Develop Attractive Personality in 2026
1.2026 में आकर्षक व्यक्तित्व विकसित करें (Develop Attractive Personality in 2026),आकर्षक व्यक्तित्व का निर्माण कैसे करें? (How to Build Attractive Personality?):
- 2026 में आकर्षक व्यक्तित्व विकसित करें (Develop Attractive Personality in 2026) के द्वारा प्रभावी और आकर्षक व्यक्तित्व विकसित करने के लिए किन-किन गुणों की जरूरत होती है,के बारे में बताया गया है।
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2.संतुलित मानसिकता (Balanced mindset):
- किसी भी विद्यार्थी के लिए संतुलित मानसिकता की तब सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है जब वह असफल हो रहा हो,निराश,हताश हो,कमजोर हो।अपने आपकी मजबूत मानसिकता रखने का यही उपयुक्त समय होता है।एक अच्छे विद्यार्थी की यही भावना होनी चाहिए-चाहे वह शैक्षिक परीक्षा दे रहा हो,प्रतियोगिता परीक्षा दे रहा हो या प्रवेश परीक्षा।विपरीत परिस्थितियों में जो विद्यार्थी दोगुने उत्साह के साथ कार्य करने का संकल्प करता है,वह अंततः अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में समर्थ होता है।जो विद्यार्थी संतुलित मानसिकता रखता है वह मनोवांछित सफलता प्राप्त कर लेता है।जो विद्यार्थी कठिन समय में अपना संतुलन बनाए रखता है और विवेक द्वारा अपनी कार्यशैली को निर्धारित करता है,वह अधिकांशतः विजयश्री का वरण करता है।कई बार संकट की स्थिति में रणनीति को बदलने से परीक्षा की तैयारी में सुधार होता है।साधन-सुविधाएँ वो ही रहते हैं,विद्यार्थी वे ही होते हैं,परंतु दिमाग को काम लेने का तरीका बदलने से अपेक्षित परिणाम प्राप्त कर लेते हैं।छात्र-छात्राएं इस प्रकार की मानसिकता का विकास करें जिसमें असफलता से निराश होने का स्थान न होकर पुनः प्रयास करने का माद्दा हो तथा उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए पूरी शक्ति के साथ मजबूत मानसिकता की प्रवृत्ति हो।
- हम समझ लें कि संकट की घड़ी हो अथवा शांति का समय हो,किसी-न-किसी को सफलता तो मिलती है।तब फिर हम ही क्यों न इस श्रेय को प्राप्त करें? हम ऐसे कई परीक्षार्थियों/प्रतियोगियों को जानते हैं जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से काम करते हुए कई विषयों में नए कीर्तिमान स्थापित किए।कोई अभ्यर्थी जाॅब प्राप्त न कर सके,मैं जाॅब प्राप्त न कर सकूं।इसका अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि जाॅब का अभाव है।हम किसी संबंधित कंपनी,कार्यालय या संगठन में जाकर देख लें,काम बराबर आता है।प्रश्न यह है कि जब वे कार्य प्राप्त कर सकते हैं तो आप या हम क्यों नहीं।यदि कोई प्रतियोगी 95% अंक प्राप्त कर सकता है तो हम भी उतने अथवा उससे अधिक अंक क्यों नहीं प्राप्त कर सकते हैं।
- दिन-रात अध्ययन करते हुए पुस्तकों पर सवार हो जाइए,पुस्तकें आपको अप्रतिम ज्ञान प्रदान करेंगी और साथ ही परीक्षा,प्रतियोगिता में सफलता।अपेक्षित सफलता प्राप्त न हो सकने का कारण प्रायः हीनभावना समन्वित हमारा भय होता है।मैं सफल न हो सका,मैं इतने अंक क्यों प्राप्त कर सकूंगा,आदि।भयोत्पादक विचार व्यक्ति को अपने मार्ग पर अग्रसर ही नहीं होने देते हैं।संतुलित मानसिकता का रुख अपनाकर जब तक हम सबसे आगे चलने का प्रयास ही नहीं करेंगे,तब तक सबसे पहले शिखर पर क्यों कर पहुंच सकेंगे? जीवन में कठिनाइयां आती रहती हैं,बुरी बातें,निराशा,हताशा,उद्विग्नता आदि आते रहते हैं,परंतु ये हमारे जीवन का स्थायी अंग न हुई है और न कभी हो सकेंगी।उनको सहन करने वाले भी हमारी तुम्हारी तरह के मनुष्य थे और उनको परास्त करने वाले भी हम और आप जैसे मानव थे।
- हम भी अपेक्षित इच्छा शक्ति द्वारा प्रेरित होकर उन विजयी मानवों की पंक्ति में बैठने के लिए स्थान बना सकते हैं।अपनी अपेक्षित सफलता के अभाव में बहाने बनाना,तरह-तरह के कारण प्रस्तुत करना ही एक तथ्य की ओर इंगित करते हैं दृढ़ संकल्प का अभाव।दूसरे शब्दों में जो व्यक्ति शिकवा-शिकायत करता है,वह हमारे विचार से,प्रगति के नियमों का पालन नहीं करना चाहता है और कठिन परिश्रम से जी चुराता है।यदि कोई परिश्रमी के रूप में सफलता का मूल्य चुकाने को तैयार नहीं है,तो हम यही कहेंगे-यह उसका दुर्भाग्य है।
3.समझदारी से काम लें (Act wisely):
- संकट की घड़ियों में महान गणितज्ञा हाइपेटिया,गणितज्ञ आर्किमिडीज आदि अपने दायित्व से विमुख नहीं हुए और अपने स्थान पर डटे रहे।यह उनकी समझदारी थी।वे अपने दायित्व को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाकर चैन के साथ रहते।यह भी उनकी समझदारी होती।समझदारी का सही रूप वास्तव में क्या है? संकट के समय अपने काम पर डटे रहना अथवा सुरक्षित स्थान को चले जाना? वस्तुतः समझदारी के प्रथम रूप की स्वीकृति में सच्ची समझदारी देखते हैं।अपने कर्त्तव्य पर डटे रहना,अपने काम पर डटे रहना,अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहना एक प्रतिबद्ध व्यक्ति और कार्यकर्त्ता का धर्म है।
- समाज में अन्य श्रेणियों के व्यक्तियों के साथ अपनी तुलना करने में भी हमारी राय में कोई समझदारी नहीं है।कुछ लोग इस तरह के प्रश्न बार-बार करते हैं कि समाज में मेरे प्रोफेशन को अधिक आदर के साथ देखा जाता है अथवा अमुक प्रोफेशन वाले व्यक्ति को? इसका उत्तर स्वयं अपने भीतर इस प्रश्न में खोजना चाहिए।जितने इतिहास प्रसिद्ध व्यक्ति हुए हैं,वे क्या किसी विशेष प्रोफेशन के व्यक्ति थे अथवा समाज के किसी विशेष वर्ग से आए थे? स्थिति स्पष्ट है।व्यक्ति की महानता और उसके प्रोफेशन का कोई संबंध नहीं होता है।महानता व्यक्ति को उपलब्ध होती है।प्रोफेशन व्यक्ति को महत्त्व नहीं देता है,व्यक्ति प्रोफेशन को महत्त्व प्रदान कर देता है।
- गणितज्ञ कार्ल फ्रेडरिक गाॅउस साधारण परिवार से थे परंतु आज चोटी के गणितज्ञों में शुमार होते हैं।गणितज्ञ और वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन तथा इसाक न्यूटन इसलिए महान नहीं है क्योंकि वे गणितज्ञ थे,बल्कि गणित और विज्ञान में अनुसंधान इसलिए महत्त्वपूर्ण बन गया क्योंकि उपर्युक्त महान गणितज्ञ किसी समय गणित में अनुसंधान करते थे।समझदारी इसमें नहीं है कि हम अपने जॉब की तुलनात्मक स्थिति पर विचार करने में समय और शक्ति का व्यय करें,समझदारी की बात तो यह है कि हम अपने श्रेष्ठ आचरण द्वारा अपने जॉब को यह महत्त्व प्रदान करने का प्रयत्न करें।हम जो काम करें,उसको श्रेष्ठतम रूप में करें और श्रेष्ठतम स्वरूप प्रदान करें।हम स्वयं श्रेष्ठतम स्थान के अधिकारी बन जाएंगे।जो व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहता है,उसके पास इस प्रकार की बातें सोचने के लिए अथवा बातें करने के लिए समय नहीं होता है।एक प्राध्यापक के दिमाग में यह बात कभी नहीं आती होगी कि अध्यापन कार्य और राजनीतिज्ञ में सामाजिक स्थिति किसकी अधिक श्रेष्ठ मानी जाती है।सत्य तो यह है कि कर्त्ता से बढ़कर कर्म का स्मारक दूसरा नहीं हो सकता है।श्रेष्ठ व्यक्ति अपनी योग्यता के अभावों के विषय में चिंतित होता है,उसको इस बात की चिंता नहीं होती कि उसको कितने लोग नहीं जानते हैं।श्रेष्ठ व्यक्ति सब कुछ अपने भीतर खोजता है,हीन व्यक्ति सब कुछ अन्य व्यक्तियों में खोजता है।
- युवावर्ग अपने दोषों का पता लगाकर उनको दूर करें तथा अपने गुणों का पता लगाकर उनका विकास करे।यह चिंता ना करें कि उसको जानने-पहचानने वाले लोगों की संख्या कितनी है।वह तो केवल याद रखें कि कोहिनूर ने कभी किसी को अपना परिचय नहीं दिया है।एक चौकोर पत्थर सड़क पर पड़ा नहीं रह सकता है।
4.आकर्षक व्यक्तित्व (magnetic personality):
- यदि आपके सामने कोई ऐसा व्यक्ति आकर खड़ा हो जाए,जिसका रंग काला हो,मुंह पर चेचक के गहरे दाग हों,आंखें छोटी-छोटी और गड्ढों में धँसी हों,नाक चपटी हो,होंढ मोटे हो,शरीर पर झुर्रियां पड़ रही हो,शरीर से बदबू आ रही हो,तो आप क्या चाहेंगे? यह व्यक्ति जल्दी-से-जल्दी मेरे सामने से चला जाए,क्योंकि उसका बाह्य व्यक्तित्व विकर्षण एवं मलीनता उत्पन्न करने वाला है।
- यदि कोई ऐसा व्यक्ति आपके सामने आ जाए,जिसका वर्ण गौर हो तथा नाक-नक्श भी ठीक हो,परंतु क्रोध के कारण गालियां बक रहा हो,घृणा एवं ईर्ष्या के कारण जिसके मन-मस्तिष्क दूषित हो रहे हों,जो धोखाधड़ी और ठगी का व्यापार करता हो आदि,तब भी आप चाहेंगे कि उस व्यक्ति से आपका पीछा जल्दी-से-जल्दी छूट जाए।मंतव्य स्पष्ट है कि वह व्यक्ति आकर्षक एवं प्रिय लगता है जिसके व्यक्तित्व के बाह्य एवं आंतरिक दोनों पक्ष सुंदर एवं निर्मल हों।सुंदर बाह्य रूप को धारण करने वाला व्यक्ति यदि भीतर से शुद्ध नहीं है,तब भी वह विशेष आकर्षक नहीं बन पाता है,उसके मन का मेल किसी-न-किसी रूप में बाह्यपक्ष पर अपना प्रभाव प्रकट कर देता है,जिस प्रकार हम आम,टमाटर आदि फल-सब्जी को देखकर समझ लेते हैं कि ये बासी है अथवा ताजी है।हमारी-आपकी तरह प्रत्येक व्यक्ति ताजा एवं देखने में सुंदर वस्तुओं को चाहता है।कुरूप एवं आभाहीन व्यक्तियों को भी बहुत कम लोग पसंद करते हैं।
- बाह्य रूप भगवान की देन होता है,आंतरिक व्यक्तित्व का निर्माण हम स्वयं करते हैं।आंतरिक व्यक्तित्व की छाया हमारे बाह्य व्यक्तित्व को अपनी प्रकृति के अनुसार आकर्षण अथवा विकर्षण प्रदान कर देती है।सरदार वल्लभभाई पटेल का बाह्य व्यक्तित्व सुंदर नहीं था,परंतु उनकी आंतरिक निर्मलता एवं पवित्रता ने उनके बाह्य व्यक्तित्व को आकर्षक एवं प्रिय बना दिया था।सामुद्रिक की यह लोकोक्ति सर्वथा सार्थक है।यत्राकृति तत्र गुणा वसन्ति अर्थात् सुंदर आकृति वाले व्यक्ति में श्रेष्ठ गुणों का निवास रहता है।अपने मन में पवित्र भावों-प्रेम,सहानुभूति,क्षमा आदि का विकास करके हम भी अपने व्यक्तित्व को चुंबकीय बना सकते हैं।जिस प्रकार श्रेष्ठ वस्तुएं स्वयं बोलती हैं,दृष्टा को अपने प्रति आकर्षित कर लेती हैं,उसी प्रकार श्रेष्ठ व्यक्तित्व द्रष्टा को अपने प्रति सहज ही आकर्षित कर लेता है,क्योंकि अच्छे आदमी से बात करके मन अच्छा हो जाता है।सुंदर वस्तु प्रत्येक व्यक्ति के लिए आनंद की वस्तु होती है।
- आकर्षक व्यक्तित्व का धनी प्रत्याशी साक्षात्कार में कक्ष में घुसते ही साक्षात्कार कर्त्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है,वे उससे बातें करने के लिए उत्सुक हो जाते हैं।इस प्रकार आधी लड़ाई तो वह प्रत्याशी बिना लड़े ही जीत जाता है।कहा भी जाता है कि First impress is the lasting impression if not the last impression अर्थात् आपसे मिलने पर व्यक्ति के ऊपर जो प्रथम प्रभाव पड़ता है,वह यदि अंतिम प्रभाव नहीं होता है,तो दीर्घकाल तक बने रहने वाला प्रभाव अवश्य होता है।अतएव आपकी प्रथम आवश्यकता यह है कि आपकी छवि उत्तम हो और वह ऐसी हो कि प्रथम प्रभावशाली हो।यह प्रथम दर्शन एवं प्रदर्शन ही व्यक्ति की सफलता की आधारशिला बनता है।
5.प्रभावशाली व्यक्तित्व (Effective Personality):
- प्रभावशाली एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी व्यक्तियों के लिए सामने उपस्थित व्यक्ति/व्यक्तियों को प्रभावित करना अपेक्षाकृत सरल होता है और वे सफलता प्राप्त कर लेते हैं।आप यदि अपने आकर्षक व्यक्तित्व के प्रति आश्वस्त हैं,तो आपका मन प्रफुल्लित एवं उत्साहपूर्ण रहेगा और सफलता के प्रति भी आश्वस्त हो जाएंगे।इतना ही नहीं,आकर्षक व्यक्तित्व अपने धारणकर्त्ता को आत्मविश्वास प्रदान कर देता है और वह परिस्थितियों का सामना करने के लिए सहज ही सक्षम हो जाता है।हमें पूरी तरह आश्वस्त रहना चाहिए कि हमारा प्रभावशाली व्यक्तित्व हमारी सफलता में सकारात्मक भूमिका का निर्वाह करेगा,जो लोक में है,वह परलोक में है,जो व्यष्टि का गुण है,वह समष्टि का गुण है-इस तथ्य को यदि आप समझते हैं,तो आप जानते होंगे कि पुस्तकों के ढेर में से आप तथा अन्य व्यक्ति भी सर्वप्रथम उसी पुस्तक पर हाथ डालते हैं,जिसका आवरण सर्वाधिक आकर्षक होता है।लोक-व्यवहार का यही नियम व्यक्ति के संदर्भ में भी लागू होता है,परंतु पढ़ने पर यदि आप पाते हैं कि पुस्तक में पढ़ने योग्य एवं ज्ञानवर्द्धक सामग्री अपेक्षाकृत बहुत थोड़ी है,तो आप पुस्तक के प्रति एक प्रकार झल्लाहट प्रकट करने लग जाते हैं और इस प्रकार की बातें कहने लगते हैं कि यहां तो ढोल की पोल है अथवा ऊंची दुकान फीका पकवान वाली बात है।
- व्यक्तित्व को पूर्णतः आकर्षक बनाने के लिए बाह्य सौंदर्य एवं आंतरिक सौंदर्य दोनों समान रूप से आवश्यक है।यह स्थिति बहुत दुःखद होती है कि व्यक्ति जितना अंदर से श्रेष्ठ हो और बाहर से उसकी अपेक्षा कम दिखाई दे,क्योंकि व्यक्ति का वास्तविक मूल्यांकन करने के लिए अगले आदमी को प्रयत्न करना पड़ता है अन्यथा व्यक्ति का वह पक्ष उपेक्षित बना रहता है।दूसरी ओर यह स्थिति निराशाजनक होती है,जब व्यक्ति बाहर से जितना दिखाई देता है,उतना भीतर से न निकले।अतः व्यक्तित्व के पूर्णतः आकर्षक एवं प्रभावशाली होने के लिए यह आवश्यक है कि हमारे बाह्य व्यक्तित्व एवं आंतरिक व्यक्तित्व के मध्य सामंजस्य अथवा तालमेल हो।आकृति के अनुरूप गुण धारण करने वाला व्यक्ति ही आकर्षक व्यक्तित्व का धनी व्यक्ति कहा जाता है।बाह्य व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने के लिए दो बातें आवश्यक होती हैं उत्तम स्वास्थ्य और व्यक्तित्व के अनुरूप आकर्षक वेशभूषा।उत्तम वेशभूषा से यह तात्पर्य नहीं है कि वस्त्र कीमती और भड़कीले हों।वे सामान्यतः मौसम के अनुरूप एवं साफ-सुथरे हों।
6.मुख हृदय का दर्पण है (The mouth is the mirror of the heart):
- कहावत है कि हमारा मुख हमारे हृदय का दर्पण होता है।मुंह पर उभरने वाली रेखाएं हमारे हृदयस्थ भावों की परिचायिकाएँ होती हैं।क्रोधी व्यक्ति की मुखाकृति विकृत हो जाती है,ईर्ष्या एवं द्वेष के भाव मुखाकृति पर कुढ़न की मुद्रा अंकित कर देते हैं।दुर्भावनापूर्ण हृदय मुख पर विकर्षण की काली छाया डाल देता है,आदि।इस प्रकार विकृत मुखमुद्रा वाला व्यक्ति भले ही श्रेष्ठतम परिधान धारण कर ले और जन्म से स्वरूपवान भी हो,परंतु आकर्षण का केंद्र नहीं बन सकेगा,क्योंकि मृदु मुस्कान से इनका संबंध विच्छेद हो जाता है।ऐसे ही व्यक्तित्व वाले लोगों को लक्ष्य करके इस तरह की बातें कही जाती हैं-“यार रोते क्यों हो?” क्या बताएं,शक्ल ही ऐसी है।”इसके विपरीत जिस व्यक्ति का हृदय सदैव प्रसन्नता से भरा रहता है,उसका मुख सदैव प्रफुल्लित रहता है,उसके गुलाबी गालों पर पड़ने वाले गड्ढों में दर्शक की आंखें समा जाने को आतुर रहती हैं।प्रेम भाव भरे कपोलों पर नृत्य करता हुआ देखा जा सकता है,बड़ी-बड़ी आंखों की चमक हृदयस्थ सद्भावना को उजागर करती है।घृणा भरा हृदय सुरुचि का वातावरण प्रस्तुत करता है और प्रेमपूरित हृदय सुरुचि की सुगंध द्वारा वायुमंडल को सुरभित कर देता है।
- हँसता-सा चेहरा प्रसन्नता प्रदान करने वाले परिणामों का विधान करता है।मनहूसीयत वाले चेहरे मनहूसियत का संदेश लेकर आते हैं-रोते से जाकर मरे की खबर लाने वाले लोग इसी वर्ग से संबंधित होते हैं,जो लोग ऊपरी हंसी हँसकर अथवा बात करते समय होठों पर बनावटी मुस्कान लाकर अपने मन की दुर्भावनाओं को छिपाने का प्रयत्न करते हैं,वे भूल जाते हैं कि मनुष्य को भगवान ने छँठवा इंद्रिय ज्ञान (sixth sense) दिया है जिसके द्वारा वह सामने उपस्थित व्यक्ति के मन में छिपे हुए चोरों को देख लेता है।दुर्भावना को छिपाकर दुनिया को मैं अपना काम निकालने का प्रयत्न करने वाले व्यक्ति को समझ लेना चाहिए कि चोर दिया बुझाकर यदि अंधेरे में भाग सकता है तो ठोकर खाकर गिर भी सकता है।सारांश यह है कि अपने व्यक्तित्व को चुंबकीयता प्रदान करने के लिए आपको अपने मन में सदैव उदारता एवं मैत्रीपूर्ण विचार उत्पन्न करते रहना चाहिए।आपका मुखमण्डल आपके उदार एवं रचनात्मक चिंतन का उद्घोषक बन जाए-चुंबकीय व्यक्तित्व के निर्माण के लिए इतना पर्याप्त है।
उपर्युक्त आर्टिकल में 2026 में आकर्षक व्यक्तित्व विकसित करें (Develop Attractive Personality in 2026),आकर्षक व्यक्तित्व का निर्माण कैसे करें? (How to Build Attractive Personality?) के बारे में बताया गया है।
Also Read This Article:व्यक्तित्व शुद्धि के 6 मंत्र
7.आकर्षक व्यक्तित्व किसका है? (हास्य-व्यंग्य) (Who Has Attractive Personality?) (Humour-Satire):
- टीचरःकिसी सीक्रेट आकर्षक व्यक्तित्व के धनी गणितज्ञ का नाम बताओ।
- स्टूडेंट:जब व्यक्तित्व ही सीक्रेट है तो आप कैसे कह सकते हैं कि वह व्यक्तित्व आकर्षक होगा?
8.2026 में आकर्षक व्यक्तित्व विकसित करें (Frequently Asked Questions Related to Develop Attractive Personality in 2026),आकर्षक व्यक्तित्व का निर्माण कैसे करें? (How to Build Attractive Personality?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.कैसा जीवन स्वतंत्र है? (What kind of life is free?):
उत्तर:वास्तव में वही जीवन स्वतंत्र है जो अपने पर शासन करता है और कष्ट सहता तथा तपता है।
प्रश्न:2.सुदृढ़ व्यक्तित्व के बारे में बताएं। (Tell us about a strong personality):
उत्तर:किसी भी व्यक्ति के आंतरिक गुण बाह्य गुणों के साथ मिलकर उसके पूरे व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।एक अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण एक दिन में नहीं होता,इसमें काफी समय लगता है।पहले आप सद्गुणों को धारण करते हैं और फिर आपके अंदर उनका विकास होता है।
प्रश्न:3.आकर्षक व्यक्तित्व से क्या आशय है? (What do you mean by attractive personality?):
उत्तर:इस व्यक्तित्व के धनी लोग सबको अपनी ओर आकर्षित करने में सफल हो जाते हैं।ऐसे लोग दिखने में बहुत सुंदर होते हैं या फिर ये अपनी बातों से दूसरे व्यक्तियों का मन मोह लेते हैं।ये आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं,ऐसी विशेषता होती है।
प्रश्न:4.व्यक्तित्व हमारी पहचान है स्पष्ट करो। (Personality is our identity):
उत्तर:व्यक्तित्व मनुष्य का ढांचा है।हर मनुष्य किसी न किसी व्यक्तित्व के साथ जीवित रहता है।उसका व्यक्तित्व ही उसकी सफलता निश्चित करता है।हम सबका व्यक्तित्व हमें कार्यक्षेत्र और समाज में एक पहचान प्रदान करता है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा 2026 में आकर्षक व्यक्तित्व विकसित करें (Develop Attractive Personality in 2026),आकर्षक व्यक्तित्व का निर्माण कैसे करें? (How to Build Attractive Personality?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
About my self I am owner of Mathematics Satyam website.I am satya narain kumawat from manoharpur district-jaipur (Rajasthan) India pin code-303104.My qualification -B.SC. B.ed. I have read about m.sc. books,psychology,philosophy,spiritual, vedic,religious,yoga,health and different many knowledgeable books.I have about 15 years teaching experience upto M.sc. ,M.com.,English and science.










