7 Strategy to Crack Competitive Exams
1.प्रतियोगी परीक्षा क्रैक करने की 7 रणनीति (7 Strategy to Crack Competitive Exams),प्रतियोगी परीक्षा कैसे क्रैक करें? (How to Crack Competitive Exams?):
- प्रतियोगी परीक्षा क्रैक करने की 7 रणनीति (7 Strategy to Crack Competitive Exams) के आधार पर निजी व सरकारी सेवाओं के लिए प्रतियोगिता परीक्षा की रणनीति जान सकेंगे।अक्सर प्रतियोगिता परीक्षाओं में आंकिक अभियोग्यता (Quantitative Aptitude,Number Ability),सामान्य बुद्धि और तर्कशक्ति परीक्षण (General Intelligence and Reasoning Test),कंप्यूटर अवेयरनेस,इंटरव्यू,सामान्य ज्ञान आदि से संबंधित सिलेबस व प्रश्न-पत्र होते हैं।इनसे संबंधित नियमित रूप से लेख इस वेबसाइट पर अपलोड किए जाते हैं।आप उन्हें पढ़कर अपनी परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं अथवा कोई स्तरीय पुस्तकें पढ़कर अपनी तैयारी को अंजाम दे सकते हैं।प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी हेतु अनेक लेख इस साइट पर उपलब्ध हैं।अब कुछ अतिरिक्त सामाग्री इस लेख में प्रस्तुत है।
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2.सफलता के द्वार तक कैसे पहुंचे? (How to get to the door of success?):
- सफलता परिश्रम,युक्ति और धैर्य का महत्तम समापवर्त्तक होती है।सफलता के लिए कोई छोटी पगडण्डी नहीं होती।इसके लिए दुर्गम पथ पर दीर्घ यात्रा तय करनी होती है।प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों के लिए समय अत्यंत मूल्यवान है।अतः उन्हें एक युक्ति (Strategy) के तहत अपनी तैयारी द्रुत गति से प्रारंभ करनी चाहिए।एक व्यावहारिक युक्ति के अंतर्गत कम समय में अधिक निष्पादन संभव है।परीक्षा में सफलता के लिए अध्ययन के घंटों से भी अधिक महत्त्वपूर्ण होती है दृष्टि की गहराई,जो कुछ क्षणों में भी मिल जाती है और कुछ घंटों में भी नहीं मिलती।वस्तुतः प्रतियोगी परीक्षाओं के विषयों का अध्ययन का अर्थ है-निरंतरता एवं परिवर्तन की शक्ति को रेखांकित करना।इस मूल तत्त्व को पकड़ लेने के पश्चात परीक्षा के किसी स्तर पर कठिनाई नहीं होती।
- परीक्षा की तैयारी से संबंधित रणनीति पर विचार करने से पूर्व कुछ मूलभूत बातों पर विचार करना आवश्यक है।प्रथम,ऐसा भी देखा जाता है की गणित (विज्ञान) पृष्ठभूमि के लड़के अन्य विषयों से डिग्री प्राप्त करने वाले लड़कों की तुलना में अच्छे अंक प्राप्त कर लेते हैं।कारण स्पष्ट है कि आंकिक अभियोग्यता व जनरल इंटेलिजेंस व तर्कशक्ति के पेपर गणित विषय से साम्य रखते हैं। इससे यह धारणा भी खंडित होती है कि गणित,विज्ञान पृष्ठभूमि के लड़के जीके (जनरल नोलेज) में अलाभप्रद स्थिति में होते हैं।ऐसा कैसे हो पाता है? वस्तुतः इसके लिए आवश्यक है-दृष्टि की स्पष्टता (clarity of vision),पूर्वाग्रह मुक्त सोच और व्यावहारिक नीति।
- दूसरे,हमारा मानना है कि निबन्धात्मक परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के लिए लेखन से परिचय आवश्यक है।लेखन के ज्ञान से आलोचनात्मक दृष्टि विकसित होती है फिर प्रश्न को अपेक्षित दिशा की ओर ले जाना संभव हो पाता है।लेखन संबंधी विभिन्न दृष्टिकोणों के आलोक में कुछ प्रश्न स्पष्ट किए जा सकते हैं।प्रश्न के उत्तर के लिए विश्लेषण करने की क्षमता की अपेक्षा रखती है।
- प्रश्न-पत्र में हर विषय का महत्त्व होता है।जैसे किसी प्रतियोगी परीक्षा में आंकिक अभियोग्यता,जनरल इंटेलिजेंस,अंग्रेजी व कंप्यूटर से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं तो परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए हरेक टॉपिक में समान रूप से अच्छे अंक हासिल करना आवश्यक है।आंकिक अभियोग्यता तथा जनरल इंटेलिजेंस में अच्छे अंक प्राप्त करने के साथ-साथ अन्य विषयों पर भी तीक्षण विश्लेषणात्मक दृष्टि अपेक्षित है।इस प्रकार की दृष्टि विकसित करने के लिए छात्रों को तुलनात्मक अध्ययन की आदत डालनी चाहिए।
- निबन्धात्मक प्रश्न-पत्रों में भाषायी क्षमता एक महत्त्वपूर्ण कारक है,जो अंक के स्तर को प्रभावित करता है।सबसे बढ़कर यह एक ऐसा पहलू है जिस पर अधिकांश परीक्षार्थियों का ध्यान नहीं जाता।भाषायी क्षमता का अर्थ है-भाषा का स्वाभाविक प्रवाह,लच्छेदार अथवा अलंकृत भाषा नहीं।भाषा ऐसी होनी चाहिए जो भाव वहन करने में समर्थ हो।भाषा का भाव से इतना गहरा संबंध होता है।भाषा कमजोर होने से अभिप्राय भी स्पष्ट नहीं हो पाता।कभी-कभी ऐसा भी देखा जाता है कि उपयुक्त शब्द चयन में कमी के कारण हम कुछ ऐसा कह जाते हैं जो हम कहना नहीं चाहते हैं।इस विषय में परीक्षार्थियों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।विशेषकर,लघु प्रश्नों के लेखन में तो भाषायी योग्यता निर्णायक प्रभाव उत्पन्न करती है क्योंकि वहां शब्दों की सीमा का भी निर्वाह करना होता है।
3.लघु-उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर लिखने की युक्ति (Tips for Writing Answers to Short-Answer Questions):
- परीक्षार्थियों के लिए संपूर्ण पाठ्यक्रम का अवलोकन आवश्यक है।विशेषकर लघु-उत्तरीय प्रश्नों को हल करने की दृष्टि से भी यह उपयोगी है।दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नों को हल करने के लिए कुछ विशिष्ट टॉपिक पर विशेष बल देना चाहिए।
- लघु प्रश्नों का स्वरूप लघु निबंध की तरह होता है।ये प्रश्न मूलतः तथ्यपरक (Fact-based) होते हैं और इनके लेखन में सूचनाओं की अधिक आवश्यकता होती है।कुछ लघु-उत्तरीय प्रश्न अवधारणा पर आधारित (concept based) होते हैं।उन्हें हल करने के लिए दृष्टि की गहराई एवं अध्ययन की व्यापकता और दोनों आवश्यक है।सबसे बढ़कर इन प्रश्नों का उत्तर लिखते हुए परीक्षार्थियों को अपना झुकाव (stand) स्पष्ट करना होता है।इन प्रश्नों को हल करते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिएः
- (1.)प्रश्नों को बार-बार पढ़कर उनका सही परिप्रेक्ष्य स्पष्ट करना चाहिए।कभी-कभी उन्हें समझना ही बड़ी चुनौती होती है।
- (2.)प्रश्न को समझने के पश्चात मानव विचार के प्रकाश में उसकी व्याख्या करनी चाहिए।
- (3.)यह आवश्यक नहीं है कि प्रश्न में लिखे गए विचार के साथ सहमति जतायी जाए।कुछ प्रश्नों में असहमति आवश्यक है।
- (4.)कतिपय प्रश्नों में किसी महत्त्वपूर्ण व्यक्ति,थिंकर का कथन होता है।किंतु वहां नाम स्पष्ट करना आवश्यक नहीं है।उनके नाम को स्पष्ट किए बिना विचार को आधार बनाकर विश्लेषण किया जा सकता है।
- (5.)प्रश्न की शुरुआत मूल बिंदु से ही होनी चाहिए,क्योंकि इसमें भूमिका बांधने का अवकाश नहीं होता।
4.दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर कैसे लिखें? (How to Write Answers to Long Answer Questions?):
- (1.)प्रश्न के वास्तविक परिप्रेक्ष्य को समझने के लिए प्रश्न को बार-बार पढ़ना चाहिए।इस संदर्भ में प्रश्न के अंत में दिए गए कुछ पारिभाषिक शब्दों,यथा व्याख्या कीजिए,विश्लेषण कीजिए,प्रकाश डालिए,युक्तियुक्त विवेचन कीजिए आदि पर गौर करना आवश्यक है।परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखकर यहाँ कुछ-एक पारिभाषिक शब्दों का अर्थ दिया जा रहा है:
- (i)व्याख्या कीजिए:उद्घृत कथन का विस्तार से विवेचन किया जाना चाहिए ताकि उसका मूल भाव स्पष्ट हो जाए।
- (ii) प्रकाश डालिए:परीक्षार्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह विभिन्न पक्षों पर विचार करते हुए अपना मत प्रकट करे।
- (iii)विश्लेषण कीजिए:तथ्य के विभिन्न पहलुओं का तुलनात्मक विवेचन किया जाना चाहिए।
- (iv)युक्तियुक्त विवेचन कीजिए:संबंधित तथ्य का विवेचन किसी दूसरे संबद्ध तथ्य के परिप्रेक्ष्य में किया जाना चाहिए।
- (v)समीक्षा कीजिएःसबल एवं निर्बल पक्ष दोनों का विवेचन किया जाना चाहिए।
- (vi)आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिएःअर्थात् समीक्षा कीजिए।
- (1.)क्या आप सहमत हैं? इस पहलू पर सावधानीपूर्वक विचार करने की जरूरत है क्योंकि अधिकतर स्थितियों में असहमति के बिंदु भी दर्शाने होते हैं।
- (2.)प्रश्न की शुरुआत मूल कथन से ही होनी चाहिए।प्रश्न के मूलतत्त्व के साथ अन्य संबद्ध बातों की चर्चा उत्तर के मध्य भाग में होनी चाहिए।पुनः निष्कर्ष में मूल कथन को एक बार दुहराया जाना चाहिए ताकि मूल अभिप्राय में किसी प्रकार की अस्पष्टता नहीं रहे।
- (3.)पॉइंट देने के बजाय विभिन्न पैराग्राफ़ों में विभाजित करके उत्तर लिखना चाहिए।प्रत्येक पैराग्राफ लिखने के पश्चात प्रश्न को एक बार पढ़ना आवश्यक है ताकि उत्तर प्रश्न से विचलित ना हो।
- (4.)उत्तर बिल्कुल ही प्रश्न की मांग के अनुसार होना चाहिए।उत्तर के आकार को बड़ा करने के लिए या कुछ अतिरिक्त बातों को लिख डालने का लोभ संवरण नहीं करने के कारण,चाहे जिस किसी भी कारण से हो असंबद्ध बातें बिल्कुल ही नहीं लिखनी चाहिए,क्योंकि यह परीक्षक पर नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करता है।
- (5.)उत्तर-लेखन में छोटे-छोटे एवं सटीक वाक्यों का प्रयोग करना चाहिए,क्योंकि बड़े एवं उलझे हुए वाक्य में व्याकरणिक गलतियां होने की संभावना रहती है।
5.परीक्षा की तैयारी हेतु कुछ महत्त्वपूर्ण बिंदु (Some important points for exam preparation):
- कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करना आवश्यक है।पहली बात पाठ्यक्रम का अध्ययन एवं विश्लेषण भी तैयारी का महत्त्वपूर्ण हिस्सा होता है।अतः प्रतियोगी परीक्षा के परीक्षार्थी को प्रत्येक दिन 10-15 मिनट समय पाठ्यक्रम के अध्ययन पर देना चाहिए।इससे दो फायदे होते हैं।प्रथम,इससे लक्ष्य के प्रति तीव्रता बनी रहती है।दूसरा,इससे तैयारी को एक सही दिशा मिलती है।
- जहाँ तक पाठ्य पुस्तकों का प्रश्न है तो आज हिंदी माध्यम में किसी भी विषय की अपेक्षित पाठ्य पुस्तकें और वेबसाइट्स पर स्तरीय अध्ययन सामग्री उपलब्ध हैं।ढेरो वेबसाइट्स पर लेख और यूट्यूब पर अनेक चैनल उत्तम क्वालिटी के वीडियो उपलब्ध हो जाएंगे।यदि आप कुछ भुगतान कर सकते हैं तो अनेक पेड़ वेबसाइट्स और यूट्यूब चैनल मिल जाएंगे जहां से आप और भी गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री प्राप्त कर सकते हैं।
- हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय,दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रयास से हिंदी माध्यम से अनेक विषयों पर बहुत ही स्तरीय पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं।आज आप चाहे जिस विषय पर महत्त्वपूर्ण पुस्तकें प्राप्त कर सकते हैं।पहले हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को स्तरीय पुस्तकों की कमी खलती थी। दूसरी तरफ राजकमल प्रकाशन द्वारा भी तथा मोतीलाल बनारसीदास द्वारा मौलिक पुस्तकों का अनुवाद प्रकाशित किया गया है।विभिन्न हिंदी राज्यों में हिन्दी ग्रंथ अकादमियाँ भी हिंदी में उत्कृष्ट पुस्तकें प्रकाशित करती हैं।
- अतः परीक्षार्थियों के सम्मुख विभिन्न पुस्तकों,ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों के विकल्प मौजूद हैं।जरूरत है कुछ महत्त्वपूर्ण पुस्तकों और ऑनलाइन माध्यम को आधार बनाकर तैयारी करने की।समय सीमा को देखते हुए कुछ मौलिक पुस्तकों का चुनाव ही श्रेयस्कर है।फिर पुस्तकों और ऑनलाइन माध्यम का अध्ययन करते हुए संबद्ध टॉपिक पर नोट बना लेना उपयोगी होगा।एक व्यापक औपचारिक नोट बनाने के बजाय छोटे-छोटे संक्षिप्त नोट बनाना ज्यादा व्यावहारिक होगा,क्योंकि कम समय में इनका पुनरावलोकन करना संभव है।
6.ग्रुप स्टडी से सफलता या असफलता (Successes and failures from group studies):
- ग्रुप स्टडी,तालमेल के अभाव में हानिकारक ही ज्यादा सिद्ध होता है।बेवजह वाद-विवाद होने की प्रबल संभावना बनी रहती है।’मैं सही तुम गलत’ जैसे विषय पर तो अक्सर नोंकझोंक होते ही रहते हैं और मुख्य मुद्दे से भटकने की प्रबल संभावना बनी रहती है।अक्सर कई-कई दिनों तक दिशाविहीनता की स्थिति बनी रहती है।अतः तैयारी कर रहे परीक्षार्थियों में कुछ विशेष प्रगति का भी अभाव बना रहता है।अतः समूह में तैयारी करने से पहले यह अवश्य ही निर्णय कर लें कि आप इसका लाभ उठा पाएंगे या नहीं।
- वैसे एक बात तो तय है।अगर आप में सफलता के प्रति दृढ़ इच्छा है और आप समूह में अध्ययन करने के लिए तैयार हैं,तो आपके सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।ग्रुप स्टडी में अध्ययन करने के लिए कुछ बिंदुओं पर विचार किया जाना चाहिए।यदि आप सफल होना चाहते हैं तो ये बिंदु आपके लिए कारगर साबित हो सकते हैं।सभी अभ्यर्थियों के विषय समान होने चाहिए।ग्रुप के सभी अभ्यर्थियों में लगन हो और उनका लक्ष्य एक ही हो अर्थात् जैसे सभी आरएएस परीक्षा दे रहे हों या आईएएस।हर अभ्यर्थी के स्वभाव में भिन्नता होती है अतः आपस में तालमेल बिठाना चाहिए।एकदूसरे से लगभग 2 से 4 घंटे (पूरा समय नहीं) तक एकदूसरे से प्रश्न पूछे और विषय पर चर्चा कर लिया करें।इससे अनेक तथ्य अकेले में याद नहीं हो पाते वे कंठस्थ हो जाते हैं।अध्ययन के प्रति समर्पण और आपस में सहयोग की भावना हो।
- व्यावहारिक तौर पर इसे कार्यान्वित करने में कई कठिनाइयाँ आती हैं।पहले समान स्वभाव के तथा एक ही विषय के अभ्यर्थियों का मिलना कठिन होता है।तालमेल का अभाव रहता है और आपस में वाद-विवाद (बेवजह का) में समय नष्ट हो जाता है।आपस में गपशप में समय को बर्बाद किया जाता है।यदि कोई अभ्यर्थी कोचिंग ले रहा हो तो उससे पढ़ने में अन्य अभ्यर्थी शुरू में तो रुचि प्रदर्शित करते हैं परंतु कुछ ही दिनों में कोचिंग लेने वाले अभ्यर्थी से पढ़ने में रुचि लेना छोड़ देते हैं।आपस में मनमुटाव भी बढ़ जाता है।निष्कर्ष यह निकलकर आता है कि सामूहिक अध्ययन में ऐसे अभ्यर्थियों को असफलता ही हाथ लगती है।
- सामूहिक अध्ययन किसी को सफलता प्रदान करता है,तो कोई असफल रहता है।सामूहिक अध्ययन में सबसे ज्यादा जरूरी आपसी ताल-मेल होता है।सामूहिक अध्ययन के कुछ लाभ अवश्य ही हैं।पाठ्य-सामग्री को आसानी से याद रखने के साथ-साथ पढ़ने की क्षमता में तेजी तो आती ही है,पाठ्यक्रम को दुहराने में भी यह तरीका कारगर साबित होता है।साथ में प्रतिस्पर्धा की भावना में भी प्रगति आती है,जिससे परीक्षार्थी में सुधार होने की प्रबल संभावना बनी रहती है।
- अगर सफलता अभी भी आपसे दूर है तो आप प्रयोग के तौर पर इस तरीके को आजमा सकते हैं।हां,यह अवश्य ध्यान रहे कि आप अपने अध्ययन के लिए निलंबित समय का कुछ ही भाग इस प्रकार के अध्ययन के लिए दे रहे हैं।साथ ही,यह भी जरूरी है कि सामूहिक अध्ययन में अनावश्यक वाद-विवाद से बचा जाए।
- एक सार्थक शुरुआत शीर्ष पर पहुंचने की प्रथम एवं आवश्यक सीढ़ी होती है।परीक्षा निकट आते देर नहीं लगती है।समय गँवाने का अर्थ है-सुनहरा अवसर खो देना।रणनीति बनाकर और समय प्रबन्धन का पालन करते हुए परीक्षा की तैयारी करेंगे तो कम समय में अधिक निष्पादन संभव हो सकता है।सफलता प्राप्ति में कई कारक काम करते हैं अतः अध्ययन की रणनीति में अपनी मौलिक प्रकृति को पहचानते हुए फैक्टर्स को शामिल करना चाहिए।विषय सामग्री जो इस वेबसाइट पर उपलब्ध है उसको संकलित करके अपनी तैयारी में जुड़ जाइए।हमारी कोशिश है कि आपको परीक्षा की रणनीति के साथ-साथ कुछ अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराते रहे और किसी न किसी प्रकार आपकी सफलता में सहायक बनें।
- उपर्युक्त आर्टिकल में प्रतियोगी परीक्षा क्रैक करने की 7 रणनीति (7 Strategy to Crack Competitive Exams),प्रतियोगी परीक्षा कैसे क्रैक करें? (How to Crack Competitive Exams?) के बारे में बताया गया है।
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7.प्रतियोगिता परीक्षा क्रैक करने का फंडा (हास्य-व्यंग्य) (Funda to Crack Competitive Exam) (Humour-Satire):
- निम्मीःदीदी प्लीज एक काम करो।आप जेईई-मेन परीक्षा में एपीयर होकर पास करो।
- दीदीःबेवकूफ मैं 12वीं में ग्रेस लगकर उत्तीर्ण हुई हूं,तो जेईई-मेन कैसे पास कर सकती हूं?
- निम्मी:क्यों कल मम्मी को मैं अपना रिजल्ट दिखा रही थी तो तुम बीच में चप्पड़-चप्पड़ बोल रही थी और मेरी नुक्ताचीनी कर रही थी।तब मम्मी ने कहा था कि तुम्हारा दिमाग तो चाकू से (शार्प) से भी तेज है।
8.प्रतियोगी परीक्षा क्रैक करने की 7 रणनीति (Frequently Asked Questions Related to 7 Strategy to Crack Competitive Exams),प्रतियोगी परीक्षा कैसे क्रैक करें? (How to Crack Competitive Exams?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नः
प्रश्न:1.क्या यह रणनीति शैक्षिक परीक्षाओं के लिए भी उपयोगी है? (Is this strategy also useful for educational exams?):
उत्तर:बोर्ड परीक्षा,कॉलेज की परीक्षाओं में भी वस्तुनिष्ठ,लघुत्तरात्मक और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं यह परीक्षा की रणनीति उनके लिए भी समान रूप से लाभदायक है।
प्रश्न:2.ऐच्छिक विषय का चयन कैसे करें? (How to choose an optional subject?):
उत्तर:अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार ऐच्छिक विषय का चयन करें।
प्रश्न:3.ऑब्जेक्टिव टाइप परीक्षा की तैयारी कैसे करें? (How to prepare for the Objective Type Exam?):
उत्तर:ऑब्जेक्टिव टाइप परीक्षा के लिए भी नोट्स (बिन्दुवार) बनाने चाहिए।ग्रुप स्टडी भी उनके लिए लाभदायक हो सकती है।सटीक रणनीति बनाकर उसके अनुसार तैयारी करें।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा प्रतियोगी परीक्षा क्रैक करने की 7 रणनीति (7 Strategy to Crack Competitive Exams),प्रतियोगी परीक्षा कैसे क्रैक करें? (How to Crack Competitive Exams?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
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