6 Strategies to Crack Competitive Exam
1.कॉम्पिटेटिव एक्जाम को क्रैक करने की 6 रणनीतियाँ (6 Strategies to Crack Competitive Exam),प्रतियोगिता परीक्षा को क्रैक कैसे करें? (How to Crack Competitive Exam?):
- कॉम्पिटेटिव एक्जाम को क्रैक करने की 6 रणनीतियों (6 Strategies to Crack Competitive Exam) के आधार पर आप समझ सकेंगे कि प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी हेतु क्या रणनीति अपनाएं? यह प्रतियोगिता परीक्षा रणनीति सरकारी,अर्द्ध-सरकारी और निजी क्षेत्र में सांझे रूप से उपयोगी है।
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2.निश्चित सफलता की रणनीति (Definitive Success Strategy):
- प्रतियोगिता परीक्षाएं अभ्यर्थियों के लिए काफी महत्त्व रखती हैं।प्रतियोगिता परीक्षा का उद्देश्य मात्र अभ्यर्थी की जानकारी और उसकी स्मरण शक्ति का परीक्षण करना ही नहीं होता,बल्कि उनकी समग्र बौद्धिक प्रतिभा और अवबोधन क्षमता को आंकना भी होता है।वस्तुतः संपूर्ण परीक्षा उत्तीर्ण करने के क्रम में सबसे महत्त्वपूर्ण मेंस परीक्षा के अंक ही होते हैं (प्रीलिम्स परीक्षा क्वालीफाइंग एक्जाम होती है)।इसलिए परीक्षार्थियों के लिए आवश्यक है कि वे मेंस परीक्षा हेतु विषयों की तैयारी काफी सजग एवं सावधानीपूर्वक करें।यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि विषयों की सही तैयारी न कर पाने की स्थिति में प्रत्याशी भ्रम में रहते हैं और उनका कई वर्ष यों ही निकल जाता है।अतः अपेक्षाकृत नए अभ्यर्थियों को यह चाहिए की परीक्षा में बैठने से काफी पहले अच्छी तरह विचार करके ही अपनी योग्यता व क्षमता के अनुसार संबंधित सेवा का चुनाव करें।हर किसी कंपिटीशन में शरीक होना और उसमें असफलता प्राप्त करने पर हतोत्साहित करने वाला कदम व निर्णय होता है।
- तकनीकी के इस युग में ऑनलाइन और ऑफलाइन नए-नए जॉब के अवसर पैदा हो रहे हैं परंतु जिस गति से जनसंख्या बढ़ रही है उस दर से पद सृजित नहीं हो पा रहे हैं।फलतः किसी पद के लिए हजारों-लाखों की संख्या में अभ्यर्थी भाग लेते हैं।एक बहुत बड़ी पढ़े-लिखे युवकों की फौज हर वर्ष तैयार होती है और उनमें से काफी युवक-युवतियाँ बेरोजगारी की लाइन में खड़े हो जाते हैं।प्रत्याशियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है फलतः प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है।
- किसी भी पद का चुनाव करने से पहले इन बातों पर ध्यान देना चाहिएःपद के लिए अपेक्षित योग्यता और क्षमता हो।प्रत्याक्षी की उस पद पर काम करने की रुचि हो।विषय पर मजबूत पकड़ हो (पद के लिए ली जाने वाले पेपर के विषयों पर जैसे जीके,कंप्यूटर,बुद्धि परीक्षण आदि),परीक्षा लिए जाने वाले विषयों का प्रारंभिक ज्ञान अवश्य हो।उचित मार्गदर्शन उपलब्ध हो।यदि आवश्यक हो तो कोचिंग वगैरह की सुविधा हो।इतनी बातें अभ्यर्थी में मौजूद हो तो उसे अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक दबाव का सामना नहीं करना पड़ता है।इसके अलावा अभ्यर्थी को चुनिंदा विषयों का चुनाव लगभग हर कॉम्पिटेटिव एग्जाम में करना पड़ता है,क्योंकि कुछ विषय प्रत्येक परीक्षा में पूछे जाते हैं जैसे आंकिक अभियोग्यता,जीके,बुद्धि परीक्षण आदि।अतः वे विषय के वृहद अंश का अनावश्यक अध्ययन करने से बच जाते हैं,क्योंकि इसके बिना भी काम चल सकता है।साथ ही आंकिक अभियोग्यता व बुद्धि परीक्षण तथा तर्कशक्ति अंक दिलाने वाले विषय भी हैं।इन विषयों में नियोजित योजना के तहत तैयारी करने से 90-95% अंक प्राप्त हो सकते हैं।जो निसंदेह प्रावीण्य सूची में ऊंचा स्थान दिलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इन सब कारणों से आंकिक अभियोग्यता व सामान्य बुद्धि परीक्षण विषय वाले कॉम्पिटेटिव परीक्षाओं की लोकप्रियता में काफी बढ़ोतरी हुई है।
3.प्रतियोगिता परीक्षा का चयन (Selection of Competitive Exams):
- अक्सर कुछ अभ्यर्थी कुछ गलतियां कर बैठते हैं जिससे उनका चयन नहीं हो पाता है।जैसे किसी अभ्यर्थी में टीचर के लिए अपेक्षित योग्यता और क्षमता है।अब यदि कोई अभ्यर्थी राजस्थान सेकंड ग्रेड टीचर की परीक्षा देता है तो प्रश्न-पत्र को देखकर उसके हाथ-पैर फूल जाते हैं।सेकंड ग्रेड टीचर के प्रश्न-पत्र में सीनियर सेकेंडरी के साथ-साथ ग्रेजुएशन लेवल का पाठ्यक्रम होता है।अतः इतने वृहद पाठ्यक्रम को तैयार करने में उसके हाथ-पैर फूल जाते हैं।अब यदि वह दो-तीन बार प्रयास करता है और उसका चयन नहीं होता है तो वह अन्य सेवाओं क्लरीकल,पटवारी आदि परीक्षाओं की तरफ रुख करता है और वहां भी असफलता मिलती है।यहां उसके द्वारा सेकंड ग्रेड टीचर हेतु की गई तैयारी क्लरीकल और पटवारी में कोई काम नहीं आती है तथा उसे इन सेवाओं के लिए नए सिरे से तैयारी करनी पड़ती है।
- इसके बजाय वह सेकंड ग्रेड के लिए अन्य विकल्पों पर विचार करके उसमें भाग ले तो संभव है उसका चयन हो जाए।उदाहरणार्थ राजस्थान में सेकंड ग्रेड टीचर में उसका सिलेक्शन नहीं हो पाया तो उसे एकलव्य मॉडल स्कूल,केंद्रीय विद्यालय,नवोदय विद्यालय तथा दिल्ली में सेकंड ग्रेड टीचर की परीक्षा में भाग लेना चाहिए।ताकि उसके द्वारा विगत वर्षों में की गई तैयारी काम आ सके।
- इन परीक्षाओं में भाग लेने के लिए विगत वर्षों के प्रश्नों को देखकर अगले वर्ष पूछे जाने वाले प्रश्नों का अनुमान लगा सकते हैं और तैयारी कर सकते हैं।यदि एक ही विषय को पकड़ कर इन टाॅपिकों के प्रत्येक भाग का विस्तृत एवं सारगर्भित अध्ययन किया जाए तो आपको इन परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने में तनिक भी कठिनाई नहीं होगी।
- आप इन परीक्षाओं में विषयवस्तु का अच्छी तरह अभ्यास करें ताकि इनसे संबंधित कोई भी प्रश्न आपसे छूटे नहीं।थ्योरीटिकल प्रश्नों को लिखकर याद करें,अन्यथा मौखिक रूप से याद करने पर कई महत्त्वपूर्ण बिंदु छूट सकते हैं क्योंकि थ्योरीटिकल विषयवस्तु को गणित की तरह अभ्यास करके याद नहीं किया जा सकता है बल्कि समझकर और फिर लिखकर याद किया जाता है।
- अब इन परीक्षाओं के पैटर्न में बदलाव होता रहता है अतः केवल परंपरागत या पिछले वर्षों के प्रश्नों की तरह प्रश्नों को याद न करके नए तरीके से,तार्किक ढंग से तैयार करके प्रश्नों के उत्तर को याद करना चाहिए।सही ढंग और आज के अनुसार,नवीन तरीके से प्रश्नों को तैयार करने से सफलता मिलना निश्चित हो जाता है।हर एंगल से प्रश्नों को तैयार करके तैयारी सही ढंग से कर ली जाए तो आपको उत्तर लिखने में किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।विषयवस्तु पर बनने वाले प्रश्न को प्रत्येक पहलुओं का सारगर्भित अध्ययन अवश्य कर लेना चाहिए,जिससे उत्तर लिखने के क्रम में किसी भी तरह का अवरोध उत्पन्न ना हो।ऐसा करने से आप में आत्मविश्वास की वृद्धि होगी।थ्योरीटिकल विषयवस्तु को गणित की तरह अभ्यास करके याद नहीं किया जा सकता है बल्कि समझकर और फिर लिखकर याद किया जाता है अब इन परीक्षाओं के पैटर्न में बदलाव होता रहता है अतः केवल परंपरागत या पिछले वर्षों के प्रश्नों की तरह प्रश्नों को याद न करके नए तरीके से,तार्किक ढंग से तैयार करके प्रश्नों के उत्तर को याद करना चाहिए।सही ढंग और आज के अनुसार,नए तरीके से प्रश्नों को तैयार करने से सफलता मिलना निश्चित हो जाता है।हर एंगल से प्रश्नों को तैयार करके तैयारी सही ढंग से कर ली जाए तो आपको उत्तर लिखने में किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।विषय वस्तु पर बनने वाले प्रश्न को प्रत्येक पहलुओं का सारगर्भित अध्ययन अवश्य कर लेना चाहिए,जिससे उत्तर लिखने के क्रम में किसी भी तरह का अवरोध उत्पन्न ना हो।ऐसा करने से आप में आत्मविश्वास की वृद्धि होगी।प्रत्येक टॉपिक को ही पूरी गहराई के साथ एवं हर पहलुओं पर दृष्टिपात करते हुए अध्ययन करते हैं तो आपको उत्तर लिखने में किसी भी प्रकार की कठिनाई नहीं होगी।लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप जिन टॉपिक को लिए हैं उनके विभिन्न पहलुओं (aspects) पर अपनी पकड़ अवश्य मजबूत बनाए रखें।उदाहरण के लिए convergence (Number Theory) टॉपिक का चुनाव करते हैं तो convergence पर आधारित प्रमेय,convergence के गुणधर्म और उनका सत्यापन,इस पर आधारित आंकिक सवाल आदि पर ठीक तरह से तैयारी करें।
4.विचारों में स्पष्टता जरूरी (Clarity of thought is necessary):
- एक महत्त्वपूर्ण बात पर ध्यान देना आवश्यक है कि जब भी आप लिखें तो अपने विचारों में स्पष्टता एवं संतुलित दृष्टिकोण रखें।अतिवादिता से बचें।कन्फ्यूज्ड (confused) न रहे।विचारों में क्रमबद्धता एवं तर्कगत लय हो,असंबद्धता नहीं।अनावश्यक,विषयेतर एवं अनुपयोगी अध्ययन सामग्री से बचें।संक्षिप्त,सारगर्भित,टू द पॉइंट (To the point) एवं पूर्णता के साथ उत्तर लिखें।उत्तर लिखने के क्रम में भाषा की शुद्धता एवं स्पष्टता पर अवश्य ध्यान रखें।विशिष्ट लेखन शैली का यह मतलब नहीं है कि लच्छेदार,अलंकृत शब्दों का प्रयोग करें।प्रश्न की प्रकृति के अनुसार उत्तर दें।उत्तर लिखते समय बीच-बीच में प्रश्न पुनः अवश्य पढ़ें।प्रश्नोत्तर यदि तुलनात्मक हो सके तो अच्छे अंक मिलने की संभावना अधिक रहती है।
- कोई भी बड़ा लक्ष्य पाने का कोई शॉर्टकट रास्ता नहीं होता,उसे पाने के लिए कांटों भरे रास्तों पर चलना होता है।मेंस परीक्षा की राह कंटकाकीर्ण पथ है,जिसे पार करने वाला ही सफलता के लक्ष्य तक पहुंच पाता है।इसके लिए यह जरूरी है कि पाठ्यक्रम के मद्देनजर एक दीर्घावधि अध्ययन नीति तैयार करें एवं उसी के अनुरूप तैयारी को भी अंजाम दें।हमारा विश्वास है की सफलता अवश्य ही मिलेगी।
- उत्तर देते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:उत्तर सामान्य भाषा में हो क्लिष्ट,दुरुह और जटिल भाषा में नहीं हो।उत्तर में जितना आवश्यक हो उतना ही लिखें,अनावश्यक विस्तार नहीं हो।उत्तर रटी-रटायी,पुस्तकीय या गाइडों की भाषा में ना हो बल्कि उत्तर अपनी भाषा में लिखा जाए अर्थात् मौलिकता हो,आप विभिन्न लेखकों की पुस्तकें व समीक्षा अवश्य पढ़ें।लेकिन उत्तर लिखते समय अपने विचार अवश्य लिखें कि आप उस विषय पर क्या सोचते हैं।उससे आपका उत्तर औरों से अलग हटकर होगा।प्रश्नों के उत्तर में यदि आवश्यक हो तो उदाहरण अवश्य दें।उदाहरण,लोकोक्ति,मुहावरों,सूक्तियों से उत्तर प्रभावी और आकर्षक तथा पठनीय बन पड़ता है।
- किसी भी विषय पर अनेक पुस्तकें होती हैं।किसी भी पुस्तक का चयन करने वाले छात्र-छात्राओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि विद्वानों के अलग-अलग गुट होते हैं। यथा वामपंथी गुट किसी पुस्तक को वामपंथ का पुट देते हुए लिखते हैं।निष्कर्ष में भी वामपंथ का पुट दे देते हैं।इसी प्रकार दक्षिणपंथी,हिंदूवादी,मुस्लिम गुट आदि।अतः प्रश्नों के उत्तर लिखते समय आप अपना झुकाव किसी पक्ष की ओर न रखें।आपकी कोशिश मध्यम मार्ग की होनी चाहिए।साथ ही यह ध्यान रखें कि आप में याद करने की क्षमता होनी चाहिए क्योंकि कुछ विषयवस्तु ऐसी होती है जिसे स्मरण करना पड़ता है।वहीं किसी टॉपिक पर मौलिकता का प्रदर्शन करना होता है।
- यदि आप प्रतियोगिता परीक्षा की प्रकृति को ध्यान में रखकर कार्यनीति और रणनीति बनाते हैं तथा ऊपर दी गई रणनीति का ध्यान रखते हुए अमल करने में अपने स्वविवेक प्रयोग करते हैं तो अच्छे अंक स्कोर कर सकते हैं।परीक्षार्थी उक्त कार्य नीति के आधार पर अपने लिए अधिकतम उपयोगी कार्यनीति भी बना सकते हैं।हर अभ्यर्थी की प्रकृति और योग्यता अलग-अलग होती है अतः अपने माफिक कार्यनीति और रणनीति का चयन करके ही परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए।वस्तुनिष्ठ परीक्षा की तैयारी वाली रणनीति निबंधात्मक परीक्षा की तैयारी हेतु कारगर नहीं हो सकती है और निबन्धात्मक परीक्षा की तैयारी वाली कार्यनीति से वस्तुनिष्ठ परीक्षा में सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती है।
5.ऐच्छिक विषय की तैयारी (Preparation of Elective Subject):
- कुछ कॉम्पिटेटिव परीक्षाओं में ऐच्छिक विषयों की तैयारी भी करनी पड़ती है।जैसे राजस्थान फॉरेस्ट सर्विस और इंडियन फॉरेस्ट सर्विस में गणित विषय से संबंधित पेपर होते हैं।भारतीय प्रशासनिक एवं विभिन्न ऐच्छिक विषयों में से चुनाव करना होता है।
- दर्शनशास्त्र,गणित,प्राकृतिक विज्ञान आदि विषय अंक प्राप्त करने की दृष्टि से काफी लाभदायक विषय है और अन्य कोई विषय इसका मुकाबला नहीं कर सकता।लेकिन जैसा कि सभी अंकोंपार्जक विषयों के साथ होता है,इनमें भी खतरा यह है कि परीक्षार्थी का ज्ञान अत्यंत सटीक होना चाहिए वरना जिस तरह सही प्रस्तुतीकरण एवं प्रतिपादन से अधिकाधिक अंकों का अर्जन हो सकता है उसी तर्ज पर भ्रामक ज्ञान और सतही प्रतिपादन आपको शून्याभिमुख भी कर सकता है और सफलता दिवास्वप्न में रूपायित हो सकता है।अस्तु प्रतियोगिता परीक्षा के मेंस में आपने दर्शन जैसे उच्च वैचारिक स्तर वाले विषय का चयन किया है तो तैयारी काफी सोच-समझकर करें।इन विषयों की तैयारी कैसे करें,इस मुख्य प्रश्न पर आने से पूर्व ही हम एक बात आपको स्पष्ट तौर पर बता दें कि परीक्षा के लिए इस प्रकार के (दर्शन) विषय का चयन आप काफी सोच-समझकर करें।स्नातक स्तर पर आप दर्शन के विद्यार्थी रहे हैं अथवा नहीं,यदि इस विषय का चयन करना चाहते हैं तो यह भलीभाँति सुनिश्चित कर लें दार्शनिक विषयों की मीमांसा में आपकी रुचि है और आप उन्हें ठीक समझ सकने योग्य वैचारिक स्तर से युक्त हैं।
- यदि दार्शनिक अभिरुचि और तदनुरूप भावभूमि में से किसी भी एक का अभाव आप अपने भीतर अनुभव करें तो बड़ी ईमानदारी से परीक्षा हेतु इस विषय के चयन का लोभ संवरण कर लें,अन्यथा हानि होगी।
- अपनी अभिरुचि एवं वैचारिक भूमि का सही आकलन करके यदि आपने इस प्रतियोगिता परीक्षा के लिए दर्शन विषय का चयन कर लिया है तो हमें विश्वास है कि कठोर,क्रमबद्ध एवं नियमित अध्ययन से आप इस विषय की परीक्षा में उच्च अंक अवश्य हासिल कर लेंगे।आपको आवश्यकता केवल एक मार्गदर्शन की है,यह जानने की है कि आप इस परीक्षा के मद्देनजर दर्शन-विषय का अध्ययन कैसे करें?
- आप एक बात अवश्य ध्यान रखें कि स्नातक स्तर पर दर्शन विषय लेकर उत्तीर्ण होना अलग बात है और प्रतियोगिता परीक्षा में उत्तीर्ण होना बिल्कुल अलग बात है।यह तुलना विषयवस्तु को लेकर तो हो सकती है परंतु यह तुलना विभिन्न विश्वविद्यालयों में होने वाली पढ़ाई या परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्नों के स्तर को लेकर नहीं।भारत के ढेर सारे विश्वविद्यालय ऐसे हैं जिनमें न तो स्तरीय पढ़ाई होती है और न उनकी परीक्षाओं में स्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं।हां,पाठ्यक्रम की दृष्टि से कमोबेश सभी विश्वविद्यालय समस्तरीय हैं।इसलिए जब आप प्रतियोगिता परीक्षा जैसे मोर्चे पर संघर्ष हेतु अग्रसर होते हैं तो पठन-पाठन के इस यथार्थ स्तर भेद का खामियाजा भी आपको भोगना पड़ता है और इससे बचने का एक ही तरीका है कि आप प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी एक नई दृष्टि,नई चेतना और नई योजना के अनुसार करें ताकि आपके अध्ययन का स्तर भारत के श्रेष्ठतर अध्ययन केंद्रों के पठन-पाठन के स्तर के बराबर हो जाए।
- आप विश्वविद्यालय के प्रश्न-पत्रों और प्रतियोगिता परीक्षाओं के विगत प्रश्नों के प्रश्न-पत्रों की तुलना करेंगे तो यह वस्तु सत्य आसानी से समझ में आ जाता है।इसी प्रकार अन्य विषयों के बारे में समझना चाहिए।तात्पर्य यह है कि स्नातक या विश्वविद्यालय स्तर पर आपने कोई विषय लिया है और परीक्षा उत्तीर्ण की है तो इसका यह अर्थ नहीं है कि आप प्रतियोगिता परीक्षाओं में भी उत्तीर्ण हो ही जाएंगे।प्रतियोगिता परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए अत्यधिक कठोर परिश्रम और रणनीति के साथ अध्ययन करेंगे तो ही किसी विषय में पार पा सकते हैं।
- उपर्युक्त आर्टिकल में कॉम्पिटेटिव एक्जाम को क्रैक करने की 6 रणनीतियाँ (6 Strategies to Crack Competitive Exam),प्रतियोगिता परीक्षा को क्रैक कैसे करें? (How to Crack Competitive Exam?) के बारे में बताया गया है।
Also Read This Article:प्रतियोगी परीक्षा क्रैक करने की 7 रणनीति
6.अभ्यर्थी नौकरी ही करना क्यों चाहता है? (हास्य-व्यंग्य) (Why Do Candidate Want to Do Job?) (Humour-Satire):
- छात्र (अपने मित्र से):बताओ सभी पढ़े-लिखे नौकरी ही क्यों करना चाहते हैं?
- मित्र:क्योंकि डिग्रिधारी परिश्रम नहीं करना चाहता है।नौकरी करने के बाद भविष्य सेफ हो जाता है,काम नहीं करना पड़ता या नाममात्र का काम करना पड़ता है।
7.कॉम्पिटेटिव एक्जाम को क्रैक करने की 6 रणनीतियाँ (Frequently Asked Questions Related to 6 Strategies to Crack Competitive Exam),प्रतियोगिता परीक्षा को क्रैक कैसे करें? (How to Crack Competitive Exam?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.कौन-सी पुस्तकों का अध्ययन करें? (What books should you study?):
उत्तर:उत्कृष्ट तथा स्तरीय पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए।केवल आपकी जेब खाली कराने वाली और झूठे प्रलोभन तथा घटिया विषयवस्तु की पुस्तकों का अध्ययन नहीं करना चाहिए।
प्रश्न:2.प्रतियोगिता परीक्षा का चयन कैसे करें? (How to choose a competitive exam?):
उत्तर:अपनी योग्यता,क्षमता को ध्यान में रखते हुए करें। जैसे आप बमुश्किल परीक्षा में उत्तीर्ण हो रहे हैं तो जेईई-मेन व एडवांस में कैसे सफल हो सकते हैं।यदि जेईई-मेन का सपना है तो अपनी योग्यता व क्षमता को उस स्तर तक बढ़ाना होगा।
प्रश्न:3.क्या ऑनलाइन स्टडी करना चाहिए? (Should I study online?):
उत्तर:ऑनलाइन कई उत्कृष्ट वेबसाइट्स और यूट्यूब चैनल है जिनसे प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी की जा सकती है परंतु उसका चुनाव सोच-समझकर करें।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा कॉम्पिटेटिव एक्जाम को क्रैक करने की 6 रणनीतियाँ (6 Strategies to Crack Competitive Exam),प्रतियोगिता परीक्षा को क्रैक कैसे करें? (How to Crack Competitive Exam?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
About my self I am owner of Mathematics Satyam website.I am satya narain kumawat from manoharpur district-jaipur (Rajasthan) India pin code-303104.My qualification -B.SC. B.ed. I have read about m.sc. books,psychology,philosophy,spiritual, vedic,religious,yoga,health and different many knowledgeable books.I have about 15 years teaching experience upto M.sc. ,M.com.,English and science.










