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Thursday, 10 January 2019

Importance of mathematics in hindi

गणित का महत्त्व(Importance of Mathematics)

(1.)बुद्धि का विकास :- 

गणित के अलावा अन्य कोई ऐसा विषय नहीं है जो गणित की तरह विद्यार्थियों को क्रियाशील रख सके।गणित की किसी भी समस्या को हल करने के लिए विद्यार्थियों को मानसिक कार्य करना होता है ।गणित ही ऐसा विषय है जो विद्यार्थियों में रचनात्मक एवं सृजनात्मकता का विकास कर सकती है ।गणित के अध्ययन से विद्यार्थियों में तर्कशक्ति, स्मरणशक्ति, एकाग्रता, विचार एवं चिन्तन शक्ति आदि सभी मानसिक क्रियाओं का विकास होता है ।

(2.)संस्कृति का विकास :-

गणित के अध्ययन से छात्र-छात्राओं को समानता, नियमितता तथा क्रमबद्धता का ज्ञान होता है जो कि संस्कृति के प्रमुख अंग हैं।संस्कृति से हमारा तात्पर्य यह है कि अपने पूर्वजों द्वारा जो अच्छी व कल्याणकारी बातें हैं वे सम्मिलित होती हैं ।इसके अलावा समाज से गरीबी, अज्ञानता, बीमारी,अशिक्षा,अन्धविश्वास को हटाने में गणित का योगदान है ।

(3.)अनुशासन :-

 विद्यार्थियों को गणित अध्ययन कराने से नियमितता, शुद्धता, मौलिकता, क्रमबद्धता, ईमानदारी, एकाग्रता, कल्पना, आत्मविश्वास, स्मृति, शीघ्र समझने की शक्ति जैसी मानसिक शक्तियों का विकास होता है जिससे उनका मस्तिष्क अनुशासित होता है ।

(4.)सामाजिकता का विकास :- 

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तथा विद्यार्थियों को भी आगे जाकर समाज का अंग बनना है ।सामाजिक जीवन के गणित के ज्ञान की आवश्यकता है क्योंकि समाज में भी लेन-देन, व्यापार, हिसाब किताब रखने की आवश्यकता है जो कि गणित के ज्ञान पर निर्भर है ।समाज के विभिन्न अंगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने तथा समाज के विभिन्न अंगों को निकट लाने में विभिन्न आविष्कारों, आवश्यकताओं में सहायता देने में गणित का बहुत बड़ा योगदान है ।

(5.)वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास :- 

गणित का अध्ययन करने के लिए विद्यार्थियों में एक विशेष प्रतिभा की आवश्यकता होती है जिसके आधार पर विद्यार्थी अपना नियमित कार्य करते हैं इसे ही हम वैज्ञानिक ढंग कहते हैं ।गणित के अध्ययन में सबसे पहले देखते हैं कि समस्या क्या है? क्या ज्ञात करना है? तथा उसके उद्देश्य क्या है? इन पदों का समाधान करने के लिए समस्या पर विशेष चिन्तन की आवश्यकता है जिससे वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास विकास होता है ।

(6.)व्यावहारिकता का ज्ञान :- 

घर का बजट बनाने, मापने, घड़ी में समय देखने, कार्यालय में जाते समय, थर्मामीटर लगाते समय, परीक्षा में पर्चे बाँटते समय गणना करने की आवश्यकता पड़ती है ।इसके अतिरिक्त दैनिक जीवन में मूलभूत क्रियाओं जैसे गिनना, जोड़ना, भाग देना, घटाना, तौलना, मापना, खरीदना, गुणा करना आदि की हमारे जीवन में बहुत आवश्यकता होती है जिनकी गणना गणित के ज्ञान के आधार पर ही सम्भव है ।मनुष्य को आनन्द व सुख देने वाली वस्तुएं जैसे रेड़ियों, टेलीविजन, मोबाईल फोन, बिजली के पंखें, कुलर आदि सभी का आविष्कार गणित के ज्ञान के बिना संभव न था ।इस प्रकार विज्ञान को व्यावहारिक बनाने में गणित का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है ।

(7.)जीविकोपार्जन का साधन :- 

आधुनिक युग में जीविकोपार्जन करना भी शिक्षा का एक उद्देश्य है ।अन्य विषयों की अपेक्षा आज हर प्रतियोगिता परीक्षा में जैसे बैंकिंग, क्लर्क, एकाउन्टेन्ट, कांस्टेबल तथा अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं में गणित का test लिया जाता है ।गणित के बिना इन प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल होना मुश्किल है ।वर्तमान समय में इंजीनियरिंग, बैंकिंग, तकनीकी व्यवसायों का ज्ञान एवं प्रशिक्षण गणित के द्वारा ही सम्भव है ।गणित में पढ़ा लिखा विद्यार्थी को जीविकोपार्जन में कोई समस्या नहीं आती है ।गणित का विद्यार्थी आसानी से वर्तमान युग में आसानी से जीविकोपार्जन कर सकता है ।


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