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Saturday, 21 September 2019

Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park

Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park

1.गणित समानता: जब एक सफेद पुरुष पार्क से बाहर निकलता है का परिचय (Introduction of Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park)-
इस आर्टिकल में बताया गया है कि गणित सीखने के लिए सबके साथ समानता का व्यवहार करना चाहिए। बौद्धिक रूप से यह विचार सुलझा हुआ तथा अच्छा लगता है परन्तु व्यावहारिक रूप से इस पर विचार करें तो यह कार्य बहुत कठिन है। क्या समानता लाने के लिए मोटे व्यक्ति को समान करने के लिए उसको छीला जा सकता है? व्यावहारिक रूप में यह कार्य कठिन है। संसार में हर चीज के दो पहलू होते जैसे शुभ-अशुभ, न्याय-अन्याय, हानि-लाभ, ऊँच-नीच, जय-पराजय इत्यादि। अर्थात् एक के बिना दूसरा असंभव है।जैसे सिक्के के दो पहलू होते हैं चित्त और पट। उसी प्रकार संसार में जो चीजे हैं उसके दो पहलू होते हैं। यहाँ कहने का यह तात्पर्य नहीं है कि समानता लाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। वस्तुतः जब तक हम कि किसी भी बात के पक्ष-विपक्ष की पूरी जाँच-पड़ताल नहीं कर लेते हैं तब तक उस पर चलना या कदम बढ़ाना हमारे लिए समस्या पैदा कर सकता है। समानता का अधिकार भी उसी तरह है। समानता लाने का प्रयास अवश्य करना चाहिए परन्तु इसमें शत-प्रतिशत सफलता प्राप्त करना नामुमकिन है। 
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(1.)गणित के इतिहास व गणितज्ञों के बारे में भेदभाव (Discrimination about the history of mathematics and mathematicians)-

हमारे विद्यालयों के पाठ्यक्रम में गणित के इतिहास के अध्ययन को कोई स्थान नहीं दिया गया है। इसका कारण यह है कि पाठ्यक्रम निर्माता वर्तमान परिस्थितियों में गणित के इतिहास की विशेष उपयोगिता नहीं समझते हैं। यदि गणित के इतिहास का अध्ययन विद्यार्थियों को कराया जाये तो उन्हें आनंद एवं परितोष की अनुभूति होगी।
गणित के इतिहास के अध्ययन से विद्यार्थियों को यह विषय गतिशील एवं प्रगति का सूचक लगेगा तथा इस विषय के अध्ययन में उनकी रुचि का विकास होगा। विद्यार्थियों को गणित के अनेक उपविषयों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी मिलने से उन्हें मानवीय प्रयासों एवं चिन्तन का महत्त्व समझ में आएगा।
गणित के इतिहास का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रभाव यह होगा कि विद्यार्थी यह समझेंगे कि अन्ततोगत्वा मानवीय समस्याएं ही हैं तथा उन्हें अनेक प्रकार से हल किया जा सकता है। मानवीय प्रगति के साथ-साथ अनेक समस्याओं का उद्भव होता रहा है तथा गणित के ज्ञान का उपयोग इन समस्याओं को हल करने में सदैव उपयोगी सिद्ध हुआ है। मानव की प्रगति गणित विषय के विस्तार एवं चिंतन के साथ जुड़ी हुई है। गणित के इतिहास के अध्ययन से विद्यार्थियों में सही प्रकार की आदतों का निर्माण करना सम्भव हो सकता है जिससे कि वे समझें कि गणित का विकास किस प्रकार मानव प्रगति का एक महत्त्वपूर्ण भाग रहा है। गणित विषयवस्तु की जितनी भी शाखाएं एवं नवीन क्षेत्र विकसित हुए हैं वे सब मनुष्य की आवश्यकताओं एवं समस्याओं के हल करने की प्रक्रिया की देन हैं तथा भविष्य में यदि मनुष्य ऐसे प्रयास करता रहेगा तो गणित की उत्तरोत्तर प्रगति होगी तथा मनुष्य की भौतिक समस्याओं के गणितीय हल अधिक सुगम एवं उपयोगी होंगे।
गणित की जीवनियां भी गणित-इतिहास का महत्त्वपूर्ण अंग हैं। भारत एवं अन्य देशों के गणितज्ञों का अध्ययन विद्यार्थियों में परिश्रम एवं सतत प्रयासों में निष्ठा पैदा कर सकेगा तथा उनमें यह भावना विकसित कर सकेगा कि गणित विषय की प्रकृति अन्तर्राष्ट्रीय है तथा धरती के सभी मानव गणित के विकास में, अपनी परिस्थितियों के अनुसार महत्त्वपूर्ण योगदान देते रहे हैं। गणित के विकास का इतिहास स्वयं में इतना रोचक है कि अध्ययन करते समय विद्यार्थी भाव-विभोर होकर यह सोचने लगते हैं कि यदि गणित विषय का विकास नहीं हुआ होता तो आज हमारी सभ्यता और संस्कृति कितनी पिछड़ी हुई होती तथा मनुष्य आज भी आदि मानव स्तर का पशुवत जीवन व्यतीत करता होता। मनुष्य के लिए 'गणित का इतिहास' अत्यन्त उपयोगी एवं उत्साहवर्धक सामग्री प्रस्तुत करता है। गणित एक मनुष्य-रचित विज्ञान है।
प्राचीन महान् गणितज्ञों का गणित के कार्य को खड़ा करने में कितना योगदान है यह सब हम भुला चुके हैं। उनको न तो याद करते हैं और न हम उनके बारे में जानते हैं। आज कोई गणितज्ञ छोटा सा भी कार्य कर देता है तो तत्काल दुनिया की नजरों में आ जाता है जबकि नींव का कार्य महत्त्वपूर्ण होता है कँगूरा खड़ा करने में ज्यादा कोई मेहनत नहीं लगती है और वह उतने समय तक ही खड़ा रह सकता है जितनी उसकी नींव मजबूत होगी।

(2.)गणित में श्वेत लोगों द्वारा अश्वेत लोगों के साथ भेदभाव (White people discriminate against black people in mathematics)-

यह विचार श्वेत लोगों द्वारा अश्वेत लोगों के साथ भेदभाव करने के कारण उत्पन्न हुआ है। शिक्षा में तथा गणित में भेदभाव करने व समानता के अधिकार से वंचित करने के कारण अश्वेत पिछड़े हुए रह गए और उनका उचित विकास नहीं हो सका। फलस्वरूप उनमें असंतोष पनप गया जिसका परिणाम यह हुआ कि आपस में लड़ाई-झगड़ा व दंगा-फसाद होने लगे। इसलिए समानता की शुरुआत करना अच्छी पहल है परन्तु यदि इसके परिणाम पर भी कुछ पहले ही विचार कर लिया जाए तो बाद में पश्चाताप नहीं होगा। रंग के आधार पर असमानता नहीं होना चाहिए। सभी को गणित शिक्षा तथा अन्य अधिकार समान रूप से प्राप्त करने का अधिकार है। यह सैद्धान्तिक बात है परन्तु व्यवहार में इसका पालन करना कितना कठिन है इसे हम सब भलीभाँति जानते हैं। 

(3.)गणित में महिलाओं के साथ भेदभाव (Discrimination against women in mathematics)-

महिलाओं के हर क्षेत्र में पिछड़ने का मूल कारण है स्त्री शिक्षा का अभाव। जो नारी शिक्षा ग्रहण करने में रूचि नहीं लेती हैं या जिनके अभिभावक नारी शिक्षा पर ध्यान नहीं देते है वे नारियाँ पिछड़ी हुई रह जाती हैं। इस प्रकार की नारियाँ या मनुष्य जैसे -तैसे अपने जीवन को बोझ की तरह ढोकर जैसे आए थे वैसे ही मृत्यु के मुख में चले जाते हैं।
नारी को शिक्षा का अवसर दिया जाए तो ज्ञान व बुद्धि में वह भी आगे बढ़ सकती है। वर्तमान युग में नारी व पुरुष को समानता का अधिकार देने के कारण नारी शिक्षा में वृद्धि हुई है। इसलिए धीरे -धीरे हर क्षेत्र में नारी आगे बढ़ रही। 'नोबेल ऑफ मैथ ' जिसे गणित का नोबल पुरस्कार कहा जाता है ,एक महिला को मिलना शुभ संकेत है.यह  करेन उहलेनबेक को मिला है। 
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2.गणित समानता: जब एक सफेद पुरुष पार्क से बाहर निकलता है(Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park)-

Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park

Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park

कैलिफोर्निया के खूबसूरत पाम स्प्रिंग्स में 59 वें वार्षिक सीएमसी-दक्षिण गणित  सम्मेलन का आज आखिरी दिन था। यह पहली बार था जब मैंने इस सम्मेलन में भाग लिया। इसने मेरी अपेक्षाओं को आसानी से पार कर लिया। सम्मेलन का सामान्य वाइब / ऊर्जा वह है जो प्रगतिशील व्यवधान के साथ भारी रूप से जुड़ा हुआ है।
जो बताता है कि आज गणित शिक्षा के सबसे जीवंत और चुनौतीपूर्ण विचारों को सुनने के लिए 3500 लोगों ने रेगिस्तान की ओर प्रस्थान किया।
और, हां मुझे पाम स्प्रिंग्स के रेगिस्तान की सुंदरता का आनंद लेना चाहिए। हालाँकि, मुझे इस सम्मेलन के अपने सबसे यादगार अनुभव को साझा करने की आवश्यकता है।
अभी।
जब चुनौतीपूर्ण प्रस्तुतियों और यथास्थिति को चुनौती देने की बात आती है, तो शायद इस कार्यक्रम के आयोजकों में से एक क्रिस शोर की तुलना में कोई और अधिक चुनौतीपूर्ण प्रस्तुति नहीं थी। सम्मेलन से कुछ हफ्ते पहले, क्रिस मेरे साथ जुड़ा और मुझे बताया कि वह अपनी प्रस्तुति में मेरे विचारों / उद्धरणों में से एक का उपयोग कर रहा था।
मुझे महसूस नहीं हुआ कि मेरे शब्दों को एक चुनौती के रूप में देखा जाएगा।
उपरोक्त स्लाइड का सार यह है कि ज्ञान / रुचि का यह सामान्य स्टीरियोटाइपिंग है - गोरे लोग सामग्री के बारे में बात करते हैं और इक्विटी के बारे में गैर-सफेद बात करते हैं। स्वाभाविक रूप से अपवाद हैं, लेकिन मुझे और अधिक गैर-श्वेत गणित शिक्षकों को सामग्री में नेता बनने और अधिक श्वेत शिक्षकों को कठिन, लेकिन महत्वपूर्ण, इक्विटी में बातचीत - और वास्तव में गहरे जाने पर देखना पसंद आएगा।
क्रिस शोर ने चुनौती ली। और, जैसा कि इस ब्लॉग के शीर्षक से पता चलता है, उन्होंने गणित शिक्षा की स्थिति के बारे में कठिन और कभी-कभी असहज विचारों को संबोधित करते हुए, इसे पार्क से बाहर खटखटाया। कि गहरे पक्षपाती हैं जो व्यवस्थित रूप से घिरे हुए हैं। उनकी 90 मिनट की प्रस्तुति नस्ल, वर्ग और लिंग के आधार पर हर रोज होने वाले भेदभाव को साबित करने के लिए आंकड़ों की एक भावनात्मक खुदाई थी।
नीचे कुछ स्लाइड्स हैं जो दर्शकों के साथ गूंजती हैं ...
दीवार में बहुत सी ईंटें

3.समानता या वक्ष(Equity or Parity)-

परिवर्तन के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में विशेषाधिकार का उपयोग करना
जो संभव के रूप में उच्च के रूप में ऊपर उठाया जा करने की आवश्यकता है
अंतराल, अंतराल, अंतराल ...
कक्षा के दरवाजे पर अपने पूर्वाग्रह की जाँच करें
यह समय गणित की शिक्षा के भविष्य के लिए इस कहानी को लिखने का है
पूरी प्रस्तुति कठिन सच्चाइयों को साझा करने और अप्रभावी और एकीकृत उद्देश्य के साथ शर्मनाक आंकड़ों को उजागर करने का एक मानवीय समरूपता थी - जो कि चलने का समय है "गणित सभी के लिए है।"
शायद बेहतर है, कि सभी गणित सभी के लिए है।
क्रिस शोर अपने स्पीकर की स्थिति का इस्तेमाल कर सकते थे और सबसे अधिक यात्रा करने वाले गणितीय मार्ग को ले सकते थे। उसने नहीं किया जिस सड़क पर वह गया था उसमें उच्च जोखिम थे, लेकिन पुरस्कार भी अधिक हैं। लेकिन वास्तव में, इक्विटी मुद्दों को संबोधित करने में एक नैतिक अनिवार्यता है। यदि नहीं, तो लोगों और संस्थानों ने गणित के बारे में अपने विचार व्यक्त किए होंगे, 21 वीं सदी की गणित शिक्षा के साथ पूरी तरह से संचालित होने वाली आवृत्ति पर काम करना।
व्यवधान की आयु विशेष रूप से… ट्रस्ट के विघटन के बारे में है। ट्रस्ट को हर रोज़ लोगों के माध्यम से क्षैतिज रूप से पुनर्वितरित और स्थानांतरित किया जा रहा है, पारंपरिक स्तंभों के माध्यम से काटकर जो सीधे खड़े होते हैं।
Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park

Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park

यह सूनामी आने का समय हैट्रस्ट के थर्मोडायनामिक्स
गणित  के शिक्षक विश्वास के गोले बना रहे हैं। उन जनजातियों में, गणित शिक्षा का सबसे शक्तिशाली विचार अनपेक्षित और वितरित किया जा रहा है - इक्विटी।
हालांकि जो असमानता की दीवारें बनाई गई हैं, वे जल्द ही कभी भी नीचे नहीं आएंगी - दुर्भाग्य से - परिवर्तन का वेक्टर सही दिशा में बताया गया है। अंत में, इस बदलाव में जो तेजी आएगी वह यह है कि सभी शिक्षण, तल पर, रिश्तों के बारे में है। रिश्ते जो दया, सहानुभूति और भेद्यता के साथ रंगे हैं। ये रिश्ते कहानियों से जाली हैं।
वह सब कुछ जो मानव है एक कहानी है।
तीन कहानियाँ बड़ी कहानी कहती हैं कि गणित एक मानवीय प्रयास रहा है जिसने इतिहास में हर सांस्कृतिक, वर्ग, नस्ल और लिंग रेखा को पार किया है।
बेटन को शिक्षा के लिए पारित किया गया है। पहले 100 साल या इसके बारे में घर लिखने के लिए कुछ नहीं किया गया है। लेकिन, विचारों और सपनों का लोकतांत्रिकरण गणित की शिक्षा की दीवारों में कुछ गंभीर छिद्रों को पंच करने के लिए कहां और कैसे विश्वास प्रवाह के पुन: अंशांकन के साथ होता है।
और, इसे क्रिस शोर जैसे विशेषाधिकार प्राप्त लोगों से अधिक घरेलू रन की आवश्यकता होगी, जिन्होंने साहसपूर्वक अपने स्वयं के पूर्वाग्रह को सीएमसी-दक्षिण की भीड़ के साथ साझा किया।
धन्यवाद, क्रिस। हम सभी को एक बिंदु पर ले जाने के लिए धन्यवाद - या कम से कम उस बिंदु को देखें - जहां कोई पीछे नहीं है। वहाँ केवल एक और बात है कि जोड़ने के लिए है, और मैं काफ्का इसे घर लाने दूँगा ...
Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park,Franz Kafka

Mathematics Equity: When A White Male Hits It Out Of The Park



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Friday, 20 September 2019

Jo Boaler Wants Everyone to Love Mathematics

Jo Boaler Wants Everyone to Love Mathematics

1.जो बोलेर गणित से प्यार करना चाहता है की भूमिका (Introduction Jo Boaler Wants Everyone to Love Mathematics) -

इस आर्टिकल में बताया गया है कि गणित को देखने के अलग-अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं जैसे-12x10=120,12x5+30x2=120,(20x5)-(5x1)=120,24x5=120 इत्यादि ।यह अलग-अलग दृष्टिकोण गणित का सौंदर्य बढ़ाता है और साथ ही रचनात्मकता को भी।

(1.)सौंदर्य की संकल्पना (Concepts of Beauty) -

बालकों के लिए वे चीजें सुन्दर होती हैं जो उन्हें पसन्द होती हैं। जब वह पड़ोस में खेलने जाने लगता है अथवा स्कूल जाने लगता है तब उसे दूसरे लोगों की सुन्दरता के बारे में मालूम पड़ता है। गणित की पहेलियों से बच्चे आपस में खेलते हैं तब उसे गणित की सुन्दरता का बोध होता है।

(2.)सृजनात्मकता (Creativity) -

इसी प्रकार रचनात्मकता व सृजनात्मकता से गणित का ज्ञान और कौशल बढ़ता है। सृजनात्मकता का अर्थ है कि गणित में कुछ नया सृजन करने की विलक्षण योग्यता से है। इसके साथ-साथ यह भी कहा जा सकता है कि जब कोई मनुष्य पुराने परम्परागत रास्तों से हटकर किसी गणितीय समस्या का हल नवीन मार्ग द्वारा करने में सफलता प्राप्त करता है तो उसे सृजनशील मनुष्य कहा जाता है।
इस आर्टिकल में इसी सामग्री प्रस्तुत की गई है यदि यह आर्टिकल आपको पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ लाईक व शेयर करें तथा कोई समस्या हो या सुझाव हो तो कमेंट करके बताएं ।

2.पारम्परिक तथा प्रगतिशील गणित -

महाकवि कालीदास जी ने कहा है कि किसी भी वस्तु के प्राचीन होने से उसकी श्रेष्ठता सिद्ध नहीं होती है और न ही किसी वस्तु के नई (आधुनिक) होने से श्रेष्ठता सिद्ध होती है। ज्ञानी अपने विवेकयुक्त ज्ञान से परीक्षण करके ही दोनों में से श्रेष्ठ को स्वीकार करते हैं जबकि मूढ़ व्यक्ति अन्य व्यक्तियों के विश्वास के अनुसार श्रेष्ठता का निर्णय करता है।
कुछ गणितज्ञ पुरानी बातों का रूढ़िवादी, दकियानूसी और पुरानी (out of date) कहकर उसको त्याग देते हैं और ऐसा करके वे अपने आपको प्रगतिशील समझते हैं। ऐसा कहना उचित नहीं है बल्कि नये और पुराने गणित के सिद्धान्तों को व्यावहारिक-अव्यावहारिक, उचित-अनुचित, सही-गलत, हित-अहित के आधार पर विवेकपूर्वक परीक्षण करके ही स्वीकार या अस्वीकार करना चाहिए सिर्फ पूर्वाग्रह और हठवादिता के आधार पर निर्णय करना हानिकारक होता है और गणित की प्रगति में सहयोगी न बनकर अवरोधक का कार्य करता है। पारम्परिक और प्रगतिशील गणितज्ञों में आपस में इसी बात को लेकर झगड़ा-फसाद होता रहता है। पारम्परिक गणित को महत्त्व देने वालो का तर्क होता है कि गणित गणित के मौलिक नियमों से छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए इससे गणित बोझिल, जटिल और नीरस होती जाती है जबकि प्रगतिशील गणितज्ञों का तर्क होता है कि जब तक गणित में नवीन सिद्धान्तों, नियमों का निर्माण नहीं किया जाएगा तो ऐसी गणित रूढ़िवादी और पुरातन तथा लकीर पीटने वाली होती है जिसमें कुछ भी नया करने का अवसर नहीं होता है।
परन्तु कालिदासजी के उक्त कथन पर विचार करके हम अपने विवेकयुक्त ज्ञान से आचरण करें तो गणित को नई दिशा मिल सकती है और आगे अधिक ऊँचाई तक पहुँचाया जा सकता है।
वस्तुतः शताब्दी 2000 से पूर्व आपस में यह झगड़ा कम हुआ है उसका कारण है कि गणित में अनुसंधान, अभ्यास, पुनरावृति और प्रक्रिया पर जोर देने के परिणामस्वरूप गणित का रूप निखरा है।
Jo Boaler Wants Everyone to Love Mathematics,Jo Boaler

Jo Boaler Wants Everyone to Love Mathematics

3.विद्यार्थियों को गणित में अच्छा करने का तरीका (Method to Make Students Good in Mathematics)-
पहले विद्यार्थी या विद्यावान का अर्थ जानना जरूरी है। विद्वान वही होता है जिसे केवल सैद्धांतिक ज्ञान हो तथा जो सैद्धान्तिक ज्ञान को अपने आचरण में उतारता है, अमल में लाता है, उपयोग करता है वह ज्ञानी होता है। केवल डिग्री धारण करने, उपाधियाँ प्राप्त करने से कोई लाभ नहीं होता है जब तक प्राप्त किए हुए ज्ञान को धारण न किया जाए। ज्ञानी अर्थात् सच्चे अर्थों में विद्यार्थी वह है जो न सिर्फ सैद्धान्तिक ज्ञान ही अर्जित करता है बल्कि उसको उपयोग में भी लेता है, विनम्र होता है, उसमें अहंकार नहीं होता है। साथ ही विद्यार्थी के जीवन में काम, क्रोध, लोभ, स्वाद, श्रृंगार, खेल-तमाशा, अधिक सोना और अति सेवा यानि दूसरों की सेवा करना इन बातों से बचना चाहिए अर्थात् ये कार्य नहीं करना चाहिए यदि इन बातों में फँसेगा तो न तो विद्या का ठीक से अभ्यास करेगा, धारण करेगा।
उक्त कथन को गणित शिक्षा पर लागू करें तो विद्यार्थी यदि उपर्युक्त दोषों काम, क्रोध, लोभ इत्यादि के चक्कर फँसेगा तो गणित शिक्षा का न तो सैद्धान्तिक ज्ञान प्राप्त करेगा, न उसका उपयोग करना तथा जनहित के लिए किस प्रकार गणित शिक्षा प्रयोग की जा सकती है उसको भी नहीं जान पाएगा।
वस्तुतः आजकल के विद्यार्थियों का रंग-ढंग देखकर यह लगता ही नहीं है कि वे सच्चे अर्थों में विद्यार्थी हैं क्योंकि ज्यादातर विद्यार्थी इन आठ बातों में ही नहीं बल्कि नशा, गुण्डागर्दी, राजनीति, बेईमानी, झूठ बोलने जैसे विकारों से ग्रस्त दिखाई देते हैं। ऐसी स्थिति में गणित जैसा विषय उनके लिए कैसे उपयोगी हो सकता है। इसलिए बहुत से विद्यार्थी गणित में डिग्री व उपाधी धारण करके यह समझने लगते हैं कि उन्होंने बहुत बड़ा तीर मार लिया है। जब तक वे इन दोषों से ग्रस्त हैं तब तक यही माना जाना चाहिए कि उन्होंने गणित शिक्षा को सच्चे अर्थों में धारण किया ही नहीं है तो उसको उपयोग में लाना या जनहित के कार्यों में लाने के बारे में तो सोचा ही नहीं जा सकता है।
इसलिए विद्यार्थियों को अपनी मानसिकता बदलने की आवश्यकता है तभी वे सच्चे अर्थों में गणित शिक्षा को धारण कर पाएंगे और उसका उपयोग कर सकेंगे वरना आदिकाल में मनुष्य असभ्य और जंगली था तथा उन्हें गणित की इकाई का ज्ञान नहीं था उनमें और आज के डिग्रीधारी गणितज्ञों में कोई अन्तर नहीं रह जाएगा। यदि सभ्यता के साथ गणित शिक्षा को आचरण में नहीं उतारा जाता तो गणित का विकास नहीं हुआ होता ऐसी स्थिति में जिन भौतिक सुविधाओं का हम उपभोग कर रहे हैं शायद वे प्राप्त नहीं कर पाते।

4.जो बोलेर मैथ को हर कोई प्यार करना चाहता है(Jo Boaler Wants Everyone to Love Mathematics)-

FEAR BUSTERS: मोंटसेराट कोर्डेरो (बाएं), गणित के डिजाइनर Youcubed में, जो बोलेर के साथ, स्टैनफोर्ड में गणित शिक्षा के प्रोफेसर।
हम एक गणित-आघातग्रस्त लोग हैं, जो बोअलर कहते हैं (हालांकि वह ब्रिटिश लोकेशन "गणित-अभिघातित" का उपयोग करता है)। यह एक ऐसा विश्वास है जो वह देखती है कि एमआरआई के लिए लंबे समय से रोने वाले छात्रों में से हर चीज की पुष्टि होती है जो युवा दिमागों को संख्याओं के रूप में प्रकट करते हैं जैसे कि वे सांप या मकड़ी थे। और यह कुछ ऐसा ही है जो उस सामान्य अपवित्रता के इस्तीफे में स्पष्ट रूप से सुनता है: "मैं एक गणित व्यक्ति नहीं हूं।"
ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन के एक प्रोफेसर बोलेर, गणित को पूरी तरह से अलग तरह से देखते हैं - सौंदर्य और रचनात्मकता के विषय के रूप में जिसमें कोई भी छात्र कामयाब हो सकता है। वास्तव में, उसकी ब्रिटिशता केवल आंशिक रूप से बताती है कि वह "गणित" क्यों पसंद करती है। बहुवचन, वह कहती है, गणित की गहराई और विविधता के लिए अधिक उपयुक्त है। "गणित " उसे संकीर्ण और संकुचित के रूप में हमला करता है। वह कहती हैं, "मैथ्स उससे बहुत ज्यादा है।"
हालांकि, श्रोताओं में गणित की चिंताओं को दूर करने के लिए यह आसान है, अक्सर प्राथमिक विद्यालय की वर्कशीट से थोड़ा अधिक। 50 गुणा समस्याओं के साथ तीन-मिनट के परीक्षण के घने होने की दृष्टि मज़बूती से नर्वस यादों को धुंधला कर देती है, यह एक प्राथमिक रीडिंग असाइनमेंट की कल्पना करना कठिन है।
"मैंने अभी पिछले दिनों स्टैनफोर्ड में नए लोगों के एक पूरे आने वाले समूह से बात की," बोलेर ने गिरावट में कहा। "मैंने इसे स्क्रीन पर रखा और पूरा कमरा टूट गया:‘ ब्ला, क्या यह भयानक नहीं है? "
बोलेर के लिए, परीक्षण - इसकी गति, मात्रा और प्रदर्शन पर ध्यान देने के साथ - गणित का एक बड़ा हिस्सा है कि क्यों गणित अन्य विषयों की तरह आत्माओं को कुचल देता है। उसके लिए, यह दुर्बल परिणामों के साथ उथले सीखने का प्रतिनिधित्व करता है। जो छात्र धीरे-धीरे काम करते हैं वे अक्सर अपनी स्वयं की अक्षमता के बारे में आश्वस्त होते हैं, हालांकि वे सबसे अच्छे गणितज्ञ बन सकते हैं। और यहां तक ​​कि जो तेजी से गणना करते हैं - न कि एक कौशल बोलेर को लगता है कि डिजिटल युग में विशेष रूप से मूल्यवान है - गणित को उच्च दबाव वाले हम्सटर व्हील के रूप में बंद कर सकता है।
एक शोधकर्ता, शिक्षक और प्रचारक के रूप में, बोअलर पूरी तरह से अलग शिक्षाशास्त्र के लिए एक प्रमुख आवाज है, जहां गति बाहर है, गहराई है, और उत्तर की यात्रा गंतव्य के रूप में महत्वपूर्ण हो सकती है। यह एक दृष्टिकोण है जहां अर्थ-मेकिंग मेमोराइजेशन से अधिक मायने रखता है और "गणित तथ्यों" को बनाए रखना इस बात से कम मायने रखता है कि इस तरह के तथ्य कैसे जुड़े।
बोलेर पूरी तरह से अलग शिक्षाशास्त्र के लिए एक प्रमुख आवाज है जहां गति बाहर है, गहराई में है, और एक उत्तर की यात्रा गंतव्य के रूप में महत्वपूर्ण हो सकती है।
उदाहरण के लिए, बोलेर "संख्या वार्ता" का एक अधिवक्ता है, जिसमें छात्र एक समस्या पर काम करते हैं - कहते हैं, 5 x 18 - फिर अलग-अलग तरीकों पर चर्चा करें, जिनमें से प्रत्येक ने उससे संपर्क किया। सफल छात्र सहजता से इस तरह की समस्याओं को मित्रवत रूप में लिखते हैं, लेकिन इसके अलावा और भी तरीके हैं जिनसे आप उम्मीद कर सकते हैं।
कोई भी समस्या को (5 x 10) + (5 x 8) तक तोड़ सकता है। एक और एक कारक को आधा कर सकता है और दूसरे को 10 x 9 प्राप्त करने के लिए दोगुना कर सकता है या इसे (5 x 20) - (5 x 2) के रूप में देख सकता है। विचार यह है कि अपने अलग-अलग दृष्टिकोणों की चर्चा, तुलना और कल्पना करके, छात्र अपने स्वयं के संदर्भ, कनेक्शन और संख्यात्मकता की भावना का निर्माण करते हैं। 5 x 18 = 90 केवल याद रखने के लिए एक तथ्य नहीं है; यह अन्य समस्याओं को तोड़ने के लिए एक व्यापक रणनीति बनाने की कुंजी है।

5.गणित युद्धों(Mathematics Wars)-

पारंपरिक गणित और प्रगतिवादियों के समर्थकों के बीच लड़ाई पीढ़ियों के लिए भड़की हुई है, हाल ही में '' 90 के दशक के गणित युद्धों '' और 'शुरुआती 00' में। यूसी-बर्कले शिक्षा के प्रोफेसर एलन स्कोनफेल्ड, एमएस '70, पीएचडी '73, आज के केबल समाचार के लिए उस प्रवचन की तुलना करते हैं: "यह सब गर्मी, बहुत कम रोशनी और एक समझदार मध्य जमीन दोनों ओर से आवाज़ों से अस्पष्ट।"
पिछले दशक के शुरुआती भाग के बाद से, वह कहते हैं, लड़ाई कम हो गई है क्योंकि अनुसंधान ने अभ्यास, दोहराव और प्रक्रिया पर पारंपरिक जोर देने के लिए प्रगतिशील दृष्टिकोण का समर्थन किया है। फिर भी, इसका मतलब यह नहीं हो सकता है कि छात्रों के लिए वास्तविकता बदल गई है।
"गणित के युद्ध खत्म हो गए हैं, लेकिन कक्षाओं में सही सामान प्राप्त करना बहुत चल रही चुनौती है," वे कहते हैं। "वास्तविक दुनिया में कार्यान्वयन के लिए आप किस तरह के बदलाव को देखना चाहते हैं और इसे लागू करने के तरीके को जानने के बीच एक बड़ा अंतर है।"
बोअलर की उस पुल को पाटने की क्षमता, जो उसकी व्यापक अपील का हिस्सा है। विचारशील डिलीवरी के साथ एक करिश्माई वक्ता, एक आसान मुस्कान और शिक्षकों से ईमेल के त्वरित जवाब की आदत, वह कई शिक्षकों के लिए एक प्रिय व्यक्ति हैं। लॉस एंजेलिस यूनिफाइड स्कूल डिस्ट्रिक्ट में एक सहायक प्रिंसिपल क्रिस्टीना लिंकन-मूर कहते हैं, "मैं खुद को जो बोलेर ग्रुपी कहता हूं।" "जब मैंने चाहा तब भी शब्द का प्रसार नहीं किया।"
डैन श्वार्ट्ज, ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन के डीन, बोलेर को के -12 गणित सुधार का सार्वजनिक चेहरा कहते हैं। हालाँकि, देश भर में कई सहयोगियों ने समान विचार साझा किए हैं कि उन्हें क्या करने की आवश्यकता है, वह कहते हैं, शिक्षकों और माता-पिता के साथ उनका प्रभाव बेजोड़ है। "वह महान संचारक है।"
स्टालफोर्ड के एसटीईपी कार्यक्रम में भविष्य के शिक्षकों को शिक्षित करके बोलेर गणित के शिक्षण को सीधे प्रभावित करता है, लेकिन उसका सबसे दूरगामी प्रभाव संभवतः उसकी स्टैनफोर्ड-आधारित वेबसाइट के माध्यम से होता है। Youcubed.org - जिसके २०१५ में लॉन्च होने के बाद से २४ मिलियन से अधिक पेज व्यू हो चुके हैं - मुफ्त पाठ योजनाओं के साथ स्टॉक किया गया है और बोलेर का मानना ​​है कि सभी छात्रों के लिए रचनात्मक, रोशन और आकर्षक हैं। वह "लो-फ्लोर, हाई-सीलिंग" गतिविधियों को संजोती है जो किसी को भी संलग्न कर सकती है लेकिन सभी को चुनौती दे सकती है।
एक साधारण गणित समस्या को और अधिक समृद्ध कैसे बनाया जा सकता है, इसका एक उदाहरण के रूप में, 4 x 6 आयत के क्षेत्र के लिए पूछते हुए एक सामान्य प्रारंभिक ज्यामिति प्रश्न की कल्पना करें। उत्तर, निश्चित रूप से, 24 है। बोलेर ने अपने सिर पर सवाल उछालने और छात्रों से यह पूछने का सुझाव दिया कि वे 24 के क्षेत्रफल के साथ कितने आयत बना सकते हैं। (24 x 1, 12 x 2, 8 x के आयामों के साथ चार हैं) 3 और 4 x 6.) एक दृष्टिकोण एक गणना के लिए पूछता है, वह कहती है; दूसरा विचार और चर्चा के लिए जगह बनाता है।

6.माइंडसेट मैटर्स(Mindset Matters)-

बोअलर का बड़ा लक्ष्य सिर्फ कक्षा की रणनीति को बदलना नहीं है, बल्कि उस मानसिकता को बदलना है जो हम सोचते हैं कि हम पहली बार में गणित सीख सकते हैं - वह स्टीरियोटाइप जो किसी के कहने पर हर बार खुद को प्रकट करता है, "मैं गणित नहीं करता।"
बोलेर के लिए, गणित जीन या गणित मस्तिष्क जैसी कोई चीज नहीं है। उनका मानना ​​है कि वस्तुतः कोई भी गणित सीख सकता है, यहां तक ​​कि उच्च स्तर पर भी, एक संदेश जिसे वह मस्तिष्क की प्लास्टिसिटी पर तंत्रिका संबंधी अंतर्दृष्टि और गणितीय किंवदंतियों से गलतियां करने वाले लाभों से संदर्भित करता है जो शुरुआती बाधाओं को पार कर लेता है।
इस वर्ष, Youcubed के लोकप्रिय सप्ताह के प्रेरणादायक गणित, जो K-12 शिक्षकों को स्कूल वर्ष शुरू करने के लिए पांच दिन के पाठ, गतिविधियों और वीडियो प्रदान करता है, दिवंगत स्टैनफोर्ड गणितज्ञ मरयम मिर्जाखानी को समर्पित था, जिनकी 2017 में 40 वर्ष की आयु में कैंसर से मृत्यु हो गई थी। मिर्ज़खानी फील्ड्स मेडल जीतने वाली पहली महिला थीं, जिन्हें गणित का शीर्ष पुरस्कार मिला, छठे-ग्रेडर के रूप में बताया गया कि वह इस विषय पर बुरी थीं और भले ही, या शायद इसलिए, उन्होंने धीरे-धीरे काम किया।
मिर्जाखानी के सम्मान में बोल्कर ने लिखा, "अद्भुत क्षमता वाले कई छात्रों को यह संदेश मिलता है कि वे गणित में अच्छे नहीं हैं, और गणित में कभी अच्छे नहीं हो सकते।" "एक युवा लड़की के रूप में उस नकारात्मक संदेश को प्राप्त करने वाले व्यक्ति के बारे में जानना और दुनिया के सबसे सफल गणितज्ञों में से एक होना दूसरों के लिए प्रेरणादायक है।"
मूल रूप से, बोएलर एक विकास मानसिकता की शक्ति का उपयोग करने की कोशिश कर रहा है, यह अवधारणा स्टैनफोर्ड मनोवैज्ञानिक कैरोल ड्वेक द्वारा प्रसिद्ध है, जो एक Youcubed सलाहकार है और Boaler की सबसे हालिया पुस्तक, गणितीय माइंडसेट के लिए अग्रदूत लिखा है। "बॉलर उन दुर्लभ और उल्लेखनीय शिक्षकों में से एक है जो न केवल महान शिक्षण के रहस्य को जानते हैं, बल्कि यह भी जानते हैं कि दूसरों को वह उपहार कैसे देना है," ड्वाक ने लिखा।
ड्वेक के शोध से पता चलता है कि जो लोग खुफिया चीज़ों को कुछ ऐसी चीज़ों के रूप में देखते हैं जिन्हें विकसित किया जा सकता है, वे उन लोगों से बेहतर हैं जो एक निश्चित गुणवत्ता के रूप में बुद्धि को देखते हैं। एक विकास मानसिकता वाले व्यक्ति को सुधारने के लिए प्रयास करने की अधिक संभावना है क्योंकि उसका मानना ​​है कि यह संभव है, जबकि एक निश्चित मानसिकता वाला व्यक्ति अधिक सहजता से असफलता की व्याख्या करता है जो कि असंतोषजनक सीमाओं के रहस्योद्घाटन के रूप में है। "मैं एक गणित व्यक्ति नहीं हूँ" एक निश्चित विश्वास को दर्शाता है।
अमीर, अधिक खुली शिक्षण विधियों को अपनाने और बच्चों को विकास मानसिकता अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने से, बोलेर का मानना ​​है कि शिक्षक छात्रों को प्रगति करने में मदद कर सकते हैं। 2015 में, उसने और उसके सहयोगियों ने 81 मिडिल स्कूलर्स - उनमें से कई अंडरएचीवर्स को लाया - सप्ताह के प्रेरणादायक गणित  से ली गई गतिविधियों पर केंद्रित चार सप्ताह के गणित शिविर के लिए परिसर में। शिविर शुरू करने वाले छात्रों ने आश्वस्त किया कि वे "गणित के लोग नहीं हैं" बोलेर कहते हैं। लेकिन वे जल्द ही लगे थे। चार सप्ताह की सुबह की कक्षाओं और दोपहर के संवर्धन के बाद, छात्रों ने 50% या 2.7 मिलियन वर्ष के औसत से मानकीकृत गणित परीक्षणों पर अपने स्कोर में सुधार किया था।
बेशक, यह सब एक विश्वविद्यालय की स्थापना में सामने आया, पांच शिक्षकों, दो स्नातक छात्रों, 12 अंडरग्रैड्स और एक स्टाफ सदस्य द्वारा निरीक्षण - एक विशिष्ट शिक्षक के समर्थन का स्तर जो सपने में नहीं होगा। ऑरेंज काउंटी, कैलिफ़ोर्निया के एक मध्य विद्यालय के गणित के शिक्षक मार्क पेट्री का कहना है कि बोलेर और यूक्यूबेड ने उन्हें एक सेटिंग में मदद की है जहाँ चुनौती निर्विवाद है।
पंद्रह साल पहले, पेट्री ने एक आकर्षक इंजीनियरिंग परामर्श नौकरी से कई कारणों से अपने युवा बेटे के प्रमुख के साथ अधिक समय के लिए शिक्षण पर स्विच किया। लेकिन उनकी प्रेरणाओं के बीच उच्च उन बच्चों के जीवन में फर्क कर रहा था जिन्हें इसकी आवश्यकता थी। आज वह जिस स्कूल में काम करता है, वहां 98 प्रतिशत छात्र मुफ्त और कम कीमत के लंच के लिए अर्हता प्राप्त करते हैं।
सबसे पहले, पेट्री को शिक्षक प्रशिक्षण में सिखाई गई पटकथा के तरीकों से प्रसन्न किया गया, जिसका वर्णन उन्होंने किया, "इस पर ध्यान दें, यह सब काम करें, और इसे फिर से प्रयास करें।" लेकिन उन्होंने जल्द ही खुद को सामने पाया। छात्रों को खो दिया। समस्या एक दिन उस समय बढ़ गई जब उन्होंने एक हाई स्कूल की कक्षा में देखा और उन्हें थियोडोर रोथके कविता "डोलर" की अंतिम पंक्ति की याद दिलाई गई, जो "डुप्लीकेट ग्रे स्टैंडर्ड फेस" के साथ समाप्त होती है।
“जब मैंने छात्रों को देखा, तो मुझे कोई खुशी नहीं हुई; मैंने सिर्फ इस्तीफा देखा, ”वह कहते हैं। "मैंने सिर्फ छात्रों को आगे और पीछे देखा, जो मुझे परेशान कर रहे थे।"
पल उसे विकल्प की तलाश में सेट कर दिया। उन्होंने कैलिफोर्निया गणित परिषद के एक सम्मेलन में बोलेर के बारे में सुना था, उनकी पुस्तकों में से एक को उठाया और जल्द ही एक कार्यशाला में भाग लिया। "यह वास्तव में मैं क्या सोच के बारे में बदल गया है।"
आज, उनकी कक्षाएं एक दशक पहले के शिक्षक-केंद्रित अनुभवों से बहुत दूर हैं। हर कोई समूहों में बैठता है, समस्याओं के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण के साथ मिलकर काम करता है, जबकि पेट्री एक कोच के रूप में कमरे में परिभ्रमण करता है, जवाब देने की तुलना में मार्गदर्शक प्रश्न पूछने की अधिक संभावना है। आवाज़ की कैकोफ़ोनी को गपशप से स्कूलवर्क को समझने के लिए एक सावधानीपूर्वक कान की आवश्यकता होती है। लेकिन वह छात्रों को केवल याद करने की प्रक्रियाओं के बजाय विचारों से जुड़ने और उन्हें अपना बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
सप्ताह में एक बार, सामान्य पाठ के अलावा, छात्र एक विकास मानसिकता को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया एक वीडियो देखते हैं - एक वास्तविक आवश्यकता, वह कहते हैं, आबादी के बीच वह कार्य करता है। संयुक्त परिणामों में परीक्षा के अंकों में नाटकीय वृद्धि हुई है - और उसके जिले भर के शिक्षकों ने पेट्री की अगुवाई की है। "जो कहते हैं कि एक प्रणाली है जिसने मुझे तात्कालिक लाभ के लिए एक तरह से बदलने की अनुमति दी है," वे कहते हैं। “हमारे टेस्ट स्कोर में काफी वृद्धि हुई है - 60 से 90 प्रतिशत। अन्य स्कूल जिले हमारी ओर देख रहे हैं। ”

7.STEPS TO STAMP OUT MATH ANXIETY


JO BOALER'S ADVICE FOR PARENTS.

(1.)Encourage children to play maths puzzles and games.Puzzles and games-anything with dice,really-will help kids enjoy maths and develop number sense,which is critically important.
(2.)Always be encouraging and never tell kids they are wrong when they are working on maths problems.Instead,find the logic in their thinking.For example, if your child multiplies 3 by 4 and gets 7, say,"Oh,I see what you are thinking.You are using what you know about addition to add 3 and 4.When we multiply,we have 4 groups of 3..."
(3.)Never share with your children the idea that you were bad at maths at school or you dislike it-especially if you are a mother.Researchers found that as soon as mothers shared that idea with their daughters,their daughter's achievement went down.
(4.)Encourage number sense.What separates high and low achievers is having an idea of the size of numbers and being able to separate and combine numbers flexibly.For example,when solving 28+56,if you take one from the 56 and make it 30+55,it is much easier work out.
(5.)Perhaps most important of all:Encourage a "growth mindset"to let students know that they have unlimited maths potential and that being good at maths is all about working hard.When they tell you something is hard for them or they have made a mistake,tell them,"that's wonderful-your brain is growing!"

8.ए रिफॉर्मर इज बॉर्न(A Reformer Is Barn)-

Boaler के सुधारवादी के झुकाव और दलित के लिए समर्थन उसकी शुरुआत पर वापस जाता है। वह 1970 के दशक में बर्मिंघम, इंग्लैंड के बाहर बड़ा हुआ - एक और प्रगतिशील गणित युग। न तो उसके माता-पिता विश्वविद्यालय गए थे। उसके पिता एक तकनीकी दराज थे; उसकी माँ एक सचिव थी।
लेकिन जब बोअलर एक बच्चा था, तो उसकी माँ ने एक शिक्षक बनने के लिए पढ़ाई करने के लिए एक दूरस्थ शिक्षा स्कूल, ओपन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। अपनी माँ की पढ़ाई के माध्यम से, बोएलर को दिन के कई अत्याधुनिक विचारों, खेल-आधारित शैक्षिक विचारों से अवगत कराया गया। उसने अपने बचपन का अधिकांश समय बिताया है, वह कहती है, कसेलेनेयर की छड़ें - बहुरंगी छड़ें जो बच्चों को संख्याओं के साथ खेलने और हेरफेर करने की अनुमति देती हैं।
हालाँकि, उनकी औपचारिक स्कूली शिक्षा विशेष रूप से प्रबुद्ध नहीं थी। हाई स्कूल में केवल देर हो चुकी थी कि उसके पास एक शिक्षक थी जो गणित के बारे में गहन, वैचारिक तरीके से बात करती थी। और जब उसे विषय काफी आसान लगा, तो वह अपने कई सहपाठियों को निराश करती हुई देख सकती थी।
अन्य विषयों में, शिक्षकों को उसके लिंग के आधार पर उसे खारिज करने की जल्दी थी। उसने एक भौतिकी पाठ्यक्रम लिया जहाँ शिक्षक ने घोषणा की कि केवल लड़के ही दो राष्ट्रीय परीक्षाएँ देंगे। उसकी माँ, "एक नारीवादी," जो लड़कियों को अकेले जाने नहीं देती थी, और बोअलर, लड़कियों के बीच अकेले ही उच्च परीक्षा देती थी। उसे एक ए मिला, इस तथ्य से प्रेरित होकर कि "उसने कहा था कि हम ऐसा नहीं कर सकते।"
लिवरपूल विश्वविद्यालय में, उन्होंने मनोविज्ञान में एक डिग्री अर्जित की, जो एक शैक्षिक मनोवैज्ञानिक बनने का इरादा रखते थे। अपने प्रशिक्षण के हिस्से के रूप में, उन्होंने दो साल मध्य लंदन में अध्यापन में बिताए। उसका पहला काम 13 साल के बच्चों का एक समूह था, जो नीचे के शैक्षिक ट्रैक पर रखा गया था। "क्या बात है?" सबसे पहले उसने एक बात सुनी थी। अपने पहले साल के अंत तक, उसने स्कूल को यह माना कि उसने छात्रों को अलग करने की क्षमता को छोड़ दिया और कुछ छात्रों को उन परीक्षाओं में बैठने दिया जो उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देती थीं।
इसके बाद उन्होंने गणित में उच्च शिक्षा हासिल की, उसके बाद गणित की शिक्षा प्राप्त की। उनके शोध प्रबंध में तीन साल की परीक्षा थी कि कैसे दो स्कूलों ने गणित पढ़ाया - एक पारंपरिक स्कूल, दूसरा प्रगतिशील। संक्षेप में, वह छात्रों को अधिक प्रगतिशील, "अराजक" स्कूल से कम जानती थी लेकिन अधिक समझती थी। शोध प्रबंध ने पुरस्कार और उच्च प्रशंसा प्राप्त की, और जिसके परिणामस्वरूप बोअलर को स्टैनफोर्ड में भर्ती किया गया।

8.टाइम्स टेबल की पीड़ा?(Torment of Times Table)-

अब भी, परंपरावादियों और प्रगतिवादियों के बीच फूट पैदा हो सकती है। बोअलर में बहुत संदेह है जो सोचते हैं कि उनके विचारों में कठोरता है। 2015 में, उसने ब्रिटेन में एक सम्मेलन में यह कहकर विवादों को प्रज्वलित किया कि उसने कभी अपने समय सारणी को याद नहीं किया था। "यह मुझे कभी वापस आयोजित नहीं किया है, भले ही मैं हर दिन गणित के साथ काम करता हूं," उसने कहा। “गणित के तथ्यों को याद रखना भयानक नहीं है; जो भयानक है वह बच्चों को उन्हें याद करने और उन पर परीक्षण देने के लिए दूर भेज रहा है, जो इस गणित की चिंता को स्थापित करेगा। "
इंग्लैंड के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन द टीचिंग ऑफ मैथेमेटिक्स के निदेशक चार्ली स्ट्रिप ने शिक्षा प्रकाशन टेस्स में एक ऑप-एड में वापसी की। "यह टाइम टेबल की सीख नहीं है जो चिंता पैदा कर रहा है, बल्कि टाइम टेबल नॉलेज की कमी है।" "यह एक शैक्षिक पात्रता होनी चाहिए कि सभी बच्चों को उनके टाइम टेबल सीखने में मदद मिले।"
स्ट्रिप की तरह, बहुत से शिक्षक परिवर्तन करने वाले एडवोकेट के प्रति संदिग्ध हैं। बेंटनविले, आर्क में एक सहायक प्रिंसिपल और पूर्व गणित विशेषज्ञ बोनी बैगेट का कहना है कि उनके क्षेत्र में कुछ लोग हैं, शिक्षक शामिल हैं, जो कभी भी गणित नहीं सीखेंगे। लेकिन उसके लिए, बोअलर के विचारों के लाभ स्पष्ट हैं।
बहुत पहले नहीं, उनके क्षेत्र के अधिकांश शिक्षकों ने गणित की कक्षाओं को अनिवार्य रूप से एक व्याख्यान के रूप में पढ़ाया था, अक्सर एक ही पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन के बाद जो हर कोई उपयोग कर रहा था। “तब वे कहते हैं, जाओ और 100 बार अभ्यास करो’ और फिर, अच्छा, अब आप जानते हैं कि अंशों का विभाजन कैसे किया जाता है। अब हम एक-चरणीय समीकरण करने जा रहे हैं। ''
जब तक छात्र बीजगणित में चले गए, तब तक वे एक ही अवधारणा का उपयोग कर रहे थे, लेकिन अक्षरों के साथ-साथ संख्याओं के साथ, वे चकित थे। अध्ययन के वर्ष अटके नहीं थे। "उनके लिए यह सिर्फ प्रक्रियाओं का एक नया सेट था," Baggett कहते हैं। “वे गणित की समझ में नहीं आ रहे थे; वे सही जवाब पाने के लिए सिर्फ प्रक्रियाओं का पालन कर रहे थे। वे मूल रूप से कंप्यूटर थे जब आप एक नंबर वाक्य में पंच करते हैं और एक उत्तर सामने आता है। "
एक सम्मेलन में उसे बोलते हुए और उसकी पुस्तक को पढ़ते हुए, बैगल ने बोलेर के साथ घनिष्ठता बढ़ाई। फिर, एक लर्क पर, उसने राज्य शिक्षा मामले पर सलाह के लिए बोलेर को ईमेल किया। वह कहती हैं, '' अगर मुझे एक घंटे के भीतर वापस ईमेल नहीं किया जाता है, तो मुझे हिम्मत नहीं होगी। "यह अद्भुत था।"
Boaler और Youcubed के कार्यकारी निदेशक कैथी विलियम्स जल्द ही इस प्रक्रिया में धर्मान्तरित विजेता नॉर्थवेस्ट अर्कांसस के लिए एक शैक्षिक सम्मेलन को शीर्षक देने के लिए बेंटनविले के रास्ते में थे।
उनके तरीकों के आगामी कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप नाटकीय परीक्षण स्कोर नहीं बढ़ा है जो पेट्री ने देखा था। वास्तव में, स्कोर शुरू में डूबा हुआ था, जो बैगेट का मानना ​​है कि शिक्षकों और छात्रों को फिर से शिक्षित करने की कठिनाई का प्रतिबिंब है। उनके सभी दोषों के लिए, पारंपरिक तरीके अल्पकालिक परीक्षण प्रस्तुत करने के लिए प्रभावी हैं। लेकिन उसे विश्वास है कि लाभ स्पष्ट हो जाएगा क्योंकि छात्र खरोंच से शुरू किए बिना बीजगणित जैसे उच्च स्तर पर चले जाते हैं। वह अकेली नहीं है, वह कहती है।
"उत्तर पश्चिमी अर्कांसस के लोगों को जो से प्यार हो गया," वह कहती हैं। "मैं उत्तर-पश्चिमी अरकंसास में हमारे 80 प्रतिशत शिक्षकों को गणित की क्रांति का हिस्सा बनाऊंगा क्योंकि हम मानते हैं कि अमेरिका में गणित पढ़ाने के तरीके को बदलने के लिए वह क्या करने की कोशिश कर रहा है।"
एक वाइडर ऑडियंस
बोअलर आगामी डॉक्यूमेंट्री द गेटकीपर का एक विषय है, जिसका निर्देशन और निर्माण विकी एबेल्स ने किया है, जिन्होंने परीक्षण और ओवरशेडिंग के कारण छात्रों पर दबाव और तनाव के बारे में प्रभावशाली फिल्म रेस बनाई। एबेल्स का कहना है कि बोएलर ने पहली बार उन्हें कुछ आश्चर्यचकित करते हुए मुलाकात की, जिससे उनका ध्यान भटक गया: अधिकांश व्यक्तिगत छात्रों के संघर्ष में रेस टू नोवेयर में प्रलेखित गणित की कक्षा शुरू हुई। वास्तव में, एबेल्स को अपने समुदाय में एक लड़की की आत्महत्या के बाद फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया गया था, जिसे उसके परिवार को संदेह था, उसने बीजगणित में संघर्ष करने के बाद उसकी बुद्धि और आत्म-मूल्य पर सवाल उठाना शुरू कर दिया था।
Jo Boaler Wants Everyone to Love Mathematics

Jo Boaler Wants Everyone to Love Mathematics

जब एबेल्स ने अमेरिका में गणित की शिक्षा के अतिरिक्त परिणामों के बारे में सीखा - इस तथ्य सहित कि हाई स्कूल के आधे से कम स्नातक कॉलेज गणित के लिए तैयार हैं - उसने एक फिल्म की कल्पना करना शुरू किया। गेटकीपर शीर्षक से तात्पर्य यह है कि उप-गणित अंक अक्सर उच्च शिक्षा और अच्छी नौकरियों तक पहुंच को प्रतिबंधित करते हैं। बोआलर, वह कहती हैं, इसे बदलने के लिए आंदोलन का एक प्रमुख हिस्सा है।
एबेल्स कहते हैं, "आप किसी भी व्यक्ति को खोजने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं जो गणित को कैसे पढ़ाया जाता है, इसे बदलने के बारे में अधिक परवाह करता है।" "स्टैनफोर्ड में एक प्रोफेसर के लिए वास्तव में अभ्यास करने के लिए समय निकालने के लिए, मुझे लगता है कि इस देश में कुछ उपन्यास है - और संभवतः।"
4.निष्कर्ष (Conclusion) -
विद्यार्थियों को गणित में अच्छा करने के लिए बहुत परिश्रम करने की आवश्यकता है। कक्षा में घिसी-पिटी परिपाटी के अनुसार ही न पढ़ाएं जिससे उनमें किसी प्रकार का कोई विकास नहीं हो सकता है। यदि कोई प्रश्न समझाए जैसे संगत कोण क्या होता है और वे बराबर कैसे होते हैं? फिर उनसे भिन्न-भिन्न आकृतियों को बनाकर उनसे पूछे कि इनमें संगत कोण कौनसे है तथा क्या वे बराबर है? यदि बराबर है तो क्यों है? और बराबर नहीं है तो क्यों नहीं है? इस प्रकार उनकी बौद्धिक क्षमता, तर्क करने की क्षमता विकसित होगी जिसके आधार पर वे गणित में अच्छा ज्ञान अर्जित कर पाएंगे। 
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Thursday, 19 September 2019

Growth Mindset in Learning Neglect Fixed Mindset in Math Course Design

Growth Mindset in Learning Neglect "Fixed" Mindset in K-12 Mathematics Course Design

1.भूमिका (Introduction) -

इस आर्टिकल में बताया गया है कि गणित सीखने के लिए विकास की मानसिकता का क्या योगदान है। यदि हम निश्चित मानसिकता के साथ के स्थान पर विकास की मानसिकता रखें तो इसमें कोई सन्देह नहीं है कि गणित को सीखने में कुछ न कुछ योगदान जरूर होता है। इसके साथ ही अन्य पहलुओं का भी वर्णन किया गया है।
यदि यह आर्टिकल आपको पसन्द आए तो इसे अपने मित्रों के साथ शेयर व लाईक करें। कोई समस्या हो अथवा आपका कोई सुझाव हो तो कमेंट करके बताएं ।आर्टिकल को पूरा पढ़ें।
Growth Mindset in Learning Neglect Fixed Mindset in Math Course Design

Growth Mindset in Learning Neglect Fixed Mindset in Math Course Design

2.सक्रिय जागरूकता (Active Awareness) -

गणित को कोई भी सीख सकता है इसके लिए जिज्ञासा, रुचि और सक्रिय जागरूकता की आवश्यकता है। यदि गणित में आपकी थोड़ी सी भी जिज्ञासा या रुचि है तथा सक्रिय जागरूकता है तो आप गणित सीखने में आगे बढ़ सकते हैं।

3.विकास मानसिकता (Mentality Development) -

विकास अधिकांश रूप से व्यवसाय और कंपनियों में प्रचलित है तथा विकास का अर्थ अधिकांशतः व्यवसाय व कंपनी के विकास से लिया जाता है। पूर्वकाल तक शिक्षा तथा निगमों में बंधें हुए या निश्चित नियम के अन्तर्गत कार्य किया जाता था। परन्तु वर्तमान युग में विकास माॅडल को हर क्षेत्र में प्रयोग किया जाने लगा है।
बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में ज्यों-ज्यों गणित की लोकप्रियता बढ़ने लगी इसके फलस्वरूप अनेक गणितज्ञों की रुचि बढ़ी और इस दिशा में अनेक अध्ययन होने लगे। उन्होंने अनुभव किया कि विभिन्न आयु स्तर पर गणित सम्बन्धी विद्यार्थियों में अनेक परिवर्तन होते हैं। विद्यार्थियों में समय के साथ गणित सम्बन्धी परिवर्तन होते हैं उनका वैज्ञानिक अध्ययन ही गणित शिक्षा में विकास कहा जाता है।
बालक अपने जीवनकाल में जो गणित सम्बन्धी ज्ञान अर्जित करता है, बोध इसी पर आधारित है। यह कोई वंशानुगत क्षमता नहीं है। जन्म के समय बालक में किसी प्रकार के गणित का बोध करने की क्षमता नहीं होती है। वह गणित शिक्षा के नाम पर केवल रोना जानता है। बालक में परिपक्वता के साथ गणित सीखने की योग्यता बढ़ती जाती है। वह अपनी ज्ञानेन्द्रियों की सहायता से देखकर, सुनकर या अनुभूति के द्वारा गणित के प्रत्ययों को समझने की कोशिश करता है। धीरे-धीरे इन प्रयासों द्वारा उसे गणित का बोध होने लगता है। उसके ज्ञान के विकास के साथ-साथ उसकी वातावरण में रुचि बढ़ती है। वातावरण उसके लिए अर्थपूर्ण होता जाता है।
परिपक्वता बालक को शारीरिक और मानसिक रूप से गणित का बोध करने के लिए तैयार करती है। गणित के बोध के लिए परिपक्वता और ज्ञानेन्द्रियों का विकास आवश्यक है।
गणित के बोध की क्षमता उन बालकों में अधिक होती है जिनमें मानसिक विकास स्वरूप से अधिक होता है तथा उन बालकों में बोध का विकास सामान्य से कम होता है जिनकी मानसिक क्षमताओं का विकास सामान्य से कम होता है।
Growth Mindset in Learning Neglect Fixed Mindset in Math Course Design

Growth Mindset in Learning Neglect Fixed Mindset in Math Course Design

ज्यों-ज्यों बालकों में स्मृति, कल्पना और चिन्तन का विकास होता जाता है उनमें गणित सम्बन्धी प्रत्ययों का विकास भी होने लगता है।

(1.)स्मृति (Memory) -

स्मरण एक प्रकार की मानसिक प्रक्रिया है जिसमें मनुष्य धारण की गई विषय-सामग्री का पुन: स्मरण कर चेतना में लाकर पहचानने का प्रयास करता है। विषय-सामग्री को धारण करने के लिए उसे सीखना आवश्यक है। परन्तु बालक चिन्ताग्रस्त रहता है तो उसका पुन: स्मरण उतना ही कम हो जाता है।

(2.)कल्पना (Imagination) -

कल्पना गत अनुभवों से सम्बंधित होती है इसमें हमेशा नवीनता पाई जाती है। बालक को कल्पना में यह अनुभव होता है कि कल्पना से सम्बन्धित अनुभव नवीन है। कल्पना पूर्व अनुभवों पर आधारित वह प्रक्रिया है जो रचनात्मक (Constructive) होती है परन्तु आवश्यक नहीं है कि सृजनात्मक (Creative) भी हो।
बालक जब पुन:स्मरण अर्थात् स्मृति और कल्पना करना सीख लेता है तब उसका गणित कौशल व ज्ञान अधिक बढ़ जाता है। इस योग्यता के प्राप्त होते ही बालक गणित की उन वस्तुओं के सम्बन्ध में भी विचार करने लग जाता है जो उसके सामने नहीं होती है। कल्पना का महत्त्व विभिन्न विकासात्मक प्रक्रियाओं में है।
कल्पना के विकास के साथ ही बुद्धि के क्षेत्र में गणित के लिए खोज प्रवृत्ति विकसित होने लगती है।

3.चिन्तन (Thinking) -

चिन्तन एक उच्च ज्ञानात्मक (Cognitive) प्रक्रिया है, जिसके द्वारा ज्ञान संचय होता है। इस मानसिक प्रक्रिया में बहुधा स्मृति, कल्पना आदि मानसिक क्रियाएं सम्मिलित होती है। बालक के सामने जब गणित की कोई समस्या उपस्थित होती है तो वह उस समस्या से सम्बन्धित क्षेत्र में कठिनाई का अनुभव करने लगता है। कठिनाई को दूर करने के लिए वह चिन्तन करता है ।इसके लिए वह समस्या का विश्लेषण करते समय वर्तमान अनुभवों को अपने गत अनुभवों के आधार पर वह समस्या समाधान के सम्बन्ध में अनुमान करता है जिससे उसके सामने कई समाधान सामने प्रस्तुत होते हैं। उनमें से वह उचित समाधान का चयन करता है अर्थात् वह इस कार्य के लिए निर्णय लेता है कि कौनसा उचित हो सकता है और कौनसा अनुचित है।
चिन्तन तथा कल्पना दोनों ही ज्ञानात्मक व रचनात्मक प्रक्रियाएं हैं। दोनों क्रियाओं में गत अनुभवों का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। चिन्तन की सहायता से बालक समस्या के विभिन्न पहलुओं को समझने की कोशिश करता है क्योंकि पहलुओं को समझे बिना समस्या समाधान नहीं हो सकता है। दूसरी ओर कल्पना में समस्या समाधान की परिस्थिति को नये-नये रूपों में देखता है। चिन्तन में तर्क की प्रधानता होती है जबकि कल्पना में तर्क का अभाव होता है।

4.विकास का मूल आधार (Background of Development) -

विकास की मूल धारणा व्यवसाय एवं कम्पनियों से अन्य क्षेत्रों में विकसित हुई है इसलिए विकास के माॅडल में व्यावसायिकता है। इस प्रकार शिक्षा तथा गणित शिक्षा का भी व्यावसायिकरण हो गया है। व्यावसायिक भावना रखना बुरा नहीं है यदि विद्यार्थियों के हितों और कल्याण का पूरा ध्यान रखा जाए परन्तु यदि व्यावसायिकता में विद्यार्थियों के हितों को नुकसान पहुंचाया जाये और अपना स्वार्थ सिद्ध किया जाए तो ऐसी व्यावसायिकता की भावना गलत है। चूँकि शिक्षा में व्यावसायिकता में कई संस्थाएं मात्र धन अर्जित करने में ही संलग्न रहती है तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की तरफ उनका ध्यान नहीं रहता है तो ऐसी व्यावसायिकता से विद्यार्थियों को नुकसान ही होता है। दीर्घकालीन दृष्टि से ऐसी संस्थाओं के लिए भी यह नुकसानदायक है।
5.विद्यार्थियों के विकास की स्थिति (Position of Development of Students) -
विद्यार्थियों को गणित सीखने के लिए विकास की मानसिकता अपनाने के लिए कहा जाता है तो लगभग आधे विद्यार्थियों का नकारात्मक उत्तर रहता है कि उन्हें गणित विषय का चुनाव ही नहीं करना है जबकि गणित का हर क्षेत्र में महत्त्व है तथा गणित का उपयोग होता है। ऐसी स्थिति इसलिए निर्मित हुई है क्योंकि शिक्षा पर शासन का अधिकार हो गया है और उसमें राजनैतिक हस्तक्षेप होता है।
इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि कुछ शिक्षकों को गणित विषय अच्छा लगता है और उन्हें गणित विषय अपने लिए ठीक लगता है तो वे सोचते हैं कि गणित विषय औरों के लिए भी ठीक होगा। गणित विषय में जिसकी रुचि नहीं है, उन पर गणित विषय थोंपना या पढ़ाना ज्यादती है उसमें शिक्षक को प्रतिरोध का ही सामना करना पड़ता है।
आज का युग लोकतान्त्रिक युग है और सबको अपनी इच्छा व रुचि, योग्यता के अनुसार कार्य करने का अधिकार है। इसलिए किसी पर जबरन गणित थोंपना न्यायसंगत नहीं है।

6.गणित में श्रेष्ठता का मापदंड(Criterion of Superiority in Mathematics) -

यदि गणित में आप अच्छा करना चाहते हैं तो गणित से प्रेम व प्यार करना होगा उसके प्रति अपनी रुचि व जिज्ञासा को बनाए रखना होगा। चाहे कितनी ही कठिन समस्या आ जाए। इसके लिए आपको धैर्य धारण करना होगा। हालांकि गणित में काव्यात्मकता नहीं है परन्तु लगातार आप गणित का अभ्यास करते रहेंगे तो गणित के क्षेत्र में जो हासिल करेंगे उसे देखकर आप खुद आश्चर्यचकित रह जाएंगे।

7. गणित की वर्तमान स्थिति (Current position of Mathematics) -

 गणित अब व्यावहारिक होती जा रही है अर्थात् हमारे जीवन के कई भागों में इसका प्रयोग किया जाता है, इसमें क्रियात्मक गणित का भी योगदान है। हमें भी अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में गणित का प्रयोग करना चाहिए जिससे गणित में आपकी रुचि जागृत हो।
इस प्रकार गणित के क्षेत्र में विकास का माॅडल अच्छा ही है यदि इसका सदुपयोग किया जाए तो अर्थात् इसमें जो व्यावसायिकता है उसको सही अर्थ में लेने की जरूरत है।

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Wednesday, 18 September 2019

Basic Education And Teaching Mathematics

Basic Education And Teaching Mathematics

Basic Education And Teaching Mathematics

Basic Education And Teaching Mathematics 

1.बेसिक शिक्षा तथा गणित शिक्षण का परिचय (Introduction of Basic Education And Teaching Mathematics) -

इस आर्टिकल में बताया गया है कि बेसिक शिक्षा तीन माध्यमों द्वारा दी जाती है - प्रकृति (Nature), समाज (Society), और उद्योग (Craft) ।बालक का जीवन प्रारम्भिक काल में प्रकृति की गोद में व्यतीत होता है और परिवार में अपना जीवन व्यतीत करता है पश्चात समाज के सम्पर्क में आता है। इसलिए बेसिक शिक्षा में प्रकृति, परिवार और समाज में सन्तुलन स्थापित किया जाता है। गणित प्रकृति, परिवार और समाज में सम्बन्ध स्थापित करता है जो उद्योग में सहायक है। बालक को प्राकृतिक घटनाओं जैसे - सूर्य, चन्द्रमा, तारों के निकलने का समय, उनकी स्थिति तथा दिशा, ऋतुओं तथा वर्षा आदि के ज्ञान की आवश्यकता होती है। यह सब गणित द्वारा ही सम्भव है। इस प्रकार गणित प्राकृतिक घटनाओं को समझने में बहुत सहायक है। घर व समाज सम्बन्धी समस्याओं जैसे - खाने-पीने, कपड़े और मकान बनाने, लेन-देन में उठने वाले खर्चो के हिसाब-किताब, शादी, श्राद्ध और अन्य सामाजिक उत्सवों में हुए आय-व्यय के ब्योरों का सामना करना पड़ता है, वे सब समस्याएँ भी गणित के द्वारा ही सुलझायी जा सकती हैं। इस प्रकार सामाजिक समस्याओं में भी गणित की आवश्यकता पड़ती है। उद्योग में तो गणित का कदम-कदम पर उपयोग है। खेतों का क्षेत्रफल, बीजों की नापतोल और उनसे उत्पादित पदार्थों की तोल, भण्डार-बिक्री, खरीद-बिक्री, कागज, लकड़ी, लोहा, जस्ता, टीन आदि की बाजार दर, रंग, रस-द्रव्य (chemical) आदि का अनुपात के अनुसार उपयोग, लाभ-हानि का हिसाब फलाना आदि बातों का हल बिना गणित के सम्भव नहीं है। अतः गणित का उपयोग चारों प्रकार के माध्यमों-प्रकृति, परिवार, समाज और उद्योग में भलीभांति होता है।
Basic Education And Teaching Mathematics

Basic Education And Teaching Mathematics 

इसके अतिरिक्त बेसिक शिक्षा में इस बात पर भी ध्यान दिया जाता है कि बालक जो भी ज्ञान प्राप्त करे, वह विभिन्न क्रियाओं (Activities) के आधार पर प्राप्त करे। इसमें शिक्षा इस प्रकार दी जाती है कि ज्ञान (Knowledge) और कार्य (Activity) में परस्पर समन्वय (correlation) बना रहे ।गणित विभिन्न क्रियाओं और उनसे उत्पन्न ज्ञानों के जोड़ने में बड़ा उपयोगी है। जिस प्रकार भवन-निर्माण में गारा एक ईंट को दूसरी ईंट से जोड़ने में सहायक होता है, उसी प्रकार गणित भी विभिन्न क्रियाओं और ज्ञान के जोड़ने में सहायक होता है। इसलिए बेसिक शिक्षा में गणित की उपयोगिता को समझकर पाठ्यक्रम में इसका समावेश (Include) किया जाए ।
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2.बेसिक शिक्षा में गणित पढ़ाने का उद्देश्य (Objectives to Teach Mathematics in Basic Education) -

बेसिक शिक्षा में गणित पढा़ने का उद्देश्य विद्यार्थियों को इस योग्य बनाना है कि वे अपने उद्योग को तथा घरेलू व सामाजिक जीवन के सम्बन्ध में आने वाले हिसाब-किताब की नापतोल की समस्याओं को शीघ्रता से हल कर सकें। अतः बेसिक शिक्षा में गणित के व्यावहारिक तथा सांस्कृतिक मूल्य पर अधिक जोर दिया जाता है। गणित के अनुशासनात्मक (Disciplinary) मूल्य पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जाता है।
अत: अध्यापक को बेसिक शिक्षा में गणित पढ़ाते समय निम्नलिखित उद्देश्यों को ध्यान में रखना चाहिए -
(1.)बालक को दैनिक जीवन में काम आने वाले अंकों का भली-भाँति ज्ञान कराना चाहिए।
(2.)उद्योग और दैनिक जीवन में उठने वाली अनेक संख्या व ज्यामिति सम्बन्धी समस्याओं को शीघ्रता एवं शुद्धता से हल करने की क्षमता प्राप्त करानी चाहिए।
(3.)बालकों को किसी विषय पर स्वयं सोचने की, एकाग्रचित्त (Concentrate) होने की, उस पर सफल प्रयत्न (Effort) करने तथा उसको शब्दों, संकेतों या चित्रों द्वारा सूक्ष्म में व्यक्त करने के अवसर प्रदान करने चाहिए।

3.बेसिक शिक्षा में गणित का पाठ्यक्रम (Mathematics Curriculum in Basic Education) -

बालक को किसी विशेष परिस्थिति में गणित के जिस ज्ञान की आवश्यकता होती है वही बात उस समय बालक को पढ़ाई जानी चाहिए। ऐसा करने से बालक रुचिपूर्वक गणित के ज्ञान को ग्रहण करता है। इस प्रकार वर्तमान आवश्यकता और बालक की रुचि, बेसिक शिक्षा में गणित का पाठ्यक्रम बनाने के मूल सिद्धान्त है।
यह पाठ्यक्रम बड़ा लचीला (Flexible) होता है ।इसमें कोर्स की सूक्ष्म रूपरेखा (Outline) दी हुई होती है। अध्यापक पढ़ाते समय उस कोर्स में से आवश्यक तथा बालकों की रुचि के अनुसार किसी भी विषय को चुनने में पूर्ण स्वतन्त्र होते हैं। पाठ्यक्रम में सैद्धान्तिक (Theoretical) और कृत्रिम (Artificial) गणित के लिए कोई स्थान नहीं होता है। इसमें विशेष बल इस बात पर दिया जाता है कि गणित का दैनिक जीवन से सम्बन्ध हो। स्व. डॉ. जाकिर हुसै ने बेसिक शिक्षा की मूल योजना में बताया था कि बेसिक शिक्षा सैद्धान्तिक अंकों तक ही सीमित न रखी जाय बल्कि उसका बहुत समीप सम्बन्ध उन व्यावहारिक समस्याओं से होना चाहिए जो बुनियादी कला-कौशल को सीखते समय उत्पन्न होती है। इसलिए बेसिक शिक्षा में गणित के पाठ्यक्रम में नीरस (Dry) भिन्ने (Fractions), काम और समय (work and Time) सम्बन्धी रूखे प्रश्न तथा निरर्थक (Meaningless) बीजगणित के गुणनखण्ड (Factors) आदि को तनिक भी स्थान प्राप्त नहीं है। इसमें उसी गणित को सम्मान प्राप्त है, जो हस्तकला ( Handicraft) में सामाजिक तथा मनोरंजन सम्बन्धी क्रियाओं और व्यावहारिक जीवन में आवश्यक होता है। रचनात्मक रेखागणित (Practical Geometry)  पर अधिक जोर दिया जाता है जिससे यह हस्तकला तथा घरेलू कामों में डिजायन और चित्र बनाने में सहायक हो सके। बीजगणित भी वही पढ़ाई जाती है जो अंकगणित के प्रश्नों को सरल करने में सहायक हो। बीजगणित के उन समीकरणों को पढ़ाया जाता है जो हस्तकला सम्बन्धी समस्याओं को हल करने में सहायक होते हैं।
Basic Education And Teaching Mathematics

Basic Education And Teaching Mathematics 

बेसिक शिक्षा में गणित के पाठ्यक्रम बनाने में प्रायः गणित को इसके व्यावहारिक कोर्स से पृथक कर दिया जाता है। पाठ्यक्रम में इसका सीधे तौर पर कोर्स लिख दिया जाता है, जैसे जोड़, बाकी, गुणा, भाग, दशमलव, ऐकिक नियम आदि ।इसका प्रभाव यह पड़ता है कि प्रायः अध्यापक बालकों को पढ़ाते समय उस कोर्स को दैनिक जीवन सम्बन्धी समस्याओं से बड़ी कठिनाई से जोड़ पाते हैं। अतः गणित कोर्स को दैनिक जीवन सम्बन्धी समस्याओं से जोड़ देना चाहिए।
गणित में दैनिक जीवन सम्बन्धी अनेक समस्याएं हैं, उनमें से कुछ निम्नलिखित है -

(1.)उद्योग सम्बन्धी -

त्रिभुज, चतुर्भुज, वर्ग व आयत आदि आकृतियों की क्यारियाँ बनाई जा सकती है। जब वे खेतों के लिए बीज व खाद और बिनौले तोलें, उस समय उनको तोल सम्बन्धी इकाइयाँ जैसे - किलोग्राम, ग्राम इत्यादि के बारे में बताया जा सकता है। खेतों व बागों में क्यारियाँ व मार्ग बनाते समय उनकी भूमि की पैमाइश करना, क्षेत्रफल आदि का निकालना सिखाया जा सकता है। खेत व बाग में उत्पन्न उपज, बुने हुए कपड़े को बिकवाकर उनकी लाभ-हानि (Profit and Loss) तथा व्यवहार गणित (practical Mathematics) का ज्ञान कराया जा सकता है। इसी सम्बन्ध में उनकी रसीद बही, रोकड़-बही और बैलेंस शीट (Balance Sheet) का ज्ञान भी सहज में हो जाएगा। खेती-बाड़ी में क्यारियाँ बनवाते समय उनको फील्ड-बुक (Field Book) भी सीखायी जा सकती है। वस्त्र बुनते समय उनकों गति (speed), घर्षण (Friction), आदि का भी ज्ञान कराया जा सकता है। बुने हुए वस्त्र पर डिजाइन करवाते समय ज्यामिति की विभिन्न आकृतियों का ज्ञान कराया जा सकता है। रँगवाते समय रंगों के हिसाब का ज्ञान हो जाता है। मिट्टी का माॅडल बनाने में ठोस ज्यामिति की आकृति-गोले (Sphere), घन (Cube) आदि का ज्ञान सरलता से दिया जा सकता है। जब वे मिट्टी के ढेलों से काम करेंगे तो उनकी गिनती का ज्ञान भी सहज में हो जायेगा। लकड़ी व मिट्टी के खिलौने बनाते समय नाप-तोल, विभिन्न पैमाइशें आदि सिखाई जा सकती है। उनको रँगने में रंगों को विभिन्न अनुपात में लाना बताया जा सकता है। इस प्रकार विभिन्न प्रकार के उद्योगों पर विभिन्न प्रकार की गणित की शिक्षा दी जा सकती है।

(2.)घर और परिवार सम्बन्धी -

खाने-पीने, कपड़े व मकान बनवाने, पढ़ने-लिखने, लेन-देन के सम्बन्ध में उठने वाले हिसाब सम्बन्धी प्रसंगों में अनेक प्रकार से गणित की शिक्षा दी जा सकती है। बालकों के अभिभावकों (Guardians) की आय-कर (Income Tax) के सम्बन्ध में प्रतिशत सम्बन्धी प्रश्न कराये जा सकते हैं। डाकखानों व बैंकों में रूपयों को जमा करने, निकालने और उन पर ब्याज लगाने के प्रसंग में ब्याज सम्बन्धी प्रश्न कराए जा सकते हैं।

(3.)समाज सम्बन्धी -

स्कूल में सहकारी भण्डार (Co-operative Store) चलाकर बालकों को ब्याज, लाभ-हानि, साझेदारी (Partnership) तथा अंकगणित के अन्य प्रमुख नियम सरलता से बताये जा सकते हैं। स्कूल में हुए उत्सव का हिसाब भी बालकों से कराया जाये। इससे वे लेन-देन, खरीद और खर्च आदि बातों को सरलता से सीख सकते हैं। समाज में शादी, ब्याह, श्राद्ध और अनेक व्यावहारिक एवं सामाजिक कार्यों में लेन-देन, खरीद-बिक्री के प्रसंग में आयी हुई अनेक प्रकार की गणित बालकों को सिखायी जा सकती है।

4.उपकरण -

पाठ्यक्रम को बनाने के बाद गणित के लिए आवश्यक उपकरण और सामग्री का होना भी नितान्त आवश्यक है। इन उपकरणों और सामग्री से गणित का शिक्षण सरल एवं रोचक हो जाता है। इसके अतिरिक्त गणित शिक्षण में कुछ ऐसी सूक्ष्म बातें आ जाती हैं, जिनका समझना यदि सब विद्यार्थियों के लिए नहीं तो कुछ के लिए तो अवश्य ही असम्भव हो जाता है। ऐसी दशा में यदि उपकरण तथा चित्रादि दिखाकर सूक्ष्म बातें स्पष्ट कर दी जाएँ तो उसे बालक शीघ्र समझ लेते है। ब्लैकबोर्ड, पाॅइण्ट, खल्ली, झाड़न के अतिरिक्त ज्योमेट्रीकल सेट, चेन(chain) और मापने के यंत्र जैसे गिनने के सामान, ठोस ज्यामिति के विभिन्न रंगों की नालियाँ, भिन्न-भिन्न ऊँचाई और गहराई वाले सामान, विभिन्न आकृतियों के माॅडल जैसे गोला (sphere), घन (cube), आयताकार ठोस (Rectangular Solid), त्रिपार्श्व (Prism) और शंकु (Cone) आदि भिन्न-भिन्न प्रकार के सिक्के, विभिन्न घनत्व (density) वाले पदार्थ, तोल के विभिन्न प्रकार के बाँट, ग्राफ, चार्ट तथा विभिन्न प्रकार के चित्र व रेखाचित्र आदि आकर्षक ढंग से विद्यालय में सजे हुए होने चाहिए। यह भी बालकों को गणित-शिक्षण का एक साधन है। जहाँ तक हो सके, चित्र हाथ के बने होने चाहिए। इन उपकरणों की सफाई और व्यवस्था का प्रतिबन्ध भी अध्यापक और बालकों द्वारा होना चाहिए।

5.विधि(Method) -

बेसिक शिक्षा में गणित की शिक्षण-पद्धति सीधे तौर पर नियम बताकर प्रश्न निकलवाने की नहीं है बल्कि सीखते समय जो समस्या खड़ी हो उसको हल करते हुए गणित सीखना चाहिए ;जैसे - किसी बालक ने एक दिन में 40 मीटर सूत काता और दूसरे दिन 35 मीटर। अब इस बात की आवश्यकता होगी कि उसने दोनों दिन में कितने मीटर सूत काता। इस समय अध्यापक को जोड़ का नियम सिखाने का अच्छा अवसर है। इस प्रकार क्राफ्ट के सम्बन्ध में अनेक समस्याएँ आयेंगी और उनका उपयोग करते हुए गणित का ज्ञान सहज में ही दिया जा सकेगा। अध्यापक को गणित की शिक्षा देते हुए भी विचार रखना चाहिए कि बेसिक कक्षाओं में बालक बहुत छोटे होते हैं, अतः उनको आगमन प्रणाली (Inductive Method) में पढ़ाना चाहिए क्योंकि निगमन प्रणाली (Deductive Method) के लिए काफी तर्क और समझ की आवश्यकता होती है।
ऐसा करने से जीवन सम्बन्धी वास्तविक प्रसंगों के सहारे गणित का शिक्षण हो सकेगा। कभी-कभी बेतुके और असत्य उदाहरण पुस्तकों में दिखाई देते हैं जैसे - एक आदमी की उम्र 14 साल है और उसके 3 बच्चे हैं। अब यह सोचने की बात है कि क्या 14 साल के लड़के के 3 बच्चे हो सकते हैं
? इसी प्रकार ऐसे प्रश्न भी किए जाते हैं जिनका उत्तर 20.5 आदमी आता है। क्या यह सम्भव है कि 20.5 आदमी हो सकते हैं? कभी-कभी ऐसे प्रश्न भी पूछे जाते हैं कि एक घोड़े का दाम 2 रूपये है तो8 घोड़े का दाम बताओं। क्या एक घोड़ा 2 रुपये का हो सकता है? अतः ऐसे प्रश्नों को बालकों से नहीं करना चाहिए जो कृत्रिम और असत्य हों। इसका बालकों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वे गणित को जीवन से असम्बन्धित समझकर एक अजीब और भयानक विषय समझ बैठते हैं। अध्यापक को चाहिए कि वह बालक से उन्हीं प्रश्नों को कराये जो संख्यात्मक, वर्णनात्मक, खाने-पीने, पहनने-ओढ़ने, खेल-खिलोने आदि से सम्बंधित और मनोरंजक हों। इसके साथ-साथ गणित से सम्बन्ध रखने वाली सामग्री का जैसे - गिनने के साधन, सिक्के, ज्याॅमैट्रीकल सैट, ठोस ज्यामिति की आकृतियों आदि का भी गणित पढ़ाते समय उपयोग करना चाहिए। ऐसा करने से बालकों में सहज प्रवृत्ति उत्पन्न होगी। उन्हें गणित में रस मिलेगा। वे गणित में रुचि लेने लगेंगे। उनमें शोध - Research) की प्रवृत्ति जाग्रत होगी और अपनी समस्याओं का हल अपने आप निकालने में समर्थ होंगे।
कभी-कभी अध्यापक एक गलती कर बैठते हैं, वे बालकों को गणित सीखाते समय उनको कुछ गलती करने पर धमकाते हैं और उनको बैंचों पर खड़ा कर देते हैं व उनको पीटते हैं। इसके अतिरिक्त गणित में सूक्ष्म और अबोधगम्य सिद्धान्तों को वे बालकों की उम्र और समझ का बिना विचार किए उन पर लादते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि बालक गणित के प्रति उदासीन हो जाते हैं और उससे कोसो दूर भागते हैं। रट-रटाकर वे चाहे परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाते हैं परन्तु गणित का वास्तविक उपयोग अपने जीवन में नहीं ले पाते हैं। अतः अध्यापकों को चाहिए कि वे इन गलतियों से सावधान रहें। उनको चाहिए कि वे इस प्रकार के प्रेम का वातावरण बनायें कि बालक नि:संकोच अध्यापक से अपनी शंका का समाधान कर सकें और किसी बात को अध्यापक से पूछने में झिझके नहीं। गणित अध्यापक को यह बात भी ध्यान रखनी चाहिए कि जब तक बालकों की रुचि विषय में रहे तभी तक गणित पढ़ानी चाहिए क्योंकि अनुकूल परिस्थिति और ठीक समय पर किया हुआ कार्य ही पूर्ण रूप से सफल होता है। जिस समय बालक गणित के किसी विषय को पढ़ते-पढ़ते ऊब जायें और उनको जब उसके पढ़ने में रुचि न रहे तो इसका परिणाम उसी प्रकार होगा जैसा कि बर्तन के भर जाने पर ओर पानी भरने से होता है। अतः बालकों की जब तक विषय में रुचि बनी रहे तभी तक उनको पढ़ाना चाहिए।
लड़कों में गणित के प्रश्नों को हल करने में शीघ्रता एवं शुद्धता (speed and accuracy) हो तथा गणित सम्बन्धी लेखन में कहीं भी किसी तरह की भूल न होने पाये। इसके लिए गणित-कार्य में अभ्यास (Drill) की आवश्यकता है। परन्तु अभ्यास इस प्रकार कराना चाहिए कि बालक उसके करने से ऊबे नहीं। अध्यापक को यह अभ्यास-कार्य खेल-पद्धति (Play-way-Method) द्वारा कराना चाहिए। अभ्यास-कार्य में प्रश्न इस ढंग से बालकों के सम्मुख चुनने चाहिए कि बालक उनमें रुचि लेते रहें। अध्यापक को किसी प्रश्न की लघु विधि(short cut) पर जोर नहीं देना चाहिए बल्कि उस क्रम से कराना चाहिए जिस क्रम से बालक सोचते हैं। कमजोर बालकों का भी गणित अध्यापक को ध्यान रखना चाहिए। तेज (Intelligent) और कमजोर (Weak) बालकों को यथासम्भव उनकी योग्यतानुसार पढ़ाना चाहिए। कमजोर बालकों को तेज बालकों के साथ लाने के लिए कभी-कभी अध्यापक बहुत जल्दी कर बैठते हैं। ऐसा करने से कमजोर बालक की नींव कमजोर रह जाती है जो आगे उन्नति में बाधक होती है। अशुद्ध उत्तर आने पर बालकों पर गुस्सा नहीं करना चाहिए बल्कि उनसे सही उत्तर निकलवाने की चेष्टा करनी चाहिए।

6.पाठ्यपुस्तक (Text-Book) -

कुछ लोगों की ऐसी धारणा है कि बेसिक शिक्षा में पाठ्यपुस्तक की कोई आवश्यकता नहीं होती है। परन्तु यह उनकी बहुत बड़ी भूल है। बेसिक शिक्षा के लिए पुस्तकों का होना अनिवार्य है परन्तु ये पुस्तकें बेसिक शिक्षा के सिद्धान्त पर लिखी होनी चाहिए। गणित की पाठ्यपुस्तक में जो प्रश्न दिये जायें, वे जीवन से सम्बंधित होने चाहिए। प्रश्न वास्तविक हों, उनमें कृत्रिमता की झलक न रहे। प्रश्नों को रखने का ढंग भी क्रमपूर्वक (systematic) हो ताकि सरल प्रश्न पहले आये और फिर अन्त में सबसे कठिन। मौखिक (Oral) तथा मानसिक प्रश्नों का भी समावेश होना चाहिए। गणित की अच्छी पुस्तकों में पुष्टि के लिए कहीं कहीं चित्र और आकृतियों का होना अनिवार्य है। 

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Tuesday, 17 September 2019

Symbols in Mathematics

Symbols in Mathematics

1.गणित में प्रतीकों का परिचय (Introduction of Symbols in Mathematics) -

इस आर्टिकल में गणित में प्रतीकों के महत्त्व और उपयोगिता के बारे में बताया गया है। जिस प्रकार हमारे जीवन में धर्म तथा संस्था में प्रतीकों का महत्त्वपूर्ण स्थान है और जहां भी प्रयोग किए जाते हैं अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं उसी प्रकार गणित में भी प्रतीकों का महत्त्व है। प्रतीक संक्षिप्त रूप में प्रकट करने के बावजूद गागर में सागर की तरह अपनी भूमिका निभाते हैं। प्रतीकों के बिना गणित की कल्पना भी नहीं की जा सकती है इसलिए कहाँ पर कौनसा प्रतीक प्रयोग किया जाएगा इसको समझना बहुत आवश्यक है। प्रतीक के द्वारा गणित को सरल बनाने में मदद मिलती है और उसको कठिन होने से बचाया जा सकता है।प्रतीकों का प्रयोग करने से हमारे समय की बचत होती है साथ ही हम प्रतीक के द्वारा संक्षिप्त में गणितीय संक्रियाओं को तत्काल व शीघ्र समझ पाते हैं और दूसरों को समझा पाते हैं।इस प्रकार प्रतीक प्रकृति की अद्भुत रचना जो गणित की सुन्दरता को बढ़ाती है और उसमें चार चाँद लगा देते हैं। हमे इनका सदुपयोग करना सीखना चाहिए।
Symbols in Mathematics

Symbols in Mathematics 

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2.गणित में प्रतीक (Symbols in Mathematics) -

मानव जीवन में गणित का महत्त्व विदित है। गणित में प्रतीकों का बहुत महत्त्व होता है। यदि यह कहा जाए कि गणित का प्राचीनकाल से अर्वाचीन काल तक विभिन्न शाखाओं से जुड़े प्रतीकों को समझे बिना अब तक की यात्रा को समझा नहीं जा सकता है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। गणित ही नहीं धर्म तथा संस्कृति, साहित्य और कला की ऊँचाईयाँ भी प्रतीकों को समझे बिना नहीं समझी जा सकती है।
प्रतीक शब्द की व्याख्या आसान नहीं है और उनको पूरी तरह स्पष्ट करना तो ओर भी कठिन है। प्रतीकों के नए-नए अर्थ आते जा रहे हैं और ऐसे में उन्हें पूर्ण अभिव्यक्ति देना एक कठिन कार्य है। गणित के सन्दर्भ में यह कार्य कितना कठिन होगा इसका अनुमान इस तरह लगाया जा सकता है कि सैंकड़ों वर्षों के दौरान विकसित इस समूची परम्परा को प्रतीकों पर आधारित माना जाता है अर्थात् इसका भी क्षेत्र व्यापक अर्थों में जो बात कही जा रही है उसकी प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति के दौरान अर्थ के कई सोपान दृष्टिगत होते हैं।
हालांकि समय-समय पर विभिन्न गणितज्ञों ने गणित के प्रतीकों को सरल भाषा में समझाने का उपयोगी कार्य समय-समय पर किया है। प्रतीकों की लोकप्रियता ही इसका प्रमाण है कि गणित में इसका कितना उपयोग करते हैं।
प्रतीकों की बहुलता के बावजूद इनकी व्याख्या करना कठिन है। प्रायः यह माना जाता है कि संकेत और प्रतीक एक हैं, पर ऐसा नहीं है। चिन्ह या संकेत जहाँ रूढ़िगत प्रतीक को व्यक्त करते हैं वहीं प्रतीक वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखते हुए अदृश्य वस्तु का दृश्य संकेत है। प्रतीकों की यह दुनिया आनन्ददायक तो है ही परन्तु विस्मयभरी भी है। एक अर्थ खुलता है और और अगले ही पल विचार तथा चिंतन की दुनिया में ओर अर्थ सामने आ जाता है।
जिस प्रतीक का गणित में कुछ ओर प्रयोग होता है अन्य विषयों में कई बार कुछ नए अर्थ में प्रयोग हो जाता है। इस तरह प्रतीकों का दायरा लगातार न केवल बढ़ता है बल्कि उसे गरिमा भी देता है।
Note-If you want to know which symbols are in mathematics.please click below.
Mathematics Symbols 

3.प्रतीकों का सम्बन्ध (Relation of Symbols) -

 प्रतीक मन तथा बुद्धि की वस्तु है, मन तथा बुद्धि, आत्मा की सम्पत्ति है। आत्मा अनन्त तथा चिरन्तन सत्य है । प्रतीक उस चिरन्तन सत्य का प्रतीक मात्र है। सच तो यह है कि जितना समझ में आ जाये, उतना ही कम है।
जहाँ तक गणित का सम्बन्ध है, वह प्रतीकों की खान हैं। जीवन का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र है जो प्रतीकात्मक अभिव्यक्तियों को ध्वनित न करता हो। कोई विद्वान इन्हें सीमित अर्थ में देखता है तो दूसरा असीमित अर्थ में। एक श्रृंखला बनती जाती है, अर्थों का इस तरह सम्पूर्ण विषय अलौकिकता से तादात्म्य स्थापित करने लगता है, मानव मन की अनन्त क्षमताओं को मुखर करता है। प्रतीकों की दुनिया काफी जटिल होने के बावजूद रोचक है और व्यापक इतनी कि इसमें चाहे गणित हो, दर्शन हों, साहित्य हो या कला,विज्ञान हो या अन्य शास्त्र सभी इसकी अनन्त सीमाओं में समाहित हैं।
प्रतीकों की व्यापकता, निरन्तरता और दार्शनिकता की पृष्ठभूमि से स्पष्ट है कि इस विषय पर लिखना आसान कार्य नहीं है। यो इस पर लिखना, आसान कार्य नहीं है। इस विभिन्न विद्वानों द्वारा रचनाओं की कमी नहीं है, पर उनमें कुछ ही स्तरीयता की ऊँचाईयाँ छू सकी है।

4.व्याख्या (Explanation) -

 सहज रूप में प्रतीक की व्याख्या करना कठिन है। इस शब्द के प्रयोग से हमारा जो तात्पर्य है, उस अर्थ में इस विषय पर देश में या विदेश में कोई भी ग्रन्थ उपलब्ध नहीं है। अंग्रेजी में प्रतीक को symbol कहते हैं जैसे संकेत, लक्षण, चिन्ह तथा मुद्रा आदि। चिन्ह के लिए अंग्रेजी में 'sign' शब्द है ।किन्तु संकेत आदि के लिए ये पर्यायवाची शब्द अनेक मिल जाएंगे पर वैज्ञानिक दृष्टि से उस भाषा में Symbol के अलावा दूसरा शब्द नहीं है। किन्तु प्रतीक न तो संकेत है, न लक्षण है और न चिन्ह है। यदि प्रतीक से तात्पर्य उस निशान से है जो किसी अदृश्य, सामने न दिखाई पड़नेवाला दृश्य, वस्तु का आभास है तो यह कहना शायद उचित न हो क्योंकि व्याकरण के अनुसार आभास का अर्थ मिथ्या होता है।

 5.विभिन्न शब्दकोश के अनुसार अर्थ (Meaning According to different Dictionary) -

अंग्रेज़ी शब्दकोश Oxford Dictionary के अनुसार अर्थ -
Symbol is a person, an object, an event etc. that represent a more general quality or situation :white has always been a symbol of purity in Western cultures. Ex. Mandela became a symbol of the anti-apartheid struggle.
Sign - A sign is number, letter etc. that has a fixed meaning, especially in science, mathematics and music, what is the chemical symbol for copper?
A list of symbols used on the map is given below.
Symbols in Mathematics

Symbols in Mathematics 

गणित शब्दकोश के अनुसार -
Symbol - A letter or mark of any sort representing quantities, relations or operations.
Algebraic Symbols - symbols representing numbers and algebraic combinations and operations with these numbers. 
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Monday, 16 September 2019

coaching vs education in hindi || what is educational coaching by satyam coaching centre


via https://youtu.be/RoFMLMR8Yv4

Linear Differential Equations

Linear Differential Equations

इस आर्टिकल में रैखिक अवकल समीकरण के बारे  में बताया गया है.इसमेP औरQ  अचर या  फलन हैं इसलिए यह रैखिक अवकल  समीकरण है .अवकल गुणांक ज्ञात करके समीकण का पूर्ण हल ज्ञात किया जाता है..इसमें बाएं पक्ष कोy से गुणा करके तथा Q को समाकलन गुणांक से गुना करके  दाएं पक्ष का समाकलन  करते है.समीकरण को सरल करके रैखिक अवकल समीकण का सम्पूर्ण हल ज्ञात करते है.
रैखिक अवकल समीकरण की थ्योरी को प्रश्न के हल द्वारा समझाया गया है.यदि यह आर्टिकल पसंद आए तो अपने मित्रो के साथ शेयर एवं लाईक कीजिए .यदि आपको कोई समस्या हो या आपका कोई सुझाव हो तो कमेंट करके बताए .
Linear Differential Equations

Linear Differential Equations

Linear Differential Equation

Definition:A differential equation or the form  (dy/dx)+Py=Q……(1)
Where P and Q are constants or functions of x alone (and not of y) is called a linear differential equation of the first order in y.
To solve such an equation multiplying both sides of (1) by
.eʃPdx we have [(dy/dx)+Py]eʃPdx =Q eʃPdx          ……..(2)
Now (d/dx)[y eʃPdx ]=y(d/dx)[ eʃPdx]+ eʃPdx   (dy/dx)
=y. eʃPdx  (d/dx)[ʃPdx]+ eʃPdx  (dy/dx)
=y. eʃPdx .P+ eʃPdx (dy/dx)
Or (d/dx)[y. eʃPdx ]=[Py+(dy/dx)] eʃPdx
From (2) we get (d/dx)[y eʃPdx ]=Q eʃPdx
Integrating both sides with respect to x,we get
.y . eʃPdx =C+ʃQ eʃPdx dx where C is constant 
Linear Differential Equations

Linear Differential Equations






Sunday, 15 September 2019

Education And Training Of Mathematics Teacher

Education And Training Of Mathematics Teacher

1.गणित शिक्षक की शिक्षा और प्रशिक्षण का परिचय (Introduction of Education And Training Of Mathematics Teacher)-

इस आर्टिकल में बताया गया है कि पाठ्यक्रम और पुस्तक दोनों मृतप्राय होती है उनको सजीव शिक्षक  ही  करता है इसलिए शिक्षक के शिक्षण और प्रशिक्षण  पर  विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। शिक्षक को व्यावहारिक ज्ञान भी होना चाहिए जैसे रिश्तेदारों से किस प्रकार व्यवहार करना चाहिए, बाजार में लेन-देन करें तो किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, अपने से बड़ों के साथ किस प्रकार व्यवहार करना चाहिए? जिससे वह विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान कर सके। 
Education And Training Of Mathematics Teacher

Education And Training Of Mathematics Teacher 

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2.वर्तमान स्थिति (Present Position) -

गणित शिक्षकों की वर्तमान व्यावसायिक (professional) और शैक्षिक (Academic) स्थिति के सम्बन्ध में निश्चयात्मक कथन अनुसंधान का विषय है, किन्तु अध्ययनों अनुभवों और सामान्य प्रेक्षणों के आधार पर एक सीमा तक विश्वसनीय अभिगृहीत तो प्रस्तुत किये ही जा सके हैं। अमेरिका में विशिष्ट विषय के रूप में गणित शिक्षा के विकास के लिए 'द मैथेमेटिक्स एसोसिएशन आॅफ अमेरिका, इन्क' तथा 'काउन्सिल आॅफ टीचर्स आॅफ मैटेमिटिक्स गत 5-6दशको से समय समय पर कमीशनों और कमेटियों के माध्यम से इसमें नियमित रूप से सुधार के प्रयास कर रहे हैं। भारत में अभी ऐसा कुछ देखने को नहीं मिलता है। यहाँ गणित शिक्षा की स्थिति पर कुछ प्रेक्षण बिन्दुगत रूप में प्रस्तुत है -
(1.)गणित की विषयवस्तु प्रत्ययों, सम्बन्धों संक्रियाओं आदि के ज्ञान और बोध का भी शिक्षकों में अभाव है।
(2.)अपने व्यापक स्वरूप में शिक्षा 'समाज सेवा' है, किन्तु वर्तमान में यह एक व्यवसाय(profession) बन गया है। गणित शिक्षा में व्यावसायिकता (professionalism) ने नकारात्मक (Negative) स्वरूप ले लिया है। इसके संस्थागत स्वरूप को प्रोत्साहन देने वाले विरले ही हैं। इस पर द्रव्य-मान (Money value) का अधिकार हो गया है।
(3.)गणित शिक्षा का व्यवसाय में विकास होना बुरा नहीं है, किन्तु व्यावसायिकता के मानदण्डों का इसमें पराभव विचारणीय है। शिक्षा व्यवसाय के व्यावसायिक मूल्यों (professional values) का सामान्य शिक्षक और विशिष्ट रूप में गणित शिक्षक को कोई ज्ञान नहीं है।
(4.)गणित शिक्षण एक व्यक्तिगत(Individual) कर्म बनकर रह गया है। इससे शिक्षकों में सहयोगिता और सहभागिता का स्पष्ट पराभव है।
(5.)शिक्षकों में गणितीय कौशलों, मूल्यों एवं श्लाघा की पैठ नहीं दिखाई देती।
(6.)गणित का केवल सतही ज्ञान ही शिक्षकों को सार्थक लगता है। गणित की विषयवस्तु के परिमाण और क्षेत्र अवश्य ज्ञान (knowledge) स्तर पर बढ़ें हैं, किन्तु विषय की गहराई में बहुत कमी आई है। कह सकते हैं कि शिक्षकों में गणितीय ज्ञान के आयतन का निश्चित रूप से ह्रास हुआ है। यह चिन्ता का विषय होना चाहिए।
(7.)गणित शिक्षण की विधियों, तकनीकों, कौशलों के प्रति शिक्षकों की अनभिज्ञता और इनके उपार्जन के लिए उनमें जिज्ञासा का अभाव स्पष्ट है।
(8.)विद्यार्थी की अभिरुचि, अभिवृत्ति, अभियोग्यता से उनका कोई सम्बन्ध नहीं रहता। वे निर्धारित विषयवस्तु को पूरा करने की औपचारिकता पूरा करने मात्र में रुचि रखते हैं।
(9.)शिक्षण-अभिवृत्ति से शिक्षक के कार्य में कोई सम्बन्ध नहीं है एवं गणित के महत्त्व को समझने का प्रयास भी शिक्षक नहीं करते।
(10.)शिक्षक अपने शिक्षार्थी की कठिनाइयों और कमियों को जानना भी नहीं चाहता। उन्हें दूर करने में रुचि रखना तो कल्पना के परे की बात है।
(11.)कक्षा शिक्षण परम्परागत व्याख्यान प्रणाली पर ही पूरा किया जाता है।
(12.)शिक्षार्थियों को पर्याप्त अभ्यास,अनुरक्षण कार्य देने में शिक्षक रुचि नहीं लेते। अपने दस्तूरी कर्म (Routine job) के रूप में ये कार्य दिये भी जायें तो उनकी जाँच के लिए शिक्षक समय भी नहीं निकाल पाता, जिससे वह निरर्थक हो जाता है।
(13.)शिक्षकों में धैर्य का अभाव, अपने विद्यार्थियों को समझने में रुचि न लेना, स्वयं विषय के मूल सिद्धान्तों के ज्ञान की कमी, शिक्षण में कौशल की कमी आदि शिक्षक की ऐसी कमियां हैं, जिन्होंने गणित विषय को कठिन बना दिया है। इस विषय के प्रति विद्यार्थी में एक सामान्य भाव बना रहता है। इससे यह विषय सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होते हुए भी विद्यार्थियों में लोकप्रिय नहीं है।

3.शिक्षकों के लिए प्रभावी शिक्षण की शर्त (Condition for Effective Teaching For Teachers) -

प्रभावी शिक्षण के लिए गणित सहित सभी विषयों के शिक्षकों को सम्बन्धित विषय में परिपूर्ण पारंगति(perfect Mastery) होनी चाहिए ।यह अनुदेशन की सफलता की पहली आवश्यक शर्त है। विषय-ज्ञान में पारंगत व्यक्ति उसके शिक्षण के लिए प्रभावी उपक्रम और युक्ति स्वयं ढूँढ लेता है। फिर गणित के सम्बन्ध में तो यह विदित ही है कि इसके अध्ययन और अध्यापन की विधियाँ एक ही हैं। अतः गणित में पारंगति उसके अध्ययन की विधियों में पारंगति सह-सम्बन्धित (Correlated) है।गणित ऐसा विषय है जो कि उसके शिक्षण की विधियों में व्यक्ति को स्वयं ही प्रशिक्षित कर देता है। अतः कह सकते हैं कि गणित का अध्ययन गणित शिक्षण की विधियों में आत्म प्रशिक्षण (Auto training) है। गणित विषय पर पूरी पकड़ के साथ-साथ शिक्षक को अनुदेशन तकनीकों (Instructional techniques) के उपयोग में भी महारथ होना जरूरी है। गणित में सफल अनुदेशन के लिए शिक्षक में विषय-ज्ञान और अनुदेशन तकनीकों के उपयोग में कौशल दोनों ही सन्तुलित रूप में विकसित होने चाहिए। इसका महत्त्व इस कथन में स्पष्ट होता है कि "हमे ऐसे शिक्षकों की आवश्यकता नहीं है जिनके पास शिक्षण के लिए कुछ नहीं है (Teachers who have nothing to teach) और न ही उनकी जो कि मात्र ज्ञान की आपूर्ति तथा कौशल को प्रोन्नत वाले(Mere purveyors of knowledge and pro motors of skill) हों। गणित शिक्षक में विषय ज्ञान और अनुदेशन तकनीकों का सन्तुलित विकास महत्त्वपूर्ण बिन्दु है।

4.ज्ञान की त्रिवेणी (Trichotomy of Knowledge) -

गणित शिक्षक सामान्य (General), व्यावसायिक (professional) और विशेषज्ञ (specialist) तीन ज्ञान वर्गो (classes) का संगम है। हम द्रुत गति से हो रहे परिवर्तनों में जी रहे हैं। विकास और भावी परिवर्तनों पर उसके निहितार्थों (Implications) की द्रुतता (Rapidity) जहाँ एक ओर कल्पना शक्ति (Imagination) का अंतरीकरण (staggering) करते हैं, वहीं दूसरी ओर सतही सूचनाओं (superficial Information) पर सन्तुष्टि (satisfaction) को प्रोत्साहित करते हैं। घटनाएँ इतनी द्रुत गति से हो रही हैं कि किसी मनुष्य के लिए इनका सूक्ष्म अध्ययन और इनको व्यवस्थित करना कठिन है, जिससे विकास प्रक्रिया को समझना सरल नहीं है। इसलिए विकास और परिवर्तन की किसी एक धारा से सम्बंधित सतही सूचनाएं ही हमारी सन्तुष्टि के लिए पर्याप्त सामग्री समझी जाने लगी है। यहाँ यह रेखांकित करना आवश्यक है कि ज्ञान की सतही मापें तो बढ़ी हैं, किंतु इसकी गहराइयाँ कम हो गई हैं। हमारा वर्तमान ज्ञान छिछला है। गणित शिक्षक को यहाँ विशेष सावधानी रखनी हैं।
गणित शिक्षक की शैक्षिक पृष्ठभूमि व्यापक और इसका आधार वृहद होना चाहिए। अपने विषय ज्ञान से कभी भी सन्तुष्टि की अनुभूति न हो। वह सदाबहार ज्ञान-पिपासु बना रहे। गणित शिक्षक को सही मायने में ज्ञानानुरागी होना चाहिए। उसका विषय ज्ञान इतना व्यापक और गहन हो कि वह मानव विकास और आधुनिक संस्कृति के विकास को समझ सके। वह मानव-प्रगति और सामाजिक मूल्यों का गुण विवेचन(Appreciation) कर सके।
Education And Training Of Mathematics Teacher

Education And Training Of Mathematics Teacher 

प्रत्येक गणित शिक्षक में व्यावसायिक अभिवृत्ति होनी चाहिए। यहाँ शिक्षण की व्यावसायिक अभिवृत्ति व्यक्ति की वह स्थायी मन:स्थिति है, जिसमें सम्मिलित प्रमुख गुण इस प्रकार हैं - अध्ययन और सेवा कार्य (Service) के लिए गणित के चयन में गहन अभिरुचि (Interest), सांस्कृतिक संरचना में गणित के मूल्य की गुण विवेचना की क्षमता, उन आधारभूत नियमों (Fundamental Laws), यान्त्रिक क्रियाओं (Mechanical Processes), प्रक्रमों के सामान्यीकरण (Generalizing Procedures), व्यावहारिक प्रयुक्तियों की सम्भावनाओं (Possibilities of practical applications) के निर्वचन में तत्परता, ये गणित के अध्ययन और मानवीय प्रयास (Endeavour) का एक विशिष्ट क्षेत्र बनाते हैं।
गणित शिक्षक के लिए सांस्कृतिक पृष्ठभूमि हेतु शिक्षा के अतिरिक्त उसकी व्यावसायिक तैयारी भी आवश्यक है। इसके लिए उसमें जिन गुणों का विकास आधारभूत है उनमें से निम्नलिखित के विकास के लिए प्रावधानों पर प्रमुखता से बल देना चाहिए -
(1.)व्यवसाय के रूप में शिक्षण के प्रति पूर्ण निष्ठा (Devotion)
(2.) अपने कार्य-क्षेत्र में दायित्व और कर्त्तव्य ज्ञान के प्रति चेतना और उनके निर्वाह के लिए पत्नी छू।
(3.)गणित और गणित शिक्षा में योगदान हेतु उत्साह।
(4.)शिक्षार्थियों को समझने में अभिरुचि एवं इसमें प्रवीणता।
(5.)शिक्षण सामग्रियों, विधियों, तकनीकों, कौशलों के उपयोग में कुशलता।
(6.)आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग में पारंगति।
(7.)गणित को आकर्षक बनाने में सिद्धहस्त।
(8.)गणित के ज्ञान को स्थायित्व प्रदान करने का कौशल।
(9.)विषय-ज्ञान में अभिरुचि और उसके अधिगम के अनुरक्षण में प्रवीणता।
(10.)भारतीय समाज और संस्कृति का गणित के विकास में योगदान का बोध।
(11.)भारतीय गणित का आधुनिक प्रौद्योगिकी से सम्बन्ध स्थापित करने की जिज्ञासा।
(12.)गणित की आधुनिक दार्शनिक विचारधाराओं के परिप्रेक्ष्य में गणित के सम्प्रत्यय का पूर्ण बोध।
(13.)गणित शिक्षा को सहज और आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न युक्तियों को खोजना और उनकी उपयोगिता प्रयुक्ति में प्रवीणता।
(14.)वर्तमान कल्प (Present Era) में गणित के व्यावसायिक महत्त्व का बोध।
(15.)गणित के अनुदेशन में बहुसाधन उपागम (Multi media approach) का पूरा पूरा लाभ उठाने क बोध और कौशल।
(16.)शिक्षण-व्यवसाय के आधारभूत मूल्यों में परिपक्वता।

गणित शिक्षक में इस व्यावसायिक ज्ञान, बोध और कौशल के विकास के लिए कोर्स को इस प्रकार डिजाइन किया जाना चाहिए कि वह अपनी सामाजिक व्यवस्था में विषय के महत्त्व को समझ सके। वह वैयक्तिक और सामाजिक जीवन में गणित के प्रकार्यों और निहितार्थों (lmplications) को समझ सके तथा विभिन्न व्यवसायों के पारस्परिक सम्बन्धों को समझते हुए गणित शिक्षा के साथ उनके सम्बन्धों को स्थापित कर सके। शिक्षार्थी के पारस्परिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक (Emotional) विकास क्रम में शिक्षक की अन्तर्दृष्टि विकसित हो सके। शिक्षक गणित की विषयवस्तु और उसके शिक्षण में पूर्ण जानकारी रखने में समर्थ हो। वह शिक्षण और अनुदेशन को प्रभावी बनाने में सभी युक्तियों का उपयोग करने में सक्षम हो सके, साथ ही शिक्षण की विधियों, तकनीकों एवं कौशलों में प्रशिक्षित हो तथा अपने कक्षा-अनुदेशन को प्रेक्षण (Observation) और अभ्यास (practice) के द्वारा प्रभावी और दक्ष बना सके।

5.गणित शिक्षक की नौकरी (Job of the Mathematics Teacher) -

गणित शिक्षक की नौकरी के विश्लेषण से इसके दायित्वों (Responsibilities) के दो प्रमुख पक्ष स्पष्ट होते हैं - (i.) सामान्य शिक्षक (ii.) गणित का विशिष्ट शिक्षक ।शिक्षण व्यवसाय में सभी शिक्षकों से अपेक्षित दायित्वों का निर्वहन गणित शिक्षक का प्रथम कर्त्तव्य है। इन दायित्वों एवं कर्त्तव्यों में प्रमुख इस प्रकार हैं -
विद्यालय के निर्बाध संचालन में सक्रिय सहयोग और सहभागिता, विद्यालय और समुदाय के मध्य सामंजस्यपूर्ण सम्बन्धों (Harmonious) और रचनात्मक पारस्परिक बोध (Mutual Understanding) के विकास (Development) और अनुरक्षण (Maintenance) में प्रभावी योगदान, सहपाठ्यचारी क्रिया-कलापों (Co-curricular activities) का प्रयोजन (sponsors), किसी भी शैक्षिक संगठन (Academic activities) का प्रायोजन (Sponsors), किसी भी शैक्षिक संगठन (Academic Organisation) के संचालन में सहयोग, मार्गदर्शन (Guidance) और परामर्श में सहभागिता, सम्बन्धित अभिलेखों (Records) का अनुरक्षण, वांछित प्रतिवेदन (Report) की तत्काल प्रस्तुति, सामुदायिक क्रियाओं में सहभागिता।
गणित शिक्षक की विशिष्ट भूमिका के तीन प्रमुख पक्ष सामने आते हैं - गणित विषय का शिक्षण, इकाई का शिक्षण और विशिष्ट गुण इकाई का अनुदेशन। जहाँ तक गणित के विशिष्ट विषय के रूप में शिक्षण का प्रश्न है, शिक्षक में अपेक्षित विशेषताएं इस प्रकार हैं -
(1.)वह यह महसूस करे कि गणित शिक्षण एक चुनौती है।
(2.)शिक्षक को गणित का विशद् ज्ञान होना चाहिए।
(3.)एक शास्त्र के रूप में गणित की अवधारणा, विकासक्रम, ज्ञान के अन्य क्षेत्रों में इसके महत्त्व, सांस्कृतिक विकास में इसकी भूमिका का स्पष्ट बोध गणित शिक्षक में अपेक्षित है।
(4.)सामान्य शिक्षा (General Education) के प्रमुख अंग के रूप में इसकी अनिवार्यता का बोध शिक्षक में होना चाहिए।
(5.)गणित के सामान्य सम्प्रत्ययों के विकास, सामान्यीकरणों को प्रयुक्ति से जोड़ने, मुख्य और गौण बिन्दुओं में विभेद, प्रमुख शिक्षण बिन्दुओं की पहचान तथा विद्यार्थी की कठिनाइयों के पूर्वाभास (Anticipation), इनके घटित होने के स्थलों की पूर्ण जानकारी तथा इन्हें दूर करने के लिए विद्यार्थियों को देने आदि में जिन कौशलों और तकनीकों की आवश्यकता है, उनमें गणित शिक्षक का पारंगत होना आवश्यक है।
किसी इकाई के शिक्षण के लिए शिक्षक में अपेक्षित ज्ञान, बोध, कौशल के पक्ष इस प्रकार हैं - विषयवस्तु (content) -सम्प्रत्यय (concepts), सूचना के मद (Items), इनके द्वारा विद्यार्थियों में विकसित कौशल, प्रभावी संगत अनुदेशन तकनीक और कौशल, विषयवस्तु का मनोवैज्ञानिक और तार्किक अनुक्रम (Psychological and logical sequence), व्यवहार परिवर्तनों के रूप में उद्देश्य, विभिन्न उप-इकाइयों की प्रस्तुति, शिक्षण सामग्रियों को एकत्रित करना और उनका कुशल उपयोग, व्यावहारिक शिक्षण आव्यूहों (Teaching strategies) का पूर्व निर्धारण, इकाई के कठिन स्थलों (Difficult Spot) का पूर्वाभास और उनके निराकरण के लिए युक्तियों का निर्धारण, विषय-वस्तु के अवशोषण (Assimilation), विकास और अनुरक्षण के लिए समुचित युक्तियों का निर्धारण, मूल्यांकन प्रक्रम।
उप इकाई के शिक्षण में सर्वप्रथम शिक्षक को इसके निर्धारित उद्देश्यों का स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए। उसको विभिन्न अनुदेशन संस्थितियों के सृजन में पारंगत होना चाहिए। प्रस्तुतीकरण के अन्तर्गत विद्यार्थियों द्वारा अनुभव की जाने वाली कठिनाईयों का पूर्वाभास और उन्हें दूर करने के लिए सहज युक्तियों की जानकारी शिक्षक में अपेक्षित है। अपने अनुदेशन को प्रभावी (Effective) और दक्ष (Efficient) बनाने के लिए शिक्षक को अनुदेशन नियोजित करने में अग्रलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए -
(1.)क्रियाएँ (Activities) और अभ्यास (Exercises) जो कि निर्धारित बोधों और कौशलों को प्रभावी और दक्ष ढंग से उत्पादित करने में समर्थ हों।
(2.)अनुदेशन-अधिगम प्रक्रिया में शिक्षार्थियों की कठिनाइयों के पूर्वाभास से इनको दूर करने के लिए प्रभावी सामग्रियों, युक्तियों प्रक्रमों (procedures) का चयन।
(3.)अनुदेशन सामग्रियों के उपयोग के लिए आवश्यक शर्तों की पूर्ति एवं उनके उपयोग में पारंगति तथा उन्हें कक्षा की आवश्यकता से सहज रूप में जोड़ना।
(4.)नवीन विषय के ज्ञान हेतु वांछनीय अभिप्रेरणा का विकास (Emergence of desired motivation), अधिगम प्रक्रिया के अविरल प्रवाह हेतु आवश्यक प्रेरक चयन (stimulant selection), अधिगम प्रक्रिया में अभिरुचि अनुरक्षण एवं विकास कार्य हेतु स्पष्टीकरण (Explanation), विमर्श (Discussion), उदाहरण एवं उद्धरण - Examples and illustration) की प्रस्तुति में प्रवीणता (proficiency).
(5.)मूल्यांकन स्थानान्तरण, निदान एवं उपचार में दक्षता (proficiency).
इसके अतिरिक्त माध्यमिक गणित की किसी उप-इकाई के अनुदेशन में शिक्षक के पास निम्नलिखित प्रश्नों के लिए सहज उत्तर होने चाहिए -
(1.)विषय-वस्तु के अधिगम के लिए शिक्षार्थी में किन अनुभवों (Experiences) और बोधों (Understandings) की पूर्व पृष्ठभूमि आवश्यक है।
(2.)विषयवस्तु के अधिगम के पश्चात शिक्षार्थी में क्या-क्या व्यवहार परिवर्तन अपेक्षित है?
(3.)वांछित व्यवहार परिवर्तनों के लिए क्या-क्या प्रक्रियाएं, प्रक्रम और तकनीकें आवश्यक हैं?
(3.)वांछित बोध और क्षमता के उपार्जन में शिक्षार्थी को किन विशिष्ट कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है?
(4.)इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए किन युक्तियों का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है?
(5.)प्रभावी अनुदेशन के लिए अभिरुचि, अभिप्रेरणा एवं अधिगम के विकास एवं अनुरक्षण के लिए किन सामग्रियों एवं प्रक्रमों की आवश्यकता है।
5.गणित शिक्षक की शिक्षा और प्रशिक्षण (Education and Training of Mathematics Teacher) -
गणित शिक्षकों की शिक्षा और प्रशिक्षण की प्रभाविता के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारक इस प्रकार हैं -
(1.)व्यवसायी आशार्थियों का चयन (selection of professional candidates), शिक्षक-शिक्षा प्रक्रिया (Teacher educational process), नौकरी में कार्य के लिए समुचित संस्थितियों की सम्भावनाएं (possibilities of appropriate working condition in the job), प्रभावी और दक्ष अनवरत शिक्षा और प्रशिक्षण के प्रावधान (Provisions of Effective and Efficient Continuous Education and Training) ।
(2.)शिक्षण को व्यवसाय के रूप में चुनना अन्तिम विकल्प माना जाता रहा है किन्तु अब ऐसी स्थिति नहीं रही। बेरोजगारी के बढ़ते रहने और रोजगार के अवसर कम होने की स्थिति में शिक्षण व्यवसाय का महत्त्व बढ़ा दिया है क्योंकि यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें जनसंख्या के बढ़ने के साथ-साथ शिक्षकों की मांग बढ़ती रहेगी। इसलिए इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की अपेक्षित सुगमता के कारण स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करते ही युवा वर्ग माध्यमिक शिक्षक प्रशिक्षण (बी. एड) प्राप्त करना चाहता है। देश में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (National Council of Teacher Education - NCTE) के गठन के साथ ही सारे देश में शिक्षक-शिक्षा को नई दिशा अवश्य मिली है। इसमें प्रवेश हेतु पूर्व परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है। विश्वविद्यालय अपने स्तर पर सम्बद्ध महाविद्यालयों और अपने विभागों के लिए इस परीक्षा के परिणामस्वरूप मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन करते हैं। राजस्थान में यह परीक्षा राज्य स्तर पर होती है। बारी-बारी से विभिन्न विश्वविद्यालय इस परीक्षा का आयोजन करते हैं। यह परीक्षा पी. टी. ई. टी. (Pre Teacher Education Test) कहलाती है। परीक्षा आयोजित करने वाला विश्वविद्यालय निर्धारित नियमों के अनुसार राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के लिए मेरिट के आधार पर प्रशिक्षणार्थियों का चयन करता है। वर्तमान में तो राजस्थान में अपनाई जा रही व्यवस्था ठीक चल रही है। इसमें कुछ कमियां हो सकती हैं, किन्तु अनुभव से इन कमियों को धीरे-धीरे दूर किया जा सकता है।
(3.)इस व्यवस्था में गणित एवं विज्ञान के भावी शिक्षकों के रूप में आजीविका के लिए ही व्यक्ति शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त करता है। ऐसे युवक युवतियां जिनकी शिक्षण और गणित में वास्तव में अभिरुचि और अभिवृत्ति हो बहुत ही कम होते हैं। शिक्षक अभिवृत्ति और योग्यता का वर्तमान परीक्षण तो मात्र औपचारिकता है। इसमें अच्छे अंक उपलब्ध गाइड़ों के अध्ययन और कोचिंग लेने से प्राप्त किए जा रहे हैं। गणित विषय में शिक्षक प्रशिक्षण के लिए उन्हीं अभ्यर्थियों का चयन किया जाना चाहिए, जिनमें इस व्यवसाय और गणित दोनों में नैसर्गिक रुचि हो। ऐसे पात्रों का चयन सहज नहीं है। इसके लिए विद्यालय स्तर से ही विद्यार्थियों के अभिलेख तैयार करने होंगे। हर कक्षा में परीक्षणों, क्लब, परियोजना आदि की गतिविधियों में व्यक्तिगत विद्यार्थी से सम्बंधित प्रेक्षण अभिलेख तैयार करने होंगे। यही कार्य उच्च माध्यमिक, महाविद्यालय तथा विश्वविद्यालय स्तर पर करना होगा। इन अभिलेखों के अध्ययन और विश्लेषण से ही गणित तथा विज्ञान विषयों के लिए भावी शिक्षकों का सही चयन किया जा सकता है।

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