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What to Do During Summer Holidays?

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1.ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में क्या करें? (What to Do During Summer Holidays?),बच्चों की छुट्टियाँ बरबाद न करें (Don’t Ruin Children’s Holidays):

  • ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में क्या करें? (What to Do During Summer Holidays?) यह प्रश्न अक्सर छात्र-छात्राओं को तथा उनके अभिभावकों को मथता रहता है।कुछ छात्र-छात्राएं सोचते होंगे कि छुट्टियों का अर्थ पढ़ाई से मुक्ति मिलना है और मौज-मस्ती तथा मनोरंजन व आराम करने के लिए है।
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2.छुट्टियों में क्या करें? (What to do during the holidays?):

  • इस बार बोर्ड परीक्षाएं फरवरी माह में ही होने जा रही है अतः फरवरी माह में परीक्षाएं समाप्त हो चुकी हैं,फिर लंबी छुट्टियों को कैसे बिताएंगे? स्कूल भी बंद होंगे।सारे मित्र भी घूमने चले जाएंगे।तब क्या होगा? आखिर ऐसा क्या करें जिससे मन लग जाए और समय का सदुपयोग हो जाए।कुछ विद्यार्थी बैठे-बैठे ऐसे सोच रहे होंगे।ऐसा अक्सर होता है कि जब बच्चों का छुट्टियों को आनंद से बिताने का समय होता है,तो माता-पिता के पास बहुत-सा कार्य होता है।माता-पिता को व्यस्त होते हुए भी थोड़ा समय बच्चों के साथ बैठकर बतियाना और मनोरंजन करना चाहिए।बच्चों को अच्छे-अच्छे पर्यटन स्थलों पर ले जाएं और उस स्थल के बारे में ज्ञानवर्धक जानकारी दें,जिससे बच्चे का ज्ञान बढ़ेगा तथा उनका मनोरंजन भी होगा।इसके अतिरिक्त बच्चे यदि छुट्टियों में कोई कोर्स करना अथवा कोई नया कार्य करना चाहें तो अवश्य करवाएं।परंतु उनके साथ घर के सदस्यों का भी पूरा प्रोत्साहन अवश्य चाहिए।वह बच्चों के कार्यों को करने में मदद करें।परंतु सबसे पहले बच्चे की रुचियों को जानना भी अति आवश्यक है।
  • लड़कियों की रुचियाँ लड़कों से थोड़ी अलग प्रकार की होती है।वह छुट्टियों में व्यावसायिक प्रशिक्षण लेती हैं जैसे सिलाई,कढ़ाई सीखना,कंप्यूटर कोर्स करना,पेंटिंग करना,डांस सीखना या फिर अपने करियर के लिए कोचिंग आदि जाना।लड़कियां अपनी छुट्टियों का सही रूप में सदुपयोग कर लेती हैं या फिर अपने घर-परिवार के लोगों के साथ समय गुजारती हैं।उसी प्रकार लड़के भी ऐसा करना चाहते हैं कि उनका मनोरंजन हो,साथ ही उनका ज्ञान भी बढ़े।छुट्टियों के होने से उनके मन में खुशी होती है।अपने दोस्तों के साथ समय व्यतीत करते हैं,उनके साथ खेलते हैं,घूमते हैं।बच्चों के लिए गर्मी की छुट्टियां बहुत उपयोगी होती हैं।गर्मी की छुट्टियां होते ही बच्चे योजनाएं बनाने लगते हैं कि ऐसा कौन-सा कार्य करें,जिससे छुट्टियों का सदुपयोग हो।कुछ बच्चे तो छुट्टियों का बेसब्री से इंतजार करते हैं कि हम यहां जाएंगे,उससे मिलेंगे,यह करेंगे,वह करेंगे,वगैरह-वगैरह। मगर बच्चों की हर इच्छा तो पूरी नहीं हो पाती है।ऐसे में माता-पिता को बच्चों के साथ पूरा मनोरंजन करना चाहिए।तभी तो बच्चों को खूब मजा आएगा।माता-पिता को चाहिए कि बच्चों को यदि पढ़ने का मन हो तो उन्हें अच्छी-अच्छी किताबें लाकर दें,जो ज्ञान बढ़ाने के अलावा उनको सीख दें,उनका मनोरंजन भी करें।इसके अलावा बच्चों को खेलने का पूरा मौका भी दें।उनकी रुचियों को देखते हुए उन्हें (छोटे बच्चों को) तरह-तरह के खिलौने भी लाकर दें।फिर देखिए,बच्चों को गर्मियों की छुट्टियों में कितना आनंद आएगा और वह स्वयं ही कहेंगे-‘मेरी छुट्टियां कितनी अच्छी बीती।’

3.बच्चों की छुट्टियां बरबाद ना करें (Don’t ruin children’s holidays):

  • सालभर की पढ़ाई के बाद जब बच्चों की छुट्टियां शुरू होती हैं,तो बच्चे अपने दोस्तों के साथ आपस में तरह-तरह से छुट्टियां बिताने की योजनाएं बनाते हैं।कोई बच्चा कहता है कि हम तो गर्मियों की छुट्टियों में पूरे 2 महीने पहाड़ों पर घूमने जाएंगे,तो कोई बच्चा कहता है कि हम तो अपने माता-पिता के साथ गांव अपने बाबा,दादी के पास जाएंगे,तो कोई बच्चा कहता है कि हम तो खूब पिक्चर देखेंगे।हर तरह के मंसूबे बनाकर बच्चे गर्मियों की छुट्टियों का आनंद उठाना चाहते हैं।किसी-किसी के मंसूबे पूरे होते हैं और किसी के नहीं।वैसे देखा जाए तो बच्चों के यह मंसूबे उनके माता-पिता की जरूरत के हिसाब से ही पूरे हो पाते हैं।
  • अक्सर देखा देखा गया है की गर्मियों की छुट्टियां होते ही माता-पिता को लगने लगता है कि हम अपने बच्चों को भरपूर मनोरंजन किस ढंग से करें ताकि वह अपनी छुट्टियों का आनंद उठा सके।बच्चों को घूमने-फिरने की खुली छूट वह दे देते हैं,उनकी हर इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश करते हैं,लेकिन जैसा कि देखा गया है,वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति व्यस्तता के दौर से गुजर रहा है।उसके पास इतना वक्त नहीं होता है कि वह अपने घर-परिवार को सही ढंग से समय दे सके।ज्यादातर घरों में माता-पिता दोनों ही या तो जॉब करते हैं,कुछ माता-पिता दोनों ही नौकरी करते हैं।उनके पास बच्चों के लिए इतना समय नहीं मिल पाता कि वह बच्चों की खुशियों में शामिल हो सकें,ऐसे घर-परिवार में माता-पिता को बच्चों की लंबी छुट्टियां एक बोझ लगने लगती हैं,क्योंकि ना तो वह उनके साथ घूमने जा पाते हैं,न ही उनकी इच्छा पूरी करने की कोशिश करते हैं और बच्चा मायूस होकर जब पुनः स्कूल खुलने पर जाता है,तो काफी उदास दिखता है,क्योंकि उसके सब मित्र उसे अपनी छुट्टियों में बिताई बातों को बताते हैं।उसे स्कूल जाने में किसी प्रकार की कठिनाई तो नहीं होती है,परंतु वह अपनी पढ़ाई एक निराशा के साथ शुरू करता है।ऐसे में बच्चे के माता-पिता बच्चे को बोझ समझकर उसे किसी रिश्तेदार के घर भेज देते हैं (नाना-नानी,मामा-मामी आदि) या फिर बच्चा अकेला  रहकर घर में छुट्टी बिता लेता है।
  • घर के साथ ही अगर बच्चा पास-पड़ोस के बच्चों के साथ खेलता है,तो माता-पिता को लगता है कि घर में बहुत शोर हो रहा है,क्योंकि माता-पिता जब थककर ऑफिस से लौटते हैं,तो उन्हें बच्चों का खेलना अच्छा नहीं लगता है।वे बच्चों को बात-बात पर डांट देते हैं।माता-पिता सोचते हैं कि अब बच्चों की छुट्टियां हो गई हैं,बच्चे घर में शैतानी करेंगे तो वे बच्चे को अपने किसी रिश्तेदार के यहां भेज देते हैं।जहां बच्चा एक सीमित दायरे में बंधकर रह जाता है।वहां उनका मनोरंजन अपने ढंग से नहीं हो पाता है,जैसा कि वह चाहते हैं।अगर रिश्तेदार के बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं,तब तो बच्चे के लिए और भी मुश्किल हो जाता है।आखिर वह कर भी क्या सकता है? उसे तो छुट्टियां बितानी है।सब बच्चों को घूमते देखकर वह अपराधी की भांति अपने को महसूस करने लगता है।वह अपने माता-पिता के प्रति क्रोधित होने लगता है।बच्चा सोचता है कि इससे अच्छा होता मेरा स्कूल खुला रहता,कम-से-कम अपने दोस्तों के साथ खेलता,कुछ बातें करता और पढ़ाई भी।
  • जब बच्चों की लंबी छुट्टियां होती हैं,तो उन्हें स्कूल से ढेर सारा होमवर्क बच्चों को करने के लिए मिल जाता है और बच्चा उस होमवर्क को करने में ही जुट जाता है। माता-पिता भी बच्चे को बार-बार टोकते रहते हैं कि चलो,पढ़ोगे नहीं तो अच्छे नंबर नहीं आएंगे,खेलना-घूमना बाद में।सारा कोर्स समाप्त कर लो इन छुट्टियों में,तभी तो अगली कक्षा में प्रथम आओगे और बच्चा बेचारा पढ़ाई के बोझ से अभी छुटकारा ही पाया था कि फिर से उसे पढ़ाई के बोझ तले दबा दिया गया है,ऐसे में जबकि बच्चों को छुट्टियां बिताने,उनकी पसंद की चीजों को दिखाने का समय होता है,तो उस बच्चे का पढ़ाई में मन कैसे लगेगा।उसका मन तो अपने बुने सपनों की उड़ान पर उड़ रहा है,परंतु पढ़ाई के आगे वह विवश है।

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4.बच्चों की रुचियों को जानें (Know the children’s interests):

  • छुट्टियों में प्रत्येक बच्चा चाहता है कि उसे अपने ढंग से,अपनी रुचियों के अनुसार छुट्टियां बिताने का मौका मिले।वह अपने दोस्तों के साथ घूमने जाना चाहता है,खेलना चाहता है तो उसे न रोकें।इससे बच्चे के व्यक्तित्व का विकास होगा।
  • बच्चे की छुट्टियां तो बर्बाद ना होने दें।इसमें माता-पिता का सहयोग जरूरी है।वह अपने बच्चों की रुचियों पर ध्यान दें,उन्हें स्वयं अपने साथ ज्ञानवर्द्धक स्थलों पर ले जाएं,उन स्थानों की सही जानकारी दिलाएं,ताकि बच्चा उसे देखकर कुछ सीखे।कुछ दिनों की छुट्टियां लेकर बच्चे के साथ समय बिताना चाहिए।उनकी इच्छाओं पर ध्यान देना चाहिए।उनके लिए क्या अच्छा है,क्या बुरा है,इस बारे में सही मार्गदर्शन करना चाहिए।उन्हें आगे क्या करना है,किस तरह वह आगे जाना चाहते हैं,उन्हें सही दिशा दें रास्ता दिखलाएं।लड़कियों को कुछ प्रयोगात्मक कार्य करने दें,जैसे वह सिलाई सीखना चाहती है या संगीत में रुचि ले रही हैं या किसी प्रतियोगिता में भाग लेना चाहती है,तो उसे करने दें,उसे रोके नहीं,क्योंकि उनके पास यही तो छुट्टियां हैं,जब वह अपने सोचे हुए कार्य को पूरा करती हैं और जब बच्चों के सपने पूरे हो जाते हैं,तो स्कूल खुलने पर वह खुशी-खुशी स्कूल जाते हैं और अपने दोस्तों को बताते हैं कि हमने यह देखा,यह कार्य किया,यह चीजें खरीदीं आदि-आदि।वह बहुत प्रसन्न हो रहते हैं और पुनः नई कक्षा में आकर अध्ययन में जुट जाते हैं।इनसे उनका मन पढ़ाई में दोगुना लगने लगता है।
  • बच्चों की छुट्टियों को बोझ न होने दें।बच्चों को भरपूर मनोरंजन करने के साथ ही अपने घर का माहौल भी हंसी-खुशी का रखें।उन्हें बोझ मत समझें।अपने बच्चों का सर्वांगीण विकास करें ताकि आपका बच्चा एक सफल प्रतियोगी बन सके एवं सच्चा नागरिक बन सके।इससे घर-परिवार में भी खुशहाली का वातावरण बना रहेगा।बच्चे अपने माता-पिता को स्नेह देंगे और खुद भी स्नेह का पात्र बनेंगे और अपनी गर्मियों की छुट्टियों को भरपूर मनोरंजन के साथ बिताएंगे।

5.बच्चों की हॉबी पहचानें (Identify children’s hobbies):

  • कुछ बच्चे जन्मदिन या किसी छोटे-मोटे फंक्शन में शरीर होते हैं,तो वहाँ बहुत सुंदर डांस करते हैं।उसके नृत्य की प्रशंसा जब देखने वाले उसके माता-पिता से करते हैं तो बहुत थोड़े माता-पिता उसकी हाॅबी को प्रोत्साहित करते हैं परंतु अधिकतर जवाब देते हैं: पहले पढ़-लिख ले,फिर बाद में देखा जाएगा।
  • आज के आधुनिक युग में बच्चे बहुत जल्दी बहुत कुछ सीख जाते हैं।चाहे वह कोई भी कठिन कार्य क्यों ना हो।नृत्य करना तो बहुत जल्दी आ जाता है।इसके अलावा गाना भी गा लेते हैं।बस,जरूरत है,बच्चों की रुचियों को बचपन से पहचानने की।उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन अवश्य दें।बहुत से माता-पिता बच्चों की रुचियों पर ध्यान नहीं देते हैं।वह यही सोचते हैं कि बच्चे सिर्फ पढ़ने में मन लगाएं।पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की प्रत्येक गतिविधियों पर भी ध्यान देना आवश्यक होता है।तभी बच्चों के व्यक्तित्व का विकास हो पाएगा।उन्हें समझने का प्रयास माता-पिता को अवश्य करना चाहिए।5 -7 साल की अवस्था में आते ही बच्चे के व्यक्तित्व का विकास होना प्रारंभ हो जाता है।अगर बच्चा नृत्य अच्छा करे तो उसे नृत्य की शिक्षा अवश्य दिलाएं या फिर बच्चा गाना गाए तो उसे गाना सिखाना प्रारंभ करें।पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे को उसकी रुचियों के अनुसार शिक्षा दें।उन्हें रोके नहीं।अक्सर छोटे बच्चों को माँ इसलिए रोक देती है कि बेटा छोटा है,कहीं गिर न जाए,कहीं उसे चोट ना लग जाए।बच्चों का क्या है,कई बार गिरेंगे नहीं,मजबूत कैसे होंगे।बच्चों का मन यदि ड्राइंग करने का करे तो अवश्य करने दें।हो सकता है कि बाद में वह बहुत बड़ा कलाकार बने।बच्चे की रुचि जिस चीज में हो,उसमें उसे आगे बढ़ने का प्रयास अवश्य करें।
  • कुछ बच्चे शिक्षा संस्थानों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों,जयन्तियों,वार्षिकोत्सव आदि में किसी न किसी कार्यक्रम में भाग लेते हैं।उनकी भूमिका को देखकर और प्रेजेंटेशन से माता-पिता बहुत खुश होते हैं और उसकी रुचियों को जानकर उन पर विशेष ध्यान देते हैं और हमेशा उसका उत्साह बढ़ाते रहते हैं।बच्चों की रुचियों को बचपन से ही पहचानें,उनका उत्साह बढ़ाएँ,उसे टोके नहीं,उसे हर कार्यक्रम में भाग लेने दें।इससे वह सीखेगा और आगे बढ़ने की कोशिश करेगा।समय-समय पर उसका उत्साह बढ़ाते रहें।बच्चों के मन में जो आएगा वही करेंगे।बहुत से बच्चे खिलौने तोड़ते हैं,फिर उसे जोड़ने का प्रयास करते हैं,तो समझिए कि वे टेक्निकल क्षेत्र में जाना चाहेंगे।उन्हें इस क्षेत्र में बढ़ाने का प्रयास करें।जिन बच्चों को विज्ञान से संबंधित चीजों में रुचि है,तो उसे वही चीजें लाकर दें।बच्चों को उनकी रुचियों के अनुसार ही कार्य करने दें।पढ़ने के साथ-साथ उनकी रुचियों पर भी विशेष रूप से ध्यान दें।बच्चों का चहुंमुखी विकास होना अति आवश्यक होता है ताकि उन्हें बड़े होकर एक सही दिशा एवं लक्ष्य मिल सके और वह अपने जीवन को सफल बना सकें।

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6.छुट्टियों का उपयोग करने का निष्कर्ष (Conclusion to using the holidays):

  • बच्चों की रुचियाँ और हाॅबी पहचान लेने के बाद खाली समय में,शीतकालीन अवकाश,दीपावली अवकाश,ग्रीष्मकालीन अवकाश आदि में उन्हें अपनी हॉबी को तराशने का मौका दिया जाना चाहिए।कई शिक्षा संस्थानों में सांस्कृतिक कार्यक्रम व जयंतियां आदि पर उनकी प्रतिभा,हाॅबी को विकसित करने के लिए कार्यक्रम में उनको कुछ न कुछ भूमिका दी जाती है।जैसे भाषण करना,नाटक में कोई भूमिका देना,योगासन का प्रदर्शन करवाना,डांस कराना,भजन,गीत गाना आदि के द्वारा उनकी हाॅबी को तराशने का अवसर दिया जाता है।
  • इसके अलावा भी कुछ शिक्षा संस्थानों में भजन,नृत्य,खेल आदि के लिए प्रशिक्षक,टीचर की नियुक्ति की जाती है और वे संबंधित क्षेत्र में बच्चे की रुचि को पहचान कर शिक्षा संस्थान में प्रशिक्षण देते रहते हैं।
  • जिन शिक्षण संस्थानों में ऐसी व्यवस्था नहीं है,तो माता-पिता,अभिभावक उनकी रुचियों को जानकर छुट्टियों में,खाली समय में उनको प्रशिक्षण,कोचिंग की व्यवस्था करके हाॅबी को तराश सकते हैं।माता-पिता को विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए।इससे न केवल बच्चे की हाॅबी और प्रतिभा निखरती है,बल्कि उसके खाली  समय,छुट्टियों का उपयोग होता है।
  • बच्चों को भी चाहिए कि वे कितने ही व्यस्त हों परंतु कुछ समय हाॅबी में अवश्य देना चाहिए।इससे पढ़ाई के दबाव व तनाव से मुक्ति मिलती है।किताबें पढ़ने में रुचि है,तो सत्साहित्य और ज्ञानवर्द्धक पुस्तकें पढ़ें।भजन,संगीत या अध्यात्म में रुचि है तो उस क्षेत्र में अपनी प्रतिभा को तराशे।कंप्यूटर में रुचि है तो कंप्यूटर सीखने या ऑनलाइन जॉब जैसे आर्टिकल लिखना,वीडियो एडिटिंग करना आदि की ट्रेनिंग छुट्टियों में ले सकते हैं।
  • यदि स्कूल में काउंसलर की व्यवस्था करने के साथ-साथ एक मल्टी टैलेंटेड टीचर की नियुक्ति की जाए तो वे बच्चों की हाॅबी यथा भजन,संगीत,नृत्य,योगासन,मेडिटेशन आदि को पहचान कर तलाशने,निखारने,उभारने और चमकाने का कार्य कर सकते हैं।आधुनिक युग में काउंसलर और मल्टी टैलेंटेड टीचर की परम आवश्यकता है ताकि बच्चे केवल शिक्षा का सर्टिफिकेट लेने के साथ-साथ कुछ हुनर भी साथ लेकर निकलें।इससे बच्चों को जॉब के लिए दर-दर ठोकरे खाना नहीं पड़ेगी।भारत जैसे जनसंख्या विस्फोट वाले देश में यह परम आवश्यकता है वरना बच्चे अपराध की ओर अग्रसर हो जाते हैं यदि उनके पास कोई हुनर नहीं होता है तो।

7.केन्द्र सरकार द्वारा काउंसलर की नियुक्ति एक सराहनीय कदम (Appointment of Counsellor by the Central Government is a commendable step):

  • 21.09.2025 को हमने काउंसलर की नियुक्ति हेतु लेख लिखा था उस पहल का परिणाम है स्कूलों में काउंसलर की नियुक्ति।केंद्र सरकार द्वारा काउंसलर की नियुक्ति सराहनीय है,इससे शिक्षा सैद्धान्तिक होने के साथ-साथ व्यावहारिक हो सकेगी।बच्चों की कैरियर,स्वास्थ्य,मानसिक परेशानी दूर होने के साथ-साथ सही मार्गदर्शन प्राप्त हो सकेगा।परंतु ध्यान यह रखना होगा कि यह नियुक्ति प्रतीक पूजा बनकर ही नहीं रह जाए।इसके लिए बच्चों का सक्रिय सहयोग तो जरूरी है ही साथ ही उच्च अधिकारियों द्वारा समय-समय पर मॉनिटरिंग करने के साथ-साथ समीक्षा करनी होगी।
  • हेल्थ टीचर की नियुक्ति सभी सरकारी स्कूलों में है परंतु यह सब जानते हैं कि न तो बच्चे रुचि दर्शाते हैं और न हेल्थ टीचर रुचि लेते हैं और उच्च अधिकारी भी कान में तेल डाल रखे हैं।इससे हेल्थ टीचर को जो वेतन दिया जाता है वह सरकार पर अनावश्यक बोझ ही है।काउंसलर की नियुक्ति में यह सबक लेने की जरूरत है।
  • केंद्र सरकार को इसके लिए साधुवाद।सरकारी स्कूलों की स्थिति बूचड़खाने जैसी क्यों है? टॉप प्रतिभाएं (टीचर्स) नियुक्त होने के बावजूद और अभिभावक प्राइवेट स्कूलों में मोटी-तगड़ी फीस चुकाकर बच्चों को क्यों पढ़ाना पसंद करते हैं।इस पर विचार मंथन करने की आवश्यकता है।
  • दरअसल बच्चे सही दिशा में आगे बढ़े उन्नति करें इसके लिए या तो उन्हें अपने जॉब करने की कला जानने के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान होना चाहिए अथवा उन्हें उनको जाॅब व हॉबी में इस तरह से व्यस्त रखा जाए ताकि वह आगे से आगे उन्नति की राह पर बढ़ता रहे और गलत राह की तरफ भटके नहीं।सैद्धांतिक शिक्षा के कारण आज अधिकांश युवा अपराध,नशाखोरी,दुर्व्यसनों,दुष्कृत्यों की तरफ बढ़ते जा रहे हैं।जब उन्हें व्यावहारिक शिक्षा मिलेगी,सही मार्गदर्शन मिलेगा तो उनके भटकने के चांस बहुत कम हो जाएंगे।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में क्या करें? (What to Do During Summer Holidays?),बच्चों की छुट्टियाँ बरबाद न करें (Don’t Ruin Children’s Holidays) के बारे में बताया गया है।

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8.छुट्टियां व्यतीत करने का तरीका (हास्य-व्यंग्य) (How to Spend Holidays) (Humour-Satire):

  • बच्चा स्कूल परीक्षा से निवृत्त होने के बाद एक कोचिंग सेंटर में पहुंचा और टीचर से बोला।
  • बच्चाःआपका मोबाइल देना जरा।
  • टीचरःतुम्हें किस लिए चाहिए।
  • बच्चाःमम्मी-पापा को मिसकॉल मारनी है कि मैं एग्जाम से फ्री होकर ऐसे कोचिंग सेंटर में पहुंच गया हूं जहां छुट्टियों को आराम से एंजॉय कर लूंगा,उनको पेमेंट कर देना।

9.ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में क्या करें? (Frequently Asked Questions Related to What to Do During Summer Holidays?),बच्चों की छुट्टियाँ बरबाद न करें (Don’t Ruin Children’s Holidays) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.क्या मल्टी टैलेंटेड टीचर की शिक्षा संस्थानों में नियुक्ति व्यावहारिक है? (Is it feasible to appoint a multitalented teacher in educational institutions?):

उत्तर:छात्र-छात्राओं को व्यावहारिक शिक्षा,उनके हुनर को तराशने के लिए नियुक्ति व्यावहारिक है।बच्चे केवल शिक्षा का सर्टिफिकेट ही लेकर नहीं निकालेंगे।इससे बच्चे बेरोजगार होने से बचेंगे।अपराधी नहीं बनेंगे।

प्रश्न:2.मल्टी टैलेंटेड टीचर की नियुक्ति के बाद क्या ध्यान रखें? (What to keep in mind after appointing a multitalented teacher?):

उत्तर:काउंसलर व मल्टी टैलेंटेड टीचर की नियुक्ति के बाद यह ध्यान रखें कि उनकी नियुक्ति प्रतीक पूजा ही बनकर न रह जाए।स्कूलों में शारीरिक शिक्षक की नियुक्ति करते हैं,परंतु शारीरिक शिक्षक बच्चों को खेल कहां खिलाते हैं।उनकी नियुक्ति प्रतीक पूजा ही है।

प्रश्न:3.केंद्र सरकार द्वारा काउंसलर की नियुक्ति पर टिप्पणी लिखो। (Write a note on the appointment of a counsellor by the Central Government):

उत्तरःयह सराहनीय कदम है और यह कदम बच्चों के लिए क्रांतिकारी कदम साबित होगा यदि इसकी सही तरीके से मानिटरिंग की जाती रहेगी।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में क्या करें? (What to Do During Summer Holidays?),बच्चों की छुट्टियाँ बरबाद न करें? (Don’t Ruin Children’s Holidays?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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