How to develop Personality in hindi
1.व्यक्तित्त्व का विकास कैसे करें? का परिचय (Introduction to How to develop Personality in hindi),व्यक्तित्व विकास का लाभ (Profit of personality development in hindi):
- व्यक्तित्त्व का विकास कैसे करें? (How to develop Personality in hindi),व्यक्तित्व विकास का लाभ (Profit of personality development in hindi):व्यक्तित्व का अंग्रेजी अनुवाद Personality है जो लैटिन शब्द परसोना (persona) से बना है तथा जिसका अर्थ को ध्यान में रखते हुए व्यक्तित्त्व को बाहरी वेशभूषा तथा दिखावे (External Appearance) के आधार पर परिभाषित किया गया है।जिस व्यक्ति का बाहरी दिखावा भड़कीला होता था उसका व्यक्तित्व उतना ही अच्छा समझा जाता था तथा जिस व्यक्ति का बाहरी दिखावा साधारण होता था उसका व्यक्तित्व उतना अच्छा नहीं समझा जाता था।परन्तु ऐसी परिभाषाओं को तुरन्त अवैज्ञानिक घोषित किया गया।वस्तुतः व्यक्तित्त्व में भीतरी गुणों तथा बाहरी गुणों यानी दोनों को सम्मिलित किया जाता है।
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2.व्यक्तित्त्व का विकास कैसे करें? (How to develop Personality in hindi),व्यक्तित्व विकास का लाभ (Profit of personality development in hindi):
- किसी भी मनुष्य को अपने में सुधार के संबंध में दूसरों का हस्तक्षेप अर्थात दखल अच्छा नहीं लगता है।इसमें वह अपने आपका अपमान समझता है। सामान्यतया हर मनुष्य अपने आपको योग्य समझता है।दूसरा अगर उसकी कमी बताता है या उसकी गलती को सुधारने के लिए कहता है तो ऐसे व्यक्ति को वह अपना विरोधी समझता है।ऐसी स्थिति में प्रथम तरीका तो यह है कि मनुष्य को स्वयं ही अपनी कमजोरियों व गलतियों को पहचान कर उसमें सुधार करते रहना चाहिए।यह कार्य है तो कठिन परंतु जो अपने आपको समझ लेता है,जान लेता है तो फिर उसे दूसरों से परामर्श की आवश्यकता बहुत कम रहती है।
- दूसरा तरीका यह है कि सामने वाला मनुष्य यदि किसी अन्य मनुष्य की कमियों या गलतियों को कहता है तो हमें अपने अंदर झांककर देखना चाहिए कि यह कमी कहीं मेरे में तो नहीं है यदि है तो उसे दूर करने का प्रयास करना चाहिए।
तीसरा तरीका यह है कि यदि कोई मनुष्य हमें कथा,कहानी या फिल्म सुना रहा हो और उस कथा-कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है उसे हमें ग्रहण कर लेना चाहिए। - कथा-कहानी और फिल्म जैसे गीता,महाभारत,रामायण,पुराण इत्यादि के प्रसंग दिए जा सकते हैं।धर्मग्रन्थों में लोगों की आस्था होती है क्योंकि हम आज भी देखते हैं कि धार्मिक त्यौहार,फिल्म तथा क्रिकेट के प्रति लोगों की दीवानगी है।इसलिए धार्मिक उत्सव,त्यौहार पर अच्छी शिक्षा को हम सहज रूप में स्वीकार कर लेते हैं।कथा प्रसंग में यदि आपके खुद के मौलिक विचार भी हैं तो उन्हें अपना बताकर प्रस्तुत करने के बजाय यह कहा जाना चाहिए कि ये विचार हम आपको धर्मग्रंथों के आधार पर बता रहे हैं।क्योंकि साथी-सहपाठी मौलिक विचारों को अपना बताने पर अत्यधिक परिचित होने के कारण उन विचारों को कोई महत्त्व नहीं देते हैं।
- कथा-प्रसंग,वार्तालाप तथा परामर्श केवल लोगों की भौतिक आवश्यकताओं व समस्याओं के संबंध में ही नहीं दिया जाना चाहिए बल्कि चिंतन और चरित्र में सुधार करने से संबंधित भी हों।इसमें भिन्न-भिन्न लोगों की स्थिति का ध्यान रखना चाहिए।वार्तालाप और परामर्श केवल सैद्धांतिक नहीं होना चाहिए बल्कि व्यावहारिक भी होना चाहिए।
- यदि इन सब बातों का ध्यान रखा जाए और इनका पालन करें तो मनुष्यों और बालकों के व्यक्तित्व को सुसंस्कृत,विकसित किया जा सकता है और उनकी प्रगति,विकास और उत्कर्ष के द्वार खुल सकते हैं। व्यक्तित्व परिष्कृत अर्थात् उन्नत व विकसित होगा तो सुख-शांति से रहने,साथियों को प्रसन्नता व कृतज्ञता प्राप्त होते रहने के इंतजाम किए जा सकते हैं।
- इसके विपरीत व्यक्तित्त्व उन्नत नहीं होगा तो सुख-सुविधाओं के साधन होते हुए भी चिन्तन,चरित्र और व्यवहार में बुराई व्याप्त रहने से कलह,अशांति,मन-मुटाव जैसी बुराइयां पनप जाएंगी जिससे मनुष्य न स्वयं शान्ति से रह सकेगा और न दूसरों को सुख शान्ति से रहने देगा।
- परिवार के सदस्यों के गुण,कर्म,स्वभाव में शालीनता,शिष्टाचार का समावेश करने का उत्तरदायित्व बड़े एवं समझदार सदस्यों का है।उन्हें कथा-कहानियों,जीवन संस्मरणों,प्रेरणादायक प्रसंगों,जीवन चरित्रों तथा सत्साहित्य के द्वारा सुधार का कार्यक्रम चलाते रहना चाहिए।क्योंकि यदि बड़े ही अच्छे मार्ग पर नहीं चलेंगे तो छोटे उनसे ही सीखते हैं।अतः बड़े जैसा करेंगे वैसा ही छोटे करने की कोशिश करते हैं।इसलिए घर में ऐसा साहित्य रखना चाहिए जिससे पढ़ने पर प्रेरणा प्राप्त कर छोटे अपने आपमें सुधार कर सकें और अपने व्यक्तित्व को विकसित कर सकें।
- उपर्युक्त आर्टिकल में व्यक्तित्त्व का विकास कैसे करें? (How to develop Personality in hindi),व्यक्तित्व विकास का लाभ (Profit of personality development in hindi) के बारे में बताया गया है।
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About my self
Lekhak Ke Baare Mein (About the Author)
**Satyam Narain Kumawat**
**Website Name:Satyam Mathematics**
*Owner:satyamcoachingcentre.in*
*Sthan:Manoharpur,Jaipur (Rajasthan)*
**Teaching Mathematics aur Anya Anubhav**
***Shiksha:**B.sc.,B.Ed.,(M.sc. star Ke Mathematics Ko Padhane ka Anubhav),B.com.,M.com. Ke vishayon Ko Padhane ka Anubhav,Philosophy,Psychology,Religious,sanskriti Mein Gahri Ruchi aur Adhyayan
***Anubhav:**phichale 23 varshon se M.sc.,M.com.,Angreji aur Vigyan Vishayon Mein Shikshaka Ka Lamba Anubhav
***Visheshagyata:*Maths,Adhyatma (spiritual),Yog vishayon ka vistrit Gyan*
****In Brief:I have read about M.sc. books,psychology,philosophy,spiritual, vedic,religious,yoga,health and different many knowledgeable books.I have about 23 years teaching experience upto M.sc. ,M.com.,English and science.


