How to Stay Away from Superstions?
1.अंधविश्वासों से दूर कैसे रहें? (How to Stay Away from Superstions?),छात्र-छात्राओं के लिए अन्धविश्वासों से दूर रहने की 6 युक्तियाँ (6 Tips for Students to Stay Away from Superstitions):
- अंधविश्वासों से दूर कैसे रहें? (How to Stay Away from Superstions?) अंधविश्वास अर्थात बिना सोचे-समझे किसी बात को मान लेना,विचार रहित विश्वास अत्यंत घातक सिद्ध हो सकता है।आधुनिक युग में भी पशुबलि,नरबलि देना अथवा किसी महिला को डायन बताकर मार डालना अंधविश्वास की पराकाष्ठा है।
- आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस गणित के आर्टिकल को शेयर करें।यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें।जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके।यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए।आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं।इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।
Also Read This Article:How to Get Rid of Inferiority Complex?
2.अंधविश्वास को प्रस्तुत करने का अंदाज (Style of presenting superstitions):
- आज शिक्षित एवं सभ्य कहलाते इस समाज में अंधविश्वास सिर चढ़कर बोल रहा है।हालांकि अनजानी या कथित लोकोत्तर शक्तियों के डरावने जाल में समाज सदियों से उलझा रहा है,परंतु आज अंधविश्वास ओझाओं-बाबाओं से लेकर बेलगाम मीडिया तक के लिए बिकाऊ चीज बन गए हैं।
- अंधविश्वास के इस मोहजाल को विज्ञान के आईने में काटने की कोशिश शुरू हुई थी।यह अधूरा सच था,परंतु इससे एक नया प्रकाश,नई आशा पनपी थी।आज यह प्रकाश और आशा मुट्ठी के रेत के समान अनकहे ही बिखर गई।अंधविश्वास को जिस अंदाज में परोसा जा रहा है,उस पर शायद ही किसी को अविश्वास हो।इसे परोसने में मीडिया का बड़ा हाथ है।हालांकि मीडिया में ही इसके विरोध में कई स्वर खड़े होते हैं,पर अंधविश्वास के मूलभूत आधार के बिना वे इसके पक्ष में या विपक्ष में समुचित न्याय नहीं कर सकते हैं।मीडिया में अंधविश्वास को ऐसे रूप में प्रस्तुत किया जाता है,जिस पर आम व्यक्ति की धारणा को बल मिलता है।
- अंधविश्वास को सच साबित करने के लिए समाज में ऐसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रस्तुत किया जाता है,जिन पर आम धारणा अच्छी एवं साफ सुथरी होती है।लोग इन रूहानी बातों को इन्हीं प्रतिष्ठित व्यक्तियों के हाथों में देखकर हाथो-हाथ ले लेते हैं।ऐसा भी नहीं है कि जो कहा जा रहा है,वह निरा झूठ है,परंतु सच भी है तो इसका भी क्या प्रमाण है।मान्यता और विश्वास के दायरे में उन बातों को सम्मिलित किया जाता है,जिन्हें अपनाकर जीवन में वांछित लाभ मिलता है,परंतु अंधविश्वास को जीवन में उतारने से एक अघटित घटना हो सकती है,भीष्ण नुकसान हो सकता है।मीडिया में देखा और उसे करने लगे,ओझा और तांत्रिक की बातों को अमल करने लगे,तो लाभ के स्थान पर हानि भी हो सकती है,पर सामान्य जन इस तथ्य से अवगत नहीं हो पाते और अंधविश्वास की उलझन में फंस जाते हैं।
- अंधविश्वास के चक्रव्यूह में न जाने कितने लोग नुकसान उठा चुके हैं,दुष्चक्र में फंस चुके हैं।गणना नामुमकिन है। इस अंधविश्वास को परोसने वाले कुछेक टीवी चैनल भी हैं जो ज्योतिष संबंधित कार्यक्रम दिखाकर लोगों को सब्जबाग दिखाए जाते हैं।एक महिला को एक तांत्रिक ने झांसा दिया कि मंत्रों से कुछ रूपयों से तिजोरी भरी जा सकती है।उस महिला से एक मटके में रुपए रखवाकर कपड़े से बांध दिया और उसे बाहर बैठने के लिए कह दिया,यह कहकर कि वह मंत्रों से रूपयों को अनेक गुना कर देगा।घंटे भर बाद में वह यह कहकर चला गया कि अभी मटके को छेड़ना मत,तीन घंटे बाद मटके का मुंह खोलना।तांत्रिक रुपए लेकर रफूचक्कर हो गया।3 घंटे बाद महिला ने मटके का मुंह खोला तो उसमें फूटी कौड़ी भी नहीं मिली।विज्ञान और तकनीकी के इस युग में तांत्रिक उपायों से मालदार बनाने का झांसा देने,गंभीर बीमारियों को चुटकियों में ठीक करने का दावा करने वाले ओझा,तांत्रिक भोले-भाले लोगों को ठगकर अपना उल्लू सीधा करते हैं।अंधविश्वास अपनी सीमा में रहे तो कोई नुकसान नहीं,परंतु जब यह क्रियान्वित होने लगे तो घटना उक्त महिला के समान होना स्वाभाविक है।
3.अंधविश्वास का कोई ठोस आधार नहीं (There is no solid basis for superstition):
- अंधविश्वास की एक घटना और है,जो दिल दहला देने वाली है।’बिग बैंग’ की सच्चाई की खोज में विज्ञान अब तक के सबसे बड़े प्रयोग की तैयारी कर रहा था और टीवी चैनल इस प्रयोग के साथ ही धरती के अंत की भ्रमित चर्चा कर रहे थे।पर्दे पर इस बात को कुछ ऐसा अंजाम दिया जा रहा था कि अब धरती समाप्त ही हो जाएगी।इससे पैदा होने वाली उत्तेजना एवं उन्माद की कोई सीमा नहीं थी।इस समाचार ने बहुत से लोगों के दिल में भय और आतंक पैदा कर दिया,क्योंकि धरती को अब समाप्त होना है,अतः इस महाभीष्ण दृश्य को देखने से पहले ही लोग अधमरे हो गए।इन अजीबोगरीब घटनाओं का मूल अंधविश्वास है।
- विश्वास और अंधविश्वास के बीच एक महीन-सी रेखा होती है।विश्वास का एक सुदृढ़ आधार होता है।किसी निश्चित तथ्य के आधार पर ही विश्वास की सीढ़ियां चढ़ी जाती हैं।जब विश्वास कायम होता है तो उसे दुनिया की कोई ताकत डिगा नहीं पाती है।विश्वास से अद्भुत,असम्भव कार्य सिद्ध होते हैं;यह सच है।पुराणों के पन्ने-पन्ने विश्वास के इस रहस्य का प्रमाण देते हैं,परंतु अंधविश्वास का कोई ठोस आधार नहीं होता,बल्कि भ्रम या कल्पना को ही आधार मानकर उस पर अमल शुरू कर दिया जाता है।इस प्रमाण का आधार तांत्रिक,ओझा आदि को माना जाता है।इनकी कही कैसी भी बात क्यों ना हो,बस ठीक है।बिना देखे-जाने-परखे उसे क्रियान्वित कर लेते हैं।इसका प्रमाण कई बार सुनने को मिलता रहता है।सुदूर देहात में करीब हजार लोगों की भीड़ के बीच भयानक उन्माद पैदा करते ओझाओं ने भेड़ों की बलि ही नहीं दी,बल्कि उनके खून से स्नान भी किया।
- अंधविश्वास से प्रेरित एक विधायक ने एक बड़े आयोजन में एक सौ एक भेड़ों की बलि दी।उसने बलि इसलिए दी,क्योंकि किसी कारण उसकी सरकार सदन में विश्वासमत जीत सकी थी।शीर्ष राजनेताओं,प्रतिष्ठित व्यक्तियों को आज इन चमत्कारी बाबाओं की खोज रहती है;क्योंकि कम समय में उन्हें चमत्कारी लाभ का लालच रहता है।अंधविश्वास का सम्मोहन उन्हें आकर्षित करता है।चमत्कार का यह भूत नैतिकता की सभी मर्यादाओं को तोड़कर,ताक में रखकर अपना असर दिखाता है।अंधविश्वास को वैज्ञानिक सोच में बदलने के लिए कार्यरत संस्था ‘स्पेस’ ने इस बात पर गहरा क्षोभ जताया था कि विज्ञान के जिन आविष्कारों का उपयोग अंधविश्वास के जाल साफ करने में किया जाना चाहिए,उसी का सहारा लेकर आदमी को और भी अंधा बनाया जा रहा है।कभी विज्ञान और वैज्ञानिक चेतना के प्रसार के लिए आविष्कार किए जाते थे।इसे किया तो अभी भी जाता है,परंतु इसे अंधविश्वास फैलाने के लिए भी प्रयोग किया जाने लगा है।
- जनमानस मान्यताओं और परंपराओं पर जीता है।सांस्कृतिक चेतना उसे विकास के कई आयाम प्रदान करती है।संस्कृति जीवन का आधार है,परंतु इस आधार को जब बौद्धिक व्यापार एवं कारोबार बना लिया जाता है,तो इसका अर्थ और मर्म दोनों ही तिरोहित हो जाते हैं।जब कोई चीज व्यापार की श्रेणी में आ जाती है तो बस उससे लाभ और मुनाफा ही खोजा जाता है।उसे स्वार्थपूर्ति के लिए पूरा किया जाता है,न कि सर्वजनीन हित के लिए देखा जाता है।अतः इससे सभी प्रकार की नीति और मर्यादा का टूटना और बिखरना स्वाभाविक है और फिर इस खेल में जादू-टोना और झाड़-फूँक के चमत्कार से मन को भ्रमित करने का पुरजोर प्रयास चल पड़ता है।भोली-भाली जनता इस तथ्य से अवगत न हो पाने के कारण उसकी गिरफ्त में आ जाती है और अंधविश्वास से अपार क्षति उठाती है।
4.अंधविश्वास से अपार हानि (Immense harm from superstition):
- अंधविश्वास का मनोविज्ञान गहरा होता है।उसे साजिश के तहत फैलाने वाले इसकी गहरी समझ रखते हैं।वे यह जानते हैं कि कैसे व्यक्ति किसी चीज के लिए स्वाभाविक रूप से तैयार होगा।उसे मान्यताओं और परंपराओं के दायरे में बनाया समझाया जाता है,जिससे वह सहजता से तैयार हो जाता है।वर्तमान समय में अंधविश्वास का यह कारोबार खूब फल-फूल रहा है।इसको फैलाने वाले तो लाभान्वित होते हैं,परंतु इसे अपनाने वालों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है।वस्तुतः पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रहीं चमत्कार,अदृश्य शक्तियों,मान्यताओं की धारणाएं हमारी चेतना की गहराई में पैदा होती हैं।इन्हें निकाल पाना आसान काम नहीं है;निकालना तो दूर,उन्हें ऐसे व्यक्तियों को समझाना भी सरल नहीं है।इस अंधविश्वास के षड्यंत्र में अनगिनत बार धोखा खाने के बावजूद लोग इसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं होते।झूठ और फरेब के षड्यंत्र में भी इन्हें बच जाने या कुछ चमत्कार की उम्मीद होती है।जालसाज इसी विश्वास और उम्मीदों का शोषण करते हैं।
- जीवन न तो चमत्कार से चलता है और न अंधविश्वास के साये में पलता-बढ़ता है।जीवन एक यथार्थ है और इसे कड़ुई हकीकत से सामना करना पड़ता है,गुजरना पड़ता है।किसी चमत्कार के सहारे जीवन की दशा और दिशा को बदला नहीं जा सकता है।जीवन ओझाओं,बाबाओं और तांत्रिकों के हाथ की कठपुतली नहीं है।अगर ऐसा होता तो अंधविश्वास के ये शागिर्द सबसे पहले स्वयं को बदल नहीं लेते।ये न स्वयं को बदल सकते हैं और न दूसरों के भाग्य में हाथ डाल सकते हैं।ऐसा वह कर सकता है,जिसे जीवन की सही एवं स्पष्ट समझ हो।जो जीवन को आईने के समान साफ-साफ देखता हो,वही असली चमत्कार कर सकता है,वही दूसरों का मार्गदर्शन कर सकता है और उसके मार्गदर्शन में ही जीवन का विकास होता है,नए आयाम खुलते हैं।वह जो कहता है,करके दिखाता है-स्वयं में भी और औरों में भी।वही उसकी सर्वोपरि प्रामाणिकता है।
- अंधविश्वास में प्रामाणिकता कहां है,यथार्थ रूप से विश्वास कहां,सब कुछ अंधेरे में चलता है।अंधेरे में तो भटकन एवं भ्रम ही पैदा हो सकता है,दिशा कहां से मिलेगी! दिशा तो दिन के उजाले में मिलती है।विश्वास के पायदान से मंजिल की ओर अग्रसर हुआ जा सकता है।अंधविश्वासी चाहता है कि बीज को डाले बगैर पेड़ फले-फूले और उसका उपयोग करे।वह मेहनत के बिना शॉर्टकट का रास्ता अपनाकर सब कुछ पाना चाहता है,कठिनाइयों को पलभर में समाप्त करना चाहता है।जीवन किसान के उस खेत के समान है,जिसमें फसल तो उगती है,अनाज भी मिलता है,परंतु कड़ी मेहनत और धैर्यपूर्वक सब कुछ समय साध्य होता है; ऐसा नहीं होता कि आज बीज बोया और कल फसल तैयार हो जाए।सब समय के साथ,निश्चित क्रम के साथ होता है और इसके लिए असीम धैर्य तथा लगन-निष्ठा की जरूरत होती है।जीवन भी ऐसा ही है,जिसके लिए एक विख्यात कहावत है-समय से पहले और भाग्य से अधिक कुछ नहीं मिलता है।इस कहावत में अंधविश्वास को दूर करने का सूत्र समाया हुआ है।
- हमें अंधविश्वासी नहीं,बल्कि भगवद्विश्वासी होना चाहिए।अंधे का भरोसा कैसे करें जो खुद देख नहीं सकता है,बल्कि उस पर अपने सभी विश्वास को उँडेल देना चाहिए,जो सब कुछ देखता,जानता,समझता है और सर्वसमर्थ है।ऐसा केवल भगवान हो सकता है।अतः सबको छोड़कर अपने दुःख-कष्ट-निवारण के लिए उसी की ओर उन्मुख होना चाहिए।वही चमत्कार का भंडार है।वही अंधे को आंख दे सकता है।ऐसे परमप्रिय परमात्मा के या उसके बंदों के अलावा किसी और पर विश्वास करना अंधविश्वास के अंधकार में भटकने जैसा है।भगवद्विश्वासी बनें और अंधविश्वास से दूर रहें,यही जीवन के विकास का मूलमंत्र है।
5.छात्र-छात्राएं अंधविश्वास से दूर रहें (Students should stay away from superstitions):
- कुछ छात्र-छात्राएं कठिन परिश्रम करने के बजाय शॉर्टकट तरीकों से सफलता अर्जित करना चाहते हैं।इसके लिए वे बाबाओं,तांत्रिकों,ओझाओं के चक्कर लगाते हैं।उनसे जादू-टोना,टोटके आदि करके सफलता के तिकड़में लगाते रहते हैं।उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि वास्तव में सफलता अर्जित करनी है तो उन्हें कठिन परिश्रम करना होगा,परीक्षा या प्रतियोगिता परीक्षा में सही उत्तर लिखकर ही सफलता अर्जित की जा सकती है।कठिन परिश्रम करना उनके हाथ में ही है,अतः सफलता भी उन्हीं को मिलती है जो कठिन परिश्रमी हैं और सही रणनीति के साथ तैयारी करते हैं।यह ठीक है कि बहुत बार कठिन परिश्रम,संघर्ष,बार-बार अभ्यास करने पर भी किन्हीं को सफलता नहीं मिलती है।परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि सफलता जादू,टोने-टोटकों,तंत्र-मंत्र,चमत्कार,छल,छद्यम,पाखंड के बल पर प्राप्त की जा सकती है।
- आज के वैज्ञानिक युग में भी कुछ छात्र-छात्राएं और लोग ओझाओं,तांत्रिकों की चाल में फंस जाते हैं और वे चाहे जैसा करवा लेते हैं।इसका मूल कारण यह है कि आज की शिक्षा वास्तव में हमें साक्षर ही करती है,इस शिक्षा के बल पर सही-गलत का निर्णय कर पाना संभव नहीं है।ज्ञान ही हमें सही मायने में सही दिशा का ज्ञान करा सकता है,अंधकार या अंधविश्वास से दूर कर सकता है।यहाँ ज्ञान से तात्पर्य केवल भौतिक ज्ञान से नहीं है।भौतिक ज्ञान हमें केवल जॉब,व्यवसाय या नौकरी के योग्य बनाता है।भौतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक ज्ञान,सूझबूझ और आध्यात्मिक ज्ञान भी जीवन जीने के लिए,जीवन की सही समझ के लिए आवश्यक है,जो केवल पुस्तकों से प्राप्त नहीं किया जा सकता है।बल्कि जीवन की वास्तविक सच्चाइयों का सामना करने,उनका समाधान करने,संघर्ष करने,जीवन क्षेत्र में आनेवाली समस्याओं का डटकर मुकाबला करने से आता है।
- हालाँकि विज्ञान के इस दौर में,वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अंधविश्वास,पाखंड,धर्मांधता दूर होती है।विज्ञान और तकनीकी विकास के कारण काफी अंधविश्वास दूर भी हुआ है लेकिन समाज से अभी भी अंधविश्वास,पाखंड,धर्मांतता पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।ऐसे तांत्रिकों,ओझाओं पर सख्त कार्यवाही की आवश्यकता है जो अनिष्ट होने का डर दिखाकर भोले-भाले छात्र-छात्राओं और लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से अपने वश में कर लेते हैं और उनसे मनचाही बातों को पूरा करवा लेते हैं।अतः शिक्षकों,शिक्षण संस्थाओं का यह उत्तरदायित्व है कि छात्र-छात्राओं को केवल साक्षर ही नहीं करें बल्कि सही मायने में उन्हें शिक्षित करने का प्रयास करें।ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही भी करनी चाहिए।मीडिया को भी अपना दायित्व निभाना चाहिए।ऐसी कपोल-कल्पित बातों का महिमामंडन नहीं करना चाहिए जो समाज में अंधविश्वास,पाखंड आदि को बढ़ावा देती हो।
- केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही अंधविश्वास की जड़ को जड़मूल से समाप्त नहीं किया जा सकता है बल्कि हम सभी को इसके लिए सम्मिलित रूप से प्रयास करना चाहिए।छात्र-छात्राओं और लोगों को अपनी क्षमता व सामर्थ्य के अनुसार जागरूक व सचेत करना चाहिए।
- उपर्युक्त आर्टिकल में अंधविश्वासों से दूर कैसे रहें? (How to Stay Away from Superstions?),छात्र-छात्राओं के लिए अन्धविश्वासों से दूर रहने की 6 युक्तियाँ (6 Tips for Students to Stay Away from Superstitions) के बारे में बताया गया है।
Also Read This Article:Eradicate Youth Social Stereotypes?
6.अंधविश्वासी टीचर (हास्य-व्यंग्य) (Superstitious Teacher) (Humour-Satire):
- छात्र (गणित टीचर से):सर आप इस गणित के प्रश्न पत्र को अगरबत्ती-धूप क्यों कर रहे हो?
- गणित टीचर:बोर्ड ने प्रश्न पत्र मंगवाया है,बोर्ड परीक्षा के लिए मैं इसको धूप-बत्ती इसलिए कर रहा हूं ताकि यही प्रश्न-पत्र बोर्ड परीक्षा में आ जाए,तो मैं फेमस हो जाऊंगा।
7.अंधविश्वासों से दूर कैसे रहें? (Frequently Asked Questions Related to How to Stay Away from Superstions?),छात्र-छात्राओं के लिए अन्धविश्वासों से दूर रहने की 6 युक्तियाँ (6 Tips for Students to Stay Away from Superstitions) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.अंधविश्वास क्यों पनपता है? (Why do superstitions flourish?):
उत्तर:अशिक्षा के कारण।परंपरा व रूढ़िवाद का अनुसरण करते हुए किसी काम के औचित्य और अनुकरणीय होने के बारे में हमें कुछ जानकारी नहीं होती और हम जानकारी प्राप्त करने की कोशिश भी नहीं करते या करते हैं तो सफल नहीं हो पाते फिर भी वैसे काम किए चले जाते हैं जो हमें परंपरा के अनुसार विरासत में मिलते हैं,बिना यह सोचे कि ऐसा करना शुभ,हितकारी या कल्याणकारी होगा भी या नहीं।
प्रश्न:2.अंधविश्वास के अनुसार काम क्यों करते हैं? (Why do they act according to superstitions?):
उत्तर:अंधविश्वास के अनुसार आचरण करके हम पथभ्रष्ट हो जाते हैं,भटक जाते हैं और अगर कोई हमें समझाने की कोशिश करेगा भी तो हम समझने की कोशिश नहीं करेंगे क्योंकि अंधविश्वास सोचने-समझने की इच्छा को नष्ट कर देता है।हम कुछ भी कुतर्क करके अपनी बात पर अड़े रहेंगे।
प्रश्न:3.श्रेष्ठ आचरण कैसे करें? (How to behave well?):
उत्तर:यदि हमें सही बात की जानकारी नहीं है तो जिस राह पर महापुरुष चले हों वही राह हमारे लिए उत्तम है पर अगर यह अनुसरण बिना सोचे-समझे,रूढ़िवादिता के रूप में किया जाए तो इसे अंधविश्वास करना कहा जाएगा।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा अंधविश्वासों से दूर कैसे रहें? (How to Stay Away from Superstions?),छात्र-छात्राओं के लिए अन्धविश्वासों से दूर रहने की 6 युक्तियाँ (6 Tips for Students to Stay Away from Superstitions) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
No. | Social Media | Url |
---|---|---|
1. | click here | |
2. | you tube | click here |
3. | click here | |
4. | click here | |
5. | Facebook Page | click here |
6. | click here | |
7. | click here |
Related Posts
About Author
Satyam
About my self I am owner of Mathematics Satyam website.I am satya narain kumawat from manoharpur district-jaipur (Rajasthan) India pin code-303104.My qualification -B.SC. B.ed. I have read about m.sc. books,psychology,philosophy,spiritual, vedic,religious,yoga,health and different many knowledgeable books.I have about 15 years teaching experience upto M.sc. ,M.com.,English and science.