6Point to Identify Moment of Good Luck
1.सौभाग्य के क्षण को पहचानने के 6 बिंदु (6Point to Identify Moment of Good Luck),सौभाग्य के क्षण को कैसे पहचानें? (How to Recognize Moment of Good Luck?):
- सौभाग्य के क्षण को पहचानने के 6 बिंदु (6Point to Identify Moment of Good Luck) के आधार पर अपने अच्छे अवसर की पहचान करके सदुपयोग कर सकेंगे।अच्छे अवसर को पहचानने के लिए हमेशा सतर्क और सावधान रहना होगा परंतु यदि असतर्क,गफलत में पड़े रह जाएंगे तो ये क्षण हाथ से चला जाएगा।
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2.सौभाग्य और दुर्भाग्य दोनों जीवन में आते हैं (Both good luck and misfortune come to life):
- सौभाग्य और दुर्भाग्य में मौलिक अंतर होता है।सौभाग्य चुपके से दबे पांव आता है और जीवन के दरवाजे पर दस्तक देकर चला जाता है।जो इस अवसर को पहचानता है,जागरूक एवं सचेत होता है,वही इसका लाभ ले पाता है,जबकि दुर्भाग्य दरवाजे पर खड़ा होकर तब तक जबरदस्त दस्तक देता रहता है,जब तक कि दरवाजा खुल न जाए।सामान्यरूप से इस दस्तक से भयभीत होकर या जाने-अनजाने हम दरवाजा खोलकर दुर्भाग्य को अंदर आने का अवसर देते हैं,पर जब दुर्भाग्य एक बार प्रवेश कर जाता है तो यह पूरी क्षमता के साथ अपना प्रभाव दिखाता है और नियत समय तक अटल-अविचल बना रहता है,हिलता-डुलता तक नहीं और हमारे जीवन को तहस-नहस करता रहता है।
- सौभाग्य चुपके से आता है दुर्भाग्य सबको बता-जताकर आता है।हां,यदि सौभाग्य अति प्रबल हो तो यह भी द्वार देहरी पर तब तक खड़ा रहता है,जब तक कि उसे प्रवेश न दे दिया जाए।यह स्थिति विरल होती है।अतिपुण्यवानों के जीवन में ऐसा महान अवसर आता है।उन्हें इस अवसर को न चाहने पर भी स्वीकारना पड़ता है,परंतु अगाध तप से आपूरित तपस्वी सौभाग्य को भी चाहे तो प्रवेश करने देता है और अनिच्छुक होने पर इसे किसी योग्य सत्पात्र में रूपांतरित भी कर सकता है।तपस्वी के लिए सामान्य बात है,क्योंकि वह सौभाग्य को अपनी तपस्या के लिए बाधक मानता है,इसलिए ऐसा करता है।
- सौभाग्य आखिर क्यों चुपके से आता है और चला जाता है,इसका कारण है कि सौभाग्य सम्मान एवं आदर की अपेक्षा करता है।जो सुख-सौभाग्य को जितना आदर एवं मान देता है,उसके जीवन में वह उतना ही गहराई से अपना प्रभाव दिखाता है।यदि जीवन में सौभाग्य का उदय पद एवं प्रतिष्ठा के रूप में हुआ है तो उसे बनाए रखने के लिए सदा यत्न करना चाहिए,अन्यथा यह समय से पूर्व ही विदा हो सकता है या फिर अपना संपूर्ण प्रभाव दिखाने से वंचित हो सकता है।सौभाग्य कई रूपों में आता है।यह हमारे भाग्य एवं पुण्य के रूप में आता है।कभी-कभी किसी को अचानक अपार संपदा की प्राप्ति हो जाती है और कुछ ही समय में रंक से राजा बन जाता है;अपार वैभव का स्वामी बन जाता है।संपदा मिलने वाले अवसर को यदि ठीक से पहचाना नहीं जा सका तो यह अवसर हाथ से फिसल भी सकता है; क्योंकि यह सुअवसर कुछ ही पल के लिए आता है।
- प्राप्त वैभव एवं ऐश्वर्य का उपयोग एवं उपभोग निजी विवेक पर निर्भर करता है।इसका सदुपयोग एवं सार्थक प्रयोग करने वाले इसको भी द्विगुणित-बहुगणित कर सकते हैं,परंतु दुरुपयोग करने वाले समय से पूर्व ही संचित कोश को रिक्त कर देते हैं और दुर्भाग्य का रोना रोते हैं।सौभाग्य तो उस बीज के समान होता है,जिसको बोते रहने से यह बढ़ता रहता है।पुण्यकार्य में,परमार्थ में,सेवा-कार्यों में इसको नियोजित करने पर यह भले ही तात्कालिक नुकसान के रूप में प्रतीत हो,पर ऐसा होता नहीं है,यह तो सौगुना,हजार गुना होकर वापस लौट आता है।
3.सुअवसर का दृष्टांत (Parable of Opportunity):
- एक विद्यार्थी के जीवन में एक अवसर आया था,जबकि उसकी आर्थिक स्थिति अत्यन्त दयनीय एवं शोचनीय थी,परंतु इतनी विपन्नता एवं अभाव की स्थिति में वह आगंतुकों की बड़े प्रेम से सेवा किया करता था।इस सेवा के अवसर को उसने बड़े यत्नपूर्वक सहेज लिया था। स्वयं भूखा-प्यासा रहकर भी आगन्तुकों को भोजन-वस्त्रादि देकर सेवा किया करता था।ऐसा एक दिन भी नहीं आया कि उस विद्यार्थी ने किसी की सेवा न की हो।जब हम किसी के प्रति भावनाओं से जुड़ जाते हैं,आंतरिक रूप से सम्मान एवं श्रद्धा रखते हैं तो इसका निर्वाह कठिन नहीं होता है,दुर्लघ्य परिस्थितियों से वह सम्पन्न होता रहता है।उस विद्यार्थी के साथ भी यही था।वह आगन्तुकों की हर प्रकार से सेवा किया करता था क्योंकि सेवाधर्म उसकी वृत्तियों में समाहित था।
- एक बार विद्यार्थी थका-हारा था।आंधी-तूफान के साथ तेज बारिश हो रही थी।भूख भी लग रही थी।ज्योंही भोजन खाने बैठा।एक साधु द्वार पर आया और पुकार करने लगा कि वह भूखा है।उसे अपने कर्त्तव्य की याद आई और अपने भोजन के थाल को साधु के सामने परोस दिया।साधु सारी स्थिति से अवगत थे।साधु ने कहा कि तूने आगन्तुकों की सेवा की है।अपना दुःख-सुख भूलकर भी सेवा करता रहा है।अपना भोजन भी मुझे परोस दिया और खुद भूखा रह गया।इसलिए आज मैं तुझे आशीर्वाद देता हूं कि तेरा जॉब लग जाएगा।तेरे पास संपदा एवं संपत्ति की कोई कमी नहीं होगी।विद्यार्थी ने इस दिव्य अवसर को हाथ से जाने नहीं दिया और साधु की कृपा से अथाह चल-अचल संपदा का स्वामी बन गया तथा उसको शानदार जाॅब भी मिल गया।सौभाग्य कृपा के रूप में भी बरस पड़ता है परंतु उसके लायक स्वयं को बनाना पड़ता है।
- प्रबल सौभाग्य द्वार की देहरी में तब तक प्रतीक्षारत रहता है,जब तक कि उसे ग्रहण न कर लिया जाए।चंद्रगुप्त के पास ऐसा ही प्रबल सौभाग्य उपस्थित हुआ था और वह सौभाग्य उनको अखंड भारत का चक्रवर्ती सम्राट बनने तक अटल खड़ा रहा।ऐसा छत्रपति के साथ भी हुआ।उन्होंने मराठा राज्य की स्थापना की और सौभाग्य उनके चरणों में लोटता रहा।उन्होंने इस अवसर को भरपूर सम्मान दिया और वे ऐसे विरल सम्राटों में से एक थे,जिनका आध्यात्मिक जीवन बड़ा गहरा था,परंतु सामान्यरूप से अवसर किसी की प्रतीक्षा नहीं करता है।अवसर की प्रतीक्षा करनी पड़ती है,उसकी पहचान करनी पड़ती है और जो ऐसा कर पाता है,उसके जीवन में सौभाग्य विविध रूपों में आता है।
- दुर्भाग्य को आमंत्रण देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है,बल्कि कह सकते हैं कि हम ही उसे आमंत्रित करते रहते हैं और वह हमारे जीवन में प्रवेश करने तक बेशर्म की तरह इंतजार करता है।विवेकवान उसके लिए अपना द्वार बंद किए रहते हैं,परंतु जिसके पास समझ का अभाव होता है,उनका द्वार इसके लिए खुला रहता है।समझ का अभाव ही तो व्यक्ति को अहंकारी बनाता है और अहंकारी व्यक्ति सतत दुर्भाग्य को साथ लेकर चलता है;क्योंकि वह सौभाग्य के सुअवसर के लिए अपने दरवाजे पर मोटी साँकड़ चढ़ा रखता है।दुर्भाग्य अत्यन्त घातक होता है।यह मायावी होता है और उसके भी रूप होते हैं,जो विभिन्न प्रकार के रोग,शोक,दरिद्रता,अभाव आदि रूपों में प्रकट होते हैं।दुर्भाग्य नानाविध कष्ट एवं पीड़ा प्रदान करता है,जीवन को संकट में डालता है,घोर आर्थिक समस्या पैदा करता है,समाज में अपमान एवं तिरस्कार का माहौल रचता है। यह उन षड्यंत्रकारीयों का साथ देता है,जो केवल व्यक्ति के लिए घोर अभिशाप के समान होते हैं।
4.छात्र-छात्राएँ सौभाग्य और दुर्भाग्य की परख कैसे करें? (How do students judge good fortune and misfortune?):
- सौभाग्य और दुर्भाग्य की परख और पहचान केवल बुद्धि एवं विवेक के द्वारा ही संभव है।एक चुपके से आकर चला जाता है और दूसरा अपने आने की आहट ही नहीं देता,परंतु आ धमकने के बाद अंत तक धमा-चौकड़ी मचाता रहता है।दुर्भाग्य के प्रवेश करने के बाद की स्थिति को भोगने वाला ही जान सकता है।अतः हमें शांत एवं स्थिर होकर सुअवसर का लाभ लेना चाहिए एवं दुर्भाग्य के लिए सारे रास्ते बंद कर देना चाहिए।हालांकि ऐसा कर पाना अत्यंत कठिन है,लेकिन भगवान की कृपा से ऐसा संभव हो सकता है।सतत सेवा एवं पुण्य कर्म करते रहने से अनेक सुअवसर आते हैं और दुर्भाग्य का जाल कटता रहता है।अतः जीवन में सौभाग्य की प्राप्ति एवं दुर्भाग्य को टालने के लिए सतत सदाचरण करते रहना चाहिए।
- हर विद्यार्थी के जीवन में सौभाग्य और दुर्भाग्य के पल आते हैं।परंतु जो विद्यार्थी सोए पड़े रहते हैं,सतर्क व सावधान नहीं रहते हैं,उनको पता ही नहीं चलता है कि कब सौभाग्य का अवसर आ गया है और छिटक कर चला गया है।परंतु दुर्भाग्य आते ही तीव्र प्रतिक्रिया करते हैं और सोचते रहते हैं कि उनके जीवन में दुर्भाग्य और बुरा होता रहता है।दुर्भाग्य यानी असफलता मिलना,जॉब नहीं मिलना और दुःख व कष्ट से पीछे छूटने का नाम ही नहीं लेता।
- लेकिन कुछ विद्यार्थी इतने सतर्क,होश में और सावधान रहते हैं कि अवसर आते ही उसको लपक लेते हैं।उन्हें सफलता पर सफलता मिलती जाती है,प्रगति करते जाते हैं।जाॅब मिलने पर आगे पदोन्नति होती चली जाती है।उनके साथी उनकी तरक्की को देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं।दूसरे छात्र-छात्राएं उन्नति करने वाले छात्र-छात्रा की उन्नति और सफलता को देखकर यह अनुमान ही नहीं लगा पाते हैं कि ऐसा कैसे संभव हो गया।
- प्रश्न यह उठता है कि यह पहचान कैसे करें कि जो अवसर आया है वह सौभाग्य का है या दुर्भाग्य का है।इसे पहचानने के लिए अपने व्यक्तित्व को गढ़ना पड़ता है।यदि हमारे अंदर दुर्गुण हैं तो हमें सौभाग्य का अवसर भी दुर्भाग्य जैसा ही नजर आता है।परंतु यदि आप सत्संगति में रहते हैं,सदाचरण का पालन करते हैं,सत्साहित्य का अध्ययन करते हैं,बुरी संगति से दूर रहते हैं ऐसे विद्यार्थी दुर्भाग्य से दूर रहते हैं और सौभाग्य के अवसरों को हाथ से निकलने नहीं देते हैं।सौभाग्य और दुर्भाग्य की सही तस्वीर उनके दिल और दिमाग पर स्पष्ट बनती है।
- सत्कर्मों की सुगंध ऐसी होती है जिससे सौभाग्य का अवसर इस प्रकार खिंचा चला आता है जैसे एक शक्तिशाली चुंबक लोहे को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है,सुगंधित पुष्प भौंरे को आकर्षित कर लेता है।सत्कर्मों और सद्गुणों के कारण छात्र-छात्रा में ऐसा आकर्षण पैदा हो जाता है जो हर किसी को मोह लेता है।जो व्यक्ति,छात्र-छात्रा ऐसे छात्र-छात्रा से मिलकर आनंदित हो जाता है।जैसे चंदन के वृक्ष पूरे जंगल को सुगंधित कर देता है,चारों तरफ जंगल में चंदन की खुशबू फैल जाती है।सदाचरण से युक्त छात्र-छात्रा की सुगंध भी चारों ओर फैल जाती है और अपने जैसे गुणों को धारण करने वालों को अपनी ओर खींच लेती है।
- ऐसे छात्र-छात्रा को जाॅब मिलने में भी किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती है।कंपनी अथवा किसी भी विभाग के संचालक ऐसे छात्र-छात्रा की तुरंत परख कर लेते हैं या कह लीजिए की ऐसे छात्र-छात्राओं की प्रसिद्धि उन तक पहुंच जाती है और वे तत्काल ऐसे छात्र-छात्रा को अपनी कंपनी में नियुक्त कर लेते हैं।कंपनी या विभाग अथवा संगठन की प्रसिद्धि ऐसे ही सौभाग्यशाली अभ्यर्थियों की वजह से चारों ओर फैल जाती है।
5.छात्र-छात्राएँ सतर्क रहें (Students should be alert):
- छात्र-छात्राओं को हमेशा सतर्क रहकर अध्ययन करते रहना चाहिए।दुर्भाग्य का अवसर हमें बड़ा लुभावना लगता है इसलिए जाने-अनजाने हम इसके जाल में फंस जाते हैं।उदाहरणार्थ आप इंजीनियरिंग का कोर्स कर रहे हैं और कोर्स करने में अभी कुछ समय बाकी है,अब यदि कोई इस समय जाॅब का ऑफर देता है और अपने संस्थान में कार्य करने का आग्रह करता है।अब आपने 3 साल कोर्स की अवधि पूरी कर ली,3 साल तक सभी 6 सेमेस्टर में उत्तीर्ण हो चुके हैं।अब केवल दो सेमेस्टर बाकी हैं।6 सेमेस्टर तक आपने लाखों रुपए खर्च कर दिए।ऐसी स्थिति में एक वर्ष कोर्स अवधि को छोड़कर आप प्रलोभन में फंस जाते हैं।आपको जिंदगी भर जॉब करने,धन कमाने का ही काम है।परंतु कोर्स करने,डिग्री लेने,विद्या ग्रहण करने जैसा अवसर दुबारा नहीं मिल सकता है।अतः आपके लिए यही उचित है कि आप उस प्रलोभन को ठुकरा कर अपना ध्यान कोर्स को पूरा करने में लगायें।
- आपके पास ऐसा आर्थिक संकट भी नहीं खड़ा है कि आप 3 साल की तपस्या को ठोकर मारकर धन कमाने के प्रलोभन में फँस जाएं।यदि आर्थिक संकट खड़ा हो गया है तो अनेक साधन है जिनसे फाइनेंशियल ज़रूरतें पूरी कर सकते हैं।स्कॉलरशिप के द्वारा,एजुकेशन लोन के द्वारा आप बीई/बीटेक अथवा अपने किसी भी कोर्स को करने के लिए अध्ययन जारी रख सकते हैं।
तो देखा आपने हमारे लक्ष्य से भटकाने वाला प्रलोभन हमारे मार्ग में आकर खड़ा हो जाता है।यदि आप इसके जाल में फंस जाते हैं तो शिक्षा पूरी करके जिस शिखर पर पहुंच सकते थे,शिक्षा पूरी किए बिना संभव है उस शिखर पर न पहुंच पाएं।हमारे लिए क्या हितकर हैं,क्या अहितकर है इसका निर्धारण हमारा विवेक ही कर सकता है।यदि आपका विवेक जागृत है,आप होशपूर्वक काम करते हैं तो इस प्रकार ऊपर से मधुर,आकर्षक दिखने वाले प्रलोभन दुर्भाग्य को पहचान सकते हैं।अनेक ऐसी प्रतिभाएं प्रलोभनों में फंस जाती हैं और फिर पश्चाताप करती हैं कि हाय में ऐसा नहीं करता तो बहुत अच्छा होता।आज मैं भी किसी ऐसे मुकाम पर होता कि जिस मुकाम को देखकर लोग दांतों तले उंगली दबा लेते।
- अब यह तो आवश्यक तो नहीं है कि सौभाग्य का पल बार-बार आपके जीवन में आता ही रहेगा।यदि आप चाहते हैं कि सौभाग्य का पल आपका पहरेदार बन कर रहें,आपके दरवाजे पर खड़ा रहे तो आपको अपना व्यक्तित्व आकर्षक और प्रभावी बनाना होगा।हमेशा सदाचरण का पालन करना होगा।सद्गुणों को धारण करना होगा।मन में निर्बलता का प्रवेश बंद कर देना होगा।सत्कर्म और निष्काम कर्म करना होगा।अपने लिए नहीं बल्कि औरों के लिए भी जीवन जीना होगा।व्यावहारिक और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करके आप सौभाग्य के पलों को अपनी मुट्ठी में रख सकते हैं।हमेशा हर कहीं,हर जगह मार्केट में आपकी मांग बराबर बनी रहेगी।हर व्यक्ति आपके साथ कुछ पल बिताने के लिए अपना सौभाग्य समझेगा।
- लेकिन हमारा ध्यान सत्कर्मों और सद्गुणों की पूंजी इकट्ठी करने की तरफ रहता ही नहीं है।हम दुनियादारी के चक्र में ऐसे फँस जाते हैं कि हमें नौन-तेल लकड़ी का इन्तजाम करना ही दिखाई देता है।विद्यार्थियों को केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना ही दिखाई देता है।ऐसी स्थिति में सौभाग्य के पल हमारे जीवन में बार-बार क्यों कर आ सकते हैं।यदि आ भी जाए तो हमें इसकी कोई खबर ही नहीं रहती है क्योंकि सौभाग्य के पलों की परख करना हमें आता ही नहीं है।इस लेख के माध्यम से हम आपको सतर्क व सावधान कर रहे हैं कि अभी से सतर्क सावधान और होश में आ जाएं।
- उपर्युक्त आर्टिकल में सौभाग्य के क्षण को पहचानने के 6 बिंदु (6Point to Identify Moment of Good Luck),सौभाग्य के क्षण को कैसे पहचानें? (How to Recognize Moment of Good Luck?) के बारे में बताया गया है।
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6.युवाओं के जीवन में सौभाग्य के दिन (हास्य-व्यंग्य) (Good Luck Days in Lives of Youth) (Humour-Satire):
- नेताजी:देश के युवाओं,मैं आपके जीवन को 50% सौभाग्यशाली बना दूंगा यदि आपने मुझे चुनाव में जिता दिया।
एक छात्रःवह कैसे नेताजी? - नेताजी:मैं परीक्षा प्रणाली में ऐसा सिस्टम कर दूंगा कि कोई फेल नहीं होगा।जिस प्रकार अभी तक नवीं कक्षा तक कोई फेल नहीं होता है।मैं एमए,बीए,बीएससी,एमएससी आदि सभी परीक्षाओं में ऐसा नियम बना दूंगा।
- छात्रःपर फिर हम कोई भी जाॅब को दक्षता के साथ कैसे कर पाएंगे।
- नेताजीःइसीलिए तो मैं 50% सौभाग्यशाली बनाने का वादा कर रहा हूँ।
7.सौभाग्य के क्षण को पहचानने के 6 बिंदु (Frequently Asked Questions Related to 6Point to Identify Moment of Good Luck),सौभाग्य के क्षण को कैसे पहचानें? (How to Recognize Moment of Good Luck?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नः
प्रश्न:1.सौभाग्य का क्या अर्थ है? (What does good fortune mean?):
उत्तर:अच्छा भाग्य,खुशकिस्मती,कल्याण,समृद्धि,सफलता,सौंदर्य,प्रेम,आनंद,शुभकामना आदि अनेक अर्थ होते हैं।
प्रश्न:2.पल का क्या अर्थ है? (What does the moment mean?):
उत्तर:समय का एक लघु विभाग 60 विपल अर्थात 24 सेकंड के बराबर होता है।
प्रश्न:3.सौभाग्यवान का क्या अर्थ है? (What does it mean to be fortunate?):
उत्तर:भाग्यशाली,खुशकिस्मत।सौभाग्यवान होने के लिए भाग्य पर भरोसा करके ही बैठ नहीं जाना है बल्कि सत्कर्म करते रहना जरूरी है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा सौभाग्य के क्षण को पहचानने के 6 बिंदु (6Point to Identify Moment of Good Luck),सौभाग्य के क्षण को कैसे पहचानें? (How to Recognize Moment of Good Luck?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
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