसरे को अपनी समस्याएं शेयर करते हैं,सवालों को हल नहीं कर पा रहे हैं तो मदद लेते हैं,कई बार दिमाग को रिफ्रेश करने के लिए हल्की-फुल्की हंसी-मजाक भी कर लेते हैं,इस प्रकार अनेक बातों को आपस में शेयर करते समय शिष्ट,विनम्र और शालीन व्यवहार रखना होता है।इससे आप अनेक समस्याओं का समाधान प्राप्त करते हैं।यदि आप रूखा,रूढ़ व्यवहार करते हैं तो समस्याओं का समाधान प्राप्त करना तो दूर रहा,आपस में झगड़ पड़ेंगे,आपस में मनमुटाव होगा और आप तनावग्रस्त हो जाएंगे।आप किसी को रुपए देकर मनमाफिक सुझाव या समस्या का समाधान प्राप्त नहीं कर सकते हैं,परंतु मधुर,विनीत और सौम्य व्यवहार से बिना कुछ भुगतान किए उनसे बहुत अधिक सहयोग,मदद प्राप्त कर सकते हैं।
  • तीसरा लाभ यह है कि आपका व्यावहारिक व सांसारिक जीवन शांति और सुखप्रद हो इसके लिए आपका व्यवहारकुशल होना जरूरी है।लोगों से मित्रता बढ़ाने,आपस में व्यवहार करने,लेन-देन करने,बाजार में खरीद-फरोख्त करने,कहीं पर आने-जाने,जॉब करते समय सहकर्मियों से वार्तालाप आदि सभी जगह नम्र और शिष्ट व्यवहार का बहुत प्रभाव पड़ता है।आप जिससे भी मिलेंगे उसको अपनी ओर आकर्षित कर लेंगे।आपको लोग मिलनसार और व्यावहारिक समझेंगे,लोग आपसे संबंध बढ़ाने के लिए उत्सुक रहेंगे।सभी का आप मन मोह लेंगे।नए रिश्ते बनाने,खुद का घर बसाने,रिश्ते बनाने में भी व्यवहारकुशल व्यक्ति को कोई दिक्कत नहीं होती है।इसीलिए कुछ लोग अपने व्यवहार से सबको अपना प्रिय बना लेते हैं जबकि कर्कश,रूखे,उज्जड़ व्यवहार वाले लोगों से अन्य लोग कतराते हैं,उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहते हैं,कोई भी अपनी मन की बात को उनसे कहना नहीं चाहता है।

5.छात्र व्यवहार की कला कैसे सीखें? (How to learn the art of student behavior?):

  • छात्र-छात्राएं स्वाध्याय,सत्संग के द्वारा व्यवहार करने की कला सीख सकते हैं।सत्संग अपने से श्रेष्ठ लोगों के साथ करना चाहिए।श्रेष्ठ लोगों से बातचीत करने का ढंग,उठने बैठने व विचारों को प्रकट करने की कला सीख सकते हैं।बालक श्रेष्ठ व्यक्ति को भी विनम्र,सेवा,सहयोग जैसे गुणों को करते देखता है,तो उसके मन में भी वैसा ही करने की जिज्ञासा उत्पन्न होती है।छात्र-छात्रा अधिकांश बातें शिक्षक,माता-पिता व सहपाठियों से सीखता है।अतः शिक्षकों व माता-पिता को अपना नैतिक चरित्र उज्ज्वल रखना चाहिए।शिक्षक बच्चों को अच्छा आचरण,चरित्रवान बनने की सीख सिखा सकता है।शिक्षक अपने आचरण को आदर्श व चरित्र उज्ज्वल रखना चाहिए,क्योंकि छात्र-छात्रा उपदेश की बजाय आचरण के द्वारा सीखता है।शिक्षक के चरित्र में ऐसा खोट नहीं होना चाहिए,जिससे छात्र-छात्रा के मन में शिक्षक के प्रति अश्रद्धा उत्पन्न हो।
    परंतु आजकल के शिक्षकों में ऐसे शिक्षक विरले ही होंगे जो गुरु होते हैं।कई शिक्षक तो छात्र-छात्राओं के साथ नशा करते हैं।बच्चों से बीड़ी-सिगरेट मंगा कर पीते हैं,तो उनसे बच्चे क्या सीख सकते हैं।
  • छात्र-छात्राएँ स्वयं अच्छे साहित्य का अध्ययन करें और स्वाध्याय करें अर्थात् अपने आप का निरीक्षण करते रहना चाहिए और जो भी दोष-दुर्गुण दिखाई दें उन्हें धीरे-धीरे उखाड़ फेंकना चाहिए।स्वयं के द्वारा आचरणवान बनना ज्यादा सरल है,क्योंकि इससे दूसरों के द्वारा दी गई नसीहत का नेगेटिव इफेक्ट नहीं पड़ता है।दूसरा कोई व्यक्ति हमारे दोष-दुर्गुण बताता है तो हमारे अंदर अहंकार उत्पन्न हो सकता है और अहंकार हमारे पतन का कारण बन जाता है।अहंकारी छात्र-छात्रा अपने सामने किसी को कुछ भी नहीं समझता है।दूसरों के द्वारा दी गई नसीहत भी उसे बुरी लगती है।अहंकार विद्या ग्रहण करने में बाधक है,क्योंकि अहंकारी विनम्र नहीं होता है और विद्या ग्रहण करने के लिए विनम्रता जरूरी है।
  • माता-पिता के आचरण से भी विद्यार्थी बहुत सी अच्छी बातों को सीख सकता है।माता-पिता को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे बच्चों को किसी के सामने झिड़के नहीं,डांट-फटकार न लगाएँ और न दूसरों से तुलना करना चाहिए।यदि बच्चों में कोई दोष-दुर्गुण हो तो उन्हें एकांत में समझाएं तथा उन दुर्गुणों के हानिकारक प्रभाव बताएं।बच्चों में अनुकरण करने की प्रवृत्ति होती है अतः माता-पिता को अपना आचरण आदर्शयुक्त रखना चाहिए।अच्छा कार्य करने पर,सहायता-सहयोग करने पर बच्चों की प्रशंसा करके प्रेरित करना चाहिए।परंतु इतनी प्रशंसा भी नहीं करना चाहिए कि उसमें अहंकार पैदा हो जाए।बालक के आत्मविश्वास को हर प्रकार बढ़ाना चाहिए,किंतु इतना भी नहीं कि उसे अपनी योग्यता और पात्रता पर अहंकार हो जाए और वह इतराने लगे,बल्कि उसके रोम-रोम में यह विचार उत्पन्न कर देना चाहिए कि माता-पिता उसके लिए भगवदीय देन हैं और उसे सारी योग्यता और शक्ति प्रदान करने वाला परमपिता परमेश्वर है।यदि माता-पिता बालकों की आत्मिक प्रकृति से अपील करें और उन्हें भगवान की एक पवित्र देन समझें तो उनके बच्चे अत्यंत योग्य,बुद्धिमान और सदाचारी बन सकते हैं।
  • बालकों की शिक्षा-दीक्षा में सबसे आवश्यक और महत्त्वपूर्ण बात उसके स्वाभाविक,यथार्थ और हर्षोत्पादक विचारों की अभिव्यक्ति को प्रोत्साहन देना है,किंतु बहुत कम बच्चों की शिक्षा-दीक्षा इस ढंग से हो पाती है कि उनके स्वाभाविक विकास में कोई बाधा या शारीरिक वृद्धि में कोई रुकावट ना हो।हृदय की बात स्पष्ट रूप से कह पाने तथा इच्छा के विरुद्ध बलात कुछ काम कर लेने से उनके मानसिक अंग क्षीण तथा क्रियाहीन हो जाते हैं।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में व्यवहार व्यक्तित्व की झलक कैसे है? (How is Behavior Glimpse of Personality?),व्यवहार में व्यक्तित्व की झलक (Glimpses of Personality in Behavior) के बारे में बताया गया है।

Also Read This Article:व्यवहारकुशलता के 6 अनमोल मोती

6.छात्र का जलवा (हास्य-व्यंग्य) (Student’s charm) (Humour-Satire):

  • टीचर:कर लगाकर शब्द बनाओ।
  • छात्र:आचरण कर,अच्छा कर,श्रेष्ठ कर,व्यवहार कर,उन्नति कर,प्रशंसा कर,प्रोत्साहित कर,निंदा कर,चोरी कर,नकल कर,अवनति कर।
  • टीचर:तुम्हें व्यवहारकुशलता के लिए अच्छे गुणों को ही धारण करना चाहिए।
  • छात्र:अच्छे गुणों को धारण करने की जरूरत कहां है,ये शब्द भी इसलिए याद कर लिए ताकि परीक्षा में प्रश्न का उत्तर सही दे सकूं।

7.व्यवहार व्यक्तित्व की झलक कैसे है? (Frequently Asked Questions Related to How is Behavior Glimpse of Personality?),व्यवहार में व्यक्तित्व की झलक (Glimpses of Personality in Behavior) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.व्यवहार कुशल कैसे बनें? (How to become tactful?):

उत्तर:भविष्य में सफल तथा व्यवहार कुशल व्यक्ति बनने के लिए जरूरी है कि बच्चों को विचारों की अभिव्यक्ति पर भी ध्यान दिया जाए।

प्रश्न:2.माता-पिता का प्रभाव कैसे पड़ता है? (How do parents influence?):

उत्तर:माता-पिता के चुंबकीय प्रभाव से बच्चे जो कुछ सीखते हैं,वहीं उनके मानस पटल पर अंकित हो जाता है।यह प्रभाव ही उनके सफल-असफल भविष्य का निर्धारण करता है।

प्रश्न:3.बच्चों को डांटे क्यों नहीं? (Why not scold the children?):

उत्तर:बच्चों की या उनसे उत्पन्न हुई किसी भी समस्या का हल डांट-फटकार या मारपीट नहीं है।इससे तो वे धृष्ट या जिद्दी बनते हैं।बच्चों का कोमल हृदय तो प्रेम से ही जीता जा सकता है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा व्यवहार व्यक्तित्व की झलक कैसे है? (How is Behavior Glimpse of Personality?),व्यवहार में व्यक्तित्व की झलक (Glimpses of Personality in Behavior) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
No. Social Media Url
1. Facebook click here
2. you tube click here
3. Instagram click here
4. Linkedin click here
5. Facebook Page click here
6. Twitter click here
7. Twitter click here

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *